हेल्थ

View All
Published / 2024-09-26 15:35:29
बीपी-सुगर की कई दवाइयां लैब टेस्ट में फेल

  • डायबिटीज, बीपी की ये दवाएं लैब टेस्ट में फेल
  • खराब मेडिसिन ऐसे पहुंचाती हैं शरीर को नुकसान

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में दवाओं की बढ़ती क़ीमतें आम लोगों के लिए एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। इस बीच जब ये पता चले की डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों को कंट्रोल करने वाली कुछ दवाएं लैब टेस्ट में फेल हैं तो फिर ये चिंता का विषय है।

भारत की भारत में ड्रग रेगुलेटरी अथॉरिटी केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने 53 दवाओं को लैब क्वालिटी टेस्ट में फेल किया है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर और टाइप-2 डायबिटीज को कंट्रोल करने वाली दवाएं भी शामिल हैं। भारत में डायबिटीज के 10 करोड़ से ज्यादा मरीज हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, आमतौर पर डायबिटीज के कुल मरीजों में से 80 फीसदी से ज्यादा टाइप-2 वाले होते हैं। इसी तरह भारत में हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या भी 20 करोड़ है। ऐसे में अब सोचिए कि इतनी बड़ी आबादी जिस बीमारी की दवा खाती है उनकी क्लाविटी अच्छी नहीं है।

जो दवाएं टेस्ट में फेल हुई हैं उनमें हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने वाली मेडिसिन टेल्मिसर्टन और टाइप-2 डायबिटीज की दवा ग्लिमेपिराइड भी शामिल है। हालांकि इन नाम की सभी मेडिसिन फेल नहीं है, इन दवाओं को बनाने वाली दो कंपनियों की दवा की ही क्वालिटी खराब मिली है। 

इस बीच यह जानना भी जरूरी है की टेस्ट में फेल दवाएं अगर कोई खा चुका है तो वह कैसे शरीर को नुकसान पहुंचाती है। क्या सभी दवाएं ही खराब हैं? इसको जानने के लिए हमने एक्सपर्ट्स से बातचीत की है। दिल्ली में मेडिसिन के डॉ अजय कुमार बताते हैं कि लैब टेस्ट में फेल होने वाली दवाएं वह होती हैं। जिनको खाने से सेहत खराब हो सकती है।

आमतौर पर दवा किडनी और लिवर को खराब करती है, चूंकि डायबिटीज और हाई बीपी की दवाएं लोग आमतौर पर हर दिन ही खाते हैं तो अगर टेस्ट में फेल दवा कोई खा चुका है तो इससे लिवर में खराबी या किडनी की कोई बीमारी होने की आशंका रहती है। हालांकि लैब टेस्ट में फेल होने का ये मतलब नहीं है कि भारत या दुनिया में मौजूद सभी ग्लिमेपिराइड और टेल्मिसर्टन दवा खराब हैं। ऐसा बिलकुल नहीं है।

डॉ कुमार बताते हैं कि हर दवा को कई कंपनियां अपने-अपने ब्रांड नेम से बनाती हैं।मैसर्स, मैस्कॉट हेल्थ सीरीज़ प्रा. लिमिटेड की ओर से बनाई जा रही ग्लिमेपिराइड लैब टेस्ट में फेल हुई है। इसी तरह स्विस गार्नियर लाइफ कंपनी की टेल्मिसर्टन फेल है। यानी सिर्फ इन कंपनी की ओर से बनाई जा रही ग्लिमेपिराइड और टेल्मिसर्टन दवाओं की गुणवत्ता अच्छी नहीं है। बाकी कंपनियों की दवाएं ठीक है। उनको आप खा सकते हैं. उनसे नुकसान नहीं है।

क्यों लैब टेस्ट में दवा होती है फेल?

जीटीबी हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉ अंकित कुमार बताते हैं कि कई बार खराब मौसम और किसी बैक्टीरिया के दवाओं के स्टॉक में जाने से कुछ स्टॉक खराब हो जाता है। कुछ मामलों में सेंपलिंग एरर की वजह से भी दवाएं लैब टेस्ट में फेल हो जाती हैं।

ऐसे में जरूरी नहीं होता कि कंपनी की ओर से बनाई गई सभी दवाएं ही खराब हों, या आगे जो दवा बनेंगी वो भी फेल हो जाएं, ये सब जरूरी नहीं है। हालांकि फिर भी दवा कंपनियों को सभी चीजों का ध्यान रखना चाहिए। कंपनियों को स्टॉक की सही से जांच करनी चाहिए। इसके बाद ही दवाएं आम लोगों तक जानी चाहिए।

Published / 2024-09-17 19:36:37
27 देशों तक फैला कोरोना का नया XEC वेरिएंट

  • कोरोना वायरस का नया खतरा! 27 देशों तक फैला XEC वेरिएंट, कितना खतरनाक?

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में लाखों लोगों की जान लेने वाला कोरोना वायरस एक बार फिर पैर पसार रहा है। इसी साल जून में जर्मनी के बर्लिन में कोरोना वायरस का एक नया वेरिएंट XEC (MV.1) सामने आया था, जानकारी के मुताबिक यह वेरिएंट दुनियाभर में तेज़ी से फैल रहा है। 

स्क्रिप्स रिसर्च के आउटब्रेक डॉट इन्फो पेज पर 5 सितंबर को दी गयी जानकारी के मुताबिक अमेरिका के 12 राज्यों और 15 देशों में इस वेरिएंट के 95 मरीज पाये गये हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया के डाटा इंटिग्रेशन स्पेशलिस्ट माइक हनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी है कि यूरोप, नॉर्थ अमेरिका और एशिया के करीब 27 देशों में इस नए वेरिएंट के 100 से ज्यादा मरीजों की पहचान की जा चुकी है।

माइक हनी ने आशंका जतायी है कि आने वाले दिनों में यह वेरिएंट ओमिक्रॉन के DeFLuQE की तरह चुनौती बन सकता है। अमेरिका के सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक इस महीने की शुरुआती दो हफ्तों में ओमिक्रॉन वेरिएंट का KP.3.1.1 स्ट्रेन (जिसे DeFLuQE के नाम से जाना जाता है) हावी रहा है।

1 से 14 सितंबर के बीच अमेरिका में इस वेरिएंट के करीब 52.7 % मरीज पाये गये हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि जितनी तेजी से XEC वेरिएंट फैल रहा है, वह जल्द ही KP.3 वेरिएंट के बाद दूसरा बड़ा खतरा हो सकता है। इस वेरिएंट के लक्षण भी बुखार और सर्दी की तरह हैं। इसमें तेज बुखार आना, शरीर में दर्द, थकान, खांसी और गले में खराश महसूस हो सकती है। 

इसके अलावा सांस लेने में परेशानी, सिरदर्द, स्वाद और सुगंध का पता न चलना, उल्टी और डायरिया जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। कोरोना वायरस से ग्रसित ज्यादातर लोग कुछ ही हफ्तों में ठीक महसूस करने लगते हैं लेकिन इस वेरिएंट से संक्रमित मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है।

Published / 2024-09-12 20:26:17
राजधानी रांची समेत राज्य भर में तेजी से पांव पसार रहा है डेंगू

टीम एबीएन, रांची। एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाली बीमारी डेंगू तेजी से राज्य के कई जिलों में पांव पसार रहा है। राजधानी के अलग-अलग निजी और सरकारी अस्पतालों में डेंगू के लक्षण के साथ पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग जहां अलर्ट मोड में हैं तो वहीं दूसरी ओर डॉक्टर इससे बचाव के उपाय भी लोगों को बता रहे हैं।

08 सितंबर तक 436 लोगों में डेंगू की हो चुकी है पुष्टि

झारखंड में वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के नोडल पदाधिकारी डॉ बीके सिंह ने बताया कि इस वर्ष राज्य के गोड्डा, पाकुड़ और जामताड़ा जिले को छोड़ बाकी के 21 जिलों में डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। सबसे ज्यादा 122 डेंगू मरीज की पहचान रांची में हुई है जबकि पूर्वी सिंहभूम में 66, खूंटी में 59 मरीज मिले हैं। 

स्वास्थ्य निदेशालय के अनुसार बोकारो में 09, चतरा में 05, देवघर में 06, धनबाद में 09, दुमका में 01, गढ़वा में 16, गिरिडीह में 18, गुमला में 08, हजारीबाग में 20, कोडरमा में 04, लातेहार में 04, लोहरदगा में 03, पलामू में 13, रामगढ़ 06, साहिबगंज में 24, सरायकेला-खरसावां में 15, सिमडेगा में 04 और पश्चिमी सिंहभूम में 24 डेंगू के कंफर्म केस मिल चुके हैं।

Published / 2024-09-11 19:34:15
देश में सुपरबग्स का भयंकर खतरा

देश के टॉप-21 अस्पतालों में मिला डेडली बैक्टीरिया, आइसीएमआर की चौंकाने वाली रिपोर्ट! 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक नयी रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ( आइसीएमआर) के अनुसार, देश के 21 प्रमुख अस्पतालों में सुपरबग्स की खतरनाक उपस्थिति देखी गई है। इन सुपरबग्स के कारण अस्पतालों में भर्ती मरीजों के जीवन को खतरा हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा क्लासीफाइड सुपरबग्स (क्लेबसिएला न्यूमोनिया और एस्चेरिचिया कोलाई) मुख्य रूप से एम्स दिल्ली, पीजीआइ चंडीगढ़, अपोलो अस्पताल चेन्नई और दिल्ली के गंगाराम अस्पताल सहित कई अन्य अस्पतालों में पाये गये। 

आईसीएमआर रिपोर्ट में कहा गया है कि ये सुपरबग्स मरीजों के सैंपल में पाये गये, जिनमें खून, यूरीन और अन्य तरल पदार्थ शामिल हैं, जो आउट पेशेंट विभागों (ओपीडी), वार्डों और आईसीयू से एकत्र किए गए थे। इस खुलासे से अस्पतालों में अलार्म बज गया है और उन्हें सुपरबग्स के आगे प्रसार को रोकने के लिए दवाओं का बेहतर मैनेजमेंट और जीवाणु अपशिष्ट के निपटान के लिए सख्त प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी गयी है। 

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनइपी) द्वारा इस साल की शुरुआत में प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 2050 तक सुपरबग्स कैंसर जितने बड़े खतरे में हो सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे सुपरबग्स के प्रत्यक्ष आर्थिक परिणाम 2030 के अंत तक लगभग 3.4 ट्रिलियन डॉलर प्रति वर्ष होंगे। इसके अलावा, 24 मिलियन लोग चरम गरीबी में धकेले जा सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि पशु पालन और फार्मास्युटिकल कंपनियों द्वारा प्रदूषण से सुपरबग्स का उदय बढ़ गया है। 

क्या हैं सुपरबग्स? 

सुपरबग्स बैक्टीरिया, वायरस, फंगी या परजीवी के ऐसे स्ट्रेन हैं जो ज्यादातर एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति रजिस्टेंस होते हैं, जिनमें आधुनिक दवाएं भी शामिल हैं। वे अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग के कारण होते हैं। कीटाणुनाशक, एंटीसेप्टिक्स और एंटीबायोटिक्स जो जर्म्स को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं, हर जगह मौजूद हैं, टूथपेस्ट और शैम्पू से लेकर गाय के दूध और गंदे पानी तक।

Published / 2024-09-08 18:50:28
सिनेर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल बरियातु में बहुत ही धूमधाम से मना वर्ल्ड फिजियोथेरेपी दिवस

टीम एबीएन, रांची। विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल के फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट में वर्ल्ड फिजियोथेरेपी दिवस को बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। इस बार वर्ल्ड फिजियोथेरेपी डे का थीम रोल आफ फिजियोथेरेपी इन मैनेजमैंट एंड प्रिवेंशन इन लो बैक पैन था। जिस विषय पर हमारे मुख्य अतिथि और प्रवक्ता ने अपने विचारों को साझा किया।

डॉ रजनीश कुमार (हड्डी रोग विशेषज्ञ) ने बताया कि हेल्थ केयर प्रोफेशन में जितना इंपोर्टेंट रोल हमारा है, उतने ही महत्वपूर्ण रोल फिजियोथेरेपी का है। सर्जरी के बाद पेशेंट को वापस दैनिक दिनचर्चा में लाने में फिजियोथेरेपी का पचास प्रतिशत का योगदान है। साथ ही डॉ राहुल (हड्डी रोग विशेषज्ञ) ने भी बताया कि जितने पेशेंट हमारे पास आते हैं उनमें से अस्सी- नब्बे प्रतिशत मामला का मुख्य कारण कमर दर्द से रिलेटेड ही रहता है।

जिसे ठीक करने हेतु हम फिजियोथेरेपी की सलाह देते हैं। फिजियोथेरेपी अतिथि के रूप में मौजूद संध्या आर मेहता (आईपीएस, डीआइजी, सीआईडी) मैम ने भी फिजियोथेरेपी को लेकर अपने जीवन के अनुभव को शेयर किया कि कैसे फिजियोथेरेपी की मदद से पुराने कमर दर्द से राहत पाया और वापस से दर्द से निजात पाया। विशेष अतिथि लवली चौबे (स्वर्ण विजेता भारत) (लॉन बॉल) और कॉमनवेल्थ गेम्स ने भी बताया कि खेलने के दौरान उन्होंने फिजियोथेरेपी के मदद से कैसे अपने सपनों को साकार किया। 

साथ ही गेस्ट के तौर पर डॉ कुमकुम विद्यार्थी मैम (सीनियर  ज्ञानिकोलोजिस्ट) और डॉ संगीत सौरभ सर (गैस्ट्रोलॉजिस्ट) ने भी फिजियोथेरेपी के जागरूकता हेतू अपने अपने विचार प्रकट किये। आखिरी स्पीकर के तौर पर डीबीपीआर के संस्थापक डॉ रजनीश कुमार बरियार, डॉ प्रियंका बरियार ने सभी अतिथियों को सौल और मोमेंटो देकर उनका सम्मान किया और डॉ बरियार ने बताया कि हम कैसे अपने समाज के हर व्यक्ति को फिजियोथेरेपी के एक्सरसाइज से हम उन्हें कमर के दर्द से दूर रख सकते हैं।

उनका बस एक ही उद्देश्य है कि समाज का हर व्यक्ति को स्वस्थ रहना है। उनकी पूरी टीम कैसे इस कार्य में जुटी हुई है और अंत में डॉ सुभालक्ष्मी खटुआ ने वोट आफ थैंक्स देकर कार्यक्रम का समापन किया। डॉ शुभालक्ष्मी ने उन सारे मरीज का भी सम्मान किया और उन्हें शॉल और गुलदस्ता देकर उनका स्वागत भी किया गया। 

कार्यक्रम में डॉ ज्योत्सना, डॉ अफजल, डॉ आर्यन, डॉ राहुल, डॉ नेहा, डॉ शिवानी, डॉ शीला, डॉ धीरज, डॉ मेहर, डॉ सबाना, जौनुअल, निशांत, राज सिंह, संजू सिंह, डॉ नसीम, डॉ जावेद, डॉ हेमलता, सबीना, पिंकी सुशांत ने अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। सबने फिजियोथेरेपी की जागरूकता को लेकर कमर के दर्द के इलाज और इसके रोक थाम के बारे में बेहतरिन जानकारी दी।

Published / 2024-08-10 20:47:49
त्राटक योग क्रिया से सिरदर्द व अनिद्रा की समस्या का निदान व स्मरण शक्ति का होता है विकास : योगाचार्य महेश पाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। योग एक आध्यात्मिक विज्ञान है, जिससे शरीर का समग्र विकास होता है। यदि किसी को अपनी एकाग्रता शक्ति बढ़ानी है, तो उसके लिए कई विशेष योग निर्धारित किये गये हैं। इन योग में से एक है त्राटक योग योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि त्राटक योग ध्यान का एक रूप है, जिसे एकाग्र दृष्टि के रूप में भी जाना जाता है। इसे आमतौर पर कैंडल ग्लेजिंग यानी मोमबत्ती देखने वाले योग के रूप में जाना जाता है। 

त्राटक क्रिया मोमबत्ती ध्यान के साथ साथ गोलाकार, चक्राकार, बिंदु, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, आदि दृश्य पर भी ध्यान किया जाता है। त्राटक मूल रूप से षट्कर्म का भाग है। यह आंतरिक अंगों को शुद्ध करने के लिए उपयोग है। त्राटक योग का उपयोग सबसे पहले मन की अस्थिरता को दूर करने और एकाग्रता को बढ़ावा देने के साथ-साथ आंखों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए किया जाता है। त्राटक योग के अभ्यास को मुक्ति और मोक्ष के मार्ग की तैयारी के लिए बताये गये छह षट्कर्म में से एक माना गया है। 

जब त्राटक योग का अभ्यास करने की बात आती है, तो इसे करने के कई तरीके हैं। चाहे उसका बौद्ध-प्रभावित श्वास-केंद्रित ध्यान हो, मंत्र के साथ वैदिक ध्यान हो या आपकी शारीरिक संवेदनाओं का ध्यानपूर्वक अवलोकन करना हो, परंपरागत रूप से योगियों द्वारा न केवल आंखों पर इसके लाभकारी प्रभावों के लिए, बल्कि एकाग्रता में सुधार पर इसके जबरदस्त प्रभाव के लिए भी विभिन्न तरीकों से इसका अभ्यास किया जाता है। 

इस योगीक क्रिया को करने के लिए सबसे पहले मोमबत्ती जलायें और इसे आंखों के स्तर पर रखें, सुनिश्चित करें कि मोमबत्ती की लौ हवा के कारण हिले नहीं, हाथों को घुटनों पर रखकर आरामदायक ध्यान मुद्रा में बैठें। शरीर को आराम देने के लिए धीरे-धीरे सांस लें अब आंखें बंद करें और कुछ सेकंड बाद धीरे-धीरे आंखें खोलें और बिना पलक झपकाये मोमबत्ती की लौ एकटक देखने की कोशिश करें। 

आंखों पर दबाव डाले बिना, जितना संभव हो सके लौ को देखते रहें और फिर जरूरत पड़ने पर आंखें बंद कर दें आंखें बंद करके अपना पूरा ध्यान भौंहों पर केन्द्रित करें, इस अवस्था में ही मस्तिष्क में मोमबत्ती की लौ की कल्पना करें और उस पर ध्यान केंद्रित करें। साथ ही बंद आंखों से नजर आने वाले किसी भी रंग का अध्ययन करें। जब मस्तिष्क के भीतर उभरने वाली छवि गायब हो जाए, तो इस प्रक्रिया को 5-10 मिनट तक जारी रखें। 

यदि मन भटकता है,तो श्वास पर ध्यान केंद्रित करें। त्राटक योग अभ्यास करने से कई अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जिसमें, आंखों की मांसपेशियों के रोग निकट दृष्टि दोष, एकाग्रता और स्मृति में सुधार करता है, इसलिए स्कूली बच्चों को इस योग का अभ्यास जरूरी है त्राटक योग के जरिए नींद से संबंधित विकारों, सिरदर्द, अनिद्रा व बुरे सपने, बेचैन मन शांत, मानसिक, व्यावहारिक और भावनात्मक बीमारियों को दूर करने में भी मदद करता है त्राटक योग से आपका आत्मविश्वास, धैर्य और इच्छाशक्ति को बढ़ावा मिलता है। त्राटक योग क्रिया के अभ्यास से पहले कुछ सावधानी बरतनी जरूरी है। 

त्राटक योग खाली पेट और प्राणायाम अभ्यास के बाद सुबह 4-6 बजे के बीच अधिक प्रभावी है। आप रात में सोने से पहले भी इस योग का अभ्यास कर सकते हैं। त्राटक योग का अभ्यास करते समय इस बात का ध्यान रखें कि कमरा न तो रोशनी से भरा हो और न ही उसमें बहुत अंधेरा हो। प्रतिदिन 10-15 मिनट इसका अभ्यास किया जा सकता है। ग्लूकोमा जैसे गंभीर नेत्र विकार होने पर त्राटक योग नहीं करना चाहिए। 

इसके अलावा, सिजोफ्रेनिया या मतिभ्रम जैसी मानसिक समस्याओं से ग्रस्त लोगों के लिए त्राटक योग उपयुक्त नहीं है। योगाचार्य के मार्गदर्शन में ही त्राटक योग क्रिया का अभ्यास किया जाना चाहिए त्राटक योग प्रभावी और लाभकारी विशेष योग है। इसके माध्यम से आप अपनी एकाग्रता शक्ति को बढ़ा सकते हैं। अगर आपको ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है, तो यह योग आपके लिए लाभदायक साबित होगा।

Published / 2024-08-02 21:23:53
कपालभाति योगिक क्रिया से फेफड़ो (लंग्स) की कार्य क्षमता बढ़ती है और लंग्स इंफेक्शन होता है कंट्रोल : योगाचार्य महेशपाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। योग की उत्पति जब से सभ्यता प्रारंभ  हुई थी और तब से योग किया जा रहा है यह हमारी भारतीय संस्कृति का हिस्सा है। योगाचार्य महेशपाल बताते है कि  यह शारीरिक, आध्यात्मिक और मानसिक व्यायामों का एक समूह है जिसका अभ्यास हमारे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। यह अब पश्चिम में भी शारीरिक व्यायाम के रूप में लोकप्रिय हो गया है। योग तनाव को कम करता है और अच्छे शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है। कपालभाति योगिक क्रिया एकलोकप्रिय योग अभ्यास है। 

कपालभाति योग में षट्कर्म (हठ योग) की एक विधि (क्रिया) है। संस्कृत में कपाल का अर्थ होता है माथा या ललाट और भाति का अर्थ है तेज। इसके नियमित अभ्यास करने से मुख पर आंतरिक प्रभा (चमक) से उत्पन्न तेज रहता है। कपाल भाति बहुत ऊजार्वान उच्च उदर श्वास व्यायाम है। कपालभाति के तीन अलग-अलग प्रकार हैं। वातक्रम कपालभाति के में सांस को बाहर निकाला जाता है जबकि सांस को अंदर लेना स्वाभाविक और निष्क्रिय होता है। व्युत्क्रम कपालभाति में नाक से पानी अंदर प्रवेश कराया जाता है और फिर मुंह से बाहर निकाला जाता है। 

अंत में, शीतक्रम कपालभाति वह है जिसमें पानी को मुँह में पिया जाता है और फिर नाक से बाहर निकाला जाता है। यह अभ्यास नाक के मार्ग और श्वसन प्रणाली को शुद्ध करने के लिए किया जाता है, कपालभाति योगिक क्रिया के अभ्यास करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें। इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से साँस को यथासंभव बाहर फेंकें। साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें। तत्पश्चात तुरन्त नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खींचते हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं। 

इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैे, किन्तु एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ायें। फेफड़े श्वसन तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो आपको सांस लेने में मदद करते हैं। फेफड़ों के अलावा, श्वसन तंत्र में वायुमार्ग शामिल होते हैं जो आपके फेफड़ों में हवा को अंदर और बाहर ले जाते हैं, फेफड़ों के आसपास की रक्त वाहिकाएं और मांसपेशियां जो आपको सांस लेने में मदद करती हैं। अगर इनमें इंफेक्शन हो जाए तो काफी गंभीर समस्या हमारे सामने नजर आती हैं जिससे हम लंग्स इन्फेक्शन के नाम से जानते हैं,  फेफड़ों का संक्रमण वायरस, बैक्टीरिया और कभी-कभी फंगस के कारण भी हो जाता है। 

जब आपके फेफड़ों से हवा को लाने-ले जाने वाली बड़ी ब्रोन्कियल नलियां संक्रमित हो जाती हैं, तो इसे ब्रोंकाइटिस कहा जाता है। ब्रोंकाइटिस बैक्टीरिया की तुलना में वायरस के कारण होने की अधिक संभावना होती है। जिसके कारण कई गंभीर समस्या हमारे समक्ष  आ जाती है जिसमें, खांसी के साथ बलगम और ब्लड आना, सांस लेने में समस्या होना, सीने में दर्द होना मांसपेशियों में दर्द होना,गले में दर्द होना, घरघराहट की समस्या, थोड़े काम या सामान्य क्रिया से जल्दी थकान होना, उल्टी-दस्त के साथ जी मिचलाना लंग्स इन्फेक्शन की समस्या से बचाव के लिए एवं वायरस बैक्टीरिया और फंगस के प्रकोप से बचाव के लिए कपालभाति योग क्रिया एवं भस्त्रिका  प्राणायाम के द्वारा हम इन गंभीर रोगों से बचाव कर सकते हैं।

यह अभ्यास  फेफड़ों के इंफेक्शन एवं फेफड़ों से हवा को लाने ले जाने वाली ब्रोंकाइल नालियों को संक्रमित होने से बचाते हैं और फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ाने में मदद करता है जिससे हम विभिन्न प्रकार के रोगों से बच सकते हैं और हमारी इम्यूनिटी स्ट्रांग बनती है, कपाल भाती के अभ्यास से हमे कई लाभ प्राप्त होते हैं जिसमें यह कपाल को शुद्ध करता है कफ विकारों को समाप्त करता है। यह जुकाम, साइनोसाइटिस, अस्थमा एवं श्वास नली संबंधी संक्रमणों में लाभदायक है। यह पूरे शरीर का कायाकल्प करता है और चेहरे को सुकोमल और दीप्तिमान बनाये रखता है। 

यह तंत्रिका तंत्र को संतुलित कर शक्तिशाली बनाता है साथ ही साथ पाचन तंत्र को शक्तिशाली बनाता है। कपालभाती क्रिया के अभ्यास करने से पहले कुछ सावधा सावधानिया रखनी चाहिए यह अभ्यास प्रारंभ मैं योगाचार्य  के मार्गदर्शन मैं ही किया जाना चाहिए हृदय संबंधी व्याधियों में, चक्कर आने, उच्च रक्तचाप, नासिका से रक्त प्रवाह, मिरगी, माइग्रेनस्ट्रोक, हर्निया एवं गैस्ट्रिक अल्सर होने की स्थिति में इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए। 

कपालभाती क्रिया के अभ्यास करने से पहले कुछ  सावधानिया रखनी चाहिए यह अभ्यास प्रारंभ मैं योगाचार्य  के मार्गदर्शन मैं ही किया जाना चाहिए हृदय संबंधी व्याधियों में, चक्कर आने, उच्च रक्तचाप, नासिका से रक्त प्रवाह, मिरगी, माइग्रेनस्ट्रोक, हर्निया एवं गैस्ट्रिक अल्सर होने की स्थिति में इस अभ्यास को नहीं करना चाहिए।

Published / 2024-07-24 18:54:43
पाचन प्रणाली को सुधार करती हैं नौली योगिक क्रिया : योगाचार्य महेशपाल

एबीएन हेल्थ डेस्क। नौली एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है एक व्यायाम जो शरीर के आंतरिक अंगों की मालिश करके पेट के क्षेत्र को साफ करने के लिए किया जाता है। इसे अंग्रेजी में आइसोलेशन आॅफ द बेली भी कहा जाता है। योगाचार्य महेशपाल विस्तार से बताते हैं कि  इस अभ्यास के चार अलग-अलग संस्करण हैं: मध्यान नौली, वामा नौली, दक्षिणा नौली और भ्रमर नौली क्रिया। 

नौलि क्रिया में पेट की आन्तरिक मांसपेशियों को गोल-गोल घुमाया जाता है जिससे उनकी मालिश होता है। इस क्रिया को करने के लिये खड़े होकर, पैरों के बीच कुछ दूरे रखते हुए, घुटनों को मोड़कर किया जाता है। उड्डियान बन्ध, नौलि में किया जाने वाला बन्ध। नौलि छह षटकर्मों में से एक है, जो पारंपरिक हठ योग में प्रयुक्त शुद्धिकरण है।नौली शुरू करने के लिए क्लासिक स्थिति यह है कि खड़े होकर धड़ को थोड़ा आगे की ओर झुकायें और हाथों को जांघों पर टिकाएं।

पूरी सांस बाहर छोड़ी जाती है और फिर पेट को अंदर लाया जाता है। फिर पेट की मांसपेशियों को अलग किया जाता है और एक सर्कल में घुमाए जाने से पहले उन्हें सिकोड़ा जाता है। यह हठ योग में इस्तेमाल किए जाने वाले छह षट्कर्म या शुद्धिकरण विधियों में से एक है। माना जाता है कि नौली समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है और जीवन शक्ति को बढ़ाती है। 

यह मणिपुर और स्वाधिष्ठान चक्रों को भी सक्रिय करती है नौली क्रिया में उड्डियन बन्ध में फेफड़ों को खाली किया जाता है, और पेट पसली के निचले किनारे के नीचे अंदर और ऊपर की ओर खींचा जाता है मध्यान नौलि : केवल पेट की केंद्रीय मांसपेशियां सिकुड़ती हैं वाम नौलि मैं केवल पेट की बाईं मांसपेशियां सिकुड़ती हैं दक्षिण नौलि मैं केवल पेट की दाहिनी मांसपेशियां सिकुड़ती हैं। 

योग का एक नियम है कि प्रत्येक मांसपेशी एक दिन में कम से कम एक बार गतिशील अवश्य हो। इससे हमारी ऊर्जा पुन: प्रवाहित होने लगती है और रुकावटें दूर होती हैं। ऊर्जा पानी के समान है। जो पानी एक जगह ठहरा रहता है वह अशुद्ध और दुर्गंधयुक्त हो जाता है। इसके विपरीत, जो पानी बहता रहता है हमेशा शुद्ध रहता है। यही कारण है कि हमें भी अपने पेट की मांसपेशियों और आंतों को रोजाना गतिशील करना चाहिये। नौलि अति प्रभावी रूप से पाचन में सहायक है और इस प्रक्रिया में आने वाली रुकावटों को दूर करती है।

नौली योगिक क्रिया के पेट की मांसपेशियों को मजबूत करती है और आंतों व पेट के निचले अवयवों की मालिश करती है। यह रक्तचाप को नियमित करती है और मधुमेह के खिलाफ सुरक्षात्मक परहेजी प्रभाव रखती है। यह अम्ल शूल और चर्म रोगों (मुहांसों) को दूर करने में सहायक है संपूर्ण पाचक प्रणाली पर सकारात्मक असर और रुकावटें दूर करने से नौलि हमारे स्वास्थ के लिए सर्वोत्तम व्यायामों मैं  से एक है। 

बहुत सारे रोगों का मूल हमारी पाचन प्रणाली में ही है : सिर दर्द, चर्म रोग, कई बार कैंसर भी। विषैले पदार्थ और व्यर्थ उत्पाद जो समय पर बाहर नहीं निकल पाते वे हमारे शरीर में जमा हो जाते हैं - ये ही विषम परिस्थितियों का बनते नौली योगिक क्रिया करने से पहले कुछ बातों का ध्यान  जरूर रखना चाहिए। खाली पेट ही यह अभ्यास करें। 

गर्भावस्था की स्थिति में या गुर्दे और पित्ताशय में पथरी हो तो इसका अभ्यास नहीं करें। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि नौली क्रिया एक उन्नत योगिक अभ्यास है और इसे किसी अनुभवी योग प्रशिक्षक या योगाचार्य के मार्गदर्शन में सीखा और अभ्यास किया जाना चाहिए। उचित निर्देश के बिना इस तकनीक का प्रयास करने से चोट या असुविधा हो सकती है।

Page 14 of 55

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse