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Published / 2026-04-11 09:31:40
वैभव सूर्यवंशी का क्रिकेट यानी आश्चर्यजनक और अविश्वसनीय

  • क्रिकेट... आश्चर्य... अविश्वसनीय 

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। वैभव सूर्यवंशी (बिहारी) अभी 14 पूर्ण करके 15 साल की उम्र के दहलीज पर, RCB के विरुद्ध 26 गेंदों में 78 रन ठोककर मैच को जीत के दरवाजे पर खड़ा कर दिया। 8 चौके, 7 छक्के हर शॉट में  आत्मविश्वास से भरपूर..15 गेंद में अर्ध शतक... आउट होने के बाद असंतोष का भाव.. भूख ऐसी जो आज तक किसी ने नहीं देखी।

आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स RR की चौथी जीत

जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखते हैं उस उम्र में दुनिया भर के बड़े-बड़े गेंदबाजों  में खौफ उत्पन्न करने वाला यह नटखट बालक आज सबका प्यारा दुलारा हीरो..

Congratulations 
India

Published / 2026-04-02 18:54:38
बंगाल का चुनाव और आमजन...

त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। बंगाल में हो रहे विधानसभा का चुनाव वास्तव में कई अर्थों में महत्वपूर्ण हो गया है। वामपंथियों की सरकार लंबे समय तक बनी रही। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी की सरकार लगातार 2011 से सत्ता में बनी हुई है। बंगाल में सत्ता की लंबी पारी का इतिहास रहा है।  

बंगाल की राजनीति हमेशा से हिंसक रही है। कई बार यह भी प्रमाणित हो चुका है कि ममता बनर्जी की सरकार तुष्टिकरण की राजनीति करती रही है।   
आज जबकि सूचना तंत्र व्यापक एवं सर्वशुलभ हो चुकी है ऐसे में वोटर को भ्रमित करना कठिन कार्य हो रहा है।  

मतदान की दृष्टि से जब कोई एक पक्ष ध्रुवीकृत होता है तो स्वाभाविक रूप से दूसरा पक्ष भी ध्रुवीकृत होगा ही। इस बार के बंगाल चुनाव में कुछ इसी प्रकार का परिदृश्य दिखाई दे रहा है। 

चुनाव का मुख्य प्रतिस्पर्धा भारतीय जनता पार्टी तथा त्रिमूल कांग्रेस मध्य ही चल रहा है। लोकतंत्र में आरोप प्रत्यारोप चुनाव का प्रमुख अंग है। अभी तक के वातावरण से यही सिद्ध हो रहा है कि ममता बनर्जी को संघर्ष करना पड़ रहा है वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी का उत्साह चरम पर है। 

4 मई को चुनाव परिणाम आने वाले हैं, उसके पहले किसी प्रकार का दावा चुनावी दंगल का हिस्सा हो सकता है। परिणाम दिलचस्प होगा कि बंगाल की जनता पूरे देश को क्या संदेश देने जा रही है।

Published / 2026-04-01 20:49:12
असम विधानसभा चुनाव में हेमंत बनाम हिमंता

त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लगातार चुनाव प्रचार कर रहे हैं। झामुमो के 16 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। पार्टी ने 21 उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, लेकिन 5 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया। 

असम के चाय बागानों में काम करने वाले अधिकांश लोग झारखंड के आदिवासी निवासी हैं, जिन्हें वहां टी ट्राईबल के नाम से जाना जाता है जबकि झामुमो उन्हें ट्राईबल नाम करने का मांग करता रहा है जिसे हेमंता की सरकार ने भी स्वीकृति प्रदान कर दी है।  

2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को चुनाव प्रभारी और असम के मुख्यमंत्री हिमंता सरमा को सह प्रभारी बनाया था। हिमंता ने ही पूरी चुनाव की रणनीति झारखंड में रहकर बनायी थी। वह दो महीने तक झारखंड में जमे रहे। 

जबरदस्त कैंपेन किया। भाजपा के पक्ष में अनेक प्रकार की कूटनीतिक चाल चली। झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता और हेमंत सोरेन के करीबी पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन को भाजपा में शामिल कराकर एक बड़ा झटका दिया। दूसरे दलों के कई नेताओं को भाजपा में शामिल कराया। शतरंज की हर चाल चली। 

हालांकि अपेक्षित सफलता नहीं मिली लेकिन हेमंत सोरेन के आंख की वह किरकिरी जरूर बन गये, और यही कारण है कि हेमंत सोरेन असम में चुनाव लड़वा रहे हैं, जबकि बंगाल में उनकी पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है। बंगाल में आदिवासियों की संख्या अच्छी खासी है और उसकी सीमा झारखंड से लगता है।

हेमंत सोरेन ने असम में भी कांग्रेस से गठबंधन का प्रयास किया लेकिन बिहार के तरह कांग्रेस ने घास नहीं डाला। असम में चुनाव लड़ने से कांग्रेस के साथ झामुमो के रिश्ते में दरार पड़ी है। इसका असर भी दिखने लगा है। झामुमो प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस को विषैला सांप तक कह दिया है।  

इधर, झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने पहली बार झारखंड के सरकार के विरुद्ध जमकर भड़ास निकला है। खनन माफिया, सरकार के कामकाज और जिलों के डीसी की भूमिका पर सवाल उठाये हैं। समझा जा सकता है कि बात अब सीमा से आगे बढ़ गयी है। इस प्रकरण का असर इंडिया गठबंधन के ऊपर तो निश्चित ही पड़ेगा और राजनीति के जानकारी के द्वारा इसकी भी संभावना व्यक्त की जा रही है कि झारखंड में सरकार का परिदृश्य परिवर्तित हो सकता है।

Published / 2026-03-31 12:23:30
आखिर दुनियाभर मे क्यों होती है पीएम मोदी की प्रशंसा

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा दुनिया भर में होने के कुछ विशेष आधार हैं। जीवन के कठिन संघर्ष में ने उन्हें ऐसा व्यक्तित्व प्रदान किया है जो विरले ही देखने सुनने में आता है।

मोदीजी सदैव व्यवस्थित दृष्टिगोचर होते हैं। उनका पहरावा सादगी परंतु गरिमामयी होता है जो सहज ही व्यापक प्रभावशाली होता है। मोदीजी की बॉडी लैंग्वेज एवं चाल-ढाल आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखाई देता है।

भगवा एवं ध्यान मुद्रा में तपस्वी की तरह, सेना के पोशाक में सैनिक के जैसा और सामान्य दिनचर्या में दिव्य आभा मंडल से युक्त दिखाई देते हैं। देशभक्ति, अनुशासन तथा मर्यादा उनके व्यक्तित्व से उद्भाषित होते रहता है, क्योंकि उनकी विचारधारा एवं भावनाएं उनके व्यवहार के अनुकूल है।

 भले ही वह दुनिया के किसी भी बड़ा नेता के साथ खड़े हों उनका आत्मविश्वास उन्हें बड़ा बनाए रखना है। वादा, शिलान्यास और उद्घाटन उनके कार्यशैली की विशेषता है और यही उनकी लोकप्रियता का रहस्य है।

देश के शीर्ष तथा इतनी शक्तिशाली होने के बाद भी परिवार का मोह उन्हें छू भी नहीं सका है। राजनीति में इस प्रकार का चरित्र दुर्लभ ही होता है।

कभी बीमार नहीं पड़ना, कभी छुट्टी नहीं लेना, निश्चित समय पर कार्यालय जाना, 18 घंटे तक काम करना, निडर होकर निर्णय लेना, अध्ययन, स्मरण शक्ति, विचार संप्रेषित करने की कला, जिम्मेवारी एवं मातृभूमि के लिए सर्वस्व समर्पण किसी एक व्यक्ति में होना कोई साधारण वस्तु नहीं है।

 मोदी जी से किसी ने पूछा कि आपके आंतरिक शक्ति का राज क्या है? मोदी जी ने कहा कि मैं रोज गाली खाता रहता हूं और यही मेरे ताकत का रहस्य है। सहनशक्ति का बल अद्भुत है और आश्चर्य चकित करता है।

राजनीति के दांव-पेंच, चुनाव जीतने की चुनौती और राजनीतिक गलियारों में विचरण करते विभिन्न प्रकार के जीव-जंतुओं का सामना इत्यादि कितना कठिन कार्य है सरलता से समझा जा सकता है लेकिन मोदीजी इन विषयों को सुलझाते चले जा रहे हैं।

कर्तव्य पथ के राही श्रीमान नरेंद्र मोदीजी कहते रहते हैं कि उनकी वास्तविक शक्ति का केंद्र बिंदु 144 करोड़ देशवासियों का आशीर्वाद और शुभकामना ही है। मोदी जी अपने राजनीतिक जीवन में अनेक झूठे आरोप, लांछन और और छवि धूमिल करने के कुत्सित प्रयास से बेदाग निकलते रहे हैं और इन दिनों जिस प्रकार के घटिया एवं अविश्वसनीय लांछन उनके ऊपर थोपे जा रहे हैं, उससे उनका कुछ बिगड़ता वाला नहीं है क्योंकि देशवासियों का विश्वास उनके साथ जुड़ा हुआ है।

Published / 2026-03-31 10:51:27
महावीर जयंती यानि अहिंसा परमो धर्म:

महावीर जयंती यानि अहिंसा परमो धर्म:

त्रिवेणी दास

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। जैन धर्म के 24वें एवं अंतिम तीर्थंकर महावीर का जन्म बिहार वैशाली के कुंडा ग्राम में राजा सिद्धार्थ तथा मां त्रिशला के यहां ईसा पूर्व 6ठी शताब्दी हुआ था। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने गृह का त्याग किया और सत्य के अन्वेषण के लिए 12 वर्षों तक कठोर तपस्या की।

जैन धर्म की परंपरा में आज का दिन आत्म स्मरण की दिशा की ओर ले जाता है। मनुष्य के बाहरी संघर्ष से भी बड़ा संघर्ष उसके भीतर चलते रहता है। अहिंसा बाहरी आचरण के अतिरिक्त वास्तव में एक आंतरिक अनुशासन है। खोने का डर एवं पाने की लालसा में उद्विग्न आदमी हिंसक बन जाता है, और यही हिंसा आदमी को मानवता एवं शांति से दूर कर देता है।

अहिंसा कायरता का प्रतीक नहीं है और ना ही निष्क्रियता का संदेश देता है। जब जीवन है, जब तक जीवन की यात्रा है और जब तक चिर-विश्राम (मृत्यु) की अवस्था नहीं आ जाती है तब तक सहयोग, सहकार, एक दूसरे के दुख-सुख में भागीदार, सामाजिक समरसता और वसुधैव कुटुम्बकम् की अवधारणा के आचरण के साथ जीवन यात्रा पूरी करने का संदेश भगवान महावीर स्वामी की जयंती से हमें प्राप्त होता है।

Published / 2026-03-29 18:28:43
एजेंडा बनाम प्रोपेगेंडा...

कार्य-सूची बनाम प्रचार-प्रसार 

त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। हर आदमी का अपना एजेंडा होता है और वह अपने एजेंडा का प्रोपेगेंडा भी   अपने ताकत भर करता है। एजेंडा का प्रकार तथा स्टैंडर्ड हर किसी का अपने औकात के हिसाब से ही होता है। किसी का छोटा एजेंडा बड़ा प्रचार तो किसी का खाली प्रचार कोई एजेंडा नहीं और किसी का बड़ा प्रोपेगेंडा छोटा एजेंडा। 

एजेंडा और प्रोपेगेंडा के बीच गहरी रिश्तेदारी है और चोली-दामन वाला दोस्ती है। हमारे मोहल्ले में एक नेताजी रहते हैं। उनके पास कोई एजेंडा नहीं होता है, लेकिन वे कुर्ता पजामा बंडी धारण करने वाले प्रोपेगेंडा के कुशल कलाकार हैं। हमारा ही एक मित्र निठल्ला नाम से मशहूर है, लेकिन उसकी प्रोपेगेंडा देखने लायक होती है।

 हमारे गुरुजी अपने मोटिवेशनल स्पीच में बड़े आत्मविश्वास के साथ समझाने का प्रयास करते हैं कि इस संसार में प्रोपेगेंडा से बड़ा कोई दूसरा नशा नहीं है जो एक बार चढ़ता है तो कभी उतरता ही नहीं है, बाकी सब किस्म का नशा चढ़ने के बाद निर्धारित समय के बाद उतर जाता है और इसीलिए उसे बार-बार चढ़ाने के लिए चिलम गरम करना पड़ता है।  वह नशा ही क्या जिसे छुपाया जा सके। स्कूल के दिनों में रटा हुआ छंद का अर्थ अब जाकर बुढौती में समझ में आ रहा है कि 

खैर खून खांसी खुशी, वैर प्रीत मधुपान! 

रहिमन दाबे ना दबे, जानत सकल जहान!!

Published / 2026-03-27 21:01:03
राहुल गांधी की एक ही चाल, हम नहीं सुधरेंगे...

त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। इस समय भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में कांग्रेस मुख्य विपक्ष की भूमिका में है। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी लीडर आॅफ अपोजिशन के पद पर विराजमान हैं। वर्तमान कांग्रेस के प्रकृति में लगता है कि राष्ट्रीय संकट के समय रचनात्मक सहयोग जैसा कोई वस्तु है ही नहीं।  

अमेरिका-इजरायल तथा ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा के कच्चा तेल एवं प्राकृतिक गैस की आपूर्ति चैनल में रुकावट पैदा हुई है जिसका प्रभाव भारत समेत दुनिया भर में दिखाई दे रहा है।  आरंभ से ही कांग्रेस मोदीजी की सरकार के ऊपर हमलावर है, जैसे इस युद्ध के कारण उत्पन्न स्थिति में भारत की भी कोई भूमिका है।

ईरान भारत को अपना मित्र देश बात कर होर्मूज जल मार्ग से भारतीय जहाज को निकलने दे रहा है। 60 दिनों तक के लिए भारत के पास ऊर्जा का संग्रहण है। दुनिया के कई देशों में तेल का राशनिंग किया गया है जबकि भारत में सब कुछ सामान्य स्वरूप में चल रहा है।  सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस जाएगी नहीं, समस्या से निपटने के लिए कोई सुझाव देगी नहीं और देश को घबराहट की स्थिति में लाने के लिए उल्टा सीधा बयान देगी।  

सच पूछा जाए तो इस समय पूरे देश  को एकजुट रहना राष्ट्रीय हित में आवश्यक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आह्वान किया है कि सभी राज्य सरकारों को केंद्र सरकार के साथ मिलकर टीम इंडिया की तरह काम करना होगा और इसी क्रम में आज मोदी जी सभी मुख्यमंत्री से संवाद करने वाले हैं। 

लोहरदगा में पैनिक जैसा कुछ नहीं दिखाई दे रहा है। आवश्यक ऊर्जा की आपूर्ति सामान्य स्वरूप में चल रही है। अगर किन्हीं को दिखाई नहीं दे रहा है तो उन्हें अपनी दृष्टिदोष का उपचार कराना चाहिए...

Published / 2026-03-20 21:57:13
मोदी जी अपनी ताकत का सही इस्तेमाल करते हैं...

त्रिवेणी दास 

एबीएन एडिटोरियल डेस्क। सांसारिक व्यवस्था में हर कोई शक्तिशाली बनना चाहता है। पैसे की ताकत, पद की ताकत और प्रतिष्ठा की ताकत पाने की इच्छा सभी की होती है; बहुत लोग की इच्छा पूरी भी होती है, परंतु विरले लोग ही अपनी ताकत का इस्तेमाल सही समय, सही दिशा और सही तरीका से कर पाते हैं।  

7 अक्टूबर 2001 को उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया था और 26 मई 2014 को उन्होंने प्रथम बार देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लिया था, तब से लेकर आज तक लगभग 25 वर्षों से वे शासनाध्यक्ष के स्वरूप में पावरफुल रहे हैं और अपनी पावर का प्रयोग देश हित और जनहित में करते चले आ रहे हैं। 

आलोचना, विरोध तथा दुष्प्रचार राजनीति का आवश्यक अंग है, जिसका सामना लगातार मोदीजी भी करते चले आ रहे हैं; लेकिन वह अपने मुख्य उद्देश्य से कभी विचलित हुए नहीं हैं जो किसी भी शक्तिशाली मानव के लिए कोई सरल बात नहीं है। 

पद-पावर-प्रतिष्ठा के उचित नियोजन के लिए सामान्य व्यक्तित्व काफी नहीं होता है, इसके लिए तो प्रखर, संवेदनशील, दृढ़निश्चयी, निडर तथा अपने संगठन के लिए अडिग सिद्धांतवादी व्यक्तित्व चाहिए जिसे हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री ने अपने संघर्ष के बल पर प्राप्त किया है और जिसके आधार पर वे नित नए-नए सफलता के इतिहास गढ़ रहे हैं।

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