एबीएन हेल्थ डेस्क। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां पिछले 24 घंटों में 739 नए केस दर्ज हुए हैं, जो कि कल आए मामलों से ज्यादा है। इसके साथ ही मुंबई में कोविड पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 8.4% पर पहुंच गया है। जबकि मंगलवार को यह दर 6 फीसदी थी। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बीएमसी ने टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और इसके लिए युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत बतलाई। शहर में इस साल 1 फरवरी के बाद से बुधवार को सबसे ज्यादा कोविड के 739 केस सामने आए हैं। इस बीच बीएमसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मॉनसून के नजदीक होने के कारण अब कोविड-19 केस में तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए बीएमसी ने टेस्टिंग बढ़ाने और अस्पतालों को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। साथ ही 12-18 साल के आयु वर्ग की कैटेगरी में टीकाकरण अभियान और बूस्टर डोज को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कहा है। वहीं मुंबई में अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक से उछाल देखने को मिला है। अप्रैल की तुलना में मई में कोविड महामारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 231 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोमवार तक, शहर के अस्पतालों में 215 मरीज दाखिले हुए, जबकि अप्रैल में ऐसे मरीजों की तादाद सिर्फ 65 थी। हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि महाराष्ट्र के उन जिलों के लोगों को मास्क लगाने समेत तमाम सावधानी बरतनी चाहिए, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं। वहीं मुंबई में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.4 के चार और BA.5 के तीन मरीज मिले हैं। इससे चिंता और बढ़ गई है क्योंकि ये सब वेरिएंट अति संक्रामक माने गए हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत बायोटेक ने घोषणा की है कि कोवैक्सिन डोज का वैक्सीनेशन फिर से शुरू होगा। कंपनी ने ट्वीट किया कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कोवैक्सिन के 2/3 फेज के क्लिनिकल ट्रायल पर रोक हटने के बाद अमेरिका में यह डोज फिर से शुरू हो जाएगी। Covaxin को भारत में वयस्कों में इस्तेमाल के लिए अप्रूव (मंजूर) किया गया है और इसे 25 देशों में इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए भी ऑथोराइज किया गया है जबकि EUA के आवेदन 60 से अधिक अन्य देशों में लंबित (पेंडिंग) हैं। हालांकि Covaxin कई बार डिले और रिजेक्शन में शामिल रही है। कोवैक्सिन को कब और क्यों होल्ड पर रखा गया था? 12 अप्रैल 2022 को USFDA ने भारत बायोटेक के COVID-19 वैक्सीन Covaxin के फेज 2/3 के क्लिनिकल ट्रायल पर रोक लगा दी थी। Covaxin के लिए US और कनाडा के लिए भारत बायोटेक के पार्टनर Ocugen Inc की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक Covaxin मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की टिप्पणियों के बाद इसे अस्थाई रूप से रोकने का FDA का निर्णय अमेरिकी फर्म के निर्णय पर आधारित था। WHO ने क्या कहा : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2 अप्रैल 2022 को जारी एक बयान में संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों के माध्यम से भारत बायोटेक द्वारा प्रोड्यूस कोवैक्सिन की आपूर्ति के निलंबन की पुष्टि की थी। WHO ने अपने बयान में कहा, यह निलंबन डब्ल्यूएचओ के बाद के EUL निरीक्षण (14-22 मार्च, 2022) के परिणामों और भारत बायोटेक के विनिर्माण संयंत्रो में जीएमपी (GMP- Good Manufacturing Practice) की कमियों की पहचान के चलते किया गया, जिन्हें दूर करने के लिए इसे अपग्रेड करने की जरूरत है। निर्यात के लिए उत्पादन ठप होने से कोवैक्सिन की आपूर्ति बाधित होगी। Covaxin को WHO से इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) में देरी का भी सामना करना पड़ा। 9 जुलाई 2021 को भारत बायोटेक ने इमरजेंसी यूज लिस्टिंग के लिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट (दस्तावेज) जमा किए। WHO ने Covaxin पर और सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण के लिए भारत बायोटेक को वो प्रश्न भेजे गए हैं। जब इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) में वैक्सीन को मंजूरी देने की बात आती है तो WHO का एक प्रोसीजर निर्धारित होता है। यह मैन्युफैक्चरर के एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI), WHO और मैन्युफैक्चरर के बीच पूर्व-सत्र बैठक, WHO द्वारा समीक्षा के लिए डोजियर की स्वीकृति, मूल्यांकन की स्थिति पर निर्णय और स्वीकृति पर अंतिम निर्णय के साथ शुरू होता है। जब कोवैक्सिन की बात आती है तो WHO ने भारत बायोटेक के EoI को यह कहकर खारिज कर दिया कि और जानकारी की जरूरत है। रिजेक्शन और डिले की टाइमलाइन : • 19 अप्रैल 2021 को हैदराबाद स्थित कंपनी ने अपना एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रोवाइड करके WHO की मंजूरी के लिए आवेदन किया। • 9 जुलाई 2021 को भारत बायोटेक ने इमरजेंसी यूज लिस्टिंग के लिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जमा किए। • भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ कृष्णा ईला ने इसकी पुष्टि भी की। इससे ठीक पहले कंपनी की सह-संस्थापक और संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा ईला ने कहा कि WHO की मंजूरी लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया नहीं होगी ऐसी उन्हें उम्मीद है। • 10 जून 2021 को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेरिका में Covaxin के EUA के लिए Ocugen Inc के प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया। • FDA ने भारत बायोटेक के प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि कंपनी ने इस साल मार्च से आंशिक परीक्षण डेटा (पार्शियल ट्रायल डेटा) जमा किया था। Ocugen Inc भारत बायोटेक का पार्टनर है, जो अमेरिकी मार्केट के लिए Covaxin को को-डेवलप कर रहा है। इसने घोषणा की कि वह अब भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के लिए इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) के बजाय अमेरिका में इस्तेमाल के लिए टीके को पूर्ण मंजूरी दिलाने की ओर बढ़ेंगे।
टीम एबीएन, रांची। हार्ट फेल्योर एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिल द्वारा ब्लड पम्प करने की क्षमता कम हो जाती है या फिर दिल में पर्याप्त मात्रा में ब्लड भर नहीं पाता है। ऐसे में मरीज के शरीर को पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं मिल पाता है, जिससे मरीज को दैनिक दिनचर्या में तकलीफ तो होती ही है साथ ही मरीज की जान भी जा सकती है। ये बातें मेदांता अस्पताल रांची के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मुकेश अग्रवाल ने बताई। हार्ट फेल्योर की बीमारी पर बात करते हुए डॉ मुकेश अग्रवाल कहते है कि इसका प्रमुख कारण हार्ट अटैक, कार्डियोमायोपैथी, जन्मजात हार्ट की बीमारी, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, दिल का अनियंत्रित धड़कना, गुर्दा की बीमारी, मोटापा है। इसके साथ ही तम्बाकू, शराब या किसी नशा का सेवन करने से या वैसी दवाइयां जो दिल को नुकसान पहुंचाती हो को लेने से हार्ट का खतरा बढ़ता है। हार्ट फेल्योर के प्रमुख लक्षणों के बारे में डॉ मुकेश अग्रवाल कहते हैं कि सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ, थकावट, कमजोरी, पांव और पेट का फूलना, वजन का बढ़ना, रात में बार-बार पेशाब आना, धड़कन का बढ़ जाना, सूखी खांसी आना, भूख कम लगना और पेट भरा-भरा लगना जैसी तकलीफें हार्ट फेल्योर के शुरुआती लक्षण है। यदि हार्ट फेल्योर बहुत अधिक हो तो मरीज को बेड पर लेटने में तकलीफ होती है, लेटने पर सांस फूलने लगती है, कुछ केस में मरीज को सांस फूलने के कारण बेचैनी होती है और उसे बेड से उठना पड़ता है, खिड़की के पास जाकर सांस लेने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में लक्षणों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। थोड़ी भी देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। हार्ट फेल्योर के उपचार में डॉक्टर द्वारा मरीज को दवाएं दी जाती है, नियमित व्यायाम करने, सभी प्रकार के नशा का सेवन बंद करने, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप एवं हाई कोलेस्ट्रॉल का उचित इलाज किया जाता है। गंभीर मरीजों को हार्ट की सर्जरी कर जान बचाई जाती है। पानी एवं नमक का सेवन कम करने की जरूरत होती है। मरीज अपनी जीवनशैली को ठीक रख हार्ट फेल्योर से बच सकते है। जीवनशैली में सुधार लाने या अच्छी जीवनशैली अपनाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि मेदांता अस्पताल रांची में हार्ट के इलाज की सभी विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में हार्ट से जुड़ी लगभग सभी तरह की सर्जरी हो रही है। मेदांता अस्पताल रांची में हार्ट की बीमारियों का इलाज आधुनिक तकनीक से अनुभवी चिकित्सकों द्वारा होता है। यहां हार्ट के हजारों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरल से के बाद दुनिया में एक ओर नई बीमारी तेजी से फैल रही है। इस नी बीमारी का नाम मंकीपॉक्स है जो 12 देशों में फैल चुका है। बता दें कि दुनिया भर में मंकीपॉक्स के 92 मरीज मिल चुके हैं और ये सारे केस यूके, यूरोपीय देश, उत्तरी अमेरिका और आॅस्ट्रेलिया समेत 12 देशों में मिले हैं। वहीं इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि जिन देशों में यह संक्रमण नहीं फैला है, वहां मंकीपॉक्स के और अधिक मामले सामने आ सकते हैं इसके अलावा मंकीपॉक्स फिजिकल कॉन्टैक्ट में आए लोगों में अधिक फैल रहा है। वहीं हऌड के आॅफिसर डेविड हेमैन के अनुसार, मंकीपॉक्स इंसानों में शारीरिक संबंध के जरिए ज्यादा फैल रहा है और इस कारण दुनिया भर में इसके मामले बढ़ रहे हैं। हऌड के मुताबिक, साउथ अफ्रीकन देशों में हर साल मंकीपॉक्स से हजारों लोग संक्रमित होते हैं। क्या है मंकीपॉक्स : यह वायरस आम तौर पर जानवरों से इंसानों में फैलता है। मंकीपॉक्स एचआइवी की तरह जूनोटिक है जो शुरू में मंकी वायरस के रूप में आया था। मंकीपॉक्स के लक्षण : बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान का अनुभव के साथ चेहरे और हाथों पर दाने और घाव होना।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के बाद दुनिया एक नई तरह की बीमारी की चेपट में है। इस बीमारी का नाम है मंकीपॉक्स वायरस जिसका अब कम्यूनिटी ट्रांसमिशन हो रहा है। ब्रिटेन में हेल्थ एजेंसी के मुताबिक देश में मंकीपॉक्स वायरस फैलना शुरू हो गया है। यूकेएचएसए के मुख्य चिकित्सा सलाहकार सुसान हॉपकिंस ने कहा- हम ऐसे मामलों का पता लगा रहे हैं जिनका पश्चिम अफ्रीका के किसी व्यक्ति के साथ कोई संपर्क नहीं रहा है फिर भी वो इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के रोज के आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। सुसान हॉपकिंस के मुताबिक ग्रामीण इलाकों की अपेक्षा शहरी इलाकों में ये बीमारी तेजी से फैल रही है। उन्होंने कहा कि इस बीमारी के प्रति लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- अधिकांश वयस्कों में इस बीमारी के लक्ष्ण हल्के हो सकते हैं लिहाजा मंकीपॉक्स के लक्ष्ण को अनदेखा ना करें और तुरंत इसकी सूचना निकटतम स्वास्थ्य केंद्र को दें और डॉक्टर से संपर्क करें। गौरतलब है कि ब्रिटेन में 7 मई को पहली बार इस बीमारी के लक्ष्ण एक मरीज में देखने को मिले थे जिसने हाल ही में नाइजीरिया की यात्रा की थी। धीरे-धीरे ये बीमारी अब यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी फैल रही है। मंकीपॉक्स वायरस किसी संक्रमित व्यक्ति का बिस्तर या उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए तौलिए के दोबारा इस्तेमाल से फैलता है। इसके लक्षणों में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, थकावट और हाथों और चेहरे पर चेचक जैसे दाने शामिल हैं। इस बीमारी का कोई अलग उपचार नहीं है लेकिन चेचक के खिलाफ टीकाकरण मंकीपॉक्स को रोकने में लगभग 85 प्रतिशत प्रभावी पाया गया है। यूके के अधिकारी नादिम जाहवी के मुताबिक सरकार ने चेचक के टीके के स्टॉक खरीदना शुरू कर दिया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोविड-19 के 2,323 नए मामले सामने आने से देश में कोरोना वायरस से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,31,34,145 हो गई है। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 14,996 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 25 और मरीजों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5,24,348 पर पहुंच गई है। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.75 फीसदी है। मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 48 की कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण की दैनिक दर 0.47 प्रतिशत, साप्ताहिक दर 0.51 प्रतिशत है। वहीं, देश में कोविड-19 से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,25,94,801 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.22 प्रतिशत है। मंत्रालय ने बताया कि देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 192.12 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर 2020 को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 26 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार हो गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, जिन 25 और मरीजों की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है, उनमें से 23 की केरल में तथा उत्तर प्रदेश और मिजोरम में एक-एक मरीज की मृत्यु हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक जिन लोगों की कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि उसके आंकड़ों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के साथ मिलान किया जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीआईपी कांके के निदेशक डॉ दास ने कहा, इस साल हीट वेव का राज्य में असर दिखा है। रांची में 22 साल में ऐसा नहीं हुआ था। हीट वेव व पोस्ट कोविड की परेशानियों के चलते सीआईपी में 15-20 फीसदी तक मानसिक मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉ दास ने कहा, संस्थान में रोज करीब 300 मानसिक रोगी ओपीडी में आते हैं। इनमें से 120 मरीज नए होते हैं। जबकि अन्य मरीज फॉलोअप के लिए आते हैं। इसके अलावा हर दिन 550 से अधिक भर्ती मरीजों की देखरेख की जाती है। सीआईपी कांके ने मंगलवार को 105वीं वर्षगांठ मनाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रिम्स निदेशक डॉ कामेश्वर प्रसाद व विशिष्ट अतिथि इनकम टैक्स विभाग के चीफ प्रिंसिपल कमिशनर राकेश मिश्रा थे। मौके पर डॉ कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि सीआईपी के कारण ही देश में रांची की पहचान है। इस संस्थान ने देशभर के मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त किया है। सीआईपी में पिछले एक साल में ही 136 से अधिक विषयों पर शोध हुए हैं। डॉ दास ने कहा, पहले कभी भी 100 से अधिक विषयों पर शोध नहीं हुए थे। सीआईपी में अब अधिकाधिक शोध किए जा रहे हैं। संस्थान में पिछले दो साल में 7 नए क्लीनिक शुरू किए गए हैं। इससे पहले 13 क्लीनिक थे। डॉ ने बताया कि संस्थान की 17 मई 1918 को हुई थी। उस समय सिर्फ यूरोपियन मरीजों का इलाज होता था। इसलिए पहले इसे यूरोपियन मेंटल असाइलम के नाम से जाना जाता था। तब से लेकर अब तक पांच बार इसका नाम बदला गया है। यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल, हॉस्पिटल फॉर मेंटल डीसिजेज व इंटरप्रोवेंसियल मेंटल हॉस्पिटल भी नाम रखा गया है। कार्यक्रम में सीआईपी का न्यूजलेटर जारी किया गया। साथ ही विभिन्न श्रेणियों में बेहतर काम करने वाले कर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं, दूसरी पाली में एलुमनी मीट का आयोजन हुआ। इसके अलावा 10 व 25 साल पहले के बैच के छात्रों का स्पेशल रीयूनियन का आयोजन हुआ। मौके पर सीआईपी के एलुमनी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का भी चयन किया गया। समारोह में मेंटल हेल्थ इन पोस्ट कोविड वर्ल्ड विषय पर सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े असर व लोगों की परेशानियों पर चर्चा की।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नॉर्थ कोरिया में इन दिनों कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। वहां एक हफ्ते पहले ही कोरोना का पहला केस मिला था। उसके बाद से मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है। हालात काबू करने के लिए सेना को उतार दिया गया है। कोरिया में कोरोना सिर्फ उसी के लिए चिंता का सबब नहीं है, पूरी दुनिया को भी मुश्किल में डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि उत्तर कोरिया जैसी जगहों से कोरोना का नया वैरिएंट पैदा हो सकता है। कोरिया में गैर टीकाकरण वाले लोगों के बीच में कोरोना वायरस के संक्रमण के उच्च स्तर पर पहुंचने का खतरा बना हुआ है। उत्तर कोरिया विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य है, लेकिन एक अलग थलग देश है। वह अपने पहले कोविड-19 के प्रकोप से ही निजात नहीं पा सका है। ऐसे में वैक्सीन की कमी और चिकित्सकीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में वहां कोरोना फैलने का खतरा बढ़ रहा है। उत्तर कोरिया में कोरोना के प्रकोप के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक माइक रायन ने कहा कि अगर कोई देश उपलब्ध तरीकों का इस्तेमाल नहीं करता है तो निश्चित तौर पर यह एक चिंता की बात हो सकती है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बार-बार यह चेतावनी दी है कि जहां संक्रमण की जानकारी या जांच नहीं होती है, वहीं से नए वैरियंट के उभरने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम घेब्रियेसिस ने भी कहा कि गैर टीकाकरण वाले लोगों में वायरस का फैलना बहुत ज्यादा चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने पहले कहा था कि प्योंगयांग ने अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत प्रकोप के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया है। यह एक प्रकार से कानूनी दायित्वों का साफ तौर पर उल्लंघन है। यह पूछने पर कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्या प्रतिक्रिया थी, रेयान का कहना था कि संस्था पूरी तरह से तैयार थी, लेकिन संप्रभु राष्ट्र में हस्तक्षेप का उनके पास अधिकार नहीं था। पिछले दो साल से कोरोना ने जब पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया था, तब भी नॉर्थ कोरिया अपनी सख्त पाबंदियों की वजह से इसकी चपेट में आने से बचा रहा। वहां कोरोना का पहला केस अभी 8 मई को दर्ज हुआ है। एक हफ्ते के अंदर ही वहां 168 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। एक व्यक्ति की मौत हुई है। हालांकि डेढ़ लाख से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इस बुखार ने 56 लोगों की जान भी ले ली है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि हेल्थ सिस्टम के मामले में नॉर्थ कोरिया की स्थिति दुनिया के सबसे खराब देशों में से एक है।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse