अमेरिका। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने की 2एम0437बी नाम के सबसे युवा ग्रह की खोज, बृहस्पति से भी बड़ा है इसका आकार एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने सबसे युवा ग्रह की खोज की है। यह पृथ्वी से 400 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के बाद ग्रहों की उत्पत्ति के नए खुलासे होंगे। 2एम0437बी नामक ग्रह बृहस्पति से भी बड़ा और धरती के ज्वालामुखी जैसा गर्म है। पृथ्वी से 400 प्रकाश वर्ष दूर, चारों तरफ धूल का गुबार बना है। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2एम0437बी ग्रह (बेबी प्लैनेट) अभी अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में है। इस समय यह बेहद गर्म है और इससे काफी ज्यादा ऊर्जा निकल रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका तापमान धरती पर लावा उगल रहे किसी भी ज्वालामुखी के बराबर हो सकता है। इसे पहली बार साल 2018 में देखा गया था। उसी समय से इस पर लगातार निगरानी की जा रही है। यह अपने तारे 2एम0437 के करीब है। नया ग्रह अपने तारे के चारों तरफ धीमी गति से चक्कर लगा रहा है। इस ग्रह को खोजने वाली टीम के वैज्ञानिक एरिक गाइडोस ने कहा कि 2एम0437बी ग्रह उन ग्रहों में से एक है, जिन्हें हम धरती पर मौजूद टलीस्कोप से देख सकते हैं। वैज्ञानिक एरिक गाइडोस ने बताया कि जब उन्होंने इस ग्रह से निकलने वाली रोशनी की जांच की तो पता चला कि इसके चारों तरफ गैस की डिस्क बनी हुई थी, जो अब नहीं है। लेकिन इसके तारे के चारों तरफ धूल का गुबार है, जो अब भी इस ग्रह से निकल रहा है। गाइडोस ने बताया कि 2एम0437बी का व्यास हमारे सौर मंडल में मौजूद बृहस्पति ग्रह से कई गुना ज्यादा है। यह अपने तारे के चारों तरफ जिस कक्षा में चक्कर लगा रहा है, वह धरती से सूर्य के बीच मौजूद कक्षा से 100 गुना बड़ी है।
एबीएन डेस्क। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने बुधवार को जमीन से जमीन पर मार करने की क्षमता वाली अपनी अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। जानकारी के मुताबिक, यह टेस्ट ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप पर हुआ। इस मिसाइल में तीन स्टेज में संचालित होने वाला सॉलिड फ्यूल इंजन लगाया गया है। अग्नि-5 पांच हजार किलोमीटर तक सटीक मार करने की क्षमता रखती है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह टेस्ट द्वीप पर शाम 7 बजकर 50 मिनट पर हुआ। अग्नि श्रृंखला की इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने साथ में विकसित किया है। कई रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया जाता है कि नई अग्नि मिसाइल की मारक क्षमता 5,000 से 8,000 किमी है, लेकिन इसकी सही रेंज के बारे में सरकार कुछ भी खुलासा नहीं करती। अग्नि-5 का यह टेस्ट पहले 2020 में होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। मिसाइल का परीक्षण मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स के जरिए किए जाने की भी खबर है। अग्नि प्राइम का भी टेस्ट कर चुका है डीआरडीओ : इससे पहले डीआरडीओ ने जून में ही अग्नि प्राइम मिसाइल का टेस्ट किया था। अग्नि प्राइम मिसाइल को 4,000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-4 और 5,000 किलोमीटर की अग्नि-5 मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीकी को मिलाकर तैयार किया गया है। अग्नि प्राइम मिसाइल की मारक क्षमता 1000 से 2000 किलोमीटर है, लेकिन यह मिसाइल अत्याधुनिक साजो सामान से सुसज्जित है।
नई दिल्ली। वॉट्सऐप अपनी पेमेंट सर्विस में कुछ बदलाव करने जा रहा है। संभव है कि अगली बार जब आप वॉट्सऐप के जरिए कोई पेमेंट करेंगे तो आपसे आपकी पहचान अथवा आईडेंटिटी को वेरीफाई करने के लिए कहा जाए। आईडेंटिटी वेरीफाई करने के बाद ही यूजर्स को पेमेंट करने दी जाएगी। यदि आप अपनी आईडेंटिटी वेरिफाई नहीं करवाएंगे तो आपको वॉटसऐप के माध्यम से पेमेंट करने में परेशानी हो सकती है।वॉट्सऐप के नए बीटा वर्जन v2.21.22.6 में मौजूद नए स्ट्रिंग्स ने इशारा किया है कि यह वेरिफिकेशन सिस्टम जल्द ही लागू किया जा सकता है। नए स्ट्रिंग कुछ इस तरह से हैं- “आपकी आइडेंटिटी अभी वेरीफाई नहीं हो पाई है। अपने डाक्यूमेंट्स को फिर से अपलोड करने की कोशिश करें” और “वॉट्सऐप पर अपनी पेमेंट्स को जारी रखने के लिए अपनी आइडेंटिटी वेरीफाई करें।” वॉट्सऐप पे (WhatsApp Pay) अभी तक सिर्फ भारत और ब्राजील में उपलब्ध है। जबकि फिलहाल भारत में ही मोबाइल नंबर के माध्यम से पेमेंट करने का विकल्प दिया गया है। ब्राजील में यूजर्स को पेमेंट करने के लिए फेसबुक पे (Facebook Pay) के माध्यम से अपने डेबिट और क्रेडिट कार्ड्स को ऑथेंटिकेट करना पड़ता है। गौरतलब है कि वॉट्सऐप अपनी पेमेंट सर्विस को यूजर फ्रेंडली बनाने और प्रतिद्वंद्वी कंपनी को चुनौती देने के लिए उसमें लगातार बदलाव कर रहा है। वॉट्सऐप ने भारत में पेमेंट सर्विस की शुरुआत 2020 में की थी। जून 2021 में इसे सभी के लिए जारी कर दिया गया था। भारत में इसे पेटीएम, फोनपे, गूगल-पे और एमेजॉन पे से मुकाबला करना पड़ रहा है।
नयी दिल्ली। भारत ने शुक्रवार को ओडिशा के चांदीपुर में एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से देश में ही विकसित हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (हीट) अभ्यास का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। डीआरडीओ के सूत्रों ने यह जानकारी दी। इस यान का इस्तेमाल अनेक मिसाइल प्रणालियों का मूल्यांकन करने के लिए हवाई लक्ष्य के तौर पर किया जा सकता है। सूत्रों ने कहा कि रडार और इलेक्ट्रो-आॅप्टिकल निगरानी प्रणाली (ईटीओएस) समेत दूरमापी तथा अनेक सेंसरों के माध्यम से लक्षित यान के कामकाज पर निगरानी रखी गयी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) को बधाई दी। अभ्यास को डीआरडीओ के वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान, बेंगलुरू ने डिजाइन और विकसित किया है। सूत्रों ने बताया कि इसे गैस टर्बाइन इंजन से चलाया जाता है ताकि सबसोनिक गति पर लंबी उड़ान भरी जा सके।
एबीएन डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सोमवार को ओडिशा के चांदीपुर में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में आकाश मिसाइल के एक नए संस्करण का सफल परीक्षण किया गया। इस मिसाइल को आकाश प्राइम नाम दिया गया है। समाचार एजेंसी एएनआई की एक रिपोर्ट के अनुसार अपडेट किए जाने के बाद अपनी पहली उड़ान में आकाश प्राइम ने दुश्मन विमानों की तरह व्यवहार कर रहे मानवरहित हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाया और नष्ट कर दिया।
अमेरिका- आज रात बेहद तेज रफ्तार से ताज महल जितना बड़ा एस्टेरॉयड पृथ्वी की कक्षा में घुस जाएगा। जी हां, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि एक बेहद विशाल पत्थर यानी एस्टेरॉयड पृथ्वी की ओर बेहद तेजी से बढ़ रहा है। आज रात ये एस्टेरॉयड धरती की कक्षा में प्रवेश कर जाएगा। खास बात यह है कि नासा के अनुसार ये एस्टेरॉयड लंदन के बिग बेन टावर जितना विशाल है। आज रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच धरती के ऑर्बिट में प्रवेश करेगा एस्टेरॉयड एक रिपोर्ट के मुताबिक ये बड़ा एस्टेरॉयड 50,000 मील प्रति घंटे यानी 80,000 किलो मीटर प्रति घंटे से भी से तेज रफ्तार से धरती की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने इस पत्थर का नाम 2021RL3 रखा है। ये 160 फीट से लेकर 360 फीट चौड़ा हो सकता है। जानकारी के लिए बता दें कि ताज महल की लंबाई 240 फीट के करीब है और चौड़ाई 365 फीट के करीब है। साइंटिस्ट्स ने बताया कि एस्टेरॉयड अपने ग्रह के ऑर्बिट के काफी नजदीक आ जाएगा। उनके अनुसार एस्टेरॉयड ऑर्बिट के 29,03,980 किलोमीटर के दायरे में प्रवेश कर जाएगा। आपको बता दें कि ये पत्थर भारतीय समय के अनुसार आज रात 1 बजे से सुबह 4 बजे के बीच धरती के ऑर्बिट में प्रवेश करेगा। धरती पर बहुत बुरा प्रभाव डालेगा : वैज्ञानिकों ने बताया कि अगर ये पत्थर धरती के और नजदीक आ गया या कहीं अगर धरती से टकरा गया तो ये धरती पर बहुत बुरा प्रभाव डालेगा। जब एस्टेरॉयड धरती के करीब आएगा तब नासा के वैज्ञानिक सही ढंग से बता पाएंगे कि उसका आकार कितना बड़ा है। एस्टेरॉयड मार्स से लेकर ज्यूपिटर तक अंडाकार ऑर्बिट में घूम रहा है वैज्ञानिकों के अनुसार, ये एस्टेरॉयड मार्स से लेकर ज्यूपिटर तक अंडाकार ऑर्बिट में घूम रहा है और सोलर सिस्टम के दूसरे ग्रहों के मुकाबले ये धरती के सबसे नजदीक होकर गुजरने वाला है। वैज्ञानिकों ने बताया कि धरती के ऑर्बिट से हर दिन छोटे पत्थर टकराते रहते हैं मगर ये आकार में काफी छोटे होते हैं इसलिए उनका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है। वैज्ञानिकों ने ये भी बताया कि कोई भी पत्थर, जो एक कार के साइज से छोटा होता है, वो अपने आप धरती के एटमॉस्फियर में प्रवेश करने के दौरान जलकर राख हो जाता है।
एबीएन डेस्क।रिलायंस जियो अपने सस्ते 4जी स्मार्टफोन JioPhone Next को दिवाली पर लांच करने वाली है। इसके अलावा कंपनी अपना JioBook laptop भी जल्द ही उतार सकती है। हाल ही में जियोबुक कथित तौर पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) की वेबसाइट पर नजर आया है। इससे भारतीय बाजार में इसकी जल्द लांचिंग के संकेत मिल रहे हैं। सर्टिफिकेशन साइट पर जियो के अपकमिंग लैपटॉप के तीन वेरिएंट लिस्टेड बताए जा रहे हैं। टिप्स्टर मुकुल शर्मा ने इन लैपटॉप्स को स्पॉट किया है। इंटरनल मॉडल्स के नाम (NB1118QMW, NB1148QMW, and NB1112MM) के अलावा इन लैपटॉप्स की बहुत ज्यादा डीटेल्स सामने नहीं आई हैं। पुरानी रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि JioBook लैपटॉप 4G LTE कनेक्टिविटी, एक स्नैपड्रैगन प्रोसेसर, 4GB LPDDR4x रैम और 64GB तक ऑनबोर्ड स्टोरेज के साथ आ सकता है। JioBook की लॉन्चिंग डेट का अभी तक नहीं पता है। पिछले लीक से पता चलता है कि अपकमिंग Jio लैपटॉप में HD (1,366×768 पिक्सल) डिस्प्ले मिल सकता है। इसमें स्नैपड्रैगन 665 प्रोसेसर मिलेगा, जो स्नैपड्रैगन X12 4G मॉडेम जुड़ा होगा। इसमें 4GB रैम और 64GB तक eMMC स्टोरेज मिलने की उम्मीद है। कनेक्टिविटी फीचर्स के रूप में एक मिनी HDMI कनेक्टर, डुअल-बैंड WiFi और ब्लूटूथ शामिल हैं। यह 3-एक्सिस एक्सेलेरोमीटर और एक क्वालकॉम ऑडियो चिप के साथ आ सकता है। खास बात है कि रिलायंस जियो के इस लैपटॉप में कंपनी के JioStore, JioMeet, और JioPages जैसे एप पहले से इंस्टॉल मिलेंगे। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट टीम्स, माइक्रोसॉफ्ट एज और ऑफिस जैसे माइक्रोसॉफ्ट ऐप भी प्री-इंस्टॉल मिलेंगे। कंपनी इसे किस कीमत पर लाएगी, इस बारे में फिलहाल नहीं कहा जा सकता। उम्मीद है कि यह बजट सेगमेंट में लाया जा सकता है
एबीएन डेस्क। चंद्रयान-2 को दो साल पूरे होने के मौके पर इसरो ने सोमवार को चंद्र विज्ञान कार्यशाल आयोजित की। इसका उद्घाटन इसरो के प्रमुख के. सिवन ने किया। उन्होंने बताया कि चंद्रयान-2 ने चंद्रमा के आसपास 9000 हजार से ज्यादा चक्कर पूरे कर लिए हैं। वह उसमें लगाए गए इमेजिंग व वैज्ञानिक उपकरणों के माध्यम से इसरो को उकृष्ट डाटा मुहैया करा रहा है। चंद्रयान-2 के आठ पेलोड चंद्रमा पर सुदूर संवेदी प्रौद्योगिकी के माध्यम से वैज्ञानिक प्रयोग कर रहे हैं। इसरो के प्रमुख सिवन ने कहा कि वैज्ञानिक आंकड़े शिक्षा जगत एवं संस्थानों के विश्लेषण के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि चंद्रयान-2 मिशन में और अधिक वैज्ञानिक साझेदारी हो सके। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (ISRO) की दो दिनी कार्यशाला सोमवार से शुरू हुई। चंद्रमा के कक्ष में चंद्रयान-2 को चक्कर लगाते हुए दो साल पूरे होने के अवसर पर इसका आयोजन किया गया है। अपने उद्घाटन भाषण में इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा कि आज दिनांक तक चंद्रयान-2 ने नौ हजार से ज्यादा चक्कर पूरे कर लिए हैं। सिवन अंतरिक्ष विभाग के सचिव भी हैं। इसरो के बंगलूर स्थित मुख्यालय में उन्होंने चंद्रयान-2 से जुड़े डाटा प्रोडक्ट व विज्ञान दस्तावेज जारी किए। सिवन ने कहा कि अब तक के नतीजे काफी उत्साहवर्धक रहे हैं। कार्यशाला में इसरो के चेयरमैन एएस किरण कुमार ने कहा कि चंद्रयान-2 के उपकरणों से हमें उत्कृष्ट आंकड़े मिल रहे हैं।
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