शुभांशु शुक्ला समेत 4 अंतरिक्ष यात्री आइएसएस से रवाना, 22 घंटे बाद पृथ्वी पर होगी वापसी एबीएन नॉलेज डेस्क। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और एक्सिओम-4 के अन्य अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर वापसी के लिए अंतरिक्ष यान में सवार होकर अंतरिक्ष स्टेशन से रवाना हो चुके हैं। अनडॉकिंग के लगभग 22.5 घंटे बाद कैलिफोर्निया के तट पर यान के पहुंचने की उम्मीद है और अंतरिक्ष कैप्सूल को एक विशेष जहाज द्वारा वापस लाया जाएगा। यान के मंगलवार को भारतीय समयानुसार दोपहर 3:01 बजे कैलिफोर्निया के तट पर पहुंचने की उम्मीद है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अंतरिक्ष स्टेशन से रवानगी का लाइव प्रसारण किया। अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और उनकी टीम के अंतरिक्ष स्टेशन से रवानगी की खबर मिलते ही केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह ने ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ह्लशुभांशु, आपका स्वागत है। पूरा देश आपके घर वापस आने का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। क्योंकि आप अ७्रङ्मे4 को सफलतापूर्वक अनडॉक करने के बाद अपनी वापसी यात्रा शुरू कर रहे हैं।शुभांशु शुक्ला और एक्सिओम-4 के तीन अन्य अंतरिक्ष यात्री अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर 18 दिनों के प्रवास के बाद पृथ्वी पर वापस लौट रहे हैं। मिशन पायलट शुक्ला के साथ कमांडर पैगी व्हिटसन, मिशन विशेषज्ञ पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीवस्की और हंगरी के टिबोर कापू हैं। ड्रैगन ग्रेस अंतरिक्ष यान का है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से जोड़ता था, भारतीय समयानुसार दोपहर 2:37 बजे बंद कर दिया गया। फिर चालक दल के सदस्य भारतीय समयानुसार दोपहर 4:35 बजे रवाना हो गए। एक्सिओम-4 मिशन ने अपनी अंतरिक्ष यात्रा 25 जून को शुरू की थी, जब ड्रैगन अंतरिक्ष कैप्सूल को ले जाने वाला फाल्कन-9 रॉकेट फ्लोरिडा से आईएसएस की ओर रवाना हुआ था।
Moonquake: NASA ने खोला रहस्यएबीएन नॉलेज डेस्क। जब भी हम भूकंप की बात करते हैं तो हमारा ध्यान धरती पर आता है लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चांद पर भी भूकंप आता है? जी हां, चांद की सतह पर भी कंपन महसूस किए गए हैं जिन्हें मूनक्वेक (Moonquake) कहा जाता है। यह एक बेहद दिलचस्प और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय है जिसे NASA ने अपोलो मिशनों के दौरान खोजा और सिद्ध किया।पहली बार कब पता चला चांद पर भूकंप आता है?अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने साल 1969 से 1977 के बीच चलाए गए Apollo मिशन के दौरान चांद पर विशेष यंत्र यानी सीस्मोमीटर (Seismometer) लगाया था। इस उपकरण ने चांद की सतह पर कंपन दर्ज किए जिससे पता चला कि वहां भी भूकंप आते हैं। यह पूरी तरह वैज्ञानिकों के लिए एक नया और हैरान करने वाला विषय था।चांद पर भूकंप क्यों आता है?चांद पर भूकंप आने के कई कारण हो सकते हैं। NASA के अनुसार, मुख्य रूप से चार कारण बताए गए हैं:पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण खींचतान (Deep Moonquakes) : चांद और पृथ्वी के बीच गुरुत्व बल काम करता है। जब पृथ्वी की खिंचतान ज्यादा होती है तब चांद के भीतर गहराई में हलचल होती है जिससे गहरे मूनक्वेक्स आते हैं।सतह पर दरारें और खिंचाव (Shallow Moonquakes) : चांद की सतह में दरारें या टूट-फूट भी भूकंप का कारण बनती हैं। यह हलचल सतही स्तर पर होती है पर इसका प्रभाव काफी तेज़ होता है।तापमान में भारी बदलाव (Thermal Moonquakes) : चांद पर दिन और रात के बीच तापमान का अंतर सैकड़ों डिग्री का होता है। इस बदलाव से सतह में तनाव बनता है जो भूकंप का कारण बनता है।उल्का पिंडों की टक्कर (Meteorite Impacts) : जब कोई उल्कापिंड चांद से टकराता है तो इससे भी वहां भूकंप जैसे झटके महसूस होते हैं।चांद पर भूकंप कितनी देर तक रहता है?धरती की तुलना में चांद पर आने वाले भूकंप थोड़े अलग होते हैं। यहां पर:कंपन अक्सर कम तीव्रता के होते हैंलेकिन उनकी एनर्जी ज्यादा देर तक बनी रहती हैकुछ मूनक्वेक 10 मिनट तक चल सकते हैंकई बार सतह पर दरारें पड़ जाती हैं और कुछ टुकड़े अपनी जगह से खिसक जाते हैं
अंतरिक्ष में किसान बने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला; उगा रहे हैं मेथी और मूंग के बीज एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर अपने 14 दिवसीय प्रवास के 12 दिन पूरे कर चुके हैं। इन 10 दिनों में उन्होंने कई प्रयोग किये। प्रयोगों के क्रम में उन्होंने किसान की भी भूमिका निभायी। उन्होंने अपने साथ ले गये मेथी और मूंग के बीजों का अंकुरण किया। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) में स्प्राउट्स प्रोजेक्ट को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण अंकुरण और पौधों के शुरुआती विकास और उन पर पड़ने वाले असर का अध्ययन करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है। बता दें कि पृथ्वी पर स्प्राउट्स प्रोजेक्ट का नेतृत्व कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय, धारवाड़ के रविकुमार होसामणि और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के सुधीर सिद्धपुरेड्डी कर रहे हैं। एक्सिओम स्पेस की ओर से इस शोध को लेकर जारी बयान में कहा गया है कि पृथ्वी पर वापस आने के बाद इन बीजों को कई पीढ़ियों तक उगाया जायेगा। जिससे कि उनके आनुवंशिकी, सूक्ष्मजीवी पारिस्थितिकी तंत्र और पोषण प्रोफाइल में होने वाले परिवर्तनों की जांच की जा सके। भारतीय वैज्ञानिकों के लिए खुलेंगे नये रास्ते अपने प्रयोगों को लेकर शुभांशु ने एक्सिओम स्पेस की मुख्य वैज्ञानिक डॉ लूसी लोव से बात की। इस बातचीत में भारतीय अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने उनके द्वारा किए जा रहे वैज्ञानिक प्रयोगों की जानकारी दी और बोले की वे बेहद व्यस्त हैं। शुभांशु शुक्ला ने कहा कि जब से हम यहां आये हैं, तब से ही काफी व्यस्त हैं। हम अंतरिक्ष स्टेशन पर बहुत सारे प्रयोग कर रहे हैं, जिन्हें लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं। इस मिशन से माइक्रोग्रैविटी के लिए रास्ते खुलेंगे और इससे भारतीय वैज्ञानिकों के लिए नई राह खुलेगी। मुझे बेहद गर्व है कि इसरो दुनियाभर के संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। कई और वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे शुभांशु शुभांशु ने बताया कि वह कई वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं, जिनमें स्टेम सेल का अध्ययन, माइक्रोग्रैविटी में बीजों का विकास, अंतरिक्ष में मस्तिष्क पर पड़ने वाला असर आदि प्रयोग शामिल हैं। शुभांशु ने कहा कि वे स्टेम सेल के अध्ययन वाले प्रयोग को लेकर बेहद उत्साहित हैं। इससे पता चलेगा कि क्या सप्लीमेंट्स लेने से चोट की रिकवरी तेज होती है या नहीं। भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि वैज्ञानिकों और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन के बीच पुल बनना मेरे लिए गर्व की बात है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के क्रू का हिस्सा हैं। जिसने 25 जून को नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट से उड़ान भरी थी।एक्सिओम-4 मिशन 14 दिन का है। अपने अंतरिक्ष प्रवास को खत्म कर 10 जुलाई के बाद मौसम की स्थिति के आधार पर किसी भी दिन पृथ्वी पर वापसी कर सकते हैं। वे फ्लोरिडा तट पर उतरेंगे। हालांकि नासा ने अभी तक एक्सिओम-4 मिशन को अंतरिक्ष स्टेशन से अलग करने की तारीख की घोषणा नहीं की है।
आसमान से बिजली गिरने के बाद पैदा होती है ये सब्जी, कीमत और फायदे जानकर चौंक जायेंगे आप टीम एबीएन, रांची। अमूमन मानसून के आगमन के साथ ही सब्जियों के दाम आसमान छूने लगते है। इस दौरान लोगों के सब्जियां खरीदने में पसीना छूट जाते हैं। ऐसी ही कुछ झारखंड की राजधानी रांची से सामने आया है, जहां एक खास तरह की सब्जी का दाम 100, 200 या फिर 300 रुपये किलो नहीं बल्कि 1000 से 1200 किलो तक है। इसके बावजूद लोग इस खरीदने के लिए साल भर इंतजार करते हैं। खास बात यह है कि इस सब्जी की पैदावार खेत में नहीं होती है। राजधानी रांची समेत झारखंड के विभिन्न जिलों के बाजारों में इन दिनों एक खास तरह की सब्जी का आगमन हुआ है। इस सब्जी का नाम रुगड़ा है, जिसे शाकाहारी मटन भी कहा जाता है। इस सब्जी के आगमन के साथ यह बाजार का राजा बन गया है, न सिर्फ अपने आसमान छूते दाम के कारण बल्कि अपने लाजवाब स्वाद के कारण भी इसकी काफी मांग है। यह सब्जी न सिर्फ विटामिन और प्रोटीन से भरपूर है, बल्कि इसे ब्लड प्रेशर और हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी रामबाण माना जाता है। इम्यूनिटी बूस्टर सब्जी डॉक्टर का भी मानना है कि रुगड़ा का सेवन इंसान के इम्यूनिटी सिस्टम को बेहतर बनाता है। इस सब्जी में विटामिन बी, विटामिन सी, कैल्शियम, फास्फोरस, पोटेशियम और तांबा भी पाया जाता है। इसमें कैलोरी बहुत कम मात्रा में होती है। दरअसल, रुगड़ा मशरूम प्रजाति की ही सब्जी मानी जाती है, लेकिन यह जमीन के ऊपर मशरूम की तरह नहीं उगती है। बल्कि इसकी पैदावार जमीन के अंदर ही होती है, जो बारिश के केवल 2 महीने यानी जून और जुलाई में सखुआ के पेड़ के इर्द-गिर्द तेज बारिश और वज्रपात के कारण धरती को चीरता हुई निकलती है। जानें क्या है कीमत ग्रामीणों की माने तो जितनी अधिक बारिश और वज्रपात होगा उतनी अधिक मात्रा में सखुआ के जंगल और सखुवा के पेड़ के आसपास की धरती को फाड़ कर रुगड़ा निकलेगा। अंडरग्राउंड मशरूम के नाम से भी कई लोग इस सब्जी को जानते हैं। ऐसे तो रुगड़ा की 12 प्रजातियां होती है, जिसमें सफेद रुगड़ा ही सर्वाधिक पौष्टिक माना जाता है। यह सब्जी झारखंड की समृद्ध खानपान की संस्कृति को जीवंत रखने के साथ ही साथ झारखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है। इस सब्जी की कीमत 50 या फिर 100 रुपये किलो नहीं बल्कि 1000 से 1200 रुपये किलो है।
भारत के करोड़ों यूज़र्स हो जाएं सावधान, सरकार ने जारी कर दी नई चेतावनीएबीएन नॉलेज डेस्क। भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है जिसमें बताया गया है कि दुनिया भर में करीब 16 अरब से ज़्यादा पासवर्ड लीक हो चुके हैं। इसे अब तक की सबसे बड़ी डेटा लीक घटनाओं में से एक माना जा रहा है और इसका असर भारत के करोड़ों इंटरनेट यूज़र्स पर पड़ सकता है खासकर उन पर जो Apple, Google, Facebook, Telegram, GitHub और VPN सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।CERT-In की रिपोर्ट के मुताबिक लीक हुए ये पासवर्ड करीब 30 से ज़्यादा डेटा डंप्स से जुटाए गए हैं जिनके मुख्य स्रोत हैं:इंफो-स्टीलर मालवेयर: यह यूज़र्स के कंप्यूटर या ब्राउज़र को संक्रमित करता है।गलत ढंग से कॉन्फ़िगर किए गए डेटाबेस: जैसे ओपन Elasticsearch सर्वर।इस लीक में केवल पासवर्ड ही नहीं बल्कि निम्न जानकारियाँ भी शामिल हैं:यूज़रनेम और पासवर्डसेशन कुकीज़ऑथेंटिकेशन टोकनअकाउंट से जुड़ी मेटाडेटा जानकारी16 अरब से अधिक पासवर्ड लीक हो चुके हैं और यह घटना हर इंटरनेट यूज़र के लिए एक चेतावनी है। भले ही आपने अब तक कोई संदिग्ध गतिविधि न देखी हो लेकिन अपनी डिजिटल सुरक्षा को मज़बूत करना अब बेहद ज़रूरी है। अपने पासवर्ड बदलिए MFA चालू कीजिए और अपने ऑनलाइन अकाउंट्स को सुरक्षित कीजिए।
शुभांशु शुक्ला तीन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहुंचे आइएसएस एबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और अन्य यात्रियों को लेकर स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पहुंच गया है। अंतरिक्ष यान करीब 28.5 घंटे की यात्रा के बाद 26 जून गुरुवार को भारतीय समय के अनुसार शाम करीब 4:01 बजे आईएसएस से जुड़ा। डॉकिंग अनुक्रम भारतीय समयानुसार शाम 4:15 बजे पूरा हुआ। अंतरिक्ष यान के सॉफ्ट कैप्चर के बाद हार्ड-मेटिंग तब पूरी हुई, जब दोनों आर्बिट बॉडी 12 हुक के सेट के साथ एक दूसरे से जुड़ गयी और उनके बीच संचार और पावर लिंक स्थापित किये गये। यह पहली बार है जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा पर गया है। अंतरिक्ष यात्रियों के अंतरिक्ष स्टेशन पर चढ़ने से पहले हैच खोलने की प्रक्रिया में लगभग दो घंटे लगते हैं। अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन मिशन कमांडर हैं और शुक्ला एक्सिओम-4 मिशन के लिए मिशन पायलट हैं।स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट ने बुधवार दोपहर 12:01 बजे एक्सिओम-4 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर फ्लोरिडा के कैनेडी अंतरिक्ष केंद्र से आईएसएस के लिए सफल उड़ान भरी थी। स्पेसएक्स ड्रैगन कैप्सूल की सफल डॉकिंग पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बधाई दी है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, बधाई हो... एक्सिओम-4 डॉकिंग सफल रही। शुभांशु अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के द्वार पर खड़े हैं। भीतर कदम रखने के लिए तैयार, 14 दिनों की अंतरिक्ष यात्रा शुरू होने वाली है... और पूरा विश्व उत्साह और अपेक्षा के साथ देख रहा है।
एक्सिओम-4 ने अंतरिक्ष के लिए भरी उड़ान एबीएन नॉलेज डेस्क। आखिरकार लंबे इंतजार के बाद भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला और 3 अन्य यात्रियों को लेकर एक्सिओम-4 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) की यात्रा के लिए रवाना हो गया।मिशन की लॉन्चिंग तय समय के अनुसार दोपहर 12.01 मिनट पर कर दी गयी। इससे पहले स्पेसएक्स ने ऐलान किया था कि आज बुधवार को होने वाले संभावित उड़ान के लिए मौसम 90 फीसदी अनुकूल है। एक्सिओम-4 मिशन ने अपनी लॉन्चिंग के दौरान करीब 30 हजार किलोमीटर प्रति घंटा की स्पीड से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरा। कहा जा रहा है कि एक्सिओम-4 मिशन के 28 घंटे की यात्रा के बाद भारतीय समयानुसार गुरुवार शाम साढ़े चार बजे अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचेगा।
बीएसएनएल ने लॉन्च की 5जी सेवा, बिना सिम चलेगा धड़ाधड़ इंटरनेट, जानें मंथली प्लान की कीमत? एबीएन नॉलेज डेस्क। सरकारी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल ने मोबाइल यूजर्स को बड़ी खुशी दी है। लंबे इंतजार के बाद बीएसएनएल ने अपनी 5जी सेवा को लॉन्च कर दिया है, जिसका नाम रखा गया है क्वेंटम 5जी सर्विस या क्यू-5जी। फिलहाल इस नई फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) सेवा को चुनिंदा क्षेत्रों में पेश किया गया है। इस कदम से लाखों यूजर्स की परेशानियां कम होने वाली हैं। आइये जानते हैं कि किन लोगों को इसका फायदा मिलेगा और इसकी मासिक कीमत क्या रहेगी। बीएसएनएल ने लगभग एक सप्ताह पहले अपने ग्राहकों से 5जी सेवा के लिए नाम सुझाने का आग्रह किया था। अब क्वेंटम 5जी सर्विस के साथ कंपनी ने दावा किया है कि इससे यूजर्स को तेज डेटा कनेक्शन और बिना सिम के आपरेशन की सुविधा मिलेगी। हालांकि, अभी यह सेवा सॉफ्ट लॉन्च के दौर में है और इसका औपचारिक रूप से व्यावसायिक विस्तार अभी नहीं हुआ है। टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल ने अब कुछ चुनिंदा सर्किल्स में अपनी क्वेंटम 5जी एफडब्ल्यूए सेवा को लॉन्च कर दिया है। यह सेवा मुख्य रूप से व्यावसायिक और एंटरप्राइज यूजर्स के लिए डिजाइन की गयी है, इसलिए आम ग्राहक फिलहाल इसका लाभ नहीं उठा पायेंगे। कंपनी के अनुसार, यह देश की पहली ऐसी 5जी एफडब्ल्यूए सेवा है जिसमें न तो किसी तार की आवश्यकता है और न ही सिम कार्ड की। इसे पूरी तरह से देशी तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है और इसी तकनीक के आधार पर यह सेवा प्रदान की जायेगी। देश में नेटवर्क कवरेज को बेहतर बनाने के उद्देश्य से बीएसएनएल 1 लाख नये 4जी और 5जी मोबाइल टावर लगाने की योजना पर काम कर रही है। इस योजना को जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है। कंपनी ने पिछले वर्ष भी इतनी ही संख्या में टावर लगाने का संकल्प लिया था, जिसमें अब तक 70,000 से अधिक टावर सक्रिय हो चुके हैं।
18 मई को अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांगISRO लॉन्च करेगा 101वां सैटेलाइटएबीएन नॉलेज डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) 18 मई को एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करने जा रहा है। इसरो इस दिन अपना 101वां उपग्रह अंतरिक्ष में भेजेगा, जिसका नाम RISAT-18 है। यह उपग्रह पृथ्वी पर नजर रखने और निगरानी करने की हमारी क्षमता को और बढ़ाएगा। इस उपग्रह को ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के जरिए श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा, जिसे PSLV-C61 भी कहते हैं। इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसरो ने इसी साल जनवरी में श्रीहरिकोटा से अपना 100वां रॉकेट सफलतापूर्वक लॉन्च किया था। अब 18 मई को भारत का 101वां उपग्रह RISAT-18 लॉन्च किया जाएगा, जो एक पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है। इस उपग्रह का मुख्य उद्देश्य भारत की निगरानी, रिमोट सेंसिंग (दूर से जानकारी जुटाना) और आपदा आने पर तेज़ी से मदद पहुँचाने की क्षमता को और भी मजबूत करना है। इससे देश की सुरक्षा और बचाव कार्यों में काफी मदद मिलेगी। नारायणन ने यह भी साफ किया कि इसरो के सभी मिशन भारत की सुरक्षा और देश की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं।जब उनसे यह पूछा गया कि क्या भारतीय सेना के लिए कोई खास प्रक्षेपण होने वाला है, तो उन्होंने कहा कि इसरो के सभी कार्यक्रम हमारे देश और लोगों की सुरक्षा के लिए ही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत किसी दूसरे देश से मुकाबला नहीं कर रहा है, बल्कि अपने मिशन अपनी ज़रूरतों के हिसाब से तय करता है।नारायणन ने इसरो की शुरुआत के बारे में बताते हुए कहा कि भारत ने 1979 में SLV-3 रॉकेट के साथ अपनी अंतरिक्ष यात्रा शुरू की थी और इसमें 98 प्रतिशत सफलता मिली थी। पहला पूरी तरह से सफल मिशन 1980 में हुआ था। तब से लेकर अब तक इसरो लगातार अपनी तकनीकी ताकत को बढ़ाता रहा है। आज इसरो रक्षा, आपदा प्रबंधन, खेती और मौसम की निगरानी जैसे ज़रूरी क्षेत्रों में भारत की मदद करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इसरो ने अपने अगले मिशन के बारे में भी जानकारी दी है, जिसका नाम EOS-09 (RISAT-1B) है। यह उपग्रह 18 जून 2025 को श्रीहरिकोटा से ही लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन भारत के पृथ्वी अवलोकन कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इसरो के अंतरिक्ष मिशन अब देश की सुरक्षा, निगरानी और आपदा प्रबंधन में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे भारत की तकनीकी और रणनीतिक ताकत बढ़ रही है।
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