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डॉक्टर्स वाइव्स एसोसिएशन ने 700 जरूरतमंदों को किया सहयोग
Published / 2022-11-04 22:49:17
डॉक्टर्स वाइव्स एसोसिएशन ने 700 जरूरतमंदों को किया सहयोग

टीम एबीएन, रांची। डॉक्टर्स वाइव्स एसोसिएशन ने अपनी चैरिटी कार्यक्रम की प्रतिबद्धता को निभाते हुए एक और कदम सेवा में समर्पण किया। बिरसा शिक्षा निकेतन विद्यालय, एचईसी जहां 700 गरीब तबके के बच्चों के बीच सभी को बिस्किट और मोजे के साथ-साथ विद्यालय प्रशासन को 35 चेयर्स दिया गया। इस कार्यक्रम में चेयर पर्सन विनीता शरण, अध्यक्ष बिंदु प्रसाद, सचिव डॉ सोनी सिन्हा, सुषमा मिश्रा, देवजानी संयाल, सुनीता सिंहा, पूनम झा, कमलेश मिद्धा, मधु गुप्ता, सीमा महेश्वरी, रश्मि कुमार, डॉ आभा कुमारी, नीलम शेखर श्रीला चौधरी, सिंधु भदानी उपस्थित थी।

अनोखी शादी... ढाई फिट का दूल्हा और मात्र तीन फीट की दुल्हन
Published / 2022-11-03 22:48:14
अनोखी शादी... ढाई फिट का दूल्हा और मात्र तीन फीट की दुल्हन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूपी के शामली का लिटिल स्टार अजीम मंसूरी की शादी की मुराद आखिरकार पूरी हो ही गई। बुधवार को ढाई फीट के अजीम मंसूरी दुल्हा बन अपनी बारात लेकर हापुड़ पहुंचे, जहां 3 फीट की बुशरा के साथ उनका निकाह पढ़ा गया। सिर पर सेहरा बांध और शेरवानी पहनकर अजीम मंसूरी बड़े ही धूमधाम से अपनी बारात लेकर निकले। हाइट की वजह से शामली जनपद के कस्बा कैराना निवासी अजीम मंसूरी की शादी नहीं हो रही थी। जिसकी वजह से वे काफी चिंतित थे और शादी करवाने के लिए थाने में भी गुहार लगा चुके थे। अजीम मंसूरी की शादी में 20 से 25 बाराती शामिल हुए। बारात कैराना से चलकर हापुड़ पहुंची जहां करीब 1 बजे उनका निकाह पढ़ा गया। गौरतलब है कि अजीम मंसूरी कैराना का चर्चित लिटिल स्टार कहा जाता है। अजीम मंसूरी का कद ढाई फीट है। अजीम मंसूरी का यह छोटा कद उसकी शादी में रोड़ा बना हुआ था। अपनी शादी को लेकर अजीम मंसूरी काफी चिंतित थे और कुछ समय पहले मीडिया में अजीम मंसूरी ने शादी को लेकर गुहार लगाई थी। मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद अजीम मंसूरी के घर हापुड़ जनपद से बुशरा नामक युवती का रिश्ता आया। अजीम मंसूरी की शादी में 20 से 25 बाराती शामिल हुए। बारात कैराना से चलकर हापुड़ पहुंची जहां करीब 1 बजे उनका निकाह पढ़ा गया। गौरतलब है कि अजीम मंसूरी कैराना का चर्चित लिटिल स्टार कहा जाता है। अजीम मंसूरी का कद ढाई फीट है। अजीम मंसूरी का यह छोटा कद उसकी शादी में रोड़ा बना हुआ था। अपनी शादी को लेकर अजीम मंसूरी काफी चिंतित थे और कुछ समय पहले मीडिया में अजीम मंसूरी ने शादी को लेकर गुहार लगायी थी। मीडिया में सुर्खियां बनने के बाद अजीम मंसूरी के घर हापुड़ जनपद से बुशरा नामक युवती का रिश्ता आया। दरअसल, बुशरा यूपी के हापुड़ जनपद की निवासी है, जिसका कद 3 फीट है। बुशरा व अजीम मंसूरी के परिजनों में रिश्ते की बात चली और 7 नवंबर को अजीम मंसूरी की शादी तय कर दी गई। तय तारीख से पहले ही अजीम मंसूरी अपनी बारात लेकर बुधवार को हापुड़ के लिए रवाना हो गये। अजीम मंसूरी के परिजनों से जब इस मामले में बात की तो उनका कहना था कि अजीम मंसूरी की शादी 7 नवंबर को होनी थी, लेकिन आज यानी 2 नवंबर को अजीम मंसूरी की बारात हापुड़ जनपद पहुंची। इसका कारण यह है कि अजीम मंसूरी की शादी में भारी भीड़ होने की आशंका परिजनों को थी। शादी के बाद शेरवानी-पगड़ी लगाए हुए अजीम मंसूरी की खुशी का कोई ठिकाना नहीं था। अजीम मंसूरी व उनके परिजन और रिश्तेदारों में भी खुशी देखने को मिली। बैंड-बाजे के साथ अजीम मंसूरी को कैराना से दूल्हा बना कर हापुड़ ले जाया गया। फूलों से सजी कार में बैठे दूल्हा अजीम मंसूरी कैराना वासियों का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया। अजीम मंसूरी का सपना है कि वह शादी के बाद अपनी बेगम को लेकर मक्का में हज करने के लिए जायेंगे। बता दें कि अजीम मंसूरी 2019 में उस वक्त सुर्खियों में आये जब उन्होंने अपनी शादी के लिए थाने में गुहार लगयी। इतना ही नहीं अजीम मंसूरी ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से भी अपने लिए पत्नी खोजने की गुहार लगा चुके हैं। 2021 में भी अजीम मंसूरी शामली के महिला थाना और कैराना थाने में शादी के लिए कई चक्कर लगाये। इस बीच उनकी हाइट और शादी करने की इच्छा ने उन्हें सोशल मीडिया स्टार बना दिया।

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ संपन्न
Published / 2022-10-31 12:07:53
उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ लोक आस्था का महापर्व छठ संपन्न

एबीएन सोशल डेस्क। 28 अक्टूबर को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ आज उदित मान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। इस दौरान बिहार, झारखंड और पूर्वांचल के हर शहर, गांवों में इस पूजा की धूम रही। छठ घाटों में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंची और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर लोंगों ने धने-धान्य, पुत्र, यश, ऊर्जा भगवान भास्कर से मांगी अब छठ घाट से घर जाकर छठ व्रतियां पारण कर 36 घंटे से जारी निर्जला उपवास तोड़ेंगी। बिहार, झारखंड और पूर्वांचल सहित देश और दुनिया के जिस कोने में भी यहां के लोग रहते हैं वहां छठ पर्व के दौरान गजब का उत्साह देखने को मिला। छठ घाटों पर इस दौरान आस्था का जन सैलाब उमड़ पड़ा। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा को लेकर छठ व्रतियों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापवित्र पर्व छठ संपन्न हो गया। छठ पर्व को लेकर पूरा शहर भक्ति में नजर आया। हर ओर छठी मइया के गीत गुंजायमान है। जिले के विभिन्न घाटों पर पहुंचकर भगवान भास्कर को अर्पित कर करने के लिए घाटों पर छठ व्रतियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए शहर के दरधा जमुना संगम तट पर जनसैलाब उमड़ पड़ा।।संगम तट के दोनों ओर घाटों पर छठ व्रतियों के साथ-साथ श्रद्धालुओं ने परंपरा के अनुसार अर्घ्य देकर भगवान भास्कर को नमन किया। बेगूसराय में चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व छठ उगते सूर्य की पूजा अर्चना के साथ समाप्त हो गया। बेगूसराय जिले में शहर से लेकर गांव तक गंगा घाट से लेकर घरों में बनाये कृत्रिम तालाब तक छठ पर्व को लेकर धूमधाम से पूजा अर्चना की गयी। चार दिवसीय छठ महापर्व के अंतिम दिन आज उगते भगवान भास्कर की पूजा अर्चना। बेगूसराय में 473 गंगा घाट, नदी घाट और पोखरों को जिला प्रशासन के द्वारा छठ पूजा के लिए तैयार किया गया था। इसके अलावा शहर से लेकर गांव तक लोग अपने अपने घरों और छत पर भी कृत्रिम तालाब बनाकर भगवान भास्कर की पूजा अर्चना की। 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद आज उगते सूरज की पूजा अर्चना के बाद छठ व्रतियों ने फलाहार कर अपना निर्जला व्रत का उपवास खत्म किया। सहरसा में भी लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आखिरी दिन छठ घाटों पर लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। नदी हो या तलाब सभी जगहों पर छठ व्रती सुबह से ही घाट पर पहुंचकर उदीयमान सूर्य का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही सूर्य भगवान ने दर्शन दिया उसके बाद अर्घ्य देने की सिलसिला शुरू हुआ। छपरा में छठ महा अनुष्ठान के चौथे दिन उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रतियों ने पूजा का समापन किया। मौके पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में उत्सव का माहौल बना रहा। बेगूसराय में लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आज चौथे दिन जिला के विभिन्न घाटों पर पहुंचे श्रद्धालु लोगों ने नौलखा मंदिर स्थित पोखार घाट पर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा के आज चौथे दिन जिले के विभिन्न घाटों पर पहुंचे श्रद्धालु लोग तो आसपास के तालाब व कृत्रिम घाट पर भी काफी संख्या में पहुंचे। लोगों ने उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। उदयीमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही गुमला में लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा का चार दिवसीय अनुष्ठान हर्षोल्लास के साथ संपन्न हो गया। उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ लोगों ने जन कल्याण की कामना करते हुए इस महापर्व का समापन किया। सुबह के अर्घ्य को देने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ छठ पूजा दिखी। लोगों ने भगवान भास्कर के उदय होते ही अर्घ्य दिया और अक्षय ऊर्जा श्रोत भगवान सूर्य की स्तुति की। उदय होने के साथ ही अर्घ्य देने का सिलसिला चल निकला, जिसके बाद लोगों ने काफी देर भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के अलावा हवन भी किये। सभी श्रद्धालुओं ने अर्घ्य देने के साथ ही सुख-समृद्धि की कामना करते हुए अगले साल फिर से छठ का अनुष्ठान करने की बात कही। बेतिया में छठ व्रतियों ने उगते सूर्य को दिया अर्घ्य, उगते सूर्य के अर्घ्य देने के बाद महापर्व छठ का हुआ समापन। खगड़िया में भी लोक आस्था का महापर्व छठ में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया गया। नदी हो या तलाब सभी जगहों पर छठ व्रती सुबह से ही घाट पर पहुंचकर उदीयमान सूर्य का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही सूर्य भगवान ने दर्शन दिया उसके बाद अर्घ्य देने की सिलसिला शुरू हुआ।

रोज पीयें हल्दी पानी, शीघ्र पिघल जायेगी चर्बी
Published / 2022-10-30 21:53:36
रोज पीयें हल्दी पानी, शीघ्र पिघल जायेगी चर्बी

एबीएन नॉलेज डेस्क। हमारे घरों में इस्तेमाल होने वाले मसाले बड़े काम के हैं। हल्दी की बात तो अलग ही है। इसे मसाला कहने से ज्यादा दवा कहना ज्यादा बेहतर होगा। हल्दी में कई औषधीय गुण छुपे हुए हैं। हल्दी में एंटी बायोटिक एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी बैक्टीरियल गुण मौजूद होते हैं। जो कई बीमारियों को दूर करने का काम करते हैं। हल्दी सेहत के लिए बड़ी फायदेमंद है, इसका इस्तेमाल वजन घटाने के लिए किया जाता है। हल्दी को पानी में मिलाकर पीने से वजन कम होता है। आइये जानते हैं कि हल्दी का पानी कैसे बनाया जाता है। कैसे घटाता है वजन : हल्दी में मौजूद पोषक तत्व वजन कम करने में कारगर हैं। हल्दी में पॉलीफेनॉल, करक्यूमिन कम्पाउंड मौजूद होते हैं, जो फैट को घटाने का काम करते हैं। वजन कम करने के लिए हल्दी का पानी बनाकर पीना चाहिए। कैसे बनायें हल्दी का पानी : हल्दी का पानी बनाने के लिए पीसी हुई हल्दी की जगह नेचुरल हल्दी की गठान लें। इस गठान को 2 कप पानी में डालकर इसे तब तक उबालना है, जब तक कि पानी आधा हो जाये। हल्दी के इस पानी में पोषक तत्व उतर आयेंगे। पानी को छानकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाएं और गुनगुना हल्दी वाला पानी पी लें। रोज खाली पेट हल्दी का पानी पीने से वजन कम होने लगेगा। हल्दी के पानी के फायदे : हल्दी के पानी पीने से वजन कम करने के अलावा भी कई फायदे मिलते हैं। खाली पेट हल्दी का पानी पीने से जोड़ों का दर्द दूर हो जाता है। हल्दी में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण इम्यूनिटी बढ़ाने का काम करते हैं। इस पानी को पीने से बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिलती है। सर्दी-खांसी जैसी परेशानियां दूर हो जाती हैं। हर्ट अटैक का खतरा कम : हल्दी का पानी पीने से हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। हल्दी वाला पानी पीने से कोलेस्ट्रॉल कम होता है। इस पानी से खून पतला बना रहता है जिससे खून का थक्का जमने का खतरा नहीं रहता है और दिल हेल्दी रहता है।

सूर्य देव के गुणों को धारण करने का महापर्व है छठ पूजा
Published / 2022-10-30 21:48:35
सूर्य देव के गुणों को धारण करने का महापर्व है छठ पूजा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सूर्योपासना के महानपर्व छठ पूजा की शुभकामनाएं देते हुए विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि आज भगवान सूर्यदेव के गुणों को धारण करने की महती आवश्यकता है। शीत ऋतु के आगमन पर जहां हम भगवान सूर्य की उपासना कर उनकी कृपा के पात्र बने रहने हेतु छठ मैया से प्रार्थना करते हैं। वहीं, दूसरी ओर उनके अनथक, समदर्शी, ऊर्जावान, प्रकाशवान व कीट नाशक स्वभाव को धारण कर विश्व कल्याण की ओर प्रेरित भी होते है। सम्पूर्ण हिंदू समाज को संकल्प लेना होगा कि हममें से कोई निस्तेज, निर्बल, लाचार, रोगी, निर्धन, उपेक्षित या अस्पृश्य न रहे। मूर्धन्य वैदिक विदुषी दर्शनाचार्या विमलेश आर्या की उपस्थिति में उन्होंने यह भी कहा कि संपूर्ण सृष्टि को आलोकित करने वाले सूर्यदेव से हमें आज प्रेरणा लेनी होगी कि विश्व के किसी भी कोने में आतंक रूपी कीटाणु, कोढ़ न रहने पाये और सभी सज्जन शक्तियां मिलकर हर्षोल्लास से आनंद पूर्वक रह सकें। पूर्वांचल वेलफेयर एसोशिएशन द्वारा दक्षिणी दिल्ली के आस्थाकुंज में आयोजित छठ पूजा महोत्सव में हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों व बच्चों ने सहभागिता की। इस अवसर पर एसोसिएशन के सुबोध झा, अजय झा, राकेश पाठक, पंडित सतीश कुमार, रतन झा और संजय झा सहित अनेक पदाधिकारी व विविध संगठनों तथा आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी उपस्थित थे। उक्त जानकारी विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ( 9810949109) ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

सुबह खाली पेट लें तुलसी की पत्ती, कई गंभीर रोग हो जायेंगे छू मंतर
Published / 2022-10-30 10:59:00
सुबह खाली पेट लें तुलसी की पत्ती, कई गंभीर रोग हो जायेंगे छू मंतर

एबीएन सोशल डेस्क। उत्तर भारत के लगभग हर घर में तुलसी का पौधा लगा होता है और सुबह-शाम उसकी पूजा की जाती है। तुलसी के पौधे की हिंदू धर्म में विशेष मान्यता है और इसलिए इसे पवित्र पौधे की उपाधि भी दी गई है। ऐसी मान्यता है कि जिस घर में तुलसी का पौधा होता है। उस जगह सुख-समृद्धि का वास होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तुलसी की पत्तियों में ऐसी खूबियां छिपी होती हैं। तुलसी की पत्तियों के सेवन से ही कुई रोग खत्म हो जाते है। जी हां, तुलसी की पत्तियों को सुबह खाली पेट चबाने से न सिर्फ आप कई बड़ी बीमारियों को दूर कर सकते हैं। बल्कि अपने शरीर को फिट भी रख सकते हैं। खाली पेट चबाएं पत्तियां और रोग भगायें दूर। सिरदर्द में कारगर : अगर आपको मौसम बदलने के कारण ठंड लग गई है या फिर सिरदर्द हो रहा है या फिर एलर्जी और साइनस जैसी परेशानी हो गयी है। तो आपके लिए तुलसी की पत्तियां बहुत काम आ सकती हैं। ये पत्तियां इम्यूनिटी बूस्ट करने में मदद करती हैं। बस आप इन्हें यूज करने से पहले पानी में उबाल लें। पानी को उबालने के बाद उसे छान लें और गुनगुना होने पर पी जायें। ऐसा करने से आपकी परेशानी कम हो जायेगी। ब्लड शुगर में कारगर : तुलसी की पत्तियों में कई सारे यौगिक पाये जाते हैं। जिसमें कैरी फिलिन, मिथाइल युजेनॉल और यूजीनोल नाम के रसायन शामिल हैं। ये सभी रसायन हमारे पैंक्रियाज की कोशिकाओं को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं। पैंक्रियाज वहीं अंग है, जो शरीर में इंसुलिन बनाने का काम करता है। जब इंसुलिन सही तरीके से बनता रहेगा तो आपको अपना ब्लड शुगर लेवल दुरुस्त रखने में मदद मिलेगी। गले की खराश होगी कम : मौसम में बदलाव होने से कई तरह की परेशानियां होने लगती है, जिसमें से एक गले में खराश है। इस समस्या को दूर करने के लिए भी आप तुलसी की पत्तियां चबा सकते हैं। आपको करना क्या है कि पत्तियों को पानी में अच्छी तरह से उबाल लेना है। उबालने के बाद पानी को छान लें और गुनगुना होने पर पीयें। ये नुस्खा गले में खराश और दर्द को दूर करने में मदद करता है। तनाव होगा कम : तुलसी की पत्तियां ढेर सारे गुणों से संपन्न होती है, जिसमें मानसिक तनाव को कम करने वाले गुण भी शामिल हैं। दरअसल, इसकी पत्तियों में कोर्टिसोल नाम का गुण होता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है। आप सुबह खाली पेट तुलसी की 4 पत्तियों को चबा सकते हैं, जो आपके तनाव को धीरे-धीरे कम करने में मदद करेंगी। मुंह की बदबू खत्म करने में कारगर : मुंह की बदबू में अक्सर कुछ भी ज्यादा एसिडिटी खाने से उसकी बदबू मुंह में रह जाती है। जिसे दूर करने का काम तुलसी की पत्तियां भी कर सकती है। आप खाली पेट तुलसी की पत्तियां चबा सकते हैं, जो मुंह से आती बदबू को दूर करने में मदद करती है। पत्तियों को तोड़ने के बाद उन्हें साफ पानी से धोना न भूलें। पत्तियों को धोने के बाद अच्छी तरह से चबायें, ताकि आपको उसका पूरा फायदा मिले।

30 अक्टूबर को मनेगा भारत भाग्य विधाता ऋषि दयानंद का ऋषि बलिदास दिवस
Published / 2022-10-29 22:56:45
30 अक्टूबर को मनेगा भारत भाग्य विधाता ऋषि दयानंद का ऋषि बलिदास दिवस

एबीएन सोशल डेस्क। दिनांक 30 अक्टूबर ऋषि दयानन्द (1825-1883) का आंग्ल तिथि के अनुसार बलिदान दिवस व पुण्य तिथि है। हिन्दी तिथि के अनुसार यह 24 अक्टूबर को था। ऋषि दयानन्द जी का बलिदान हुए पूरे 139 वर्ष व्यतीत हो चुके हैं। इस अवधि में उनके अनुयायियों एवं आर्यसमाज ने जो कार्य किये हैं उसमें अनेक सफलतायें हैं और कुछ क्षेत्रों में हम कमजोर भी रहे हैं जिनका निवारण वा समाधान हम नहीं कर पा रहे हैं। ऋषि दयानन्द को हम इसलिये भी स्मरण करते हैं कि उन्होंने हमें असत्य का परिचय कराकर सत्य ज्ञान, सत्य सिद्धान्त, मान्यताओं व जीवन को श्रेष्ठ एवं सफल बनाने वाले कर्तव्यों सहित अनुष्ठानों से परिचित कराया था। एक बार उनके समय के भारत की स्थिति पर विचार कर लेना उचित होगा। प्रथम बात यह है कि ऋषि दयानन्द के कार्य क्षेत्र में अवतीर्ण होने से पूर्व देश घोर अविद्या व अन्धविश्वासों से ग्रस्त था। ईश्वर व जीवात्मा के सत्यस्वरूप से देश व विश्व के लोग अपरिचित थे। जब ईश्वर का सत्य स्वरूप ही लोगों को पता नहीं था तो सत्य उपासना भी वह नहीं जान सकते थे। देश भर में अविद्या पर आधारित मिथ्या परम्परायें प्रचलित थीं जिनसे हमारा देश व समाज दिन प्रतिदिन निर्बल व रूग्ण हो रहा था। महर्षि दयानन्द के समय में देश अंग्रेजों का गुलाम था। इससे पूर्व यह यवनों व मुसलमानों का गुलाम रहा। सबने इसका शोषण किया और अमानवीय अत्याचार करने के साथ धर्मान्तरण किया। इस गुलामी का कारण भी अविद्या ही मुख्य था। इस गुलामी के कारण वैदिक धर्म व संस्कृति मिट रही थी और ईसाईयत का प्रचार व प्रसार हो रहा था। इन विपरीत परिस्थितियों में देश, धर्म और संस्कृति की रक्षा करने का दायित्व ऋषि दयानन्द ने अपने ऊपर लिया और प्रथम उपाय के रूप में वेद, धर्म और संस्कृति का प्रचार आरम्भ किया। वह असत्य व मिथ्या मत एवं उनकी मान्यताओं का खण्डन एवं विद्या की बातों, सत्य सिद्धान्तों एवं वैदिक मान्यताओं का मण्डन करते थे। हरिद्वार के कुम्भ के मेले में भी उन्होंने पाखण्डों का खण्डन किया था और हरिद्वार में पांखण्ड खण्डिनी पताका भी फहराई थी। पौराणिक नगरी काशी में जाकर उन्होंने वहां भी पाखण्ड एवं मूर्तिपूजा आदि मिथ्या अवैदिक मान्यताओं का खण्डन किया था। इससे मिथ्या मतों के आचार्यों में खलबली मच गई थी परन्तु सभी मिथ्या मतों के आचार्यों में इतनी योग्यता नहीं थी कि वह सत्य को स्वीकार करें अथवा ऋषि दयानन्द की मान्यताओं को असत्य व वेद विरुद्ध सिद्ध करें। इसका परिणाम सन् 16 नवम्बर, 1869 को मूर्तिपूजा पर शास्त्रार्थ के रूप में सम्मुख आया। पौराणिक आचार्यों के रूप में काशी के शीर्ष लगभग 30 आचार्यों ने अकेले स्वामी दयानन्द जी से शास्त्रार्थ किया। यह सभी आचार्य मूर्तिपूजा, अवतारवाद आदि के समर्थन में वेद का कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सके। काशी शास्त्रार्थ के बाद भी स्वामी दयानन्द जी का प्रचार जारी रहा। वह देश के अनेक राज्यों व नगरों में जाकर वेदों का प्रचार करने लगे। सर्वत्र लोग उनके शिष्य बनने लगे। शिष्यों में अधिक संख्या पठित, शिक्षित व ज्ञानी लोगों की हुआ करती थी। सन् 1875 के अप्रैल महीने की 10 तारीख को लोगों के आग्रह पर स्वामी दयानन्द जी ने मुम्बई नगरी के गिरिगांव मुहल्ले में आर्यसमाज की स्थापना की। आर्यसमाज की स्थापना का उद्देश्य वेद और वेदानुकूल सिद्धान्तों एवं मान्यताओं सहित वैदिक जीवन शैली का प्रचार तथा पाखण्ड एवं अन्धविश्वासों सहित मिथ्या व अवैदिक सामाजिक परम्पराओं का उन्मूलन करना था। स्वामी दयानन्द जी मनुष्यों के भोजन पर भी ध्यान देते थे। वह शुद्ध अन्न से बने शुद्ध भोजन को करने के ही समर्थक थे। मांसाहार, मदिरापान, अण्डे व मछली आदि का सेवन तथा धूम्रपान आदि को वह धर्म की दृष्टि से अनुचित तथा आत्मा को दूषित करने वाला मानते थे। देश को जातिवाद से मुक्त करने का भी स्वामी जी ने प्रयत्न किया। उन्होंने वैदिक काल में प्रचलित वैदिक वर्ण व्यवस्था, जो गुण कर्म व स्वभाव पर आधारित थी, उसके सत्यस्वरूप को देश व समाज के सामने रखा। देश के पतन का मुख्य कारण अज्ञान व अन्धविश्वास अर्थात् अविद्या ही थी। स्वामी जी ने अज्ञानता व अशिक्षा दूर करने के लिए गुरुकुल शिक्षा प्रणाली का समर्थन किया और उस पर विस्तार से चिन्तन प्रस्तुत किया। इसी का परिणाम कालान्तर में गुरुकुल एवं दयानन्द ऐंग्लो वैदिक स्कूलों व कालेजों की स्थापना के रूप में सामने आया। भारत के शिक्षा जगत में यह एक प्रकार की क्रांति थी। हमारे पौराणिक भाई नारी शिक्षा का विरोध करते थे। ऋषि दयानन्द ने नारी शिक्षा की वकालत की और बताया कि विवाह गुण, कर्म व स्वभाव की समानता से होता है। अतः नारी का भी पुरुष के समान शिक्षित व विदुषी होना आवश्यक है। नारी यदि शिक्षित होगी तभी उसकी सन्तानें भी शिक्षित व संस्कारित हो सकेंगी। समाज ने ऋषि दयानन्द के इन विचारों को अपनाया जिसका परिणाम हम आज देख रहे हैं कि शिक्षा जगत में नारियों की उपलब्धियां पुरुष वर्ग के समान ही देखने को मिलती हैं। स्वामी दयानन्द जी ने समाज सुधार का जो कार्य किया वह एकांगी न होकर सर्वांगीण था। स्वामी दयानन्द नारी को संस्कारित कर वेद विदुषी बनाना चाहते थे। बहुत सी नारियां वेद विदुषी बनीं और आज भी गुरुकुलों से दीक्षित आचार्यायें गुरुकुलों का संचालन कर रही हैं। इसके विपरीत पाश्चात्य सभ्यता व संस्कृति के प्रभाव में विवेक के अभाव में बहुत सी नारियों ने भारतीयता की उपेक्षा कर पाश्चात्य नारी के स्वरूप को ग्रहण कर लिया जहां मनुष्य की भौतिक उन्नति तो कुछ-कुछ होती दिखाई देती हैं परन्तु आध्यात्मिक उन्नति प्रायः शून्य ही रहती है जिसका परिणाम जन्म जन्मान्तरों में दुःख के सिवा कुछ नहीं होता है। यह भी बता दें कि स्वामी दयानन्द जी और उनके अनुयायियों वा आर्यसमाज ने जन्मना जातिवाद को समाप्त करने सहित दलितोद्धार का भी महान कार्य किया है। अज्ञान व अन्धविश्वास सहित पाखण्डों का खण्डन करते हुए स्वामी दयानन्द जी ने मूर्तिपूजा, अवतारवाद, जन्मना जातिवाद, फलित ज्योतिष, मृतक श्राद्ध, अज्ञान व अविद्या के सभी कार्यों का खण्डन किया। स्वामी जी ने विद्या का प्रचार व प्रसार करने के लिये सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादि भाष्यभूमिका, ऋग्वेद-यजुर्वेद का संस्कृत-हिन्दी भाष्य, संस्कार विधि, आर्याभिविनय आदि अनेक ग्रन्थों का प्रणयन किया जिससे देश में अविद्या का प्रसार कम होकर विद्या का प्रसार न केवल भारत में अपितु विदेशों में भी हुआ। स्वामी दयानन्द जी ने अविद्या को दूर करने व सर्वत्र वैदिक मान्यताओं के अनुसार समाज व परिवार बनाने के लिए आर्यसमाज की स्थापनायें की। आर्यसमाजों में सर्वत्र साप्ताहिक सत्संग होने लगे जहां प्रातः यज्ञ-अग्निहोत्र, ईश्वर भक्ति के गीत व भजन तथा विद्वानों के ईश्वर व जीवात्मा के स्वरूप का प्रचार, समाजोत्थान व देशोत्थान की प्रेरणा, मिथ्या मान्यताओं का खण्डन एवं सत्य सिद्धान्तों का मण्डन व प्रचार होता था। ऋषि दयानन्द ने पूरे विश्व को सर्वोत्तम व श्रेष्ठतम उपासना पद्धति भी दी है या यह कह सकते हैं कि वैदिक काल में योग की रीति से जो उपासना की जाती थी, उसका उन्होंने पुनरुद्धार किया। सन्ध्या में किन मन्त्रों से व किस विधि से उपासना की जाये, इस पर न केवल चारों वेदों के चुने हुए मन्त्रों से संकलित उपासना की विधि बताई अपितु अपने सभी ग्रन्थों में ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना तथा उपासना पर व्यापक रूप से प्रकाश भी डाला। आध्यात्मिक व सामाजिक जगत के उन्नयन व उत्कर्ष का ऐसा कोई कार्य व उपाय नहीं था जिसका उल्लेख स्वामी दयानन्द जी ने न किया हो व जिसको प्रचलित करने के लिए उन्होंने व उनके अनुयायियों ने कार्य न किया हो। स्वामी दयानन्द जी ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने स्वराज्य प्राप्ति का उद्घोष अपने अमर ग्रन्थ सत्यार्थ प्रकाश में किया था। ऐसा अनुमान है कि सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ के आठवें समुल्लास में अंग्रेजों का विरोध ही उनकी मृत्यु के षडयन्त्र का एक कारण बना था। इसकी विस्तार से चर्चा न कर हम पाठकों से अनुरोध करेंगे कि वह सत्यार्थप्रकाश का आठवां समुल्लास व ग्यारहवें समुल्लास सहित आर्याभिविनय, संस्कृत वाक्य प्रबोध एवं व्यवहारभानु आदि सभी ग्रन्थों को पढ़े। हिन्दी को देश की व्यवहार व राजकाज की भाषा बनाने और गोवध बन्द करने के लिये भी ऋषि दयानन्द ने अंग्रेजों की गुलामी के दिनों में अग्रणीय भूमिका निभाई थी। जिन दिनों ऋषि दयानन्द यह कार्य कर रहे थे तब गांधी जी बच्चे थे और अन्य बड़े राजनीतिक नेताओं का जन्म भी नहीं हुआ था। देश की आजादी के क्रांतिकारी व अहिंसक आन्दोलनों में भाग लेने वालों में आर्यसमाज के अनुयायियों की संख्या सबसे अधिक थी। अंग्रेज भी इस तथ्य से परिचित थे और इसी कारण उन्होंने पटियाला के आर्यसमाज व अन्यत्र भी आर्यसमाज के सदस्यों के उत्पीड़न के कार्य किये। देशभक्त स्वामी श्रद्धानन्द, लाला लाजपत राय, भाई परमानन्द, राम प्रसाद बिस्मिल आदि ऋषि दयानन्द के समर्पित अनुयायी थे। देश से स्त्री व पुरुषों की अशिक्षा को दूर कर शिक्षा का प्रचार व प्रसार करने में आर्यसमाज की अग्रणी एवं प्रमुख भूमिका रही है। स्वधर्म एवं स्वसंस्कृति का बोध एवं प्रचार करने में भी आर्य समाज का प्रमुख एवं सर्वाधिक योगदान है। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां स्वामी दयानन्द ने अपना बौद्धिक योगदान न किया हो। स्वामी दयानन्द जी वस्तुतः विश्व गुरु थे। इसके साथ ही वह भारत के निर्माता और भाग्य विधाता भी सिद्ध होते हैं। ऋषि दयानन्द जी के बलिदान दिवस व पुण्य तिथि पर हम उनकी महान आत्मा को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं। आज देश के सामने अनेक चुनौतियां हैं। हम आर्य समाज के सभी विद्वानों से निवेदन करते हैं कि वह संगठन को मजबूत बनाने में अपना योगदान करें, जिससे देश व संसार में सत्यज्ञान वेद का प्रचार होकर अविद्या दूर हो सके और मानव समाज की सभी समस्याएं हल होकर संसार में सुख-शान्ति स्थापित हो सके।

नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ अनुष्ठान प्रारंभ
Published / 2022-10-28 14:50:11
नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ अनुष्ठान प्रारंभ

टीम एबीएन, हजारीबाग। हजारीबाग सुन लीं अरजिया हमार, हे छठी मैया... शहर में शुक्रवार से सूर्योपासना का महापर्व छठ का चार दिवसीय अनुष्ठान नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया। शहर घाटों पर छठ गीत बजने लगी। श्रद्धालुओं ने घरों पर स्नान कर लौकी की सब्जी और अरवा चावल ग्रहण कर छठ व्रत का संकल्प लिया। व्रतियों का 36 घंटे का निराहार-निर्जला व्रत शनिवार को खरना के बाद शुरू होगा। रविवार को सायंकालीन व सोमवार को उदीयमान सूर्य को प्रात:कालीन अर्घ्य देने के बाद व्रती पारण करके चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन करेगी। धार्मिक मान्यता है कि छठ महापर्व में नहाय-खाय से पारण तक व्रतियों पर षष्ठी माता की कृपा बरसती है। झारखंड-बिहार में छठ महापर्व पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। अपने शहर हजारीबाग में भी काफी तादाद में श्रद्धालु छठ महापर्व कर रहे हैं। श्रद्धालुओं के घरों में छठी मैया और हर-हर गंगे के जयकारे शुक्रवार की सुबह से ही गूंजने लगे, जिससे उनके घरों का नजारा बदला-बदला दिख रहा था। छठ व्रती व उनके परिजन छठ के पारंपरिक गीत दर्शन देहू न आपार हे छटी मैया...उगऽ हे सूरजदेव अरघ के बेरिया... गाते हुए सुबह से ही पूजा में लगे हुए थे। कई श्रद्धालु घाटों पर प्रसाद के लिए पानी लेकर गये। फिर कई छठ व्रतियों ने हर हर गंगे और हे छठी मैया के जयकारे लगाते हुए गंगा में आस्था की डुबकी लगायी। जिसके पश्चात छठ व्रतियों ने अपने अपने घरों में लौकी की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल बनाकर भगवान भास्कर को भोग लगाकर प्रसाद ग्रहण किये। दूसरी ओर भारी संख्या में व्रतियों ने अपने-अपने घरों में अरवा चावल, चने की दाल व कद्दू की सब्जी बनाकर भोजन किया। व्रतियों व उनके परिजनों ने नहाय-खाय के साथ ही खरना व सायंकालीन, प्रात:कालीन अर्घ्य की भी तैयारी की। घरों की छतों पर खरने के प्रसाद के लिए गेहूं साफ करके सुखाये गये। गेहूं के पूरी तरह से सूखने तक व्रती व अन्य सदस्य वहीं बैठे रहे।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का दर्शन समय बढ़ा
Published / 2022-10-27 22:34:04
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का दर्शन समय बढ़ा

एबीएन सोशल डेस्क। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर दर्शन समय में वृद्धि करने का निवेदन शासन व प्रशासन ने स्वीकार कर लिया है। परिवर्तन नीचे लिखे अनुसार हुआ है- भविष्य में प्रात:काल 6:30 बजे जागरण आरती में उपस्थित रहने के लिए अधिकतम 30 भक्तों को प्रवेश पत्र दिये जायेंगे। यह प्रवेश पत्र मोहल्ला रामकोट स्थित राम कचहरी मंदिर में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कैंप कार्यालय से जारी होंगे। पुलिस द्वारा सुरक्षा जांच व अन्य सभी व्यवस्थाएं सदैव के अनुसार ही रहेंगी। अन्य सभी भक्त सदैव के समान प्रात: काल 7 से दर्शन के लिए प्रवेश कर सकेंगे। यह प्रवेश अब 11:30 बजे दोपहर तक रहेगा। भोग आरती में 30 भक्त अधिकतम प्रवेश पत्र लेकर उपस्थित रह सकेंगे। भोग आरती दोपहर 12 बजे होगी। भगवान की विश्राम अवधि दिन में 12:30 बजे से दोपहर पश्चात 2 बजे तक रहेगी। दो बजे से दर्शन के लिए सर्व सामान्य भक्त सदैव के समान प्रवेश कर सकेंगे। यह प्रवेश अब सायंकाल 7 बजे तक होगा। भोग आरती में सायंकाल को अधिकतम 60 व्यक्ति प्रवेश पत्र के साथ उपस्थित रह सकेंगे। भोग आरती रात्रि 7:30 बजे होगी। यह व्यवस्था आगामी 29 अक्टूबर 2022 ज्ञान पंचमी से प्रारंभ होगी। उक्त जानकारी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र, अयोध्या के महामंत्री चंपत राय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

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