हेल्थ

View All
Published / 2022-07-27 12:54:25
बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों से बचाता है टीका

टीम एबीएन, मेदिनीनगर, (पलामू)। टीका 12 तरह की जानलेवा बीमारियों से बचाव करता है। किसी बीमारी के विरुद्ध प्रतिरोधात्मक क्षमता (इम्यूनिटी) विकसित करने के लिए जो दवा खिलाई/पिलाई या किसी अन्य रूप में दी जाती है, उसे टीका (वैक्सीन) कहते हैं। यह क्रिया ही टीकाकरण (वैक्सीनेशन) कहलाती है। संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए टीकाकरण सर्वाधिक प्रभावी विधि मानी जाती है। यह जानकारी बुधवार को एएनएम को दी गई। सिविल सर्जन सभागार में सभी प्रखंडों से 2-2 एएनएम को रिफ्रेशर कोर्स में नियमित टीकाकरण से सम्बंधित प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों को ससमय टीका के माध्यम से प्रतिरक्षित करने एवं समुदाय को गुणवत्तापूर्ण सेवा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार के निर्देश पर सभी एएनएम का रिफ्रेशर ट्रेनिंग कराया जा रहा है। मौके पर प्रभारी डीआरसीएचओ डॉ. रजी, यूनिसेफ के क्षेत्रीय समन्वयक मनीष प्रियदर्शी, वीसीसीएम अमित कुमार ने प्रशिक्षण दिया। केके शर्मा द्वारा सभी प्रशिक्षणार्थियों को टीकाकरण के रिपोर्टिंग से सम्बंधित जानकारी दी गई। इन 12 बीमारियों से बचाता है टीका : बीसीजी का टीका बच्चों को टीबी से बचाव करता है। यह टीका बच्चे के जन्म के समय दिया जाता है। पेंटावैलेंट टीका बच्चों को पांच घातक रोगों से बचाता है। इनमें गलघोंटू, परटूसिस (काली खांसी), टेटनेस, हेपेटाइटिस बी और हिमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी (हिब) रोग से बचाव करता है। ओपीवी और एफआईपीवी का टीका पोलियो से बचाव करता है। रोटा का वैक्सीन बच्चों को रोटा वायरस से होने वाले डायरिया से बचाव करता है। पीसीवी का टीका निमोनिया से बचाव करता है। एमआर का टीका खसरा और रूबेला से बचाव करता है। जेई का टीका बच्चों को जापानी इंसेफ्लाइटिस से बचाव करता है। बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी का टीका बच्चों को जन्म के 24 घण्टे अंदर एवं ओपीवी 0 जन्म के 15 दिनों के अंदर दिया जाता है। ओपीवी, पेंटा, पीसीवी, रोटा, एफईपीवी का टीका डेढ़ महीने में दिया जाता है। ओपीवी, पेंटा, रोटा का दूसरा डोज ढाई महीने में, ओपीवी, पेंटा, रोटा का तीसरा डोज व पीसीवी व एफआईवी का दूसरा डोज साढ़े तीन महीने में और एमआर, जेई, पीसीवी बूस्टर का टीका 9 महीने में पड़ जाने पर फुल इम्यूनाइजेशन और 16 से 24 महीने के अंदर डीपीटीबी, ओपीवीबी, जेई और एमआर का दूसरा डोज पड़ जाने को कम्पलीट इम्यूनाइजेशन कहते हैं। टीकाकरण पूरी तरह से सुरक्षित है।

Published / 2022-07-26 07:32:31
दिल्ली आ चुके मंकीपॉक्स पर जानें डॉक्टरों की जानें सलाह; लक्षण भी पहचान लें...

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ कि मंकीपॉक्स नाम की बीमारी ने देश में दस्तक दे दी है। केरल के बाद राजधानी दिल्ली में भी इस वायरस से ग्रस्त एक मरीज एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती है। अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में हजारों लोगों को संक्रमित करने के बाद यह बीमारी भारत आई है और देश के कई शहरों में इससे लड़ने की तैयारी की जा रही है। पूरे शरीर पर लाल दाने उभरने के अलावा इस बीमारी के लक्षण क्या हैं, कैसे यह यह वायरल फैलता है और सेक्स से इसका क्या कनेक्शन है। आइए हम आपको मंकीपॉक्स से जुड़े हर सवाल का जवाब आपको बताते हैं। मंकीपॉक्स से संक्रमित शख्स के संपर्क में आने से यह वायरल एक से दूसरे शख्स तक पहुंचता है। खास तौर पर यदि संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर उभरे दानों को छूने पर। मंकीपॉक्स से संक्रमित व्यक्ति को छूने के अलावा उसके कपड़े, टॉवल, बिस्तर आदि साझा करने पर भी यह संक्रमण फैलता है। करीब बैठे संक्रमित की छींक या खांसी से निकले ड्रॉपलेट्स से भी यह संक्रमण एक से दूसरे व्यक्ति को हो सकता है। मंकीपॉक्स के लक्षण संक्रमित होने के 5 से 21 दिन के भीतर दिखाई पड़ते हैं। मंकीपॉक्स संक्रमण के बाद तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर दर्द, कमर दर्द, ठंड लगना और थकावट जैसे प्राथमिक लक्षण दिखाई पड़ते हैं। इसके बाद शरीर पर चकते और लाल दाने दिखाई पड़ते हैं। चेहरे के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी यह दिखाई देते हैं। गुप्तांगों पर भी दाने निकलते हैं। कुछ सप्ताह बाद ये लक्षण आमतौर पर ठीक हो जाते हैं। मंकीपॉक्स संक्रमण किसी को भी हो सकता है। हालांकि, इसका सेक्स कनेक्शन भी सामने आया है। अभी तक दुनिया में इसके जितने केस आए हैं, उनमें से अधिकतर पुरुष हैं और गे हैं, यानी दूसरे पुरुषों के साथ उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए थे। डॉक्टर राम मनोहर लोलिया हॉस्पिटल में त्वचा रोग विभाग के प्रमुख डॉ करीब सरदाना ने भी टाइम्स ऑफ इंडिया में लिखे लेख में लोगों को मंकीपॉक्स से जुड़ी जानकारी देते हुए सुरक्षित सेक्स की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मंकीपॉक्स और अनसेफ सेक्स के बीच संबंध सामने आ रहा है। उन्होंने बताया कि जर्नल ऑफ मेडिकल वायरोलॉजी ने यूरोप और यूके के छह क्लस्टर के विश्लेषण में पाया है कि यह संक्रमण अधिकतर पुरुषों को हुआ है और चेहरे, पैर या हाथ से अधिक गुदा और अन्य गुप्तांगों पर इसका असर देखा गया है। यूके और न्यूयॉर्क सिटी के डेटा के बाद सेक्सुअल कॉन्टैक्ट को लेकर गाइडलाइंस जारी किए जा रहे हैं। खासतौर पर कंडोम के इस्तेमाल की सलाह दी जा रही है। उन्होंने कहा है कि संक्रमण फैलने का एकमात्र रास्ता नहीं है, बल्कि किसी भी तरह से करीबी संपर्क से यह संक्रमण फैल सकता है। कोरोना की तरह मंकीपॉक्स से बचाव के लिए भी डॉक्टर बार-बार हाथ धोने और सैनिटाइजर्स के इस्तेमाल की सलाह दे रहे हैं। अपने पार्टनर से सेक्सुअल हेल्थ के बारे में बात करें और सुनिश्चित कर लें कि किसी तरह का कोई लक्षण तो नहीं। यदि मंकीपॉक्स का कोई भी लक्षण हो तो सेक्स और दूसरे किसी व्यक्ति से संपर्क ना बनाएं। यदि किसी में लक्षण दिख रहा तो बिस्तर या टॉवल साझा न करें। एक मीटर से अधिक की दूरी बनाकर रखें। बीमार और लावारिश पशुओं से दूरी रखें। जिन देशों में मंकीपॉक्स के केस अधिक हैं, वहां जाने से परहेज कर सकते हैं।

Published / 2022-07-24 17:26:41
AIIMS के पूर्व निदेशक बोले- मंकीपॉक्स कोविड की तरह संक्रामक नहीं

एबीएन हेल्थ डेस्क। दिल्ली में मंकीपॉक्स का पहला मामला सामने आ चुका है। यह देश में मंकीपॉक्स का चौथा मामला है। इसके पहले मंकीपॉक्स के तीन मामले केरल में सामने आ चुके हैं। आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS), दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने कहा है कि मंकीपॉक्स से घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह कोविड 19 की तरह संक्रामक नहीं है और यह उसकी तरह तेजी से नहीं फैलता है। इसमें मृत्यु दर बहुत कम है और ज्यादातर मरीज 14-21 दिन में स्वस्थ हो जाते हैं। मंकीपॉक्स 99 फीसदी मामलों में समलैंगिक पुरुषों में होता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सहित देश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस तरह की बीमारी को हैंडल करने में पूरी तरह सक्षम है, लिहाजा यह चिंता का बड़ा कारण नहीं है। हालांकि, इससे बचने के लिए आवश्यक सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ एमसी मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि मंकीपॉक्स दुनिया के 74 देशों में फैल चुका है। अब तक इसके 16,836 मामले सामने आ चुके हैं। यह सबसे ज्यादा समलैंगिक पुरुषों में फैलता है, इसलिए इस तरह के संबंधों से बचने की कोशिश करनी चाहिए। जिन लोगों में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखाई पड़ते हैं, उनसे दूरी रखनी चाहिए। चूंकि, कोविड की तरह यह तेज संक्रामक नहीं है, इससे संक्रमण का खतरा कम है। मंकीपॉक्स पीड़ित मरीज के साथ लंबे समय तक संपर्क में रहने के बाद ही इस तरह की बीमारी होने की संभावना होती है। इस बीमारी में सबसे पहले चेचक की तरह बुखार आता है और मांसपेशियों में दर्द होता है। इसलिए लक्षण सामने आने के बाद सबसे पहले बुखार को कम करने का प्रयास किया जाता है। मंकीपॉक्स के सबसे ज्यादा केस स्पेन में 3125, अमेरिका में 2890, जर्मनी में 2268, ब्रिटेन में 2208 और फ़्रांस में 1567 मामले सामने आ चुके हैं। भारत में मंकीपॉक्स का पहला मामला केरल में आया था, जिसका मरीज विदेश से आया था। इसके बाद केरल में ही एक अन्य मामला भी विदेश से आये हुए मरीज का सामने आया था। तीसरा मरीज भी केरल से था, लेकिन इसका विदेश से कनेक्शन स्थापित नहीं हो पाया था। दिल्ली में सामने आए देश के चौथे मंकीपॉक्स के मरीज के भी विदेश से आने की कोई सूचना नहीं है। यह इस बात की ओर भी इशारा करता है कि मंकीपॉक्स का वायरस अन्य माध्यमों से भी फैल सकता है। ये हैं लक्षण : • मरीज में चेचक और वायरल बुखार से मिलते-जुलते लक्षण दिखाई पड़ते हैं। • इसमें मरीज को बुखार होता है, मांसपेशियों में दर्द होता है। • गर्दन और हाथ की चमड़ी पर 2-5 मिलीमीटर के फफोले पड़ जाते हैं। • इनमें पानी भर जाता है, गंभीर स्थिति में इसमें मवाद भर सकती है। • फफोले 21-28 दिन के अन्दर सूख जाते हैं और पपड़ी पड़ जाती है।

Published / 2022-07-23 17:19:51
WHO ने मंकीपॉक्स को घोषित किया "ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी"

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में नई बीमारी मंकीपॉक्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस एडनॉम ने कहा कि मंकीपॉक्स को वैश्विक आपातकाल घोषित किया है। भारत में अब तक मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आ चुके हैं।

Published / 2022-07-22 10:17:40
क्रोनिक किडनी मरीजों का सबसे बेहतर इलाज समय रहते ट्रांसप्लांट है : डॉ अमित कुमार

टीम एबीएन, रांची। किडनी के क्रोनिक मरीजों जिन्हें डायलिसिस की जरूरत होती है उनका सबसे बेहतर इलाज समय रहते ट्रांसप्लांट है। ट्रांसप्लांट करवा लेने से उन्हें गुणवत्तापूर्ण जीवन मिलता है और डायलिसिस से छुटकारा मिलता है। मरीज की बीमारी के इलाज में अच्छे परिणाम मिलते हैं। ये बातें मेदांता अस्पताल रांची में आयोजित मेदांता पेशेंट कनेक्ट इनिशिएटिव में अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ अमित कुमार ने कही। वे अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग की ओर से किडनी के मरीजों और उनके परिजनों के लिए आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि किडनी के मरीज अगर बेहतर इलाज करवाएं, अपनी दवाएं लेते रहे और संतुलित जीवनशैली अपनाएं तो लंबे समय तक बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं। अगर डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की समस्या है तो इसे नियंत्रित रखें। सूजन की समस्या है तो अपने डॉक्टर से मिलकर जांच और इलाज करवाएं। नियमित रूप से डॉक्टर के संपर्क में रहें। डॉक्टर की दी हुई दवाएं लेते रहे। उन्होंने कहा कि किडनी के मरीज जो डायलिसिस पर है, उन्हें और उनके परिजनों रहना जरूरी है। ऐसे लोग अपने आसपास के दूसरे मरीजों और उनके परिजनों को भी जागरूक करें। मौके पर उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों के विभिन्न सवालों का भी जवाब दिया। मौके पर डॉ अमित कुमार के साथ ही डॉ सिद्धार्थ मिश्रा ने भी मरीजों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि डायलिसिस पर कैसे रहा जाए। मेदांता अस्पताल रांची के डायरेक्टर डॉ विश्वजीत ने मेदांता पेशेंट कनेक्ट इनिशिएटिव कार्यक्रम में शामिल डॉक्टरों को बधाई देते हुए बताया कि आगे भी अन्य विभागों के लिए मेदांता पेशेंट कनेक्ट इनिशिएटिव कार्यक्रम आयोजित किए जायेंगे। उन्होंने कहा कि मेदांता रांची में सभी तरह का सुपर स्पेशियलिटी इलाज मौजूद है। इसके लिए अब दूसरे बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं है। यहां एक ही छत के नीचे सभी तरह का अत्याधुनिक इलाज अनुभवी डॉक्टरों द्वारा किया जाता है। मेदांता अस्पताल रांची ने बहुत कम समय में गुणवत्तापूर्ण इलाज से एक खास पहचान बनाई है। अब झारखंड के मरीजों को रांची में ही बेहतरीन इलाज मिलने लगा है। मेदांता अस्पताल रांची इलाज के साथ ही मरीजों को जागरूक करने की अपनी जिम्मेदारी भी बखूबी निभा रहा है।

Published / 2022-07-20 17:56:44
नौ राज्यों में तेजी से बढ़े कोरोना के मामले, स्वास्थ्य मंत्रालय ने की बैठक कर दिये निर्देश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्र ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से बुधवार को अपील की कि वे कोविड-19 की वजह से गृह पृथकवास में रह रहे मरीजों की कड़ाई से निगरानी करें ताकि वे समुदाय में संक्रमण का प्रसार नहीं कर सकें। केंद्र ने इसके साथ ही घर में ही जांच के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट (आरएटी) किट के प्रति जागरूकता फैलाने का भी आह्वान किया ताकि समय से बीमारी का पता लगाया जा सके। केंद्र ने राज्यों को सलाह दी है कि वे निगरानी करें और रोजाना जिले वार एसएआरआई (गंभीर श्वास संबंधी बीमारियों) और आईएलआई (इंफ्लुएंजा की बीमारी) के मामलों की जानकारी दें और इन बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के नमूनों को निर्धारित आईएनएसएसीओजी प्रायोगशाला आनुवंशिकी अनुक्रमण (जीनोम सिक्वेंसिंग) के लिए भेजें। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान के मुताबिक राज्यों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के अनुपात में जांच करने और सभी संक्रमितों (विदेश से आए यात्रियों)के आनुवंशिकी अनुक्रमण करने की सलाह दी गई है। साथ ही इंडियन सार्स-कोव-2 जिनोमिक कंस्टोरियम (आईएनएसएसीओजी) नेटवर्क के लिए स्थान की पहचान करने को कहा गया है ताकि पूर्ण आनुवंशिकी अनुक्रमण के लिए नमूनों को भेजा जा सके। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने बुधवार को नौ राज्यों में कोविड-19 की स्थिति की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए ये निर्देश जारी किए। इस बैठक में केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, असम, आंध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश के हालात की समीक्षा की गई। बयान के मुताबिक इन राज्यों में संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं या संक्रमण दर में वृद्धि देखी गई है। इस बैठक में नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ विनोद पॉल भी मौजूद रहे। गत एक महीने में कोविड-19 के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए पॉल ने कहा, हमें यह ध्यान में रखना है कि कोविड-19 खत्म नहीं हुआ है। वैश्विक परिदृश्य को देखिए, हमें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। कई राज्यों में लचर निगरानी, सीमित जांच, औसत से कम टीकाकरण मौजूदा समय में संक्रमण के मामलों में हो रही वृद्धि के कारण हैं। यान के मुताबिक पॉल ने राज्यों से अपील की कि जहां पर संक्रमण दर अधिक है, वहां पर जांच में सुधार किया जाए, निगरानी बढ़ाई जाए, उसके अनुरूप नीति में बदलाव किया जाए और टीकाकरण की गति बढ़ाई जाए। भूषण ने इस दौरान अहम कोविड-19 नियंत्रण और प्रबंधन रणनीति को रेखांकित किया। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि उच्च संक्रमण दर वाले सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में जांच की जरूरत है, जिसमें उच्च अनुपात आरटी-पीसीआर जांच का हो। किसी तरह की लापरवाही से इन जिलों में स्थिति खराब होगी। उन्होंने कहा कि गृह पृथकवास में रह रहे संक्रमितों की कड़ाई से निगरानी करने की जरूरत है ताकि वे पड़ोस, समुदाय, गांव, मोहल्ला, वार्ड आदि में न जा सकें और संक्रमण न फैला सकें।

Published / 2022-07-16 04:12:16
पूर्वी सिंहभूम में मिला जापानी बुखार का पहला मरीज, स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप

टीम एबीएन, जमशेदपुर/ रांची। जमशेदपुर के पूर्वी सिंहभूम जिले में जापानी बुखार का पहला मरीज मिला है। मरीज शहर के बारीडीह निवासी युवती है। सर्विलांस विभाग की जांच में यह पुष्टि होने के बाद हड़कंप मचा है, क्योंकि 2022 में पहली बार किसी मरीज की सैंपल जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। युवती का मर्सी अस्पताल में इलाज चल रहा है। रिपोर्ट आने से फाइलेरिया विभाग की टीम युवती के घर पहुंचकर लार्वा जांच का अभियान चलाया। इससे मच्छर का लार्वा मिला है, जिसे स्वास्थ्यकर्मियों ने नष्ट कर दिया। वहीं, क्षेत्र के निवासियों को जागरूक कर मच्छर से बचाव का उपाय बताया। जानकारी के अनुसार, युवती 10 जुलाई को बुखार, गले में खराश, हाथ-पैर में कंपन की शिकायत के कारण मर्सी अस्पताल में भर्ती हुई थी। संदेह होने पर अस्पताल ने सर्विलांस टीम को सूचना देकर सैंपल जांच कराई। हालांकि, स्वाइन फ्लू, डेंगू व जेई के संदेह में स्वास्थ्य विभाग ने अबतक 70 संदिग्ध मरीजों के सैंपल की जांच की है, लेकिन किसी में पुष्टि नहीं हुई थी। इधर, सर्विलांस पदाधिकारी डॉ साहिर पाल ने कहा कि बारिश में मच्छरजनित बीमारी का खतरा रहता है। बुखार, बदन दर्द व शरीर में अकड़न पर डॉक्टर से दिखाकर सैंपल की जांच करानी चाहिए।

Published / 2022-07-15 05:27:51
स्टडी का दावा : कोरोना को नाक में ही "बेदम" कर देगा फैबी स्प्रे

एबीएन हेल्थ डेस्क। हेल्थ जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे चरण के परीक्षण के परिणामों के अनुसार, भारत में COVID-19 के उच्च जोखिम वाले वयस्क मरीजों को दी गई नेजल स्प्रे (नाक के रास्ते लिया जाने वाला एंटी-कोविड स्प्रे) ने 24 घंटे के भीतर वायरल लोड को 94 प्रतिशत और 48 घंटे में 99 प्रतिशत तक कम कर दिया। इसी साल फरवरी में सरकार से अनुमति लेने वाले इस नेजल स्प्रे को "फैबी स्प्रे" नाम से लॉन्च किया गया था। मुंबई स्थित दवा कंपनी ग्लेनमार्क ने भारत में करीब 20 स्थानों पर टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले 306 वयस्कों पर नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे (NONS) का अध्ययन किया, जो COVID-19 से संक्रमित थे। ग्लेनमार्क की क्लीनिक डेवलपमेंट प्रमुख मोनिका टंडन ने कहा, नेजल स्प्रे का कोरोना संक्रमित मरीजों पर देश के 20 अस्पतालों में परीक्षण हुआ। इस दौरान हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों (जिन्होंने टीका लिया) और बिना टीका लेने वाले कोरोना मरीजों को अलग-अलग समूह में रखा गया। एक को नेजल स्प्रे यानी नाक के जरिए नाइट्रिक ऑक्साइड दी गई, जबकि दूसरे समूह को एक प्लेसीबो दिया गया। सात दिन बाद परिणामों की समीक्षा की गई तो असर का पता चला। उच्च जोखिम वाले कोरोना रोगियों, जिन्होंने नेजल स्प्रे लिया था, उनमें 24 घंटे के भीतर वायरल लोड में 94% तक की कमी देखी गई। नेजल स्प्रे का क्लीनिकल ट्रायल कोरोना के डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के सर्ज के दौरान किया गया था। शोध में पाया गया कि एनओएनएस प्राप्त करने वाले उच्च जोखिम वाले रोगियों में 24 घंटों के भीतर वायरल लोड में उल्लेखनीय कमी आई, जो 7 दिनों के उपचार के दौरान बनी रही। जर्नल में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि NONS के साथ उपचार के 24 घंटे के भीतर वायरल लोड 93.7 प्रतिशत और 48 घंटे के भीतर 99 प्रतिशत कम हो गया। टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले समूहों में इसी तरह के परिणाम देखे गए। रिसर्च पेपर के लेखकों में से एक और ग्लेनमार्क की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मोनिका टंडन ने कहा, मजबूत डबल-ब्लाइंड ट्रायल ने NONS की महत्वपूर्ण प्रभावकारिता और उल्लेखनीय सुरक्षा का प्रदर्शन किया। मोनिका टंडन ने एक बयान में कहा, इस थेरेपी में, COVID-19 प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। इसका उपयोग बहुत आसान है। रिसर्च पेपर में कहा गया है कि नाइट्रिक ऑक्साइड, कोरोनो के वायरस को नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करने से रोकता है, वायरस को मारता है और इसकी प्रतिकृति को रोकता है। यही वजह है कि एनओएनएस के साथ वायरल लोड इतनी तेजी से कम होता है। उपचार शुरू होने के बाद एनओएनएस समूह में वायरल इलाज का औसत समय 3 दिन और प्लेसीबो समूह में 7 दिन रहा। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस साल फरवरी में नेजल स्प्रे को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया था।

Page 36 of 57

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse