ज्ञान विज्ञान

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Published / 2022-05-24 17:18:39
क्या टैटू बनवाने वाला कभी नहीं दे सकता है खून? जानें सटीक जवाब...

एबीएन नॉलेज डेस्क। आजकल टैटू बनवाना एक नया फैशन बन गया है और काफी लोग शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर टैटू बनवा रहे हैं। लेकिन, टैटू को लेकर कहा जाता है कि इसे बनवाने के कई तरह नुकसान होते हैं। इन नुकसान में नौकरी ना लगने के तर्क के साथ ये भी कहा जाता है कि टैटू बनवाने के बाद कोई व्यक्ति कभी भी ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है। इंटरनेट पर कई रिपोर्ट्स में और सोशल मीडिया पर यह जानकारी शेयर की जाती है कि जिस व्यक्ति ने अपने शरीर के किसी हिस्से में टैटू करवा रखा है तो वो जिंदगी भर ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है। हालांकि, डॉक्टर्स का इस मामले में कुछ और कहना है। ऐसे में आज हम आपको बताते हैं कि सोशल मीडिया पर टैटू और ब्लड डोनेशन को लेकर जो जानकारी शेयर की जाती है, उसमें कितनी सच्चाई है। दरअसल, सोशल मीडिया पर टैटू को लेकर कई गलत जानकारी दी जाती है तो जानते हैं ये तथ्य कितने सही है और इस पर डॉक्टर्स का क्या कहना है? क्या है इसका सच : डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऐसा नहीं है कि एक बार टैटू करवाने के बाद व्यक्ति कभी भी खून डोनेट नहीं कर सकता है। टैटू करवाने के बाद भी एक व्यक्ति आसानी से ब्लड डोनेट कर सकता है। लेकिन, इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर किसी ने हाल ही में टैटू करवाया है तो वो ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है। टैटू करवाने के करीब 6 महीने बाद तक कोई भी व्यक्ति ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है और इसके बाद डोनेट कर सकता है। इसके अलावा पीयरसिंग को लेकर भी कहा जाता है कि अगर किसी ने पीयरसिंग करवाई है तो वो व्यक्ति भी ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है। हालांकि, इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर किसी ने बॉडी पियरसिंग किसी हेल्थ प्रोफेशनल और पियरसिंग से होने वाली सूजन ठीक हो गई है, तो पियरसिंग करवाने के करीब 12 घंटे बाद भी ब्लड डोनेट किया जा सकता है। इसलिए अगर आप ब्लड डोनेट करना चाहते हैं तो पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें। क्या कहते हैं एक्सपर्ट : वहीं, इस पर एशियन हॉस्पिटल की एसोसिएट डायरेक्टर (लेबोरेट्री) डॉक्टर उमा रानी का कहना है, अगर किसी ने टैटू बनवाया है तो वो एक साल तक ब्लड डोनेट नहीं कर सकते हैं। टैटू को मल्टीपल पियरसिंग माना जाता है, इसलिए कुछ दिन का इंतजार करना आवश्यक है। इसके अलावा अगर शरीर में कोई छोटी सी भी सर्जरी हुई है तो ऐसी स्थिति में ब्लड डोनेट के लिए वैट करना होता है। इसके अलावा दिल्ली के पीएसआरआई हॉस्पिटल की डॉक्टर विनीता का कहना है, अगर किसी व्यक्ति ने टैटू करवाया है तो 6 महीने तक ब्लड डोनेट नहीं कर सकता है। दरअसल, टैटू में निडल से काफी पियरसिंग होती है और इससे काफी इंफेक्शन हो सकते हैं। ऐसे में उसके एचआईवी, हेपेटाइटस बी आदि हो सकते हैं और ये ट्रांसमिसबल होते हैं, इससे दूसरे मरीज के होने के कारण बढ़ जाते हैं। वहीं, अगर किसी ने हेल्थ एक्सपर्ट से पियरसिंग करवाया है तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर कहीं से भी पियरसिंग करवाई है तो इसके लिए वेट करना चाहिए। इसके साथ ही जिन लोगों के बुखार, जुकाम आदि है तो भी ब्लड डोनेट से बचना चाहिए।

Published / 2022-05-22 15:25:17
गर्व की बात... चीन छोड़ भारत आने की तैयारी में एपल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईफोन निर्माता एपल चीन से परेशान होकर भारत का दामन थामने की योजना बना रहा है। एपल ने अपने कई कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चर्स से कहा है कि वह भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में अपना उत्पादन बढ़ाना चाहता है। एपल चीन के कड़े कोविड प्रतिबंधों से परेशान हो गया है और अब चीन के बाहर अपना उत्पादन बढ़ाना चाहता है। चीन के बाहर एपल की पहली पसंद भारत है। एपल ने चीन की एंटी कोविड पॉलिसी सहित कई दूसरे फैक्टर्स की आलोचना की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, सूत्रों ने भारत और वियतनाम को चीन के सबसे बड़े विकल्प बताए हैं। उन्होंने बताया कि इन दो देशों में अभी एपल के वैश्विक उत्पादन का एक छोटा हिस्सा ही है लेकिन कंपनी अब इन्हें चीन के विकल्प के रूप में देख रही है। एक अनुमान के अनुसार, चीन में इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर्स के 90 फीसदी से अधिक उत्पाद बनाते हैं। भारत को अगले चीन के रूप में देखता है एपल : विश्लेषकों के अनुसार, बीजिंग के दमनकारी कम्युनिस्ट शासन और अमेरिका के साथ उसके संघर्षों के चलते चीन पर निर्भरता को एक संभावित खतरा है। हालांकि, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने जब एपल के प्रवक्ता से संपर्क किया, तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एपल के मैन्युफैक्चरिंग योजना से जुड़े लोगों के अनुसार, कंपनी बड़ी जनसंख्या और कम लागत के चलते भारत को अगले चीन के रूप में देखता है। चीन में यह है एपल को फायदा : दूसरी तरफ चीन में योग्य श्रमिकों की एक बड़ी तादात है, जो कई एशियाई देशों की आबादी से अधिक है। एपल ने चीन में स्थानीय सरकारों के साथ मिलकर काम किया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसके ठेकेदारों के पास प्लांट्स में आईफोन और दूसरी उपकरणों के निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि, लोग और अन्य सामानों की सप्लाई हो। अप्रैल में एपल के सीईओ टिम कुक ने कहा, हमारी आपूर्ति श्रृंखला वास्तव में ग्लोबल है और इसलिए उत्पाद हर जगह बनाए जाते हैं। हम आॅप्टिमाइज करना भी जारी रखते हैं। महामारी से पहले भी चीन से दूर होना चाह रही थी कंपनी : साल 2020 की शुरूआत में कोविड-19 के दुनिया भर में फैलने से पहले एपल चीन से दूर होने की कोशिश कर रहा था लेकिन महामारी ने उसकी इन महत्वाकांक्षाओं को रोक दिया। मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, एपल फिर से अपने कॉन्ट्रैक्टर्स पर दबाव बना रहा है और उन्हें निर्देश दे रहा है कि वे नई विनिर्माण क्षमता की तलाश करें।

Published / 2022-05-20 10:09:26
आखिर गाड़ियों में क्यों लगे होते हैं अलग-अलग रंगों के नंबर प्लेट? जानें इनके राज...

एबीएन नॉलेज डेस्क। सड़कों पर कई तरह की गाड़ियां दौड़ती है। आमतौर पर लोगों की नजर गाड़ियों की डिजाइन और उसके ब्रांड्स पर पड़ती है। लेकिन अगर आप गौर करैंगे तो पाएंगे कि गाड़ियों में अलग-अलग रंग के नंबर प्लेट लगे रहते हैं। किसी में सफ़ेद, तो किसी में पीली, काली, लाल नंबर प्लेट्स भी दिख जाती हैं। क्या आप जानते हैं इन अलग-अलग रंगों के नेम प्लेट्स का मतलब क्या होता है? आखिर इन नंबर प्लेट्स का रंग के आधार पर क्या मतलब होता है। आज हम आपको हर रंग के नंबर प्लेट्स का मतलब और उनसे जुड़े राज के बारे में बताने जा रहे हैं। सफ़ेद नंबर प्लेट्स- जिस गाड़ी पर सफ़ेद नंबर प्लेट लगा होता है, उसे कभी भी कमर्शियल यूज में नहीं लाया जा सकता। सफ़ेद नंबर प्लेट पर काले रंग से नंबर लिखे होते हैं। पीले नंबर प्लेट्स- जिन गाड़ियों को टैक्सी या ट्रकों में पीले नंबर प्लेट्स लगे होते हैं, उसका मतलब होता है कि इनका इस्तेमाल कमर्शियल पर्पस से किया जा सकता है। इसमें भी काले रंग से नंबर लिखे जाते हैं। नीले नंबर प्लेट- नीले रंग नंबर प्लेट की गाड़ियां आपको दिल्ली में आसानी से दिख जाएंगे। ऐसे नंबर प्लेट्स विदेशी दूतावास या यूएन मिशन के लिए चलने वाले गाड़ियों में लगे रहते हैं। नीले नंबर प्लेट्स पर सफ़ेद रंग से अक्षर लिखे जाते हैं। काले नंबर प्लेट्स- काले रंग के नंबर प्लेट्स भी कमर्शियल गाड़ियों में लगे होते हैं। लेकिन ये गाड़ियां किसी और के यूज के लिए होती हैं। ऐसे नंबर प्लेट्स की गाड़ियां किसी होटल के बाहर आपको लगी मिल जाएंगी। इसपर पीले रंग से अक्षर लिखे होते हैं। लाल नंबर प्लेट्स- देश के किसी बड़े ओहदे के शख्स यानी राज्यपाल या राष्ट्रपति की गाड़ियों पर लाल रंग के नंबर प्लेट्स लगे होते हैं। इनके पास लाइसेंस नहीं होता। ये ऑफिशियली इन गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं। इनपर गोल्डन रंग से नंबर लिखे जाते हैं। साथ ही इसपर अशोक चक्र बना होता है।

Published / 2022-05-19 16:44:38
गुड न्यूज... केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया 5जी वॉइस और वीडियो कॉल

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को आईआईटी मद्रास में 5जी कॉल का सफल परीक्षण किया। वीडियो और वॉइस कॉल कर उन्होंने 5जी कॉल का टेस्ट किया। बता दें कि इसे भारत में ही डिजाइन और विकसित किया गया है। सफल परीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री ने कहा, ह्यहमें आईआईटी मद्रास टीम पर गर्व है, जिसने 5जी टेस्ट पैड को विकसित किया है, जो संपूर्ण 5जी विकास पारिस्थितिकी तंत्र और हाइपरलूप पहल को बड़े अवसर प्रदान करेगा। रेल मंत्रालय हाइपरलूप पहल का पूरा समर्थन करेगा। गौरतलब है कि भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के रजत जयंती समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा था कि अगले डेढ़ दशकों में 5ॠ से देश की अर्थव्यवस्था में 450 अरब डॉलर का योगदान होने वाला है और इससे देश की प्रगति और रोजगार निर्माण के अवसर को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के संपर्क यानी कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी। इस दौरान पीएम मोदी ने आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में कुल आठ संस्थानों द्वारा बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित 5जी टेस्ट बेड की भी शुरूआत की। इसके अलावा उन्होंने एक डाक टिकट भी जारी किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ह्यमुझे देश को अपना, खुद से निर्मित 5जी टेस्ट बेड राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला है। ये दूरसंचार क्षेत्र में क्रिटिकल और आधुनिक टेक्नॉलॉजी की आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक अहम कदम है। मोदी ने कहा कि 5जी के रूप में जो देश का अपना 5जी मानदंड बनाया गया है, वह देश के लिए बहुत गर्व की बात है और यह देश के गांवों में 5जी प्रौद्योगिकी पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, 21वीं सदी के भारत में कनेक्टिविटी, देश की प्रगति की गति को निर्धारित करेगी। इसलिए हर स्तर पर कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाना ही होगा। पीएम मोदी ने कहा कि 5जी प्रौद्योगिकी देश के शासन में, जीवन की सुगमता में और व्यापार की सुगमता में सकारात्मक बदलाव लाने वाली है तथा इससे खेती, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और हर क्षेत्र में प्रगति को बल मिलेगा। जल्द 5जी बाजार में आये : मोदी- प्रधानमंत्री ने कहा कि जल्द से जल्द 5जी बाजार में आए, इसके लिए सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, इस दशक के अंत तक 6जी सेवा आरंभ हो पाए, इसके लिए एक कार्य बल काम करना शुरू कर चुका है। बता दें कि 5जी से जुड़ी इस परियोजना में भाग लेने वाले अन्य संस्थानों में आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर, आईआईएस बैंगलोर, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (एसएएमईईआर) और सेंटर आॅफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी (सीईडब्लूआईटी) शामिल हैं।

Published / 2022-05-17 08:24:36
TRAI की रजत जयंती पर पीएम ने जारी किया डाक टिकट, बोले- 6G की ओर बढ़ रहा देश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को रेगुलेटरी ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) के रजत जयंती समारोह में शामिल हुए। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर एक डाक टिकट भी किया। पीएम मोदी ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में आठ संस्थानों की बहु-संस्थान सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित 5जी टेस्ट बेड का भी शुभारंभ किया। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण के रजत जयंती समारोह के मौके पर बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ये सुखद सहयोग है कि TRAI ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। आज देश आजादी के अमृत काल में अगले 25 वर्ष के रोड मैप पर काम कर रहा है। मुझे देश को खुद से निर्मित 5G-Testbed राष्ट्र को समर्पित करने का अवसर मिला है। आज देश आजादी के अमृत काल में अगले 25 साल के रोड मैप पर काम कर रहा है। ये टेलीकॉम सेक्टर में क्रिटिकल और आधुनिक टेक्नोलाजी की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम है। पीएम मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता और स्वस्थ स्पर्धा कैसे समाज में, अर्थव्यवस्था में गुणात्मक प्रभाव पैदा करती है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा टेलिकॉम सेक्टर है। 2G काल की निराशा, हताशा, करप्शन, पॉलिसी पैरालिसिस से बाहर निकलकर देश ने अब 5G और 6G की तरफ तेजी से कदम बढ़ाए हैं। पीएम ने कहा कि 2014 से पहले भारत में 100 ग्राम पंचायतें भी ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी से नहीं जुड़ी थीं। आज हम करीब पौने दो लाख ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचा चुके हैं। कुछ समय पहले सरकार ने देश के नक्सल प्रभावित अनेक जनजातीय जिलों में 4जी सुविधा पहुंचाने की बड़ी शुरुआत की है। बीते वर्षों में सरकार जिस तरह नई सोच और एप्रोच के साथ काम कर रही है। बता दें कि ट्राई की स्थापना 1997 में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण अधिनियम, 1997 के माध्यम से हुई थी। जिसके 25 साल पूरे हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने आईआईटी मद्रास के नेतृत्व में विकसित 5G टेस्ट बेड का शुभारंभ किया है। इस प्रोजेक्ट में आईआईटी मद्रास के साथ आईआईटी दिल्ली, आईआईटी हैदराबाद, आईआईटी बॉम्बे, आईआईटी कानपुर, IISc बैंगलोर, सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च और सेंटर आफ एक्सीलेंस इन वायरलेस टेक्नोलॉजी शामिल हैं।

Published / 2022-05-16 16:39:19
…आखिर क्यों बच्चों को जन्म देने के बाद खुद को खत्म कर लेती है मादा ऑक्टोपस

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मादा ऑक्टोपस कभी भी अपने बच्चों को नहीं देख पाती। वह अंडे देने के बाद आत्महत्या कर लेती है। वह आत्महत्या का जो तरीका चुनती है वो और भी ज्यादा रोंगटे खड़े कर देने वाला है। यह दावा ऑक्टोपस पर हुई हालिया रिसर्च में किया गया है। रिसर्च करने वाली शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, मादा ऑक्टोपस अंडे देने के बाद खुद को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू कर देती है, जानिए, ऐसा क्यों और कैसे होता है। शोधकर्ताओं का कहना है, मादा ऑक्टोपस अंडे देने के बाद धीरे-धीरे भोजन लेना बंद कर देती है। खुद को नुकसान पहुंचाने लगती है। शरीर से स्किन को नोचना शुरू कर देती है। अपने टेन्टेकल्स के ऊपरी हिस्से को काट देती है। जब तक इसके बच्चे अंडे से बाहर निकलते हैं जब तक मादा ऑक्टोपस की मौत हो चुकी होती है। सबसे चौंकाने वाली बात है कि कुछ ही समय बाद बच्चों के पिता यानी नर ऑक्टोपस की मौत भी हो जाती है। शोधकर्ताओं का कहना है, नर और मादा ऑक्टोपस संभोग करते हैं। इसके बाद मादा ऑक्टोपस के हार्मोंस में कोलेस्ट्रॉल से जुड़े बायोकेमिकल पाथवेज में बदलाव होता है। इनके जीवन में भी कोलेस्ट्रॉल अहम रोल निभाता है। इनके शरीर में ऑप्टिक ग्लैंड होती है। नर और मादा के बीच मेटिंग के बाद यह ग्लैंड सेक्स हॉर्मोन, इंसुलिन और कोलेस्ट्रॉल को अधिक बनाने लगती है। यही तीनों मॉलिक्यूल ऑक्टोपस की मौत की वजह बनते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक, ऑक्टोपस के शरीर में जब ये बदलाव होते हैं तो वो पागलों की तरह व्यवहार करने लगते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाने लगते हैं। मौत से पहले इनका व्यवहार बदला-बदला नजर आता है। आसान भाषा में समझें तो आंखों के बीच मौजूद ऑप्टिक ग्रंथि ही ऑक्टोपस की समय से पहले से मौत के लिए जिम्मेदार होती है। साइंसअलर्ट की रिपोर्ट में शिकागो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है, अगर ऑक्टोपस के शरीर से इस ग्रंथि को हटा दिया जाए तो इतनी जल्दी उसकी मौत नहीं होगी। वह अंडे देने के बाद भी कई महीनों तक जीवित रह सकेगी। रिसर्च में यह साबित भी हुआ है।

Published / 2022-05-13 15:44:44
एलन मस्क बोले- ट्वीटर डील पर फिलहाल रोक... जानिए क्या है वजह?

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कंपनी टेस्ला के उएड एलन मस्क ने हाल ही में ट्विटर का सौदा किया था लेकिन अब इससे जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। एलन मस्क ने अब नया ट्वीट कर जानकारी दी है कि ट्विटर की खरीद संबंधी 44 अरब डॉलर के सौदे को अस्थायी तौर पर रोक दिया है। ट्विटर की डील को रोकने के पीछे का कारण माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी या स्पैम अकाउंट्स की लंबित जानकारी को बताया जा रहा है। मस्क ने ट्वीट किया कि यह गणना बताती है कि प्लेटफॉर्म पर फर्जी या स्पैम अकाउंट्स की संख्या पांच फीसदी से कम है। कुछ दिन पहले ही ट्विटर ने कहा था कि पहली तिमाही के दौरान इसके मोनेटाइजेबल दैनिक सक्रिय यूजर्स में फर्जी या स्पैम अकाउंट्स की संख्या पांच फीसदी से कम रही। सोशल मीडिया कंपनी के पहली तिमाही में 22.90 करोड़ यूजर्स ऐसे थे जिनको विज्ञापन मिले थे। बता दें कि ट्विटर के सबसे बड़े शेयरधारक मस्क ने पिछले महीने 44 अरब डॉलर में इसको खरीदने की घोषणा की थी। इसके लिए उन्होंने कोष जुटाना भी शुरू कर दिया था।

Published / 2022-05-13 04:24:32
हमारी आकाशगंगा के केंद्र में दिखा विशाल ब्लैक होल, इसका आकार कर रहा हैरान

एबीएन नॉलेज डेस्क। अंतरिक्ष एक पहेली है और विज्ञान की इतनी प्रगति के बावजूद इसके बहुत से ऐसे सवाल है जो अभी भी अनसुलझे हुए हैं। अंतरिक्ष को जानने के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक दिन रात रिसर्च में लगे हुए हैं। इस बीच गुरुवार को खगोलविदों ने अंतरिक्ष को लेकर एक बड़ी जानकारी दी है। वैज्ञानिकों के दावा किया कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में एक विशाल ब्लैकहोल है। इसकी घोषणा एक स्वतंत्र एजेंसी नेशनल साइंस फाउंडेशन की तरफ से की गई है। अंतरिक्ष की जानकारी तलाशने वाले खगोलविदों ने कहा कि हमारी आकाश गंगा समेत अंतरिक्ष में मौजद सभी आकाश गंगाओं के केंद्र में एक विशाल ब्लैक होल है। वैज्ञानिकों ने अपनी आकाश गंगा में एक विशाल ब्लैक होल की तस्वीर का दावा किया हालांकि यह छवि अस्पष्ट है.₹। ब्लैक होल के चारों तरफ अंगूठी की तरह आकृति : ब्लैक होल के बारे में जानकारी देते हुए टक्सन में यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के एस्ट्रोफिजिस्ट फेरियल ओजेल ने कहा कि यह छवि ब्लैक होल के चारों तरफ एक चमकती हुई अंगूठी की तरह है। मिल्की वे ब्लैक होल को धनु A कहा जाता है। उन्होंने बताया कि यह ब्लैक होल धनु और स्कॉर्पियस नक्षत्रों की सीमा के करीब है। वैज्ञानिक के मुताबित आकाशगंगा के केंद्र में मौजूद ब्लैक होल हमारे सूर्य की तलुना में 4 मिलियन यानि 40 लाख गुना अधिक विशाल है। वैज्ञानिकों द्वारा किसी ब्लैकहोल की यह पहली तस्वीर नहीं है। इससे पहले इसी समूह ने 2019 में एक ब्लैकहोल की तस्वीर को जारी किया था और यह 53 मिलियन प्रकाश वर्ष दूर एक आकाशगंगा में मौजूद था। वैज्ञानिकों ने जिस मिल्की वे ब्लैकहोल की जानकारी दी है, वह करीब 27 हजार प्रकाश वर्ष दूर है।

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