एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश भर में राष्ट्रीय कोविड टीकाकरण अभियान के अंतर्गत 188.65 करोड़ से अधिक कोविड टीके लगाये गये हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने शुक्रवार को यहां बताया कि आज सुबह सात बजे तक 188 करोड़ 65 लाख 46 हजार 894 कोविड टीके दिये जा चुके हैं। मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोविड संक्रमण के 3377 नये मरीज सामने आये हैं। इनके साथ ही देश में कोरोना रोगियों की संख्या 17 हजार 801 रह गयी है। यह संक्रमित मामलों का 0.04 प्रतिशत है। दैनिक संक्रमण दर 0.71 प्रतिशत हो गयी है। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में 2496 लोग कोविड से मुक्त हुए हैं। अभी तक कुल चार करोड़ 25 लाख 30 हजार 622 कोविड से उबर चुके हैं। स्वस्थ होने की दर 98.74 प्रतिशत है। देश में पिछले 24 घंटे में चार लाख 73 हजार 635 कोविड परीक्षण किए गये हैं। देश में अब तक कुल 83 करोड़ 69 लाख 45 हजार 383 कोविड परीक्षण किए गये हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत के औषधि महानियंत्रक ने मंगलवार को 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ZycovD कोविड वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण प्रदान किया है। इस मंजूरी के साथ 12 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों को 3 मिलीग्राम की दो खुराक के रूप में दवा दी जा सकती है और दोनों खुराक के बीच 28 दिन का अंतर रखा जा सकता है। इस समय जाइकोवी-डी की 2 मिलीग्राम की तीन खुराक की अनुमति है, जिसमें प्रत्येक खुराक के 28 दिन बाद अगली खुराक दी जाती है। सरकार से परमिशन मिलने के बाद जाइडस लाइफसाइंसेस ने मंगलवार को कहा कि जाइकोवी-डी की दो खुराक देने से कम समय में बड़ी आबादी को कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ टीका लगाने में मदद मिलेगी। भारत ने 16 मार्च को 12 से 14 साल की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया था। जाइडस लाइफसाइंसेस के प्रबंध निदेशक शर्विल पटेल ने दो खुराक की योजना के बारे में कहा कि इससे वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा को मजबूत करने के लिहाज से टीकाकरण के लिए जरूरी कुल समय घटाने में मदद मिलेगी। इससे पहले औषधि महानियंत्रक ने 6-12 साल की उम्र के बच्चों के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी। बता दें कि भारत ने 16 मार्च को 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया। देशभर में कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान 16 जनवरी 2021 को शुरू किया गया था, तब केवल स्वास्थ्य कर्मियों को टीके लगाए जा रहे थे। इसके बाद दो फरवरी 2021 से अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों का टीकाकरण और एक मार्च 2021 से 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 45 या उससे अधिक आयु के लोगों के लिए टीकाकरण शुरू हुआ। 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए एक अप्रैल 2021 को टीकाकरण शुरू हुआ और 18 साल से अधिक आयु के लोगों को एक मई 2021 से कोविड-19 रोधी टीके देने शुरू किए गए। देश में तीन जनवरी 2022 से 15 से 18 वर्ष के बच्चों का टीकाकरण शुरू हुआ था। स्वास्थ्य कर्मियों तथा अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों और गंभीर बीमारी से पीड़ित 60 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को एहतियाती खुराक 10 जनवरी 2022 से देनी शुरू की गई। देश में 10 अप्रैल 2022 से 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को एहतियाती खुराक देनी शुरू कर दी गई थी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में एक बार फिर कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। इसको देखते हुए कई राज्यों ने हटाए गए कोरोना प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया है और सख्ती से इनका पालन करने का निर्देश जारी किया है। अभी स्थिति फिलहाल कंट्रोल में हैं। लेकिन जैसे-जैसे मामले बढ़ते जा रहे हैं, उससे संभावना जताई जा रही है कि भारत में चौथी लहर दस्तक देने वाली है। हालांकि वायरोलॉजिस्ट और क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज वेल्लोर के पूर्व प्रोफेसर डॉ जैकब जॉन का कहना है कि चौथी लहर के आने के आसार बेहद कम हैं। डॉ जैकब जॉन ने कहा कि भारत में कोरोनावायरस की चौथी लहर की संभावना बहुत कम है। यह पूछे जाने पर कि कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण के मामले क्यों बढ़ रहे हैं? वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि दिल्ली और हरियाणा में पिछले दो से तीन हफ्तों से कोविड-19 केस में वृद्धि दर्ज की जा रही है। लेकिन यह बढ़ोतरी ज्यादा दिनों तक नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य कोरोना मामलों में वृद्धि की सूचना नहीं दे रहा है। भारत में मार्च और अप्रैल के दौरान सामने आए मामलों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम है। चौथी लहर की संभावना बेहद कम : जैकब जॉन ने कहा, दिल्ली और हरियाणा में पिछले दो से तीन हफ्तों के दौरान संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज हुई है। हालांकि यह ज्यादा दिनों तक बरकरार नहीं रहेगा। दिल्ली में एक हजार केस प्रति 5 लाख आबादी के बराबर है। वायरोलॉजिस्ट ने दोहराया कि चौथी लहर की संभावना बेहद कम है। डॉ जॉन ने कहा, अगर चौथी लहर आती है तो यह आश्चर्य की बात होगी। अभी इसको लेकर अनुमान नहीं लगाया जा सकता। हालांकि चौथी लहर की संभावना बहुत कम है। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन कवरेज बहुत ज्यादा हो चुका है। कोरोना संक्रमण के मामलों में कमी लाने के लिए क्या करना चाहिए? इस सवाल के जवाब में जॉन ने कहा, मास्क का लगातार इस्तेमाल करना चाहिए। यह कारगर है। यह पूछे जाने पर कि क्या स्कूलों को बंद कर दिया जाएगा क्योंकि कई राज्यों में बच्चे बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित पाए गए हैं। इसपर उन्होंने कहा, बिल्कुल भी नहीं। स्कूल खुले रहने चाहिए। बूस्टर डोज लेने वाले 70% लोग नहीं हुए संक्रमित : इस बीच, कोरोना वायरस पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की राष्ट्रीय टास्क फोर्स के सह-अध्यक्ष डॉक्टर राजीव जयदेवन के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में कहा गया है कि भारत में कोविड-19 वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने वालों में से 70 प्रतिशत लोग महामारी की तीसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुए। रिसर्च के मुताबिक, वैक्सीनेशन कराने वाले लेकिन बूस्टर डोज नहीं लेने वाले 45 प्रतिशत लोग तीसरी लहर के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित हुए।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण के एक विशेषज्ञ पैनल ने पांच से 11 साल के बच्चों के लिए बायोलॉजिकल ई के कोविड-19 वैक्सीन कॉर्बेवैक्स की आपातकालीन उपयोग मंजूरी देने की सिफारिश की है। सीडीएससीओ की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति ने हालांकि भारत बायोटेक से दो से 11 वर्ष की आयु के लोगों के बीच कोवैक्सिन के उपयोग के लिए अपने आपातकालीन उपयोग मंजूरी (ईयूए) आवेदन की समीक्षा करने के लिए अधिक डेटा मांगा है। 12 से 14 वर्ष के बच्चों को दिया जा रहा है कोर्बेवैक्स : ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने पिछले साल 28 दिसंबर को वयस्कों में आपातकालीन स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए और इस साल 9 मार्च को कुछ शर्तों के तहत 12 से 17 वर्ष की आयु वर्ग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी। बायोलॉजिकल ई के कोर्बेवैक्स का उपयोग 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। 24 दिसंबर 2021 को 12 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के लिए डीसीजीआई द्वारा कोवाक्सिन को आपातकालीन उपयोग सूची में शामिल किया गया था। एक सूत्र ने कहा कि बायोलॉजिकल-ई के ईयूए आवेदन पर विचार-विमर्श करने वाली सीडीएससीओ की कोविड-19 पर विषय विशेषज्ञ समिति ने पांच से 11 वर्ष की आयु में कॉर्बेवैक्स के उपयोग के लिए आपातकालीन उपयोग मंजूरी देने की सिफारिश की है। बता दें कि भारत ने 16 मार्च को 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया है। टीकाकरण अभियान पिछले साल 16 जनवरी को शुरू किया गया था : देशभर में टीकाकरण अभियान पिछले साल 16 जनवरी को शुरू किया गया था, जिसमें पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया गया था। फ्रंटलाइन वर्कर्स का टीकाकरण पिछले साल 2 फरवरी से शुरू हुआ था। कोविड 19 टीकाकरण का अगला चरण पिछले साल 1 मार्च को 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों और 45 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए पहले से बीमार लोगों के लिए शुरू हुआ था। भारत ने पिछले साल 1 अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों के लिए टीकाकरण शुरू किया था। इसके बाद सरकार ने पिछले साल 1 मई से 18 वर्ष से अधिक उम्र के सभी लोगों को वायरल बीमारी के खिलाफ टीकाकरण की अनुमति देकर अपने टीकाकरण अभियान का विस्तार करने का फैसला किया था। टीकाकरण का अगला चरण 3 जनवरी को 15-18 वर्ष के आयु वर्ग के किशोरों के लिए शुरू हुआ था। भारत ने 10 जनवरी से हेल्थकेयर वर्कर्स और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं और 60 वर्ष व उससे अधिक आयु के लोगों को टीकों की एहतियाती खुराक देना शुरू किया है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में बन रही अधिक तापमान पर टिकने वाली कोरोना वैक्सीन वायरस के डेल्टा और ओमिक्रॉन समेत अन्य स्वरूपों पर कारगर साबित हुई है। यह दावा चूहों पर हुए एक शोध के नतीजों में किया गया है। बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) और बायोटेक स्टार्ट-अप कंपनी मिनवैक्स द्वारा विकसित की जा रही इस "वॉर्म" वैक्सीन में वायरस के स्पाइक प्रोटीन (आरबीडी) का इस्तेमाल किया गया है। ऑस्ट्रेलिया के कॉमनवेल्थ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (सीएसआईआरओ) के शोधकर्ताओं ने बताया कि अधिकांश टीकों को असरदार बनाए रखने के लिए बहुत कम तापमान में रखना होता है, लेकिन गर्मी सह सकने वाला यह टीका (हीट स्टेबल वैक्सीन) चार हफ्तों तक 37 डिग्री सेल्सियस और 100 डिग्री सेल्सियस में 90 मिनट तक रखा जा सकता है। चूहों को यह "वॉर्म" वैक्सीन लगाकर जब उनके खून के नमूनों की जांच की गई तो उनमें डेल्टा और ओमिक्रॉन स्वरूपों के खिलाफ प्रभावी एंटीबॉडी मिलीं। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो गर्मी में भी टिक पाने वाला यह टीका उन गरीब और कम आय वाले देशों में वैक्सीन असमानता को दूर करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, जिनके पास पर्याप्त कोल्ड चेन भंडारण सुविधा नहीं है। गरीब देशों को बड़ी मदद : बता दें, दुनियाभर में 10 अरब से ज्यादा कोरोना खुराकें लग चुकी हैं और 51 देशों में तो 70 फीसदी से ज्यादा आबादी का टीकाकरण हो गया है, लेकिन कमजोर देशों में यह आंकड़ा महज 11 फीसदी ही है। फाइजर को चाहिए होता है -70 डिग्री तापमान : भारत में बड़े पैमाने पर लग रहा कोविशील्ड टीका दो से आठ डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है तो वहीं, अमेरिका के फाइजर टीके को विशेष कोल्ड स्टोरेज में -70 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता पड़ती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज गुजरात के भुज शहर में केके पटेल सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया। पीएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अस्पताल का उद्घाटन किया। उद्घाटन के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भूकंप से मची तबाही को पीछे छोड़कर भुज और कच्छ के लोग अब अपने परिश्रम से इस क्षेत्र का नया भाग्य लिख रहे हैं। आज इस क्षेत्र में अनेक आधुनिक मेडिकल सेवाएं मौजूद हैं। इसी कड़ी में भुज को आज एक आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल मिल रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं सिर्फ बीमारी के इलाज तक ही सीमित नहीं होती हैं, ये सामाजिक न्याय को प्रोत्साहित करती हैं। जब किसी गरीब को सस्ता और उत्तम इलाज सुलभ होता है, तो उसका व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होता है। देश में आज दर्ज़नों एम्स के साथ अनेक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। देश के हर ज़िले में मेडिकल कॉलेज के निर्माण का लक्ष्य हो या फिर मेडिकल एजुकेशन को सबकी पहुंच में रखने के प्रयास, इससे आने वाले 10 साल में देश को रिकॉर्ड संख्या में नए डॉक्टर मिलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना और जनऔषधि योजना से हर साल गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के लाखों करोड़ रुपए इलाज में खर्च होने से बच रहे हैं। आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन से मरीज़ों की सुविधाएं और बढ़ेगी। बता दें कि भुज के इस अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी (कैथलैब), कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूक्लियर मेडिसिन, न्यूरो सर्जरी, जॉइंट रिप्लेसमेंट और प्रयोगशाला तथा रेडियोलॉजी जैसी अन्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। ब्रिटेन ने नन्हे मुन्नों को कोरोना से बचाने के लिए माडर्ना इंका. द्वारा विकसित "स्पाइकवैक्स" टीके को मंजूरी दे दी है। ये टीके 6 से 11 साल तक के बच्चों को लगेंगे। ब्रिटेन के दवा नियामक ने इस टीके को पूरी तरह सुरक्षित पाया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक नए सर्वे में दावा किया गया है कि मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने से भारत में 10 में आठ परिवार कोरोना वायरस संक्रमण की चपेट में आने से बच गए। यह सर्वे लोकलसर्किल्स की ओर से कराया गया है। लोकलसर्किल्स को सर्वे के दौरान देश के 345 जिलों के नागरिकों से 29,000 से ज्यादा प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई थीं। लोकल सर्किल्स ने दावा किया है कि सर्वे के अनुसार पिछले दो वर्षों में 57 फीसदी भारतीय परिवारों में से एक या अधिक व्यक्ति कोरोना वायरस से संक्रमित हुआ। यह सर्वे ऐसे समय में कराया गया था जब कई राज्यों ने कोरोना वायरस से संबंधित प्रतिबंध हटा चुके थे। सर्वे के अनुसार ऐसे 10 में आठ परिवारों ने, जिनका कोई सदस्य पिछले दो वर्षों में कोरोना वायरस से संक्रमित नहीं हुआ, कहा कि उन्होंने सामाजिक संपर्क को कम से कम किया और सतर्कता के साथ मास्क पहनने और शारीरिक दूरी के नियम का पालन किया। मास्क व शारीरिक दूरी के नियम ने कोरोना को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। इसमें कहा गया है कि अगर उन लोगों से मिली प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण किया जाए जो कोरोना संक्रमित नहीं हुए हैं, 80 फीसदी लोगों ने कहा कि जब कोरोना महामारी की कोई लहर आई तो उन्होंने सामाजिक संपर्क को कम किया और मास्क पहनने और शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती के साथ पालन किया। 33 फीसदी लोग सुरक्षित स्थानों पर ही अन्य लोगों से मिले : इस सर्वे में कहा गया है कि 33 फीसदी लोगों ने कहा कि वह या तो लोगों से सिर्फ घर से बाहर मिले। इसके अलावा अगर उन्हें किसी परिस्थिति में लोगों से घर के अंदर मिलना पड़ा तो उन्होंने सुनिश्चित किया कि वहां हवा के आने-जाने की अच्छी व्यवस्था है। इस सर्वे में शामिल होने वाले लोगों में 61 फीसदी पुरुष थे और 39 फीसदी महिलाएं थीं। 74 फीसदी परिवारों ने कहा- नियम मानकर बच सकते थे : इसमें हिस्सा लेने वाले ऐसे 74 फीसदी परिवारों ने, जिनका एक या या अधिक सदस्य कोरोना संक्रमित हुए थे, कहा कि वह सामाजिक संपर्क को कम करके और मास्क पहनकर संक्रमण से बच सकते थे। सर्वे में कहा गया है कि कोरोना वायरस महामारी की सभी लहरों में मास्क पहनना और शारीरिक दूरी के नियम का पालन करना प्रभावी रहा है।
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