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Published / 2022-07-08 12:52:17
फिर बढ़ रहे कोविड केस, ऐसे में मास्क अनिवार्य : डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय

टीम एबीएन, रांची। कोविड के केस एक बार फिर से बढ़ रहे हैं। इस बार पूर्व की तरह पाबंदियां भी नहीं हैं। स्कूल, बाजार, दफ्तर सभी खुले हैं। ऐसे में हमें इससे बचने के लिए विशेष रूप से सावधान रहना होगा। इसके लिए जरूरी है कि कोविड के अनुरूप व्यवहार करें। मास्क जरूर लगाएं, हाथों को धोते रहें या सैनेटाइज करें और भीड़ में जाने से परहेज करें। ये बातें शुक्रवार को मेदांता अस्पताल रांची की डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि इन दिनों फिर एक बार कोविड के केस बढ़े हैं, ऐसे में इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भी अब तक वैक्सीन की बूस्टर डोज नहीं ली है और उन्हें यह मिलने का समय हो गया है तो तुरंत ले लें। बूस्टर डोज अब दूसरी डोज लेने के छह माह बाद ही मिलने लगी है। इससे गंभीर बीमारी और हॉस्पिटल में भर्ती होने का खतरा कम होगा। उन्होंने कहा कि कोविड का खतरा उन लोगों को ज्यादा होता है जिन्हें कोई क्रोनिक बीमारी है जैसे हार्ट एवं क्रोनिक लंग, किडनी कैंसर, अनियंत्रित डायबिटीज आदि। जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं ली है या इसकी डोज पूरी नहीं की है उन्हें भी खतरा है। ऐसे लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। डॉ देवदत्ता बंधोपाध्याय ने कहा कि अगर कोविड हो जाता है तो सबसे पहले खुद को आइसोलेशन में रखें। मास्क लगा कर रहें। हर छह घंटे पर अपना बुखार, आक्सीजन लेवल, हार्ट रेट चेक करते रहे। तीन दिन से ज्यादा बुखार हो, तेज सरदर्द हो, छाती में दर्द हो या सांस लेने में दिक्कत हो तो डॉक्टर से मिलकर इलाज करवाएं। उन्होंने बताया कि मेदांता अस्पताल रांची में एक ही छत के नीचे सभी तरह की बीमारियों का गुणवत्तापूर्ण इलाज होता है। यहां अनुभवी डॉक्टरों की टीम है जो अत्याधुनिक तकनीक से मरीजों का इलाज करती है।

Published / 2022-07-06 13:46:37
बूस्टर डोज : 9 महीने से घटाकर 6 महीने की तय हुई वैक्सीन की समय सीमा

एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने आज एक अहम फैसला लेते हुए 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के अंतर को मौजूदा 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। सरकार ने कोविड वैक्सीन की दूसरी खुराक और एहतियाती खुराक के बीच के अंतर को 9 महीने से घटाकर 6 महीने कर दिया है। टीकाकरण पर सरकार की सलाहकार संस्था-नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप आॅन इम्यूनाइजेशन ने दूसरी खुराक और बूस्टर डोज के बीच के अंतर को कम करने की सिफारिश की थी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को एक पत्र में कहा, निजी कोरोना टीकाकरण केंद्रों में दूसरी खुराक की तारीख से 6 महीने या 26 सप्ताह पूरे होने के बाद अब 18-59 साल के सभी लाभार्थियों को एहतियाती खुराक दी जायेगी। उन्होंने कहा कि 60 साल और उससे अधिक के लाभार्थियों के साथ-साथ स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों और फ्रंट लाइन वर्कर्स दूसरी खुराक दिए जाने के 6 महीने या 26 सप्ताह पूरा होने के बाद बूस्टर डोज ले सकेंगे।

Published / 2022-07-06 08:03:59
डेंगू-चिकनगुनिया मुक्त मादा मच्छर छोड़ेगा आईसीएमआर

एबीएन हेल्थ डेस्क। मच्छरों के कारण पनपने वाली डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से मुक्ति दिलाने की दिशा में आईसीएमआर को बड़ी कामयाबी मिली है। आईसीएमआर ने ये बीमारियां फैलाने वाले मच्छरों के खात्मे के लिए ऐसे मादा मच्छर तैयार किए हैं, जिनसे पैदा होने वाले लार्वा में इनके वायरस नहीं होंगे। आईसीएमआर-वीसीआरसी के निदेशक डॉ अश्विनी कुमार ने बताया कि हम ऐसे मादा मच्छरों को छोड़ेंगे जो नर मच्छरों के संपर्क में आकर ऐसा लार्वा पैदा करेंगे, जिनमें ये वायरस नहीं होंगे। उन्होंने बताया कि हमने मच्छर और अंडे तैयार किए हैं और उन्हें कभी भी छोड़ सकते हैं।

Published / 2022-06-30 17:14:33
देश की पहली mRNA कोरोना वैक्सीन को मिली आपात इस्तेमाल की मंजूरी

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में पहली mRNA कोविड वैक्सीन को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने आपात इस्तेमाल की अनूमति दे दी है। इस वैक्सीन को 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को दिया जा सकता है। इस वैक्सीन को पुणे की जेनोवा बायोफार्मास्युटिकल्स ने तैयार किया है। वैक्सीन को 2-8 डिग्री सेल्सियस के तापमान में रखना होगा। जेनोवा बायोफार्मास्युटिक्स लिटिमेट के सीईओ संजय सिंह ने बताया कि यह वैक्सीन कोरोना की दूसरी लहर पर आधारित है, इसका तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है। हमें इससे सुरक्षित और सक्षम नतीजे मिले हैं। हम इस वैक्सीन की शुरुआत एनटीएजीआई की अनुमति के 72 घंटे के भीतर करेंगे। हम इस वैक्सीन की 200-300 मिलियन डोज तैयार कर सकते हैं। संजय सिंह ने बताया कि लॉजिस्टिक की समस्या की वजह से यह वैक्सीन जरूरतमंद लोगों तक नहीं पहुंच सकी। वैक्सीन की कीमत अभी तय नहीं हुई है। इसको लेकर हम सरकार से बात कर रहे हैं, लेकिन वैक्सीन की कीमत प्रतिस्पर्धात्मक होगी। संजय सिंह ने बताया कि हमे पूरा भरोसा है कि यह वैक्सीन अपनी गुणवत्ता से पहचान बनाएगी और लोग इसे स्वीकार करेंगे। बता दें कि कंपनी को पहले ही सीडीएससीओ ने लाइसेंस दे रखा है, कंपनी के पास 70 लाख वैक्सीन को बेचने का टास्क है। संजय सिंह ने बताया कि अब जब हमे ईयूए प्राप्त हो गया है, हम जल्द ही इस वैक्सीन को डिलिवर कर सकते हैं। हमारी मौजूदा क्षमता 50 लाख डोज प्रति महीना है, जिसे हम जल्द ही दो-तीन गुना बढ़ा लेंगे।

Published / 2022-06-29 17:16:04
110 देशों में बढ़ रहे बीए.4 और बीए.5 के मामले, मंकीपॉक्स भी खतरनाक : डब्ल्यूएचओ महानिदेशक

एबीएन हेल्थ डेस्क। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेडरोस अदनहोम गेब्रेहेसुस ने कोरोना के बीए.4 और बीए.5 के बढ़ रहे मामलों पर चिंता जताई है। उन्होंने बुधवार को कहा कि BA4 और BA5 के मामले कुछ देशों में बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि 110 देशों में बढ़ रहे BA4 और BA5 के मामलों के कारण कुल वैश्विक मामलों में 20% की वृद्धि हुई है। इसके अलावा WHO के 6 क्षेत्रों में से 3 में कोरोना के इन सब-वैरिएंट्स के कारण मौतें बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि जबकि वैश्विक आंकड़ा अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने आगे मंकीपॉक्स को लेकर कहा कि नाइजीरिया 2017 से मंकीपॉक्स के प्रकोप से जूझ रहा है। इस साल वहां मंकीपॉक्स के अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा, मंकीपॉक्स वायरस 50 से ज्यादा नए देशों में इस वायरस के मरीज मिले थे। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही आगे भी नए देशों में मंकीपॉक्स के मामले मिलने की संभावना है।

Published / 2022-06-29 05:02:09
7-11 साल के बच्चों को लगेगी कोवोवैक्स

एबीएन हेल्थ डेस्क। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने मंगलवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविड -19 वैक्सीन कोवोवैक्स (Covovax) को 7-11 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए मंजूरी दे दी है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, डीसीजीआई ने इस उम्र के बच्चों के लिए आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी दी है। डीसीजीआई ने पिछले साल 28 दिसंबर 2021 को वयस्कों के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी। 12-17 साल की आयु के बच्चों के लिए 9 मार्च 2022 को मंजूरी दी थी। कोवोवैक्स एक प्रोटीन आधारित कोविड-19 वैक्सीन है, जिसका निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने नोवावैक्स के लाइसेंस के तहत किया गया है और यह Covax सुविधा का हिस्सा है। कोवोवैक्स एसआईआई द्वारा निर्मित दूसरा कोविड-19 वैक्सीन है, जो कोविशील्ड भी बनाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पिछले साल दिसंबर में Covovax की आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दी थी। कोवोवैक्स दो खुराक वाली वैक्सीन है। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस पर स्टोर किया जा सकता है। SII के अनुसार Covovax की प्रभावकारिता 90 प्रतिशत है। फिलहाल कोवोवैक्स की कीमत 225 रुपये है। भारत के दवा नियामक ने पहले ही 6-12 साल की उम्र के बच्चों के लिए भारत बायोटेक के कोवैक्सिन, 5-12 साल के बच्चों के लिए बायोलॉजिकल ई के कोविड -19 वैक्सीन कॉर्बेवैक्स और 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ZycovD (ज़ाइडस कैडिला वैक्सीन) को मंजूरी दे दी है। सरकार ने 16 मार्च से 12-14 वर्ष की आयु के बच्चों का टीकाकरण शुरू किया। 15-18 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए टीकाकरण 3 जनवरी से शुरू हुआ।

Published / 2022-06-28 16:58:34
एक्सपर्ट की चेतावनी : चीन पर मंडराया इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 का दोहरा खतरा

एबीएन हेल्थ डेस्क। दक्षिणी चीन में एक फ्लू के प्रकोप की वजह से दवाओं की कमी हो गई है, जिसके बाद डॉक्टरों ने इन्फ्लूएंजा और कोविड-19 के दोहरे स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी दी है। एक सरकारी मीडिया रिपोर्ट में सोमवार को यह जानकारी दी गई। ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों ने कहा कि लॉकडाउन सहित लगातार कोविड-19 की रोकथाम के उपायों के कारण कमजोर सामूहिक रोग प्रतिरोधक शक्ति (हर्ड इम्युनिटी) आंशिक रूप से इन्फ्लूएंजा मामलों के असामान्य तरीके से बढ़ने के लिए जिम्मेदार हो सकती है। डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह चिंताजनक है कि इन्फ्लूएंजा से पीड़ित लोगों की संख्या सर्दियों के मुकाबले काफी अधिक है, जो आमतौर पर तब होती है जब संक्रमण ज्यादा तेजी से फैलता है। ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चाइनीज नेशनल इन्फ्लुएंजा सेंटर (सीएनआईसी) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है, 4 अप्रैल से 19 जून के बीच 17 प्रांतों में इन्फ्लूएंजा के 507 मामलों में, 503 दक्षिणी चीन में थे, जो 2021 में 136 मामलों की तुलना में काफी ज्यादा है। जब फ्लू से पीड़ितों की तादाद 10 या अधिक हो जाती है, तो उसे इन्फ्लूएंजा के प्रकोप के रूप में परिभाषित किया जाता है। चीन के 3 क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित : समाचार रिपोर्ट में कहा गया है, बड़ी मांग की वजह से ओसेल्टामिविर जैसी इन्फ्लूएंजा की एंटीवायरल दवाएं दक्षिणी चीन के कई फार्मेसियों में कम संख्या में उपलब्ध हैं। सीएनआईसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिणी चीन में दो क्षेत्र ग्वांगडोंग और गुआंग्शी ज़ुआंग स्वायत्त क्षेत्र और पूर्वी चीन में एक फ़ुज़ियान प्रांत सबसे अधिक इन्फ्लूएंजा से प्रभावित होने के साथ लिस्ट में सबसे ऊपर है। इन तीनों ही क्षत्रों में इन्फ्लूएंजा के मामले की संख्या क्रमशः 119, 79 और 109 हैं। इन्फ्लूएंजा के सबटाइप की संक्रमण दर अधिक शेनझेन अस्पताल के प्रमुख लू होंगझोउ ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि भारी बारिश, कम तापमान और कोविड -19 के खिलाफ नियंत्रण के उपाय, जिसने जनता में श्वसन संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम कर दिया, वास्तव में दक्षिणी चीन में असामान्य इन्फ्लूएंजा प्रसार में योगदान दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दक्षिण चीन में बढ़ते संक्रमणों में इन्फ्लूएंजा ए (H3N2) उपप्रकार (सबटाइप) के सबसे अधिक मामले मिले हैं, उच्च महामारी तीव्रता, उच्च संक्रमण दर और तेजी से बार-बार म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) इसकी विशेषता है। हालांकि, लू ने कहा कि इस संक्रमण से मृत्यु दर 0.2% है।

Published / 2022-06-28 04:46:55
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने सुलझायी एक्सरसाइज से वजन घटने की गुत्थी

एबीएन हेल्थ डेस्क। एक्सरसाइज शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। यह वजन को कंट्रोल करती है। मेटाबॉलिज्म को सुधारती है और बॉडी को स्ट्रॉन्ग बनाती है। पर ये सब होता कैसे है, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने यह गुत्थी सुलझा ली है। उनका कहना है, वर्कआउट में दौरान शरीर में कौन से बदलाव होते हैं जिसके कारण इंसान को फायदा पहुंचता है, इसका पता लगा लिया गया है। जानिए क्या कहती है, अमेरिकी वैज्ञानिकों की नई रिसर्च…रिसर्च करने वाले अमेरिका के स्टेनफोर्ड और बेलर कॉलेज ऑफ मेडिसिन के वैज्ञानिकों का कहना है, उन्होंने ऐसे ब्लड मॉलिक्यूल की खोज की है जिसका निर्माण एक्सरसाइज के दौरान होता है। यह ब्लड मॉलिक्यूल इंसान में खाना खाने की चाहत और मोटापा दोनों को कम करता है। नेचर जर्नल में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, रिसर्च के जरिए भूख और एक्सरसाइज के बीच के कनेक्शन को समझा गया है। शोधकर्ता डॉ यॉन्ग शू का कहना है, खासकर मोटे लोगों के रेग्युलर एक्सरसाइज करने पर उनका वजन घटता है, भूख नियंत्रण में रहती है और मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है। शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च चूहे पर की है। चूहे पर एक्सरसाइज के असर को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने उनके ब्लड प्लाज्मा की जांच की। चूहे वर्कआउट कर सकें इसके लिए उन्हें खासतौर पर ट्रेडमिल पर भागने की ट्रेनिंग दी गई थी। ब्लड में जिस मॉलिक्यूल की खोज की गई है वो अमीनो एसिड का बदला हुआ रूप है, जिसे Lac-Phe नाम दिया गया। शोधकर्ताओं का कहना है, Lac-Phe तब बनता है जब कोई लगातार एक्सरसाइज करता है और मांसपेशियों में सनसनी होती है। रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि शरीर में यह मॉलिक्यूल तब बनता है, जब इंसान स्प्रिंट एक्सरसाइज करता है। तब ब्लड में इस मॉलिक्यूल का निर्माण तेजी से होता है। इस तरह यह समझा जा सका कि एक्सरसाइज के जरिए कैसे वजन कंट्रोल होता है।

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