Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

हेल्थ

View All
मार्च से शुरू हो जाएगा 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण
Published / 2022-01-17 16:34:21
मार्च से शुरू हो जाएगा 12-14 साल के बच्चों का टीकाकरण

एबीएन डेस्क। भारत में कोरोना वायरस टीकाकरण की रफ्तार तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बीच केंद्र सरकार के कोविड-19 वर्किंग ग्रुप (NTAGI) के अध्यक्ष डॉक्टर एनके अरोड़ा ने एलान किया है कि भारत में 12 से 14 साल के बच्चों का टीकाकरण मार्च में शुरू हो सकता है। उन्होंने कहा कि तब तक 15 से 18 साल के किशोरों का टीकाकरण पूरा हो जाने की उम्मीद है। ऐसे में अगले चरण में बच्चों को टीका लगाए जाने की उम्मीद है। डॉ अरोड़ा के मुताबिक, देश में 15-18 आयु वर्ग के 7.5 करोड़ लोग हैं। इनमें से 3.45 करोड़ किशोरों को कोरोना की वैक्सीन लग चुकी है। चूंकि, किशोरों को कोवाक्सिन लगाई जा रही है, इसलिए 28 से 42 दिन के अंदर उन्हें टीके की दूसरी खुराक भी दे दी जाएगी। यानी 15-18 आयु वर्ग का वैक्सिनेशन मार्च तक पूरा हो जाएगा। इसके बाद 12 से 14 साल वाले बच्चों का टीकाकरण पूरे जोर-शोर से शुरू किया जा सकेगा। उन्होंने कहा, 15 से 18 आयु वर्ग के किशोर टीकाकरण प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और टीकाकरण की इस गति को देखते हुए इस आयु वर्ग के बाकी लाभार्थियों को जनवरी के अंत तक पहली खुराक लग जाने की संभावना है और उसके बाद उनकी दूसरी खुराक फरवरी के अंत तक दिए जाने की उम्मीद है। अरोड़ा ने कहा कि 15-18 वर्ष के आयु वर्ग का टीकाकरण हो जाने के बाद, सरकार मार्च में 12-14 वर्ष के आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान शुरू करने के बारे में नीतिगत फैसला कर सकती है। उन्होंने बताया कि 12-14 वर्ष के आयु वर्ग में अनुमानित आबादी 7.5 करोड़ है।

कोरोना का नया वैरिएंट : दो दिन में बुखार तो चल जा रहा है, लेकिन खांसी और कफ...
Published / 2022-01-16 12:22:47
कोरोना का नया वैरिएंट : दो दिन में बुखार तो चल जा रहा है, लेकिन खांसी और कफ...

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना की तीसरी लहर में संक्रमितों को नयी समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह समस्या खांसी और कफ की है। बुखार तो दो दिनों में उतर जा रहा है, लेकिन खांसी निगेटिव होने के बावजूद रहती है। चिकित्सकों का मानना है कि मौसम के बदलने से खांसी और कफ कायम है। उनके अनुसार इसमें सर्वाधिक आवश्यकता परहेज की है। बुखार उतरने के बाद हमें लगता है कि हम ठीक हो गए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। बुखार में भी जिस तरह से परहेज कर रहे थे, उसके बाद कम से कम पांच दिनों तक परहेज की जरूरत है। चिकित्सकों ने बताया कि अधिकतर मरीजों को वे लोग कम समय के लिए ही दवा देते हैं, क्योंकि वायरल की एक अवधि है। मरीजों में सहनशीलता नहीं है। वे लोग चिकित्सक से दिखाने या सलाह लेने के बाद मेडिकल स्टोर में जाकर अपने मन से दवा ले रहे हैं, जो उनके लिए ठीक नहीं। कुछ संक्रमितों में यह देखने को मिल रहा है कि उनमें सीआरपी व डी डीमर जल्दी कम नहीं हो रहा है, लेकिन ऐसे मरीजों की संख्या कम है। कुछ लोग स्वत: सीआरपी, सीबीसी और डी डाइमर की जांच करा ले रहे हैं, जो ठीक नहीं। वे लोग कोरोना की दूसरी लहर से डरे हुए हैं। इससे बचने की जरूरत है। ठीक हुए मरीजों की आपबीती अब तक खांसी है। पहले ही दिन से थी। बाद में जांच कराने पर पॉजिटिव निकला। बुखार दो दिनों में ठीक हो गया, लेकिन खंसी अब भी है।

महाराष्ट्र में कम पड़ी किशोरों की कोविड वैक्सीन
Published / 2022-01-16 07:58:06
महाराष्ट्र में कम पड़ी किशोरों की कोविड वैक्सीन

एबीएन डेस्क। महाराष्ट्र में वैक्सीनेशन कितने लोगों की हो चुकी है इस सवाल का जवाब देते हुए राज्य के वैक्सीन ऑफिसर डॉ सचिन देसाई ने बताया है कि महाराष्ट्र में किशोरों को लगाई जाने वाली कोविड वैक्सीन इन दिनों कम पड़ गई है। अब तक राज्य में 90 प्रतिशत लोगों को कोविड वैक्सीन की पहली डोज़ लग चुकी है, वहीं 62 प्रतिशत लोगों को दूसरी डोज़ भी लगाई जा चुकी है। अभी महाराष्ट्र के 94 लाख लोग ऐसे हैं जिन्हें पहली डोज़ नहीं लगी है और दूसरा डोज़ की अनुमति होने के बावजूद भी 1 करोड़ 13 लाख लोगों ने दूसरी डोज़ नहीं ली है। अब तक 15 से 18 साल के 60 लाख किशोरों को वैक्सीन की डोज़ लगाई जानी थी लेकिन अभी केवल 24 लाख किशोरों को ही वैक्सीन लगाई गई है। उन्होंने बताया कि रोजाना 4.5 लाख डोज़ दी जा चुकी हैं और मौजूदा वैक्सीन स्टॉक 20 दिनों तक चल सकता है। महाराष्ट्र राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से कोविशील्ड के 50 लाख डोज़ और कोवैक्सीन के 40 लाख डोज़ मांगे थे, इस महीने 13 लाख कोवैक्सीन डोज़ मिली हैं।

ICMR एक्सपर्ट का दावा : ओमीक्रोन सबको होगा, पहली डोज ही थी बूस्टर
Published / 2022-01-12 05:54:22
ICMR एक्सपर्ट का दावा : ओमीक्रोन सबको होगा, पहली डोज ही थी बूस्टर

एबीएन डेस्क। कोरोना का नया संक्रमण देश में तेजी से पैर पसार रहा है। लेकिन एक्सपर्ट का मानना है कि ओमीक्रोन वेरिएंट डेल्टा की तुलना में बहुत हल्का है पर इसे रोका नहीं जा सकता है, उनका कहना है कि ओमीक्रोन से हर कोई संक्रमित हो सकता है, इससे बचा नहीं जा सकता। देश के शीर्ष महामारी विज्ञानी और सरकारी विशेषज्ञ के अनुसार, कोविड अब भयावह बीमारी नहीं है क्योंकि नया वेरिएंट घातक नहीं, बल्कि हल्का है। उन्होंने कहा कि ओमीक्रोन से बहुत कम रोगी अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं और देश इससे निपट सकता है। ICMR के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान की वैज्ञानिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष महामारी विशेषज्ञ डॉ जयप्रकाश मुलीयिल के हवाले से कहा गया है कि हममें से ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलेगा कि वह ओमिक्राॅन से संक्रमित हो गए हैं। शायद 80 प्रतिशत से अधिक को यह भी नहीं पता चलेगा कि वे इससे संक्रमित हुए थे। इससे पहले पिछले दो दिनों क दौरान अलग-अलग साक्षात्कारों में दो IIT प्रोफेसरों ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा था कि देश में एक तरह की हर्ड इम्युनिटी बन गई है और वर्तमान लहर उम्मीद से जल्द खत्म हो जाएगी। मुंबई और कुछ अन्य शहरों में लहर कम हो रही है। ICMR की जांच नीति में संशोधन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि वायरस केवल दो दिनों में संक्रमण को दोगुना कर देता है, इससे जांच का नतीजा आने से पहले ही संक्रमित व्यक्ति इसे बड़ी संख्या में लोगों को फैला चुका होता है। आप जब जांच करते हैं तब भी आप बहुत पीछे चल रहे होते हैं। वहीं इस बीच एक नए अध्ययन में कहा गया है कि भारत में टीके लगाए जाने से पहले ही 85 प्रतिशत भारतीय कोविड से संक्रमित हो चुके थे। लिहाजा, टीके का पहला डोज व्यवहारिक रूप से पहली बूस्टर डोज था। बताते चलें कि बुधवार को कोरोना के कुल 1.94 लाख नए मामले देशभर में आये हैं।

ऑक्सीजन पर रखें नजर, तेजी से बदल रहे हालात : मंडाविया
Published / 2022-01-10 17:11:15
ऑक्सीजन पर रखें नजर, तेजी से बदल रहे हालात : मंडाविया

एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने शुक्रवार को राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश को मेडिकल ऑक्सीजन के संबंध में इंफ्रास्ट्रक्चर पर नजर रखने की सलाह दी। स्वास्थ्य मंत्री की ये सलाह ऐसे समय में आई है जब देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के चलते कोविड-19 संक्रमण के मामलों में भारी उछाल देखा जा रहा है। पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के साथ एक कोविड-19 समीक्षा बैठक को संबोधित करते हुए, मंडाविया ने अपने समकक्षों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि सभी प्रकार के ऑक्सीजन बुनियादी ढांचे की जांच इस तरह की जाए कि यह चलने की स्थिति में हो।मंडाविया ने कहा, जैसा कि हम महामारी के इस उछाल से लड़ रहे हैं ऐसे में हमारी तरफ से तैयारियों में कोई चूक न हो। केंद्र और राज्यों के बीच समग्र तालमेल निर्बाध और प्रभावी महामारी प्रबंधन के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्यों से स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के वास्ते नियमित समीक्षा करने, हर जिले में टेलीकंसल्टेशन हब स्थापित करने और उपलब्ध बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में व्यापक जागरूकता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। बैठक दोपहर 3:30 बजे गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव के स्वास्थ्य मंत्रियों के साथ हुई। इससे पहले दिन में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अपने समकक्षों को अस्पताल में भर्ती होने की संख्या में तेजी से बदलाव की चेतावनी दी थी।उन्होंने कहा कि वर्तमान उछाल में पांच से 10 प्रतिशत सक्रिय मामलों में अब तक अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है। हालांकि, स्थिति तेजी से बदल रही है और अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता भी तेजी से बदल सकती है।

अब लीजिये... साइप्रस में मिला कोविड का डेल्टाक्रॉन स्वरूप
Published / 2022-01-09 06:20:29
अब लीजिये... साइप्रस में मिला कोविड का डेल्टाक्रॉन स्वरूप

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के नए नए रूप सामने आते जा रहे हैं, इससे इस महामारी को लेकर आशंकाएं गहराती जा रही हैं। अब साइप्रस से खबर है कि वहां ओमिक्रॉन व डेल्टा से मिलकर बने नए कोरोना वैरिएंट का पता चला है। ओमिक्रॉन अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला कोरोना वैरिएंट बताया गया है, जबकि डेल्टा ने पिछले साल कई देशों में कहर बरपाया था। ऐसे में इनके मिले-जुले नए वैरिएंट के क्या खतरे होंगे, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। ब्लूमबर्ग न्यूज ने खबर दी है कि साइप्रस के एक शोधार्थी ने इस नए स्ट्रैन का पता लगाया है, जिसके ओमिक्रॉन और डेल्टा वैरिएंट का सम्मिलित रूप होने का दावा किया गया है। साइप्रस यूनिवर्सिटी के जीव विज्ञान के प्राध्यापक लियोन्डियोस कोस्ट्रिक्स का इसे डेल्टाक्रॉन नाम दिया गया है, क्योंकि इसके ओमिक्रॉन जैसे आनुवंशिक लक्षण हैं और डेल्टा जैसे जीनोम हैं। रिपोर्ट के अनुसार साइप्रस में डेल्टाक्रॉन के अब तक 25 मरीज पाए गए हैं। हालांकि यह वैरिएंट कितना घातक है और इसका क्या असर होगा, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी।

अमेरिकी पत्रिका में शोध प्रकाशित, हवन से नष्ट होते हैं रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया : पतंजलि का दावा
Published / 2022-01-09 03:54:36
अमेरिकी पत्रिका में शोध प्रकाशित, हवन से नष्ट होते हैं रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया : पतंजलि का दावा

एबीएन डेस्क। हवन से रोग फैलाने वाले बैक्टीरिया नष्ट होते हैं। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने इसे प्रमाणित करने का दावा किया है। इस अनुसंधान के अनुसार हवन-यज्ञ वातावरण को शुद्ध करने का सुरक्षित व पर्यावरण के अनुकूल उपाय हो सकता है। यह अध्ययन अमेरिका की प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका जर्नल ऑफ एवीडेंस बेस्ड इंटेग्रेटिव मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। पतंजलि के शोध के बारे में आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि यज्ञ-हवन पर्यावरण को शुद्ध करने का पारंपरिक तरीका है। इससे संबंधित यह पहला वैज्ञानिक प्रमाण है। उन्होंने इन वैज्ञानिक निष्कर्षों को नियमित पर्यावरण परिशोधन प्रोटोकॉल के रूप में यज्ञ-हवन आयोजित करने की प्राचीन भारतीय दैनिक प्रथा से जोड़ा। यह मानसिक शांति के अतिरिक्त शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त करने का एक आध्यात्मिक तरीका भी है। पतंजलि अनुसंधान संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ.अनुराग वार्ष्णेय के अनुसार, विषघ्न धूप नामक हवन सामग्री के धूम्र से पैथॉगोनिक माइक्रोब्स को उपचारित किया गया। उनकी वृद्धि पर धूम्र के प्रभाव का व्यापक अध्ययन किया गया। अध्ययन किए गए पैथोजेंस में वे रोगाणु शामिल हैं जो आमतौर पर दूषित वातावरण में मौजूद होते हैं। ये त्वचा, फेफड़े, पेट और जननांगों को संक्रमित करते हैं। पाया गया कि पैथोजेंस की वृद्धि को विषघ्न धूप के धूम्र रोक देता है। पतंजलि के वैज्ञानिकों ने पर्यावरण की शुद्धि में हवन की व्यावहारिकता को भी प्रमाणित किया। उन्होंने देखा कि पहले से संक्रमित कमरों में विषघ्न धूप का यज्ञ-हवन करने से सूक्ष्म बैक्टीरिया और कवक की मात्रा में काफी हद तक कमी आई है। विषघ्न धूप का फेफड़ों पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।

कोवैक्सीन : ट्रायल सफल, लंबी सुरक्षा देगा बूस्टर डोज
Published / 2022-01-08 17:57:13
कोवैक्सीन : ट्रायल सफल, लंबी सुरक्षा देगा बूस्टर डोज

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत बायोटेक का कहना है कि कोवैक्सीन के बूस्टर डोज ने ट्रायल में बिना किसी गंभीर प्रतिकूल घटना के दीर्घकालिक सुरक्षा का प्रदर्शन किया है। भारत बायोटेक ने कहा, जिन वॉलंटियर्स को कोवैक्सीन बूस्टर डोज लगाई गई, उनमें से 90 प्रतिशत में वाइल्ड टाइप स्ट्रेन से बचाव के लिए एंटीबॉडी बन गई। इस एंटीबॉडी को मापा भी जा सकता है। कंपनी ने कहा कि यह कोरोना वायरस के खिलाफ बड़ी सफलता है। भारत बायोटेक ने कहा कि उसकी कोवैक्सीन बूस्टर डोज का ट्रायल सफल रहा है। ट्रायल में बूस्टर डोज लगने के बाद कोई साइड इफेक्ट नहीं मिला और साथ ही डोज लगवाने वालों में लंबे समय तक वायरस से बचाव की क्षमता भी पाई गई है। कंपनी ने पिछले महीने खुलासा किया था कि उसकी कोरोना वायरस वैक्सीन फेस दो और तीन ट्रायल में 2-18 साल के वॉलंटियर्स में सुरक्षित, अच्छी तरह से सहन करने वाला और इम्युनोजेनिक साबित हुआ था। भारत बायोटेक ने 2-18 आयु वर्ग के स्वस्थ बच्चों और किशोरों में कोवैक्सिन की सुरक्षा, प्रतिक्रियात्मकता और प्रतिरक्षण क्षमता का मूल्यांकन करने के लिए ट्रायल II/III, ओपन-लेबल और मल्टीसेंटर स्टडी आयोजित की थी। बता दें कि 15 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए कोविड टीकाकरण कार्यक्रम 3 जनवरी, 2022 से शुरू किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया है कि इस जनसंख्या श्रेणी में केवल कोवैक्सीन दी जाएगी और कोवैक्सीन की अतिरिक्त खुराक सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को भेजी जाएगी।

युवाओं-बुजुर्गों में कम गंभीर हो सकता है ओमिक्रॉन, लेकिन हल्के में लेने की भूल न करें...
Published / 2022-01-07 12:03:45
युवाओं-बुजुर्गों में कम गंभीर हो सकता है ओमिक्रॉन, लेकिन हल्के में लेने की भूल न करें...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर से दुनिया को चेताया है कि इसे हल्के में न लें। डब्ल्यूएचओ चीफ ने जिनेवा में प्रेसवार्ता के दौरान चेताया कि वायरस का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन, भले ही डेल्टा स्वरूप से कम गंभीर प्रतीत होता हो लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि इसे हल्के की श्रेणी में रखना चाहिए। वहीं डब्ल्यूएचओ प्रमुख जेनेट डियाज ने कहा कि शुरूआती अध्ययनों से पता चला कि डेल्टा की तुलना में नवंबर में दक्षिण अफ्रीका और हांगकांग में पहली बार पहचाने गए वेरिएंट से अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम कम था। उन्होंने कहा कि युवा और वृद्ध दोनों लोगों में गंभीरता का जोखिम कम प्रतीत होता है। डब्ल्यूएचओ की यह टिप्पणी दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के अध्ययनों सहित अन्य आंकड़ों के साथ गंभीर बीमारी के कम जोखिम पर आई है। जेनेट डियाज ने कहा कि ओमिक्रॉन बुजुर्गों और युवाओं दोनों को प्रभावित कर रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम गेब्रियेसुस ने कहा कि वैक्सीन लोगों के लिए बेहद जरूरी है और साथ ही सतर्कता भी बरतनी जरूरी है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कह कि पिछले वेरिएंट की तरह, ओमिक्रॉन के चलते लोगों को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा रहा है और उनकी मौत भी हो रही है, यह गंभीर रूप ले इससे पहले सभी देशों को उपाय करने जरूरी हैं। टेड्रोस ने कहा कि कई देशों में लोगों ने अब भी वैक्सीन नहीं लगाई है और लाखों लोग अब भी असुरक्षित है। साथ ही उन्होंने कहा कि कुछ देशों में बूस्टर लगाए जा रहे हैं लेकिन बूस्टर महामारी को समाप्त नहीं करेगा, इसके बावजूद भी अरबों लोग पूरी तरह से असुरक्षित रहेंगे।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 32,565