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स्टडी का दावा : कोरोना को नाक में ही "बेदम" कर देगा फैबी स्प्रे
Published / 2022-07-15 05:27:51
स्टडी का दावा : कोरोना को नाक में ही "बेदम" कर देगा फैबी स्प्रे

एबीएन हेल्थ डेस्क। हेल्थ जर्नल द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरे चरण के परीक्षण के परिणामों के अनुसार, भारत में COVID-19 के उच्च जोखिम वाले वयस्क मरीजों को दी गई नेजल स्प्रे (नाक के रास्ते लिया जाने वाला एंटी-कोविड स्प्रे) ने 24 घंटे के भीतर वायरल लोड को 94 प्रतिशत और 48 घंटे में 99 प्रतिशत तक कम कर दिया। इसी साल फरवरी में सरकार से अनुमति लेने वाले इस नेजल स्प्रे को "फैबी स्प्रे" नाम से लॉन्च किया गया था। मुंबई स्थित दवा कंपनी ग्लेनमार्क ने भारत में करीब 20 स्थानों पर टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले 306 वयस्कों पर नाइट्रिक ऑक्साइड नेजल स्प्रे (NONS) का अध्ययन किया, जो COVID-19 से संक्रमित थे। ग्लेनमार्क की क्लीनिक डेवलपमेंट प्रमुख मोनिका टंडन ने कहा, नेजल स्प्रे का कोरोना संक्रमित मरीजों पर देश के 20 अस्पतालों में परीक्षण हुआ। इस दौरान हल्के लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों (जिन्होंने टीका लिया) और बिना टीका लेने वाले कोरोना मरीजों को अलग-अलग समूह में रखा गया। एक को नेजल स्प्रे यानी नाक के जरिए नाइट्रिक ऑक्साइड दी गई, जबकि दूसरे समूह को एक प्लेसीबो दिया गया। सात दिन बाद परिणामों की समीक्षा की गई तो असर का पता चला। उच्च जोखिम वाले कोरोना रोगियों, जिन्होंने नेजल स्प्रे लिया था, उनमें 24 घंटे के भीतर वायरल लोड में 94% तक की कमी देखी गई। नेजल स्प्रे का क्लीनिकल ट्रायल कोरोना के डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के सर्ज के दौरान किया गया था। शोध में पाया गया कि एनओएनएस प्राप्त करने वाले उच्च जोखिम वाले रोगियों में 24 घंटों के भीतर वायरल लोड में उल्लेखनीय कमी आई, जो 7 दिनों के उपचार के दौरान बनी रही। जर्नल में प्रकाशित लेख में कहा गया है कि NONS के साथ उपचार के 24 घंटे के भीतर वायरल लोड 93.7 प्रतिशत और 48 घंटे के भीतर 99 प्रतिशत कम हो गया। टीकाकरण और बिना टीकाकरण वाले समूहों में इसी तरह के परिणाम देखे गए। रिसर्च पेपर के लेखकों में से एक और ग्लेनमार्क की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट मोनिका टंडन ने कहा, मजबूत डबल-ब्लाइंड ट्रायल ने NONS की महत्वपूर्ण प्रभावकारिता और उल्लेखनीय सुरक्षा का प्रदर्शन किया। मोनिका टंडन ने एक बयान में कहा, इस थेरेपी में, COVID-19 प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है। इसका उपयोग बहुत आसान है। रिसर्च पेपर में कहा गया है कि नाइट्रिक ऑक्साइड, कोरोनो के वायरस को नाक के रास्ते शरीर में प्रवेश करने से रोकता है, वायरस को मारता है और इसकी प्रतिकृति को रोकता है। यही वजह है कि एनओएनएस के साथ वायरल लोड इतनी तेजी से कम होता है। उपचार शुरू होने के बाद एनओएनएस समूह में वायरल इलाज का औसत समय 3 दिन और प्लेसीबो समूह में 7 दिन रहा। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इस साल फरवरी में नेजल स्प्रे को इमरजेंसी यूज अप्रूवल दिया था।

कोरोना : एक और बड़ी जंग आज से, 75 दिन चलेगा बूस्टर डोज का विशेष अभियान
Published / 2022-07-15 04:08:08
कोरोना : एक और बड़ी जंग आज से, 75 दिन चलेगा बूस्टर डोज का विशेष अभियान

एबीएन हेल्थ डेस्क। देश में कोरोना महामारी का प्रकोप अभी खत्म नहीं हुआ है। हर रोज 15 हजार से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं और मौत के आंकड़े भी बढ़ते जा रहे हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने सभी वयस्कों को एहतियाती खुराक देने का फैसला किया है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार से सभी वयस्कों को मुफ्त एहतियाती खुराक लगाने का फैसला किया है। 15 जुलाई से "आजादी के अमृत महोत्सव" के हिस्से के रूप में अगले 75 दिनों तक मुफ्त एहतियाती खुराक के लिए अभियान चलाया जायेगा। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई थी। सरकारी केंद्रों पर सभी वयस्कों को मुफ्त बूस्टर डोज लगाई जायेगी। लक्षित आबादी में एक प्रतिशत से कम लोगों ने लिया बूस्टर डोज : कोरोना से बचने के लिए जहां सरकार लोगों से टीका लगवाने की अपील कर रही है वहीं अब कुछ लापरवाही भी सामने आई है। दरअसल, बूस्टर डोज को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। अभी तक 18-59 वर्ष की लक्षित 77 करोड़ आबादी में मात्र एक प्रतिशत से भी कम लोगों ने बूस्टर डोज लगवाई है। बुस्टर डोज लेने की समय सीमा हुई कम : कोरोना संक्रमण होने पर मौत से बचाने और गंभीर लक्षण रोकने में वैक्सीन की अहम भूमिका साबित हो चुकी है। इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड रोधी वैक्सीन की दूसरी डोज लेने के बाद बूस्टर डोज लेने की समय सीमा को भी नौ महीने से घटाकर छह महीने कर दिया है। अब 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी व्यक्ति सरकारी टीकाकरण केंद्र पर जाकर बूस्टर डोज लगवा सकता है। राज्यों को स्पुतनिक-वी उपलब्ध कराने के निर्देश : इस विशेष अभियान को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है कि स्पुतनिक-वी टीका उपलब्ध करा रहे निजी टीकाकरण केंद्र टीके की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ लाभार्थियों तक इसकी दूसरी और एहतियाती खुराक उपलब्ध कराएं। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने गुरुवार को कहा कि देखने में आया है कि जिन लोगों को स्पुतनिक-वी टीके की एहतियाती खुराक लेनी है, उनकी संख्या की केवल 0.5 प्रतिशत ही वैक्सीन की प्राप्ति की गई है। उन्होंने कहा कि निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों में वैक्सीन की दो खुराक लगवाने वालों को स्पुतनिक-वी के कंपोनेंट-1 का इस्तेमाल करते हुए एहतियाती खुराक दी जा सकती है। इस टीके के लाभार्थी बूस्टर खुराक लें, इसके लिए इसकी उपलब्धता को बढ़ाने के लिहाज से स्वास्थ्य सचिव ने राज्यों से स्पुतनिक वी टीके (कंपोनेंट-1) की उपलब्धता सुनिश्चित करने और निजी कोविड टीकाकरण केंद्रों की सक्रियता सुनिश्चित करने को कहा है। बता दें कि 12 से 18 साल की उम्र के बच्चों के टीकाकरण को भी स्कूल आधारित अभियानों के जरिए पूरा किया जाएगा। टीकाकरण में तेजी को लेकर केंद्र सरकार ने एक जून से दूसरी बार "हर घर दस्तक 2.0" डोर-टू-डोर अभियान शुरू किया था। केंद्र को 12 साल से कम उम्र के बच्चों को टीके के लिए नहीं मिली वैज्ञानिक सलाह : मांडविया केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को कहा कि सरकार को 12 साल से कम आयु के बच्चों के लिए टीकों पर वैज्ञानिक समुदाय से कोई सलाह नहीं मिली है। मंत्री ने बंगलुरू में एक कार्यक्रम के इतर संवाददाताओं से कहा, हम वैज्ञानिक समुदाय की सलाह पर निर्णय लेते हैं। हमें 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए अनुमति मिली है। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक समुदाय की सलाह के आधार पर निर्णय लिए जाएंगे। अब तक, हमें वैज्ञानिकों से कोई सलाह नहीं मिली है।

भारत में मिला मंकीपॉक्स का पहला केस, विदेश से केरल लौटा था शख्स
Published / 2022-07-14 15:25:40
भारत में मिला मंकीपॉक्स का पहला केस, विदेश से केरल लौटा था शख्स

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केरल में विदेश से लौटा एक शख्स मंकीपॉक्स से संक्रमित पाया गया, जिसके बाद उसका सैंपल जांच के लिए भेजा गया था। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस की पुष्टि हो गई है। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने गुरुवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मंकीपॉक्स के मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। विदेश से लौटने के बाद इस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण दिखाई दिए थे। रक्त के सैंपल को परीक्षण के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आॅफ वायरोलॉजी भेजा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस बीमारी की पुष्टि हो सकती है। मंत्री जॉर्ज ने मरीज के बारे में ज्यादा जानकारी दिए बगैर कहा कि उस व्यक्ति में मंकीपॉक्स के लक्षण थे और वह विदेश में एक मंकीपॉक्स रोगी के निकट संपर्क में था। पशुओं से इंसानों में फैलता है वायरस : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, मंकीपॉक्स एक वायरल जूनोसिस (पशुओं से इंसान में फैलने वाला वायरस) है। इसमें पूर्व में चेचक के रोगियों में देखे गए लक्षणों के समान लक्षण होते हैं।हालांकि, इलाज की दृष्टि से यह कम गंभीर है। 1980 में चेचक के खात्मे और उन्मूलन और उसके बाद इसके टीकाकरण की समाप्ति के बाद मंकीपॉक्स बड़ा आॅर्थोपॉक्सवायरस के रूप में उभरा है।

WHO अलर्ट : कोरोना-इबोला से भी जानलेवा है यह वायरस...
Published / 2022-07-12 17:57:26
WHO अलर्ट : कोरोना-इबोला से भी जानलेवा है यह वायरस...

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस संक्रमण से दुनिया अभी जूझ रही है, कई देशों में मामले बढ़ रहे हैं और इसके साथ-साथ वायरस के नए रूप भी सामने आ रहे हैं। अभी कोरोना से मुक्ति मिली नहीं है कि इस बीच एक नया वायरस सामने आया है, जिसे काफी खतरनाक बताया जा रहा है और इस वायरस का नाम है मारबर्ग। मारबर्ग वायरस सबसे खतरनाक वायरस माना जाता है. यह वायरस पहले भी दस्तक दे चुका है। साल 1967 में इसके सबसे ज्यादा मामले देखे गए थे। इस वायरस के बारे में ये कहा जाता था कि यदि इसकी चपेट में कोई आ गया, तो उसकी मौत निश्चित है। पश्चिमी अफ्रीकी देश घाना में मारबर्ग के 2 संदिग्ध मामले सामने आए हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) भी इस नए वायरस को लेकर सतर्क हो गया है। मारबर्ग संक्रमण, इबोला वायरस से कहीं तेजी से फैलकर लोगों को अपनी गिरफ्त में लेता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 1967 से अब तक दक्षिण और पूर्वी अफ्रीका में मारबर्ग संक्रमण का प्रकोप कई बार देखा जा चुका है। ये वायरस कितनी तेजी से फैलता है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संक्रमितों के मृत्यु की दर 24 फीसद से 88 प्रतिशत तक रही है। इस पर बात करते हुए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व महानिदेशक एनके गांगुली ने कहा, इस वायरस का ट्रांसमिशन एक से दूसरे व्यक्ति में हो सकता है और यह स्किन टू स्किन टच के माध्यम से भी फैल सकता है। मारबर्ग वायरस इबोला वाले वायरस से ही संबंधित है। उन्होंने आगे कहा, इस वायरस के लक्षण फ्लू जैसे ही हैं। इसकी पहचान के लिए सैंपल लेकर उनकी सीक्वेंसिग की जाती है, जिससे टीशू कल्चर करके वायरस का पता लगाया जाता है। मारबर्ग वायरस जैसे वायरस आते रहते हैं, लेकिन कोरोना के बाद ऐसी बीमारियों को लेकर लोग सतर्क हो गए हैं। ट्रेसिंग भी बढ़ गई है। ऐसे वायरस के लिए सर्विलांस ज़रूरी है। इसपर बात करते हुए डॉ एम वली ने कहा कि मारबर्ग वायरस के मामले पहले भी आते रहे हैं, लेकिन कोरोना के दौर में इस वायरस का फिर से सक्रिय होना ठीक नहीं है क्योंकि ये इबोला की तरह ही फैलता है। इसकी कोई एंटीवायरल दवा या वैक्सीन भी नहीं है। हालांकि राहत की बात यह है कि इस वायरस के मामले कभी भी अफ्रीका के बाहर के देशों में नहीं आए हैं। लोगों को सतर्क रहने की ज़रूरत है।

फिर बढ़ रहे कोविड केस, ऐसे में मास्क अनिवार्य : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय
Published / 2022-07-08 12:52:17
फिर बढ़ रहे कोविड केस, ऐसे में मास्क अनिवार्य : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय

टीम एबीएन, रांची। कोविड के केस एक बार फिर से बढ़ रहे हैं। इस बार पूर्व की तरह पाबंदियां भी नहीं हैं। स्कूल, बाजार, दफ्तर सभी खुले हैं। ऐसे में हमें इससे बचने के लिए विशेष रूप से सावधान रहना होगा। इसके लिए जरूरी है कि कोविड के अनुरूप व्यवहार करें। मास्क जरूर लगाएं, हाथों को धोते रहें या सैनेटाइज करें और भीड़ में जाने से परहेज करें। ये बातें शुक्रवार को मेदांता अस्पताल रांची की डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि इन दिनों फिर एक बार कोविड के केस बढ़े हैं, ऐसे में इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भी अब तक वैक्सीन की बूस्टर डोज नहीं ली है और उन्हें यह मिलने का समय हो गया है तो तुरंत ले लें। बूस्टर डोज अब दूसरी डोज लेने के छह माह बाद ही मिलने लगी है। इससे गंभीर बीमारी और हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा कम होगा। उन्होंने कहा कि कोविड का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जिन्हें कोई क्रोनिक बीमारी है जैसे हार्ट एवं क्रोनिक लंग, किडनी कैंसर, अनियंत्रित डायबिटीज आदि। जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं ली है या इसकी डोज पूरी नहीं की है उन्हें भी खतरा है। ऐसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय ने कहा कि अगर कोविड हो जाता है तो सबसे पहले खुद को आइसोलेशन में रखें। मास्क लगा कर रहें। हर छह घंटे पर अपना बुखार, आक्सीजन लेवल, हार्ट रेट चेक करते रहे। तीन दिन से ज्यादा बुखार हो, तेज सरदर्द हो, छाती में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से मिलकर इलाज करवाएं। उन्होंने बताया कि मेदांता अस्पताल रांची में एक ही छत के नीचे सभी तरह की बीमारियों का गुणवत्तापूर्ण इलाज होता है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम है जो अत्याधुनिक तकनीक से मरीजों का इलाज करती है।

बूस्टर डोज : 9 महीने से घटाकर 6 महीने की तय हुई वैक्सीन की समय सीमा
Published / 2022-07-06 13:46:37
बूस्टर डोज : 9 महीने से घटाकर 6 महीने की तय हुई वैक्सीन की समय सीमा

एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज एक अहम फैसला लेते हुए 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के अंतर को मौजूदा 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। सरकार ने कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के बीच के अंतर को 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। टीकाकरण पर सरकार की सलाहकार संस्था-नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आॅन इम्यूनाइजेशन ने दूसरी खुराक और बूस्टर डोज के बीच के अंतर को कम करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को एक पत्र में कहा, निजी कोरोना टीकाकरण केंद्रों में दूसरी खुराक की तारीख से 6 महीने या 26 सप्ताह पूरे होने के बाद अब 18-59 साल के सभी लाभार्थियों को एहतियाती खुराक दी जायेगी। उन्होंने कहा कि 60 साल और उससे अधिक के लाभार्थियों के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स दूसरी खुराक दिए जाने के 6 महीने या 26 सप्ताह पूरा होने के बाद बूस्टर डोज ले सकेंगे।

डेंगू-चिकनगुनिया मुक्त मादा मच्छर छोड़ेगा आईसीएमआर
Published / 2022-07-06 08:03:59
डेंगू-चिकनगुनिया मुक्त मादा मच्छर छोड़ेगा आईसीएमआर

एबीएन हेल्थ डेस्क। मच्छरों के कारण पनपने वाली डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से मुक्ति दिलाने की दिशा में आईसीएमआर को बड़ी कामयाबी मिली है। आईसीएमआर ने ये बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों के खात्मे के लिए ऐसे मादा मच्छर तैयार किए हैं, जिनसे पैदा होने वाले लार्वा में इनके वायरस नहीं होंगे। आईसीएमआर-वीसीआरसी के निदेशक डॉ अश्विनी कुमार ने बताया कि हम ऐसे मादा मच्छरों को छोड़ेंगे जो नर मच्छरों के संपर्क में आकर ऐसा लार्वा पैदा करेंगे, जिनमें ये वायरस नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि हमने मच्छर और अंडे तैयार किए हैं और उन्हें कभी भी छोड़ सकते हैं।

देश की पहली mRNA कोरोना वैक्सीन को मिली आपात इस्तेमाल की मंजूरी
Published / 2022-06-30 17:14:33
देश की पहली mRNA कोरोना वैक्सीन को मिली आपात इस्तेमाल की मंजूरी

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में पहली mRNA कोविड वैक्सीन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने आपात इस्तेमाल की अनूमति दे दी है। इस वैक्सीन को 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को दिया जा सकता है। इस वैक्सीन को पुणे की जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने तैयार किया है। वैक्सीन को 2-8 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखना होगा। जेनोवा बायोफार्मास्युटिक्स लिटिमेट के सीईओ संजय सिंह ने बताया कि यह वैक्सीन कोरोना की दूसरी लहर पर आधारित है, इसका तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। हमें इससे सुरक्षित और सक्षम नतीजे मिले हैं। हम इस वैक्सीन की शुरुआत एनटीएजीआई की अनुमति के 72 घंटे के भीतर करेंगे। हम इस वैक्सीन की 200-300 मिलियन डोज तैयार कर सकते हैं। संजय सिंह ने बताया कि लॉजिस्टिक की समस्या की वजह से यह वैक्सीन जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच सकी। वैक्सीन की कीमत अभी तय नहीं हुई है। इसको लेकर हम सरकार से बात कर रहे हैं, लेकिन वैक्सीन की कीमत प्रतिस्पर्धात्मक होगी। संजय सिंह ने बताया कि हमे पूरा भरोसा है कि यह वैक्सीन अपनी गुणवत्ता से पहचान बनाएगी और लोग इसे स्वीकार करेंगे। बता दें कि कंपनी को पहले ही सीडीएससीओ ने लाइसेंस दे रखा है, कंपनी के पास 70 लाख वैक्सीन को बेचने का टास्क है। संजय सिंह ने बताया कि अब जब हमे ईयूए प्राप्त हो गया है, हम जल्द ही इस वैक्सीन को डिलिवर कर सकते हैं। हमारी मौजूदा क्षमता 50 लाख डोज प्रति महीना है, जिसे हम जल्द ही दो-तीन गुना बढ़ा लेंगे।

110 देशों में बढ़ रहे बीए.4 और बीए.5 के मामले, मंकीपॉक्स भी खतरनाक : डब्ल्यूएचओ महानिदेशक
Published / 2022-06-29 17:16:04
110 देशों में बढ़ रहे बीए.4 और बीए.5 के मामले, मंकीपॉक्स भी खतरनाक : डब्ल्यूएचओ महानिदेशक

एबीएन हेल्थ डेस्क। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेडरोस अदनहोम गेब्रेहेसुस ने कोरोना के बीए.4 और बीए.5 के बढ़ रहे मामलों पर चिंता जताई है। उन्होंने बुधवार को कहा कि BA4 और BA5 के मामले कुछ देशों में बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि 110 देशों में बढ़ रहे BA4 और BA5 के मामलों के कारण कुल वैश्विक मामलों में 20% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा WHO के 6 क्षेत्रों में से 3 में कोरोना के इन सब-वैरिएंट्स के कारण मौतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि जबकि वैश्विक आंकड़ा अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने आगे मंकीपॉक्स को लेकर कहा कि नाइजीरिया 2017 से मंकीपॉक्स के प्रकोप से जूझ रहा है। इस साल वहां मंकीपॉक्स के अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, मंकीपॉक्स वायरस 50 से ज्यादा नए देशों में इस वायरस के मरीज मिले थे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आगे भी नए देशों में मंकीपॉक्स के मामले मिलने की संभावना है।

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