Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...
लाइव: 33
होम ई-पेपर देश झारखंड खेल समाचार राज काज कानून व्यवस्था करियर बिजनेस वर्ल्ड हेल्थ विचार ज्ञान विज्ञान समाज वन और पर्यावरण मनोरंजन बिहार विज्ञापन

ज्ञान विज्ञान

View All
5जी स्पेक्ट्रम : 7वें दिन भी नीलामी जारी, अबतक 1.50 लाख करोड़ रुपए की बोलियां
Published / 2022-08-01 07:37:04
5जी स्पेक्ट्रम : 7वें दिन भी नीलामी जारी, अबतक 1.50 लाख करोड़ रुपए की बोलियां

एबीएन नॉलेज डेस्क। भारत में 5जी स्पेक्ट्रम की पहली नीलामी सोमवार को सातवें दिन में प्रवेश कर गई। इस दौरान जियो और एयरटेल समेत कई कंपनियां उत्तर प्रदेश पूर्वी सर्किल के लिए 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए बोली लगा रही हैं। इससे पहले रविवार को बोली लगाने के छठे दिन कुल स्पेक्ट्रम बिक्री 1.50 लाख करोड़ रुपए के मील के पत्थर को पार कर गई थी। अत्यधिक उच्च गति की इंटरनेट सेवा देने में सक्षम 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के छह दिनों में अब तक 1,50,130 करोड़ रुपए की बोलियां मिल चुकी हैं। रविवार को आयोजित सात नए दौर की बोली में 163 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई। दूरसंचार विभाग ने इस नीलामी में कुल 4.3 लाख करोड़ रुपए मूल्य के 72 गीगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की बिक्री की पेशकश की है। इस नीलामी में रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया के अलावा अडाणी एंटरप्राइजेज भी शिरकत कर रही है। सोमवार को नीलामी का सातवां दिन है और फिलहाल 38वें दौर की बोली चल रही है। सूत्रों ने कहा कि शनिवार को मांग में अपेक्षाकृत नरमी के बाद उप्र पूर्वी सर्किल, जिसमें लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर शामिल हैं, ने 1800 मेगाहर्ट्ज के लिए एक बार फिर से बोली लगाने में तेजी देखी। उप्र पूर्वी में 10 करोड़ से अधिक मोबाइल ग्राहक हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान रिलायंस जियो और भारती एयरटेल जैसी कंपनियों के बीच स्पेक्ट्रम के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा चल रही है। दूरसंचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले दिनों कहा था कि 5जी नीलामी इस बात को रेखांकित करती है कि उद्योग विस्तार करना चाहता है और विकास के चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम के लिए निर्धारित आरक्षित मूल्य उचित है और यह नीलामी के परिणाम से साबित होता है।

बिहार के 207 और झारखंड के 1615 गांवों में 4 जी सेवा शीघ्र
Published / 2022-07-30 13:06:10
बिहार के 207 और झारखंड के 1615 गांवों में 4 जी सेवा शीघ्र

टीम एबीएन, रांची/पटना। केंद्र सरकार द्वारा देश के विभिन्न राज्यों के गांवों में 4जी मोबाइल सेवा बहाल करने के लिए 26,316 करोड़ रूपए की लागत वाली एक परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है। इस परियोजना के तहत दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में अवस्थित देश के 24,680 वंचित गांवों में 4जी मोबाइल सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इनमें बिहार राज्य के 14 जिलों के 207 गांव तथा झारखंड राज्य के 23 जिलों के 1615 गांव शामिल हैं। केंद्र सरकार की इस परियोजना के तहत बिहार राज्य के औरंगाबाद जिला का एक गांव, बांका के चार गांव, बेगूसराय के दो गांव, गया के 12 गांव, जमुई के 13 गांव, कैमूर-भभुआ के 125 गांव, लखीसराय का एक गांव, मुंगेर के चार गांव, नवादा के 11 गांव, पूर्वी चंपारण के तीन, पश्चिम चंपारण के पांच गांव, पटना के 11 गांव, रोहतास के 14 एवं सीतामढ़ी के 1 गांव सहित 14 जिलों के 207 गांवों में 4जी सर्विस की सुविधा बहाल की जाएगी। इसी तरह झारखंड राज्य के बोकारो 27 गांव, चतरा के 161 गांव, देवघर के 33 गांव, धनबाद एक गांव दुमका का 117 गांव, गढ़वा का 28 गांव, गिरीडीह के 5 गांव, गोड्डा के 32 गांव, गुमला के 91 गांव, हजारीबाग के 30 गांव, जामताड़ा का एक गांव, खूंटी के 88 गांव, कोडरमा के 30 गांव, लातेहार के 81 गांव, लोहरदग्गा के 28 गांव पाकुड़ के छ: गांव, पलामू के 136 गांव, पश्चिम सिंहभूम के 177 गांव, पूर्वी सिंहभूम के 279 गांव, रामगढ़ के 18 गांव, रांची के 6 गांव, साहिबगंज के 96 गांव, सरायकेला-खरसांवा के 35 गांव और सिमडेगा का 109 गांव सहित 23 जिलों के 1615 गांवों में 4जी सर्विस की सुविधा बहाल की जाएगी। यह परियोजना ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के सरकार के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना से मोबाइल ब्रॉडबैंड के माध्यम से विभिन्न ई-गवर्नेंस सेवाएं बैंकिंग सेवाएं टेली-मेडिसिन टेली-एजुकेशन इत्याादि सुलभ कराने को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन होगा।

दो पिन तो ‘ठंडा-गरम’ होता है, लेकिन तीसरी पिन क्या काम है...
Published / 2022-07-30 13:05:41
दो पिन तो ‘ठंडा-गरम’ होता है, लेकिन तीसरी पिन क्या काम है...

एबीएन नॉलेज डेस्क। आप अपने घरों में देखते हैं और तमाम बिजली के उपकरणों को जब घर में इस्तेमाल करते होंगे तो देखते होंगे कि उनके यूज के लिए आप जब उनके प्लग्स को शाकेट में लगाते हैं तो ये आमतौर पर तीन पिन वाले होते हैं। ज्यादातर बिजली के प्लग तीन पिन वाले होते हैं। क्या आपने ध्यान दिया कि ऐसा क्यों होता है। हालांकि कभी आपने इन्हें अगर खोलकर देखा हो तो इसके तीन पिनों में तीन तार जुडे़ होते हैं। इन तीन पिनों दो का आकार तो बराबर और एक जैसा होता है लेकिन तीसरी पिन इन दो पिनों की तुलना में कुछ मोटी होती है। इस पिन को सामान्य तौर पर एक हरे रंग के तार से जोड़ दिया जाता है। इस तार को अर्थ का तार कहते हैं। क्या आप जानते हैं कि प्लग में इस तीसरी पिन का काम क्या होता है। तीसरी पिन और हरे रंग के तार में सामान्य स्थितियों में कोई भी बिजली की धारा नहीं बहती है। इस तार का एक सिरा जिस बिजली के उपकरण का आप इस्तेमाल कर रहे होते हैं, उससे जुड़ा होता है। और हर रंग के तार वाला पिन प्लग के जरिए जिस प्वाइंट से जुड़ता है वो उसे अर्थिंग या पृथ्वी से जोड़ देता है। इसे इलैक्ट्रिक ग्राउंडिंग भी कहते हैं। तब बिजली का झटका लगता है : कभी-कभी ऐसा होता है कि विद्युत उपकरण में कोई दोष हो जाता है तब इस उपकरण में बिजली की धारा प्रवाहित होने लगती है। ऐसी स्थिति में अगर कोई उस उपकरण को छू ले तो उसे बिजली का झटका लगेगा। बिजली के झटके की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्य के शरीर में से कितनी बिजली की धारा किस मात्रा में प्रवाहित हो रही है। अगर उसके हाथ भीगे हों तो शरीर से अधिक बिजली की धारा प्रवाहित होगी। इसका कारण है कि गीली त्वचा सूखी त्वचा की तुलना में बिजली की सुचालक होती है और ऐसी स्थिति में व्यक्ति को भयानक झटका लगेगा। इससे उसकी मृत्यु भी हो सकती है। तीसरी पिन के जरिए अर्थिंग का काम : तीसरी पिन का प्रयोग या अर्थिंग एक ऐसा तरीका है जो दोषी उपकरणों से लगने वाले बिजली के झटकों के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करता है। मेंस से चलने वाली सभी उपकरणों के लिए ये बहुत जरूरी है कि उनका धरती के साथ उचित तौर पर संबंध स्थापित करा दिया जाए, प्लग की तीसरी पिन यही काम करती है। तो नहीं लगेगा झटका : यदि बिजली की तीसरी पिन के जरिए अर्थिंग सही तरीके से हो रही हो तो बिजली उपकरण के खराब होने पर अगर उसकी बॉडी में करंट प्रवाहित भी होने लगता है तो बिजली का झटका लगेगा भी तो ज्यादा खतरनाक नहीं होगा या झटका लगेगा ही नहीं। इस तरह बिजली प्लग की तीसरी पिन आपको सबसे ज्यादा सुरक्षा देने वाली होती है।

अब गूगल मैप्स पर दिखेंगी भारत में सड़कों की वास्तविक तस्वीरें
Published / 2022-07-28 08:49:20
अब गूगल मैप्स पर दिखेंगी भारत में सड़कों की वास्तविक तस्वीरें

एबीएन नॉलेज डेस्क। गूगल मैप्स पर अब भारत के 10 शहरों में सड़कों और गलियों की वास्तविक तस्वीरें देखी जा सकेंगी। प्रौद्योगिकी कंपनी ने इसके लिए दो स्थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी की है। सरकार ने पूर्व में सुरक्षा कारणों से सड़कों और अन्य जगहों की व्यापक फलक वाली तस्वीरें दिखाने की अनुमति नहीं दी थी। अबतक गूगल मैप्स पर उपग्रह से ली गयी तस्वीरें होती थीं, लेकिन अब उसपर वास्तविक तस्वीरें होंगी। गूगल ने बुधवार को बयान में कहा कि जेनेसिस इंटरनेशनल और टेक महिंद्रा की भागीदारी के साथ सड़कों, गलियों की वास्तविक तस्वीर देखने की सेवा शुरू की गई है। बयान के अनुसार, गूगल मैप्स पर आज से सड़क की तस्वीर उपलब्ध होगी। यह सेवा बेंगलुरु, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, पुणे, नासिक, वडोदरा, अहमदनगर और अमृतसर में होगी। गूगल, जेनेसिस इंटरनेशनल और टेक महिंद्रा की 2022 तक इस सेवा का 50 से अधिक शहरों में विस्तार करने की योजना है। इसके साथ गूगल मैप्स यातायात प्राधिकरणों की तरफ से जारी गति सीमा के आंकड़े भी दिखाएगी। गूगल ने "ट्रैफिक लाइट" के समय को बेहतर ढंग से बनाने के मॉडल को लेकर बेंगलुरु यातायात पुलिस के साथ अपनी साझेदारी की भी घोषणा की है। बयान में कहा गया है, यह स्थानीय यातायात प्राधिकरण को प्रमुख चौराहों पर सड़क की भीड़ का प्रबंधन करने में मदद कर रहा है... इस व्यवस्था का पूरे शहर में विस्तार किया जाएगा। गूगल स्थानीय यातायात अधिकारियों के साथ साझेदारी में कोलकाता और हैदराबाद में भी इसका विस्तार करेगी। इसके अलावा, वैश्विक कंपनी ने वायु की गुणवत्ता के बारे में जानकारी देने के लिये केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ भी गठजोड़ की घोषणा की है।

खतरे में जिंदगी... धरती पर गिरेगा चीन का "बेकाबू रॉकेट"
Published / 2022-07-28 05:54:54
खतरे में जिंदगी... धरती पर गिरेगा चीन का "बेकाबू रॉकेट"

एबीएन नॉलेज डेस्क। चीन की एक लापरवाही धरती के लोगों को मुश्किल में डाल सकती है। बता दें कि, चीन ने लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट लॉन्च किया है, जिसका एक हिस्सा वापस पृथ्वी पर गिरेगा और वो धरती की तरफ तेजी बढ़ रहा है। चीन ने फैसला किया है कि लॉन्ग मार्च 5बी रॉकेट का ये हिस्सा धरती पर गिरेगा और ये कहां गिरेगा इसके ऊपर चीन का कोई कंट्रोल नहीं है। ये तीसरी बार है कि जब चीन ने लॉन्च हुए रॉकेट के हिस्से को धरती पर गिराने का फैसला किया है। साल 2020 और 2021 वो पहले भी ऐसा कर चुका है। चीन का एक और रॉकेट बेकाबू होकर धरती पर गिरने वाला है। दुनिया चीन की इस लापरवाही से चिंतित है, कि आगे क्या होगा, कहां गिरेगी ये आफत। पिछले साल ही हिंद महासागर में एक ऐसा ही चीनी रॉकेट क्रैश हुआ था और उसके मलबे की वजह से पर्यावरण को खासा नुकसान हुआ था। विशेषज्ञों को चिंता सता रही है कि रविवार को चीन ने जो 21 टन का रॉकेट मार्च 5बी लॉन्च किया था, वो अब धरती के वातावरण में ब्लास्ट होने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक, धरती में दाखिल होते ही ये रॉकेट पूरी तरह से जल जाएगा। ये अचानक सतह पर आएगा और किसी अज्ञात जगह पर पूरी स्पीड से गिरेगा। इस बात की आशंका थोड़ी कम है कि इसका मलबा उस जगह पर गिरेगा जहां पर काफी आबादी है। हालांकि, विशेषज्ञों को इस बात की चिंता है कि चीन दुनिया के लिए लगातार खतरा की वजह बनता जा रहा है लेकिन उसे होश नहीं है कि वह क्या कर रहा है। चीन ने पिछले हफ्ते हैनान स्थित वेनचांग लॉन्च साइट से एक रॉकेट लॉन्च किया था। ये रॉकेट सौर ऊर्जा से चलने वाली नई लैब को लेकर रवाना हुआ था जिसमें वेनतियान एक्सपेरिमेंट मॉड्रयूल था। इसे चीन के तियांगॉन्ग स्पेस स्टेशन तक जाना था। मगर अब पिछले साल मई की ही तरह इस बार भी धरती पर क्रैश होने की आशंका है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के प्रशासक बिल नेल्सन ने चीन पर गैर-जिम्मेदाराना रवैये का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि चीन जिम्मेदारी से मानकों को नहीं मान रहा है और अंतरिक्ष के मलबे को लेकर बहुत ही लापरवाह है। उन्होंने कहा कि चीन रॉकेट के फिर से धरती में दाखिल होने वाले खतरों को कम नहीं कर पा रह है और न ही वो अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को लेकर पारदर्शी है। चीन का ये रॉकेट लॉन्चिंग के समय ही ब्लास्ट हो गया था। अब आने वाले दिनों में ये धरती का चक्कर लगाता रहेगा। इसके कुछ दिनों बाद ही ये सतह पर वापस लौटेगा। वहीं, चीन ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है कि वो अंतरिक्ष के कार्यक्रम को लेकर गैरजिम्मेदार है। चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि रॉकेट की वजह किसी को होने वाले नुकसान की आशंका बहुत कम है।

विज्ञान का चमत्कार : वैज्ञानिकों ने पहली बार घटाया चूहे की उम्र, अब इंसानों की बारी...
Published / 2022-07-27 05:28:10
विज्ञान का चमत्कार : वैज्ञानिकों ने पहली बार घटाया चूहे की उम्र, अब इंसानों की बारी...

एबीएन नॉलेज डेस्क। इंसानों में अमर होने की चाहत है और कोई भी इंसान बूढ़ा नहीं होना चाहता है। हर इंसान चाहता है कि वो कभी भी ना मरे, वो अमर हो जाए और दुनियाभर के वैज्ञानिक इस कोशिश में लगातार प्रयोग करते रहते है और पहली बार ऐसा हुआ है कि वैज्ञानिकों की एक टीम ने चूहों की उम्र घटाने में कामयाबी हासिल कर ली है और इसे विज्ञान का चमत्कार कहा जा रहा है। डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार वैज्ञानिकों की एक टीम ने चूहों की कोशिकाओं को रीसेट करने में कामयाबी हासिल कर ली है, जिससे चूहों की उम्र कम हो गई है। हार्वर्ड के जीवविज्ञानी डॉ डेविड सिंक्लेयर के नेतृत्व में किए गए अभूतपूर्व शोध से मनुष्यों में बढ़ती उम्र को उलटने की दौड़ पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की संभावना है। वैज्ञानिकों की टीम ने प्रोटीन का उपयोग करके अविश्वसनीय परिणाम प्राप्त किए है, जिससे एक वयस्क कोशिका को एक स्टेम सेल में बदलने में कामयाबी मिली है। वैज्ञानिकों ने अपने इस प्रयोग को लेकर कहा है कि अब प्रभावी रूप से घड़ी की सुइयों को वापस घुमा सकते हैं और उम्र बढ़ाने वाली कोशिकाओं को उसके छोटे आकार में रीसेट कर सकते हैं। डॉ सिनक्लेयर ने सेलुलर कायाकल्प को "स्थायी रीसेट" के रूप में वर्णित किया है और उनका मानना है कि वही वैज्ञानिक सिद्धांत मानव कोशिकाओं पर लागू किया जा सकता है। उन्होंने सीएनएन से बात करते हुए कहा है कि, जहां तक हम बता सकते हैं, और हमें लगता है कि यह एक सार्वभौमिक प्रक्रिया हो सकती है, जिसे हमारी उम्र को रीसेट करने के लिए पूरे शरीर में लागू किया जा सकता है। डॉ सिनक्लेयर और उनकी टीम ने पहले चूहों में क्षतिग्रस्त रेटिना को युवा चूहों के ब्लड प्लाज्मा को ट्रांसप्लांट करके उसे ठीक करने में कामयाबी हासिल की है। वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने इस प्रक्रिया से चूहों के सेल्स को बूढ़ा होने से रोकने में 54 प्रतिशत सफलता हासिल की है। डॉ सिनक्लेयर को पूरा विश्वास है कि बढ़ती उम्र को पलटना भी कई घातक बीमारियों को ठीक करने की कुंजी है और उन्हें विश्वास है कि ये नई वैज्ञानिक तकनीकें इंसानों को लंबा और स्वस्थ जीवन जीने में सक्षम बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास 70 साल की उम्र में कैंसर, 80 की उम्र में हृदय रोग और 90 की उम्र में भूलने की बीमारी को ठीक करने की नई तकनीक हासिल करने की क्षमता है और इसकी वजह से जो हजारों जाने जाती हैं, उसे बचाया जा सकता है। हालांकि, कुछ और रिसर्चर्स ऐसे हैं, जिन्होंने चूहों की उम्र को पलटने में कामयाबी हासिल की है और उन्हीं वैज्ञानिकों में से एक वैज्ञानिक हैं, जापान के बायोमेडिकल वैज्ञानिक डॉ शिन्या यामानाका, जिन्होंने वयस्क चूहों की त्वचा कोशिकाओं को उनके मूल पैटर्न में उनके एपिजेनेटिक निशान को प्रभावी ढंग से रीसेट करके स्टेम कोशिकाओं के लिए सफलतापूर्वक फिर से प्रोग्राम किया है। आपको बता दें कि एपिजेनेटिक परिवर्तन ही उम्र बढ़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं और जैसे-जैसे हम बड़े होते जाते हैं, हमें बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं। इस सफलता ने जापानी वैज्ञानिक डॉ यामानाका को नोबेल पुरस्कार दिलाया था और स्टेम सेल को अब "यामानाका कारक" के रूप में जाना जाता है। वैज्ञानिक सिनक्लेयर के प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले व्हिटनी केसी ने कहा कि वैज्ञानिक सिनक्लेयर के शोध से पता चलता है कि आप जीवन को लंबे समय तक छोटा बनाने के लिए उम्र बढ़ने को बदल सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब वह दुनिया को बदलना चाहते हैं और उम्र बढ़ने को एक बीमारी बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि, आधुनिक चिकित्सा पद्धति से बीमारी का इलाज किया जाता है, जबकि बीमारी क्यों हुई है, इसका इलाज नहीं किया जाता है, और ज्यादातर बीमारियों की असल वजह उम्र का बढ़ना है। वहीं, सिनक्लेयर ने कहा कि हम जानते हैं कि जब हम चूहे में मस्तिष्क जैसे अंग की उम्र उलट देते हैं, तो उम्र बढ़ने के रोग दूर हो जाते हैं। याददाश्त वापस आती है, कोई और मनोभ्रंश नहीं होता है। उन्होंने कहा कि, मेरा मानना है कि भविष्य में, उम्र बढ़ने में को देर तक रोकना और फिर उसे उलटना, उन बीमारियों के इलाज का सबसे अच्छा तरीका होगा जो हम में से अधिकांश को पीड़ित करते हैं।

5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू, रेस में जियो, आइडिया, वोडाफोन और अडानी ग्रुप
Published / 2022-07-26 07:48:06
5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी शुरू, रेस में जियो, आइडिया, वोडाफोन और अडानी ग्रुप

एबीएन नॉलेज डेस्क। 5जी नेटवर्क के लिए आज देश में 5जी स्पेक्ट्रम की नीलामी हो रही है। अब जल्द ही आपको 5जी की सुविधा अपने मोबाइल फोन पर मिलेगी। 5जी की नीलामी में देश की चार बड़ी कंपनियां हिस्सा ले रही हैं, ये सभी कंपनियां 72 गीगाहर्ट्ज की रेडियोवे्स को हासिल करने के लिए 4.3 लाख करोड़ की नीलामी में हिस्सा ले रही हैं। नीलामी की प्रक्रिया आज सुबह 10 बजे से शुरू हो गई है। हालांकि इस 5जी की बिक्री प्रक्रिया को पूरा होने में कई दिन लग सकते हैं। इस नीलामी में अडानी इंटरप्राइजेस, भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया हिस्सा ले रहे हैं।

चीन ने किया अपने अंतरिक्ष केंद्र के पहले लैब मॉड्यूल का सफल प्रक्षेपण
Published / 2022-07-24 16:59:53
चीन ने किया अपने अंतरिक्ष केंद्र के पहले लैब मॉड्यूल का सफल प्रक्षेपण

एबीएन नॉलेज डेस्क। चीन ने अपने निर्माणाधीन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लैब मॉड्यूल का रविवार को सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। चीन की अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार, दक्षिणी द्वीपीय प्रांत हैनान के तट स्थित वेनचांग अंतरिक्ष यान प्रक्षेपण स्थल से वेन्तियान को लेकर लॉन्ग मार्च-5बी वाई3 रॉकेट रवाना हुआ। नया मॉड्यूल मूल मॉड्यूल के काम न करने की स्थिति में उसकी जगह काम करेगा और साथ ही तियांगोंग अंतरिक्ष केंद्र में शक्तिशाली वैज्ञानिक प्रयोगशाला के तौर पर भी काम करेगा। चीन अभी इस अंतरिक्ष केंद्र का निर्माण कर रहा है। सरकारी पीपुल्स डेली अखबार की खबर के मुताबिक, चीन लैब मॉड्यूल का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण करने के साथ ही अपने अंतरिक्ष केंद्र का निर्माण जल्द ही पूरा करने वाला है।

गाड़ी के टायरों पर क्यों बने होते हैं रबर के "कांटे", यहां जानें...
Published / 2022-07-19 05:45:21
गाड़ी के टायरों पर क्यों बने होते हैं रबर के "कांटे", यहां जानें...

एबीएन नॉलेज डेस्क। बाइक और कारों के टायरों को ध्यान से देखेंगे तो पाएंगे कि इन पर रबर के कांटे लगे हुए नजर आएंगे। इसे ज्यादातर लोग मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। चौंकाने वाली बात है कि यह कोई निर्माण से जुड़ी गड़बड़ी नहीं है। इसे योजना के तहत बनाया गया है। टायरों में रबर के कांटों को खास मकसद से बनाया गया। जानिए, इन्हें क्या कहते हैं और इनका काम क्या है… टायर पर मौजूद इन रबर के कांटों को वेंट स्पिउज के नाम से जाना जाता है। इसका मतलब होता है कि किसी चीज का बाहर की ओर निकला हुआ होना। टायरों के काम करने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए इन्हें बनाया जाता है। आसान भाषा में समझें तो गाड़ी चलने के दौरान टायर पर दबाव बनता है, इस दबाव को कम करने के लिए इसे निर्माण के दौरान बनाया जाता है। इसे बनाने वाली कंपनियां जब टायर का निर्माण करती हैं तब रबर के इन नुकीले हिस्सों को टायर में इंजेक्ट किया जाता है। ऐसा क्यों किया जाता है, अब इसकी एक वजह और भी जान लीजिए। टायर के निर्माण के दौरान इनमें बुलबुले बनने का खतरा रहता है। अंदरूनी तौर पर ऐसा होने पर टायर कमजोर हो सकता है, इसलिए इन्हें लगाकर इसका खतरा कम किया जाता है। अगर आप कोई टायर खरीद रहे हैं और उनमें ये कांटे मौजूद हैं तो इसका मतलब है वो अच्छी क्वालिटी का है। इसलिए अगली बार आप ऐसा टायर खरीदते हैं तो इसका मतलब है कि ये फायदे का सौदा है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding