एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है। हर दिन तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बदलते मौसम में तमाम बीमारियां घेर लेते हैं। चिकनगुनिया और डेंगू के मामले भी काफी तेजी से बढ़ जाते हैं। एक रिसर्च सामने आई है, जिसके बाद मेडिकल डिपार्टमेंट भी अलर्ट हो गया है।
इस रिसर्च में बताया गया है कि एडीज एजिप्टी मच्छर एक ही समय में डेंगू और चिकनगुनिया दोनों वायरस ले जा रहा है, जिसके कारण शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में दोनों ही बीमारियों के काफी मामले सामने आ रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) वायरोलॉजी विभाग की रिसर्च टीम ने ही इसका खुलासा किया है।
इस स्टडी ने खतरे को दोगुना बढ़ा दिया है। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही घातक होता है। अगर समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यक्ति की मौत तक हो जाती है। दोनों विषाणुओं को एक साथ ले जाने वाले मच्छर के कारण लोगों को डेंगू और चिकनगुनिया दोनों के सह-संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। यह निष्कर्ष शहर में 2022 में अब तक चिकनगुनिया के 101 मामलों के बाद आया है जोकि छह साल के उच्च स्तर में हैं। इसके अलावा डेंगू के 839 मामले सामने आये हैं।
एक ही मच्छर ने दोनों को चौंकाया
वायरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख राधाकांत राठो ने कहा कि इस मौसम के दौरान एडीज मच्छर डेंगू या चिकनगुनिया के मामले एक ही मच्छर के काटने से आ रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि दोनों बीमारियों वाले मच्छर के काटने से दोनों बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू वायरस और चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्यों में एक समवर्ती वायरल संक्रमण हो सकता है।
रिसर्च टीम ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया के वायरस मच्छर में एक साथ प्रतिकृति बनाने में सक्षम हैं। लार के माध्यम से एक ही मच्छर के काटने में दोनों वायरस के संक्रामक कणों को शरीर में फैलाने की क्षमता रखते हैं। राठो ने कहा कि यह देखा गया है कि एडीज एजिप्टी डेंगू रोग के फैलाव के लिए प्राथमिक वेक्टर प्रजाति होती है। इसी तरह, वही मच्छर चिकनगुनिया वायरस को प्रसारित करने की क्षमता भी रखता है। कभी-कभी मच्छर दोनों संक्रमणों को एक साथ भी फैला देता है।
टीम एबीएन, रांची। बदलते दौर में हर्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर वक्त पर उपचार ने हो तो ये खतरनाक भी साबित हो सकता है। उम्मीद की एक किरण यह भी है कि हर्ट अटैक के खतरे से बाहर निकालने में सीपीआर एक अहम रोल निभाता है। मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू का कहना है कि अगर किसी को हर्ट अटैक आता है और वक्त पर सीपीआर दे दिया जाए तो मरीज की जीवन को बचाया जा सकता है।
मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने बताया कि आम बोलचाल की भाषा में कार्डियोपलमनरी रिससिटेशन को सीपीआर कहा जाता है। दरअसल, यह इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस, दिल के रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। यह हर्ट के बंद होने के बाद फिर चालू करने की प्रक्रिया है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि अगर हम किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत होती है। जैसे कि अगर किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो प्रति मिनट 100 - 120 सीपीआर देना चाहिए। दबाव का ख्याल रखना चाहिए। 30 सीपीआर देने के साथ ही दो बार सांस भी देना चाहिए। प्रति दो मिनट में पांच साइकिल पूरा होना चाहिए। एक साइकिल में तीस सीपीआर होना चाहिए। वो कहते हैं, सीपीआर के साथ ही डिफिब्रिलेटर मशीन की भी जरूरत पड़ती है। इससे मरीज की जान को बचाए जाने की संभावना और बढ़ जाती है। सीपीआर और ऑटोमेटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मशीन अगर मिल जाए तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।
मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने कहा कि सीपीआर देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित हो जाने के बाद इसे आम आदमी भी दे सकता है। पोस्ट कोविड ऐसी घटनाएं बढ़ गई है। दरअसल कोरोना फेफड़े पर असर डालने के साथ-साथ शरीर के और भी कई अंगों पर अपना दुष्प्रभाव डालता है।
जिससे हार्टअटैक की घटनाएं बढ़ गई है। हर्ट अटैक न हो, इसके लिए खुद को भी कुछ चीजों पर ध्यान रखना होगा। अगर वजन ज्यादा है तो कंट्रोल करना होगा। मधुमेह के रोगी हैं तो भोजन संतुलित करना होगा साथ ही दवा और इन्सुलिन लेते रहना चाहिए। हरी सब्जी और फल का ज्यादा सेवन लाभदायक होगा। बीपी पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। भोजन में तेल व वसा का जितना कम प्रयोग होगा, उतना बेहतर होगा। इसके अलावा टहलना एक बेहतर माध्यम है। सप्ताह में अगर कम से कम 150 मिनट ब्रिस्क वॉक करते हैं तो इससे खुद को फिट रखा जा सकता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने खसरे के मामलों में वृद्धि का जायजा लेने के लिए रांची (झारखंड), अहमदाबाद (गुजरात) और मलप्पुरम (केरल) में तीन उच्च-स्तरीय बहु-विषयक 3-सदस्यीय टीमों को तैनात करने का निर्णय लिया है।
टीमें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को स्थापित करने में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरणों की सहायता करेंगी और अपेक्षित नियंत्रण उपायों के संचालन की सुविधा प्रदान करेंगी।
तीन शहरों में रिपोर्ट किये जा रहे खसरे के बढ़ते मामलों के प्रबंधन के लिए टीमें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों, प्रबंधन दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के संदर्भ में प्रकोप की जांच करने और राज्य के स्वास्थ्य विभागों की सहायता करने के लिए क्षेत्र का दौरा भी करेंगी। टीम क्षेत्र में सक्रिय मामलों की खोज सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ और पहचान किये गये मामलों के परीक्षण के लिए वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) के साथ भी समन्वय करेगी।
रांची जाने वाली केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (नई दिल्ली) और राम मनोहर लोहिया अस्पताल (नई दिल्ली) के विशेषज्ञ शामिल हैं। पीएचओ, मुंबई, कलावती सरन चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (नई दिल्ली) और क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय (अहमदाबाद) के विशेषज्ञ अहमदाबाद जाने वाली केंद्रीय टीम में शामिल होंगे।
मलप्पुरम की टीम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के क्षेत्रीय कार्यालय (तिरुवनंतपुरम), जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पुडुचेरी) और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (नई दिल्ली) के विशेषज्ञ शामिल होंगे। वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक, परिवार कल्याण के क्षेत्रीय कार्यालय (झारखंड) गुजरात और केरल अपनी यात्राओं के संबंध में संबंधित टीमों के साथ समन्वय करेंगे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी को इस सदी की सबसे बड़ी महामारी घोषित की जा चुकी है। इस वायरस की तबाही के बाद दुनियाभर में वैज्ञानिक भविष्य में आने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि वह रोगजनकों की एक सूची बना रहा है जो भविष्य में प्रकोप या महामारी का कारण बन सकते हैं। इन रोगजनकों को एक प्रतिउपाय के रूप में कड़ी निगरानी में रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से ऐसे रोगाणुओं को चिह्नित किया जायेगा, जिन पर प्राथमिकता के तौर पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ द्वारा रोगजनकों की पहली सूची 2017 में प्रकाशित की गई थी और अंतिम को 2018 में जारी किया गया था। संगठन अगली लिस्ट 2023 के शुरुआत में जारी कर सकता है।
वर्तमान सूची में कोविड -19, क्रीमियन-कोंग रक्तस्रावी बुखार, इबोला वायरस रोग और मारबर्ग वायरस रोग, लस्सा बुखार,मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, निपाह और हेनिपाविरल रोग, रिफ्ट वैली बुखार, जीका और रोग शामिल हैं। सभी वैज्ञानिक तथाकथित बीमारी एक्स पर भी विचार करेंगे - एक अज्ञात रोगजनक जो एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी का कारण बन सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने इस सूची को अनुसंधान समुदाय के लिए एक संदर्भ बिंदु कहा है ताकि वे अगले खतरे का प्रबंधन करने के लिए अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह लिस्ट क्षेत्र में विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार की गई है। एक वैश्विक अनुसंधान समुदाय के रूप में सब सब एकमत हैं कि उन्हें परीक्षण, उपचार और टीके विकसित करने के लिए कहां ऊर्जा और धन का निवेश करने की आवश्यकता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। रहन-सहन में बदलाव के साथ ही सर्दी का सीजन हमारे खानपान में भी कई परिवर्तन लाता है। सर्दी में जहां खाने के लिए कई सारे विकल्प मौजूद होते हैं तो वहीं बदलते माहौल की वजह से हमारी इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है।
कमजोर इम्यूनिटी की वजह से इस मौसम में सर्दी, खांसी, फ्लू, गले की खराश, बुखार और संक्रमण आदि होना काफी आम बात है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण भी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से लोग आसानी से इसकी चपेट में भी आ सकते हैं। अगर आप सर्दियों में खुद को फिट और सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो इन आदतों के जरिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं।
घी
सर्दी में घी का सेवन शरीर के लिए काफी अच्छा माना गया है। घी का सेवन करने के लिए आप दाल और सब्जियों में छौंक लगा सकते हैं। इसके अलावा आप बने हुए खाने के ऊपर घी डालकर खा सकते हैं। घी न सिर्फ आपके खाने के स्वाद को बढ़ाएगा बल्कि आपको गर्म रखने के मदद करेगा।
लहसुन
खाने में लहसुन का सेवन सर्दियों में आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। गर्म तासीर होने की वजह से लहसुन आपको गर्म रखेगा। इतना ही नहीं गर्म रखने के साथ ही लहसुन आपके शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाता है, जिससे आप इंफेक्शन से बच सकते हैं। आप सूप, चटनी या अचार के रूप में लहसुन का सेवन कर सकते हैं।
हरी सब्जियां
सर्दियों का मौसम कई तरह की सब्जियां और फल भी अपने साथ लेकर आता है। हरी सब्जियों के लिए सर्दी का मौसम काफी अच्छा माना जाता है। ऐसे में आप सर्दी में गाजर, चुकंदर, मूली और अन्य हरी सब्जियां अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
अदरक
अदरक भी तासीर में गर्म होती है। सर्दियों में इसके सेवन से पाचन संबंधी कोई परेशानी नहीं होती है। इसके अलावा अदरक सर्दी-जुकाम में भी काफी उपयोगी माना गया है। आप अदरक की चाय, पानी या काढ़ा आदि के जरिए इसका सेवन कर सकते हैं।
गुड़
गुड़ की तासीर भी बेहद गर्म होती है। आप गुड़ की चाय या गुड़ के लड्डू आदि बनाकर खा सकते हैं।
तिल और मूंगफली
तिल और मूंगफली भी आपको सर्दियों में फिट रखने में काफी मददगार साबित होंगे। सर्दियों में इनका सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। प्रोटीन से भरपूर मूंगफली आपके अंदर विटामिन बी, अमीनो एसिड और पॉलीफेनॉल की पूर्ति करेगी। वहीं, तिल के बीज आपको जरूरी फैटी एसिड और विटामिन ई देंगे, जो हड्डियों, स्किन और बालों के लिए अच्छे माने जाते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व मधुमेह दिवस पर आज सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र, एवं आरोग्य भारती के सौजन्य से सरोवर एनक्लेव, कांके रोड में मधुमेह की रोकथाम विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें आरोग्य भारती से आये विशिष्ट अतिथि डॉ देवेन्द्रनाथ तिवारी स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति कैसे हो इस पर वृहत रूप से प्रकाश डाले। उन्होंने कहा, घर के रसोईघर से लेकर आस-पास उपलब्ध वनस्पतियाँ कई बीमारियों को दूर कर सकता है। मधुमेह के रोकथाम के लिए जीवनशैली को बेहतर करने की जरूरत है। योगाभ्यास और मानसिक हल्केपन के लिए मेडिटेशन करना बहुत लाभदायक है।
मुख्य वक्ता आचार्य मुक्तरथ जी ने मधुमेह के रोकथाम पर योग का एक विस्तृत रूपलेखा प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा आज माताओं के पास घर में शरीरिक कार्यों को करने को कुछ नहीं है। रसोई घर में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। जो मेहनत दादी और नानी सबेरे से साम तक करती थीं वो अब कहीं नहीं है।
व्यायाम का अभाव और मानसकि आपाधापी मधुमेह को हर दिन बढ़ा रहा है। आग की तरह फैलते मधुमेह को रोकने के लिए हमें अपने जीवनशैली को मजबूत बनाना होगा। हर व्यक्ति को प्रतिदिन एक घण्टे योगाभ्यास,20 मिनट प्राणायाम और 10 मिनट ध्यान करने की जरूरत है। कुछ भी करें खुश होकर करें, जो उपलब्धि मिली उसमें प्रसन्नचित होकर भगवान को धन्यवाद दें। 24 घण्टे में डेढ़ घण्टा अपने स्वास्थ्य के लिए समय दें। सत्यानन्द योग मिशन का बहुत बड़ा प्रयोग स्वामी मुक्तरथ के निर्देशन में मानसिक स्वास्थ्य पर चल रहा है।
टीम एबीएन, रांची। डाइबिटीज ऐसी बीमारी है तो धीरे से शरीर मे घर बनाती है। हालांकि इसे इसे कंट्रोल में लाया जा सकता है। अगर कंट्रोल में लाने के बाद परहेज न किया जाए तो शरीर के लिए घातक हो सकता है। विश्व मधुमेह दिवस के मौके पर मेदांता रांची के एक्सपर्ट डॉक्टरों का कहना है कि अगर परहेज बंद करने के बाद दोबारा डायबिटीज होता है तो शुगर लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और यह मरीज के लिए अच्छा नहीं कहा जा सकता है।
मेदांता रांची के कंसल्टेंट फिजिसियन डॉक्टर (लेफ्टिनेंट कर्नल) निलभ कुमार ने कहा कि डायबिटीज का इलाज इसलिए करते हैं कि मरीज को आगे चलकर आर्गन डैमेज न हो।
अगर किसी को डायबिटीज है तो आगे चलकर उसे हर्ट, किडनी, स्ट्रोक, नर्व्स की प्रॉब्लम और रेटिना की दिक्कत हो सकती है। अगर इसे कंट्रोल में रखा जाए तो आगे चलकर दिक्कत कम होगी। इफेक्ट के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज है, उसे 20 साल तक डायबिटीज रहा और शुरू के 10-15 साल अगर किसी मरीज ने डायबिटीज को अगर कंट्रोल में रखा तो उसका इफेक्ट आगे चलकर बहुत फायदेमंद होता है। अगर किसी ने डायबिटीज होने के बाद शुरू के 5 से 10 सालों में इनिशियल कंट्रोल नहीं रखा है तो ऐसे हालत में आने वाले 5 से 10 सालों में टारगेट आॅर्गन डैमेज होने का रिस्क ज्यादा हो जाता है। टाइप वन, टाइप टू, टाइप 3 और टाइप फॉर डायबिटीज के प्रकार होते हैं। इसमें टाइप वन डायबिटीज होता है, वह जेनेटिक होता है। टाइप टू डायबिटीज में इन्वायरमेंट, लाइफस्टाइल और जेनेटिक तीनों का मेकअप रहता है।
मेदांता रांची के कंसल्टेंट क्रिटिकल केयर एंड न्यूरो एनिस्थेसिया के डॉक्टर मनोज कुमार ने बताया कि अगर किसी को डायबिटीज होता है, तो मरीज के नर्व्स सिस्टम पर असर पड़ता है। अगर किसी को 5 या 10 साल तक डायबिटीज है और वह कंट्रोल में नहीं है तो एक मेडिकल की भाषा में शब्द है जिसे डायबिटीज न्यूरोपैथी कहते हैं। दरअसल लंबे वक्त के डायबिटीक को दिक्कत होती है, जिसके चलते उसे पैरों में सनसनाहट और झिनझिनापन महसूस होता है। हाथ और पैरों में झिनझिनापन रहता है, इसे ही डायबीटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है। पैरों में सूनापन या झीनझिनापन हो जाना, उसके लक्षण है। अगर हम डायबिटीज को कंट्रोल में रखते हैं तो इस से रिलेटेड जितने भी उसके कॉम्प्लिकेशंस हैं, कंट्रोल में रहेंगे। डायबिटीज ऐसी बीमारी है कि अगर एक बार यह हो जाता है तो पैंक्रियास में बदलाव हो जाते हैं। अगर हम डायबिटीज को अच्छे से कंट्रोल करें तो कई सारे कॉम्प्लिकेशंस को प्रिवेंट कर सकते हैं। अगर किसी को डायबिटीज हो जाता है तो सबसे पहले उसे अपने लाइफस्टाइल में बदलाव करने की जरूरत होती है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। हमारे खान पान और लाइफस्टाइल पर शुगर का लेवल काफी हद तक निर्भर करता है, सर्दियों में शुगर लेवल बढ़ता-घटता रहता है, इसलिए जरूरी है कि हम ठंड में क्या खाएं जिससे डायबिटीज कंट्रोल रहे। ठंड के ऐसे 10 आहार हैं जिससे ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल रहता है, उनके फायदे जानते हैं। मेथी : सर्दियों मेथी खूब आती है, मेथी खाने से शुगर कंट्रोल होती है। आप चाहें तो मेथी का साग, लड्डू, पराठे कुछ भी बना सकते हैं। मेथी में फाइबर और आयरन भरपूर है। इससे शुगर कंट्रोल रहती है। वे साग सर्दियों में वजन कम करता है, इससे पेट भरा सा रहता है और डायबिटीज कंट्रोल रहती है। रोजाना खाली पेट मेथी का पानी पीने से शुगर लेवल सही रहता है। बाजरा : बाजरा सर्दियों का सबसे बेहतरीन मिलेट है, ये डायबिटीज के मरीजों के लिए बेस्ट है। बाजरे में हाई फाइबर और मैग्नीशियम भरपूर है, फाइबर से ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल होता है, वहीं मैग्नीशियम शरीर में इंसुलिन और ग्लूकोज रिसेप्टर की क्षमता को बढ़ाता है। इससे शुगर आसानी से पच जाता है और डायबिटीज कंट्रोल करने में मदद मिलती है। बाजरा की रोटी खाने से पाचन क्रिया अच्छी होती है। ये खराब कोलेस्ट्रोल में भी कमी लाने में मदद करता है। बाजरा में ट्रिप्टोफेन पाया जाता है, जो शरीर में सेरोटोनिन स्तर को बढ़ता है और तनाव में कमी लाता है। रागी : मिलेट में रागी भी बहुत लाभकारी है, रागी की रोटी खाने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। रागी में प्रोटीन, फाइबर, आयरन, कार्बोहाइड्रेट और मिनरल्स भरपूर मात्रा में है, रागी खाने से कोलेस्ट्रोल कम होता है, शुगर भी कंट्रोल में रहती है। रागी की रोटी खाने से वजन भी कम होता है। पालक : पालक हरी सब्जियों में सबसे बेस्ट है, इसमें आयरन, विटामिन्स, मिनरल्स भरपूर मात्रा में है। पालक खाने से डायबिटीज कंट्रोल होती है। पालक में फोलेट या फोलिक एसिड होता है,जो ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को सही रखने में मदद करता है। वजन कम करने और पेट साफ रखने में मददगार है। पालक का जूस, पालक की सब्जी बहुत ही फायदेमंद है। नट्स : नट्स डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है,सर्दियों में रात को भिगोकर सुबह नट्स खाएं, जैसे बादम, अखरोट,खजूर भिगोकर खाने से ज्यादा फायदे मिलते हैं। इसमें विटामिन ई, आयरन और कई पोषक तत्व होते हैं, जो प्लॉक के विकास को रोकतें है और धमनियों को संकीर्ण होने से बचाते हैं। इनमें ओमेगा थ्री, फैटी एसिड होते हैं। गुड़ : चीनी की जगह गुड़ खाना फायदेमंद होता है। ठंड में गुड़ की कई चीजें बनती है, डायबिटीज मरीज अगर गुड़ का सेवन करते हैं तो ब्लड शुगर लेवल ठीक रहेगा। डायबिटीज के मरीज को हर दिन गुड़ खा सकते हैं लेकिन एक मात्रा निर्धारित कर लें। मुनक्का : किशमिश की तरह मुनक्का भी बहुत फायदेमंद है, जिससे खून बढ़ता है। मुनक्का देखने में थोड़ा बड़ा होता है। ये हार्ट हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता है। इसका नियमित सेवन करना हाई ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद करता है। इसमें पोटेशियम की मात्रा अधिक होती है,जो हाई ब्लड प्रेशर को कम कंटोल करता है। रोजाना दूध में मुनक्का भिगोकर खाने से बहुत फायदे मिलते हैं। अश्वगंधा : डायबिटीज के मरीजों के लिए अश्वगंधा काफी फायदेमंद है। इससे तनाव कम होता है, इसमें मौजूद औषधीय गुणों से अनिद्रा की शिकायत दूर होती है। आपका ब्लड शुगर का लेवल सही रहता है, सुबह सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। अमरूद : डायबिटीज के मरीज के लिए फायदेमंद फल है अमरूद। ठंड में काफी मिलते हैं, अमरूद में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो कब्ज को कम करने में मदद करता है। रोजाना 1 अमरूद खाने से टाइप -2 डायबिटीज नहीं होती। शकरकंद : शकरगंद मतलब मीठा आलू, इसे खाने से शुगर नहीं बढ़ती बल्कि कंट्रोल में रहती है। इसमें नेचुरल मीठा रहता है।
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