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Published / 2022-03-03 16:47:26
शुगर-कोलेस्ट्रॉल समेत कई रोगों का खतरा कम करती है ये औषधि

एबीएन हेल्थ डेस्क। आयुर्वेद सबसे प्राचीन और अत्यंत प्रभावी चिकित्सा पद्धतियों में से एक है। विशेषज्ञों के मुताबिक कई औषधियों में ऐसे गुणों के बारे में पता चलता है जो शरीर को अत्यंत लाभ पहुंचा सकती हैं। कोरोना के इस दौर में इम्युनिटी को बढ़ाने के लिए कई तरह की औषधियों और जड़ी-बूटियों को प्रयोग में लाया जा रहा है। आयुर्वेदाचार्यों की मानें तो कई औषधियों को इतना प्रभावी पाया गया है जो कैंसर जैसे गंभीर रोगों के खतरे को कम करने में भी असरदार हो सकती हैं। डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कम करने में भी कुछ जड़ी-बूटियों को काफी असरदार पाया गया है। विशेषज्ञ बताते हैं, काली मिर्च ऐसी ही एक अत्यंत फायदेमंद औषधि है जिससे कई तरह के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं। हम सभी के किचन में आसानी से उपलब्ध यह दिव्य औषधि न सिर्फ खाने के स्वाद को बढ़ा देती है साथ ही इसका नियमित रूप से सेवन करना गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकता है। एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सिडेंट गुणों से भरपूर काली मिर्च का सेवन करना विशेष फायदेमंद माना जाता है। आइए आगे की स्लाइडों में काली मिर्च से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। ब्लड शुगर रहता है कंट्रोल : डायबिटीज रोगियों के लिए काली मिर्च का सेवन करना विशेष लाभकारी हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि काली मिर्च में पाया जाने वाला कंपाउंड पिपेरिन, ब्लड शुगर के मेटाबॉलिज्म में सुधार करने में मदद कर सकता है। चूहों पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि काली मिर्च का अर्क रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है। इसके अतिरिक्त, 8 सप्ताह के लिए पिपेरिन और अन्य यौगिकों युक्त पूरक लेने वाले 86 लोगों में इंसुलिन संवेदनशीलता में महत्वपूर्ण बदलाव देखा गया। हृदय रोगों का खतरा होता है कम : कोलेस्ट्रॉल को हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि काली मिर्च का अर्क कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने की क्षमता रखता है, ऐसे में नियमित रूप से काली मिर्च का सेवन करने वाले लोगों में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का जोखिम कम होता है। चूहों पर किए गए एक अध्ययन में पहले कुछ दिनों तक उन्हें वसा वाला आहार दिया गया। इसके बाद काली मिर्च का अर्क देने के बाद उनमें एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी दर्ज की गई। कैंसर का कम होता है खतरा : काली मिर्च कैंसर के खतरे को भी कम करने में सहायक औषधि मानी जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि काली मिर्च में पाए जाने वाले पिपेरिन में सक्रिय यौगिक, कैंसर से लड़ने वाले गुणों से भरपूर होते हैं। टेस्ट-ट्यूब अध्ययनों में पाया गया कि पिपेरिन स्तन, प्रोस्टेट और कोलन कैंसर कोशिकाओं की प्रतिकृति को धीमा कर देता है। विशेषज्ञों के मुताबिक नियमित रूप से भोजन के माध्यम से काली मिर्च का सेवन करने से कई तरह के कैंसर का जोखिम कम हो सकता है।

Published / 2022-02-28 18:36:23
चेतावनी : जून में दस्तक दे सकती है कोरोना की चौथी लहर

एबीएन डेस्क। एक तरफ जहां भारत में कोरोना के मामलों में रोजाना गिरावट देखी जा रही है, तो वहीं दूसरी ओर चौथी लहर की भी खबरें सामने आ रही है। एक स्टडी के मुताबिक देश में इस साल जून के महीने में कोरोना की चौथी लहर दस्तक दे सकती है। आईआईटी कानपुर के शोधकर्ताओं ने चेतवानी दी है कि कोविड-19 महामारी की चौथी लहर 22 जून के आसपास शुरू हो सकती है और अगस्त के अंत तक चरम पर हो सकती है। स्टडी के मुताबिक चौथी लहर का असर करीब चार महीने तक बना रह सकता है। इंडिया टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आईआईटी कानपुर के एक वरिष्ठ शोधकर्ता के मुताबिक, टीकाकरण का प्रभाव संक्रमण की संभावना और चौथी लहर से संबंधित विभिन्न मुद्दों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह अध्ययन आईआईटी कानपुर के गणित विभाग के सबरा प्रसाद राजेशभाई, शुभ्रा शंकर धर और शलभ ने किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका में किए गए एक और हालिया अध्ययन से पता चला है कि अगला कोरोना वैरिएंट दो अलग-अलग तरीकों से उभर सकता है और इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि नया वैरिएंट पहले से पहचाने गए लोगों की तुलना में कम गंभीर होगा। आपको बता दें कि शनिवार को भारत में एक दिन में कोविड-19 के 8,013 नए मामले सामने आने के बाद देश में कोरोना वायरस के संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 4,29,24,130 हो गई। करीब दो महीने बाद संक्रमण के दैनिक मामले 10 हजार से कम सामने आए हैं। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 1,02,601 रह गई है।

Published / 2022-02-26 15:15:23
नीम की पत्तियों में छुपा है सेहत का खजाना...

एबीएन हेल्थ डेस्क। नीम की पत्तियां हो या तना आयुर्वेदिक दृष्टि से ये सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। बता दें कि नीम की पत्तियों में कई ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जो सेहत को कई समस्याओं से दूर रख सकते हैं। नीम स्वाद में तिक्त (तीखा) और कटु (कड़वा) होता है। लेकिन अगर नीम का रोज खाली पेट सेवन किया जाए तो कई समस्याओं को दूर किया जा सकता है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि 5 से 6 नीम की पत्तियों को अगर रोज चबाया जाए तो इससे सेहत को क्या-क्या हो सकते हैं। 1. खाली पेट नीम के पत्ते खाने से सेहत को कई फायदे हो सकते हैं। बता दें कि जो लोग खून की समस्या से परेशान रहते हैं वो अपनी दिन की शुरूआत नीम के साथ करें। ऐसा करने से एनीमिया की समस्या से राहत मिल सकता है। खून की कमी को पूरा करने में नीम की पत्तियां आपके बेहद काम आ सकती है। 2. त्वचा में प्राकृतिक चमक बढ़ाने में नीम की पत्तियां आपके बेहद काम आ सकती हैं। ऐसे में आप खाली पेट नीम की पत्तियों को अच्छे से धोकर चबाएं। ऐसा करने से न केवल त्वचा की समस्या से राहत मिल सकती है बल्कि त्वचा में प्राकृतिक चमक भी आ सकती है। 3. आज के समय में इम्यूनिटी का मजबूत होना बेहद जरूरी है। ऐसे में आप खाली पेट नीम के पत्तों को खाएं। ऐसा करने से न केवल रोग प्रतिरोधक को बढ़ाया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि एंटी-आॅक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-इंफ्लेमेट्री, एंटी-फंगल आदि गुण पाए जाते हैं, जिससे शरीर को कई संक्रमण से दूर रखा जा सकता है। (नोट : अगर नीम की पत्तियां खाकर परेशानी महसूस हो तो एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)

Published / 2022-02-25 13:35:30
सेहत को रखना है तंदुरुस्त, तो खायें घी के साथ ये चीज...

एबीएन हेल्थ डेस्क। घी और गुड़ दोनों ही सेहत के लिए बेहद उपयोगी होते हैं। बता दें कि गुड़ के अंदर मैग्नीशियम, पोटेशियम, कैल्शियम, आयरन, जिंक आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं घी के अंदर विटामिन ए, विटामिन ई, विटामिन डी, फैटी एसिड आदि पोषक तत्व मौजूद होते हैं। ऐसे में यदि इन दोनों का सेवन एक साथ किया जाए तो सेहत के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। इन दोनों का मिश्रण सेहत को तंदुरुस्त बना सकता है। ऐसे में हम आज के लेख से जानेंगे कि गुड़ और घी के सेवन से सेहत को क्या-क्या फायदे हो सकते हैं। पेट की समस्याओं को दूर करने में घी और गुड़ आपके बेहद काम आ सकते हैं। ऐसे में आप घी और गुड़ का एक साथ सेवन करें। ऐसा करने से न केवल मल त्याग में आसानी हो सकती है बल्कि एसिडिटी, पेट में दर्द, पेट में ऐठन आदि समस्याओं से भी राहत मिल सकती है। शरीर में एनीमिया की कमी आयरन के कारण हो सकती है। एनीमिया यानी खून की कमी। जब शरीर में खून की कमी हो जाती है तब व्यक्ति को एनीमिया का समस्या का सामना करना पड़ता है। ऐसे में गुड़ और घी का सेवन एक साथ किया जाए तो खून की कमी से भी राहत मिल सकती है। गुड़ के अंदर आयरन पाया जाता है जो शरीर में खून की पूर्ति कर सकता है। ऐसे में व्यक्ति एनीमिया की समस्या से बच सकता है। हड्डियों को मजबूत बनाने में घी और गुड़ आपके बेहद काम आ सकता है। बता दें कि गुड़ के अंदर कैल्शियम पाया जाता है। वही घी के अंदर विटामिन ह्य2 पाया जाता है। ऐसे में इन दोनों का अधिक सेवन किया जाए तो हड्डी को मजबूती मिल सकती है। (नोट : घी और गुड़ का यदि एक साथ सेवन किया जाए तो सहत को कई समस्याओं से दूर रखा जा सकता है। लेकिन यदि आप किसी अन्य समस्या से ग्रस्त हैं तो इन दोनों का सेवन करने से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।)

Published / 2022-02-21 17:42:10
कोरोना : भारत में 12-18 साल के बच्चों को जल्द लगेगी वैक्सीन

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित कोविड टीके कोर्बेवेक्स को 12 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों को आपात स्थिति में प्रयोग करने की अनुमति प्रदान कर दी है। कोर्बेवेक्स का निर्माण करने वाली भारतीय कंपनी बायोलोजिकल ई. लिमिटेड ने सोमवार को बताया कि डीसीजीआई ने उसके प्रोटीन आधारित कोविड टीके कोर्बेवैक्स को कोरोना महामारी से बचाव के लिए आपात प्रयोग की मंजूरी दे दी है। कोर्बेवेक्स टीके को 18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों को देने के लिए डीसीजीआई की अनुमति पहले ही मिली चुकी है। कंपनी की प्रबंध निदेशक महिमा डाटला ने हैदराबाद में कहा कि यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है और इससे दुनिया को कोरोना महामारी के विरुद्ध लड़ाई में मदद मिलेगी। इससे बच्चों को शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेने में मदद मिलेगी।पिछले वर्ष सितंबर में कंपनी को कोर्बेवेक्स को पांच से 18 वर्ष आयु वर्ग की आबादी पर द्वितीय और तृतीय चरण का परीक्षण करने की अनुमति दी गयी थी। अक्टूबर 2021 में इसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू किया गया। कोर्बेवेक्स टीके की दो खुराक 28 दिन के अंतराल पर दी जाएंगी।

Published / 2022-02-21 17:13:40
एक और महामारी का खतरा दुनिया पर मंडरा रहा है : बिल गेट्स

एबीएन सेंट्रल डेस्क। दुनिया कोरोना महामारी से अभी उबरी नहीं है और एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले समय में कोरोना के नए वेरिएंट आ सकते हैं। वहीं माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स ने चेतावनी दी है कि दुनिया में बहुत जल्द ही कोरोना जैसी एक और महामारी दस्तक दे देगी। बिल गेट्स का कहना है कि जिस तरीके एकाएक कोरोना के केस कम हुए हैं वो खतरनाक है। बिल गेट्स ने सीएनबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि आने वाले समय में आने वाली महामारी कोरोना वायरस परिवार के एक अलग रोगाणु से आ सकती है। हालांकि उन्होंने आशा जताई कि मेडिकल तकनीक में आए विकास की मदद से दुनिया इससे बेहतर तरीके निपट सकती है। गेट्स ने कहा कि इसके लिए अभी से निवेश करना होगा। माइक्रोसाफ्ट के संस्थापक ने कहा कि कोरोना पिछले दो साल हमारे बीच है और इसका खराब असर अब कम हो रहा है। बिल गेट्स ने बताया कि कोरोना का कमना इसलिए हो रहा है क्योंकि कुछ स्तर तक की इम्युनिटी पैदा हो गई है। उन्होंने कहा कि जब वायरस फैलता है तो वह अपनी खुद की इम्युनिटी पैदा करता है। यह आदत विश्व समुदाय के महामारी निकलने में वैक्सीन की तुलना में ज्यादा कारगर साबित हुई है। बता दें कि डेल्टा वेरिएंट के बाद ओमीक्रॉन वेरिएंट ने पैर पसारना शुरू किया। हालांकि इस वेरिएंट से लोगों की मौतें कम हुई। ओमिक्रॉन के बाद इलके सब-वेरिएंट BA.2 ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमीक्रोन का सब-वेरिएंट BA.2 भी ज्यादा तेजी से फैलने वाला है।

Published / 2022-02-19 18:18:27
जानें रात में सोने से पहले दूध पीने के चमत्कारिक फायदे...

एबीएन हेल्थ डेस्क। संपूर्ण सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना रात में पौष्टिक चीजों के सेवन पर जोर दिया जाता है। वर्षों से रात के समय दूध पीना सेहत के लिए विशेष लाभदायक माना जाता रहा है। दूध को संपूर्ण आहार माना जाता है, इसमें मौजूद विटामिन्स और पौष्टिक तत्व इसे बेहद खास बनाते हैं। रात के समय गर्म दूध का सेवन करना सेहत के लिए कई तरह से लाभकारी माना जाता है। सोने से पहले दूध का सेवन करने से आपको दिन भर की मेहनत के बाद आराम करने और बेहतर नींद लेने में भी मदद मिलती है। अध्ययनों से पता चलता है कि दूध में कैलोरी, प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन-डी, विटामिन-बी12 और पोटेशियम की पर्याप्त मात्रा पाई जाती है। दूध को बेहतर सप्लीमेंट भी माना जाता है। कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि रात के समय गर्म दूध में एक चुटकी हल्दी मिलाकर इसका सेवन करना शरीर के लिए और भी कई तरह से लाभदायक हो सकता है। आइए रोजाना रात के समय गर्म दूध पीने से होने वाले फायदों के बारे में जानते हैं। क्या कहते हैं अध्ययन? रात में दूध पीने से सेहत को होने वाले फायदों को लेकर किए गए अध्ययनों में इसके लाभ के बारे में पता चलता है। शोधकर्ता बताते हैं दूध और डेयरी उत्पादों में ट्रिप्टोफैन नामक एमिनो एसिड होता है जो नींद को बढ़ावा देने में मददगार माना जाता है। ट्रिप्टोफैन, शरीर को आराम देने में सहायक है जिसके चलते अच्छी नींद आती है। इसके अलावा दूध में निहित विशिष्ट प्रोटीन मस्तिष्क के रिसेप्टर्स को ट्रिगर करने वाले होते हैं जो चिंता और तनाव को कम करने में मदद करते हैं। अच्छी नींद के लिए पिएं दूध : सोने से पहले दूध पीने से आपकी नींद की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। दूध में ट्रिप्टोफैन और बायोएक्टिव पेप्टाइड्स होते हैं जो नींद के पैटर्न को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं। कई मामलों में, जिन लोगों को तनाव के कारण सोने में परेशानी होती है, उन्हें रात में दूध पीने की सलाह दी जाती है। दूध का सेवन पोषक तत्वों की पूर्ति के लिए भी काफी लाभदायक हो सकता है। वजन को नियंत्रित रखने में सहायक : स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक रात में दूध पीने की आदत वजन कम करने में भी मदद कर सकती है। दूध प्रोटीन का एक आवश्यक स्रोत है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित बनाए रखने और पर्याप्त ऊर्जा स्तर को सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है। वजन कम करने की कोशिशों में लगे हुए लोगों को कम फैट वाले दूध का सेवन करना चाहिए, इसके लिए दूध की मलाई को उतार सकते हैं।

Published / 2022-02-18 13:43:44
खुलासा : बीए.1 की तुलना में अधिक संक्रामक है ओमीक्रोन का उपस्वरूप बीए.2

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस के ओमीक्रोन स्वरूप का उप स्वरूप बीए.2 न केवल तेजी से फैलता है बल्कि यह गंभीर बीमारी का कारण भी बनता है। प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन के परिणाम की अभी स्वतंत्र रूप से समीक्षा नहीं की गई है। इसे अभी बायोआरएक्सिव पर प्रकाशित किया गया है। इसमें कहा गया है कि बीए.2 कोरोना वायरस के पुराने स्वरूप की तुलना में गंभीर बीमारी का कारक बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बृहस्पतिवार को कहा कि बीए.2, बीए.1 की तुलना में अधिक संक्रामक है, लेकिन उप स्वरूप अधिक गंभीर नहीं है। डब्ल्यूएचओ में कोविड-19 टेक्निकल लीड मारिया वान केरखोवा ने एक वीडियो में कहा, सभी उपस्वरूपों में, बीए.2 बीए.1 की तुलना में अधिक संक्रामक है। हालांकि, गंभीरता के मामले में कोई अंतर नहीं है। नवीनतम अध्ययन में तोक्यो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक जापानी टीम ने पाया कि बीए.1, बीए.2 के समान ओमीक्रोन का उप स्वरूप काफी हद तक कोविड-19 रोधी टीकों से तैयार प्रतिरक्षा से बच जाता है। अध्ययन के लेखकों ने कहा, प्रयोगों से पता चला है कि टीके से तैयार प्रतिरक्षा बीए.2 की तरह बीए.1 के खिलाफ काम करने में नाकाम रहती है। ओमीक्रोन के आरंभिक मामले पहली बार नवंबर 2021 में बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका से आए थे। इसका बीए.1 उप स्वरूप तब से दुनिया भर में तेजी से फैल चुका है और डेल्टा जैसे अन्य स्वरूपों पर हावी हो गया है। इस साल फरवरी तक, डेनमार्क और ब्रिटेन जैसे कई देशों में ओमीक्रोन के एक अन्य उप स्वरूप बीए.2 वंश का पता लगाया गया। शोधकर्ताओं ने कहा है कि बीए.2 ने बीए.1 को पीछे छोड़ना शुरू कर दिया है। इससे पता चलता है कि यह मूल ओमीक्रोन स्वरूप की तुलना में अधिक संक्रामक है। शोधकर्ताओं ने कहा, बीए.2 को ओमीक्रोन स्वरूप के रूप में माना जाता है, लेकिन इसका जीनोमिक अनुक्रम बीए.1 से काफी अलग है, जो बताता है कि बीए.2 की विशेषताएं बीए.1 से अलग हैं। शोधकर्ताओं ने चूहों पर इसका अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान इन जीवों को बीए.2 और बीए.1 से संक्रमित किया गया तो देखा गया कि बीए.2 से संक्रमित जानवर बीमार हो गए और उनके फेफड़े खराब हो गए। उन्होंने कहा कि ऊतकों के नमूनों में बीए.2-संक्रमित चूहों के फेफड़ों को बीए.1 से संक्रमितों की तुलना में अधिक नुकसान हुआ।

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