एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने जहां नाक द्वारा दी जाने वाली दवा नेजल वैक्सीन को बीते हफ्ते मंजूरी दे दी वहीं अब नेजल वैक्सीन की कीमत भी साफ हो गई है। बता दें कि अब इसे कोविन पोर्टल पर लिस्टेड करने की मंजूरी भी मिल गयी है। वहीं इसकी कीमत की बात करें तो इनकोवेक वैक्सीन की कीमत 800+ 5% जीएसटी बतायी जा रही है। यह सरकार द्वारा तय की गई कीमत है इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में नेजल वैक्सीन की कीमत 325 रुपये होगी। वहीं, नेजल वैक्सीन जनवरी के आखिरी हफ्ते से लगेगी।
दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार ने भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इस वैक्सीन का नाम इनकोवेक है। कोविन प्लेटफॉर्म पर अब ये वैक्सीन भी उपलब्ध होगी। ये वैक्सीन 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जायेगी इतना ही नहीं नाक से दी जाने वाली इस वैक्सीन को बूस्टर डोज पर लगाया जायेगा।
वहीं, सूत्रों ने कहा कि राज्य या केंद्र सरकारों ने खरीद के लिए कोई अपील नहीं की है। दूसरे देशों से मंजूरी मिलने के बाद इनकोवेक को अन्य देशों में वैक्सीन को निर्यात करने की योजना बना रहा है। इस इंट्रानेजल को भारत में 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बूस्टर डोज के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सीडीएससीओ से भी मंजूरी मिल गई है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार की मॉक ड्रिल शुरू हो गयी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया सभी अस्पतालों का दौरा कर रहे हैं।दिल्ली जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को 31 दिसंबर से 15 जनवरी तक दिल्ली हवाईअड्डे पर कोविड ड्यूटी पर तैनात करने के अपने आदेश को वापस लिया।
प्राधिकरण का कहना है कि जरूरत पड़ने पर हवाई अड्डे पर नागरिक सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की जायेगी।देश में बीते 24 घंटों में कोरोना के 157 नये मामले सामने आये हैं और एक व्यक्ति की मौत हुई है। वहीं सक्रिय मामले घटकर 3,421 हो गये हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। चीन में कोरोना बेकाबू है। जिसे देख पूरी दुनिया सकते में है। दिल्ली एम्स के चिकित्सकों में भी बेचैनी दिख रही है। उन्होंने देशवासियों से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के प्रति खुद सतर्क रहने की अपील की है। इसे लेकर एम्स के डॉ विनोद ने लोगों को स्वस्थ और सतर्क रहने जरूरी टिप्स भी दिये हैं। उन्होंने कहा है कि सभी परिवार के सदस्य कृपया ध्यान दें :
एबीएन हेल्थ डेस्क। रेफ्रिजरेटर तकनीकी प्रगति में से एक माना जा सकता है जिसमें हम खाने-पीने की चीजें लम्बे समय तक फ्रेश रखते हैं। कुछ समय के लिए खाने-पीने की चीजें फ्रिज में रखना समय की जरूरत है। हमारी मसरूफियत भरी जिंदगी में हम सुबह का खाना रात तक फ्रिज में ही सुरक्षित रखते हैं। अक्सर हम लोग वीकआॅफ के दिन ही सब्जियां और फू्रट खरीद लेते हैं और उसका पूरे हफ्ते इस्तेमाल करते हैं।
फल और सब्जियों को स्टोर करने से काम आसान हो जाता है। लेकिन आप जानते हैं कि सर्दी में कुछ फूड्स को फ्रिज में स्टोर करने से उनकी तासीर बदल जाती है और वो फूड बॉडी में जहर की तरह असर करते हैं। कुछ सब्जियां सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इन सब्जियों को हम फ्रेश रखने के लिए फ्रिज में रख देते हैं। आप जानते हैं कि कुछ सब्जियों को फ्रिज में रखने से उनकी तासीर बदल जाती है और वो सेहत को नुकसान पहुंचाती है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी ऐसी सब्जियां हैं जिन्हें फ्रिज में स्टोर नहीं करना चाहिए।
टमाटर को फ्रिज में नहीं रखें :
डायटिशियन के मुताबिक टमाटर को फ्रिज में स्टोर नहीं करना चाहिए। अगर आप टमाटर को रखना चाहते हैं तो कमरे के तापमान में रखें। एक्सपर्ट के मुताबिक टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद, बनावट और सुगंध में बदलाव होने लगता है। टमाटर ऐसी सब्जी है जो पकने के बाद एथिलीन गैस छोड़ती हैं जो सब्जियों को तेजी से पकाती है। टमाटर को अगर रखना चाहते हैं तो कमरे में रखें।
खीरा को फ्रिज में नहीं रखें :
कॉलेज आफ एग्रीकल्चर एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज के मुतााबिक अगर खीरे को 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे कुछ दिनों तक रखा जाए तो ये तेजी से सड़ने लगता हैं। खीरा को आप फ्रिज में नहीं रखें बल्कि नॉर्मल टेम्प्रेचर पर रखें। ज्यादा समय तक फ्रिज में रखा खीरा सेहत को बिगाड़ सकता है।
एवोकाडो :
एवोकाडो को फ्रिज में नहीं रखें। एवोकाडो में फैटी एसिड ज्यादा मात्रा में होता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है। इस फूड को फ्रिज में रखने पर उसकी बाहरी परत सख्त हो जाती है और अंदरूनी भाग खराब होने लगता है। कच्चे एवोकाडोस को फ्रिज में रखने पर वो कच्चे ही रहेंगे और खराब हो जाएंगे और आपकी सेहत को नुकसान पहुंचायेंगे।
आलू को फ्रिज में कभी मत रखें :
कुछ लोग आलू को भी बाकी सब्जियों के साथ फ्रिज में रख देते हैं। आलू को फ्रिज में रखने पर उसमें मौजूद स्टार्च शुगर में बदल जाता है जो शुगर के मरीजों की ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक आलू को फ्रिज में रखने के बजाए खुली जगह पर नॉर्मल तापमान में रखें।
लहसुन को रखें फ्रिज से दूर :
हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक लहसुन को कई तरह से संग्रहित किया जा सकता है, जैसे कि कमरे के तापमान पर या रेफ्रिजरेटर या फ्रीजर में। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक ताजा लहसुन को स्टोर करने का सबसे सरल और सबसे अच्छा तरीका आपके किचन में हैं। किचन में नॉर्मल तापमान पर लहसुन को स्टोर करने से उसकी तासीर नहीं बदली और वो सेहत के लिए उपयोगी रहता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में तेजी से संक्रमण फैला रहे बीएफ.7 नामक कोविड-19 के नके म्यूटेशन ने केंद्र सरकार को लोगों को मास्क लगाने और टीका लगवाने की सलाह देने के लिए प्रेरित किया है। कोविड-19 के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के इस सब-वैरिएंट के देश में अब तक बीएफ.7 के चार मामले सामने आये हैं। इनमें से तीन गुजरात से हैं और एक ओडिशा से। दो संक्रमित व्यक्ति अमेरिका की यात्रा करके लौटे थे। ये महिलाएं हैं। हालांकि, चारों अब स्वस्थ हो चुके हैं।
भले ही भारत में आने वाले रोजाना केसों की संख्या नियंत्रण है, केंद्र ने बुधवार को संक्रमित मरीजों को निगरानी में रखने और उभरते वैरिएंट की पहचान करने के उपायों पर चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आने वाले यात्रियों के नमूने फिर से लिए जा रहे हैं। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा है कि वे सभी कोविड केसों के नमूनों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भारतीय एसएआरएस- सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम प्रयोगशालाओं में भेजें।
बीएफ.7 क्या है : सभी वायरसों की तरह एसएआरएस- सीओवी-2, जिसके कारण 2020 में कोविड महामारी फैला, अल्फा, डेल्टा, ओमिक्रॉन और अन्य जैसे कई म्यूटेशन से गुजरा। ये वैरिएंट मानव प्रतिरक्षा (इम्यून सिस्टम) और टीके से बचने के लिए शाखाओं में बंट गये और अधिक सब-वैरिएंट के रूप में विकसित हुए।
बीएफ.7 (बीए.5.2.1.7) का पहला मामला भारत में पहली बार जुलाई में पाया गया था। यह अत्यधिक तेजी से फैलने वाले ओमिक्रॉन का एक सब-वेरिएंट है। यह चीन में प्रवेश करने से पहले पहली बार अमेरिका और यूरोप में पाया गया था, जहां यह नए संक्रमणों में तेजी से वृद्धि कर रहा है।
कैसे पता चलेगा कि मुझे बीएफ.7 संक्रमण है : बीएफ.7 संक्रमण वाले मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित लोगों के समान लक्षण दिखाई देते हैं। इसके लक्षणों में ऊपरी श्वसन संक्रमण, गले में खराश, थकान, नाक बहना, खांसी और बुखार शामिल हैं। कुछ रोगियों में लूज मोशन और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। नये सब-वेरिएंट के कारण ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा है। हालांकि, ऐसे कुछ मामले हैं जिनमें मरीज को निमोनिया हुआ है। अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि चौथा बूस्टर डोज कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
क्या बीएफ.7 सब-वेरिएंट ज्यादा घातक है : बीएफ.7 वैरिएंट ओमिक्रॉन का एक वेरिएंट है, जिसमें ओमिक्रॉन की तुलना में अधिक न्यूट्रलाइजेशन रेजिस्टेंस है, जिसका अर्थ है कि टीके या यहां तक कि बाईवेलेंट बूस्टर डोज संक्रमण या पुन: संक्रमण को रोकने में सक्षम नहीं हो सकते। नये वेरिएंट की इनक्यूबेशन पीरियड कम है, यह बताता है कि संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट प्रभावी नहीं होंगे।
हाई ट्रांसमिशन रेट के साथ, यह मौजूदा एक्सबीबी स्ट्रेन को प्रतिस्थापित करेगा, जो भारत में नए मरीजों में पाया जाने वाला सबसे प्रमुख स्ट्रेन है। अगर इसके प्रसार को रोकने के लिए कदम नहीं उठाये गये तो यह फैल सकता है।
एक अनुमान के अनुसार, BF.7 वेरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति अपने आसपास के 10-18.6 लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि, ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट की मृत्यु दर अधिक नहीं है, लेकिन विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल बताते हैं कि चीन की 60 फीसदी आबादी तीन महीने के भीतर संक्रमित हो जायेगी और हजारों लोगों के मरने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह यह है कि चीनी नागरिकों को दी गई वैक्सीन कोविड-19 के शुरुआती वेरिएंट वाले एक मृत वायरस से विकसित किया गया था, जबकि एमआरएनए टीके म्यूटेशन के खिलाफ अधिक प्रभावी माने जाते हैं।
रौशन सिन्हा
टीम एबीएन, दारू (हजारीबाग)। प्रखंड क्षेत्र के पुनाई पंचायत के जरगा और इरगा पंचायत के बड़वार बिरहोर टोला के दर्जनों बच्चे गंभीर चर्म और अन्य रोगों से पीड़ित है पर इनका समुचित इलाज नही हो पा रहा है। सरकार के तरफ से इन्हें विशेष संरक्षित समुदाय का दर्जा दिया गया है पर इनके इलाज की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है।
चर्म रोग से पीड़ित बच्चों के माता पिता का कहना है कि इन बच्चों के इलाज वे गरीबी के कारण नहीं करा पा रहे हैं उनके मुहल्ले में बीडीओ, सीओ, मुखिया सहित कई लोग आते हैं पर किसी भी तरह से उनकी मदद नही मिल पाई है। लुप्त होती इस समुदाय की तरफ यदि ठीक से नहीं ध्यान दिया गया तो इनकी स्तिथि दिन ब दिन और खराब होती जायेगी।
जरगा का लक्ष्मण बिरहोर की आंखों में कुछ दिन पूर्व मिट्टी चली गयी थी जिसका भी इलाज वो ठीक से नहीं करा पा रहा है उसे एक आंख से दिखना पूरी तरह से बंद हो गया है और उसकी दूसरी आंख की भी रोशनी कम हो रही है। उसकी तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण वो दिन भर घर में पड़ा रहता है और कोई मेहनत मजदूरी के काम भी नहीं कर पाता है। पंचायत के मुखिया अनिल कुमार देव ने उसकी आंखों का इलाज करवाने का भरोसा दिलाया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन चीन में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों की खबरों को लेकर बेहद चिंतित है, क्योंकि देश ने अपनी शून्य कोविड नीति को मोटे तौर पर छोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं।
टेड्रोस ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को चीन में कोविड-19 की गंभीरता, विशेषकर अस्पतालों और गहन देखभाल इकाइयों में भर्ती मरीजों को लेकर और अधिक जानकारी की आवश्यकता है, ताकि जमीन पर स्थिति का व्यापक जोखिम आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि चीन में गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों की खबरों के बीच बदल रही स्थिति को लेकर डब्ल्यूएचओ बहुत चिंतित है।
टीम एबीएन, रांची। आमतौर पर पीठ के दर्द को लोग हल्के में ले लेते हैं लेकिन एक पीठ का दर्द कई अन्य बीमारियों का सूचक भी हो सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। पीठ के दर्द से परेशान लोगों के लिए मेदांता रांची ने विशेष पहल की है और विशेष बैकएक क्लीनिक यानी पीठ के दर्द की क्लीनिक की शुरूआत की है।
रिडीटिंग पेन के बारे में विशेष जानकारी देते हुए मेदांता रांची के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि वैसे मरीज जिनके पीठ में दर्द हो रिडीटिंग पेन यानी जिसे साइटिका कहते हैं, इस दर्द के कारण जिसके पैर में दर्द होता हो या चलने में परेशानी हो चलने के बाद बैठ जाना पड़ता हो। अगर ऐसे लक्षण हो तो वह इस क्लीनिक में संपर्क कर सकते हैं।
डॉक्टर आनंद ने बताया कि अगर पीठ में दर्द हो तो उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। वह आगे चलकर धीरे-धीरे सूनापन पैदा कर सकता है और अगर वक्त रहते इलाज न किया जाए तो पैरालाइसिस भी हो सकता है। डॉक्टर आनंद ने यह भी बताया कि बैकएक में भी कई तरह के दर्द होते हैं। इसमें अपर बैकएक, मिडल बैकएक और लोअर बैकएक होता है। इन सब में कॉमन बैकएक कॉमन होता है। जिसे कमर का दर्द भी कहा जाता है।
इस क्लिनिक में शनिवार को सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक संपर्क किया जा सकता है। बैकएक के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेदांता रांची ने इस पहल को किया है। ऐसे मरीज जो बैकएक से परेशान हैं, उनके इलाज के लिए मेदांता की एक्सपर्ट टीम रहेगी।
Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.
टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।
© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse