हेल्थ

View All
Published / 2022-03-14 16:10:57
12-14 वर्ष के किशोरों को 16 से लगेगा कोरोना टीका

एबीएन सेट्रल डेस्क7 उत्तर प्रदेश सरकार ने 16 मार्च से 12 से 14 आयु वर्ग के बच्चों का कोविड टीकाकरण और 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बुजुर्गो को कोविड प्रिकाशन डोज दिए जाने का फैसला किया है। आधिकारिक प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि आगामी 16 मार्च से 12-14 आयु वर्ग के बच्चों का कोविड टीकाकरण और 60 वर्ष अथवा उससे अधिक उम्र के बुजुर्गो को कोविड प्रिकॉशन डोज की सुविधा प्रारंभ होने जा रही है। गौरतलब है कि इससे पहले तीन जनवरी को 15 से 18 साल के बच्चों के टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। प्रदेश में पिछले सप्ताह के अंत तक 29 करोड़ 43 लाख 9 हजार 712 कोरोना वैक्सीन की डोज दी जा चुकी थी जिनमें 18 वर्ष से अधिक लोंगों को 15,24,48,057 पहली डोज तथा 12,03,96,024 को दूसरी डोज दी गयी थी। इसके अलावा 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों को 1,28,78,493 पहली डोज तथा 62,53,011 डोज दी गयी वहीं 23 लाख 34 हजार 127 प्रीकॉशन डोज दी गयी है।

Published / 2022-03-09 13:22:36
डीसीजीआई की मंजूरी : अब 12-17 साल के किशोरों को लगेगी कोरोना वैक्सीन

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत के दवा नियामक ने सीरम इंस्टीट्यूट आॅफ इंडिया के कोविड-19 वैक्सीन कोवोवैक्स को कुछ शर्तों के तहत 12-17 वर्ष आयु वर्ग के लिए सीमित आपातकालीन उपयोग की अनुमति दी है। यह 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों के बीच उपयोग के लिए नियामक की अनुमति हासिल करने वाला चौथा टीका है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल आॅफ इंडिया (डीसीजीआई) की मंजूरी पिछले सप्ताह सीडीएससीओ की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति द्वारा 12 से 17 वर्ष की आयु के लोगों के लिए कोवोवैक्स को आपातकालीन उपयोग अनुमति देने की सिफारिश के बाद आई है। 2707 बच्चों पर एसआईआई का अध्ययन : सरकार ने अभी तक 15 साल से कम उम्र वाले किशोरों को टीका लगाने पर कोई फैसला नहीं लिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने लगातार कहा है कि टीकाकरण की जरूरत और टीकाकरण अभियान में और लोगों को शामिल करने की लगातार समीक्षा की जाती है। 21 फरवरी को एसआईआई में निदेशक (सरकारी और नियामक मामलों) प्रकाश कुमार सिंह ने डीसीजीआई को ईयूए आवेदन में कहा था कि 12 से 17 वर्ष की आयु के लगभग 2707 बच्चों पर दो अध्ययनों से पता चलता है कि कोवोवैक्स अत्यधिक प्रभावकारी, प्रतिरक्षात्मक और सुरक्षित है। एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि सिंह ने अपने आवेदन कहा है- यह अनुमोदन न केवल हमारे देश के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि पूरे विश्व को लाभान्वित करेगा। साथ ही हमारे प्रधानमंत्री के मेकिंग इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के दृष्टिकोण को भी पूरा करेगा। हमारे सीईओ डॉ अदार सी पूनावाला के दर्शन के अनुरूप, मुझे यकीन है कि कोवोवैक्स हमारे देश और दुनिया के बच्चों को बड़े पैमाने पर कोविड-19 से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और हमारे राष्ट्रीय ध्वज को विश्व स्तर पर ऊंचा रखेगा। कोवोवैक्स को व्यस्कों में आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली थी : डीसीजीआई ने पहले ही 28 दिसंबर को वयस्कों में आपातकालीन स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दे दी है। इसे अभी तक देश के टीकाकरण अभियान में शामिल नहीं किया गया है। डीसीजीआई ने 21 फरवरी को कुछ शर्तों के तहत 12 से 18 वर्ष से कम आयु वर्ग के लिए बायोलॉजिकल ई के कोविड-19 वैक्सीन कोबेर्वैक्स के सीमित उपयोग की अनुमति दी थी। कोवोवैक्स, नोवावैक्स से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण द्वारा निर्मित है और सशर्त विपणन अनुमति के लिए यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी द्वारा अनुमोदित है। दिसंबर 2017 को डब्ल्यूएचओ द्वारा आपातकालीन उपयोग सूची भी प्रदान की गई है। देश में भारत बायोटेक के कोवाक्सिन का उपयोग 15-18 वर्ष के बीच के किशोरों का टीकाकरण करने के लिए किया जा रहा है।

Published / 2022-03-08 18:01:05
दलिया और मैदा दोनों गेहूं से बनते हैं, लेकिन दोनों में इतना अंतर क्यों?

एबीएन हेल्थ डेस्क। जब भी हेल्दी खाने की बात होती है तो सबसे पहले नाम दलिया का आता है। दलिया खाने में काफी फायदेमंद माना जाता है और मैदा को खाने से मना किया जाता है। लेकिन, कभी आपने सोचा है कि आखिर दलिया और मैदा गेहूं से ही बनाए जाते हैं, लेकिन दोनों में इतना अंतर क्यों होता है। एक फायदेमंद है तो एक को खाने से मना किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों है। कैसे बनते हैं दलिया और मैदा? दलिया भी गेहूं से बनता है और दलिया बनाने के लिए पहले गेहूं को पीसा जाता है। लेकिन, दलिया बनाते वक्त पूरी तरह से पीसा नहीं जाता है, छोटे-छोटे टुकड़े ही किए जाते हैं। अगर इसे ज्यादा बारीक पीस दिया जाए तो ये आटा बन जाता है। दलिया एक तरीके से गेहूं की किनकी है, जैसे चावल की होती है और यह टूटे हुए चावल होते हैं। वहीं, मैदा भी गेहूं से बनाया जाता है और इसकी प्रक्रिया अलग होती है। मैदा बनाने के लिए सबसे पहले मील में सभी गेहूं के दाने की ऊपरी परत निकलकर अलग हो जाती है। इस ऊपरी परत को हटाकर सफेद वाले हिस्से का काफी बारीक पिसा जाता है। यह पूरी तरह सफेद होता है और इसे पिसने के बाद 80 जाल प्रति इंच वाली चलनी से छाना जाता है और इसे एकदम बारीक कर दिया जाता है। छिलके हटने से यह हल्का पीला भी नहीं होता है और एकदम सफेद होता है गुणों में क्यों है अलग? दलिया और मैदा में इसलिए अलग अलग गुण होते हैं, क्योंकि दलिया सीधे गेहूं से पीसा जाता है। इससे इसके पोषक तत्व इसी में रहते हैं और यह काफी लाभदायक होता है। वहीं मैदा को बनाने में छिलके हटाया जाए हैं और गेंहू के इन छिलकों में ही सबसे ज्यादा पोषक तत्व पाए जाते हैं। ऐसे में मैदा में ये पोषक तत्व नहीं होते हैं और सफेद हिस्से में स्टार्च आदि होने से यह शरीर के लिए नुकसान दायक होते हैं। इसलिए मैदा को हेल्थ के लिए नुकसान दायक माना जाता है और इसे ना खाने की सलाह दी जाती है।

Published / 2022-03-08 17:38:56
साइंटिस्ट का दावा : भारत में नहीं आएगी कोरोना की चौथी लहर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में कोविड-19 की तीसरी लहर समाप्त होने का दावा करते हुए जाने- माने विषाणु विज्ञानी डॉ टी जैकब जॉन ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि देश में तब तक महामारी की कोई चौथी लहर नहीं आएगी, जब तक वायरस का कोई अनपेक्षित स्वरूप सामने नहीं आ जाता। भारत में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 3,993 नए मामले सामने आए, जो पिछले 662 दिन में सबसे कम हैं। कोविड-19 की तीसरी लहर के दौरान संक्रमण के मामलों की संख्या 21 जनवरी के बाद कम होनी शुरू हो गई थी, जब एक दिन में संक्रमण के 3,47,254 मामले सामने आए थे। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के विषाणु विज्ञान में आधुनिक अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक जॉन ने कहा कि विश्वास के साथ यह कहा जा सकता है कि वैश्विक महामारी की तीसरी लहर समाप्त हो गयी है और देश एक बार फिर स्थानिक बीमारी के चरण में प्रवेश कर गया है। उन्होंने कहा कि मेरी निजी अपेक्षा और राय है कि हम चार सप्ताह से अधिक समय तक स्थानिक बीमारी के चरण में रहेंगे। भारत में सभी राज्यों में इस तरह की प्रवृत्ति मुझे यह विश्वास दिला रही है।

Published / 2022-03-08 13:22:03
कॉरपोरेट अस्पताल रांची, कोलकाता और सिलीगुड़ी में कर रहे विस्तार

एबीएन डेस्क। महामारी खत्म होने के संकेत नजर आने और स्वास्थ्य क्षेत्र में वृद्धि का परिदृश्य बने रहने से सूचीबद्ध एवं गैर-सूचीबद्ध कॉरपोरेट अस्पताल मुख्य रूप से मौजूदा अस्पतालों की क्षमता बढ़ाकर एवं अधिग्रहण के जरिये विस्तार की योजनाएं बना रहे हैं। ज्यादातर अस्पतालों ने अपने मौजूदा अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई है, जबकि अन्य मौजूदा अस्पतालों का अधिग्रहण कर रहे हैं। कुछ अस्पतालों ने छोटे कस्बों एवं शहरों में परिचालन एवं प्रबंधन के करार करने की योजना बनाई है। प्रभुदास लीलाधर में विश्लेषक परम देसाई ने कहा कि मौजूदा क्षमता अगले एक या डेढ़ साल की मांग ही पूरी कर सकती है। देसाई ने कहा, इस तरह अब अस्पताल विस्तार योजनाओं पर काम कर रहे हैं। वे अगले पांच या छह साल की मांग पूरी करने के लिए मुख्य रूप से अधिग्रहण और मौजूदा अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ाने का तरीका अपना रहे हैं। अस्पताल भी इससे सहमत नजर आते हैं। पूर्वी भारत में मेडिका ग्रुप आॅफ हॉस्पिटल्स के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक आलोक राय ने कहा कि उनके पांच अस्पतालों के नेटवर्क में पहले से ही 80 फीसदी क्षमता इस्तेमाल हो रही है। राय ने कहा, इस तरह हम मौजूदा अस्पतालों में बेड बढ़ा रहे हैं, अधिग्रहण की संभावनाएं तलाश रहे हैं और पूर्वी भारत के छोटे कस्बों एवं शहरों में परिचालन एवं प्रबंधन के मौके तलाश रहे हैं। मेडिका के पास इस समय 1,100 बेड हैं और यह करीब 500 बेड बढ़ाने जा रही है। यह रांची, कोलकाता और सिलीगुड़ी में अपने मौजूदा अस्पतालों में बेड बढ़ाने पर करीब 150 करोड़ रुपये खर्च कर रही है और रायपुर, गुवाहाटी एवं भुवनेश्वर में अस्पतालों के अधिग्रहण पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करेगी। राय ने कहा, अधिग्रहण के जरिये विस्तार और परिचालन एवं प्रबंधन के जरिये हम अगले कुछ वर्षों में पांच और अस्पताल बढ़ा लेंगे। इस समय पांच अस्पतालों का परिचालन कर रहे हैं। सूचीबद्ध कॉरपोरेट अस्पतालों ने भी विस्तार की बड़ी योजनाएं बनाई हैं। मैक्स हेल्थकेयर अपने मौजूदा अस्पतालों साकेत (दिल्ली), नानावटी (मुंबई) और शालीमार बाग में अगले पांच साल के दौरान 2,300 बेड बढ़ाने की योजना बना रही है, जो उसकी मौजूदा क्षमता का 70 फीसदी हैं। मैक्स भी परिचालन एवं प्रबंधन के जरिये एनसीआर में बेड बढ़ा रहा है, जो वित्त वर्ष 2024 में चालू हो जाएंगे। फोर्टिस हेल्थकेयर ने भी चालू वित्त वर्ष में वृद्धि और प्रतिस्थापन पूंजीगत व्यय पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बनाई है। फोर्टिस हेल्थकेयर के एमडी और सीईओ आशुतोष रघुवंशी ने कहा कि वे शालीमार बाग, फरीदाबाद और कोलकाता स्थित मुख्य अस्पतालों और मुलुंड में अपनी विस्तार योजना पर ठीक से आगे बढ़ रहे हैं। मणिपाल हॉस्पिटल्स जैसे कुछ कॉरपोरेट अस्पताल नई जगहों पर अस्पतालों का निर्माण करने जा रहे हैं। यह अगले ढाई साल में 1,000 बेड बढ़ाएगा, जिसमें 750 बेड नए अस्पतालों में होंगे।

Published / 2022-03-06 16:50:11
टूथपेस्ट के ट्यूब पर बने लाल, हरे, नीले और काले ब्लॉक का मतलब क्या है?

एबीएन हेल्थ डेस्क। टूथपेस्ट के ट्यूब पर अलग-अलग रंगों के ब्लॉक बने होते हैं। जैसे- लाल, हरा, नीला और काला। इन रंगों का अपना एक मतलब है, जिसे समझाने के लिए टूथपेस्ट तैयार करने वाली कंपनियों इन पर ब्लॉक बनवाती हैं। ये रंग बताते हैं यह टूथपेस्ट दूसरे से कितना अलग है। जानिए, टूथपेस्ट की ट्यूब पर बने अलग-अलग रंगों के ब्लॉक का क्या मतलब है? सबसे पहले बात करते हैं टूथपेस्ट ट्यूब पर बने लाल रंग के ब्लॉक की। इस रंग के ब्लॉक का मतलब है कि यह टूथपेस्ट नेचुरल और केमिकल दोनों तरह की चीजों से मिलाकर तैयार किया गया है। अगर आप सिर्फ नेचुरल चीजों से तैयार टूथपेस्ट का इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके लिए नहीं है। अगर टूथपेस्ट ट्यूब पर ग्रीन रंग का ब्लॉक है तो इसका मतलब है कि इसे केवल नेचुरल चीजों से बनाया गया है। अगर आप केमिकल वाली चीजें नहीं पसंद करते तो इस तरह के टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है। अगर ट्यूब पर नीले रंग का ब्लॉक है तो यह बताता है कि इसे प्राकृतिक चीजों और दवाओं से तैयार किया गया है। इस तरह के पेस्ट को डॉक्टर्स किसी खास स्थिति में इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। इसलिए इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टरी सलाह जरूर लें। वहीं, ब्लैक ब्लॉक का मतलब है कि इस टूथपेस्ट को सिर्फ केमिकल से तैयार किया गया है। इसलिए आप अपनी सुविधा के मुताबिक, अलग-अलग रंग के ब्लॉक वाले पेस्ट में से अपना पेस्ट चुन सकते हैं।

Published / 2022-03-06 16:10:32
बूस्टर डोज : विशेषज्ञ समिति ने कोवोवैक्स के तीसरे चरण के परीक्षण की मांगी अनुमति

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकार की एक विशेषज्ञ समिति ने वयस्कों में बूस्टर खुराक के रूप में कोविड-19 रोधी टीके कोवोवैक्स के चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की है। भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 28 दिसंबर को वयस्कों में आपात स्थिति में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को स्वीकृति दी थी। इसे अभी देश के टीकाकरण अभियान में शामिल नहीं किया गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को बूस्टर खुराक के रूप में एकल-खुराक कोविड-19 रोधी टीके स्पुतनिक लाइट के चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की थी। एक आधिकारिक सूत्र ने कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) में सरकार और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने फरवरी में डीसीजीआई को एक अर्जी दी थी जिसमें कोवोवैक्स की सुरक्षा और प्रतिरक्षात्मकता का मूल्यांकन करने के लिए उन लोगों को बूस्टर खुराक देकर इसके चरण-3 के नियंत्रित अध्ययन के लिए मंजूरी मांगी थी, जिन्होंने कम से कम तीन महीने पहले कोवीशील्ड या कोवैक्सीन का टीका लगाया हो। सिंह ने कहा है कि कई देश कोविड-19 महामारी की अनिश्चितताओं को देखते हुए पहले से ही अपने नागरिकों को बूस्टर खुराक दे रहे हैं। सिंह ने अर्जी में कहा, हमें यकीन है कि इस क्लीनिकल परीक्षण के संचालन के लिए आपकी मंजूरी हमारे प्रधानमंत्री के मेकिंग इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड के दृष्टिकोण के अनुरूप हमारे देश के साथ-साथ दुनिया के लोगों के लिए बूस्टर खुराक के उपयोग के लिए कोवोवैक्स की शीघ्र उपलब्धता सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा, हमारी कंपनी हमारे मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार सी पूनावाला के दूरदर्शी नेतृत्व में एक किफायती मूल्य पर विश्व स्तरीय जीवन रक्षक टीके उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि हमें भारतीय वयस्कों पर कोवोवैक्स की बूस्टर खुराक के लिए चरण-3 के क्लीनिकल परीक्षण की अनुमति दें।

Published / 2022-03-06 10:31:29
दुनियाभर में कोरोना ने ली करीब 60 लाख लोगों की जान : WHO

एबीएन हेल्थ डेस्क। दुनियाभर में कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या 60 लाख के करीब पहुंच चुकी है। यह आंकड़ा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के नवीनतम जानकारी से प्राप्त हुई है। पूरी दुनिया में अभी तक कोरोना संक्रमण के 44,08,07,756 मामले सामने आए हैं, तथा संक्रमण से 59,78,096 लोगों की मौत हुई है। महामारी से सबसे अधिक मौत यूरोप में हुई हैं। यूरोप में 18,12,75,264 मामले सामने आए तथा अमेरिका में 14,76,55,931 संक्रमित पाए गए। WHO के अनुसार, अमेरिका, भारत और ब्राजिल में सबसे अधिक संक्रमित मिले हैं। वहीं, नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 27 फरवरी तक विश्व भर में 10.6 बिलियन लोगों को वैक्सीन लगाए जा चुके हैं।

Page 42 of 54

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

Tranding

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse