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Published / 2022-05-21 06:54:20
कोरोना मामलों में उताव-चढ़ाव जारी, एक दिन में आये 2,000 से ज्यादा मामले

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोविड-19 के 2,323 नए मामले सामने आने से देश में कोरोना वायरस से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,31,34,145 हो गई है। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटकर 14,996 रह गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के शनिवार सुबह आठ बजे तक अद्यतन आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण से 25 और मरीजों के जान गंवाने से मृतकों की संख्या बढ़कर 5,24,348 पर पहुंच गई है। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या संक्रमण के कुल मामलों का 0.03 प्रतिशत है, जबकि कोविड-19 से स्वस्थ होने वालों की राष्ट्रीय दर 98.75 फीसदी है। मंत्रालय के मुताबिक, बीते 24 घंटे में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 48 की कमी दर्ज की गई है। मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण की दैनिक दर 0.47 प्रतिशत, साप्ताहिक दर 0.51 प्रतिशत है। वहीं, देश में कोविड-19 से उबरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,25,94,801 हो गई है, जबकि मृत्यु दर 1.22 प्रतिशत है। मंत्रालय ने बताया कि देशव्यापी कोविड-19 रोधी टीकाकरण अभियान के तहत अब तक 192.12 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं। गौरतलब है कि देश में सात अगस्त 2020 को कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या 20 लाख, 23 अगस्त 2020 को 30 लाख और पांच सितंबर 2020 को 40 लाख से अधिक हो गई थी। संक्रमण के कुल मामले 16 सितंबर 2020 को 50 लाख, 28 सितंबर 2020 को 60 लाख, 11 अक्टूबर 2020 को 70 लाख, 29 अक्टूबर 2020 को 80 लाख और 20 नवंबर 2020 को 90 लाख के पार चले गए थे। देश में 19 दिसंबर 2020 को ये मामले एक करोड़ से अधिक हो गए थे। पिछले साल चार मई को संक्रमितों की संख्या दो करोड़ और 23 जून 2021 को तीन करोड़ के पार पहुंच गई थी। इस साल 26 जनवरी को मामले चार करोड़ के पार हो गए थे। आंकड़ों के मुताबिक, जिन 25 और मरीजों की कोरोना वायरस के कारण मौत हुई है, उनमें से 23 की केरल में तथा उत्तर प्रदेश और मिजोरम में एक-एक मरीज की मृत्यु हुई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि अब तक जिन लोगों की कोरोना वायरस के संक्रमण से मौत हुई है, उनमें से 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों को अन्य बीमारियां भी थीं। मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर बताया कि उसके आंकड़ों का भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के आंकड़ों के साथ मिलान किया जा रहा है।

Published / 2022-05-18 10:08:23
झारखंड : पोस्ट कोविड और हीट वेव के कारण बढ़ रहे मानसिक रोगी

टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीआईपी कांके के निदेशक डॉ दास ने कहा, इस साल हीट वेव का राज्य में असर दिखा है। रांची में 22 साल में ऐसा नहीं हुआ था। हीट वेव व पोस्ट कोविड की परेशानियों के चलते सीआईपी में 15-20 फीसदी तक मानसिक मरीजों की संख्या बढ़ी है। डॉ दास ने कहा, संस्थान में रोज करीब 300 मानसिक रोगी ओपीडी में आते हैं। इनमें से 120 मरीज नए होते हैं। जबकि अन्य मरीज फॉलोअप के लिए आते हैं। इसके अलावा हर दिन 550 से अधिक भर्ती मरीजों की देखरेख की जाती है। सीआईपी कांके ने मंगलवार को 105वीं वर्षगांठ मनाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रिम्स निदेशक डॉ कामेश्वर प्रसाद व विशिष्ट अतिथि इनकम टैक्स विभाग के चीफ प्रिंसिपल कमिशनर राकेश मिश्रा थे। मौके पर डॉ कामेश्वर प्रसाद ने कहा कि सीआईपी के कारण ही देश में रांची की पहचान है। इस संस्थान ने देशभर के मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त किया है। सीआईपी में पिछले एक साल में ही 136 से अधिक विषयों पर शोध हुए हैं। डॉ दास ने कहा, पहले कभी भी 100 से अधिक विषयों पर शोध नहीं हुए थे। सीआईपी में अब अधिकाधिक शोध किए जा रहे हैं। संस्थान में पिछले दो साल में 7 नए क्लीनिक शुरू किए गए हैं। इससे पहले 13 क्लीनिक थे। डॉ ने बताया कि संस्थान की 17 मई 1918 को हुई थी। उस समय सिर्फ यूरोपियन मरीजों का इलाज होता था। इसलिए पहले इसे यूरोपियन मेंटल असाइलम के नाम से जाना जाता था। तब से लेकर अब तक पांच बार इसका नाम बदला गया है। यूरोपियन मेंटल हॉस्पिटल, हॉस्पिटल फॉर मेंटल डीसिजेज व इंटरप्रोवेंसियल मेंटल हॉस्पिटल भी नाम रखा गया है। कार्यक्रम में सीआईपी का न्यूजलेटर जारी किया गया। साथ ही विभिन्न श्रेणियों में बेहतर काम करने वाले कर्मियों को पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं, दूसरी पाली में एलुमनी मीट का आयोजन हुआ। इसके अलावा 10 व 25 साल पहले के बैच के छात्रों का स्पेशल रीयूनियन का आयोजन हुआ। मौके पर सीआईपी के एलुमनी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का भी चयन किया गया। समारोह में मेंटल हेल्थ इन पोस्ट कोविड वर्ल्ड विषय पर सीएमई का आयोजन किया गया। इसमें देशभर से आए विशेषज्ञों ने कोविड के बाद मानसिक स्वास्थ्य पर पड़े असर व लोगों की परेशानियों पर चर्चा की।

Published / 2022-05-18 09:35:58
कोरोना का नया वैरिएंट नॉर्थ कोरिया से फैलने का खतरा : WHO

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नॉर्थ कोरिया में इन दिनों कोरोना ने कोहराम मचा रखा है। वहां एक हफ्ते पहले ही कोरोना का पहला केस मिला था। उसके बाद से मरीजों की संख्या बेहद तेजी से बढ़ रही है। हालात काबू करने के लिए सेना को उतार दिया गया है। कोरिया में कोरोना सिर्फ उसी के लिए चिंता का सबब नहीं है, पूरी दुनिया को भी मुश्किल में डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है कि उत्तर कोरिया जैसी जगहों से कोरोना का नया वैरिएंट पैदा हो सकता है। कोरिया में गैर टीकाकरण वाले लोगों के बीच में कोरोना वायरस के संक्रमण के उच्च स्तर पर पहुंचने का खतरा बना हुआ है। उत्तर कोरिया विश्व स्वास्थ्य संगठन का सदस्य है, लेकिन एक अलग थलग देश है। वह अपने पहले कोविड-19 के प्रकोप से ही निजात नहीं पा सका है। ऐसे में वैक्सीन की कमी और चिकित्सकीय इन्फ्रास्ट्रक्चर के अभाव में वहां कोरोना फैलने का खतरा बढ़ रहा है। उत्तर कोरिया में कोरोना के प्रकोप के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक माइक रायन ने कहा कि अगर कोई देश उपलब्ध तरीकों का इस्तेमाल नहीं करता है तो निश्चित तौर पर यह एक चिंता की बात हो सकती है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बार-बार यह चेतावनी दी है कि जहां संक्रमण की जानकारी या जांच नहीं होती है, वहीं से नए वैरियंट के उभरने का सबसे ज्यादा खतरा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहानोम घेब्रियेसिस ने भी कहा कि गैर टीकाकरण वाले लोगों में वायरस का फैलना बहुत ज्यादा चिंता का विषय है। संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य एजेंसी ने पहले कहा था कि प्योंगयांग ने अभी तक विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य नियमों के तहत प्रकोप के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया है। यह एक प्रकार से कानूनी दायित्वों का साफ तौर पर उल्लंघन है। यह पूछने पर कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की क्या प्रतिक्रिया थी, रेयान का कहना था कि संस्था पूरी तरह से तैयार थी, लेकिन संप्रभु राष्ट्र में हस्तक्षेप का उनके पास अधिकार नहीं था। पिछले दो साल से कोरोना ने जब पूरी दुनिया में हाहाकार मचा दिया था, तब भी नॉर्थ कोरिया अपनी सख्त पाबंदियों की वजह से इसकी चपेट में आने से बचा रहा। वहां कोरोना का पहला केस अभी 8 मई को दर्ज हुआ है। एक हफ्ते के अंदर ही वहां 168 लोगों में कोरोना वायरस की पुष्टि हो चुकी है। एक व्यक्ति की मौत हुई है। हालांकि डेढ़ लाख से ज्यादा लोग बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं। इस बुखार ने 56 लोगों की जान भी ले ली है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि हेल्थ सिस्टम के मामले में नॉर्थ कोरिया की स्थिति दुनिया के सबसे खराब देशों में से एक है।

Published / 2022-05-04 12:51:25
खुलासा : कोरोना से दिमाग पर हो रहा है बुरा असर

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरस महामारी ने शुरुआत से ही किस कदर दुनिया को परेशान किया है, ये बात शायद किसी को बताने ये समझाने की जरूरत नहीं है। नाजाने कितने लोगों की जान ये वायरस अब तक ले चुका है और रोजाना काफी संख्या में लोग इससे संक्रमित भी हो रहे हैं। मौजूदा समय में पूरी दुनिया में लगभग रोजाना 5 लाख से ज्यादा कोरोना केस सामने आ रहे हैं, जो हर किसी के लिए चिंता का विषय है। वहीं, पहले से संक्रमण की जबरदस्त मार झेल चुका चीन एक बार फिर से कोरोना की लहर का सामना कर रहा है। ऐसे में हर किसी के लिए ये चिंता का विषय है, क्योंकि कोरोना काफी खतरनाक वायरस है। इन सबके बीच कोरोना को लेकर ब्रिटेन का एक नया अध्ययन सामने आया है, जो बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि इसमें दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमण का असर व्यक्ति के दिमाग पर 20 साल तक बना रह सकता है। तो चलिए आपको इस अध्ययन के बारे में बताते हैं। आप अगली स्लाइड्स में इसके बारे में जान सकते हैं... किसने किया है ये अध्ययन? • दरअसल, कोरोना पर हुए इस अध्ययन को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों की एक टीम ने किया है। ये अध्ययन हर किसी को चौंका रहा है, क्योंकि इसमें कई ऐसी बातें सामने जो आई हैं। क्या कहती है स्टडी? • दरअसल, वैज्ञानिकों द्वारा किया गया ये अध्ययन बताता है कि कोरोना का असर 10 आईक्यू अंक खोने के बराबर है। वहीं, रिसर्च ये भी दावा करती है कि कोरोना संक्रमण एक स्थाई संज्ञानात्मक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। साथ ही इसमें दावा किया गया है कि कोरोना संक्रमण का व्यक्ति के दिमाग पर 20 साल तक असर रह सकता है। • अध्ययन ये भी बताता है कि कोरोना संक्रमण एक स्थाई संज्ञानात्मक और मानसिक स्वास्थ्य यानी दिमागी समस्याओं का कारण भी बन सकता है। वहीं, कोरोना से संक्रमित मरीजों में संक्रमण के बाद भी नींद की दिक्कत, थकान होना, शब्दों को याद करने में दिक्कतें, चिंता और पोस्ट-टॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। कितने लोगों पर हुआ अध्ययन? • वैज्ञानिकों ने कोरोना के 46 मरीजों के डाटा पर अध्ययन किया, जो अस्पताल में भर्ती थे। वहीं, इनमें से 16 कोरोना मरीजों को आईसीयू में रखा गया था। पहले इन मरीजों को मार्च से जुलाई 2020 तक अस्पताल में भर्ती किया गया और फिर संक्रमण के 6 महीने बाद इन पर कॉग्निट्रॉन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर टेस्ट कराए गए। • ये सभी टेस्ट, ध्यान, मेमोरी और तर्क, अवसाद और अन्य तनाव संबंधित विकारों जैसे मानसिक पहलुओं को मापने वाले थे। जो मरीज आईसीयू में भर्ती थे, उन पर कोरोना का ज्यादा असर देखा गया। अध्ययन के मुताबिक, कोरोना संक्रमण के 6 महीने से ज्यादा समय के बाद भी प्रभावों का पता लगाया जा सकता है। (नोट : ये खबर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गए एक शोध के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।)

Published / 2022-05-02 10:09:10
कोरोना : नये मरीज 5% घटे, लेकिन आज भी 3000 के पार केस

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना के मोर्चे पर थोड़ी चिंता थोड़ी राहत की खबर है। सोमवार को एक बार फिर 3000 से ज्यादा मरीज मिले। हालांकि पिछले तीन दिनों से नए मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की जा रही है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि पिछले 24 घंटों के अंदर 3157 नए मामले दर्ज किए गए और 26 लोगों को कोरोना की वजह से जान गंवानी पड़ी। बीते 24 घंटे में कोरोना से 2,723 लोग ठीक हुए हैं। इसके साथ ही एक्टिव केसों की संख्या अब 19500 हो गई है। इससे पहले रविवार को 3,324 केस सामने आए थे। शनिवार को 3,688, शुक्रवार को 3377 और गुरुवार को 3,303 केस मिले थे। सोमवार को बताई गईं 26 मौतों में 21 वो हैं, जो केरल में पिछले दिनों हुईं। लेकिन आंकड़ा अब अपडेट किया गया है। सोमवार को हेल्थ मिनिस्ट्री की बेवसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, एक्टिव केसों में एक दिन पहले के मुकाबले 408 को बढ़ोतरी हुई है। राज्यों में एक्टिव केसों का आंकड़ा देखें तो सबसे ज्यादा केस दिल्ली में ही मिले हैं। राजधानी में एक्टिव केस अब 5997 हो गए हैं, पिछले 24 घंटों में इसमें 281 की बढ़ोतरी हुई है। उसके बाद यूपी, हरियाणा और बंगाल का नंबर है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बताया गया कि देश में अब तक कोरोना से 4,25,38,976 लोग ठीक हो चुके हैं। कोरोना के नए केसों में सबसे ज्यादा उछाल 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में देखा जा रहा है। गनीमत ये है कि ज्यादातर राज्यों में कोरोना के नए मरीजों की संख्या हफ्ते में 1000 से कम ही है। हेल्थ मिनिस्ट्री के मुताबिक, देश में अब तक 5,23,869 लोगों की मौत कोरोना की वजह से हो चुकी है। मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देशभर में वैक्सीन की कुल 1,89,23,98,347 करोड़ खुराक लोगों को दी जा चुकी है। पिछले 24 घंटों में देश में 4,02,170 लोगों को लगाई गईं। राजधानी से सटे गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिले में कोविड-19 के नए मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए धारा 144 को 31 मई तक बढ़ा दिया है। खुले में पूजा और नमाज पर भी रोक लगा दी गई है। यह फैसला त्योहारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए लिया गया है।

Published / 2022-05-01 15:05:32
स्टडी में खुलासा- ओमिक्रॉन के 2 नए वेरिएंट्स तेजी से कर सकते हैं संक्रमित

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना वायरस के वेरिएंट ओमिक्रॉन के दो नए सब वेरिएंट इम्युनिटी को नुकसान पहुंचाकर फिर से लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। एक स्टडी में दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है। उन्होंने कहा कि इन सब वेरिएंट के कारण कोरोना की नई लहर देखने को मिल सकती है। हालांकि इन वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि कोविड-19 वैक्सीन ले चुके लोगों के संक्रमित होने की संभावना कम है। कई संस्थानों के वैज्ञानिक Omicron के BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट की जांच कर रहे हैं – जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले महीने अपनी निगरानी सूची में जोड़ा था। उन्होंने पिछले साल के अंत में पहली बार ओमाइक्रोन से संक्रमित 39 लोगों के ब्लड सैंपल लिए थे। इस अध्ययन में यह सामने आया है कि टीके लगवा चुके लोगों में करीब 5 गुना अधिक न्यूट्रलाइजेशन क्षमता दिखाई दी। वहीं वैक्सीन नहीं लेने वाले लोगों के सैंपल में Omicron के मूल वेरिएंट BA.1 की तुलना में BA.4 और BA.5 के संपर्क में आने पर एंटीबॉडीज पर गहरा असर पड़ा और टीका लगा चुके लोगों की तुलना में यह तीन गुना कम थी। भारत में बीते 24 घंटों में कोविड-19 संक्रमण के 3324 नए मामले, एक्टिव केस बढ़कर 19000 के पार : ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि दक्षिण अफ्रीका में कोरोना की 5वीं लहर आ सकती है। अधिकारियों और वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को कहा कि ओमिक्रॉन के BA.4 और BA.5 सब वेरिएंट के कारण कोरोना वायरस संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। इस स्टडी में कहा गया है कि ओमिक्रॉन के ये दो सब वेरिएंट कोरोना की नई लहर को जन्म देने की क्षमता रखते हैं।

Published / 2022-05-01 14:58:45
कोरोना : 24 घंटे में मिले 3324 नए संक्रमित, एक्टिव केस 19,000

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में एक दिन में कोरोना वायरस के 3,324 नए मामले सामने आने से देश में covid-19 से अब तक संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या बढ़कर 4,30,79,188 हो गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को यह जानकारी दी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से रविवार सुबह 8 बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत में संक्रमण से 40 और मरीजों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 5,23,843 पर पहुंच गई है। वहीं, देश में covid-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 19,092 हो गई है, जो कुल मामलों का 0.04 प्रतिशत है। पिछले 24 घंटे में उपचाराधीन मरीजों की संख्या में 403 की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, संक्रमण से उबरने की राष्ट्रीय दर 98.74 प्रतिशत है। आंकड़ों के अनुसार, संक्रमण की दैनिक दर 0.71 प्रतिशत और साप्ताहिक दर 0.68 प्रतिशत है। देश में अभी तक कुल 4,25,36,253 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं और covid-19 से मृत्यु दर 1.22 प्रतिशत है। वहीं, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक covid-19 रोधी टीकों की 189.17 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी हैं।

Published / 2022-04-30 16:25:02
चीन में मिला इंसानों में H3N8 बर्ड फ्लू का पहला केस, 4 साल का बच्चा संक्रमित

एबीएन हेल्थ डेस्क। पहली बार इंसानों में बर्ड फ्लू एवियन इन्फ्लुएंजा के H3N8 स्ट्रेन मिलने से दुनिया भर में हड़कंप मच गया है। कोरोना महामारी का कहर झेल रहे लोग अब इस नई बीमारी को लेकर खौफजदा है। चीन में चार साल का एक बच्चा इस स्ट्रेन से संक्रमित पाया गया है। उसे इसी महीने बुखार व अन्य लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चीन के नैशनल हेल्थ कमिशन (NHC) की ओर से जारी बयान के अनुसार, बच्चे का परिवार घर पर मुर्गियां पालता था। पूरा परिवार ऐसे इलाके में रहता था जहां जंगली बत्तखों की भरमार है। बयान में कहा गया कि बच्चे को सीधे पक्षियों से संक्रमण मिला और स्ट्रेन में इंसानों को प्रभावी रूप से संक्रमित करने की क्षमता नहीं मिली। बच्चे के करीबी लोगों में भी किसी तरह की कोई दिक्कत नहीं पाई गई। NHC के अनुसार, यह "क्रॉस-स्पीशीज ट्रांसमिशन" का दुर्लभ केस है और बड़े पैमाने पर प्रसार का खतरा कम है। हालांकि, पब्लिक को मृत या बीमार पक्षियों से दूर रहने को कहा गया है। अगर बुखार या सांस से जुड़ी कोई दिक्कत महसूस हो तो फौरन मेडिकल सहायता लेने की सलाह दी गई है। आइए इस वायरस के बारे में और विस्तार से जानते हैं। जानें क्या है न्फ्लुएंजा H5N1 और कितना है खतरनाक : विशेषज्ञों के अनुसार एवियन इन्फ्लुएंजा H5N1 वायरस यानी बर्ड फ्लू आमतौर पर पक्षियों में होने वाला रोग है। लेकिन कभी-कभी यह इंसानों में भी आ सकता है। उस स्थिति में टिपिकल फ्लू वाले लक्षण ही होते हैं। यह पक्षियों से इंसानों में तब आता है जब इंसान और वायरस से बीमार पक्षी के बीच लंबे समय तक करीबी संपर्क हो। ऐसे में जो पॉल्ट्री फॉर्म वाले हैं, विक्रेता हैं और या फिर उनके साथ रहने वाले हैं, उनको बर्ड फ्लू होने के चांस रहते हैं। इसके अलावा अगर पक्षी का बिना पका या अधपका मीट खाते हैं तो भी इसके होने की संभावनाएं रहती हैं। खास बात यह है कि यह इंसानों से इंसानों में आसानी से नहीं फैलता। इंसानों पर प्रभाव : सभी एवियन इन्फ्लुएंजा वायरस इंसानों को संक्रमित नहीं करते हैं। लेकिन, इनमें से कुछ इंसानों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकते हैं। एवियन इन्फ्लुएंजा H5N8 वायरस, जिसे आमतौर पर बर्ड फ्लू के नाम से जाना जाता है, उनमें से एक है। यह हमारे फेफड़ों, नाक और गले पर अटैक करता है। यह सांस से जुड़ी एक संक्रामक बीमारी है और इसके लक्षण सामान्य जुकाम की तरह होते हैं। अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (CDC) के अनुसार, ऐसे वायरस आमतौर पर लोगों को संक्रमित नहीं करते। हालांकि इंसानों में संक्रमण के दुर्लभ मामले पहले भी सामने आए हैं। ज्यादातर संक्रमण H7N9 और H5N1 स्ट्रेन से होते हैं। भारत में बर्ड फ्लू के मामले : देश में इसी साल फरवरी में महाराष्ट्र से बर्ड फ्लू (H5N1) के मामले सामने आए थे। इसके अलावा बिहार के सुपौल में भी पॉल्ट्री रिसर्च फॉर्म में इसके केस मिले थे। पिछले साल दिल्ली में H5N1 से संक्रमित 11 साल के एक बच्चे की मौत हो गई थी। जनवरी 2021 में कई राज्यों के हजारों पक्षियों में बर्ड फ्लू कन्फर्म हुआ था। प्रोटोकॉल कहता है कि केस मिलने पर प्रभावित इलाकों के एक किलोमीटर की रेडियस में सभी पॉल्ट्री पक्षियों और अंडों को नष्ट कर दिया जाता है।

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