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Published / 2021-09-22 10:40:54
आखिरकार झुका ब्रिटेन : कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड को दी मान्यता, नई ट्रैवल गाइडलाइंस जारी

एबीएन डेस्क। भारत द्वारा भारी दबाव बनाए जाने के बाद आखिरकार ब्रिटेन ने भारत में बनी कोरोना वैक्सीन कोविशील्ड को स्वीकृत वैक्सीन मान लिया है और इसे लेकर नई ट्रैवल गाइडलाइंस जारी की गई हैं। हालांकि, इस कदम से फिलहाल भारत को इतनी जल्दी राहत नहीं मिलने वाली है। ब्रिटेन सरकार की तरफ से कहा गया है कि अगर किसी भारतीय ने कोविशील्ड वैक्सीन की दोनों डोज लगवा ली है और वह ब्रिटेन जाता है तो उसे अभी भी क्वारंटीन में रहना होगा, क्योंकि अभी भी कोई सर्टिफिकेशन का मसला अटका हुआ है। बताते चलें कि ब्रिटेन की ताजा ट्रैवल गाइडलाइंस चार अक्तूबर से लागू होगी और इसमें कोविशील्ड के नाम को जोड़ा गया है। ताजा ट्रैवल गाइडलाइंस में नई बात यह है कि इसमें चार लिस्टेड व वैक्सीनों के फॉर्मूलेशन जिसमें एस्ट्राजेनिका कोविशील्ड, एस्ट्राजेनिका वैक्सजेवरिया, मॉडर्ना टाकेडा को वैक्सीन के रूप में अप्रूवल दिया गया है। इसके अलावा जिस वैक्सीन को यूके, यूरोप, अमेरिका के वैक्सीन प्रोग्राम के तहत मान्यता मिली होगी उनको ही फुली वैक्सीनेटिड माना जाएगा। वहीं इसके अलावाऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनिका, फाइजर बायोएनटेक, मॉडर्ना और जेनसेन वैक्सीन को भी मान्यता दी गई है लेकिन ये वैक्सीन बारबाडोस, बहरीन, ब्रुनेई, कनाडा, डोमिनिका, इज़राइल, जापान, कुवैत, मलेशिया, न्यूजीलैंड, कतर, सऊदी अरब, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया या ताइवान के किसी मान्यताप्राप्त सार्वजनिक स्वास्थ्य निकाय से लगी होनी चाहिए। इसके अलावा इसमें कहा गया है कि ब्रिटेन पहुंचने से कम से कम 14 दिन पहले आपके पास एक स्वीकृत टीके का पूरा कोर्स होना चाहिए। मंगलवार को यात्रा नियमों के संबंध में भारत को सूची से बाहर किए जाने पर विदेश सचिव हर्षवर्द्धन श्रृंगला ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि अगर ब्रिटेन ने मांग नहीं मानी तो भारत भी कोई दूसरा रास्ता अपना सकता है।

Published / 2021-09-09 18:43:45
कोरोना से जंग : एम्स में जल्द भारत बायोटेक करेगा नेजल वैक्सीन का ट्रायल, बच्चों के लिए साबित होगा वरदान

एबीएन डेस्क। एम्स में जल्द ही भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन का ट्रायल शुरू होने जा रहा है। यहां नेजल वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल किया जाना है और अगले कुछ दिनों में यह शुरू हो सकता है। अभी एम्स में बच्चों पर कोवाक्सिन का ट्रायल चल रहा है। यह लगभग पूरा हो चुका है और इस माह तक इसके नतीजे आ जाएंगे। इसके कुछ दिनों बाद बच्चों का टीकाकरण शुरू कर दिया जाएगा। नेजल वैक्सीन बच्चों के लिए कारगर साबित होगी। यह नाक के जरिए दी जाएगी, जिससे बच्चों में टीके का डर भी नहीं रहेगा। एम्स के मुताबिक, इस वैक्सीन के ट्रायल के लिए भी वॉलंटियर्स की तलाश शुरू कर दी गई है। हालांकि, अभी ट्रायल शुरू होने में वक्त है, लेकिन जितनी जल्दी तैयारियां पूरी की जाएंगी, यह उतनी ही जल्दी शुरू हो सकेगा। फिलहाल दो साल के बच्चे से लेकर 18 साल तक के किशोर पर वैक्सीन का ट्रायल चल रहा था। इसके नतीजे आते ही नेजल वैक्सीन का ट्रायल शुरू होगा। नेजल वैक्सीन को नाक के माध्यम से शरीर में डाला जाता है। वैक्सीन की मात्रा महज चार बूंद है। पहली बार दो बूंद और दो मिनट के अंतराल पर दो बूंद डाली जाती है। संक्रमण का खतरा कम, बच्चों के लिए वरदान : नेजल वैक्सीन कुछ इस तरह काम करता है, जिससे कि वायरस ना तो शरीर के अंदर जा सकेगा न ही नाक के माध्यम से शरीर के बाहर आ सकेगा। ऐसे में दूसरे लोग वायरस से संक्रमित होने से बच जाएंगे। जानकार बताते हैं कि कुछ लोग इंजेक्शन लगवाने से काफी डरते हैं। ऐसे लोगों के लिए अथवा बच्चों के लिए ये वैक्सीन काफी सुलभ होगा। इसके साथ ही वैक्सीन पर लगने वाला खर्च भी कम होगा। पल्स-पोलियो के वैक्सीन की तरह ही इसे भी घर-घर जाकर दिया जा सकेगा।

Published / 2021-09-07 15:25:34
निपाह का खतरा : कर्नाटक ने केरल से लगी सीमाएं सील की

एबीएन डेस्क। निपाह वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए कर्नाटक ने केरल से लगती सीमाओं को सील कर दिया है। दक्षिण कन्नड़ जिले में भी अलर्ट जारी किया गया है। जिले के उपायुक्त केवी राजेंद्र ने लोगों से सावधानी बरतने को कहा है और स्वास्थ्य विभाग से एहतियाती उपाय करने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्त राजेंद्र ने कहा कि दक्षिण कन्नड़ की सीमा केरल से लगती है और यहां से काफी लोग नौकरी और शिक्षा के लिए आते हैं। एहतियातन सीमा के इलाके में टीकाकरण और जांच को बढ़ा दिया गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने विशेषज्ञों को निर्देश दिए हैं कि निपाह को लेकर अध्ययन कर इससे निपटने के तरीके के बारे में अपने सुझाव दें। सीमा के इलाके में टीकाकरण और जांच को बढ़ा दिया गया है। केंद्र और राज्य सरकार को भी सतर्क रहने को कहा गया है। वहीं, केरल में निपाह वायरस से जान गंवाने 12 वर्षीय बच्चे के करीबी संपर्क में आए लोगों की जांच रिपोर्ट में संक्रमण नहीं होने की पुष्टि हुई है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया कि बच्चे के करीबी संपर्क में आए आठ लोगों के नमूनों की जांच रिपोर्ट आ गई है, जिनमें कोई भी संक्रमित नहीं पाया गया है। गौरतलब है कि तीन सितंबर को केरल के कोझिकोड के 12 वर्षीय बच्चे की निपाह वायरस के कारण मौत हो गई थी। केरल की स्वास्थ्य मंत्री जार्ज ने बताया कि आठ लोगों के 24 सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि अब और सैंपलों की जांच की जा रही है। कर्नाटक सरकार ने जारी किया परामर्श : राज्य सरकार की ओर से ताजा हालात को लेकर मंगलवार को एक परामर्श भी जारी किया गया। इसमें कर्नाटक सरकार ने कहा है कि लोगों को अक्तूबर के अंत तक केरल जाने से बचना चाहिए। शैक्षणिक/नर्सिंग/पैरामेडिकल संस्थानों के अफसरों, अस्पतालों, कारखानों आदि के मालिकों से अपने कर्मचारियों आदि जो जो कर्नाटक नहीं लौटे हैं को अक्तूबर के अंत तक वापसी स्थगित करने का निर्देश देने के लिए भी कहा गया है। कर्नाटक सरकार ने उन सभी छात्रों और कर्मचारियों से जो अभी तक केरल से कर्नाटक नहीं लौटे हैं, कहा है कि केरल में कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए अक्तूबी 2021 के अंत तक राज्य में अपनी वापसी को टालने या स्थगित कर दें।

Published / 2021-09-01 08:19:33
कोरोना : डेल्टा से भी खतरनाक है कोरोना का सी.1.2 वैरिएंट

एबीएन डेस्क। कोरोना के नए वैरिएंट सी.1.2 ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की चिंता बढ़ा दी है। डेल्टा से भी ज्यादा संक्रामक इस वैरिएंट पर डब्लूएचओ की तकनीकि प्रमुख डॉ. मारिया वॉन ने ट्वीट करके कहा है कि सी.1.2 के बारे में ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन लगातार दक्षिणी अफ्रीका के शोधकर्ताओं से संपर्क साधे हुए है और कोविड-19 महामारी के दौरान उनके शोधों पर चर्चा कर रहा है। आगे कहा कि हम दक्षिण अफ्रीका के शोधकर्ताओं को धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने सबसे पहले सी.1.2 के बारे में स्वास्थ्य संगठन को जानकारी दी और अपनी शोध को भी साझा किया। 100 से ज्यादा मामले आए सामने : डब्लूएचओ का कहना है कि दक्षिण अफ्रीका में 21 मई को इस वैरिएंट का पहला मामला सामने आने के बाद दुनिया भर में अब तक इस वैरिएंट के 100 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। डब्ल्यूएचओ की तकनीकि प्रमुख का कहना है कि हमें इस नए वैरिएंट के और भी सीक्वेंस के बारे में पता करने की आवश्यकता है। क्योंकि, अभी तक डेल्टा वैरिएंट ही सबसे ज्यादा संक्रामक प्रतीत हो रहा है। काफी खतरनाक हो सकता है नया वैरिएंट : वैज्ञानिकों का कहना कि अब तक पूरी दुनिया डेल्टा वैरिएंट से खतरे को लेकर परेशान थी, इस बीच इस नए वैरिएंट ने समस्याओं को और बढ़ा दिया है। अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने यह भी पाया है कि यह नया वैरिएंट शरीर में वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी से मात दे सकता है। ऐसे में एक बार फिर सभी लोगों के लिए कोरोना का खतरा बढ़ता हुआ नजर आ रहा है। तेजी से अपना रूप बदल सकता है कोरोना का यह वैरिएंट : कोरोना के इस नए वैरिएंट को म्यूटेशन के लिहाज से भी वैज्ञानिक बेहद खतरनाक बता रहे हैं। 24 अगस्त को प्रीप्रिंट रिपोजिटरी मेडरेक्सिव पर पीयर-रिव्यू अध्ययन के लिए पोस्ट किए गए डेटा के अनुसार सी.1 की तुलना में कोरोना के इस नए वैरिएंट सी.1.2 में तेजी से म्यूटेशन हो सकता है। इसका मतलब यह है कि कोरोना के इस नए वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में काफी तेजी से बदलाव होता रह सकता है। प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने की क्षमता : कोरोना के इस नए वैरिएंट को लेकर शोधकर्ताओं की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वैरिएंट शरीर में संक्रमण या वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरक्षा प्रणाली को आसानी चकमा दे सकता है। शोधकर्ता बताते हैं, सार्स-सीओवी-2 वायरस अपने स्पाइक प्रोटीन का उपयोग करके मानव कोशिकाओं को संक्रमित करते हुए उनमें प्रवेश करता है। इस नए वैरिएंट सी.1.2 में N440K और Y449H जैसे म्यूटेशनों का पता चला है। यह म्यूटेशन शरीर में बनीं प्रतिरक्षा को आसानी से मात देने की क्षमता रखते हैं। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले ली हैं, उनमें खतरा अन्य लोगों के मुकाबले कम हो सकता है। भारत में अभी एक भी मामला नहीं : कोरोना के इस नए वैरिएंट ने जहां दुनिया भर की चिंता बढ़ा दी है तो वहीं भारत के लिए राहत की खबर है। भारत सरकार का कहना है कि सी.1.2 वैरिएंट का अभी तक एक भी मामला सामने नहीं आया है। हालांकि, भारत इस नए खतरे को लेकर चिंतित और सतर्क है।

Published / 2021-08-27 17:45:59
ऐतिहासिक : आज देशभर में लगी कोरोना की एक करोड़ से अधिक वैक्सीन

एबीएन डेस्क। देश में कोरोना महामारी के खिलाफ तेज गति से वैक्सीनेशन अभियान चल रहा है। शुक्रवार को देश में पहली बार एक दिन में एक करोड़ से अधिक कोरोना वैक्सीन की डोज लगाई गई हैं। देर रात एक करोड़ से अधिक डोज का आंकड़ा पार कर देश ने इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों को ट्वीट कर बधाई दी है।

Published / 2021-08-26 09:02:00
वायरस में म्यूटेशन के कारण उसके स्पाइक प्रोटीन का अमिनो एसिड होता है प्रभावित

एबीएन डेस्क। वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस में म्यूटेशन के कारण उसके स्पाइक प्रोटीन का अमिनो एसिड प्रभावित होता है। वायरस की संरचना में होने वाले इस बदलाव को वैज्ञानिक भाषा में पी681आर म्यूटेशन कहते हैं। नेचर जनरल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव उसके फ्यूरिन क्लीवेज साइट में होता है जिसकी मदद से वायरस तेजी के साथ फैलता है। प्लाज्मा मेंब्रेन को करता है फ्यूज : यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के वायरोलॉजिस्ट प्रो. की सातो का कहना है कि वायरस के स्पाइक प्रोटीन में पी681आर म्यूटेशन स्वस्थ कोशिकाओं की प्लाज्मा मेंब्रेन को तीन गुना अधिक तेजी से फ्यूज करता है। डेल्टा में 300 गुना अधिक वायरल लोड : कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की चपेट में आने वाले लोगों में वायरल लोड अन्य स्ट्रेन की तुलना में 300 गुना अधिक होता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये वैरिएंट 300 गुना अधिक संक्रामक है।

Published / 2021-08-25 10:14:24
शिक्षक दिवस से पहले सभी टीचर्स को वैक्सीन लगाने के निर्देश : स्वास्थ्य मंत्री

एबीएन डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि राज्यों को इस माह दो करोड़ अतिरिक्त कोविड-19 टीकों की खुराकें उपलब्ध कराई गई हैं और उनसे पांच सितंबर को शिक्षक दिवस से पहले सभी स्कूली शिक्षकों को टीका लगाने को कहा गया है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, इस महीने हर राज्य को टीका उपलब्ध कराने की योजना के अलावा दो करोड़ से ज्यादा खुराक उपलब्ध कराई गई हैं। हमने सभी राज्यों से शिक्षक दिवस से पहले प्राथमिकता के आधार पर सभी स्कूली शिक्षकों को टीका लगाने की कोशिश करने का अनुरोध किया है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से पहले पिछले साल मार्च में सभी स्कूलों को बंद कर दिया गया था। केंद्र ने पिछले साल अक्टूबर में कोविड-19 की स्थिति के अनुरूप स्कूलों को फिर से खोलने की अनुमति दी थी। कई राज्यों ने स्कूलों को आंशिक रूप से खोलना शुरू भी कर दिया था लेकिन कोविड-19 की खतरनाक दूसरी लहर आने के बाद अप्रैल में फिर से सभी स्कूल पूरी तरह बंद कर दिए गए थे। कोविड-19 की स्थिति में सुधार होने के साथ, कई राज्यों ने अब स्कूलों को फिर से खोलना शुरू कर दिया है, लेकिन शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों का पूर्ण टीकाकरण न हो पाने के कारण चिंता भी बनी हुई है।

Published / 2021-08-24 17:07:53
देवघर एम्‍स में OPD सेवा शुरू, 30 रुपये में होगा रजिस्‍ट्रेशन

देवघर। झारखंड के संथाल परगना प्रमंडल के अंतर्गत बाबानगरी देवघर में मंगलवार से एम्स में OPD सेवा की शुरूआत हो गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने नयी दिल्ली से इसका ऑनलाइन उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में मंत्री हफिजुल हसन अंसारी, सांसद निशिकांत दुबे, विधायक नारायण दास उपस्थित थे। स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा की धरती पर झारखंड के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा एम्स में मिलेगी। इलाज के लिए उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एम्स की टीम से उन्होंने कहा कि वे सेवाभाव से काम कर जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरें। देवघर एम्स में ओपीडी की सेवा के लिए 30 रुपये में रजिस्ट्रेशन होगा। जांच के दौरान मरीजों को दवा दी जाएगी। एक बार रजिस्ट्रेशन कराने पर मरीज साल भर तक इलाज करा सकेंगे। फिलहाल 20 से अधिक रोगों की जांच होगी। देवघर एम्‍स में रोजाना 200 मरीजों का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। देवघर एम्स में डॉक्टरों का ड्यूटी रोस्टर तैयार कर लिया गया है। डॉक्टरों के नाम व विभाग देवघर एम्स की वेबसाइट www.aiimsdeoghar.edu.in में भी है। ओपीडी में जांच, चिकित्सीय परामर्श व दवाइयां मरीजों को दी जायेंगी. हर तरह की बीमारी से संबंधित मरीजों को पूरी सलाह दी जाएगी। डॉक्टरों को अगर लगेगा कि मरीज दवा से ठीक हो सकते हैं तो उन्हें रियायत दरों पर रैन बसेरा बिल्डिंग में अमृत फार्मेसी से दवाएं दी जाएंगी। अलग-अलग दवाओं में 60 फीसदी तक छूट मिलेगी। पूर्वी भारत में देवघर एम्स में पहला रैन बसेरा बना है। इस रैन बसेरा में मरीज के साथ आनेवाले परिजन रात में रुक पायेंगे, उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। फिलहाल रैन बसेरा में एम्स के छात्रों की लैब की पढ़ाई होगी। छह माह बाद एम्स की अन्य बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद रैन बसेरा से छात्रों का लैब दूसरे भवन में शिफ्ट कर दिया जाएगा।

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