एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटिश प्रतिस्पर्धा नियामक ने कहा है कि उसने अपने ब्राउजर में यूजर-ट्रैकिंग कुकीज में बदलाव पर अल्फाबेट की साथी कंपनी गूगल से बेहतर प्रतिबद्धता हासिल की है। ब्रिटिश प्रतिस्पर्धा नियामक ने कहा, कुछ क्रोम में कुछ कुकीज कम होंगे इसमें अमेरिकी प्रतिस्पर्धा और बाजार प्राधिकरण (सीएमए) क्रोम में कुछ कुकीज को कम करना शामिल है। गूगल इसकी योजना की जांच कर रहा है ताकि डिजिटल विज्ञापन की प्रतिस्पर्धा में कोई बाधा न पहुंचे। गूगल ने जून में प्राइवेसी सैंडबॉक्स को लेकर अपनी योजना में बदलाव करने का प्रस्ताव रखा था जिसमें सीएमए को एक निरीक्षण भूमिका की अनुमति देना शामिल है। गूगल ने यह भी कहा है कि यदि उसकी प्रतिबद्धताएं स्वीकार की गईं तो इन्हें विश्व स्तर पर लागू किया जाएगा। सीएमए ने कहा कि गूगल ने कुछ अन्य चिंताओं को दूर करने के लिए भी अपना संकल्प दोहराया है। इसमें आईपी पते तक पहुंच को कम करना और डाटा पर अंदरूनी सीमाओं को स्पष्ट करना शामिल है। सीएमए के मुख्य कार्यकारी एंड्रिया कोसेली ने बताया कि हम हमेशा से यूजरों की गोपनीयता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। सशस्त्र सेनाओं के बीच संचार नेटवर्क को सुरक्षित एवं मजबूत बनाने के लिए वायु सेना के लिए 2,236 करोड़ रुपए की लागत से देश में ही बने जीसैट- 7 सी उपग्रह की खरीद को मंगलवार को मंजूरी दी गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में आज हुई रक्षा खरीद परिषद की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस प्रस्ताव को जरूरत के आधार पर खरीद की श्रेणी में मेक इन इंडिया के तहत मंजूरी दी गई है। वायुसेना के आधुनिकीकरण और संचालन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है और इस की अनुमानित लागत 2,236 करोड़ रुपए है। सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो के लिए इस उपग्रह का पूरा डिजाइन, विकास और प्रक्षेपण देश में ही किया जाएगा। इसकी बदौलत हमारी सशस्त्र सेनाएं एक दूसरे के साथ सभी तरह की परिस्थितियों में पूरी सुरक्षा के साथ द्दष्टि की सीमा से आगे तक संपर्क साधने में सक्षम होगी।
एबीएन डेस्क। बीते कुछ सालों में भारत के अंदर डिजिटल पेमेंटिंग सिस्टम में कई बड़े बदलाव हुए हैं। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते डिजिटल ट्रांजैक्शन की मात्रा में एक्सपोनेंशियल ग्रोथ देखने को मिली है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि देश की अर्थव्यवस्था को जल्द से जल्द एक कैशलेस इकॉनोमी के रूप में बदला जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए जल्द ही आधार कार्ड में एक बड़ा बदलाव आ सकता है। रिपोर्ट की मानें तो आने वाले समय में हम आधार कार्ड के जरिए पैसों को ट्रांसफर कर सकेंगे। अभी तक हम लोग आधार कार्ड का उपयोग सरकारी और गैर सरकारी क्षेत्रों की कई सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए करते थे। वहीं अब इस नए बदलाव के आने से देश में लेन देन की एक नई व्यवस्था की शुरूआत हो जाएगी। इससे देश भर के करोड़ों लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा। इसी कड़ी में आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से - रिपोर्ट के मानें तो BHIM (Bharat interface for money) यूजर्स आसानी से आधार कार्ड नंबर के जरिए उन व्यक्तियों के खातों में पैसों को भेज सकेंगे, जिनके पास स्मार्टफोन या यूपीआई आईडी नहीं है। इससे देश में एक सकारात्मक बदलाव आ सकता है। बीते कुछ सालों में डिजटलीकरण की रफ्तार में काफी तेजी आई है। इस कारण कई लोग लेनदेन के लिए डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर रहे हैं। वहीं देश के भीतर कई लोग ऐसे भी हैं, जो अभी भी लेन देन की इस नई व्यवस्था का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। रिपोर्ट की मुताबिक आधार कार्ड से पैसों को ट्रांसफर करने के लिए आपको BHIM ऐप में संबंधित व्यक्ति के आधार नंबर को दर्ज करना होगा। आधार नंबर को दर्ज करने के बाद वेरीफाई के बटन पर क्लिक करना है। इसे करने के बाद आधार नंबर की लिंकिंग की पुष्टि की जाएगी। प्रोसेस सफलतापूर्वक होने के बाद राशि को संबंधित व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।
एबीएन डेस्क। मंगल ग्रह पर जीवन की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए एक निराशाजनक खबर है। वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में कहा गया है कि जिन जीवाश्म (फॉसिल) साक्ष्यों को उस ग्रह पर जीवन का संकेत समझा गया है, वे भ्रामक हो सकते हैं। धरती से कई रोबोट संचालित यान मंगल ग्रह पर भेजे गए हैं। उन्हें वहां जीवन के संकेत का पता लगाने के मकसद से भेजा गया है। आम तौर पर मंगल ग्रह की सतह शुष्क है। लेकिन उस पर कुछ सूक्ष्म माइक्रोफॉसिल नजर आए हैं, जिन्हें कुछ वैज्ञानिकों ने इस ग्रह पर अतीत या वर्तमान में जीव मौजूद होने का संकेत समझा है। छद्म जीवाश्मों की थ्योरी : लेकिन लंदन से प्रकाशित जर्नल आॅफ जियोलॉजिकल में छपी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में माइक्रोफॉसिल संकेतों की व्याख्या करते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एडिनबरा विवि में एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट सीन मैकमोहन और आॅक्सफोर्ड विवि में जियो-बॉयोलॉजिस्ट जूली कॉस्मिड्स ने अपनी अध्ययन रिपोर्ट मे कहा है कि वैज्ञानिकों को गैर-जैवीय खनिज पदार्थों पर भी जरूर ध्यान देना चाहिए। इनमें कई ऐसे होते हैं, जो फॉसिल की तरह नजर आते हैं। इस अध्ययन रिपोर्ट में दर्जनों ऐसे गैर-जैवीय (नॉन बॉयोलॉजिकल) प्रक्रियाओं का जिक्र है, जिनसे छद्म जीवाश्म पैदा होते हैं। यानी वे जीवाश्म जैसे दिखते हैं, लेकिन असल में वे जीवाश्म नहीं होते। इन शोधकर्ताओं के मुताबिक मंगल ग्रह पर जो जीवाश्म दिखे हैं, उनके साथ भी ऐसी ही बात हो सकती है। वेबसाइट साइंसअलर्ट.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मैकमोहन ने कहा है- आगे चल कर मार्स पर गए घुमंतू यान (रोवर) जरूर ऐसी कोई चीज हासिल करेंगे, जो जीवाश्म की तरह नजर आएंगे। इसलिए हमें उनकी रासायनिक संरचना को समझने के लिए खुद सक्षम बनाना पड़ेगा।
एबीएन डेस्क। हर चीज के फायदे और नुकसान दोनों होते हैं। इंटरनेट के साथ भी ऐसा ही है। कई एक्सपर्ट कम-से-कम मोबाइल इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं, लेकिन लोग कहां सुनने वाले हैं। भारत के लोग इस वक्त स्मार्टफोन पर सबसे ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। एक रिपोर्ट से इसकी जानकारी मिली है। भारतीय मोबाइल यूजर्स के बीच गेमिंग एप्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मोबाइल पर समय बिताने के मामले में भारत चौथे नंबर पर : मोबाइल एप एनालिस्ट कंपनी एप एनी की एक रिपोर्ट के मुताबकि 5.5 घंटे के साथ इंडोनेशिया पहले नंबर पर, 5.4 घंटे के साथ ब्राजील दूसरे नंबर पर, 5 घंटे के साथ दक्षिण कोरिया तीसरे नंबर पर, 4.8 घंटे के साथ भारत चौथे नंबर पर और 4.8 घंटे के साथ मैक्सिको पांचवे नंबर पर है। भारतीय यूजर्स हर रोज 24 घंटे में से 4.8 घंटे मोबाइल पर बिता रहे हैं। पिछले साल की पहली तिमाही में यह समय 4 घंटे का था। इसमें सबसे ज्यादा यूजर्स गेमिंग वाले हैं। इसके अलावा फिनटेक और क्रिप्टो एप्स भी भारत में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। एप एनी ने 2021 की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट जारी की है। कुल एप्स की डाउनलोडिंग में भी 28 फीसदी का इजाफा देखने को मिला है जिसके बाद डाउनलोड हुए कुल एप्स की संख्या 24 बिलियन पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत मोबाइल गेमिंग के लिहास से पूरी दुनिया में सबसे बड़ा मार्केट है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रत्येक पांचवां मोबाइल गेम एप भारत में ही डाउनलोड होता है। सबसे ज्यादा डाउनलोडिंग का ताज लुडो किंग के सिर फैंटसी मोबाइल गेम एप्स की लोकप्रियता के बावजूद साल 2021 की छमाही में लुडो किंग डाउनलोडिंग के मामले में टॉप पर है। घरेलू गेमिंग एप्स को महज 7.6 फीसदी ही डाउनलोड्स मिले हैं। सरकार द्वारा पिछले साल बैन करने के बाद भी पबजी मोबाइल गेम लोकप्रियत के शिखर पर है। पबजी मोबाइल को हाल ही में भारत में नए नाम बैटलग्राउंड्स मोबाइल इंडिया के नाम से लॉन्च किया गया है। फिनटेक एप्स का इस्तेमाल 5.4 गुना बढ़ा : फोनपे, गूगल पे और सरकार के यूपीआई एप्स समेत कई सारे फिनटेस एप्स के इस्तेमाल में भी बड़ा इजाफा देखने को मिला है। फिनटेक एप्स का इस्तेमाल भारतीय यूजर्स पिछले साल के मुकाबले 5.4 गुना अधिक कर रहे हैं। फेस्टिव सीजन के दौरान डिजिटल पेमेंट वाले एप्स के इस्तेमाल में बड़ा इजाफा देखने को मिला है।
एबीएन डेस्क। एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने गुरुवार को अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के साथ मिलकर चार अंतरिक्ष यात्रियों का इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) का मिशन सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इस क्रू के पृथ्वी की कक्षा पार करते ही 60 वर्षों के इतिहास में 600 लोगों के अंतरिक्ष में जाने का अनोखा रिकॉर्ड बन गया। स्पेसएक्स हाल ही में चार अंतरिक्ष यात्रियों को अपने अंतरिक्ष यान के जरिए वापस पृथ्वी पर भी लेकर आया है। बताया गया है कि टीम में जो अंतरिक्षयात्री शामिल किए गए हैं, उनमें एक अनुभवी स्पेसवॉकर (अंतरिक्ष में विमान से बाहर निकलकर अभ्यास कर चुका व्यक्ति) और दो युवा शामिल हैं। नासा ने इन्हें अपने आने वाले चंद्र मिशन के लिए भी चुना है।
एबीएन डेस्क : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कहा है कि सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण 19 नवंबर, शुक्रवार को (कार्तिक पूर्णिमा) के दिन लगेगा। इस मौके पर पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच से गुजरेगी, ग्रहण दोपहर एक बजकर 30 मिनट के बाद अपने पीक पर होगा। सदी के सबसे लंबे चंद्रग्रहण पर सुर्ख दिखेगा चांद : इस दौरान पृथ्वी पूरे चंद्रमा को सूरज की किरणों से ढक देगी। खगोलविदों के अनुसार, इस दौरान चांद का रंग सुर्ख लाल होगा जिसे भारत में भी देखा जा सकेगा। इसके पहले 26 मई को चंद्रग्रहण लगा था। चंद्रग्रहण के दीदार को लेकर देश की कई नक्षत्रशालाओं में बड़ी तैयारियां की गई हैं। सदी का लंबा चंद्रग्रहण क्यों? नासा के वैज्ञानिकों और खगोलविदों का कहना है कि सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण तीन घंटे 28 मिनट और 23 सेकंड का होगा। वैज्ञानिकों के अनुसार, वर्ष 2001 से वर्ष 2021 के बीच पहली बार इस तरह की घटना घटित होगी। नासा के अनुसार पृथ्वी 21वीं सदी में 228 चंद्रग्रहण का साक्षी बनेगी। एक माह में दो और तीन चंद्रग्रहण भी देखने को मिल सकते हैं। असम और अरुणाचल में दिखेगा चांद : वैज्ञानिकों के अनुसार, चंद्रमा उन्हीं स्थानों पर दिखेगा जहां वो हॉरिजन के ऊपर होगा। भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों असम, अरुणाचल प्रदेश के लोग इस खगोलीय घटना को देख सकेंगे। इसी तरह उत्तरी अमेरिका के लोग भी सदी के सबसे लंबे ग्रहण के साक्षी बनेंगे। मेक्सिको, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया और उत्तरी यूरोप के लोग भी चंद्रग्रहण को देखेंगे। इस वर्ष कुल चार ग्रहण : इस वर्ष दो चंद्रग्रहण पड़ने हैं, जिसमें से एक चंद्रग्रहण बीते 26 मई को लग चुका है। अब इस महीने साल का यह दूसरा और आखिरी चंद्रग्रहण है। इस वर्ष में कुल मिलाकर कुल चार ग्रहण पड़ने हैं, जिनमें दो चंद्रग्रहण और दो सूर्यग्रहण शामिल हैं। साल का आखिरी सूर्यग्रहण अगले महीने चार दिसंबर को पड़ेगा।
अमेरिका। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने की 2एम0437बी नाम के सबसे युवा ग्रह की खोज, बृहस्पति से भी बड़ा है इसका आकार एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरिक्ष विज्ञानियों ने सबसे युवा ग्रह की खोज की है। यह पृथ्वी से 400 प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस खोज के बाद ग्रहों की उत्पत्ति के नए खुलासे होंगे। 2एम0437बी नामक ग्रह बृहस्पति से भी बड़ा और धरती के ज्वालामुखी जैसा गर्म है। पृथ्वी से 400 प्रकाश वर्ष दूर, चारों तरफ धूल का गुबार बना है। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों ने कहा कि 2एम0437बी ग्रह (बेबी प्लैनेट) अभी अपनी जिंदगी के शुरुआती दिनों में है। इस समय यह बेहद गर्म है और इससे काफी ज्यादा ऊर्जा निकल रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका तापमान धरती पर लावा उगल रहे किसी भी ज्वालामुखी के बराबर हो सकता है। इसे पहली बार साल 2018 में देखा गया था। उसी समय से इस पर लगातार निगरानी की जा रही है। यह अपने तारे 2एम0437 के करीब है। नया ग्रह अपने तारे के चारों तरफ धीमी गति से चक्कर लगा रहा है। इस ग्रह को खोजने वाली टीम के वैज्ञानिक एरिक गाइडोस ने कहा कि 2एम0437बी ग्रह उन ग्रहों में से एक है, जिन्हें हम धरती पर मौजूद टलीस्कोप से देख सकते हैं। वैज्ञानिक एरिक गाइडोस ने बताया कि जब उन्होंने इस ग्रह से निकलने वाली रोशनी की जांच की तो पता चला कि इसके चारों तरफ गैस की डिस्क बनी हुई थी, जो अब नहीं है। लेकिन इसके तारे के चारों तरफ धूल का गुबार है, जो अब भी इस ग्रह से निकल रहा है। गाइडोस ने बताया कि 2एम0437बी का व्यास हमारे सौर मंडल में मौजूद बृहस्पति ग्रह से कई गुना ज्यादा है। यह अपने तारे के चारों तरफ जिस कक्षा में चक्कर लगा रहा है, वह धरती से सूर्य के बीच मौजूद कक्षा से 100 गुना बड़ी है।
एबीएन डेस्क। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) ने बुधवार को जमीन से जमीन पर मार करने की क्षमता वाली अपनी अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। जानकारी के मुताबिक, यह टेस्ट ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप पर हुआ। इस मिसाइल में तीन स्टेज में संचालित होने वाला सॉलिड फ्यूल इंजन लगाया गया है। अग्नि-5 पांच हजार किलोमीटर तक सटीक मार करने की क्षमता रखती है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह टेस्ट द्वीप पर शाम 7 बजकर 50 मिनट पर हुआ। अग्नि श्रृंखला की इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल को डीआरडीओ और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने साथ में विकसित किया है। कई रिपोर्ट्स में तो यहां तक दावा किया जाता है कि नई अग्नि मिसाइल की मारक क्षमता 5,000 से 8,000 किमी है, लेकिन इसकी सही रेंज के बारे में सरकार कुछ भी खुलासा नहीं करती। अग्नि-5 का यह टेस्ट पहले 2020 में होना था, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे स्थगित कर दिया गया था। मिसाइल का परीक्षण मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल्स के जरिए किए जाने की भी खबर है। अग्नि प्राइम का भी टेस्ट कर चुका है डीआरडीओ : इससे पहले डीआरडीओ ने जून में ही अग्नि प्राइम मिसाइल का टेस्ट किया था। अग्नि प्राइम मिसाइल को 4,000 किलोमीटर की रेंज वाली अग्नि-4 और 5,000 किलोमीटर की अग्नि-5 मिसाइलों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक तकनीकी को मिलाकर तैयार किया गया है। अग्नि प्राइम मिसाइल की मारक क्षमता 1000 से 2000 किलोमीटर है, लेकिन यह मिसाइल अत्याधुनिक साजो सामान से सुसज्जित है।
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