एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना के मोर्चे पर थोड़ी चिंता थोड़ी राहत की खबर है। सोमवार को एक बार फिर 3000 से ज्यादा मरीज मिले। हालांकि पिछले तीन दिनों से नए मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की जा रही है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि पिछले 24 घंटों के अंदर 3157 नए मामले दर्ज किए गए और 26 लोगों को कोरोना की वजह से जान गंवानी पड़ी। बीते 24 घंटे में कोरोना से 2,723 लोग ठीक हुए हैं। इसके साथ ही एक्टिव केसों की संख्या अब 19500 हो गई है। इससे पहले रविवार को 3,324 केस सामने आए थे। शनिवार को 3,688, शुक्रवार को 3377 और गुरुवार को 3,303 केस मिले थे। सोमवार को बताई गईं 26 मौतों में 21 वो हैं, जो केरल में पिछले दिनों हुईं। लेकिन आंकड़ा अब अपडेट किया गया है। सोमवार को हेल्थ मिनिस्ट्री की बेवसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, एक्टिव केसों में एक दिन पहले के मुकाबले 408 को बढ़ोतरी हुई है। राज्यों में एक्टिव केसों का आंकड़ा देखें तो सबसे ज्यादा केस दिल्ली में ही मिले हैं। राजधानी में एक्टिव केस अब 5997 हो गए हैं, पिछले 24 घंटों में इसमें 281 की बढ़ोतरी हुई है। उसके बाद यूपी, हरियाणा और बंगाल का नंबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि देश में अब तक कोरोना से 4,25,38,976 लोग ठीक हो चुके हैं। कोरोना के नए केसों में सबसे ज्यादा उछाल 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में देखा जा रहा है। गनीमत ये है कि ज्यादातर राज्यों में कोरोना के नए मरीजों की संख्या हफ्ते में 1000 से कम ही है। हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, देश में अब तक 5,23,869 लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो चुकी है। मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देशभर में वैक्सीन की कुल 1,89,23,98,347 करोड़ खुराक लोगों को दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटों में देश में 4,02,170 लोगों को लगाई गईं। राजधानी से सटे गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले में कोविड-19 के नए मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए धारा 144 को 31 मई तक बढ़ा दिया है। खुले में पूजा और नमाज पर भी रोक लगा दी गई है। यह फैसला त्योहारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए लिया गया है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस के वेरिएंट ओमिक्रॉन के दो नए सब वेरिएंट इम्युनिटी को नुकसान पहुंचाकर फिर से लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। एक स्टडी में दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि इन सब वेरिएंट के कारण कोरोना की नई लहर देखने को मिल सकती है। हालांकि इन वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि कोविड-19 वैक्सीन ले चुके लोगों के संक्रमित होने की संभावना कम है। कई संस्थानों के वैज्ञानिक Omicron के BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट की जांच कर रहे हैं – जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले महीने अपनी निगरानी सूची में जोड़ा था। उन्होंने पिछले साल के अंत में पहली बार ओमाइक्रोन से संक्रमित 39 लोगों के ब्लड सैंपल लिए थे। इस अध्ययन में यह सामने आया है कि टीके लगवा चुके लोगों में करीब 5 गुना अधिक न्यूट्रलाइजेशन क्षमता दिखाई दी। वहीं वैक्सीन नहीं लेने वाले लोगों के सैंपल में Omicron के मूल वेरिएंट BA.1 की तुलना में BA.4 और BA.5 के संपर्क में आने पर एंटीबॉडीज पर गहरा असर पड़ा और टीका लगा चुके लोगों की तुलना में यह तीन गुना कम थी। भारत में बीते 24 घंटों में कोविड-19 संक्रमण के 3324 नए मामले, एक्टिव केस बढ़कर 19000 के पार : ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की 5वीं लहर आ सकती है। अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को कहा कि ओमिक्रॉन के BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट के कारण कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि ओमिक्रॉन के ये दो सब वेरिएंट कोरोना की नई लहर को जन्म देने की क्षमता रखते हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस के 3,324 नए मामले सामने आने से देश में covid-19 से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,30,79,188 हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में संक्रमण से 40 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5,23,843 पर पहुंच गई है। वहीं, देश में covid-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 19,092 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.04 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 403 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, संक्रमण से उबरने की राष्ट्रीय दर 98.74 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 0.71 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.68 प्रतिशत है। देश में अभी तक कुल 4,25,36,253 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और covid-19 से मृत्यु दर 1.22 प्रतिशत है। वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक covid-19 रोधी टीकों की 189.17 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। पहली बार इंसानों में बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लुएंजा के H3N8 स्ट्रेन मिलने से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। कोरोना महामारी का कहर झेल रहे लोग अब इस नई बीमारी को लेकर खौफजदा है। चीन में चार साल का एक बच्चा इस स्ट्रेन से संक्रमित पाया गया है। उसे इसी महीने बुखार व अन्य लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चीन के नैशनल हेल्थ कमिशन (NHC) की ओर से जारी बयान के अनुसार, बच्चे का परिवार घर पर मुर्गियां पालता था। पूरा परिवार ऐसे इलाके में रहता था जहां जंगली बत्तखों की भरमार है। बयान में कहा गया कि बच्चे को सीधे पक्षियों से संक्रमण मिला और स्ट्रेन में इंसानों को प्रभावी रूप से संक्रमित करने की क्षमता नहीं मिली। बच्चे के करीबी लोगों में भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं पाई गई। NHC के अनुसार, यह "क्रॉस-स्पीशीज ट्रांसमिशन" का दुर्लभ केस है और बड़े पैमाने पर प्रसार का खतरा कम है। हालांकि, पब्लिक को मृत या बीमार पक्षियों से दूर रहने को कहा गया है। अगर बुखार या सांस से जुड़ी कोई दिक्कत महसूस हो तो फौरन मेडिकल सहायता लेने की सलाह दी गई है। आइए इस वायरस के बारे में और विस्तार से जानते हैं। जानें क्या है न्फ्लुएंजा H5N1 और कितना है खतरनाक : विशेषज्ञों के अनुसार एवियन इन्फ्लुएंजा H5N1 वायरस यानी बर्ड फ्लू आमतौर पर पक्षियों में होने वाला रोग है। लेकिन कभी-कभी यह इंसानों में भी आ सकता है। उस स्थिति में टिपिकल फ्लू वाले लक्षण ही होते हैं। यह पक्षियों से इंसानों में तब आता है जब इंसान और वायरस से बीमार पक्षी के बीच लंबे समय तक करीबी संपर्क हो। ऐसे में जो पॉल्ट्री फॉर्म वाले हैं, विक्रेता हैं और या फिर उनके साथ रहने वाले हैं, उनको बर्ड फ्लू होने के चांस रहते हैं। इसके अलावा अगर पक्षी का बिना पका या अधपका मीट खाते हैं तो भी इसके होने की संभावनाएं रहती हैं। खास बात यह है कि यह इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलता। इंसानों पर प्रभाव : सभी एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। लेकिन, इनमें से कुछ इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। एवियन इन्फ्लुएंजा H5N8 वायरस, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है, उनमें से एक है। यह हमारे फेफड़ों, नाक और गले पर अटैक करता है। यह सांस से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है और इसके लक्षण सामान्य जुकाम की तरह होते हैं। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, ऐसे वायरस आमतौर पर लोगों को संक्रमित नहीं करते। हालांकि इंसानों में संक्रमण के दुर्लभ मामले पहले भी सामने आए हैं। ज्यादातर संक्रमण H7N9 और H5N1 स्ट्रेन से होते हैं। भारत में बर्ड फ्लू के मामले : देश में इसी साल फरवरी में महाराष्ट्र से बर्ड फ्लू (H5N1) के मामले सामने आए थे। इसके अलावा बिहार के सुपौल में भी पॉल्ट्री रिसर्च फॉर्म में इसके केस मिले थे। पिछले साल दिल्ली में H5N1 से संक्रमित 11 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी। जनवरी 2021 में कई राज्यों के हजारों पक्षियों में बर्ड फ्लू कन्फर्म हुआ था। प्रोटोकॉल कहता है कि केस मिलने पर प्रभावित इलाकों के एक किलोमीटर की रेडियस में सभी पॉल्ट्री पक्षियों और अंडों को नष्ट कर दिया जाता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच केंद्र सरकार के सूत्रों ने कहा है कि दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के बीच मौजूदा अंतर को फिलहाल कम नहीं किया गया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से बताया कि पहले की तरह दोनों खुराकों के बीच का अंतर नौ महीने का ही रहेगा। फिलहाल अंतर कम करने पर विचार नहीं किया जा रहा है। दरअसल, पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के बीच के अंतर को कम करने के लिए राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) द्वारा सिफारिश किए जाने की उम्मीद है। कहा गया था कि आईसीएमआर और अन्य अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानों के अध्ययनों ने सुझाव दिया है कि दोनों खुराक के साथ प्राथमिक टीकाकरण से लगभग छह महीने बाद एंटीबॉडी स्तर कम हो जाता है और बूस्टर देने से प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया बढ़ जाती है। 10 जनवरी से टीकाकरण शुरू हुआ था : भारत ने 10 जनवरी से हेल्थकेयर और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को टीकों की एहतियाती खुराक देना शुरू किया था। सरकार ने मार्च में 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को एहतियाती खुराक के लिए पात्र बनाते हुए कॉमरेडिटी क्लॉज को हटा दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 18-59 साल के आयु वर्ग में 5 लाख से ज्यादा लोगों को एहतियात की खुराक दी जा चुकी है। इसके अलावा, 4736567 स्वास्थ्य कर्मियों, 7447184 अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 14,545595 व्यक्तियों ने एहतियाती खुराक लिए हैं। भारत ने 10 अप्रैल को निजी टीकाकरण केंद्रों पर 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को कोविड-19 टीकों की एहतियाती खुराक देना शुरू किया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश भर में राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 188.65 करोड़ से अधिक कोविड टीके लगाये गये हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि आज सुबह सात बजे तक 188 करोड़ 65 लाख 46 हजार 894 कोविड टीके दिये जा चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के 3377 नये मरीज सामने आये हैं। इनके साथ ही देश में कोरोना रोगियों की संख्या 17 हजार 801 रह गयी है। यह संक्रमित मामलों का 0.04 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 0.71 प्रतिशत हो गयी है। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में 2496 लोग कोविड से मुक्त हुए हैं। अभी तक कुल चार करोड़ 25 लाख 30 हजार 622 कोविड से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.74 प्रतिशत है। देश में पिछले 24 घंटे में चार लाख 73 हजार 635 कोविड परीक्षण किए गये हैं। देश में अब तक कुल 83 करोड़ 69 लाख 45 हजार 383 कोविड परीक्षण किए गये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के औषधि महानियंत्रक ने मंगलवार को 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ZycovD कोविड वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण प्रदान किया है। इस मंजूरी के साथ 12 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों को 3 मिलीग्राम की दो खुराक के रूप में दवा दी जा सकती है और दोनों खुराक के बीच 28 दिन का अंतर रखा जा सकता है। इस समय जाइकोवी-डी की 2 मिलीग्राम की तीन खुराक की अनुमति है, जिसमें प्रत्येक खुराक के 28 दिन बाद अगली खुराक दी जाती है। सरकार से परमिशन मिलने के बाद जाइडस लाइफसाइंसेस ने मंगलवार को कहा कि जाइकोवी-डी की दो खुराक देने से कम समय में बड़ी आबादी को कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ टीका लगाने में मदद मिलेगी। भारत ने 16 मार्च को 12 से 14 साल की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। जाइडस लाइफसाइंसेस के प्रबंध निदेशक शर्विल पटेल ने दो खुराक की योजना के बारे में कहा कि इससे वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिहाज से टीकाकरण के लिए जरूरी कुल समय घटाने में मदद मिलेगी। इससे पहले औषधि महानियंत्रक ने 6-12 साल की उम्र के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। बता दें कि भारत ने 16 मार्च को 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया। देशभर में कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 को शुरू किया गया था, तब केवल स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए जा रहे थे। इसके बाद दो फरवरी 2021 से अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों का टीकाकरण और एक मार्च 2021 से 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 45 या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ। 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए एक अप्रैल 2021 को टीकाकरण शुरू हुआ और 18 साल से अधिक आयु के लोगों को एक मई 2021 से कोविड-19 रोधी टीके देने शुरू किए गए। देश में तीन जनवरी 2022 से 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ था। स्वास्थ्य कर्मियों तथा अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 60 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को एहतियाती खुराक 10 जनवरी 2022 से देनी शुरू की गई। देश में 10 अप्रैल 2022 से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को एहतियाती खुराक देनी शुरू कर दी गई थी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। इसको देखते हुए कई राज्यों ने हटाए गए कोरोना प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया है और सख्ती से इनका पालन करने का निर्देश जारी किया है। अभी स्थिति फिलहाल कंट्रोल में हैं। लेकिन जैसे-जैसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, उससे संभावना जताई जा रही है कि भारत में चौथी लहर दस्तक देने वाली है। हालांकि वायरोलॉजिस्ट और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के पूर्व प्रोफेसर डॉ जैकब जॉन का कहना है कि चौथी लहर के आने के आसार बेहद कम हैं। डॉ जैकब जॉन ने कहा कि भारत में कोरोनावायरस की चौथी लहर की संभावना बहुत कम है। यह पूछे जाने पर कि कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा में पिछले दो से तीन हफ्तों से कोविड-19 केस में वृद्धि दर्ज की जा रही है। लेकिन यह बढ़ोतरी ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य कोरोना मामलों में वृद्धि की सूचना नहीं दे रहा है। भारत में मार्च और अप्रैल के दौरान सामने आए मामलों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम है। चौथी लहर की संभावना बेहद कम : जैकब जॉन ने कहा, दिल्ली और हरियाणा में पिछले दो से तीन हफ्तों के दौरान संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हालांकि यह ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रहेगा। दिल्ली में एक हजार केस प्रति 5 लाख आबादी के बराबर है। वायरोलॉजिस्ट ने दोहराया कि चौथी लहर की संभावना बेहद कम है। डॉ जॉन ने कहा, अगर चौथी लहर आती है तो यह आश्चर्य की बात होगी। अभी इसको लेकर अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हालांकि चौथी लहर की संभावना बहुत कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन कवरेज बहुत ज्यादा हो चुका है। कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी लाने के लिए क्या करना चाहिए? इस सवाल के जवाब में जॉन ने कहा, मास्क का लगातार इस्तेमाल करना चाहिए। यह कारगर है। यह पूछे जाने पर कि क्या स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा क्योंकि कई राज्यों में बच्चे बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इसपर उन्होंने कहा, बिल्कुल भी नहीं। स्कूल खुले रहने चाहिए। बूस्टर डोज लेने वाले 70% लोग नहीं हुए संक्रमित : इस बीच, कोरोना वायरस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष डॉक्टर राजीव जयदेवन के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने वालों में से 70 प्रतिशत लोग महामारी की तीसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुए। रिसर्च के मुताबिक, वैक्सीनेशन कराने वाले लेकिन बूस्टर डोज नहीं लेने वाले 45 प्रतिशत लोग तीसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित हुए।
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