एबीएन डेस्क। महामारी खत्म होने के संकेत नजर आने और स्वास्थ्य क्षेत्र में वृद्धि का परिदृश्य बने रहने से सूचीबद्ध एवं गैर-सूचीबद्ध कॉरपोरेट अस्पताल मुख्य रूप से मौजूदा अस्पतालों की क्षमता बढ़ाकर एवं अधिग्रहण के जरिये विस्तार की योजनाएं बना रहे हैं। ज्यादातर अस्पतालों ने अपने मौजूदा अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है, जबकि अन्य मौजूदा अस्पतालों का अधिग्रहण कर रहे हैं। कुछ अस्पतालों ने छोटे कस्बों एवं शहरों में परिचालन एवं प्रबंधन के करार करने की योजना बनाई है। प्रभुदास लीलाधर में विश्लेषक परम देसाई ने कहा कि मौजूदा क्षमता अगले एक या डेढ़ साल की मांग ही पूरी कर सकती है। देसाई ने कहा, इस तरह अब अस्पताल विस्तार योजनाओं पर काम कर रहे हैं। वे अगले पांच या छह साल की मांग पूरी करने के लिए मुख्य रूप से अधिग्रहण और मौजूदा अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाने का तरीका अपना रहे हैं। अस्पताल भी इससे सहमत नजर आते हैं। पूर्वी भारत में मेडिका ग्रुप आॅफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आलोक राय ने कहा कि उनके पांच अस्पतालों के नेटवर्क में पहले से ही 80 फीसदी क्षमता इस्तेमाल हो रही है। राय ने कहा, इस तरह हम मौजूदा अस्पतालों में बेड बढ़ा रहे हैं, अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रहे हैं और पूर्वी भारत के छोटे कस्बों एवं शहरों में परिचालन एवं प्रबंधन के मौके तलाश रहे हैं। मेडिका के पास इस समय 1,100 बेड हैं और यह करीब 500 बेड बढ़ाने जा रही है। यह रांची, कोलकाता और सिलीगुड़ी में अपने मौजूदा अस्पतालों में बेड बढ़ाने पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर रही है और रायपुर, गुवाहाटी एवं भुवनेश्वर में अस्पतालों के अधिग्रहण पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। राय ने कहा, अधिग्रहण के जरिये विस्तार और परिचालन एवं प्रबंधन के जरिये हम अगले कुछ वर्षों में पांच और अस्पताल बढ़ा लेंगे। इस समय पांच अस्पतालों का परिचालन कर रहे हैं। सूचीबद्ध कॉरपोरेट अस्पतालों ने भी विस्तार की बड़ी योजनाएं बनाई हैं। मैक्स हेल्थकेयर अपने मौजूदा अस्पतालों साकेत (दिल्ली), नानावटी (मुंबई) और शालीमार बाग में अगले पांच साल के दौरान 2,300 बेड बढ़ाने की योजना बना रही है, जो उसकी मौजूदा क्षमता का 70 फीसदी हैं। मैक्स भी परिचालन एवं प्रबंधन के जरिये एनसीआर में बेड बढ़ा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में चालू हो जाएंगे। फोर्टिस हेल्थकेयर ने भी चालू वित्त वर्ष में वृद्धि और प्रतिस्थापन पूंजीगत व्यय पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। फोर्टिस हेल्थकेयर के एमडी और सीईओ आशुतोष रघुवंशी ने कहा कि वे शालीमार बाग, फरीदाबाद और कोलकाता स्थित मुख्य अस्पतालों और मुलुंड में अपनी विस्तार योजना पर ठीक से आगे बढ़ रहे हैं। मणिपाल हॉस्पिटल्स जैसे कुछ कॉरपोरेट अस्पताल नई जगहों पर अस्पतालों का निर्माण करने जा रहे हैं। यह अगले ढाई साल में 1,000 बेड बढ़ाएगा, जिसमें 750 बेड नए अस्पतालों में होंगे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। टूथपेस्ट के ट्यूब पर अलग-अलग रंगों के ब्लॉक बने होते हैं। जैसे- लाल, हरा, नीला और काला। इन रंगों का अपना एक मतलब है, जिसे समझाने के लिए टूथपेस्ट तैयार करने वाली कंपनियों इन पर ब्लॉक बनवाती हैं। ये रंग बताते हैं यह टूथपेस्ट दूसरे से कितना अलग है। जानिए, टूथपेस्ट की ट्यूब पर बने अलग-अलग रंगों के ब्लॉक का क्या मतलब है? सबसे पहले बात करते हैं टूथपेस्ट ट्यूब पर बने लाल रंग के ब्लॉक की। इस रंग के ब्लॉक का मतलब है कि यह टूथपेस्ट नेचुरल और केमिकल दोनों तरह की चीजों से मिलाकर तैयार किया गया है। अगर आप सिर्फ नेचुरल चीजों से तैयार टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके लिए नहीं है। अगर टूथपेस्ट ट्यूब पर ग्रीन रंग का ब्लॉक है तो इसका मतलब है कि इसे केवल नेचुरल चीजों से बनाया गया है। अगर आप केमिकल वाली चीजें नहीं पसंद करते तो इस तरह के टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। अगर ट्यूब पर नीले रंग का ब्लॉक है तो यह बताता है कि इसे प्राकृतिक चीजों और दवाओं से तैयार किया गया है। इस तरह के पेस्ट को डॉक्टर्स किसी खास स्थिति में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इसलिए इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। वहीं, ब्लैक ब्लॉक का मतलब है कि इस टूथपेस्ट को सिर्फ केमिकल से तैयार किया गया है। इसलिए आप अपनी सुविधा के मुताबिक, अलग-अलग रंग के ब्लॉक वाले पेस्ट में से अपना पेस्ट चुन सकते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकार की एक विशेषज्ञ समिति ने वयस्कों में बूस्टर खुराक के रूप में कोविड-19 रोधी टीके कोवोवैक्स के चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 28 दिसंबर को वयस्कों में आपात स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को स्वीकृति दी थी। इसे अभी देश के टीकाकरण अभियान में शामिल नहीं किया गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को बूस्टर खुराक के रूप में एकल-खुराक कोविड-19 रोधी टीके स्पुतनिक लाइट के चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की थी। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने फरवरी में डीसीजीआई को एक अर्जी दी थी जिसमें कोवोवैक्स की सुरक्षा और प्रतिरक्षात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए उन लोगों को बूस्टर खुराक देकर इसके चरण-3 के नियंत्रित अध्ययन के लिए मंजूरी मांगी थी, जिन्होंने कम से कम तीन महीने पहले कोवीशील्ड या कोवैक्सीन का टीका लगाया हो। सिंह ने कहा है कि कई देश कोविड-19 महामारी की अनिश्चितताओं को देखते हुए पहले से ही अपने नागरिकों को बूस्टर खुराक दे रहे हैं। सिंह ने अर्जी में कहा, हमें यकीन है कि इस क्लीनिकल परीक्षण के संचालन के लिए आपकी मंजूरी हमारे प्रधानमंत्री के मेकिंग इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के दृष्टिकोण के अनुरूप हमारे देश के साथ-साथ दुनिया के लोगों के लिए बूस्टर खुराक के उपयोग के लिए कोवोवैक्स की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, हमारी कंपनी हमारे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार सी पूनावाला के दूरदर्शी नेतृत्व में एक किफायती मूल्य पर विश्व स्तरीय जीवन रक्षक टीके उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि हमें भारतीय वयस्कों पर कोवोवैक्स की बूस्टर खुराक के लिए चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण की अनुमति दें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या 60 लाख के करीब पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम जानकारी से प्राप्त हुई है। पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना संक्रमण के 44,08,07,756 मामले सामने आए हैं, तथा संक्रमण से 59,78,096 लोगों की मौत हुई है। महामारी से सबसे अधिक मौत यूरोप में हुई हैं। यूरोप में 18,12,75,264 मामले सामने आए तथा अमेरिका में 14,76,55,931 संक्रमित पाए गए। WHO के अनुसार, अमेरिका, भारत और ब्राजिल में सबसे अधिक संक्रमित मिले हैं। वहीं, नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 27 फरवरी तक विश्व भर में 10.6 बिलियन लोगों को वैक्सीन लगाए जा चुके हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। सघन क्षय रोगी खोज अभियान (एसीएफ कैंपेन) ने अनुराधा और बबिता (बदला हुआ नाम) को टीबी मुक्त जीवन की सौगात दी है। दोनों युवतियों का कहना है कि लक्षण दिखने पर तत्काल जांच करानी चाहिए। जांच में अगर टीबी की पुष्टि होती है तो दवा का पूरा कोर्स लेना चाहिए। जिले में नौ से 22 मार्च तक एक बार फिर एसीएफ कैंपेन चलाने की तैयारी है। सरदारनगर क्षेत्र की रहने वाली बबिता (27) ने बताया कि वर्ष 2019 में उन्हें काफी थकान महसूस होती थी। शाम को बुखार चढ़ जाता था। सांस लेने में दिक्कत होती थी। एसीएफ कैंपेन के दौरान बलगम की जांच हुई, जिसमें टीबी की पुष्टि हुई। जांच के बाद दवा शुरू हुई। छह माह तक निशुल्क इलाज के बाद स्वस्थ हो गई। सहजनवां क्षेत्र की रहने वाली अनुराधा (21) ने बताया कि वर्ष 2016 में भाई को टीबी हुई थी। भाई के इलाज के दौरान ही एक स्वयंसेवी संस्था के जरिए एसीएफ कैंपेन के बारे में जानकारी मिली। भाई की दवा चली और वह ठीक हो गए। इस बीच वर्ष 2018 में मुझे खुद ही टीबी हो गया। लगातार दवा खाई और पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। बताया कि भेदभाव की वजह से लोग टीबी छिपाते हैं और संक्रमण बढ़ता है, जो समाज के लिए घातक है। इसलिए मरीजों के साथ सतर्कता बरतते हुए सामान्य संबंध नहीं तोड़ने चाहिए। 9.61 लाख की आबादी में ढूंढेंगे मरीज : जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ रामेश्वर मिश्र ने बताया कि नौ से 22 मार्च तक प्रस्तावित एसीएफ कैंपेन के दौरान 9.61 लाख लोगों के बीच से टीबी के संभावित रोगी ढूंढ़े जाएंगे। ऐसे मरीजों की जांच कराने के बाद पुष्ट टीबी मरीजों का नि:शुल्क उपचार शुरू होगा। दो सप्ताह या अधिक समय तक खांसी आना, खांसी के साथ बलगम आना, बलगम में कभी-कभी खून आना, सीने में दर्द होना, शाम को हल्का बुखार आना, वजन कम होना और भूख न लगना टीबी के सामान्य लक्षण हैं। ऐसे लक्षणों वाले लोगों को टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए। जिले में टीबी के 5498 सक्रिय मरीज हैं, जिनका निशुल्क इलाज चल रहा है । 387 टीम चलाएंगी अभियान : डॉ मिश्रा ने बताया कि एसीएफ कैंपेन में 387 टीम लगेंगी। टीम के कुल 1,161 सदस्य लक्षित आबादी में घर-घर जाकर टीबी मरीज ढूंढेंगे। अभियान में 86 सुपरवाइजर, 21 मेडिकल ऑफिसर और 46 लैब टेक्नीशियन (एलटी) भी लगाए गए हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। आयुर्वेद सबसे प्राचीन और अत्यंत प्रभावी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई औषधियों में ऐसे गुणों के बारे में पता चलता है जो शरीर को अत्यंत लाभ पहुंचा सकती हैं। कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए कई तरह की औषधियों और जड़ी-बूटियों को प्रयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेदाचार्यों की मानें तो कई औषधियों को इतना प्रभावी पाया गया है जो कैंसर जैसे गंभीर रोगों के खतरे को कम करने में भी असरदार हो सकती हैं। डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कम करने में भी कुछ जड़ी-बूटियों को काफी असरदार पाया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं, काली मिर्च ऐसी ही एक अत्यंत फायदेमंद औषधि है जिससे कई तरह के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। हम सभी के किचन में आसानी से उपलब्ध यह दिव्य औषधि न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ा देती है साथ ही इसका नियमित रूप से सेवन करना गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकता है। एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर काली मिर्च का सेवन करना विशेष फायदेमंद माना जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में काली मिर्च से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। ब्लड शुगर रहता है कंट्रोल : डायबिटीज रोगियों के लिए काली मिर्च का सेवन करना विशेष लाभकारी हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि काली मिर्च में पाया जाने वाला कंपाउंड पिपेरिन, ब्लड शुगर के मेटाबॉलिज्म में सुधार करने में मदद कर सकता है। चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि काली मिर्च का अर्क रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, 8 सप्ताह के लिए पिपेरिन और अन्य यौगिकों युक्त पूरक लेने वाले 86 लोगों में इंसुलिन संवेदनशीलता में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया। हृदय रोगों का खतरा होता है कम : कोलेस्ट्रॉल को हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि काली मिर्च का अर्क कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने की क्षमता रखता है, ऐसे में नियमित रूप से काली मिर्च का सेवन करने वाले लोगों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम कम होता है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पहले कुछ दिनों तक उन्हें वसा वाला आहार दिया गया। इसके बाद काली मिर्च का अर्क देने के बाद उनमें एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी दर्ज की गई। कैंसर का कम होता है खतरा : काली मिर्च कैंसर के खतरे को भी कम करने में सहायक औषधि मानी जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि काली मिर्च में पाए जाने वाले पिपेरिन में सक्रिय यौगिक, कैंसर से लड़ने वाले गुणों से भरपूर होते हैं। टेस्ट-ट्यूब अध्ययनों में पाया गया कि पिपेरिन स्तन, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर कोशिकाओं की प्रतिकृति को धीमा कर देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित रूप से भोजन के माध्यम से काली मिर्च का सेवन करने से कई तरह के कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।
एबीएन डेस्क। एक तरफ जहां भारत में कोरोना के मामलों में रोजाना गिरावट देखी जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर चौथी लहर की भी खबरें सामने आ रही है। एक स्टडी के मुताबिक देश में इस साल जून के महीने में कोरोना की चौथी लहर दस्तक दे सकती है। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने चेतवानी दी है कि कोविड-19 महामारी की चौथी लहर 22 जून के आसपास शुरू हो सकती है और अगस्त के अंत तक चरम पर हो सकती है। स्टडी के मुताबिक चौथी लहर का असर करीब चार महीने तक बना रह सकता है। इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी कानपुर के एक वरिष्ठ शोधकर्ता के मुताबिक, टीकाकरण का प्रभाव संक्रमण की संभावना और चौथी लहर से संबंधित विभिन्न मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह अध्ययन आईआईटी कानपुर के गणित विभाग के सबरा प्रसाद राजेशभाई, शुभ्रा शंकर धर और शलभ ने किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका में किए गए एक और हालिया अध्ययन से पता चला है कि अगला कोरोना वैरिएंट दो अलग-अलग तरीकों से उभर सकता है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि नया वैरिएंट पहले से पहचाने गए लोगों की तुलना में कम गंभीर होगा। आपको बता दें कि शनिवार को भारत में एक दिन में कोविड-19 के 8,013 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,29,24,130 हो गई। करीब दो महीने बाद संक्रमण के दैनिक मामले 10 हजार से कम सामने आए हैं। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,02,601 रह गई है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। नीम की पत्तियां हो या तना आयुर्वेदिक दृष्टि से ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। बता दें कि नीम की पत्तियों में कई ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जो सेहत को कई समस्याओं से दूर रख सकते हैं। नीम स्वाद में तिक्त (तीखा) और कटु (कड़वा) होता है। लेकिन अगर नीम का रोज खाली पेट सेवन किया जाए तो कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि 5 से 6 नीम की पत्तियों को अगर रोज चबाया जाए तो इससे सेहत को क्या-क्या हो सकते हैं। 1. खाली पेट नीम के पत्ते खाने से सेहत को कई फायदे हो सकते हैं। बता दें कि जो लोग खून की समस्या से परेशान रहते हैं वो अपनी दिन की शुरूआत नीम के साथ करें। ऐसा करने से एनीमिया की समस्या से राहत मिल सकता है। खून की कमी को पूरा करने में नीम की पत्तियां आपके बेहद काम आ सकती है। 2. त्वचा में प्राकृतिक चमक बढ़ाने में नीम की पत्तियां आपके बेहद काम आ सकती हैं। ऐसे में आप खाली पेट नीम की पत्तियों को अच्छे से धोकर चबाएं। ऐसा करने से न केवल त्वचा की समस्या से राहत मिल सकती है बल्कि त्वचा में प्राकृतिक चमक भी आ सकती है। 3. आज के समय में इम्यूनिटी का मजबूत होना बेहद जरूरी है। ऐसे में आप खाली पेट नीम के पत्तों को खाएं। ऐसा करने से न केवल रोग प्रतिरोधक को बढ़ाया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एंटी-आॅक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-फंगल आदि गुण पाए जाते हैं, जिससे शरीर को कई संक्रमण से दूर रखा जा सकता है। (नोट : अगर नीम की पत्तियां खाकर परेशानी महसूस हो तो एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)
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