टीम एबीएन, रांची। मानव शरीर में उसका मस्तिष्क सबसे अहम हिस्सा है। अगर मनुष्य के शरीर में कोई बीमारी हो जाती है, चोट लग जाती है, तो उसका समय पर और सही उपचार अत्यंत आवश्यक होता है। वर्तमान में भी चिकित्सा के ऐसे साधन हैं, जिसे अगर वक्त पर इलाज के रूप में प्रयोग किया जाये तो जीवन को बचाया जा सकता है।
यह बातें मेदांता रांची की तरफ से 6 और 7 मई को विशेष रूप से आयोजित किये गये वर्कशॉप में हिस्सा लेते हुए विशेषज्ञ डॉक्टरों ने कही। इस वर्कशॉप का आयोजन कंप्रिहेंसिव न्यूरो क्रिटिकल केयर कोर्स के नाम से आयोजित किया गया था। पूर्वोत्तर भारत में कोलकाता के बाद रांची में इस तरह के वर्कशॉप का आयोजन किया गया।
इस वर्कशॉप के आर्गनाइजिंग चेयरमैन सह मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर एंड हेड क्रिटिकल केयर, डॉक्टर तापस कुमार साहू ने हिस्सा लेने वाले सभी प्रतिभागियों को मस्तिष्क से जुड़ी सारी बीमारियों के साथ ही ट्रामा के केस में वर्तमान में उपलब्ध इलाज की सुविधा के बारे में जानकारी दी।
साथ ही यह भी बताया गया कि इसमें और भी प्रगति होगी। डॉक्टर तापस कुमार साहू ने इस विशेष वर्कशॉप में मस्तिष्क की बीमारी से लेकर उसके इलाज करने तक की अत्याधुनिक तकनीक के बारे में विस्तार से जानकारी दी। आयोजन में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन, क्रिटिकल केयर और आपातकालीन स्थिति में इलाज करने वाले डॉक्टर उपस्थित थे।
वर्कशॉप में इस बात की विशेष जानकारी दी गई कि अगर कोई मरीज आपातकालीन स्थिति में आता है तो कैसे और किस तरीके से उसका बेहतर तरीके से उपचार किया जा सकता है ताकि उसकी जीवन की क्षति न हो। इस विशेष वर्कशॉप में मेदांता गुड़गांव, एम्स दिल्ली व एम्स भुवनेश्वर से आए हुए विशेषज्ञों ने भी वर्कशॉप के थीम से जुड़ी कई अहम जानकारियां दी।
वर्कशॉप में रांची के भी कई बड़े हॉस्पिटल के विशेषज्ञ भी उपस्थित थे। आयोजन के जनरल सेक्रेट्री सह मेदांता रांची के न्यूरो एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के कंसलटेंट डॉ मनोज कुमार और एसएनसीसी के कोर्स कोआर्डिनेटर डॉ हिमांशु प्रभाकर ने भी कई बिंदुओं पर जानकारी दी।
इस वर्कशॉप के आर्गेनाइजिंग चेयरमैन मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर एंड हेड क्रिटिकल केयर के डॉक्टर तापस कुमार साहू थे। जबकि जनरल सेक्रेट्री न्यूरो एनेस्थीसिया और क्रिटिकल केयर के कंसलटेंट डॉ मनोज कुमार थे। कंसलटेंट न्यूरो सर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा और कंसलटेंट न्यूरो फिजीशियन डॉक्टर कुमार विजय आनंद कोर्स के को-चेयरमैन थे।
डॉ हिमांशु प्रभाकर एसएनसीसी प्रेसिडेंट कोर्स के कोआॅर्डिनेटर थे। आयोजन में करीब 80 डॉक्टरों को न्यूरो और ब्रेन से जुड़ी अलग-अलग बीमारियों और इलाज के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। इस विशेष वर्कशॉप के बारे में मेदांता रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने कहा कि मेदांता रांची वक्त वक्त पर ऐसे आयोजन करते रहता है।
हमारा उद्देश्य बीमारियों के इलाज और अत्याधुनिक सुविधा के साथ लोगों को मदद कैसे पहुंचाई जा सकती है? इसके बारे में विस्तृत जानकारी हासिल करना होता है। मेदांता रांची आगे भी अलग-अलग विषयों पर ऐसे वर्कशॉप का आयोजन करता रहेगा।
एबीएन सोशल डेस्क। दुनियाभर से हर साल 45 लाख से अधिक महिलाओं और शिशुओं की मृत्यु गर्भावस्था के दौरान, बच्चे के जन्म के समय या जन्म के कुछ सप्ताह के अंदर हो जाती है। संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जारी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह जानकारी दी।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि हर साल 45 लाख से अधिक महिलाओं और शिशुओं की मृत्यु गर्भावस्था, प्रसव या जन्म के पहले सप्ताह के दौरान होती है, जो हर सात सेकंड में एक मौत के बराबर है। समय से चिकित्सा नहीं मिलने और उचित देखभाल के अभाव में ज्यादतर ये मौतें होती हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि पिछले आठ वर्षों के अंदर गर्भवती महिलाओं, माताओं और शिशुओं की मृत्यु दर में कमी नहीं पायी गयी है, क्योंकि उनकी स्वास्थ्य देखभाल में निवेश में कटौती की गयी है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वर्ष 2015 से, हर साल लगभग 2.90 लाख माताओं की मृत्यु हो जाती है, साथ ही 28 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद 19 लाख बच्चे और जन्म के बाद, पहले महीने के भीतर 23 लाख शिशु मर जाते हैं।
डब्ल्यूएचओ के मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य और वृद्धावस्था के निदेशक डॉ अंशु बनर्जी के हवाले से संरा ने कहा, गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की मृत्यु दुनिया भर में अस्वीकार्य रूप से उच्च दर पर हो रही है और कोविड-19 महामारी ने उन्हें आवश्यक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए और अधिक झटके दिए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणी अफ्रीकी देश, मध्य और दक्षिण एशिया ज्यादातर नवजात और मातृ मृत्यु दर से प्रभावित क्षेत्र हैं। संयुक्त राष्ट्र ने कहा, कि महिलाओं और शिशुओं के जीवन को बचाने के लिए प्रसव से पहले, प्रसव के दौरान और बाद में स्वास्थ्य विशेषज्ञ, गुणवत्तापूर्ण, सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ होनी चाहिए।
इसके अलावा, स्वच्छ वातावरण, स्वच्छ पानी और बिजली आपूर्ति, सस्ती दवाएं उपलब्ध होनी चाहिए। एजेंसी ने बताया कि वर्तमान रुझानों के संबंध में 60 से अधिक देश 2030 तक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में निर्धारित मातृ और नवजात मृत्यु दर को पूरा करने में विफल रहेंगे।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड का प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल रिम्स यूं तो अव्यवस्था को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहता है, लेकिन यहां कई मरीजों को नया जीवन भी मिलता है। अनुभवी डॉक्टरों की टीम ने मौत के मुंह से अब तक कई मरीजों को निकाला है और उन्हें नयी जिंदगी दी है।
रांची जिले की एक महिला ट्यूमर से परेशान थी। उसकी आंख बाहर निकल आयी थी। इस कारण देखने में उसे काफी दिक्कत हो रही थी। कई जगहों पर उसने इलाज कराया, लेकिन राहत नहीं मिली। आखिरकार उसने रिम्स में इलाज कराया। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ प्रो सीबी सहाय की यूनिट में ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। डॉ विकास ने जानकारी दी है कि यह एक रेयर टाइप ऑपरेशन था।
ट्यूमर के कारण देखने में हो रही थी दिक्कत
रांची जिले के सिकिदिरी की रहने वाली महिला (44 वर्ष) पिछले 5-6 वर्षों से ट्यूमर से परेशान थी। यह ट्यूमर आंख के पीछे एवं ब्रेन के निचले हिस्से में था।
इसकी वजह से एक आंख बाहर निकल आयी थी। इस वजह से मरीज को देखने में काफी परेशानी हो रही थी। इलाज के लिए वह कई अस्पताल में दौड़ती रही। आखिरकार इलाज कराने रिम्स पहुंची।
रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ प्रो सीबी सहाय की यूनिट में एडमिट हुई और मंगलवार को न्यूरो सर्जरी विभाग एवं नेत्र विभाग की टीम ने महिला मरीज का सफल ऑपरेशन किया। ट्यूमर आसपास फैल चुका था। डॉ विकास ने बताया कि यह एक रेयर टाइप ऑपरेशन था।
इस टीम में न्यूरोसर्जरी विभाग के डॉक्टर प्रो सीबी सहाय और उनकी टीम में रोहित भारती, विकास कुमार, डॉ अशोक एवं नेत्र विभाग की डॉ सिंधु एवं डॉ जेनिफर शामिल थे।
एबीएन नॉलेज डेस्क। चिकित्सकों की एक टीम ने मां के गर्भ में ही पल रहे एक अजन्मे बच्चे की ब्रेन सर्जरी कर चमत्कार किया है। इस तरह की यह दुनिया की पहली सर्जरी है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डॉक्टरों की एक टीम ने गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के अंदर एक दुर्लभ रक्त वाहिका की असामान्य स्थिति का इलाज करने के लिए उसकी ब्रेन-सर्जरी की है।
अमेरिकी शहर बोस्टन में डॉक्टरों की एक टीम ने यह सफल सर्जरी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गैलेन मालफॉर्मेशन की नस के रूप में जानी जाने वाली दुर्लभ बीमारी का इलाज करने के लिए सफलतापूर्वक भ्रूण की सर्जरी की गयी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भ के अंदर हुई यह सर्जरी अल्ट्रासाउंड-गाइडेड प्रक्रिया थी।
यह सर्जरी मार्च में हुई थी लेकिन इसके बारे में पूरी रिपोर्ट गुरुवार को स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित हुई है। सीएनएन के मुताबिक, गैलेन मालफॉर्मेशन की स्थिति तब विकसित होती है, जब ब्रेन से हार्ट तक खून पहुंचाने वाली रक्त नलिका का विकास भ्रूण के अंदर नहीं हो पाता है।
इस नली के विकसित नहीं होने से बच्चे के विकास पर बुरा असर पड़ता है और उसे कई तरह की बीमारियां होने का खतरा रहता है। बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के रेडियोलॉजिस्ट के स्पेशलिस्ट डॉ डैरेन ओरबैक ने बताया कि ऐसी स्थिति में बच्चे के ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट फेल होने का खतरा रहता है।
ओरबैक के मुताबिक, आमतौर पर ऐसे मामलों में बच्चे के जन्म लेने के बाद उसका इलाज किया जाता है और उसके ब्रेन में एक कैथेटर डालकर उसके ब्लड सप्लाई की गति को कम किया जाता है। बतौर डॉक्टर इस प्रक्रिया में 50 से 60 फीसदी बच्चे बहुत कमजोर हो जाते हैं और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में मृत्युदर भी 40 फीसदी के करीब होती है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना के बाद गढ़वा में मलेरिया का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। आलम ये है कि गढ़वा जिले के 7 प्रखंड डेंजर जोन में आ गये हैं। इन 7 प्रखंडों में मलेरिया का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि स्वास्थ्य महकमा बीमारी की रोकथाम को लेकर अभियान चला रहा है, लेकिन जरूरी है कि आम जनता भी सावधानियां बरतें। गढ़वा जिले में मलेरिया के मरीजों की बढ़ती संख्या से हड़कंप मचा है। एक्शन मोड में आए स्वास्थ्य महकने ने जिले के सात प्रखंडों को डेंजर जोन घोषित कर दिया है। इन प्रखंडों में मेराल, धुरकी, बंशीधर नगर, भवनाथपुर, माझीयाओ, रंका और भंडरिया शामिल हैं।
मौसम में बदलाव है वजह : गढ़वा जिले में कभी भीषण गर्मी तो कभी बारिश से मौसम में हो रहे बदलाव के चलते मलेरिया का प्रकोप बढ़ रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ती जा रही है। इस बीच स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी के रोकथाम को लेकर अभियान चलाया है। जिसके तहत लगभग 25 हजार ऐसे सैम्पल कलेक्ट किये गये, जिन्हें बुखार था।
हालांकि सभी सैंपल्स की रिपोर्ट निगेटिव आयी, लेकिन जब सैंपल्स को पटना भेज कर क्रॉस वेरिफिकेशन किया गया तो दो पॉजिटिव मरीज भी मिले। जिसमें एक मेराल और एक माझीयाओ के हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग लोगों में जागरुकता फैलाने कोशिश कर रहा है ताकि ज्यादा लोग बीमारी की चपेट में न आये।
ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान : मलेरिया के ज्यादातर मरीज ग्रामीण इलाकों से मिलते हैं ऐसे में ग्रामीण इलाकों में भी जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। जगह-जगह पर डीडीटी का छिड़काव भी किया जा रहा है। मलेरिया मच्छर की फीमेल प्रजाति एनोफिलीज के काटने से फैलता है।
इस मच्छर में प्लाज्मोडियम नाम का जीवाणु पाया जाता है। इसी से संक्रमित होकर लोग बीमार पड़ते हैं। मलेरिया के लक्षण शुरुआत के 2 से 3 दिनों के अंदर ही दिखने लगते हैं। मलेरिया होने पर बुखार आना, सिर दर्द होना, उल्टी होना, मन मचलना, ठंड लगना, चक्कर आना, थकान होना, पेट दर्द, थकान और बैचेनी होना जैसे लक्षण शामिल हैं।
हालांकि अब तो वैक्सीन्स से मलेरिया का बचाव हो जाता है, लेकिन कई बार ये बीमारी मौत का कारण भी बन जाती है। ऐसे में जरूरी है कि मलेरिया से बचाव के लिए सावधानियां बरती जाये।
एबीएन हेल्थ डेस्क। करीब एक दशक लंबी रिसर्च के बाद दुनिया में पहली बार पारंपरिक चिकित्सा के दम पर कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकी जायेगी। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए) के डॉक्टरों ने आयुर्वेद सिद्धांतों के जरिए वी2एस2 नामक दवा की खोज की है जिसे हाइड्रो एल्कोहलिक तत्वों से तैयार किया है।
दवा को बाजार में आने से पहले क्लीनिकल ट्रायल से गुजरना होगा जिसकी शुरुआत मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल से होने जा रही है। इस प्री क्लीनिकल ट्रायल के बाद जम्मू में उसके आगे का परीक्षण किया जायेगा। एनआईए के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि प्री क्लीनिकल ट्रायल जल्द ही मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में शुरू होंगे। इसके बाद जयपुर और जम्मू कश्मीर में ट्रायल पूरा होगा।
पारंपरिक चिकित्सा और वैज्ञानिक तथ्यों को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ ज्योति कोडे ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस अध्ययन के लिए मॉडल तैयार किया गया है। क्लीनिकल ट्रायल फेज पूरा करने में करीब दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है लेकिन इस अवधि में उनके पास ठोस परिणाम होंगे और फिर यह उपचार पद्धति में शामिल हो सकती है।
संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद के कई अध्यायों में कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ रोकने का वर्णन मिलता है। इन्हीं फाॅर्मूला को लेकर लंबे समय से डॉक्टर अध्ययन कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान इसमें थोड़ी रुकावट आई थी लेकिन जब प्रयोगशाला में यह तैयार हुआ तो इसमें कैंसररोधी गुणों की पुष्टि हुई। साथ ही, पता चला कि यह इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी सहायक है।
टीम एबीएन, रांची। श्री माहेश्वरी सभा रांची एवं लायंस क्लब रांची नार्थ के सयुंक्त प्रयास से आज दिनांक 11 अप्रैल को स्थानीय माहेश्वरी भवन में न्यूरोथैरेपी चिकित्सा कैंप का शुभारंभ किया गया। यह कैंप 11 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलेगा।
नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे 10 दिनों तक रांची में रोगियों का इलाज कर उन्हें लाभान्वित करेंगे। न्यूरोथैरेपी एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जिसके द्वारा जटिल से जटिल एवं पुराने से पुराने रोगों का उपचार किया जाता है।
इस पद्धति द्वारा मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र और हार्मोन असंतुलन के विकार को दूर कर उपचार किया जाता है। यह दवा रहित नैसर्गिक उपचार पद्धति है। तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र को ठीक कर बीमारी के मूल कारण को समाप्त किया जाता है। शरीर के केंद्र नाभि को व्यवस्थित कर रोग को नष्ट किया जाता है।
विभिन्न पुरानी और गंभीर बीमारियां जैसे :- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों का दर्द, कब्ज और पेट की अन्य बीमारियां, पीठ और कमर का दर्द, मंद बुद्धि या अवसाद, अम्ल पित्त से संबंधित बीमारियां, अस्थमा या सांस की बीमारी, बवासीर, अनिंद्रा, अनियमित या पीड़ादायक मासिक, चक्कर आना आदि सभी तरह के रोगों का उपचार संभव है।
कैंप का उद्घाटन झारखंड बिहार प्रदेश माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष श्री राज कुमार मारु तथा लायंस क्लब के पूर्व जिलापाल श्री संजीव पोद्दार ने किया। श्री राज कुमार मारु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे कई रोगी जिनका इलाज अब दवाइयों से संभव नहीं है उन्हें इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से लाभ मिलेगा।
नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे ने बताया की वर्तमान में रहन-सहन एवं खानपान के कारण शरीर में हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है एवं तंत्रिका तंत्र में विकार पैदा होने लगता है इलाज से हार्मोन को संतुलित एवं तांत्रिक तंत्र को मजबूती प्रदान कर रोगों का निवारण किया जाता है।
लायंस क्लब के पूर्व जिला पाल श्री संजीव पोद्दार ने कैंप के आयोजक श्री नरेन्द्र लाखोटिया एवं श्री मुरारी लाल राजगढ़िया की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को रांची की जनता तक पहुंचा कर उल्लेखनीय कार्य किया है।
श्री माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष किशन साबू ने बताया कि भविष्य में इस तरह के वैकल्पिक चिकित्सा कैंप का आयोजन किया जाता रहेगा। चिकित्सा परामर्श एवं इलाज प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक तथा संध्या 4 बजे से 7 बजे तक चलेगा।
आज के उद्घाटन कार्यक्रम में शिव शंकर साबू, रोहित अग्रवाल, प्रभात साबू, मनोज चौधरी, अमित मालपानी, अंकुर डागा, मंजू दरगड़, अजय दरगड़ उपस्थित रहे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। देश के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्तियों का दौर लौटने लगा है। कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना फिर अनिवार्य कर दिया है, तो कई प्रदेशों ने बेहद सावधान रहने की हिदायत दी है। जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है।
देशभर में मॉकड्रिल शुरू
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी अस्पतालों, पॉलिक्लीनिक व डिस्पेंसरियों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, कोरोना संक्रमण के चलते किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश भर में सरकारी और निजी अस्पतालों में दो दिन मॉकड्रिल होगी।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में तैयारियों को परखने का निर्देश दिया था, साथ ही तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल करने के भी निर्देश दिये थे। जिसके बाद आज देशभर में मॉकड्रिल शुरू हो गई हैं।
चेन्नई के राजीव गांधी जनरल हॉस्पिटल में भी कोरोना महामारी की तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल की गई, जिसका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण भी किया। संक्रमण को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियातन सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है।
जिला प्रशासन और पंचायतों को भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। केरल सरकार ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग नागरिकों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया है।
पुडुचेरी प्रशासन ने भी तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक स्थलों पर मास्क अनिवार्य कर दिया है। वहीं, यूपी सरकार ने राज्य के सभी हवाईअड्डों पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सरकारी आदेश में पॉजिटिव पाए जाने वाले नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने को भी कहा गया है।
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