Breaking
ताज़ा समाचार लोड हो रहा है...

हेल्थ

View All
10 अप्रैल से 18+ को भी बूस्टर डोज
Published / 2022-04-08 13:14:20
10 अप्रैल से 18+ को भी बूस्टर डोज

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के खिलाफ अभी जंग जारी है। देश में भले ही कोरोना के केस कम आ रहे हैं लेकिन यह पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ। इसी बीच केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि 18+ एज ग्रुप वालों को भी कोरोना वैक्सीन की बूस्टर डोज लगेगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 10 अप्रैल से 18+ वाले कोरोना का बूस्टर डोज लगवा सकेंगे। बूस्टर डोज सभी प्राइवेट वैक्सीनेशन सेंटर्स पर उपलब्ध होगी। बता दें कि पहली और दूसरी कोरोना डोज के लिए सरकारी टीकाकरण केंद्रों के माध्यम से चल रहे मुफ्त वैक्सीनेशन प्रोग्राम के साथ-साथ हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स और 60+ एज ग्रुप के लिए बूस्टर डोज जारी रहेगा।

टीकाकरण : देशभर में लगे कोरोना के 180.04 करोड़ टीके
Published / 2022-04-06 12:42:33
टीकाकरण : देशभर में लगे कोरोना के 180.04 करोड़ टीके

एबीएन हेल्थ डेस्क। देशभर में राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 185.04 करोड़ से अधिक कोविड टीके लगाए गए हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को यहां बताया कि आज सुबह सात बजे तक 185 करोड़ चार लाख 11 हजार 569 कोविड टीके दिये जा चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के एक हजार 86 नये मरीज सामने आये हैं। इनके साथ ही देश के विभिन्न अस्पताल में उपचार करवा रहे कोरोना रोगियों की संख्या 11 हजार 871 रह गयी है। यह संक्रमित मामलों का 0.03 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 0.23 प्रतिशत हो गयी है। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में एक हजार 198 लोग कोविड से मुक्त हुए हैं। अभी तक कुल चार करोड़ 24 लाख 97 हजार 567 लोग कोविड से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.76 प्रतिशत है। देश में पिछले 24 घंटे में चार लाख 81 हजार 374 कोविड परीक्षण किए गये हैं। देश में कुल 79 करोड़ 20 लाख 27 हजार 142 कोविड परीक्षण किए हैं।

कोरोना मुक्ति की ओर है भारत, लेकिन अभी भी मास्क जरूरी...
Published / 2022-04-05 12:28:37
कोरोना मुक्ति की ओर है भारत, लेकिन अभी भी मास्क जरूरी...

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना जैसी भयानक महामारी को लेकर अपने देश में इसकी निगरानी करने वाली सबसे बड़ी संस्था ने राहत भरी घोषणा की है। इंडियन काउंसिल आॅफ मेडिकल रिसर्च के मुख्य महामारी विशेषज्ञ ने भारत को अब कोरोना महामारी से मुक्त घोषित कर दिया है। अब भारत में कोरोना एंडेमिक कैटेगरी में पहुंच गया है। यानी यह वायरस तो हमारे आपके बीच मौजूद रहेगा, लेकिन अलग-अलग बदले हुए स्वरूप में होगा। जो अब अपने पुराने महामारी जैसे हालात में नहीं पहुंच सकेगा। स्वास्थ्य विशेषज्ञ का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में जनजीवन और सामान्य होता जाएगा। हालांकि अब पूरे देश को अगले कई सालों तक कोरोना वायरस के बदले हुए तमाम रूपों से दो चार होना ही पड़ेगा। आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर समीरन पांडा कहते हैं कि देश में कोविड जैसी खतरनाक महामारी का अब अंत हो चुका है। वे कहते हैं जब पूरी दुनिया में कोविड को लेकर हाहाकार मचा था, तो विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत आईसीएमआर ने अपने देश में इसको पेंडेमिक (महामारी) घोषित किया था। पेंडेमिक के दौरान देश और दुनिया में कोरोना ने लाखों जानें ले ली। डॉक्टर पांडा कहते हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में पहली दूसरी और तीसरी लहरों ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। उनका कहना है कि अलग-अलग देश के हिसाब से लहरों का आकलन किया गया। एंडेमिक कैटेगरी में वायरस : वे कहते हैं कि भारत में फिलहाल अब किसी भी तरीके का कोरोना वायरस का बड़ा खतरा नहीं दिख रहा है। जिस तरीके के मामले और आंकड़े सामने आ रहे हैं उससे अब इस बीमारी को एंडेमिक कैटेगरी में रखा जा रहा है। यानी अब यह बीमारी पूरे देश में सभी राज्यों के सभी शहरों, गांवों, तहसीलों और कस्बों में अपना कहर बरपाने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है। वह कहते हैं कि संभव है किसी राज्य में किसी शहर में मामले जरूर बढ़ें, लेकिन इसका प्रकोप एक साथ पूरे देश में अब देखने को नहीं मिलेगा। आईसीएमआर के पास मौजूद डाटा, तो इसी बात की तस्दीक कर रहा है। इसी के आधार पर अब कोरोना जैसी महामारी को एंडेमिक निपाह जैसी बीमारी के बराबर रखा गया है। रूप बदल कर आता रहेगा वायरस : डॉक्टर पांडा कहते हैं कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और आईसीएमआर के पास अलग-अलग राज्यों से पहुंच रहे इस बीमारी से संक्रमित लोगों के आंकड़े पूरी तरह से सामान्य हालात की ओर इशारा कर रहे हैं। हालांकि उनका कहना है कि उनकी टीम लगातार इस वायरस के म्यूटेशन और इस वायरस के जिनोमिक्स को स्टडी करती रहती है। लेकिन अब यह प्रक्रिया बिल्कुल एंडेमिक हो चुके वायरस की स्टडी करने जैसा हो चुका है। प्रोफेसर पांडा का स्पष्ट कहना है कि कोरोना वायरस बिल्कुल गया नहीं है। यह वक्त-वक्त पर बदले हुए स्वरूप में आता रहेगा। संभव है कि कुछ इलाकों में इसका असर दिखे और कुछ इलाकों में यह बेअसर भी होगा। उनका कहना है कि देश में हुए टीकाकरण और लोगों में इस वायरस के खिलाफ बढ़े रोग प्रतिरोधक क्षमता के चलते वायरस अब महामारी जैसा रूप लेने की स्थिति में नहीं है। आईसीएमआर के मुख्य महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर सम्मेलन पांडा कहते हैं कि बहुत से राज्यों ने मास्क लगाने की छूट दे दी है। वह कहते हैं कि आज के हालात के मुताबिक ऐसी छूट जरूर दी गई है, लेकिन वह मानते हैं कि लोगों को मास्क लगाना चाहिए। प्रोफेसर पांडा के मुताबिक मास्क सिर्फ कोरोना वायरस से ही नहीं बचाता है बल्कि प्रदूषण से लेकर बैक्टीरियल और वायरल इंफेक्शन से भी सुरक्षा करता है। उनका कहना है कि बुजुर्गों और खासतौर से गंभीर बीमारियों वाले लोगों को तो मास्क वैसे भी लगा कर रखना चाहिए। इसके पीछे उनका तर्क है कि किसी भी तरीके का मास्क बीमार व्यक्ति को इंफेक्शन के कारण होने वाली गंभीरता से बचाता है।

देश को जल्द मिलेगा कोरोना टीका का नया वर्जन
Published / 2022-04-04 15:35:57
देश को जल्द मिलेगा कोरोना टीका का नया वर्जन

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी के दौरान देश को वैक्सीन के मामले में विश्व में अग्रणी बनाने वाली देसी कंपनी भारत बायोटेक की नजर देश में दूसरी बीमारियों को लेकर वैक्सीन बनाने को लेकर है। हैदराबाद में कंपनी के भविष्य को लेकर डॉ कृष्णा एल्ला ने बताया कि कॉलरा को लेकर काफी काम हो रहा है। यदि सबकुछ ठीक रहा तो देश में जल्द ही कॉलरा का वैक्सीन भी उपलब्ध होगा। डॉ कृष्णा एल्ला ने बताया कि कॉलरा के वैक्सीन को लेकर भारत बॉयोटेक की स्टडी चल रही है। यह लगभग अंतिम चरण में है। अभी तक की सफलता काफी सकारात्मक है। इस वैक्सीन को लेकर हम केन्द्र सरकार के भी सम्पर्क में हैं। ह्यूमन ट्रॉयल और दूसरी बुनियादी मानकों को पूरा करने के बाद जल्द ही यह आम लोगों के लिए उपलब्ध होगी। कॉलरा एक आंतों की बीमारी है जो जलजनित बीमारियों का मूलरूप है। यह मल-मौखिक मार्ग से फैलता है। यदि भारत की बात करें तो ऐसे इलाके जहां दूषित जल का प्रवाह अधिक है वहां यह बीमारी बड़ी संख्या में देखने को मिलती है। इसका संक्रमण भी आबादी के माध्यम से फैलता है। कोविड वैक्सीन का नया वर्जन जल्द ही : सूत्रों के अनुसार डब्ल्यूएचओ ने फैसिलिटी विजिट की थी और उसके बाद फैसिलिटी में जीएमपी (गुड मैन्यूफैक्चरिंग प्रैक्टिस) के तहत कुछ बदलाव करने को कहा है। कंपनी ने इसे बहुत ही सकारात्मकता से लिया है और इस तकनीकी बदलाव को करने में 4 से 6 महीने का वक्त लग सकता है। इसमें करोड़ों रुपए की लगता आएगी। कोविड के सभी आर्डर पूरे : भारत बॉयोटेक से मिली जानकारी के अनुसार फरवरी से कोरोना वैक्सीन का प्रोडक्शन कम करना शुरू कर दिया था, इसके बारे में प्लानिंग हो चुकी है। ज्यादातर आॅर्डर पूरे किए गए है। अंकलेश्वर की फैसिलिटी और कुछ और फैसिलिटी बंद करने का फैसला किया है। वहीं कुछ में कोवैक्सीन का प्रोडक्शन कम किया जोेगा क्योंकि ज्यादातर सप्लाई पूरी की जा चुकी है और अभी डिमांड उतनी नहीं है।

ओमिक्रॉन से 10% ज्यादा संक्रामक है कोरोना का नया XE वैरिएंट
Published / 2022-04-02 17:40:42
ओमिक्रॉन से 10% ज्यादा संक्रामक है कोरोना का नया XE वैरिएंट

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर के ज्यादातर देशों में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार गिरावट आ रही है और भारत में भी केस कम होने की वजह से कई तरह की कोविड से जुड़ी पाबंदियों को खत्म किया जा रहा है। लेकिन इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेताया है कि नोवेल कोरोना वायरस का एक नया म्यूटेंट, जिसे XE के नाम से जाना जाता है, ओमिक्रॉन के BA.2 सब वेरिएंट की तुलना में करीब दस फीसदी अधिक संक्रमणीय है। भले ही कोरोना के मामले कम हो रहे हों और लोग राहत की सांस ले रहे हों, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि XE नाम का कोरोना वायरस का नया म्यूटेंट है, जो ओमिक्रॉन के BA.2 सब वेरिएंट की तुलना में लगभग दस प्रतिशत अधिक संक्रमणीय प्रतीत होता है। ओमिक्रॉन के BA.2 सब-वेरिएंट को अब तक कोविड-19 के ज्ञात सबसे संक्रामक स्ट्रेन माना जाता था। XE वेरिएंट क्या है : नया वेरिएंट, XE, Omicron के दो वेरिएंट्स (BA.1 और BA.2) का एक म्यूटेंट हाइब्रिड है और हाइब्रिड म्यूटेंट वेरिएंट से इस समय दुनिया भर में कुछ ही केस सामने आए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में कहा था, XE recombinant (BA.1-BA.2), पहली बार 19 जनवरी को ब्रिटेन में पाया गया था और तब से 600 से कम अनुक्रमों की रिपोर्ट और पुष्टि की गई है। वैश्विक स्वास्थ्य निकाय ने कहा, शुरुआती अनुमान के आधार पर कह सकते हैं कि BA.2 की तुलना में 10 प्रतिशत की सामुदायिक संक्रमण की संभावना का संकेत देते हैं, हालांकि, इस खोज को और पुष्टि की जरूरत है। जब तक XE म्यूटेंट में गंभीरता और संचरण सहित विशेषताओं में महत्वपूर्ण अंतर का पता नहीं चल जाता है, तब तक इसे डब्ल्यूएचओ के अनुसार ओमिक्रॉन वेरिएंट के हिस्से के रूप में ही वर्गीकृत किया जाना जारी रहेगा। इस बीच भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 1,260 नए केस आने से संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 4,30,27,035 हो गई है, जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 13,445 रह गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आज शनिवार सुबह आठ बजे जारी आंकड़ों के अनुसार, 83 मरीजों के जान गंवाने से कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 5,21,264 हो गई है। जबकि उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है। कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.76 फीसदी है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 227 मामलों की कमी दर्ज की गई है।।वहीं, संक्रमण की दैनिक दर 0.24 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.23 प्रतिशत रिकॉर्ड हुई है।

स्टडी : बूस्टर डोज से ही ओमिक्रॉन संक्रमण से बचाव संभव
Published / 2022-04-02 07:21:17
स्टडी : बूस्टर डोज से ही ओमिक्रॉन संक्रमण से बचाव संभव

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वैरिएंट के मामले में कोविशील्ड, कोवैक्सीन और दोनों के मिश्रण की खुराक ले चुके लोगों में एंटीबॉडी का स्तर छह महीने के बाद घटने लगता है। पुणे स्थित राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के एक अध्ययन से यह संकेत मिला है। एनआईवी में वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा कि डेल्टा और अन्य चिंताजनक स्वरूप के मामले में पहली खुराक में कोविशील्ड और दूसरी खुराक में कोवैक्सीन दिए जाने पर अच्छे नतीजे मिले। स्टडी के नतीजे जर्नल ऑफ ट्रैवल मेडिसिन में प्रकाशित किए गए हैं। अध्ययन के तहत तीन श्रेणियों में टीके के प्रभाव का आकलन किया गया और परीक्षण के तहत सभी लोगों की करीबी तौर पर निगरानी की गई। अध्ययन से पता चला कि ओमिक्रॉन के मामले में टीकाकरण के बाद बनी प्रतिरोधी क्षमता छह महीने बाद कमजोर होने लगी। इससे टीकाकरण रणनीति में बदलाव करने की जरूरत पड़ सकती है। अध्ययन में तीन समूह शामिल थे। 18 व्यक्तियों का एक विषम समूह था, जिन्हें यूपी में अनजाने में कोविशील्ड की पहली खुराक और कोवैक्सिन की दूसरी खुराक दी गई थी। अन्य दो समूहों में 40 व्यक्ति शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक को कोविशील्ड या कोवैक्सिन की दो खुराक प्राप्त हुई थी। एनआईवी की वैज्ञानिक डॉ प्रज्ञा यादव ने कहा, तीनों समूहों की बारीकी से निगरानी की गई। इस दौरान पाया गया कि जिन लोगों को कोविशील्ड की पहली और कोवैक्सिन की दूसरी खुराक लगी थी, उनमें डेल्टा और अन्य वैरिएंट्स के खिलाफ काफी अच्छी एंटीबॉडी पाई गई। वहीं, जिन लोगों को एक ही वैक्सीन की दोनों खुराक लगी थी, उनमें तुलनात्मक तौर पर एंटीबॉडी थोड़ी कम रही। अब तक की स्टडी में यह बात सामने आई है कि ओमिक्रॉन से रिकवर होने के लिए बूस्टर डोज जरूरी है।

2024 तक भारत के पास आ जायेगा टीबी का टीका
Published / 2022-04-02 03:33:32
2024 तक भारत के पास आ जायेगा टीबी का टीका

एबीएन हेल्थ डेस्क। दो टीकों के तीसरे चरण का क्लीनिकल परीक्षण 2024 में पूरा हो जाने के साथ ही भारत में अगले दो सालों में ट्यूबरकुलोसिस के विरूद्ध एक टीका आ सकता है। आईसीएमआर- राष्ट्रीय एड्स अनुसंधान संस्थान (एनएआरआई) (पुणे) के वैज्ञानिक डॉ सुचित काम्बले ने बताया कि लार संबंधी पोजिटिव पल्मोनरी टीबी मरीजों से स्वस्थ व्यक्तियों में ट्यूबरकुलोसिस के संचार को रोकने के लिए दो टीबी टीकों- वीपीएम 1002 और इम्यूनोवैक की प्रभावकारिता एवं सुरक्षा को परखने के लिए परीक्षण चल रहे हैं। दरअसल, 2025 तक टीबी के सफाये के भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए नए ट्यूबरकुलोसिस टीकों की जरूरत है। काम्बले ने कहा, ट्यूबरकुलोसिस को रोकने के लिए वीपीएम 1002 और इम्युनोवैक टीकों की प्रभावकारिता एवं सुरक्षा को परखने के लिए तीसरे चरण का यादृच्छिक... परीक्षण छह राज्यों- महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना, तमिलनाडु, कर्नाटक और ओडिशा के 18 शहरों में चल रहा है। इस परीक्षण के लिए छह साल या उससे ऊपर के 12000 लोगों का पंजीकरण पूरा कर लिया गया है और अब 2024 तक उसका फॉलोअप चलेगा। महाराष्ट्र में आईसीएमआर-एनएआरआई महाराष्ट्र में मुख्य स्थल है और उसने 1593 लोगों का पंजीकरण पूरा किया है। इन लोगों पर 38 महीने के लिए नियमित अंतराल पर नजर रखी जा रही है। पुणे में 2024 तक आखिरी फॉलोअप पूरा हो जाने की संभावना है। काम्बले ने कहा, आंकड़े के विश्लेषण के बाद वैज्ञानिक निष्कर्ष के आधार पर हम इन टीकों की प्रभावकारिता एवं सुरक्षा के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचते हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं कि 2024 तक या अधिक से अधिक 2025 तक भारत के पास टीबी के विरूद्ध अच्छा एवं प्रभावी टीका होगा।

वैज्ञानिक भी नहीं जानते एशिया में वायरस फैलाने वाले चमगादड़ों की 40% प्रजाति
Published / 2022-04-01 17:39:14
वैज्ञानिक भी नहीं जानते एशिया में वायरस फैलाने वाले चमगादड़ों की 40% प्रजाति

एबीएन सेंट्रल डेस्क। निपाह से लेकर कोरोना वायरस तक के संक्रमण फैलने में चमगादड़ की अहम भूमिका रही है। दुनियाभर के वैज्ञानिकों अपनी रिसर्च में इसकी पुष्टि भी की है। चमगादड़ से फैलने वाले ज्यादातर वायरस की शुरूआत एशियाई देशों से ही हुई है। चिंता की बात यह है कि एशिया में 40 फीसदी ऐसे चमगादड़ हैं जिनके बारे में वैज्ञानिक भी अंजान हैं। यह दावा चाइनीज एकेडमी आॅफ साइंस और हॉन्गकॉन्ग यूनिवर्सिटी की रिसर्च में किया गया है। जानिए, इसके खतरे क्या हैं : ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ-ईस्ट एशिया और चीन में हॉर्सशू चमगादड़ की 40 फीसदी प्रजाति का ब्योरा वैज्ञानिक रिकॉर्ड में भी नहीं है। यह चमगादड़ की ऐसी प्रजाति है, जिनसे वायरस का संक्रमण फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इनमें वायरस लम्बे समय तक बना रहा है। भविष्य में ऐसी अंजान प्रजाति से नए वायरस का संक्रमण फैल सकता है। हॉर्सशू चमगादड़ से इंसानों में फैलने वाली बीमारी को जूनोटिक डिजीज कहते हैं। खास बात यह भी है कि इनके जरिए फैलने वाली ज्यादातर बीमारियों का अब तक कोई सटीक इलाज नहीं खोजा सका है। इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह के 40 फीसदी चमगादड़ों की जानकारी रिकॉर्ड में न होना चिंताजनक है।कोरोनावायरस भी चमगादड़ से इंसानों में पहुंचा था। कई रिसर्च रिपोर्ट में यही दावा किया गया था। चीन के वुहान इंस्टीट्यूट आॅफ वायरोलॉजी के वायरस विशेषज्ञ शी झेंगली का कहना है, हॉर्सशू चमगादड़ की अंजान प्रजातियों को पहचान लिया जाता है तो भविष्य में इनके जरिए फैलने वाली बीमारियों का रिस्क कम करने में मदद मिल सकती है। इतना ही नहीं, कोरोनावायरस की उत्पत्ति के बारे में भी अहम जानकारी मिल सकती है। हॉन्ग-कॉन्ग यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता एलिस के मुताबिक, कोरोना वायरस का कनेक्शन भी चीन के दक्षिण-पश्चिम इलाके के यून्नान प्रांत में पाए जाने वाले हॉर्सशू चमगादड़ से मिला है। हॉर्सशू चमगादड़ की मुख्य 11 प्रजाति हैं, इनसे ही इनकी ऐसी-ऐसी नई प्रजातियों का जन्म हुआ है, जिनके बारे में वैज्ञानिकों को अधिक जानकारी नहीं है। इनका पता लगाने की कोशिश जारी है।

चार दिन बाद बढ़ जायेंगी 800 जरूरी दवाओं की कीमत
Published / 2022-03-28 15:32:37
चार दिन बाद बढ़ जायेंगी 800 जरूरी दवाओं की कीमत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश की आम जनता पहले से ही महंगाई के बोझ के तले दबी हुई है और उस पर कच्चे तेल में तेजी के चलते पेट्रोल-डीजल के रोज बढ़ रहे दामों ने इस बोझ को और भी बढ़ा दिया है। बीते सात दिनों में छह दिन पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं और इससे माल ढुलाई भी बढ़ गई है। इस बीच आम जनता पर एक अप्रैल यानी चार दिन बाद स्वास्थ्य के मोर्चे पर महंगाई का एक और बम फूटने वाला है। दरअसल, 800 दवाएं महंगी होने जा रही हैं। 10.76 फीसदी बढ़ जाएंगे दाम : गौरतलब है कि राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने बीते दिनों दवाओं के दाम बढ़ाने को अनुमति दी है। इसके तहत दर्द निवारक व विभिन्न संक्रमणों और हृदय, किडनी, अस्थमा से संबंधित मरीजों को दी जाने वालीं करीब 800 आवश्यक दवाएं नए वित्त वर्ष में 10.76 फीसदी तक महंगी हो जाएंगी। ये बढ़ी हुई दरें एक अप्रैल 2022 से लागू हो जाएंगी। बता दें कि मरीजों के लिए उपयोगी ये दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (एनएलईएम) के तहत मूल्य नियंत्रण में रखी जाती हैं। एनपीपीए की संयुक्त निदेशक रश्मि तहिलियानी के अनुसार, उद्योग प्रोत्साहन घरेलू व्यापार विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने सालाना 10.76 फीसदी वृद्धि की अनुमति दी है। पहली बार इतनी मूल्य वृद्धि : हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सूचीबद्ध दवाओं की मूल्यवृद्धि पर हर वर्ष अनुमति दी जाती है। लेकिन इस बार होने वाली मूल्य वृद्धि अब तक की सबसे अधिक है। विशेषज्ञों ने कहा है कि ऐसा पहली बार है कि सूचीबद्ध दवाओं को सूची से बाहर की दवाओं से ज्यादा महंगा करने की अनुमति दी गई है। अब तक मूल्य वृद्धि की बात करें तो इनमें प्रति वर्ष के हिसाब से एक से दो फीसदी बढ़ोतरी की जाती थी। इससे पहले साल 2019 में एनपीपीए ने दवाओं की कीमतों में दो फीसदी और इसके बाद साल 2020 में दवाओं के दाम में 0.5 फीसदी की वृद्धि करने की अनुमति दी थी। इन प्रमुख दवाओं पर असर : जिन दवाओं के दाम में इजाफा होने वाला है उनमें सबसे आम उपयोग में लाई जाने वाली पैरासिटामोल भी शामिल है। इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन, सिप्रोफ्लोक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड, मेट्रोनिडाजोल, फेनोबार्बिटोने जैसी दवाएं भी इस सूची में हैं। इसके अलावा कोरोना के इलाज में इस्तेमाल की जानें वाली दवाइयों के अलावा कई विटामिन, खून बढ़ाने वाली दवाएं, मिनरल को भी इसमें रखा गया है। कुल मिलाकर 30 श्रेणियों में 376 दवाएं रखी गई हैं। ये बुखार, संक्रमण, त्वचा व हृदय रोग, एनीमिया, किडनी रोगों, डायबिटीज व बीपी की दवाएं हैं। एंटी एलर्जिक, विषरोधी, खून पतला करने, कुष्ठ रोग, टीबी, माइग्रेन, पार्किंसन, डिमेंशिया, साइकोथेरैपी, हार्मोन, उदर रोग की दवाएं भी शामिल हैं। कच्चा माल महंगा होने का असर : रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इस्तोमाल होने वाली कुल दवाओं के 16 फीसदी पर इस मूल्य वृद्धि का असर दिखाई देने वाला है। गौरतलब है कि फार्मा सेक्टर ने अपनी व्यथा उजागर करते हुए गैर-सूचीबद्ध दवाओं के दाम में भी 20 फीसदी तक इजाफा करने की मांग की है। उन्होंने अपना तर्क रखते हुए कहा है कि दवाओं के कच्चे माल की कीमत 15 से 150 प्रतिशत तक बढ़ी हैं। सिरप, ओरल ड्रॉप्स, संक्रमण में उपयोगी प्रोपलीन ग्लाइकोल, ग्लिसरीन, सॉल्वेंट के दाम 250 प्रतिशत तक बढ़े। परिवहन, पैकेजिंग, रखरखाव भी महंगा हुआ है। ऐसे में दवाओं का दाम न बढ़ने से उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ 24 अपने सभी पाठकों और प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और विश्वास के लिए धन्यवाद।

विज्ञापन

© 2026 ABN News 24. All Rights Reserved.

कुल पाठक (Total Visitors): 33,859