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Published / 2022-04-09 14:16:20
आधे से भी कम हुई कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत

एबीएन हेल्थ डेस्क। पुणे की वैक्सीन निमार्ता सीरम इंस्टीट्यूट ने निजी अस्पतालों को बूस्टर डोज के लिए कोविड-19 की वैक्सीन कोविशील्ड को प्रति डोज 600 के बजाए 225 रुपए में आपूर्ति करने की शनिवार को घोषणा की। कंपनी ने यह फैसला सरकार से बातचीत के बाद लिया है। इंस्टीट्यूट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार पूनावाला ने ट्विटर पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के बाद सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया ने निजी अस्पतालों के लिए कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 600 रुपए प्रति डोज से घटाकर 225 रुपए करने का निर्णय किया है। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के इस फैसले की पुन: सराहना करते हैं कि उसने वैक्सीन की एहतियाती खुराक 18 वर्ष से ऊपर की आबादी के लिए खोल दी है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने शुक्रवार को फैसला किया कि 10 अप्रैल से सभी वयस्क कोविड टीके की एहतियाती खुराक ले सकेंगे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कोविड का पहला और दूसरा टीका तथा अग्रिम पंक्ति के कोरोना योद्धाओं और 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को तीसरा टीका पूर्व की भांति सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर निशुल्क उपलब्ध होगा।

Published / 2022-04-08 17:44:13
फिर दर्द देने लगा कोरोना... दिल्ली समेत कई राज्यों को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अलर्ट

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 353 नए मामले सामने आए और कोरोना से किसी की मौत नहीं हुई है। सक्रिय मामलों की संख्या 2,351 और राज्य में कुल मौतों का आंकड़ा 68,339 है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने शुक्रवार को दिल्ली, केरल, हरियाणा, मिजोरम और महाराष्ट्र को पिछले हफ्ते कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी पर पत्र लिखकर सख्त निगरानी बनाए रखने को कहा है। बात अगर मिजोरम की करें तो यहां पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के 123 नए मामले सामने आने के बाद राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 2,25,336 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि राज्य में कोविड-19 से अभी तक 687 लोगों की मौत हुई है। राज्य में संक्रमण दर बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है, जो एक दिन पहले 13.69 प्रतिशत थी। इससे पहले गुरुवार को राज्य में 101 नए मामले सामने आए थे। उन्होंने बताया कि मिजोरम में अभी 836 लोगों का कोरोनावायरस संक्रमण का इलाज चल रहा है, जबकि 2,23,813 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। गुरुवार को संक्रमण से 143 लोग ठीक हुए। राज्य में मरीजों के ठीक होने की दर 99.32 प्रतिशत और कोविड-19 से मृत्यु दर 0.30 प्रतिशत है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अभी तक 19 लाख से अधिक नमूनों की कोविड-19 संबंधी जांच की गई है, जिनमें 721 नमूनों की जांच गुरुवार को की गई। वहीं दिल्ली में गुरुवार को कोरोनावायरस संक्रमण के 176 नए मामले सामने आए, जो एक दिन पहले आए मामलों से 40 प्रतिशत ज्यादा थे। राज्य के स्वास्थ्य विभाग की ओर से शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक संक्रमण की दर 1.68 प्रतिशत दर्ज की गई और पिछले एक दिन में महामारी से किसी की मौत नहीं हुई है। बुधवार को कोरोना संक्रमण के 126 मामले सामने आए थे, संक्रमण की दर 1.12 प्रतिशत थी और एक मरीज की मौत हो गई थी।

Published / 2022-04-08 13:14:20
10 अप्रैल से 18+ को भी बूस्टर डोज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के खिलाफ अभी जंग जारी है। देश में भले ही कोरोना के केस कम आ रहे हैं लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ। इसी बीच केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि 18+ एज ग्रुप वालों को भी कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 10 अप्रैल से 18+ वाले कोरोना का बूस्टर डोज लगवा सकेंगे। बूस्टर डोज सभी प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर्स पर उपलब्ध होगी। बता दें कि पहली और दूसरी कोरोना डोज के लिए सरकारी टीकाकरण केंद्रों के माध्यम से चल रहे मुफ्त वैक्सीनेशन प्रोग्राम के साथ-साथ हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60+ एज ग्रुप के लिए बूस्टर डोज जारी रहेगा।

Published / 2022-04-06 12:42:33
टीकाकरण : देशभर में लगे कोरोना के 180.04 करोड़ टीके

एबीएन हेल्थ डेस्क। देशभर में राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 185.04 करोड़ से अधिक कोविड टीके लगाए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को यहां बताया कि आज सुबह सात बजे तक 185 करोड़ चार लाख 11 हजार 569 कोविड टीके दिये जा चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के एक हजार 86 नये मरीज सामने आये हैं। इनके साथ ही देश के विभिन्न अस्पताल में उपचार करवा रहे कोरोना रोगियों की संख्या 11 हजार 871 रह गयी है। यह संक्रमित मामलों का 0.03 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 0.23 प्रतिशत हो गयी है। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में एक हजार 198 लोग कोविड से मुक्त हुए हैं। अभी तक कुल चार करोड़ 24 लाख 97 हजार 567 लोग कोविड से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.76 प्रतिशत है। देश में पिछले 24 घंटे में चार लाख 81 हजार 374 कोविड परीक्षण किए गये हैं। देश में कुल 79 करोड़ 20 लाख 27 हजार 142 कोविड परीक्षण किए हैं।

Published / 2022-04-05 12:28:37
कोरोना मुक्ति की ओर है भारत, लेकिन अभी भी मास्क जरूरी...

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना जैसी भयानक महामारी को लेकर अपने देश में इसकी निगरानी करने वाली सबसे बड़ी संस्था ने राहत भरी घोषणा की है। इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च के मुख्य महामारी विशेषज्ञ ने भारत को अब कोरोना महामारी से मुक्त घोषित कर दिया है। अब भारत में कोरोना एंडेमिक कैटेगरी में पहुंच गया है। यानी यह वायरस तो हमारे आपके बीच मौजूद रहेगा, लेकिन अलग-अलग बदले हुए स्वरूप में होगा। जो अब अपने पुराने महामारी जैसे हालात में नहीं पहुंच सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में जनजीवन और सामान्य होता जाएगा। हालांकि अब पूरे देश को अगले कई सालों तक कोरोना वायरस के बदले हुए तमाम रूपों से दो चार होना ही पड़ेगा। आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि देश में कोविड जैसी खतरनाक महामारी का अब अंत हो चुका है। वे कहते हैं जब पूरी दुनिया में कोविड को लेकर हाहाकार मचा था, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत आईसीएमआर ने अपने देश में इसको पेंडेमिक (महामारी) घोषित किया था। पेंडेमिक के दौरान देश और दुनिया में कोरोना ने लाखों जानें ले ली। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहली दूसरी और तीसरी लहरों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। उनका कहना है कि अलग-अलग देश के हिसाब से लहरों का आकलन किया गया। एंडेमिक कैटेगरी में वायरस : वे कहते हैं कि भारत में फिलहाल अब किसी भी तरीके का कोरोना वायरस का बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है। जिस तरीके के मामले और आंकड़े सामने आ रहे हैं उससे अब इस बीमारी को एंडेमिक कैटेगरी में रखा जा रहा है। यानी अब यह बीमारी पूरे देश में सभी राज्यों के सभी शहरों, गांवों, तहसीलों और कस्बों में अपना कहर बरपाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है। वह कहते हैं कि संभव है किसी राज्य में किसी शहर में मामले जरूर बढ़ें, लेकिन इसका प्रकोप एक साथ पूरे देश में अब देखने को नहीं मिलेगा। आईसीएमआर के पास मौजूद डाटा, तो इसी बात की तस्दीक कर रहा है। इसी के आधार पर अब कोरोना जैसी महामारी को एंडेमिक निपाह जैसी बीमारी के बराबर रखा गया है। रूप बदल कर आता रहेगा वायरस : डॉक्टर पांडा कहते हैं कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के पास अलग-अलग राज्यों से पहुंच रहे इस बीमारी से संक्रमित लोगों के आंकड़े पूरी तरह से सामान्य हालात की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि उनकी टीम लगातार इस वायरस के म्यूटेशन और इस वायरस के जिनोमिक्स को स्टडी करती रहती है। लेकिन अब यह प्रक्रिया बिल्कुल एंडेमिक हो चुके वायरस की स्टडी करने जैसा हो चुका है। प्रोफेसर पांडा का स्पष्ट कहना है कि कोरोना वायरस बिल्कुल गया नहीं है। यह वक्त-वक्त पर बदले हुए स्वरूप में आता रहेगा। संभव है कि कुछ इलाकों में इसका असर दिखे और कुछ इलाकों में यह बेअसर भी होगा। उनका कहना है कि देश में हुए टीकाकरण और लोगों में इस वायरस के खिलाफ बढ़े रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते वायरस अब महामारी जैसा रूप लेने की स्थिति में नहीं है। आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर सम्मेलन पांडा कहते हैं कि बहुत से राज्यों ने मास्क लगाने की छूट दे दी है। वह कहते हैं कि आज के हालात के मुताबिक ऐसी छूट जरूर दी गई है, लेकिन वह मानते हैं कि लोगों को मास्क लगाना चाहिए। प्रोफेसर पांडा के मुताबिक मास्क सिर्फ कोरोना वायरस से ही नहीं बचाता है बल्कि प्रदूषण से लेकर बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से भी सुरक्षा करता है। उनका कहना है कि बुजुर्गों और खासतौर से गंभीर बीमारियों वाले लोगों को तो मास्क वैसे भी लगा कर रखना चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि किसी भी तरीके का मास्क बीमार व्यक्ति को इंफेक्शन के कारण होने वाली गंभीरता से बचाता है।

Published / 2022-04-04 15:35:57
देश को जल्द मिलेगा कोरोना टीका का नया वर्जन

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी के दौरान देश को वैक्सीन के मामले में विश्व में अग्रणी बनाने वाली देसी कंपनी भारत बायोटेक की नजर देश में दूसरी बीमारियों को लेकर वैक्सीन बनाने को लेकर है। हैदराबाद में कंपनी के भविष्य को लेकर डॉ कृष्णा एल्ला ने बताया कि कॉलरा को लेकर काफी काम हो रहा है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो देश में जल्द ही कॉलरा का वैक्सीन भी उपलब्ध होगा। डॉ कृष्णा एल्ला ने बताया कि कॉलरा के वैक्सीन को लेकर भारत बॉयोटेक की स्टडी चल रही है। यह लगभग अंतिम चरण में है। अभी तक की सफलता काफी सकारात्मक है। इस वैक्सीन को लेकर हम केन्द्र सरकार के भी सम्पर्क में हैं। ह्यूमन ट्रॉयल और दूसरी बुनियादी मानकों को पूरा करने के बाद जल्द ही यह आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। कॉलरा एक आंतों की बीमारी है जो जलजनित बीमारियों का मूलरूप है। यह मल-मौखिक मार्ग से फैलता है। यदि भारत की बात करें तो ऐसे इलाके जहां दूषित जल का प्रवाह अधिक है वहां यह बीमारी बड़ी संख्या में देखने को मिलती है। इसका संक्रमण भी आबादी के माध्यम से फैलता है। कोविड वैक्सीन का नया वर्जन जल्द ही : सूत्रों के अनुसार डब्ल्यूएचओ ने फैसिलिटी विजिट की थी और उसके बाद फैसिलिटी में जीएमपी (गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस) के तहत कुछ बदलाव करने को कहा है। कंपनी ने इसे बहुत ही सकारात्मकता से लिया है और इस तकनीकी बदलाव को करने में 4 से 6 महीने का वक्त लग सकता है। इसमें करोड़ों रुपए की लगता आएगी। कोविड के सभी आर्डर पूरे : भारत बॉयोटेक से मिली जानकारी के अनुसार फरवरी से कोरोना वैक्सीन का प्रोडक्शन कम करना शुरू कर दिया था, इसके बारे में प्लानिंग हो चुकी है। ज्यादातर आॅर्डर पूरे किए गए है। अंकलेश्वर की फैसिलिटी और कुछ और फैसिलिटी बंद करने का फैसला किया है। वहीं कुछ में कोवैक्सीन का प्रोडक्शन कम किया जोेगा क्योंकि ज्यादातर सप्लाई पूरी की जा चुकी है और अभी डिमांड उतनी नहीं है।

Published / 2022-04-02 17:40:42
ओमिक्रॉन से 10% ज्यादा संक्रामक है कोरोना का नया XE वैरिएंट

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर के ज्यादातर देशों में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार गिरावट आ रही है और भारत में भी केस कम होने की वजह से कई तरह की कोविड से जुड़ी पाबंदियों को खत्म किया जा रहा है। लेकिन इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि नोवेल कोरोना वायरस का एक नया म्यूटेंट, जिसे XE के नाम से जाना जाता है, ओमिक्रॉन के BA.2 सब वेरिएंट की तुलना में करीब दस फीसदी अधिक संक्रमणीय है। भले ही कोरोना के मामले कम हो रहे हों और लोग राहत की सांस ले रहे हों, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि XE नाम का कोरोना वायरस का नया म्यूटेंट है, जो ओमिक्रॉन के BA.2 सब वेरिएंट की तुलना में लगभग दस प्रतिशत अधिक संक्रमणीय प्रतीत होता है। ओमिक्रॉन के BA.2 सब-वेरिएंट को अब तक कोविड-19 के ज्ञात सबसे संक्रामक स्ट्रेन माना जाता था। XE वेरिएंट क्या है : नया वेरिएंट, XE, Omicron के दो वेरिएंट्स (BA.1 और BA.2) का एक म्यूटेंट हाइब्रिड है और हाइब्रिड म्यूटेंट वेरिएंट से इस समय दुनिया भर में कुछ ही केस सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में कहा था, XE recombinant (BA.1-BA.2), पहली बार 19 जनवरी को ब्रिटेन में पाया गया था और तब से 600 से कम अनुक्रमों की रिपोर्ट और पुष्टि की गई है। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने कहा, शुरुआती अनुमान के आधार पर कह सकते हैं कि BA.2 की तुलना में 10 प्रतिशत की सामुदायिक संक्रमण की संभावना का संकेत देते हैं, हालांकि, इस खोज को और पुष्टि की जरूरत है। जब तक XE म्यूटेंट में गंभीरता और संचरण सहित विशेषताओं में महत्वपूर्ण अंतर का पता नहीं चल जाता है, तब तक इसे डब्ल्यूएचओ के अनुसार ओमिक्रॉन वेरिएंट के हिस्से के रूप में ही वर्गीकृत किया जाना जारी रहेगा। इस बीच भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,260 नए केस आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,30,27,035 हो गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 13,445 रह गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आज शनिवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, 83 मरीजों के जान गंवाने से कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,21,264 हो गई है। जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है। कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.76 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 227 मामलों की कमी दर्ज की गई है।।वहीं, संक्रमण की दैनिक दर 0.24 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.23 प्रतिशत रिकॉर्ड हुई है।

Published / 2022-04-02 07:21:17
स्टडी : बूस्टर डोज से ही ओमिक्रॉन संक्रमण से बचाव संभव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले में कोविशील्ड, कोवैक्सीन और दोनों के मिश्रण की खुराक ले चुके लोगों में एंटीबॉडी का स्तर छह महीने के बाद घटने लगता है। पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के एक अध्ययन से यह संकेत मिला है। एनआईवी में वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा कि डेल्टा और अन्य चिंताजनक स्वरूप के मामले में पहली खुराक में कोविशील्ड और दूसरी खुराक में कोवैक्सीन दिए जाने पर अच्छे नतीजे मिले। स्टडी के नतीजे जर्नल ऑफ ट्रैवल मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं। अध्ययन के तहत तीन श्रेणियों में टीके के प्रभाव का आकलन किया गया और परीक्षण के तहत सभी लोगों की करीबी तौर पर निगरानी की गई। अध्ययन से पता चला कि ओमिक्रॉन के मामले में टीकाकरण के बाद बनी प्रतिरोधी क्षमता छह महीने बाद कमजोर होने लगी। इससे टीकाकरण रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। अध्ययन में तीन समूह शामिल थे। 18 व्यक्तियों का एक विषम समूह था, जिन्हें यूपी में अनजाने में कोविशील्ड की पहली खुराक और कोवैक्सिन की दूसरी खुराक दी गई थी। अन्य दो समूहों में 40 व्यक्ति शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक को कोविशील्ड या कोवैक्सिन की दो खुराक प्राप्त हुई थी। एनआईवी की वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा, तीनों समूहों की बारीकी से निगरानी की गई। इस दौरान पाया गया कि जिन लोगों को कोविशील्ड की पहली और कोवैक्सिन की दूसरी खुराक लगी थी, उनमें डेल्टा और अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ काफी अच्छी एंटीबॉडी पाई गई। वहीं, जिन लोगों को एक ही वैक्सीन की दोनों खुराक लगी थी, उनमें तुलनात्मक तौर पर एंटीबॉडी थोड़ी कम रही। अब तक की स्टडी में यह बात सामने आई है कि ओमिक्रॉन से रिकवर होने के लिए बूस्टर डोज जरूरी है।

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