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दिल का ख्याल रखने के लिए जीवनशैली बदलें...
Published / 2023-03-16 21:53:11
दिल का ख्याल रखने के लिए जीवनशैली बदलें...

एबीएन हेल्थ डेस्क। एक समय था जब हार्ट संबंधी समस्याएं उम्रदराज लोगों को ही ज्यादा हुआ करती थीं। लेकिन आज हार्ट की बीमारी के शिकार हर आयुवर्ग के लोग हैं। भारत में एक बड़ी आबादी हृदय रोग से पीड़ित है और हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या वजह है? कहीं खानपान व लाइफस्टाइल में गड़बड़ हो रही है? जानिये उन गड़बड़ियों के बारे में जो युवाओं में हार्ट अटैक के कारणों को बढ़ावा दे रही हैं। पेट की चर्बी युवाओं में बैली फैट का बढ़ना और मोटापा दिल का दौरा पड़ने का सबसे बड़ा कारण है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की नयी रिपोर्ट के अनुसार अगर आपका बीएमआई सामान्य है और पेट के आसपास चर्बी की मात्रा अधिक है तो आपको दिल का दौरा पड़ने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है। ऐसे में व्यायाम और खुराक दोनों का ख्याल जरूरी है। पोषण का स्तर शोध बताते हैं कि भारत में 47 प्रतिशत लोगों को विटामिन बी12 की कमी है। विटामिन बी12 की कमी दिल का दौरा पड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण रिस्क फेक्टर है। बी12 की कमी से सीरम होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है जो दिल के दौरे से सीधा संबंध रखता है। जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी और विटामिन ई की कमी वाले आहार को भी हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जोड़ा जाता है। साथ ही सैचुरेटेड फैट्स, ट्रांस फैट्स और नमक यानी सोडियम का अत्यधिक सेवन हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। नींद की अहमियत सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार जो वयस्क रोज रात को 7 घंटे से कम सोते हैं उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका काफी अधिक होती है। इसका कारण यह है कि नींद की कमी से अकसर तनाव बढ़ता है। जो आपको दिन भर गतिहीन बनाकर रखता है। इस वजह से आप भूख लगने पर बाहर से कुछ अनहेल्दी भी खा ही लेते हैं। यह सभी कारण शरीर में फैट को जमा करते हैं। जिसका आपके दिल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तनाव के असर ज्यादातर लोग हर समय कुछ न कुछ सोच रहे होते हैं। इससे शरीर में स्ट्रैस हार्मोन बढ़ जाते हैं जो पेट के चारों तरफ फैट बनकर जमा होने लगते हैं। बहुत लोग तनाव में अधिक भोजन करते हैं। जिसके चलते अनहेल्दी फूड खा लेते हैं और ओवर ईटिंग के शिकार हो जाते हैं। इससे शरीर में कैलोरी का स्तर बहुत बढ़ जाता है। फैट और बढ़ जाता है। तनाव के चलते अनिद्रा दोष हो जाता है। ये सब स्थितियां हृदय रोग की आशंका बढ़ा देती हैं। तनाव हाई ब्लडप्रेशर या हाइपरटेंशन के कारणों में से एक है। दिल के दौरे का एक कारण हाई ब्लड प्रेशर भी है। तनाव तनाव को कैसे डील करते हैं यह आपकी ओवरआॅल वेलनेस पर प्रभाव डालता है। मनोवैज्ञानिक शोधों से यह बात सामने आई कि तनाव उन व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है जो यह विश्वास करने लगते हैं कि तनाव की वजह से उनपर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सक्रियता सन 2020 में हुए एक शोध में यह पाया गया कि शहरों में रहने वाले 60 प्रतिशत लोग निष्क्रिय या कम एक्टिव हैं। शारीरिक सक्रियता कम होना भी हृदय रोग बढ़ाता है। इसलिए यदि आपको एक ही स्थान पर बैठकर काम करना है तो अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज व योग को जरूर शामिल करें। स्वस्थ हृदय के लिए प्रतिदिन ढाई घंटा व्यायाम या योग करने की सलाह दी जाती है। धूम्रपान का कारक धूम्रपान करने से ब्लडस्ट्रीम में रसायन निकलते हैं। जो धमनियों और नसों के रक्त को गाढ़ा कर देते हैं और थक्का बनने का कारण बनते हैं। यह थक्के रक्तप्रवाह में बाधक बनते हैं। परिणाम स्वरूप दिल का दौरा पड़ता है। तम्बाकू का प्रयोग लगभग 11।9 प्रतिशत युवाओं द्वारा किया जाता है। यह चिंता का बड़ा कारण है। ये सभी कारण इस युवा पीढ़ी की बदलती जीवनशैली की वजह से हैं। हमने देर से सोना शुरू कर दिया है। फास्टफूड का सेवन ज्यादा है। वक्त-बेवक्त भोजन करते हैं। न सोने का समय निश्चित,न ही उठने का व न ही भोजन करने का। युवा पीढ़ी की एक निश्चित दिनचर्या ही नहीं है। ये सभी कारण केवल हृदय रोग ही नहीं बल्कि पीसीओडी, असामान्य लिपिड प्रोफाइल, अवसाद, एंग्जाइटी आदि का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। हमारी पुरानी पीढ़ी अपने खानपान और जीवनशैली को लेकर बहुत सजग रही है। समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा रहा है जिसे आज की युवा पीढ़ी को अपने बड़ों से सीखने की जरूरत है।

एच3एन2 के बढ़ते मामलों से केंद्र सरकार चिंतित
Published / 2023-03-11 23:31:30
एच3एन2 के बढ़ते मामलों से केंद्र सरकार चिंतित

कोविड केसों की वृद्धि पर राज्यों को दिये कई सख्त निर्देशएबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में मौसमी इंफ्लूएंजा के उप-स्वरूप एच3एन2 के मामलों में वृद्धि के बीच केन्द्र ने कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण दर में क्रमिक बढ़ोतरी को लेकर शनिवार को चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे तुरंत निपटने की जरूरत है। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इंफ्लूएंजा जैसी बीमारी (आईएलआई) या गंभीर तीव्र श्वसन संक्रमण (एसएआरआई) के मामलों के रूप में पेश होने वाले श्वसन संबंधी रोगों की एकीकृत निगरानी के लिए दिशा-निर्देशों का पालन करने का अनुरोध किया। राज्यों से दवाओं और मेडिकल आॅक्सीजन की उपलब्धता, कोविड-19 और इन्फ्लूएंजा के खिलाफ टीकाकरण जैसी अस्पताल की तैयारियों का जायजा लेने का भी अनुरोध किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को शनिवार को लिखे एक पत्र में कहा है, हालांकि पिछले कुछ महीनों में कोविड-19 के मामले कम होते जा रहे है लेकिन कुछ राज्यों में कोविड-19 संक्रमण दर में क्रमिक वृद्धि हुई है जो चिंता का एक मुद्दा है और इससे तेजी से निपटा जाना चाहिए।भूषण ने कहा कि नए मामलों की कम संख्या, अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में कमी और कोविड-19 टीकाकरण के मामले में महत्वपूर्ण प्रगति के बावजूद, सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जांच, इलाज और टीकाकरण पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए और कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन किये जाने की जरूरत है। देशभर के कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में अन्य आइएलआइ और एसएआरआइ में बढ़ते रुझान के मद्देनजर, केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और संबंधित संगठनों के साथ वर्तमान स्थिति की समीक्षा करने के लिए हाल में एक बैठक आयोजित की गई थी।उन्होंने कहा कि विभिन्न प्रयोगशालाओं में विश्लेषण किए जा रहे नमूनों में इंफ्लुएंजा ए (एच3एन2) विशेष रूप से चिंता का विषय है। यह भी ध्यान में रखा जाना चाहिए कि बच्चे, बुजुर्ग लोग और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों में एच1एन1, एच3एन2 का अधिक खतरा है। भूषण ने पत्र में कहा है कि इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए लोगों को स्वच्छता के बारे में जागरूक करना जरूरी है।

खांसी जुकाम को हल्के में न लें, जा सकती है जान
Published / 2023-03-10 18:51:50
खांसी जुकाम को हल्के में न लें, जा सकती है जान

जानलेवा बना इन्फ्लूएंजा : एच3एन2 से अब तक दो की मौत एबीएन हेल्थ डेस्क। देशभर में धूमधाम से होली मनाने के बाद अब देश में कोरोना तेजी से पैर पसार रहा है। बता दें कि जहां भारत में एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 440 नये मामले आने के बाद देश में अभी तक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 4,46,89,512 हो गयी है। वहीं, उपचाराधीन मरीजों की संख्या बढ़कर 3,294 पर पहुंच गयी है। इसके साथ ही देश में एक और नये वायरस ने दस्तक दिया है जिससे अब तक दो लोगों की मौत भी हो गयी है। बता दें कि इंफ्लूएंजा अब जानलेवा बनता जा रहा है। देश में अब तक एच3एन2 से दो मौत के मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें से एक मौत हरियाणा जबकि दूसरी मौत कर्नाटक में हुई है। देश में एच3एन2 के कुल 90 मामले आ चुके हैं। वहीं, एच1एन1 के 8 मामले मिले हैं। कुल इंफ्लूएंजा के तीन प्रकार होते हैं : एन1एन1, एच3एन2 और इन्फ्लूएंजा इ, जिसको यामा गाटा कहा जाता है। भारत में फिलहाल दो तरह के इंफ्लूएंजा वायरस एच1एन1 और एच3एन2 के मामले पाये गये हैं। क्या है लक्षण इसके साथ ही इंफ्लुएंजा अ का सबटाइप एच3एन2 वायरस है, जिसको लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने भी एडवाइजरी जारी की है। इस बीमारी में आपको तेज बुखार, तेज सिरदर्द, शरीर में दर्द, गले में दर्द, तेज खांसी, सर्दी जुकाम फेफड़े जाम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।क्या करें पानी पीते रहें शरीर को हाइड्रेट रखें। बाहर का खाना बिल्कुल न खायें और फ्लूड डाइट लीजिये। आप फ्लू वैक्सीन जरूर लगवाये। साथ में जो लोग इससे संक्रमित हैं उनसे दूरी बनाकर रखिये। हाथ को सेनेटाइज करके रखें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

एच3एन2 इन्फ्लूएंजा कोरोना की तरह ही संक्रामक, उसी की तरह फैलता है
Published / 2023-03-07 18:44:25
एच3एन2 इन्फ्लूएंजा कोरोना की तरह ही संक्रामक, उसी की तरह फैलता है

एम्स के पूर्व निदेशक गुलेरिया ने चेताया- मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जरूरी, बुजुर्ग सावधान रहेंएबीएन हेल्थ डेस्क। एम्स के पूर्व निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने देश में फैल रहे एच3एन2 इन्फ्लूएंजा से लोगों को सावधान रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह कोरोना के जैसी ही फैलता है। इससे बचने के लिए मास्क पहनें, सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और बार-बार हाथ धोते रहें। बुजुर्गों और पहले से ही किसी बीमारी से परेशान लोगों को इससे ज्यादा परेशानी हो सकती है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को हेल्थ एक्सपर्ट्स के साथ एच3एन2 इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की। इसमें एक्सपर्ट्स ने कहा कि देश में कोरोना के मामले कम हुए हैं, लेकिन फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। यह फ्लू कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट्स ने इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर मास्क पहनने की सलाह दी है।पिछले दो महीने से राजधानी दिल्ली समेत भारत के कई हिस्सों में इन्फ्लूएंजा के मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना महामारी के बाद फ्लू के बढ़ते मामलों से लोगों में डर है, क्योंकि इससे जूझ रहे मरीजों में कोरोना जैसे ही लक्षण देखने को मिल रहे हैं। बीते कुछ दिनों में दिल्ली और आसपास के इलाकों से कई ऐसे मरीज अस्पताल पहुंचे हैं, जो 10-12 दिनों से तेज बुखार के साथ खांसी से परेशान हैं।आईसीएमआर की रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले दो-तीन महीनों से इन्फ्लूएंजा वायरस का एक सब-टाइप एच3एन2 फैल रहा है। देश के कई हिस्सों में लोगों में इसी स्ट्रेन के लक्षण मिले हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाकी सब-टाइप्स की तुलना में इस वैरिएंट की वजह से लोग अस्पतालों में ज्यादा भर्ती होते हैं।बरतें सतर्कताफेस मास्क पहनें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचेंहाथों को नियमित रूप से पानी और साबुन से धोते रहें।नाक और मुंह छून से बचें।खांसते या छींकते समय नाक और मुंह को अच्छी तरह कवर करें।खुद को हाइड्रेट रखें, पानी के अलावा फ्रूट जूस या अन्य पेय पदार्थ लेते रहें।बुखार आने की स्थिति में पैरासिटामोल लें।

महामारी की तरह बढ़ रही है ऑस्टियोपोरोसिस : डॉ चौधरी
Published / 2023-02-28 00:00:14
महामारी की तरह बढ़ रही है ऑस्टियोपोरोसिस : डॉ चौधरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमए भवन में रविवार को हड्डी रोग पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में आईएमए सचिव डॉ सौरभ चौधरी, डॉ सुनील कुमार व डॉ राजेश ठाकुर शामिल थे। डॉ चौधरी ने कहा कि साइलेंट महामारी की तरह ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ रही है। इसके प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। अधिकांश लोगों को यह बीमारी तब समझ में आती है, जब उनकी हड्डियां किसी न किसी कारण से टूट जाती है। 50 वर्ष के बाद लगभग  30 प्रतिशत  महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त हो जाती है। इस दौरान हड्डियां अंदर से खोखली हो जाती है और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज संभव है। अगर किसी व्यक्ति को पीठ में दर्द, आसानी  से  बोन  फ्रैक्चर  हो जाना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना सहित अन्य परेशानी हो तो उसे नजर अंदाज न करें। उसकी जांच कराएं। वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील कुमार ने घुटने के दर्द वाले रोगी का इलाज कैसे करना है, उसके बारे में बताया। इस अवसर पर आइएमए के अध्यक्ष डॉ जीसी माझी सहित दर्जन भर डाक्टर उपस्थित थे।

झारखंड : राज्य में पहली बार 3डी विजन से हुई लेप्रोस्कोपिक सर्जरी
Published / 2023-02-23 23:21:45
झारखंड : राज्य में पहली बार 3डी विजन से हुई लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

टीम एबीएन, रांची। विज्ञान और तकनीक हेल्थ सेक्टर में आये दिन कुछ नई मशीनें लेकर आ रहे हैं, जो मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी रामबाण होते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं झारखंड की राजधानी रांची की। यहां धुर्वा स्थित पारस एचईसी हॉस्पिटल में 3डी विजन के माध्यम से लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन किया गया है।पारस हॉस्पिटल के डॉक्टर संजय ने ABN से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि 3डी विजन आने से न सिर्फ मरीजों को फायदा होगा, बल्कि हम जैसे डॉक्टर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और जब डॉक्टर का कॉन्फिडेंट होगा तो ऑपरेशन बेहतर और सटीक होगा। हेल्थ सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी एक क्रांति है। डॉक्टर संजीव कुमार ने कहा कि लेप्रोस्कोपिक में रोगी के पेट में पोर्ट से छेद कर कार्बन डाईऑक्साइड गैस भरी जाती है। ऐसा करने से रोगी का पेट फूल जाता है। इसके बाद तीन और सूराख बनाये जाते हैं। इन तीन सूराखों में एक से एचडी कैमरा और दो से सर्जरी उपकरण पेट के अंदर डाले जाते हैं। कंसोल की मदद से चिकित्सक पेट के भीतर उपकरणों के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं और उस हिस्से को काट-काट कर निकालते हैं, जो बीमारी का कारण होता है। 3डी कैमरे से हमें स्पष्ट रूप से चीजें दिखती हैं। सबसे बड़ी बात है कि हम काफी गहराई तक जा कर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे बारीक नसें बहुत आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। साथ ही बहुत स्पष्ट दिखाई देने से ऑपरेशन भी बहुत जल्द और सटीक होता है। इस ऑपरेशन में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता।डॉक्टर संजीव कुमार कहते हैं इस ऑपरेशन में आधुनिक मशीन का उपयोग होगा। पर इसमें कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं है। सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50,000 रुपये का खर्च आता है, 3डी के बाद भी इसका खर्च यही रहेगा। साथ ही 24 घंटे के अंदर हम मरीज को डिस्चार्ज कर देते हैं। इससे मरीज बड़ी जल्दी स्वस्थ होगा व जल्दी डिस्चार्ज होगा तो खर्च भी कम आयेगा। लेप्रोस्कोपिक 3डी माध्यम से ऑपरेशन करा चुकीं कविता कहती हैं कि ऑपरेशन के बाद बहुत जल्दी डिस्चार्ज कर दिया गया। जिस वजह से खर्च काफी कम आया व आराम भी है।

बर्ड फ्लू को लेकर पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं...
Published / 2023-02-22 18:24:47
बर्ड फ्लू को लेकर पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं...

बर्ड फ्लू को लेकर केंद्रीय टीम का बोकारो दौराटीम एबीएन, बोकारो/ रांची। बोकारो के सरकारी फार्म में एमबीएल फ्लू के प्रकोप के बाद उसकी स्थिति का आंकलन करने के लिए मंगलवार को केंद्रीय टीम बोकारो पहुंची। जिसमे दिल्ली से पशुपालन विभाग से डॉक्टर जिमी शर्मा, कोलकाता से हेल्थ विभाग की टीम में डॉ सीएस तलकर, डॉ अमित भौमिक और डॉ शिव कुमार शामिल थे। इस दौरान 1040 अंडे और 103 मुर्गियों को नष्ट का दिया गया। 908 मुर्गी फार्म में थे। जिसमे से लगभग 800 मुर्गी फ्लू से मरी हैं। बताते चलें कि मुर्गियों के मरने की शुरुआत 03 फरवरी से हुई थी। वहीं सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव 21 फरवरी को आयी थी। पशुपालन विभाग से आई डॉक्टर जिमी शर्मा ने पशुपालन विभाग के डाटा को कलेक्ट किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिये। उन्होंने आसपास के पोल्ट्री फार्म जहां चिकेन की संख्या अधिक है, वहां सैंपल करने के काम की जानकारी ली। वहीं कोलकाता से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पोल्ट्री फार्म में हैंडलर और कर्मियों को सर्विलांस पर रखा है। क्योंकि वह सभी संक्रमित मुर्गी के कॉन्टेक्ट में रहे हैं। कोलकाता से आई हेल्थ विभाग की टीम ने सिविल सर्जन से मुलाकात की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उनके साथ जिला महामारी विशेषज्ञ पवन कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद थे। पशुपालन पदाधिकारी मनोज कुमार मणि ने बताया बुधवार से ही सैंपलिंग का काम शुरू हो गया है जरीडीह, सिवानडीह और चास समेत अन्य स्थानों पर सैंपलिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में कहीं बड़ी संख्या में मुर्गियों के मरने की सूचना नहीं मिली है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ भी स्पष्ट हो सकेगा। सहायक निरीक्षक प्रदीप ने बताया कि इसमें पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इससे बचाव की आवश्यकता है, अगर किसी को इस प्रकार की कोई भी सूचना मिलती है, तो तुरंत कंट्रोल रूम को अवगत कराएं ताकि वहां एहतियात के तौर पर जो कदम उठाना चाहिए उसे उठाया जा सके। उन्होंने पोल्ट्री फार्म संचालकों से भी अपील की है कि अगर उन्हें अपने फार्म में इस प्रकार का कोई लक्षण देखने को मिलता है तो तुरंत पशुपालन विभाग को अवगत करायें।

मेदांता रांची की एक और उपलब्धि, क्रिटिकल केस में मरीज का किया सफल उपचार, स्वस्थ जीवन जी रही मरीज
Published / 2023-02-17 18:52:17
मेदांता रांची की एक और उपलब्धि, क्रिटिकल केस में मरीज का किया सफल उपचार, स्वस्थ जीवन जी रही मरीज

मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी टीम एबीएन, रांची। अपनी एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम, अत्याधुनिक तकनीक और मरीज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मेदांता रांची सफल उपचार में लगातार उपलब्धि हासिल कर रहा है। मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी। उपचार के बाद महिला अभी एकदम स्वस्थ्य जीवन जी रही है। मेदांता रांची के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेदांता रांची में एक 70 वर्षीय महिला का केस आया था। इनको शार्टनेस आफ ब्रेथ था। जिसकी ग्रेडिंग इनवाईएचए क्लास 4 थी। ये महिला रात में सो भी नहीं पाती थी। रात भर बैठ कर रहती थी। इनकी सांस इतनी फूल रही थी। मेदांता रांची में जब इनका इलाज शुरू हुआ तो बहुत सारे मेडिसिन दिए गए। लेकिन इन महिला मरीज की प्रॉब्लम ठीक नहीं हो पा रही थी। मरीज का इजेकशन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, जबकि उनकी डायग्नोसिस डीसीएम था साथ ही इसीजी में एलबीबीबी था।  डॉ मुकेश ने बताया कि इसके बाद मरीज को एक डिवाइस लगाने की प्लानिंग की गई। इस डिवाइस को सीआरटीडी कहा जाता है। उस डिवाइस को मेदांता रांची में गत गुरुवार को लगाया गया। डिवाइस को लगाने के बाद मरीज की इलाज में काफी सुधार है। पहले जितना शार्टनेस आफ ब्रेथ था, वह काफी कम हो गया है। इस डिवाइस को लगाने से धीरे-धीरे इसका इंप्रूवमेंट और बढ़ेगा। आने वाले 15 से 20 दिन में वो मरीज आक्सीजन के बिना वह अपना काम कर लेंगी। मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस को लगाने के लिए सबसे पहले हृदय में 3 तार डालने होते हैं। 3 चेंबर में 3 तार इस डिवाइस को चलाते हैं। और साथ में इन वायर के साथ एक बैटरी कनेक्टेड होता है। जिसे पल्स जनरेटर कहा जाता हैं। पल्स जनरेटर में  बैटरी होता है। इसको स्किन के नीचे लेफ्ट साइड के सोल्जर के नीचे स्किन में फिट कर दिया जाता है। चेस्ट के अपर पार्ट में बैटरी को फिट कर दिया जाता है और फिर डिवाइस को तीन तार से कनेक्ट कर दिया जाता है। ये तार हर्ट का जो कॉन्ट्रैक्टलिटी उसे सिंक्रोनाइज करके रेगुलेटेड वे में कॉन्ट्रैक्ट करवा देते हैं। यानी मरीज का जो इजेक्शन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, इसको इंप्रूव कर के 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक जा सकते हैं। यह 60 प्रतिशत भी हो सकता है। मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस की बैटरी एक तरह से कैपेसिटर है। इसमें चार्ज स्टोर होता है। इसके 3 तार में से एक तार शॉकवेव देता है। अगर पेशेंट को कभी और अरिदिमिया होता है। वीटी/वीएफ होता है तो उसके अंदर एक तार शॉकवेव देगा और आटोमेटिक डिफाइब्रिलेशन देकर अरिदिमिय को खत्म कर देगा। जिसके कारण पेशेंट की जान बच जायेगी। इस मशीन को लगाने का मुख्य कारण यही है कि बहुत सारे मरीज जिनके हृदय का फंक्शन कम होता है और अरिदिमिया होने का चांस ज्यादा होता है। इसको लगाने से अगर कोई अरिदिमिया हो तो वह आॅटोमेटिक शॉक देकर उसको कन्वर्ट कर देता है और मरीज की जान बच जाती है। डॉ मुकेश ने बताया कि इस मरीज के सांस फूलने का मुख्य कारण रिड्यूस्ड हार्ट फंक्शन था। हृदय का जो पंपिंग फंक्शन है, वह रिड्यूस हो चुका था। वैसे जो नॉरमल पर्सन होते हैं उनके हृदय का फंक्शन 60 प्रतिशत से ऊपर होता है। इस मरीज के हर्ट का पंपिंग फंक्शन 27 प्रतिशत तक हो चुका था। डॉक्टर मुकेश ने बताया कि मेदांता रांची में कार्डियक क्रिटिकल केयर के लिए सारी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। वहीं मेदांता रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता रांची में इलाज की सारी विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध है। यहां डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम है, जो किसी भी हालात में इलाज करने में सक्षम हैं। इसी कारण से मेदांता रांची चिकित्सा के क्षेत्र में नया आयाम हासिल कर रहा है।

अब नया खतरा... मारबर्ग वायरस की चपेट में आ सकती है पूरी दुनिया
Published / 2023-02-14 18:04:36
अब नया खतरा... मारबर्ग वायरस की चपेट में आ सकती है पूरी दुनिया

शरीर से पसीने की तरह निकलने लगता है खून, डब्ल्यूएचओ ने बुलायी आपात बैठकएबीएन सेंट्रल डेस्क। पूरा विश्व अभी कोरोना वायरस के कहर से उबरी भी नहीं है कि एक और खतरनाक वायरस मारबर्ग ने चिंता बढ़ा दी है। इस मारबर्ग वायरस से अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी में अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला से मिलते-जुलते इस बेहद घातक वायरस के लिए कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। ऐसे में इसे रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। इस नये वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की भी चिंता बढ़ा दी है और उसने इसे लेकर एक आपात बैठक बुलाई है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने एक बयान में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इक्वेटोरियल गिनी में नये मारबर्ग वायरस के प्रकोप पर चर्चा करने के लिए मारबर्ग वायरस वैक्सीन कंसोर्टियम की एक तत्काल बैठक बुलायेगा। संगठन ने इसके साथ ही बताया कि यह बैठक भारतीय समयानुसार मंगलवार शाम 7:30 बजे होगी। कितना खतरनाक है मारबर्ग वायरस डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मारबर्ग एक बेहद घातक वायरस है, जो चमगादड़ों से लोगों में पहुंचता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को रक्तस्रावी बुखार आता है और धीरे-धीरे उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि अब तक सामने मिले मरीजों में से 88 फीसदी की मौत हो गयी।विश्व स्वास्थ्य संगठन की अफ्रीका इकाई के निदेशक डॉ मतशिदिसो मोइति ने बताया कि मारबर्ग वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक है जो कि इबोला वायरस की फैमिली से ही संबंध रखता है। यह वायरस इंसानों में फ्रूट बैट से पहुंचा है और इससे संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 88 प्रतिशत है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद अचानक लक्षण दिखने शुरू होते हैं। क्या हैं इसके लक्षण अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने बताया है कि मारबर्ग वायरस के लक्षण 2 से लेकर 21 दिनों की अवधि के बीच अचानक शुरू होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द होते हैं। इन लक्षणों के कुछ दिनों बाद छाती, पीठ और पेट पर दाने निकल आते हैं। इसके अलावा उल्टी, सीने में दर्द, गले में खराश, पेट में दर्द और दस्त इस वायरस के लक्षण हो सकते हैं।

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