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Published / 2022-11-29 22:29:18
डब्ल्यूएचओ का ऐलान : अब इस नाम से जाना जायेगा मंकीपॉक्स...

एबीएन हेल्थ डेस्क। मंकीपॉक्स बीमारी को अब "एमपॉक्स" के नाम से जाना जायेगा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह ऐलान किया है। दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ विमर्श कर डब्ल्यूएचओ ने मंकीपॉक्स का नाम बदला है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ को शिकायतें मिली थीं, जिसमें मंकीपॉक्स नाम का इस्तेमाल आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियों के लिए किया जा रहा था। इसके बाद इसके नाम को बदलने पर विचार किया गया।

फिलहाल मंकीपॉक्स और एमपॉक्स दोनों ही नाम का इस्तेमाल होगा लेकिन अगले एक साल में मंकीपॉक्स नाम को पूरी तरह हटा दिया जायेगा। मंकीपॉक्स को इसका नाम इसलिए मिला क्योंकि इस बीमारी से जुड़े वायरस की पहचान सबसे पहले 1958 में डेनमार्क में शोध के लिए रखे गये बंदरों में हुई थी। हालांकि यह बीमारी कई जानवरों में पाई जाती है, और चूहों आदि जैसे रोडेन्ट्स जानवरों में खूब मिलती है। इस साल की शुरूआत में कई देशों में इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे।

यह वायरस पशुओं से फैलना शुरू हुआ और इंसानों में बहुत तेजी से फैला। 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो में पहली बार मनुष्यों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए थे। इसके बाद से इसका प्रचार मनुष्यों में मुख्य रूप से कुछ पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों तक सीमित रहा। हालांकि इस साल इसके केस भारत सहित कई देशों में भी मिले। इस साल 110 देशों से लगभग 81,107 पुष्ट मामले मंकीपॉक्स के मिले। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 55 लोगों की मौत भी दुनियाभर में इस साल मॉकीपॉक्स से हुई।
 

लक्षण


• मंकीपॉक्स चेचक की तरह होता है।
• इससे संक्रमण के 7 से 10 दिन में व्यक्ति में लक्षण दिखने लगते हैं। 
• इसमें लक्षण को तौर पर संक्रमित व्यक्ति को बुखार महसूस होता है। 
• शरीर में दर्द और थकान भी महसूस हो सकती है। यह पहला चरण है। 
• संक्रमण के दूसरे चरण में त्वचा पर कहीं-कहीं गांठ दिखने लगती हैं और चकते आ जाते हैं और फिर यही चकत्ते बडे़ दानों में बदल जाते हैं।

Published / 2022-11-28 23:00:08
स्टडी का दावा... भारत में 75% मरीजों का हाई ब्लडप्रेशर आउट ऑफ कंट्रोल, हार्ट पेशेंट्स को ज्यादा खतरा

एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में हाई ब्लडप्रेशर के एक चौथाई से भी कम मरीजों का ब्लडप्रेशर कंट्रोल रहता है। रिसर्च जर्नल ‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ’ में प्रकाशित एक स्टडी में इसका खुलासा हुआ है। हार्ट पेशेंट के लिए हाई ब्लड प्रेशर एक अहम कारक है, जो समय से पहले मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। 
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, नई दिल्ली और अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ के शोधकर्ताओं ने 2001 के बाद प्रकाशित 51 स्टडीज की डिटेल में समीक्षा की है। इसी आधार पर भारत में हाई ब्लडप्रेशर नियंत्रण की दरों का पता चला। रिसर्चर्स ने पाया कि 21 अध्ययनों (41 प्रतिशत) में महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के बीच हाई ब्लडप्रेशर के नियंत्रण की सबसे खराब दर है। 
छह अध्ययनों (12 प्रतिशत) में ग्रामीण मरीजों के बीच नियंत्रण की दर ज्यादा खराब पाई गई। इस रिसर्च स्टडी के लेखकों ने कहा, भारत में हाई ब्लडप्रेशर के एक चौथाई से भी कम मरीजों का रक्तचाप 2016-2020 के दौरान नियंत्रण में था। हालांकि, पिछले कुछ वर्ष के मुकाबले नियंत्रण दर में सुधार हुआ। रिसर्चर्स का कहना है कि हृदय रोगियों की मौत की संख्या कम करने में उच्च रक्तचाप की बेहतर नियंत्रण दर हासिल करना बेहद अहम है। कारण कि हाई ब्लड प्रेशर भारत में मौत की प्रमुख वजहों में से एक है।

Published / 2022-11-26 10:23:40
अब लीजिये... एक ही मच्छर फैला रहा है डेंगू-चिकनगुनिया

रिसर्च में हुए खुलासे ने सबको चौंकाया, सकते में लोग

एबीएन सेंट्रल डेस्क। सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है। हर दिन तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। इस बदलते मौसम में तमाम बीमारियां घेर लेते हैं। चिकनगुनिया और डेंगू के मामले भी काफी तेजी से बढ़ जाते हैं। एक रिसर्च सामने आई है, जिसके बाद मेडिकल डिपार्टमेंट भी अलर्ट हो गया है।

इस रिसर्च में बताया गया है कि एडीज एजिप्टी मच्छर एक ही समय में डेंगू और चिकनगुनिया दोनों वायरस ले जा रहा है, जिसके कारण शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में दोनों ही बीमारियों के काफी मामले सामने आ रहे हैं। पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर) वायरोलॉजी विभाग की रिसर्च टीम ने ही इसका खुलासा किया है। 

इस स्टडी ने खतरे को दोगुना बढ़ा दिया है। डेंगू और चिकनगुनिया दोनों ही घातक होता है। अगर समय पर ध्यान नहीं दिया गया तो व्यक्ति की मौत तक हो जाती है। दोनों विषाणुओं को एक साथ ले जाने वाले मच्छर के कारण लोगों को डेंगू और चिकनगुनिया दोनों के सह-संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है। यह निष्कर्ष शहर में 2022 में अब तक चिकनगुनिया के 101 मामलों के बाद आया है जोकि छह साल के उच्च स्तर में हैं। इसके अलावा डेंगू के 839 मामले सामने आये हैं।

एक ही मच्छर ने दोनों को चौंकाया
वायरोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रमुख राधाकांत राठो ने कहा कि इस मौसम के दौरान एडीज मच्छर डेंगू या चिकनगुनिया के मामले एक ही मच्छर के काटने से आ रहे हैं। अध्ययन में पाया गया कि दोनों बीमारियों वाले मच्छर के काटने से दोनों बीमारियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि डेंगू वायरस और चिकनगुनिया वायरस से होता है, जिसके परिणामस्वरूप मनुष्यों में एक समवर्ती वायरल संक्रमण हो सकता है।

डेंगू और चिकनगुनिया दोनों बीमारी फैलाता है ये एडीज

रिसर्च टीम ने बताया कि डेंगू और चिकनगुनिया के वायरस मच्छर में एक साथ प्रतिकृति बनाने में सक्षम हैं। लार के माध्यम से एक ही मच्छर के काटने में दोनों वायरस के संक्रामक कणों को शरीर में फैलाने की क्षमता रखते हैं। राठो ने कहा कि यह देखा गया है कि एडीज एजिप्टी डेंगू रोग के फैलाव के लिए प्राथमिक वेक्टर प्रजाति होती है। इसी तरह, वही मच्छर चिकनगुनिया वायरस को प्रसारित करने की क्षमता भी रखता है। कभी-कभी मच्छर दोनों संक्रमणों को एक साथ भी फैला देता है।

Published / 2022-11-24 14:43:34
हार्ट अटैक आने पर जान बचाने में सीपीआर का अहम रोल : डॉ तापस साहू, मेदांता हाॅस्पिटल रांची

टीम एबीएन, रांची। बदलते दौर में हर्ट अटैक के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अगर वक्त पर उपचार ने हो तो ये खतरनाक भी साबित हो सकता है। उम्मीद की एक किरण यह भी है कि हर्ट अटैक के खतरे से बाहर निकालने में सीपीआर एक अहम रोल निभाता है। मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू का कहना है कि अगर किसी को हर्ट अटैक आता है और वक्त पर सीपीआर दे दिया जाए तो मरीज की जीवन को बचाया जा सकता है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने बताया कि आम बोलचाल की भाषा में कार्डियोपलमनरी रिससिटेशन को सीपीआर कहा जाता है। दरअसल, यह इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिसके जरिए किसी व्यक्ति की सांस, दिल के रुक जाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है। यह हर्ट के बंद होने के बाद फिर चालू करने की प्रक्रिया है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि अगर हम किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो कुछ सावधानी भी बरतने की जरूरत होती है। जैसे कि अगर किसी को सीपीआर दे रहे हैं तो प्रति मिनट 100 - 120 सीपीआर देना चाहिए। दबाव का ख्याल रखना चाहिए। 30 सीपीआर देने के साथ ही दो बार सांस भी देना चाहिए। प्रति दो मिनट में पांच साइकिल पूरा होना चाहिए। एक साइकिल में तीस सीपीआर होना चाहिए। वो कहते हैं, सीपीआर के साथ ही डिफिब्रिलेटर मशीन की भी जरूरत पड़ती है। इससे मरीज की जान को बचाए जाने की संभावना और बढ़ जाती है। सीपीआर और ऑटोमेटिक एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर मशीन अगर मिल जाए तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।

मेदांता हॉस्पिटल रांची के क्रिटिकल केयर डिपार्टमेंट के सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर तापस साहू ने कहा कि सीपीआर देने के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित हो जाने के बाद इसे आम आदमी भी दे सकता है। पोस्ट कोविड ऐसी घटनाएं बढ़ गई है। दरअसल कोरोना फेफड़े पर असर डालने के साथ-साथ शरीर के और भी कई अंगों पर अपना दुष्प्रभाव डालता है। 
जिससे हार्टअटैक की घटनाएं बढ़ गई है। हर्ट अटैक न हो, इसके लिए खुद को भी कुछ चीजों पर ध्यान रखना होगा। अगर वजन ज्यादा है तो कंट्रोल करना होगा। मधुमेह के रोगी हैं तो भोजन संतुलित करना होगा साथ ही दवा और इन्सुलिन लेते रहना चाहिए। हरी सब्जी और फल का ज्यादा सेवन लाभदायक होगा। बीपी पर नियंत्रण रखने की जरूरत है। भोजन में तेल व वसा का जितना कम प्रयोग होगा, उतना बेहतर होगा। इसके अलावा टहलना एक बेहतर माध्यम है। सप्ताह में अगर कम से कम 150 मिनट ब्रिस्क वॉक करते हैं तो इससे खुद को फिट रखा जा सकता है।

Published / 2022-11-24 10:30:57
रांची, अहमदबाद, मलप्पुरम में खसरे के मामलों में तेजी, केंद्र की टीम सक्रिय

एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने खसरे के मामलों में वृद्धि का जायजा लेने के लिए रांची (झारखंड), अहमदाबाद (गुजरात) और मलप्पुरम (केरल) में तीन उच्च-स्तरीय बहु-विषयक 3-सदस्यीय टीमों को तैनात करने का निर्णय लिया है।
टीमें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को स्थापित करने में राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरणों की सहायता करेंगी और अपेक्षित नियंत्रण उपायों के संचालन की सुविधा प्रदान करेंगी।
तीन शहरों में रिपोर्ट किये जा रहे खसरे के बढ़ते मामलों के प्रबंधन के लिए टीमें सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों, प्रबंधन दिशा-निर्देशों और प्रोटोकॉल के संदर्भ में प्रकोप की जांच करने और राज्य के स्वास्थ्य विभागों की सहायता करने के लिए क्षेत्र का दौरा भी करेंगी। टीम क्षेत्र में सक्रिय मामलों की खोज सुनिश्चित करने के लिए राज्यों के साथ और पहचान किये गये मामलों के परीक्षण के लिए वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) के साथ भी समन्वय करेगी।
 

रांची जाने वाली केंद्रीय टीम में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (नई दिल्ली) और राम मनोहर लोहिया अस्पताल (नई दिल्ली) के विशेषज्ञ शामिल हैं। पीएचओ, मुंबई, कलावती सरन चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल (नई दिल्ली) और क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय (अहमदाबाद) के विशेषज्ञ अहमदाबाद जाने वाली केंद्रीय टीम में शामिल होंगे।

मलप्पुरम की टीम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण के क्षेत्रीय कार्यालय (तिरुवनंतपुरम), जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पुडुचेरी) और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज (नई दिल्ली) के विशेषज्ञ शामिल होंगे। वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक, परिवार कल्याण के क्षेत्रीय कार्यालय (झारखंड) गुजरात और केरल अपनी यात्राओं के संबंध में संबंधित टीमों के साथ समन्वय करेंगे।

Published / 2022-11-22 22:30:52
अब लीजिये... बीमारी एक्स बन सकती है अगली महामारी!

एबीएन हेल्थ डेस्क। कोरोना महामारी को इस सदी की सबसे बड़ी महामारी घोषित की जा चुकी है। इस वायरस की तबाही के बाद दुनियाभर में वैज्ञानिक भविष्य में आने वाली ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों में जुटे हुए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि वह रोगजनकों की एक सूची बना रहा है जो भविष्य में प्रकोप या महामारी का कारण बन सकते हैं। इन रोगजनकों को एक प्रतिउपाय के रूप में कड़ी निगरानी में रखा गया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को बताया कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मदद से ऐसे रोगाणुओं को चिह्नित किया जायेगा, जिन पर प्राथमिकता के तौर पर पहले ध्यान देने की आवश्यकता है। डब्ल्यूएचओ द्वारा रोगजनकों की पहली सूची 2017 में प्रकाशित की गई थी और अंतिम को 2018 में जारी किया गया था। संगठन अगली लिस्ट 2023 के शुरुआत में जारी कर सकता है।
वर्तमान सूची में कोविड -19, क्रीमियन-कोंग रक्तस्रावी बुखार, इबोला वायरस रोग और मारबर्ग वायरस रोग, लस्सा बुखार,मध्य पूर्व श्वसन सिंड्रोम और गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम, निपाह और हेनिपाविरल रोग, रिफ्ट वैली बुखार, जीका और रोग शामिल हैं। सभी वैज्ञानिक तथाकथित बीमारी एक्स पर भी विचार करेंगे - एक अज्ञात रोगजनक जो एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय महामारी का कारण बन सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की मुख्य वैज्ञानिक डॉ सौम्या स्वामीनाथन ने इस सूची को अनुसंधान समुदाय के लिए एक संदर्भ बिंदु कहा है ताकि वे अगले खतरे का प्रबंधन करने के लिए अपनी ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर सकें। यह लिस्ट क्षेत्र में विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार की गई है। एक वैश्विक अनुसंधान समुदाय के रूप में सब सब एकमत हैं कि उन्हें परीक्षण, उपचार और टीके विकसित करने के लिए कहां ऊर्जा और धन का निवेश करने की आवश्यकता है।

Published / 2022-11-19 23:01:37
सर्दियों में बढ़ानी है इम्यूनिटी तो लें ये खाद्य सामग्री

एबीएन हेल्थ डेस्क। रहन-सहन में बदलाव के साथ ही सर्दी का सीजन हमारे खानपान में भी कई परिवर्तन लाता है। सर्दी में जहां खाने के लिए कई सारे विकल्प मौजूद होते हैं तो वहीं बदलते माहौल की वजह से हमारी इम्यूनिटी भी कमजोर हो जाती है।
कमजोर इम्यूनिटी की वजह से इस मौसम में सर्दी, खांसी, फ्लू, गले की खराश, बुखार और संक्रमण आदि होना काफी आम बात है। इसके अलावा कोरोना संक्रमण भी अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। ऐसे में इम्यूनिटी कमजोर होने की वजह से लोग आसानी से इसकी चपेट में भी आ सकते हैं। अगर आप सर्दियों में खुद को फिट और सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो इन आदतों के जरिए अपने स्वास्थ्य का ध्यान रख सकते हैं।
घी
सर्दी में घी का सेवन शरीर के लिए काफी अच्छा माना गया है। घी का सेवन करने के लिए आप दाल और सब्जियों में छौंक लगा सकते हैं। इसके अलावा आप बने हुए खाने के ऊपर घी डालकर खा सकते हैं। घी न सिर्फ आपके खाने के स्वाद को बढ़ाएगा बल्कि आपको गर्म रखने के मदद करेगा।
लहसुन
खाने में लहसुन का सेवन सर्दियों में आपके लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। गर्म तासीर होने की वजह से लहसुन आपको गर्म रखेगा। इतना ही नहीं गर्म रखने के साथ ही लहसुन आपके शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाता है, जिससे आप इंफेक्शन से बच सकते हैं। आप सूप, चटनी या अचार के रूप में लहसुन का सेवन कर सकते हैं।
हरी सब्जियां
सर्दियों का मौसम कई तरह की सब्जियां और फल भी अपने साथ लेकर आता है। हरी सब्जियों के लिए सर्दी का मौसम काफी अच्छा माना जाता है। ऐसे में आप सर्दी में गाजर, चुकंदर, मूली और अन्य हरी सब्जियां अपने आहार में शामिल कर सकते हैं।
अदरक
अदरक भी तासीर में गर्म होती है। सर्दियों में इसके सेवन से पाचन संबंधी कोई परेशानी नहीं होती है। इसके अलावा अदरक सर्दी-जुकाम में भी काफी उपयोगी माना गया है। आप अदरक की चाय, पानी या काढ़ा आदि के जरिए इसका सेवन कर सकते हैं।
गुड़
गुड़ की तासीर भी बेहद गर्म होती है। आप गुड़ की चाय या गुड़ के लड्डू आदि बनाकर खा सकते हैं।
तिल और मूंगफली
तिल और मूंगफली भी आपको सर्दियों में फिट रखने में काफी मददगार साबित होंगे। सर्दियों में इनका सेवन काफी फायदेमंद माना जाता है। प्रोटीन से भरपूर मूंगफली आपके अंदर विटामिन बी, अमीनो एसिड और पॉलीफेनॉल की पूर्ति करेगी। वहीं, तिल के बीज आपको जरूरी फैटी एसिड और विटामिन ई देंगे, जो हड्डियों, स्किन और बालों के लिए अच्छे माने जाते हैं।

Published / 2022-11-14 21:10:54
उत्तम जीवनशैली और योग से ही आग की तरह फैलते मधुमेह पर रोक लगाना संभव : आचार्य मुक्तरथ

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व मधुमेह दिवस पर आज सत्यानन्द योग मिशन केन्द्र, एवं आरोग्य भारती के सौजन्य से सरोवर एनक्लेव, कांके रोड में मधुमेह की रोकथाम विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें आरोग्य भारती से आये विशिष्ट अतिथि डॉ देवेन्द्रनाथ तिवारी स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारक और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति कैसे हो इस पर वृहत रूप से प्रकाश डाले। उन्होंने कहा, घर के रसोईघर से लेकर आस-पास उपलब्ध वनस्पतियाँ कई बीमारियों को दूर कर सकता है। मधुमेह के रोकथाम के लिए जीवनशैली को बेहतर करने की जरूरत है। योगाभ्यास और मानसिक हल्केपन के लिए मेडिटेशन करना बहुत लाभदायक है। 
मुख्य वक्ता आचार्य मुक्तरथ जी ने मधुमेह के रोकथाम पर योग का एक विस्तृत रूपलेखा प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा आज माताओं के पास घर में  शरीरिक कार्यों को करने को कुछ नहीं है। रसोई घर में संसाधनों की कोई कमी नहीं है। जो मेहनत दादी और नानी सबेरे से साम तक करती थीं वो अब कहीं नहीं है। 
व्यायाम का अभाव और मानसकि आपाधापी मधुमेह को हर दिन बढ़ा रहा है। आग की तरह फैलते मधुमेह को रोकने के लिए हमें अपने जीवनशैली को मजबूत बनाना होगा। हर व्यक्ति को प्रतिदिन एक घण्टे योगाभ्यास,20 मिनट प्राणायाम और 10 मिनट ध्यान करने की जरूरत है। कुछ भी करें खुश होकर करें, जो उपलब्धि मिली उसमें प्रसन्नचित होकर भगवान को धन्यवाद दें।  24 घण्टे में डेढ़ घण्टा अपने स्वास्थ्य के लिए समय दें। सत्यानन्द योग मिशन का बहुत बड़ा प्रयोग स्वामी मुक्तरथ के निर्देशन में मानसिक स्वास्थ्य पर चल रहा है। 

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