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Published / 2023-01-14 09:57:19
अब लीजिये... इस कोरोना वैक्सीन से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

  • फिर भी फाइजर-बायोनटेक वैक्सीन लगाने की सलाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। इस जानलेवा महामारी से रोकथाम के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। लेकिन इन सब के बीच यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने शुक्रवार को एक ऐसी जानकारी दी है जो कि चिंताजनक है। 

दरअसल, अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि अमेरिकी दवा निर्माता फाइजर इंक और जर्मन पार्टनर बायोएनटेक के अपडेटेड बाइवेलेंट कोविड-19 शॉट  से बुजुर्गों में ब्रेन स्ट्रॉक का खतरा हो सकता है। हालांकि, फिर भी सीडीसी ने लोगों को वैक्सीन लेते रहने की सलाह दी है।

65 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए खतरा : सुरक्षा निगरानी प्रणाली ने कहा कि एक सीडीसी वैक्सीन डेटाबेस ने एक संभावित सुरक्षा मुद्दे को उजागर किया था जिसमें 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को 22-44 दिनों की तुलना में फाइजर/बायोएनटेक बाइवेलेंट शॉट प्राप्त करने के 21 दिनों के बाद इस्केमिक स्ट्रोक होने की अधिक संभावना थी। बता दें कि इस्कीमिक स्ट्रोक मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को रक्त पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका में किसी अवरोध (थक्के या एम्बोलाइ) के कारण होते हैं।

Published / 2023-01-13 11:32:38
बूस्टर डोज में कोवोवैक्स भी शामिल

  • सरकारी समिति ने की बाजार में उतारने की सिफारिश

एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश के केंद्रीय औषधि प्राधिकरण की एक विशेषज्ञ समिति ने अहम फैसला लेते हुए सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (के कोविड रोधी वैक्सीन कोवोवैक्स को बाजार में उतारने संबंधी मंजूरी दिये जाने की सिफारिश की है। यह एक बूस्टर खुराक है जो कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दोनों खुराक लेने वाले वयस्कों को ही लगायी जानी है। 

आधिकारिक सूत्रों ने कल गुरुवार को इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि एसआईआई के निदेशक (सरकारी और नियामक मामले) प्रकाश कुमार सिंह ने हाल में भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखकर कुछ देशों में कोविड-19 महामारी के बढ़तों मामलों को देखते हुए 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में कोवोवैक्स वैक्सीन के लिए मंजूरी देने की मांग की थी।

बूस्टर डोज के लिए सिफारिश
एक आधिकारिक सूत्र ने बताया कि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की कोविड-19 संबंधी विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने बुधवार को इस मुद्दे पर विचार-विमर्श किया और कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक लेने वाले वयस्कों के लिए बूस्टर खुराक के रूप में कोविड रोधी टीके कोवोवैक्स के लिए विपणन मंजूरी देने को लेकर सिफारिश की थी।

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने 28 दिसंबर, 2021 को वयस्कों में आपातकालीन स्थितियों में सीमित उपयोग के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी और नौ मार्च, 2022 को कुछ शर्तों के साथ 12 से 17 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों के लिए मंजूरी दी थी। डीसीजीआई ने सात से 11 साल आयु वर्ग के बच्चों के लिए 28 जून, 2022 को इसे मंजूरी दी थी। कोवोवैक्स को नोवावैक्स से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए तैयार किया जाता है। इसे सशर्त विपणन मंजूरी के लिए यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी ने अनुमोदित किया है।

आदर पूनावाला ने जतायी थी उम्मीद
इससे पहले रविवार को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आदर पूनावाला ने कहा था कि उनके कोवोवैक्स टीके को अगले 10 से 15 दिनों में कोविडरोधी बूस्टर खुराक के तौर पर मंजूरी मिल जायेगी। पूनावाला ने रविवार को यहां भारती विद्यापीठ विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से कहा कि टीका कोरोना वायरस के ओमीक्रॉन स्वरूप के खिलाफ बहुत असरदार है। राज्यों और जिलों को कोविशील्ड टीके नहीं मिलने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के पास आपूर्ति के लिए टीके का पर्याप्त भंडार है।

उन्होंने कहा कि कोवोवैक्स को अगले 10-15 दिनों में बूस्टर खुराक के रूप में मंजूरी मिल जायेगी। यह वास्तव में सबसे अच्छा बूस्टर है क्योंकि यह कोविशील्ड की तुलना में ओमीक्रॉन के खिलाफ बहुत असरदार है। पूनावाला ने कहा कि हर कोई भारत की ओर आशा की नजर से देख रहा है, न केवल स्वास्थ्य सेवा के मामले में बल्कि इसलिए कि देश एक विशाल और विविध आबादी की देखभाल करने में कामयाब रहा है और इसने कोविड-19 महामारी के दौरान 70 से 80 देशों की मदद भी की।

Published / 2023-01-13 08:45:19
स्वस्थ जीवन के लिए घटायें चीनी की मात्रा...

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के देशों को मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें में सुझाया गया है कि स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देश किस तरह राजकोषीय नीतियां तैयार कर सकते हैं। दिशानिर्देशों के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से पर फिलहाल मंत्रणा चल रही है।

इसमें कहा गया है कि कर प्रणाली का सहारा लेकर चीनी युक्त पेय पदार्थों (एसएसबी) का उत्पादन नियंत्रित किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने विशेषकर उन देशों के अनुभव से सीखने की सलाह दी है जो चीनी युक्त पेय पदार्थों पर अतिरिक्त कर लगा रहे हैं। ऐसे देशों में ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको शामिल हैं।

इस चिंता का एक मजबूत आधार है। विकासशील देशों सहित पूरी दुनिया में आवश्यकता से अधिक चीनी का इस्तेमाल मधुमेह (टाइप 2 डायबिटीज) का एक प्रमुख कारण माना जाता है। कार्बन युक्त पेय पदार्थ (कार्बोनेटेड ड्रिंक्स), एनर्जी ड्रिंक्स़, फलों के रस ये सभी एसएसबी की श्रेणी में रखे गए हैं।

मधुमेह जीवनशैली से जुड़ा रोग है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशेषकर, उन देशों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है जहां मधुमेह की बीमारी तेजी से फैल रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार खराब गुणवत्ता वाले, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ पूरी दुनिया में धूम्रपान से भी अधिक संख्या में लोगों को लील रहे हैं।

सरकारें निकोटिन का सेवन करने से रोकने के लिए राजकोषीय नीति का इस्तेमाल करती रही हैं, इसलिए यह आशा करने का तर्कपूर्ण कारण है कि सरकार मधुमेह पर नियंत्रण के लिए भी ऐसी ही नीतियां आजमा सकती है।

हालांकि भारत में कुछ अलग तरह की समस्याएं हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना कुछ ऐसी है जिसमें वर्तमान में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। वातित पेय (एयरेटेड ड्रिंक्स) पर सिगरेट की तरह ही 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इस पर और कर लगाना बुद्धिमानी नहीं होगी क्योंकि जीएसटी संरचना को अस्थिर करने से बचना ही उचित रहेगा।

एक और कर श्रेणी जोड़ने से पूरा जीएसटी तंत्र और पेचीदा हो सकता है। इस श्रेणी में मीठे एवं प्रसंस्कृत फल रस लाये जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इस समय फ्रूट जूस का वर्गीकरण इस बात की व्याखात्मक रेखा है कि अतिरिक्त चीनी (एडेड शुगर) या अन्य मीठी सामग्री मायने रखती हैं या नहीं। इन पर 12 प्रतिशत दर से कर लगता है।

इस वर्गीकरण को दो और श्रेणियों में विभाजित करना सीधा उपाय होगा। इनमें एक श्रेणी एडेड शुगर वाली और दूसरी प्राकृतिक रसों वाली हो सकती है। एडेड शुगर वाली श्रेणी पर कार्बन फ्रूट जूस की तरह ही कर लगाया जा सकता है। वास्तव में एडेड शुगर ही समस्या की जड़ है, न कि कार्बन का मिश्रण।

वास्तव में परिष्कृत चीनी युक्त सभी उत्पादों पर ऊंचा कर लगाया जा सकता है। इससे खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां अधिक चीनी युक्त उत्पाद बेचने के बजाय अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर तरीके खोज सकती हैं। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामान्य तंदुरुस्ती के लिए इन उपायों के परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। इसके अलावा उत्पादों पर एडेड शुगर का लेबल चिपकाया जा सकता है जैसा कि शाकाहारी एवं मांसाहारी उत्पादों के मामले में होता है।

इस विषय पर खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं दे पाया है। रोजमर्रा की जरूरतों के सामान बनाने वाली कंपनियों की मुहिम इसका एक कारण हो सकता है। उत्पादों पर सूचना स्पष्ट होने से उपभोक्ताओं का ध्यान तत्काल इसकी तरफ जाता है। केवल उत्पाद में उपयोग में लाए गए तत्त्वों के नाम अंकित करने से उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित नहीं होता है।

उत्पादों पर स्पष्ट लेबल होने से उपभोक्ताओं को चयन करने में आसानी होगी। दुनिया में इस संदर्भ में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां तंबाकू उत्पादों की तरह ही स्वास्थ्य संबंधी वैधानिक चेतावनी अंकित करना जरूरी होता है। इस दिशा में नियामकीय हस्तक्षेप की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों में मधुमेह के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाना भी सरकार की तरफ से एक अच्छा प्रयास हो सकता है।

Published / 2023-01-12 18:34:25
ठंड में पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें हर्ट के मरीज, रखें बीपी का ख्याल : डॉ नीरज प्रसाद

  • मेदांता रांची के डॉक्टर ने लोगों को दी सलाह 

एबीएन हेल्थ डेस्क। ठंड के मौसम में हार्ट के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें कई ऐसे भी है जिन की हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे पेशेंट्स मरीजों को इस मौसम में विशेष रूप से अपना ख्याल रखने की जरूरत है। मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी डॉक्टर नीरज प्रसाद का कहना है कि कड़ाके की ठंड में कुछ सावधानियां जरूर रखनी पड़ेगी ताकि हालात विपरीत न हो। 

डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि कुछ ऐसे भी केस होते हैं। जिनको हल करना बहुत मुश्किल होता है। कार्डियोजेनिक शॉक वाले केस काफी चैलेंजिंग होते हैं। इनमें तीन ऐसे लिजन्स होते हैं, जिनके इलाज के दौरान काफी सावधानी रखनी होती है। इनमें एक नस होती है जिसकी शुरूआत मुंह से होती है और उसमें दो-तीन ब्रांच निकलते हैं। मुंह से निकलने वाली नस में जो बीमारी होती है और उसे खोला जाता है तो बीपी क्रैश करने का डर होता है। इस हालत में बहुत सावधानी और तेजी से इलाज करना पड़ता है। इसके अलावा सीटीओ क्रॉनिक टोटल ओकुलजन होता है। यह अगर पूरी तरीके से बंद हो तो भी मैं इसे खोल देता हूं। डॉक्टर नीरज बताते हैं कि हर 3 महीने में कोई न कोई एक चैलेंजिंग केस आता है। कई केस ऐसे भी आए हैं जिन में मरीजों को 10 से ज्यादा ब्लॉकेज देखा गया। अभी तक मैंने 18 ब्लॉकेज को ठीक किया है। 

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद बताते हैं कि शीतकालीन मौसम में तीन तरह की दिक्कतें आती है। तापमान कम हो जाता है, तब हमारे शरीर की नसें सिकुड़ जाती है तो रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। जिसके कारण ब्लॉक टूट जाते हैं। इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ठंड के वक्त 65 साल के ऊपर के लोगों को बहुत दिक्कत होती है। उनको इस मौसम में बचाकर चलना चाहिए।  

अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो किसी भी प्रकार के वैसे खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। जिनमें निकोटिन होता है। इसके अलावा कभी भी तनाव न लें। तनाव के कारण ब्लड प्रेशर क्रिएट होता है। ब्लड प्रेशर के कारण कभी-कभी हार्ट अटैक होने का डर बना रहता है। अगर भोजन कर रहे हैं तो कोशिश रखें कि वह सात्विक हो। कई लोग प्रतिदिन नॉनवेज का सेवन करते हैं। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल बनता है जो खतरनाक हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से न केवल हार्ट बल्कि ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है। साथ ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान रखना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर नहीं होना चाहिए। इससे आर्टरी पर असर पड़ सकता है।  

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि ठंड के दिनों में पानी की कमी से हार्ट के वेंट्रिकल में क्लॉट बनता है। वह कभी मस्तिष्क में या कहीं और चल जाता है पर वह हानिकारक हो सकता है। ये कम पानी पीने से होता है। इसलिए इस मौसम में पानी पीने में कमी नहीं होनी चाहिए। हल्का गर्म पानी पी सकते हैं।

Published / 2023-01-12 11:06:05
कोरोना मृतकों की संख्या कम बता रहा चीन: डब्ल्यूएचओ

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दावा किया है कि चीन कोविड-19 से मरने वालों की संख्या को कम करके बता रहा है।डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को कहा कि चीन कोविड-19 महामारी पर पहले की तुलना में अधिक जानकारी देने के बावजूद अभी भी महामारी से होने वाली मौतों की संख्या बेहद कम करके बता रहा है। कोविड-19 तकनीकी प्रमुख, मारिया वान केरखोव ने कहा कि चीन से मिलने वाली जानकारी में काफी खामियां हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए हम चीन के साथ काम कर रहे हैं।

दरअसल, पिछले साल दिसंबर में शून्य-कोविड उपाय समाप्त किए जाने के बाद चीन में कोविड-19 का संक्रमण बढ़ गया है। चीन हालांकि इस बात से इनकार कर रहा है कि उसके द्वारा कोविड मौतों के आंकड़े छिपाया जा रहा है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विश्वभर के विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि चीन जानबूझकर कोविड से होने वाली मौतों की संख्या कम दिखा रहा है।

चीन में कोविड के बढ़ते संक्रमण के चलते भारत सहित कई देशों ने चीन से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बीजिंग ने इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए इसकी आलोचना की है। कोविड के मामलों में उछाल के बावजूद चीन में किसी नये कोविड वेरिएंट का पता नहीं चला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऐसा परीक्षणों में कमी के कारण हुआ है।

चीन में करीब एक महीने पहले शून्य कोविड नीति खत्म कर दी गयी थी। इससे यहां कोविड मामलों में तेजी से उछाल आया और रिपोर्टों के अनुसार अस्पतालों और श्मशान घाटों तक की कमी हो गयी। दिसंबर में चीन ने कोविड से होने वाली मौतें चिह्नित करने के मानदंड बदल दिये। इससे सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोविड से मरने वालों की संख्या में काफी कमी आयी।

Published / 2023-01-11 21:16:13
बड़कागांव : अदाणी फाउंडेशन ने अंबाजीत में लगाया नि:शुल्क हेल्थ चेकअप कैंप

टीम एबीएन, बड़कागांव। गोंदलपुरा खनन परियोजना के तहत अदाणी फाउंडेशन ने बुधवार को मध्य विद्यालय अम्बाजीत परिसर में निशुल्क हेल्थ चेक-अप कैंप का आयोजन किया। अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कैंप में 85 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें आवश्यक दवाएं निशुल्क प्रदान की गई। 

इस अवसर पर हजारीबाग के जेनरल फिजिशियन डॉ विजय चैतन्य के नेतृत्व में पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम ने ग्रामीणों को कई तरह की चिकित्सकीय सुविधाएं निशुल्क प्रदान की। सुबह 11:00 बजे से दिन भर चले इस कैंप में महिलाएं, ग्रामीण और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जांच की गयी। कैंप में कई महिलाएं भी अपने बच्चों के साथ आई हुई थीं।

Published / 2023-01-10 20:53:20
यदि आप भी ले चुके हैं वैक्सीन की दोनों डोज, तो जरूर पढ़ें ये खबर...

  • कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक ले चुके लोगों को लगने वाली बूस्टर खुराक पर आयी बड़ी खबर! 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की एक विशेषज्ञ समिति कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक ले चुके वयस्कों के लिए हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक के रूप में एसआईआई के कोविड-19 रोधी कोवोवैक्स टीके को बाजार में उतारने की मंजूरी देने पर बुधवार को फैसला कर सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक में प्राथमिक खुराक से अलग बूस्टर खुराक दी जा सकती है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक 11 जनवरी को हो सकती है। 

सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) के सरकारी और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने कुछ देशों में महामारी के बढ़ते हालात के मद्देनजर वयस्कों के लिए हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक के रूप में कोवोवैक्स को मंजूरी देने के लिए हाल में भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखा था। 

डीसीजीआई ने 28 दिसंबर, 2021 को वयस्कों के लिए आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी। उसने 12 से 17 साल की आयु के लोगों के लिए 9 मार्च, 2022 को तथा 7 से 11 साल के बच्चों के लिए 28 जून, 2022 को मंजूरी दी थी। ये मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गयी। 

कोवोवैक्स का उत्पादन एसआईआई करता है जिसमें नोवावैक्स की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 17 दिसंबर, 2021 को आपात उपयोग के लिए इसे सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी थी। 

अमेरिकी टीका निर्माता नोवावैक्स इंक ने अपने कोविड-19 टीके एनवीएक्स-सीओवी2373 के भारत एवं कम तथा मध्यम आय वाले देशों में विकास तथा व्यावसायीकरण के लिए अगस्त 2020 में एसआईआई के साथ लाइसेंस समझौते की घोषणा की थी।

Published / 2023-01-10 18:34:31
अब लीजिये... देश की हवा में घुले ओमीक्रॉन के सभी वेरिएंट

  • अब सरकारी सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन, जापान और अमेरिका समेत कई देशों में जानलेवा कोरोना वायरस फिर से कहर बरपा रहा है। इन देशों में ओमीक्रॉन के बीए.2 और एक्सबीबी वेरिएंट से सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हुए। बड़ी बात यह है कि इन वेरिएंट्स समेत ओमीक्रॉन के सभी वेरिएंट और सबवेरिएंट भारत की हवा में भी घुल चुके हैं। हालांकि डरने की कोई बात नहीं है, क्योंकि देश में अभी तक इन वेरिएंट्स की वजह से मामलों में न तो उछाल देखा गया है और न ही मौतों की संख्या में कोई बढ़ोतरी हुई है। 

सरकार की सर्विलांस रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के दौरान 324 पॉजिटिव नमूनों की सीक्वेंसिंग से भारत में सभी ओमिक्रॉन वेरिएंट की उपस्थिति का पता चला। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जिन क्षेत्रों में इन ओमीक्रॉन के इन वेरिएंट्स का पता चला है, वहां मृत्यु दर या कोरोना के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। 

एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की टेस्टिंग जारी 
मंत्रालय ने पिछले साल 24 दिसंबर से देश के तमाम एयरपोर्ट्स पर पहुंचने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोरोना टेस्टिंग शुरू की थी। मंत्रालय ने बताया कि तमाम एयरपोर्ट्स पर 7786 उड़ानों से 13.6 लाख से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत पहुंचे, जिनमें से 29 हजार 113 यात्रियों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया। इनमें से 183 नमूने पॉजिटिव पाये गये, जिन्हें बाद में पूरे जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा गया। 50 नमूनों की सीक्वेंसिंग से ओमिक्रॉन और ओमिक्रॉन सब-लाइनेज का पता चला था, जिसमें एक्सबीबी (11), बीक्यू.1.1 (12) और बीएफ7.4.1 (1) वेरिएंट शामिल थे। 

कोरोना के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप का नया मामला मिला 
बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप का एक नया मामला पाया गया है, जिससे देश में इस स्वरूप से संबंधित मामलों की कुल संख्या आठ हो गई है। कोरोना वायरस के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप की वजह से अमेरिका में संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। भारतीय सार्स कोव-2 जिनोमिकी संगठन (इंसाकोग) ने कहा कि पिछले 24 घंटे में संबंधित स्वरूप का नया मामला उत्तराखंड में मिला, जबकि इससे पहले एक्सबीबी 1.5 स्वरूप से जुड़े तीन मामले गुजरात में और एक-एक मामला कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में मिला था।

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