Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 41
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

ज्ञान विज्ञान

View All
नासा का अलर्ट : 24 को धरती के नजदीक आ रहा अंतरिक्ष का राक्षस
Published / 2025-05-17 13:50:20
नासा का अलर्ट : 24 को धरती के नजदीक आ रहा अंतरिक्ष का राक्षस

24 मई को 14 KM/सेकेंड की रफ्तार से आ रहा है अंतरिक्ष का राक्षस, NASA ने कहा – रहिए अलर्टएबीएन नॉलेज डेस्क। आकाश में कुछ ऐसा है जो सिर्फ देखने का नहीं, बल्कि चिंता का विषय बन चुका है। एस्टेरॉयड 2003 MH4, एक विशाल अंतरिक्षीय चट्टान, 14 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से धरती की ओर बढ़ रही है। इसका आकार करीब 335 मीटर है – यानी तीन फुटबॉल मैदान जितना विशाल।NASA ने इस पिंड को संभावित रूप से खतरनाक घोषित करते हुए चेतावनी दी है कि यह 24 मई 2025 को पृथ्वी के बेहद पास से गुजरेगा। हालांकि टकराव की संभावना नहीं है, लेकिन इसकी गति और दिशा को देखते हुए वैज्ञानिक लगातार नजर बनाए हुए हैं।कितना पास और कितना खतरनाकNASA की Jet Propulsion Laboratory के मुताबिक, यह एस्टेरॉयड धरती से लगभग 6.68 मिलियन किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में इसे करीब  ही माना जाता है - खासकर जब ऑब्जेक्ट 150 मीटर से बड़ा हो और 7.5 मिलियन किलोमीटर से कम दूरी से गुजरे। 2003 MH4 दोनों मानकों को पूरा करता है, इसलिए इसे Potentially Hazardous Asteroid (PHA) की श्रेणी में रखा गया है।

आखिर धरती पर कब और कहां से आया सोना
Published / 2025-05-15 23:17:08
आखिर धरती पर कब और कहां से आया सोना

कैसे खजाना पहुंचा भारतएबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरिक्ष में कई रहस्य छिपे हैं, जिन्हें जानने के लिए वैज्ञानिक सालों से शोध कर रहे हैं। इन रहस्यों में सोने जैसे धातु का रहस्य भी छिपा हुआ है। अब आपके मन में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर सोना कहां से आया? वैज्ञानिकों इन रहस्य को सुलझा लिया है। सोने की गिनती दुनिया की महंगी धातुओं में होती है। भारत में शादी और शुभ अवसरों पर सोने से बने आभूषण पहनना एक परंपरा की तरह है। बहुत लोगों को जानकारी होगी कि धरती पर सोना नहीं था। वैज्ञानिकों का कहना है कि सोना पृथ्वी के निर्माण के साथ नहीं आया, बल्कि यह बाद में अंतरिक्ष से धरती पर पहुंचा था।वैज्ञानिकों के मुताबिक, ब्रह्मांड में कहीं भी सोना सुपरनोवा न्यूक्लियोसिंथेसिस नामक प्रक्रिया से बनता है। विशाल सितारे फटते हैं, तो यह प्रकिया होती है, जिससे भारी धातुएं, जैसे सोना बनती हैं और अंतरिक्ष में फैल जाती हैं। बताया जाता है कि धरती पर जितना सोना है, मर चुके तारों से आया है। वहां से धरती के भूगर्भ में चला गया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, करीब चार अरब साल पहले पृथ्वी पर उल्कापिंडों की भारी बारिश हुई थी। उल्काओं की बारिश से सोने जैसे भारी तत्व धरती पर पहुंचे। पृथ्वी की अंदर की परतों में भारी धातुएं जैसे तांबा, प्लेटिनम और सोना मौजूद थे। ज्वालामुखी विस्फोटों की वजह से यह धीरे-धीरे धरती की सतह तक आए। इसके बाद जब ज्वालामुखियों से पिघली धातुएं बाहर आईं, तो सोने के बेहद बारीक कण पानी में घुलने लगे। इससे बहकर नदियों और समुद्रों तक पहुंच गए। इन कणों को बाहर निकालना बेहद कठिन कार्य था। पृथ्वी की बाहरी परत का घनत्व हल्का है। इसकी वजह से भारी धातुएं जैसे सोना, धीरे-धीरे पृथ्वी के अंदरूनी हिस्से में चली गईं। यही वजह है कि सतह पर इसकी मात्रा बहुत कम है। भारत में अधिक सोना खुद नहीं निकला है। हालांकि, व्यापार के माध्यम से देश में बड़ी मात्रा में सोना आया।प्राचीन समय में भारत से कपड़े, मसाले और कला विदेशों में जाती थी, जिसके बदले में सोना आता था। सदियों से सोना जमा होते-होते इतना सोना इकट्ठा हो गया। अर्थशास्त्रियों के एक आंकड़े के मुताबिक, भारत के पास वर्तमान में करीब 10000 टन से अधिक सोना है। एक नये अध्ययन में हुआ ये खुलासाकोलंबिया विश्वविद्यालय के डॉक्टरेट छात्र अनिरुद्ध पटेल के नेतृत्व में सोना कहां से आया, इस विषय पर एक अध्ययन किया गया है। इससे पता चला है कि मैग्नेटर्स (अत्यधिक चुंबकीय न्यूट्रॉन वाले तारे) ब्रह्मांड में सोने जैसे भारी तत्वों को बनाने और फैलाने में मदद कर सकते हैं। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में यह अध्ययन प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि मैग्नेटर फ्लेयर्स की इसमें ज्यादा बड़ी भूमिका रही होगी। अध्ययन करने वाले पटेल की टीम ने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) और नासा के करीब 20 साल पुराने डेटा का इस्तेमाल किया है।

कहीं आप भी तो नहीं पी रहे यहूदियों के लिए बना कोकाकोला!
Published / 2025-04-16 20:23:24
कहीं आप भी तो नहीं पी रहे यहूदियों के लिए बना कोकाकोला!

कोकाकोला की येलो ढक्कन वाली बॉटल को लेकर सामने आयी चौंका देने वाली बातएबीएन नॉलेज डेस्क। अगर आप भी कोका-कोला पीने के शौकीन हैं तो यह खबर आपके लिए खास है। दरअसल, कोका कोला के यैलो ढक्कन वाली बोतल को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। जी हां, कोका कोला कंपनी यहूदी धर्म से जुड़े लोगों के लिए अलग से ड्रिंक बनाती है। इस खास बोतल के ढक्कन का रंग लाल की बजाए पीला होता है। जानकारी के अनुसार यहूदी धर्म में कड़े नियम होते हैं, ऐसे में नियमों का सम्मान करते हुए कोका-कोला पासओवर के लिए अपनी ड्रिंक का कॉर्न फ्री वर्जन बनाती है। इसकी पहचान आसानी से हो सके तो  चमकीले पीले रंग के ढक्कन से इन बोतलों को सील किया जाता है। लाल ढक्कन वाली कोका-कोला की बोतल में हाई-फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है जबकि पीले ढक्कन वाली बोतल में  गन्ने की शुगर मिलाई जाती है। ऐसे में  यहूदी धर्म से जुड़े ग्राहक अपने धार्मिक नियमों का पालन करते हुए छुट्टी के दौरान कोका-कोला का आनंद ले सकते हैं।

पिंक मून देख लोग हुए गदगद
Published / 2025-04-13 21:17:34
पिंक मून देख लोग हुए गदगद

शाम से ही आसमान में दिखेगा अद्भुत नजारा एबीएन नॉलेज डेस्क। 13 अप्रैल की रात यानी आज आसमान में एक अनोखा खगोलीय नजारा दिखाई दिया, जिसे पिंक मून कहा जाता है। हालांकि नाम भले ही पिंक यानी गुलाबी हो, लेकिन चांद गुलाबी नहीं दिखा। असल में ये चंद्रमा की पूर्णिमा की स्थिति है जब चांद पृथ्वी से अपने सबसे दूर बिंदु पर होता है, जिसे वैज्ञानिक रूप से माइक्रोमून कहा जाता है। अप्रैल की पूर्णिमा को पिंक मून इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बसंत ऋतु में खिलने वाले गुलाबी फूलों जैसे फ्लॉक्स से जुड़ा है। मूल अमेरिकी जनजातियों ने इसे यह नाम दिया था। इस चंद्रमा का रंग गुलाबी नहीं बल्कि सामान्य रूप से सुनहरा या चांदी जैसा ही दिखाई देता है। यह चांद सूर्यास्त के तुरंत बाद दिखाई दिया और रात भर चमकता रहा। अपने चरम पर पहुंचने से पहले और बाद में यह लगभग 48 घंटे तक पूर्णिमा जैसा दिखा। वहीं सबसे अच्छा नजारा कम प्रकाश प्रदूषण वाले क्षेत्र,  गांव, पहाड़ी इलाके या समुद्र तट पर देखने को मिला। इस संबंध में खगोलविदों ने पहले ही बताया था कि शहरों में रहने वाले लोग किसी ऊंची इमारत या घर की छत से पूर्वी दिशा में देखें, इसके लिए आप मोबाइल ऐप या डिजिटल कंपास की मदद से सही दिशा को पहचान सकते हैं। इस खास रात को चंद्रमा के पास स्पाइका तारा भी चमकता दिखाई देगा। कुछ देशों में लोग चंद्र अधिव्यापन भी देख पायेंगे, जहां चंद्रमा थोड़ी देर के लिए किसी तारे को ढंक लेता है।

यूपीआई ट्रांजेक्शन सेवा फिर से बहाल
Published / 2025-04-12 21:14:30
यूपीआई ट्रांजेक्शन सेवा फिर से बहाल

गुड न्यूज... फिर से शुरू हुई पेटीएम, फोन पे और गूगल पे की सर्विस, यूजर्स को मिली राहत एबीएन सेंट्रल डेस्क। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई शहरों में शनिवार दोपहर को यूपीआई सर्विस कुछ समय के लिए ठप हो गयी। इस दौरान लाखों लोग गूगल पे, फोन पे और पेटीएम जैसे ऐप्स के जरिए भुगतान नहीं कर पा रहे थे। कुछ समय बाद ये सर्विस सामान्य तौर पर शुरू हो गयी हैं। सर्विस दोबारा शुरू होने से यूजर्स को फिर से राहत मिली है। शनिवार दोपहर को यूपीआई पेमेंट सिस्टम में अचानक आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण गूगल पे, फोन पे और पेटीएम जैसे लोकप्रिय ऐप्स पर लेनदेन कुछ समय के लिए रुक गया। कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर इसकी शिकायत की और बताया कि वे भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। इस गड़बड़ी की जानकारी सबसे पहले डाउन डिटेक्टर वेबसाइट ने दी, जो इंटरनेट सेवाओं में आई परेशानी को ट्रैक करती है। वेबसाइट के अनुसार, यूपीआई सर्विस में रुकावट की शुरुआत शनिवार दोपहर करीब 12 बजे हुई थी। यूपीआई भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली डिजिटल पेमेंट सेवा है। इसका उपयोग रोजाना करोड़ों लोग छोटे-बड़े लेनदेन के लिए करते हैं। यह सेवा बैंकिंग ऐप्स, फोन पे, गूगल पे और पेटीएम सहित कई प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है। राहत की बात यह है कि कुछ समय बाद यह तकनीकी गड़बड़ी ठीक कर ली गयी और अब सभी ऐप्स पर यूपीआई ट्रांजैक्शन फिर से सुचारू रूप से हो रहे हैं।

सुनीता ने रिकॉर्ड 9 बार किया स्पेस स्टेशन के बाहर स्पेसवॉक
Published / 2025-03-19 19:23:58
सुनीता ने रिकॉर्ड 9 बार किया स्पेस स्टेशन के बाहर स्पेसवॉक

सुनीता विलियम्स ने बनाया नया रिकॉर्डएबीएन नॉलेज डेस्क। नासा की अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर ने 286 दिनों यानी लगभग 9 महीने के अंतरिक्ष अभियाण के बाद धरती पर वापसी की, जबकि मूल रूप से यह मिशन केवल 8 दिनों के लिए निर्धारित था। इस बीच सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की धरती पर वापसी को लेकर अमेरिका प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने कहा, जो वादा किया उसे निभाया।बता दें कि फ्लोरिडा के तट पर भारतीय समयानुसार सुबह 3:30 बजे स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल ने समुद्र में सफलतापूर्वक लैंडिंग की, जिसने इस ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के समापन का सूत्रपात किया।इस असामान्य विस्तार के बावजूद, मिशन ने नासा और स्पेसएक्स के बीच सहयोग की एक नई मिसाल कायम की। अंतरिक्ष में बिताए गए महीनों के दौरान कई महत्वपूर्ण प्रयोग और अवलोकन किए गए, जो भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। कैमरों ने वह निर्णायक पल कैद किया जब ड्रैगन कैप्सूल ने समंदर में उतरते हुए धरती की ओर कदम बढ़ाया, जिससे अंतरिक्ष यात्रा की इस लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा का सफल समापन हुआ। नासा के बताया कि सुनीता विलियम्स और उनकी टीम ने 9 महीने में  900 घंटे का शोध पूरा किया। उन्होंने 150 से अधिक प्रयोग किए और उन्होंने अंतरिक्ष में सबसे अधिक समय बिताने वाली महिला का एक नया रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने स्पेस स्टेशन के बाहर 62 घंटे और 9 मिनट बिताए, यानी 9 बार स्पेसवॉक किया। इसके अलावा इस दौरान उन्होंने उन्होंने स्पेस स्टेशन की देखभाल की और साफ सफाई का भी ध्यान रखा।

सकुशल लौटी सुनीता विलियम्स, नशा को बधाई
Published / 2025-03-19 15:03:09
सकुशल लौटी सुनीता विलियम्स, नशा को बधाई

सुनीता विलियम्स समेत चार यात्री सुरक्षित लौटे, नासा ने कहा- क्रू-9 की सफल वापसीएबीएन सेन्ट्रल डेस्क। भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों के बाद धरती पर वापस लौट आई हैं। अंतरिक्ष एजेंसी- नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक सुनीता और बैरी विल्मोर को लेकर लौट रहा यान तड़के 3.27 बजे अमेरिका के फ्लोरिडा में समुद्र तल पर उतारा। खास बात ये है कि इस मिशन में नासा के साथ एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स का भी उल्लेखनीय सहयोग रहा। सुनीता विलियम्स की सकुशल वापसी के लिए भारत में परिजनों ने यज्ञ-हवन और प्रार्थना की। गुजरात में अखंड ज्योति जलाई गई। फ्लोरिडा में स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल से लौटे चारों अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी की नासा ने पुष्टि की। इसे वैज्ञानिक भाषा में सफल स्प्लैशडाउन बताया गया।

चांद पर फिर तिरंगा लहराने की तैयारी में भारत
Published / 2025-03-18 13:51:31
चांद पर फिर तिरंगा लहराने की तैयारी में भारत

भारत भेजेगा Chandrayaan-5 मिशनएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत की अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के जितने भी चंद्रयान मिशन अब तक चांद की सतह पर पहुंचे हैं, सभी ने चांद के बारे में कुछ नई खोज करने के साथ-साथ एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है। फिर वह चाहें चांद पर पानी की मौजूदगी का पता लगाना हो या दुनिया में पहली बार चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरना। भारतीय चंद्रयान मिशन की वजह से ही चांद की सतह पर भारत का तिरंगा और ऊंचा उठा है। अब भारत ने चंद्रयान-5 मिशन भेजने की तैयारी शुरू कर दी है।इसरो के चेयरमैन वी. नारायण का कहना है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में चंद्रयान-5 मिशन को अनुमति दे दी है। ये भारत के चांद की सतह पर मानव को उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम है।क्या है चंद्रयान-5 मिशनISRO के चेयरमैन वी. नारायणन का कहना है कि भारत ने 2040 तक मानव को चांद की सतह पर उतारने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में भारत की कैपेसिटी बिल्डिंग करने के लिए चंद्रयान-5 मिशन भेजा जाएगा। इतना ही नहीं भारत ने 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन डेवलप करने का भी टारगेट सेट किया है।चंद्रयान-5 मिशन के लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसमें 350 किलोग्राम का एक रोवर होगा। वहीं भारत और जापान मिलकर इस पर काम करेंगे। चंद्रयान-5 से पहले भारत ने चंद्रयान-4 मिशन भेजना है। ये चांद की सतह से सैंपल कलेक्ट करने के लिए भेजा जाना है। सरकार ने पिछले साल ही चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे दी थी। ये मिशन चंद्रमा पर सेफ लैंडिंग और फिर उसके सेफ रिटर्न की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए पूरा किया जाना है। साथ ही इसमें सैंपल कलेक्ट करने की टेक्नोलॉजी को भी विकसित करने का लक्ष्य है।जबकि इससे पहले भारत ने 3 चंद्रयान मिशन और पूरे किए हैं। भारत का चंद्रयान-3 मिशन दुनिया का पहला ऐसा लूनार मिशन था, जिसमें रोवर ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग की थी। इतना ही नहीं, इस मिशन के साथ ही भारत ने चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने की कैपेसिटी भी तैयार की है।

क्रू-10 मिशन के बाद सुनीता और विल्मोर के लाउटंर की उम्मीदें बढ़ी
Published / 2025-03-16 12:05:17
क्रू-10 मिशन के बाद सुनीता और विल्मोर के लाउटंर की उम्मीदें बढ़ी

अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचा क्रू-10 मिशनजानें सुनीता विलियम्स और विल्मोर कब होंगे धरती के लिए रवानाएबीएन नॉलेज डेस्क। नासा और स्पेसएक्स का क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गया है। फैल्कन 9 रॉकेट में गए इस मिशन के चारों सदस्य अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गए हैं। डॉकिंग और हैच खुलने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने क्रू-9 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात की। वहीं नासा के मुताबिक बुधवार को नौ महीने से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती के लिए रवाना होंगे। नासा और स्पेसएक्स का क्रू-10 मिशन शनिवार को फैल्कन 9 रॉकेट के जरिये अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुआ था। इस मिशन में एन मैक्लेन, निकोल आयर्स, जापानी अंतरिक्ष  यात्री तकुया ओनिशी और रूसी अंतरिक्ष यात्री किरिल पेस्कोव गये हैं। बताया जाता है कि क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय स्टेशन पर पहुंच गया है। सफल डॉकिंग और हैच खुलने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन में प्रवेश किया।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding