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Published / 2022-06-07 10:37:54
न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका के मरीज का मेदांता में हुआ सफलतापूर्वक इलाज

टीम एबीएन, रांची। मेदांता अस्पताल रांची में न्यूरोलॉजी विभाग के डॉ कुमार विजय आनंद ने दुर्लभ बीमारी न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका (एनएमओ) का इलाज दवाओं से करने में कामयाबी हासिल की है। उनकी यह कामयाबी इसलिए भी बड़ी है कि जो मरीज इसे लेकर उनके पास आया था उसमें बीमारी से संबंधित लक्षण स्पष्ट नहीं थे ऐसे में इस बीमारी की पहचान मुश्किल थी। दवाओं से मरीज को ठीक करने के बाद डॉ कुमार विजय आनंद ने कहा कि इस बीमारी के लक्षण की पहचान कर जल्द इलाज शुरू करना एवं जरूरी टेस्ट कराना महत्त्वपूर्ण है। ऑटोइम्यून डिजीज है न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका (एनएमओ) केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जो मस्तिष्क, आंखों और रीढ़ की नसों को मुख्य रूप से प्रभावित करता है। इस बीमारी में शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, जिससे वह शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं और प्रोटीन ( AQP4 ) को बाहरी मानकर शरीर में एंटीबॉडी का निर्माण कर मस्तिष्क, आंखों और रीढ़ की नसों पर हमला करने लगता है। इस दुर्लभ बीमारी और केस के बारे में मेदांता रांची के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ कुमार विजय आनंद कहते हैं कि झारखंड के सुदूर ग्रमीण इलाके से आए 46 वर्षीय मरीज को ब्रेन स्ट्रोक जैसी स्थिति में भर्ती किया गया था। मरीज को चक्कर, लगातार हिचकी और उल्टियां हो रही थी। इसके साथ ही मरीज के शरीर का पूरा बायां भाग लकवा ग्रस्त हो चुका था। जांच के बाद मरीज में न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका (एनएमओ) बीमारी का पता चला। इस बीमारी की पहचान करना मुश्किल होता है। इस मरीज में ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण थे, जिससे इसकी पहचान करना और भी मुश्किल था। आमतौर पर इसका प्रमुख लक्षण है - आंखों की रोशनी चले जाना, हमेशा सुस्ती बना रहना, चलने- फिरने में असंतुलन की स्थिति, लगातार हिचकी आना, उल्टियां होना, लकवा की शिकायत आदि। इस बीमारी में मरीज के प्रतिरक्षा तंत्र मे असंतुलन हो जाती है औऱ नसों को नुकसान करने वाले एंटीबॉडी से मरीज की मस्तिष्क और स्पाइन की कोशिकाएं नष्ट होने लगती है और इसका दुष्प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। मरीज की जान बचाने के लिए इलाज जरूरी था : डॉ कुमार विजय आनंद ने बताया कि 46 वर्षीय इस मरीज में न्यूरोमाइलाइटिस ऑप्टिका के पूरे लक्षण मौजूद नहीं थे इसलिए इनकी बीमारी की पहचान करना मुश्किल था और इसके बाद मरीज को जीवन भर की अपंगता से बचाने के लिए इसका सही इलाज जरूरी था। मरीज के परिजनों ने आर्थिक दिक्कतों के कारण IVIG और प्लाज्माफेरेसिस जैसे इलाज कराने से मना कर दिया गया। ऐसी परिस्थितियों में हमने मरीज को हाई डोज स्टेरॉइड और कुछ एडवांस इमुनोमोडुलेटर टैबलेट्स देकर ठीक किया है। दूसरी बार जब मरीज फॉलोअप में आया तो उसके स्वास्थ्य में काफी सुधार पाया गया।

Published / 2022-06-05 08:17:39
DCGI ने COVID-19 बूस्टर डोज के रूप में CORBEVAX को दी मंजूरी

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी के बीच ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने बूस्टर डोज के रूप में CORBEVAX वेक्सीन को मंजूरी दे दी है। इससे पहले DCGI ने बायोलॉजिकल ई के कोर्बेवैक्स का उपयोग 12 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। अब DCGI ने 18 और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दे दी है। बायोलॉजिकल ई ने मई में निजी टीकाकरण केंद्रों के लिए माल और सेवा कर सहित कॉर्बेवैक्स की कीमत 840 प्रति खुराक से घटाकर 250 कर दिया था। बीई ने कॉर्बेवैक्स के विकास में टेक्सास चिल्ड्रन हॉस्पिटल और बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के साथ कोलॉबोरेट किया था। टीकाकरण के लिए EUA प्राप्त करने से पहले, कंपनी ने कहा कि उसने 5 से 12 और 12 से 18 आयु वर्ग के 624 बच्चों में चरण दो और तीन में सेंट्रल क्लीनिकल ट्रायल किए हैं। जब मार्च में कॉर्बेवैक्स को 12 से 14 साल के समूह के लिए लॉन्च किया गया था, तो जैविक ई की प्रबंध निदेशक महिमा दतला ने संकेत दिया था कि उनके टीके की सामर्थ्य उन प्रमुख लक्ष्यों में से एक था, जिसके लिए उन्होंने काम किया था।

Published / 2022-06-04 13:24:52
अब युवाओं में भी हार्ट अटैक के केस बढ़ा रही खराब जीवनशैली

टीम एबीएन, रांची। भारतीय युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल के कुछ दिनों में कई सेलिब्रिटीज की मौतें इसके कारण हो चुकी है। दक्षिण भारतीय अभिनेता पुनीत राजकुमार, बिग बॉस फेम सिद्धार्थ शुक्ला और अब मशहूर सिंगर केके की मौत का कारण हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट बताया जा रहा है। एक स्टडी बताती है कि अगर आप 50 साल की उम्र पार कर चुके भारतीय हैं, तो आपको 20 प्रतिशत हार्ट की समस्या हो सकती है। इसका कारण खराब लाइफस्टाइल और अन्य बीमारियां हो सकती है। भारत में पूरी दुनिया की तुलना हार्ट की बीमारी एक दशक पहले शुरू हो जाती है। भारतीय शहरी युवाओं हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण मानसिक तनाव है। मेदांता अस्पताल रांची के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ नीरज प्रसाद कहते हैं कि पहले हृदय से जुड़ी बीमारियों को बुढ़ापे की बीमारी माना जाता था लेकिन अब माना जाता है कि किसी भी उम्र में यह हो सकती है। हार्ट अटैक के विभिन्न कारण होते हैं। हाई लिपिड प्रोफाइल, विशेषकर हाई कोलेस्ट्रॉल, हाइपरटेंशन और डायबिटीज के रोगियों को यह बीमारी हो सकती है। अनुवांशिक होना भी एक कारण है। यह है हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट : हार्ट अटैक एक ब्लड सर्कुलेशन प्रॉब्लम है। जब हार्ट मसल्स तक ब्लड सर्कुलेशन ब्लॉक हो जाता है या ठीक से नहीं पहुंचता या लंबे समय तक इसकी सप्लाई नहीं होती तो हार्ट मसल्स डैमेज हो जाती हैं। जिसके परिणामस्वरूप हार्ट अटैक आया है। वहीं जब व्यक्ति का हार्ट पंपिंग करना बंद कर देता है, बॉडी में ब्लड सर्कुलेशन रूक जाता है और व्यक्ति सामान्य तरीके से सांस नहीं ले पाता तो कार्डिएक अरेस्ट यानि हार्ट फेल हो जाता है। हार्ट अटैक और कार्डिएक अरेस्ट दोनों में ही इमरजेंसी सिचुएशन होती है। इससे बचने के लिए अच्छी जीवनशैली अपनायें : मेदांता अस्पताल रांची के हृदयरोग विशेषज्ञ कहते हैं कि कम उम्र में हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट आने का सबसे बड़ा कारण खराब जीवनशैली है। इसलिए इससे बचना चाहते हैं तो एक अच्छी जीवनशैली को अपनाएं। स्मोकिंग से दूर रहें। डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों वाले लोगों को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। आहार में वसा और चीनी कम लें। इसके साथ ही नियमित रूप से व्यायाम करें।

Published / 2022-06-03 12:50:06
नये वैरिएंट्स पर कितनी असरदार है वैक्सीन, क्या हर साल होगा टीकाकरण...

एबीएन सेंट्रल डेस्क। वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना महामारी सभी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। पिछले दो साल से जारी संक्रमण में वायरस के कई तरह के नए वैरिएंट्स देखने को मिले है, इनमें से कुछ की प्रकृति भी एक दूसरे से भिन्न देखी गई है। कोरोना के उभरते नए वैरिएंट्स से बचाव के लिए वैज्ञानिक दो डोज वाली वैक्सीन के बाद लोगों को बूस्टर शॉट देने की सलाह देते हैं, इससे शरीर में नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए मजबूत प्रतिरक्षा विकसित करने में मदद मिलती है। हालांकि जिस तरह से एक के बाद एक, कोरोना वायरस के नए-नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं, इसने विशेषज्ञों की चिंता को और बढ़ा दिया है। असल में महामारी की शुरुआत में कोरोना वायरस के मूल रूप को ध्यान में रखते हुए टीके तैयार किए गए थे, हालांकि समय के साथ वायरस में हुए म्यूटेशन ने इन टीकों की प्रभाविकता को कम कर दिया है। इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए हाल के शोध के आधार पर वैज्ञानिकों की एक टीम का कहना है कि आने वाले समय में वैक्सीनेशन में अपडेशन की आवश्यकता हो सकती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि जिस तरह से कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स उभर रहे हैं, ऐसे में भविष्य में कोविड-19 बूस्टर शॉट्स के लिए नए फॉर्मूलेशन की आवश्यकता होगी। आइए जानते हैं वैज्ञानिकों का इस संबंध में और क्या कहना है? टीके प्रभावी, पर समय के साथ अपडेशन की जरूरत : विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 से बचाव के लिए प्रयोग में लाए जा रहे टीके अब भी नए वैरिएंट्स से होने वाले संक्रमण के गंभीर मामलों और इसके कारण होने वाली मौत से सुरक्षित रखने में सहायक हैं। पर जिस तरह से अधिक संक्रामक नए वैरिएंट्स सामने आ रहे हैं साथ ही समय के साथ लोगों की प्रतिरक्षा कम होती जाती है, ऐसे में हमें टीकों में अपडेशन को लेकर विचार करना चाहिए। टीकों के नए फॉर्मूलेशन और अपडेशन का मतलब नए वैरिएंट्स की प्रकृति के आधार पर इसमें बदलाव और वैक्सीन की तीन या चार खुराक देने की आवश्यकता से है। बार-बार वैक्सीनेशन की होगी जरूरत : वायरस के प्रति टीकों की प्रतिरोधक क्षमता को लेकर अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक ने बताया कि अक्सर यह पूछा जाता रहा है कि भविष्य में लोगों को कितनी बार टीके देने की आवश्यकता हो सकती है? फिलहाल तो यह समझना आवश्यक है कि कोई ऐसा पैरामीटर नहीं है जिसके आधार पर यह तय किया जा सके कि आगे कौन सा नया वैरिएंटस आएगा और भविष्य में ये वैक्सीन, लोगों को सुरक्षित रखने में कितनी सहायक होंगी? इस सवाल के बारे में सिर्फ इतना कहा जा सकता है कि वायरस में म्यूटेशन के साथ हमें वैक्सीन के अपडेशन की जरूरत पर ध्यान देना होगा। इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 की प्रकृति : वैज्ञानिकों का कहना है कि वायरस में म्यूटेशन और उस आधार पर वैक्सीनेशन की जरूरत को समझने के लिए इन्फ्लुएंजा वायरस एक उदाहरण है। यह संक्रमण बार-बार देखने को मिलता रहा है। हर साल विशेषज्ञ इस संक्रमण के कारण होने वाली गंभीर बीमारी के जोखिम को कम करने के लिए फ्लू शॉट के सर्वोत्तम फॉर्मूलेशन को लाने का प्रयास करते हैं। कोरोना के मामले में भी हमें इसी तरह की जरूरत हो सकती है। वैसे तो इन्फ्लूएंजा और सार्स-सीओवी-2 वायरस की प्रकृति अलग-अलग हैं, पर इन्फ्लूएंजा की तरह ही कोरोना वायरस में हो रहे अपडेशन के साथ-साथ वैक्सीन की प्रभाविकता को ध्यान में रखने की आवश्यकता है। वैक्सीन अपडेशन की आवश्यकता : वैज्ञानिकों का कहना है कि सार्स-सीओवी-2 का प्रसार जारी है और इसके एंडमिक होने की संभावना है। ऐसे में यह संभव है कि लोगों को निकट भविष्य के लिए समय-समय पर बूस्टर शॉट्स की आवश्यकता हो सकती है। वायरस खुद में म्यूटेशन करके आसानी से मानव कोशिकाओं में प्रवेश कर लेता है, जबकि हमारे पास अभी वायरस के मूल स्ट्रेन के आधार पर ही टीके हैं। टीके आपके शरीर को एक विशेष स्पाइक प्रोटीन को पहचानने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, चूंकि वायरस का स्पाइक प्रोटीन समय के साथ बदलता जा रहा है, ऐसे में इससे सुरक्षा के लिए हमें वैक्सीनेशन में समय के साथ नए फॉर्मूलेशन की आवश्यकता पर जोर देना होगा। (नोट : यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।)

Published / 2022-06-01 16:47:27
मुंबई : 8.4% पर कोविड पॉजिटिविटी रेट, फिर सतर्कता की जरूरत

एबीएन हेल्थ डेस्क। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आज फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां पिछले 24 घंटों में 739 नए केस दर्ज हुए हैं, जो कि कल आए मामलों से ज्यादा है। इसके साथ ही मुंबई में कोविड पॉजिटिविटी रेट बढ़कर 8.4% पर पहुंच गया है। जबकि मंगलवार को यह दर 6 फीसदी थी। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच बीएमसी ने टेस्टिंग बढ़ाने के निर्देश दिए हैं और इसके लिए युद्ध स्तर पर काम करने की जरूरत बतलाई। शहर में इस साल 1 फरवरी के बाद से बुधवार को सबसे ज्यादा कोविड के 739 केस सामने आए हैं। इस बीच बीएमसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि मॉनसून के नजदीक होने के कारण अब कोविड-19 केस में तेजी से वृद्धि देखने को मिल सकती है। कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए बीएमसी ने टेस्टिंग बढ़ाने और अस्पतालों को अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया है। साथ ही 12-18 साल के आयु वर्ग की कैटेगरी में टीकाकरण अभियान और बूस्टर डोज को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कहा है। वहीं मुंबई में अस्पतालों के आईसीयू में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में अचानक से उछाल देखने को मिला है। अप्रैल की तुलना में मई में कोविड महामारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में 231 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सोमवार तक, शहर के अस्पतालों में 215 मरीज दाखिले हुए, जबकि अप्रैल में ऐसे मरीजों की तादाद सिर्फ 65 थी। हाल ही में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि महाराष्ट्र के उन जिलों के लोगों को मास्क लगाने समेत तमाम सावधानी बरतनी चाहिए, जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले रोजाना बढ़ रहे हैं। वहीं मुंबई में ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट BA.4 के चार और BA.5 के तीन मरीज मिले हैं। इससे चिंता और बढ़ गई है क्योंकि ये सब वेरिएंट अति संक्रामक माने गए हैं।

Published / 2022-05-24 17:24:08
USFDA का होल्ड हटते ही भारत बायोटेक की Covaxin की डोज फिर से जल्द शुरू होगी

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत बायोटेक ने घोषणा की है कि कोवैक्सिन डोज का वैक्सीनेशन फिर से शुरू होगा। कंपनी ने ट्वीट किया कि फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा कोवैक्सिन के 2/3 फेज के क्लिनिकल ट्रायल पर रोक हटने के बाद अमेरिका में यह डोज फिर से शुरू हो जाएगी। Covaxin को भारत में वयस्कों में इस्तेमाल के लिए अप्रूव (मंजूर) किया गया है और इसे 25 देशों में इमरजेंसी में इस्तेमाल के लिए भी ऑथोराइज किया गया है जबकि EUA के आवेदन 60 से अधिक अन्य देशों में लंबित (पेंडिंग) हैं। हालांकि Covaxin कई बार डिले और रिजेक्शन में शामिल रही है। कोवैक्सिन को कब और क्यों होल्ड पर रखा गया था? 12 अप्रैल 2022 को USFDA ने भारत बायोटेक के COVID-19 वैक्सीन Covaxin के फेज 2/3 के क्लिनिकल ट्रायल पर रोक लगा दी थी। Covaxin के लिए US और कनाडा के लिए भारत बायोटेक के पार्टनर Ocugen Inc की एक प्रेस रिलीज के मुताबिक Covaxin मैन्युफैक्चरिंग प्लांट पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की टिप्पणियों के बाद इसे अस्थाई रूप से रोकने का FDA का निर्णय अमेरिकी फर्म के निर्णय पर आधारित था। WHO ने क्या कहा : विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 2 अप्रैल 2022 को जारी एक बयान में संयुक्त राष्ट्र की खरीद एजेंसियों के माध्यम से भारत बायोटेक द्वारा प्रोड्यूस कोवैक्सिन की आपूर्ति के निलंबन की पुष्टि की थी। WHO ने अपने बयान में कहा, यह निलंबन डब्ल्यूएचओ के बाद के EUL निरीक्षण (14-22 मार्च, 2022) के परिणामों और भारत बायोटेक के विनिर्माण संयंत्रो में जीएमपी (GMP- Good Manufacturing Practice) की कमियों की पहचान के चलते किया गया, जिन्हें दूर करने के लिए इसे अपग्रेड करने की जरूरत है। निर्यात के लिए उत्पादन ठप होने से कोवैक्सिन की आपूर्ति बाधित होगी। Covaxin को WHO से इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) में देरी का भी सामना करना पड़ा। 9 जुलाई 2021 को भारत बायोटेक ने इमरजेंसी यूज लिस्टिंग के लिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट (दस्तावेज) जमा किए। WHO ने Covaxin पर और सवाल उठाए और उनके स्पष्टीकरण के लिए भारत बायोटेक को वो प्रश्न भेजे गए हैं। जब इमरजेंसी यूज लिस्टिंग (EUL) में वैक्सीन को मंजूरी देने की बात आती है तो WHO का एक प्रोसीजर निर्धारित होता है। यह मैन्युफैक्चरर के एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI), WHO और मैन्युफैक्चरर के बीच पूर्व-सत्र बैठक, WHO द्वारा समीक्षा के लिए डोजियर की स्वीकृति, मूल्यांकन की स्थिति पर निर्णय और स्वीकृति पर अंतिम निर्णय के साथ शुरू होता है। जब कोवैक्सिन की बात आती है तो WHO ने भारत बायोटेक के EoI को यह कहकर खारिज कर दिया कि और जानकारी की जरूरत है। रिजेक्शन और डिले की टाइमलाइन : • 19 अप्रैल 2021 को हैदराबाद स्थित कंपनी ने अपना एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट प्रोवाइड करके WHO की मंजूरी के लिए आवेदन किया। • 9 जुलाई 2021 को भारत बायोटेक ने इमरजेंसी यूज लिस्टिंग के लिए सभी जरूरी डॉक्यूमेंट जमा किए। • भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ कृष्णा ईला ने इसकी पुष्टि भी की। इससे ठीक पहले कंपनी की सह-संस्थापक और संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा ईला ने कहा कि WHO की मंजूरी लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया नहीं होगी ऐसी उन्हें उम्मीद है। • 10 जून 2021 को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अमेरिका में Covaxin के EUA के लिए Ocugen Inc के प्रपोजल को रिजेक्ट कर दिया। • FDA ने भारत बायोटेक के प्रस्ताव को इसलिए खारिज कर दिया क्योंकि कंपनी ने इस साल मार्च से आंशिक परीक्षण डेटा (पार्शियल ट्रायल डेटा) जमा किया था। Ocugen Inc भारत बायोटेक का पार्टनर है, जो अमेरिकी मार्केट के लिए Covaxin को को-डेवलप कर रहा है। इसने घोषणा की कि वह अब भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के लिए इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन (EUA) के बजाय अमेरिका में इस्तेमाल के लिए टीके को पूर्ण मंजूरी दिलाने की ओर बढ़ेंगे।

Published / 2022-05-24 10:33:47
बेहतर जीवनशैली अपना कर हार्ट फेल्योर से बच सकते हैं : डॉ मुकेश अग्रवाल

टीम एबीएन, रांची। हार्ट फेल्योर एक ऐसी बीमारी है जिसमें दिल द्वारा ब्लड पम्प करने की क्षमता कम हो जाती है या फिर दिल में पर्याप्त मात्रा में ब्लड भर नहीं पाता है। ऐसे में मरीज के शरीर को पर्याप्त मात्रा में ब्लड नहीं मिल पाता है, जिससे मरीज को दैनिक दिनचर्या में तकलीफ तो होती ही है साथ ही मरीज की जान भी जा सकती है। ये बातें मेदांता अस्पताल रांची के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ मुकेश अग्रवाल ने बताई। हार्ट फेल्योर की बीमारी पर बात करते हुए डॉ मुकेश अग्रवाल कहते है कि इसका प्रमुख कारण हार्ट अटैक, कार्डियोमायोपैथी, जन्मजात हार्ट की बीमारी, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, दिल का अनियंत्रित धड़कना, गुर्दा की बीमारी, मोटापा है। इसके साथ ही तम्बाकू, शराब या किसी नशा का सेवन करने से या वैसी दवाइयां जो दिल को नुकसान पहुंचाती हो को लेने से हार्ट का खतरा बढ़ता है। हार्ट फेल्योर के प्रमुख लक्षणों के बारे में डॉ मुकेश अग्रवाल कहते हैं कि सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ, थकावट, कमजोरी, पांव और पेट का फूलना, वजन का बढ़ना, रात में बार-बार पेशाब आना, धड़कन का बढ़ जाना, सूखी खांसी आना, भूख कम लगना और पेट भरा-भरा लगना जैसी तकलीफें हार्ट फेल्योर के शुरुआती लक्षण है। यदि हार्ट फेल्योर बहुत अधिक हो तो मरीज को बेड पर लेटने में तकलीफ होती है, लेटने पर सांस फूलने लगती है, कुछ केस में मरीज को सांस फूलने के कारण बेचैनी होती है और उसे बेड से उठना पड़ता है, खिड़की के पास जाकर सांस लेने तक की नौबत आ जाती है। ऐसे में लक्षणों को नजरंदाज नहीं करना चाहिए। लक्षण दिखते ही तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। थोड़ी भी देरी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। हार्ट फेल्योर के उपचार में डॉक्टर द्वारा मरीज को दवाएं दी जाती है, नियमित व्यायाम करने, सभी प्रकार के नशा का सेवन बंद करने, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप एवं हाई कोलेस्ट्रॉल का उचित इलाज किया जाता है। गंभीर मरीजों को हार्ट की सर्जरी कर जान बचाई जाती है। पानी एवं नमक का सेवन कम करने की जरूरत होती है। मरीज अपनी जीवनशैली को ठीक रख हार्ट फेल्योर से बच सकते है। जीवनशैली में सुधार लाने या अच्छी जीवनशैली अपनाने से इस बीमारी से बचा जा सकता है। वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश अग्रवाल बताते हैं कि मेदांता अस्पताल रांची में हार्ट के इलाज की सभी विश्व स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध हैं। अस्पताल में हार्ट से जुड़ी लगभग सभी तरह की सर्जरी हो रही है। मेदांता अस्पताल रांची में हार्ट की बीमारियों का इलाज आधुनिक तकनीक से अनुभवी चिकित्सकों द्वारा होता है। यहां हार्ट के हजारों मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है।

Published / 2022-05-23 13:02:11
मंकीपॉक्स : 12 देशों में खतरनाक रूप लेने पर डब्ल्यूएचओ ने जारी की चेतावनी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना वायरल से के बाद दुनिया में एक ओर नई बीमारी तेजी से फैल रही है। इस नी बीमारी का नाम मंकीपॉक्स है जो 12 देशों में फैल चुका है। बता दें कि दुनिया भर में मंकीपॉक्स के 92 मरीज मिल चुके हैं और ये सारे केस यूके, यूरोपीय देश, उत्तरी अमेरिका और आॅस्ट्रेलिया समेत 12 देशों में मिले हैं। वहीं इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने चेतावनी जारी की है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि जिन देशों में यह संक्रमण नहीं फैला है, वहां मंकीपॉक्स के और अधिक मामले सामने आ सकते हैं इसके अलावा मंकीपॉक्स फिजिकल कॉन्टैक्ट में आए लोगों में अधिक फैल रहा है। वहीं हऌड के आॅफिसर डेविड हेमैन के अनुसार, मंकीपॉक्स इंसानों में शारीरिक संबंध के जरिए ज्यादा फैल रहा है और इस कारण दुनिया भर में इसके मामले बढ़ रहे हैं। हऌड के मुताबिक, साउथ अफ्रीकन देशों में हर साल मंकीपॉक्स से हजारों लोग संक्रमित होते हैं। क्या है मंकीपॉक्स : यह वायरस आम तौर पर जानवरों से इंसानों में फैलता है। मंकीपॉक्स एचआइवी की तरह जूनोटिक है जो शुरू में मंकी वायरस के रूप में आया था। मंकीपॉक्स के लक्षण : बुखार, शरीर में दर्द, ठंड लगना, थकान का अनुभव के साथ चेहरे और हाथों पर दाने और घाव होना।

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