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Published / 2022-08-24 09:37:26
केंद्र ने राज्य सरकारों को चेताया : "टोमैटो फ्लू" को हल्के में मत लें...

एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्र सरकार ने देश में बच्चों के बीच "टोमेटो फ्लू" के 82 से अधिक मामले सामने आने के बाद मंगलवार को राज्य सरकारों को एहतियाती उपायों का पालन करने का निर्देश दिया। केंद्र ने इस बात पर भी जोर दिया कि इस वायरल रोग के इलाज के लिए कोई विशिष्ट दवा नहीं है। यह रोग हाथ, पैर व मुंह की बीमारी (HFMD) का एक स्वरूप प्रतीत होता है। यह मुख्य रूप से 10 साल से कम आयु के बच्चों में होता है, लेकिन वयस्क भी इसके शिकार हो सकते हैं। केंद्र द्वारा जारी एक परामर्श में कहा गया है कि बच्चों को बीमारी के संकेतों व लक्षणों और इसके दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। केंद्र ने कहा कि वैसे तो "टोमेटो फ्लू" में अन्य वायरल संक्रमणों की तरह (बुखार, थकान, बदन दर्द और त्वचा पर चकत्ते जैसे) लक्षण दिखते हैं, लेकिन इस वायरस का सार्स-कोव-2, मंकीपॉक्स, डेंगू या चिकुनगुनिया से कोई संबंध नहीं है। इस साल छह मई को केरल के कोल्लम जिले में "टोमेटो फ्लू" का पहला मामला सामने आया था और इसके अब तक 82 से अधिक मामले सामने आने की सूचना है।

Published / 2022-08-21 07:28:35
अब लीजिये... भारत में बढ़ा नई बीमारी ‘टोमैटो फ्लू’ का खतरा, जद में 5 साल तक के बच्चे

एबीएन हेल्थ डेस्क। एक तरफ भारत कोरोना वायरस और मंकीपॉक्स से जूझ रहा है। वहीं दूसरी तरफ भारत में एक नई बीमारी अपने पैर पसारने लगी है। यह बीमारी है हैंड, फूट एंड माउथ डिजीज (एचएफएमडी), जिसे टोमैटो फीवर भी कहा जा रहा है। अभी तक भारत में इस बीमारी के 82 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। यह मामले छह मई को केरल के कोल्लम जिले में मिले थे। लैंसेंट जॉर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इन सभी बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। इसका नाम भले ही टोमैटो फ्लू हो, लेकिन इसका टमाटर से कुछ लेना-देना नहीं है। लैसेंट की रिपोर्ट में कहा गया है कि एक तरफ हम कोविड-19 की चौथी लहर की संभावना को लेकर आशंकित हैं। वहीं दूसरी तरफ टोमैटो फ्लू नाम का नया वायरस नई मुसीबत बनकर सामने आ रहा है। यह वायरस केरल में पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में ले रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक यह केरल के अंचलीय इलाकों जैसे आर्याण्कावू और नेदुवातुर में फैल रहा है। बताया जा रहा है कि अचानक से इस बीमारी के फैलने के बाद पड़ोसी राज्यों तमिलनाडु और कर्नाटक में इसको लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। टोमैटो फ्लू या टोमैटो फीवर एक रेयर किस्म की वायरल बीमारी है। इसमें स्किन पर लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं, खुजली होती है और डिहाइड्रेशन की समस्या होती है। हालांकि इस बीमारी का टमाटर से कुछ लेना-देना नहीं है, लेकिन इसे टोमैटो-फ्लू इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस बीमारी में पड़ने वाले चकत्ते टमाटर से मिलते-जुलते होते हैं। यह संक्रामक रोक की श्रेणी में आता है और पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अपनी चपेट में ले लेता है।

Published / 2022-08-20 15:39:17
लैंसेट की रिपोर्ट... अब कहर बरपाने की तैयारी में ‘टोमेटो फ्लू’, 5 साल तक के बच्चे हो रहे संक्रमित

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में एक और नई बीमारी के पैर पसारने का खतरा मंडरा रहा है। यह रोग जिसे आमतौर पर ‘टोमेटो फ्लू’ कहा जाता है। बच्चों के हाथ, पैर और मुंह पर होने वाली एक संक्रामक बीमारी है। इससे जुड़े मामले केरल और ओडिशा में सामने आए हैं। लैंसेट रेस्पिरेटरी जर्नल के अनुसार, ‘टोमेटो फ्लू’ का मामला सबसे पहले केरल के कोल्लम में 6 मई को सामने आया था और अब तक 82 बच्चे इससे संक्रमित हो चुके हैं। लैंसेट की रिपोर्ट में बताया गया है कि ये सभी बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं। लैंसेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, हम फिलहाल कोविड -19 की चौथी लहर के संभावित खतरे से उभर रहे हैं, लेकिन इस बीच एक नया वायरस जिसे टोमैटो फ्लू, या टोमैटो फीवर के रूप में जाना जाता है, केरल में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में उभरा है। यह संक्रामक बीमारी 0 से 5 साल के बच्चों को अपनी चपेट में लेती है और वयस्कों में यह दुर्लभ होती है क्योंकि उनके पास वायरस से बचाव के लिए पर्याप्त प्रतिरक्षा प्रणाली होती है। बच्चों की त्वचा पर हो जाते हैं टमाटर की तरह लाल दाने : इस वायरल इंफेक्शन का नाम टोमेटो फ्लू इसलिए रखा गया है क्योंकि इससे संक्रमित होने पर बच्चों के शरीर पर टमाटर की तरह लाल रंग के दाने या चकते हो जाते हैं। टोमेटो फ्लू में थकान, मितली, उल्टी, दस्त, बुखार, पानी की कमी, जोड़ों की सूजन, शरीर में दर्द और सामान्य इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। केरल के अलावा ओडिशा में 26 बच्चे इस बीमारी से ग्रसित मिले हैं। केरल, तमिलनाडु और ओडिशा के अलावा, भारत में कोई अन्य क्षेत्र इस वायरस से प्रभावित नहीं है। टोमेटो फ्लू के मुख्य लक्षणों में डिहाइड्रेशन, त्वचा पर लाल निशान और खुजली शामिल हैं। हालांकि संक्रमित बच्चों में शरीर पर टमाटर जैसे चकत्ते और दाने, तेज बुखार और जोड़ों में दर्द आदि की समस्या देखने को भी मिल सकती है।

Published / 2022-08-19 17:23:28
कोरोना के बाद मंकीपॉक्स को मात देने के लिए स्वदेशी वैक्सीन की तैयारी में जुटीं सीरम समेत कई कंपनियां

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी के बाद देश इन दिनों मंकीपॉक्स के संकट का सामना कर रहा है। राज्यों में लगातार संक्रमण के मामले बढ़ते हुए दिखाई दे रहे है। बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार भी अलर्ट हो गई है। इसी बीच भारत ने अपना स्वदेशी मंकीपॉक्स टीका बनाने के लिए लगभग पूरी तरह से तैयार है। निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के टीका निर्माताओं सहित कई कंपनियों ने टीके तैयार करने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के साथ साझेदारी करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जैसी कुछ कंपनियां टीका तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ गठजोड़ करने के विकल्पों का आकलन भी कर रही हैं। एसआईआई के सूत्रों का कहना है कि कुछ टीके बनाने के लिए एमआरएनए टीके की तकनीक वाली अमेरिका की कंपनी ग्रीन लाइट बायोसाइंसेज के साथ करार किया है। हम उनके साथ मिलकर मंकीपॉक्स टीके पर भी कुछ करने पर विचार कर रहे हैं। यह एक ऐसी तकनीक है जिसके लिए अभी कुछ समय लगेगा। सूत्र ने कहा कि एसआईआई मंकीपॉक्स टीके बनाने के लिए अपने विकल्पों का आकलन कर रही है। इस बीमारी से पहले ही 90 से अधिक देशों में वैश्विक स्तर पर 38,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। चिंता का विषय यह है कि 85 से अधिक देशों ने 2022 से पहले कभी भी मंकीपॉक्स के प्रयोगशाला में पुष्ट मामलों की सूचना नहीं दी थी और यह बीमारी ज्यादातर अफ्रीका के कुछ हिस्सों में स्थानीय स्तर पर देखी गई थी। दरअसल, सीरम ने इस साल मार्च में ग्रीनलाइट के साथ तीन एमआरएनए उत्पाद डिजाइन करने के लिए करार किया है। जिसमें दाद खुजली के लिए भी टीका शामिल है। एसआईआई के पास दो अतिरिक्त टीके या इलाज के लक्ष्यों में विस्तार का विकल्प है। इस बीच भारत में एसआईआई उन कंपनियों में से एक है जिसने मंकीपॉक्स टीका बनाने के लिए आईसीएमआर के साथ सहयोग करने के लिए दिलचस्पी दिखाई है। हालांकि कंपनी ने इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं की। आईसीएमआर का राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान, पुणे पहले ही मंकीपॉक्स वायरस स्ट्रेन को अलग-थलग करने में सफल रहा है। जैसा कि उसने सार्स.सीओवी .2 महामारी के समय किया था। हैदराबाद की इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स और मुंबई की हाफकिन रिसर्च इंस्टीट्यूट जैसी सरकारी क्षेत्र की कंपनियां भी मंकीपॉक्स टीका बनाने की होड़ में जुट गई हैं। सूत्रों से संकेत मिलता है कि रूस के टीके स्पूतनिक वी कोविड-19 टीके के लिए भारतीय भागीदार कंपनी डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज भी मैदान में है। कंपनियां केंद्र सरकार के संदेश का कर रही है इंतजार : कई उद्योग सूत्रों ने संकेत दिया कि कंपनियां अब केंद्र से यह संदेश मिलने का इंतजार कर रही हैं कि चीजों को कैसे आगे बढ़ाया जाए। आईसीएमआर ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है कि वह किस कंपनी के साथ साझेदारी करेगा और अब अभिरुचि पत्र की जांच कर रहा है। यह साझेदार कंपनी से 5 प्रतिशत रॉयल्टी लेगा जबकि टीका बनाने वाली कंपनी क्लिनिकल परीक्षण करने के साथ ही टीका बनाने और इसके कारोबार के लिए जिम्मेदार होगी।

Published / 2022-08-19 05:53:00
विश्व में कोरोना : संक्रमण मामलों में आयी 24% की कमी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा बृहस्पतिवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस से संक्रमण के नए मामलों की संख्या में पिछले सप्ताह लगभग एक चौथाई की कमी आई वहीं मौतों की संख्या छह प्रतिशत घट गई लेकिन एशिया के कुछ हिस्सों में अभी भी यह अधिक है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी डब्ल्यूएचओ ने कहा कि पिछले सप्ताह कोरोना वायरस के 54 लाख नए मामले दर्ज किए गए जो उससे पिछले सप्ताह की तुलना में 24 प्रतिशत कम है। अफ्रीका और यूरोप में मामलों में करीब 40 प्रतिशत और मध्य पूर्व में एक तिहाई कमी आई है। पश्चिमी प्रशांत और दक्षिण पूर्व एशिया में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में क्रमशः 31 प्रतिशत और 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसुस ने बुधवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि पिछले एक महीने में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह 15,000 मौतें हुईं। उन्होंने कहा, एक सप्ताह में 15,000 मौतें किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं हैं, जबकि हमारे पास संक्रमण को रोकने और जीवन बचाने के लिए सभी उपकरण हैं। उन्होंने कहा कि हर हफ्ते साझा किए जाने वाले वायरस अनुक्रमों की संख्या 90 प्रतिशत तक कम हो गई है जिससे वैज्ञानिकों के लिए यह पता करना मुश्किल हो गया है कि कोविड-19 कैसे उत्परिवर्तित हो सकता है।

Published / 2022-08-17 06:57:19
कोरोना : कितना खतरनाक है 20 देशों में फैल चुका नया सेंटोरस वेरिएंट वायरस

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत के कई शहरों में कोरोना के बढ़ते केसों के बीच वैज्ञानिकों को आशंका है कि ओमिक्रॉन का सब वेरिएंट "सेंटोरस" अगला वैश्विक कोरोना वेरिएंट हो सकता है। इसकी वजह यह है कि यह अब तक करीब 20 देशों में फैल चुका है। इसका प्रसार बेहद तेज है। लेकिन राहत की बात यह है कि मजबूत इम्यूनिटी के चलते भारत समेत तमाम देशों में इसका प्रभाव कम नजर आ रहा है। संक्रमण में तेजी के बावजूद अस्पताल में भर्ती होने की दर नहीं बढ़ी है। दरअसल, नेचर जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सेंटोरस यानी बीए. 2.75 पर वैज्ञानिक निगाह रखे हुए हैं। यह ओमिक्रॉन का ही एक नया सब वेरिएंट है जिसके मामले जुलाई में भारत में तेजी से बढ़ने शुरू हुए थे और उसके बाद एशिया और यूरोप समेत 20 देशों में इसका फैसला हो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मई से लेकर अब तक एक हजार नमूनों की जीनोम सिक्वेंसिंग की गई थी जिनमें से दो तिहाई मामले बीए 2.75 के थे। इसके बाद सर्वाधिक मामले बीए-5 के थे जबकि शेष मामले ओमिक्रॉन के अन्य सब वेरिएंट के थे। स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि बीए 2.75 के मामले दिल्ली में भी सर्वाधिक पाए गए हैं। लेकिन अब यह स्थिरता की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार बीए 2.75 में एक म्यूटेशन ए452आर है जिससे दोबारा संक्रमण की आशंका बढ़ती है। कुछ वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि यह अगले वैश्विक वेरिएंट के रूप में उभर रहा है लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि हाइब्रिड इम्यूनिटी के कारण इसका ज्यादा प्रभाव नहीं दिखेगा। हाइब्रिड इम्यूनिटी का मतलब संक्रमण से उत्पन्न इम्यूनिटी के साथ-साथ टीकाकरण से भी इम्यूनिटी हासिल करना है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वायरोलाजिस्ट शाहिज जमील के अनुसार ज्यादातर जगहों पर बीए. 2.75 कोई नई लहर पैदा करेगा। हम उस बिंदु पर आ रहे हैं जहां ये वेरिएंट एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं और वे लगभग बराबर हैं। इसलिए जिन लोगों को बीए-5 का संक्रमण हुआ है, उन्हें बीए 2.75 का संक्रमण होने की संभावना नहीं है।

Published / 2022-08-15 16:26:57
नाक के रास्ते मिलने वाले टीके के तीसरे चरण का परीक्षण सफल : भारत बायोटेक

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (BBIL) ने सोमवार को बताया कि नाक के जरिये दिए जाने वाले कोविड-19 टीके बीबीवी154, तीसरे चरण के नियंत्रित क्लीनिकल परीक्षण में सुरक्षित, बेहतर तरीके से सहन करने योग्य और प्रतिरक्षाजनक साबित हुआ है। टीका निर्माता ने यहां जारी बयान में कहा कि संभावित टीके के पहले और दूसरे चरण के क्लीनिकल परीक्षण सफल रहे थे। बीबीवी154 को खासतौर पर नाक के जरिये शरीर में पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। नाक के जरिये टीके की खुराक देने के अलावा इसे इस तरह से डिजाइन व विकसित किया गया है जिससे निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों के लिए यह मूल्य के लिहाज से किफायती हो। बयान के मुताबिक बीबीवी154 को सेंट लुइस स्थित वाशिंगटन विश्वविद्यालय की साझेदारी में तैयार किया गया है। प्री क्लीनिकल सुरक्षा आकलन, बड़े पैमाने पर निर्माण, फॉर्मूला और मानव पर क्लीनिकल परीक्षण सहित वितरण प्रणाणी पर काम भारत बायोटेक ने किया। केंद्र सरकार ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग के कोविड सुरक्षा कार्यक्रम के तहत उत्पाद के विकास और क्लीनिकल परीक्षण के लिए आंशिक वित्तपोषण किया। बयान के मुताबिक बीबीवी154 के प्राथमिक खुराक (शुरुआती दो खुराक) के तौर पर प्रभाव और कोविड-19 के अन्य टीके की दो शुरुआती खुराक लेने वालों को तीसरी खुराक पर बीबीवी154 को देने पर होने वाले असर का आकलन किया गया। भारत बायोटेक की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा के इल्ला ने कहा कि आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हमें बीबीवी154 इंटरनेशनल टीके का सफल क्लीनिकल परीक्षण पूरा होने की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। हम नवोन्मेष और उत्पाद के विकास को लेकर प्रतिबद्ध और केंद्रीत थे और भारत बायोटेक की बहु विषयक टीम की यह एक और उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अगर इसे मंजूरी दी जाती है तो इंटरनैसल टीके से बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान को अंजाम देने में आसानी होगी।

Published / 2022-08-12 10:10:43
आज से बूस्टर डोज के रूप में उपलब्ध होगा Corbevax

एबीएन हेल्थ डेस्क। कई राज्यों में कोविड-19 मामलों में अचानक वृद्धि के बीच, भारत शुक्रवार को कॉवैक्सिन या कोविशील्ड टीकों के साथ पूरी तरह से टीकाकरण वाले वयस्कों के लिए एहतियाती खुराक के रूप में कॉर्बेवैक्स का उपयोग करना शुरू कर देगा। कॉर्बेवैक्स की बूस्टर खुराक और कोवैक्सिन या कोविशील्ड टीकों की दूसरी खुराक के बीच का अंतर छह महीने या 26 सप्ताह का होगा।

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