एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 राजनीतिक मायनों से झारखंड में बहुत हलचल भरी रही। जहां लिफाफा प्रकरण ने मौजूदा राज्य सरकार को हिला कर रख दिया, तो वहीं कांग्रेस सांसद धीरज साहू के घर से मिले 351 करोड़ रुपये कैश ने पूरे देश-विदेश का ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं, 4 साल बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष मिला तो वहीं बेबी देवी के सिर पर जीत का ताज सजा। आइये जानते हैं उन मुद्दों को जो इस साल चर्चा का विषय बना रहा।
प्रदेश की भाजपा सरकार ने सीएम हेमंत सोरेन पर पत्थर खनन मामले को लेकर सवाल उठाया था। इसके साथ ही उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द किए जाने की मांग की थी, जिसे लेकर राज्यपाल को लिफाफा भी भेजा गया था, जिसे राज्यपाल ने समीक्षा के लिए रखते हुए कहा था कि अभी लिफाफा नहीं खुला है। ऐसे में जहां विपक्ष हेमंत सरकार को गिराने में लगी हुई थी तो वहीं अपने कुछ विश्वसत नेताओं की निगरानी में हेमंत अपने सभी विधायकों को लेकर छत्तीसगढ़ रवाना हो गये थे और करीब हफ्तेभर तक वहीं के पांच सितारा रिसॉर्ट में सभी विधायकों को ठहराया गया था।
साल 2023 में बाबूलाल मरांडी को भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष की कमान सौंपी। इसी के साथ पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया। पूर्व मंत्री अमर बाउरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया। बता दें कि पहले नेता प्रतिपक्ष के लिए बाबूलाल मरांडी का नाम प्रस्तावित था, लेकिन कुछ वजहों की वजह से आखिर चार साल बाद नेता प्रतिपक्ष का पद भरा गया और अमर बाउरी को चुना गया।
झारखंड के स्वर्गीय शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के निधन के बाद डुमरी विधानसभा में उपचुनाव किया गया, जिसमें उनकी पत्नी बेबी देवी को चुनाव में उतारा गया और इस चुनाव में आजसू प्रत्याशी यशोदा देवी को हराते हुए बेबी देवी के सिर पर जीत का ताज सजा।
कांग्रेस नेता धीरज साहू की चर्चा तो मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर बनी रही। इतना ही नहीं आईटी रेड में अलमारी में मिले 351 करोड़ कैश की तस्वीर तो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुई। खबर तब सुर्खियों में बन गयी जब रेड के लिए तीन दर्जन गई नोट काउंटिंग मशीन भी नोटों की काउंटिंग के लिए कम पड़ गयी।
एबीएन नॉलेज डेस्क। एक नये अध्ययन में यह पाया गया है कि सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करने से उपयोगकर्ताओं को काम का दबाव कम महसूस होता है और उनमें बेचैनी या घबराहट भी कम होती है।
सोशल मीडिया का उपयोग 30 मिनट तक कम करके मानसिक स्वास्थ्य को दुरूस्त करने के साथ ही नौकरी के प्रति संतुष्टि की भावना में सुधार लाने में मदद मिलती है जबकि इसका लगातार उपयोग करने वाले लोगों को अपने काम पर ध्यान लगाने में मुश्किल होती है।
एक नये अध्ययन में यह पाया गया है कि सोशल मीडिया का कम इस्तेमाल करने से उपयोगकर्ताओं को काम का दबाव कम महसूस होता है और उनमें बेचैनी या घबराहट भी कम होती है।
जर्मनी में रुर यूनिवर्सिटी, बोचम और जर्मन सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ के अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि सोशल मीडिया से दूरी बनाने से लोगों को अपना काम करने का अधिक वक्त मिलता है और उन्हें ध्यान भटकने की समस्या भी कम होती है।
पत्रिका बिहेवियर एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के लेखक जूलिया ब्रेलोव्स्किया ने कहा कि जो लोग सोशल मीडिया फीड पर नजर रखने के लिए अपना काम रोक देते हैं, उनके लिए अपने काम पर ध्यान केंद्रित करना और मुश्किल हो जाता है।
अध्ययन के लिए अनुसंधानकर्ताओं ने 166 लोगों को शामिल किया, जिनमें से सभी नौकरी करते थे और वे बिना काम के सोशल मीडिया पर हर दिन कम से कम 35 मिनट का वक्त बिताते हैं।
ब्रेलोव्स्किया ने कहा- इतने कम वक्त में भी हमने पाया कि जिन लोगों ने सोशल मीडिया पर हर दिन 30 मिनट से कम वक्त बिताया उनमें मानसिक स्वास्थ्य और नौकरी के प्रति संतुष्टि की भावना में सुधार आया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। आवरआल लुक को परफेक्ट बनाने के लिए आउटफिट, मेकअप और हेयरस्टाइल के अलावा नेल आर्ट भी खूबसूरती पर चार-चांद लगा देते हैं।
खासतौर पर इस वेडिंग सीजन में नेल आर्ट के जरिए आप अपनी खूबसूरती पर चार-चांद लगा सकते हैं। वैसे तो नेल आर्ट बहुत ही बारीकी से करवाने पड़ते हैं लेकिन आज आपको कुछ ऐसे डिजाइन्स दिखाते हैं जिन्हें आप इस वेडिंग सीजन ट्राई कर सकती हैं।
एबीएन नॉलेज डेस्क। साल 2023 कई खट्टे-मीठे, तीखे स्वाद देकर जा रहा है। इस साल गूगल पर सबसे ज्यादा जिस रेसिपी को लोगों ने सर्च किया वो थी सेक्स आन द बीच रेसिपी, जी हां ये वो ड्रिंक है जो इस साल लोग सबसे ज्यादा पीना और बनाना चाहते थे।
तो आप भी अगर नया साल आने से पहले ये रेसिपी जान लेंगे तो इस साल न्यू ईयर पार्टी में आप भी अपने मेहमानों को सेक्स आन द बीच ड्रिंक सर्व करेंगे। सेक्स आन द बीच एक पॉप्युलर कॉकटेल है जिसे बनाना आसान है और इसका स्वाद बहुत रेफ्रेशिंग होता है।
तो आप अगर इसे घर पर बनाना चाहते हैं तो आपका क्या सामग्री चाहिए और इसे बनाने का सही तरीका क्या है। आइये सब जानते हैं : सेक्स आन द बीच रेसिपी बनाने की सामग्री :
नोट : आप इसे गर्मी में ठंडा करने के लिए बार-आइस या क्रश की हुई बर्फ का उपयोग कर सकते हैं। यह कॉकटेल ठंडा और रेफ्रेशिंग है और इसका स्वाद बहुत शानदार होता है। कृपया ध्यान दें कि शराब की सेवा केवल आदृष्ट वयस्क उम्र के व्यक्तियों के लिए उचित है।
एबीएन नॉलेज डेस्क। विदेशी टनल एक्सपर्ट अर्नाल्ड डिक्स जितने बार भी टनल के अंदर गये और बाहर निकले, उतनी बार पास वापस स्थापित पूजा स्थल के आगे घुटनों पर बैठकर हाथ जोड़े और आंख बंद करके प्रार्थना की।
इन्हीं अमेरिकी एक्सपर्ट ने आते ही टनल के मुहाने से हटाये गये पूजा स्थल को वापस रखवाया था। कहा था कि हिमालय ने गुस्सा दिखाया है। उन्होंने मजदूरों को बंधक बनाया है। अब हिमालय ही जब चाहेगा, तब उनको छोड़ेगा।
हुआ भी ऐसा ही। अमेरिकी मशीन भी पहली बार किसी मिशन पर टूट गया और दरवाजे तक पहुंचकर भी सारे एक्सपर्ट लाचार हो गये थे। अमेरिकी टनल विशेषज्ञ ने कहा था कि उन्होंने मां काली से एक डील की है। शायद अब वे उस अध्यात्म अनुभव को साझा करेंगे।
आज भी अर्नाल्ड उस छोटे से चबूतरे वाले मंदिर के में देवी, भोलेनाथ और बाबा बौगनाथ की पूजा की और बहुत देर तक वहीं बैठे रहे।
सबसे अजूबा तब हुआ, जब इसी पूजा स्थल के पीछे चट्टान पर पानी की धारा निकल गयी और उससे बाबा भोलेनाथ की आकृति सी बन गयी। मौसम अचानक साफ हो गया। जबकि बारिश का अनुमान मौसम विभाग ने बता रखा था। उसे देखकर अर्नाल्ड ने कहा कि आज हिमालय और यहां के बाबा भोलेनाथ खुशखबरी देने वाले हैं।
एक दूसरे धर्म के प्रख्यात इंजीनियर द्वारा हिंदू धर्म की मान्यताओं को इस स्तर तक समझना और इज्जत देना काफी कुछ कह जाता है, जहां विज्ञान डगमगाता है। वहीं से आस्था की शुरूआत होती है। विज्ञान और धर्म विपरीत नहीं बल्कि पूरक है।
सभी 41 लोगों की सकुशल लौटे अब सरकार से कुछ उम्मीद कि अब हर मजदूर का 1 करोड़ का दुर्घटना इंश्योरेंस कंपलसरी हो ... और दूसरा पहाड़ों के मंदिर को धार्मिक स्थल रहने दें, पर्यटन स्थल न बनायें। प्रकृति से छेड़छाड़ कम से कम हो। और पहाड़ों के धार्मिक स्थान में रहने के होटल, घर आदि निर्माण न हों। लोग सुबह जाएं और वापस उसी दिन नीचे लौटें। बस मूलभूत सुविधा ही हो।
प्रकृति ने बता दिया है कि
हम सबको उसे मानना ही होगा।
एबीएन नॉलेज डेस्क। सूर्य के अध्ययन के लिए भेजे गये भारत के पहले अंतरिक्ष मिशन यान आदित्य एल-1 अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही अपने लक्षित पॉइंट तक पहुंच जायेगा। इसरो चीफ एस सोमनाथ ने इसकी जानकारी दी है।
इसरो चीफ ने कहा कि आदित्य सही रास्ते पर है और मुझे लगता है कि यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि संभव है कि सात जनवरी को आदित्य एल-1 अपना अंतिम मैनुवर पूरा कर एल-1 पॉइंट में दाखिल होगा।
बता दें कि आदित्य एल1 को बीती 2 सितंबर 2023 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। आदित्य एल-1 स्पेस यान करीब 15 लाख किलोमीटर की दूरी तय कर 125 दिनों में सूर्य के नजदीक स्थित लैग्रेजियन पॉइंट तक पहुंचेगा।
आदित्य एल1 लैग्रेजियन पॉइंट से सूर्य की तस्वीरें लेकर पृथ्वी पर भेजेगा। आदित्य एल1 की मदद से इसरो सूर्य के किनारों पर होने वाली हीटिंग का अध्ययन करेगा और सूरज के किनारों पर उठने वाले तूफानों की गति और उसके तापमान के पैटर्न को समझने की कोशिश की जायेगी।
एबीएन नॉलेज डेस्क। पृथ्वी के वायुमंडल में ऐसे बदलाव आयेंगे, जिससे यहां आक्सीजन बहुत ही कम हो जाएगी। इसके चलते पृथ्वी पर वर्तमान का वायुजीवी वाला जीवन खत्म हो जायेगा।
इसमें इंसान भी शामिल होंगे। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे पहले इंसानों के रहने लायक दूसरा ग्रह खोजना होगा। हाल में किये गये एक अध्ययन में इसका खुलासा हुआ है। अध्ययन नासा के नेक्सएसएस (नेक्सस फॉर एक्सोप्लैनेट सिस्टम साइंस) परियोजना का हिस्सा है, जिसमें बाहरी ग्रहों पर जीवन ढूंढा जा रहा है।
जॉर्जिया इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिक क्रिस रेनहार्ड ने कहा कि हमारा अध्ययन बताता है कि पृथ्वी में दो तरह के बदलाव हो रहे हैं। एक ऐसी प्रक्रिया जो लाखों वर्षों से चल रही हैं और पृथ्वी को अलग-अलग दौर में ले जाने का काम करती हैं।
इससे होने वाले बदलाव पृथ्वी पर दूरगामी प्रभाव देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे बदलाव जो बहुत तेजी से होते हैं, लेकिन उनके असर बहुत गहरे होते हैं और यहां तक उनसे पृथ्वी की प्रक्रियाओं में बड़ा या लंबे समय तक रहने वाला बदलाव आ जाता है। मानवीय गतिविधियों के कारण होने वाला जलवायु परिवर्तन भी इसी का हिस्सा है।
रेनहार्ड ने कहा कि इस बदलाव का नतीजा यह होगा कि पृथ्वी पर आक्सीजन पर निर्भर जीवन खत्म हो जायेगा। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी के जैवमंडल के जटिल मॉडलों का उपयोग किया और सूर्य की बढ़ती चमक के कारण कार्बन डाइआक्साइड के टूटने से उसकी कमी जैसे कारकों को शामिल किया।
एबीएन नॉलेज डेस्क। नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (निसार) को विशेष रूप से कंपन से संबंधित परीक्षणों के बाद 2024 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जायेगा। नासा निसार के प्रोजेक्ट मैनेजर फिल बरेला ने कहा कि इसे इसरो अगले साल की पहली तिमाही में लॉन्च करने का अनुमान है।
उन्हें उम्मीद है कि इसरो जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क-2 के जरिए श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निसार (जिसे नाइसर कहा जाता है) का प्रक्षेपण जनवरी से पहले नहीं होगा।
तीन साल की अवधि वाले इस मिशन का उद्देश्य हर 12 दिनों में पृथ्वी की सभी भूमि और बर्फ से ढंकी सतहों का सर्वेक्षण करना है। यह 90 दिनों की उपग्रह कमीशनिंग अवधि के बाद शुरू होगा।
जिन प्रमुख परीक्षणों को किया जाना बाकी है, उनमें सबसे अहम कंपन परीक्षण है। बरेला ने कहा परीक्षणों की एक पूरी शृंखला है जिसे हमें करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए बैटरी और सिमुलेशन परीक्षण किए जाने चाहिए कि सिस्टम ठीक काम करता है।
बरेला ने कहा- हम रडार और विभिन्न अंतरिक्ष यान इलेक्ट्रॉनिक्स पर प्रदर्शन परीक्षण करेंगे। इसलिए, बहुत सारे परीक्षण बाकी हैं, लेकिन बड़े वातावरण का परीक्षण, जो अब शेष है, वह कंपन है।
नासा के जेट प्रोपल्शन लैबोरेटरी के निदेशक डॉ लॉरी लेशिन ने कहा कि निसार परियोजना अतीत में उड़ायी गयी किसी भी चीज से बेहतर है। उन्होंने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा था, हालांकि पिछले मिशनों के डेटासेट हैं जो एक तरह की बेसलाइन बना सकते हैं, लेकिन निसार के साथ हम क्षमता के नये स्तर पर पहुंचेंगे।
लेशिन ने कहा, अगर यह बहुत अच्छी तरह से काम करता है, तो हम लगभग निश्चित रूप से लंबी आधार रेखा को प्राप्त करने के लिए उस मिशन का विस्तार करेंगे। पृथ्वी को बहु-वर्षीय टाइमस्केल पर बदलते हुए देखना एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात है। यह वही है जिसे हम ढूंढ़ रहे हैं।
इसरो के अनुसार, निसार एक लो अर्थ आर्बिट (एलईओ) वेधशाला है जिसे उसके और नासा द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया जा रहा है। निसार 12 दिनों में पूरे विश्व का नक्शा तैयार करेगा और पृथ्वी के पारिस्थितिक तंत्र, बर्फ द्रव्यमान, वनस्पति बायोमास, समुद्र के स्तर में वृद्धि, भूजल और भूकंप, सुनामी, ज्वालामुखी और भूस्खलन सहित प्राकृतिक खतरों में परिवर्तन को समझने के लिए स्थानिक और अस्थायी रूप से सुसंगत डेटा प्रदान करेगा।
नासा ने एक बयान में कहा कि इस परियोजना का उद्देश्य जंगली, कृषि, आर्द्रभूमि और पर्माफ्रॉस्ट पारिस्थितिक तंत्र में कार्बन भंडारण और उत्थान की गतिशीलता और जलवायु परिवर्तन के लिए बर्फ की चादरों की प्रतिक्रिया, समुद्री बर्फ और जलवायु के संबंध और दुनिया भर में समुद्र के स्तर में वृद्धि पर प्रभाव को समझना है।
निसार में सिंथेटिक अपर्चर रडार इंस्ट्रूमेंट (एसएआर), एल-बैंड एसएआर, एस-बैंड एसएआर और एंटीना रिफ्लेक्टर होंगे। नासा के अनुसार, आनबोर्ड उपकरण अंतरिक्ष से एक सेंटीमीटर का मामूली बदलाव भी देख सकते हैं। एसयूवी आकार के उपग्रह का द्रव्यमान लगभग 2,800 किलोग्राम है, जो लगभग चार किलोवाट बिजली प्रदान करने वाले दो सौर प्रणालियों द्वारा संचालित होगा।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse