एबीएन हेल्थ डेस्क। करीब एक दशक लंबी रिसर्च के बाद दुनिया में पहली बार पारंपरिक चिकित्सा के दम पर कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि रोकी जायेगी। केंद्रीय आयुष मंत्रालय के अधीन जयपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए) के डॉक्टरों ने आयुर्वेद सिद्धांतों के जरिए वी2एस2 नामक दवा की खोज की है जिसे हाइड्रो एल्कोहलिक तत्वों से तैयार किया है।दवा को बाजार में आने से पहले क्लीनिकल ट्रायल से गुजरना होगा जिसकी शुरुआत मुंबई स्थित टाटा मेमोरियल अस्पताल से होने जा रही है। इस प्री क्लीनिकल ट्रायल के बाद जम्मू में उसके आगे का परीक्षण किया जायेगा। एनआईए के कुलपति डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि प्री क्लीनिकल ट्रायल जल्द ही मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में शुरू होंगे। इसके बाद जयपुर और जम्मू कश्मीर में ट्रायल पूरा होगा। पारंपरिक चिकित्सा और वैज्ञानिक तथ्यों को लेकर अक्सर सवाल खड़े होते हैं। टाटा मेमोरियल अस्पताल की प्रमुख वैज्ञानिक डॉ ज्योति कोडे ने कहा कि आधुनिक वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस अध्ययन के लिए मॉडल तैयार किया गया है। क्लीनिकल ट्रायल फेज पूरा करने में करीब दो से तीन वर्ष का समय लग सकता है लेकिन इस अवधि में उनके पास ठोस परिणाम होंगे और फिर यह उपचार पद्धति में शामिल हो सकती है।संजीव शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद के कई अध्यायों में कैंसर कोशिकाओं की ग्रोथ रोकने का वर्णन मिलता है। इन्हीं फाॅर्मूला को लेकर लंबे समय से डॉक्टर अध्ययन कर रहे थे। कोरोना महामारी के दौरान इसमें थोड़ी रुकावट आई थी लेकिन जब प्रयोगशाला में यह तैयार हुआ तो इसमें कैंसररोधी गुणों की पुष्टि हुई। साथ ही, पता चला कि यह इम्यूनिटी बूस्ट करने में भी सहायक है।
टीम एबीएन, रांची। श्री माहेश्वरी सभा रांची एवं लायंस क्लब रांची नार्थ के सयुंक्त प्रयास से आज दिनांक 11 अप्रैल को स्थानीय माहेश्वरी भवन में न्यूरोथैरेपी चिकित्सा कैंप का शुभारंभ किया गया। यह कैंप 11 अप्रैल से 20 अप्रैल तक चलेगा। नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे 10 दिनों तक रांची में रोगियों का इलाज कर उन्हें लाभान्वित करेंगे। न्यूरोथैरेपी एक प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति है जिसके द्वारा जटिल से जटिल एवं पुराने से पुराने रोगों का उपचार किया जाता है। इस पद्धति द्वारा मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र और हार्मोन असंतुलन के विकार को दूर कर उपचार किया जाता है। यह दवा रहित नैसर्गिक उपचार पद्धति है। तंत्रिका तंत्र एवं पाचन तंत्र को ठीक कर बीमारी के मूल कारण को समाप्त किया जाता है। शरीर के केंद्र नाभि को व्यवस्थित कर रोग को नष्ट किया जाता है। विभिन्न पुरानी और गंभीर बीमारियां जैसे :- मधुमेह, उच्च रक्तचाप, जोड़ों का दर्द, कब्ज और पेट की अन्य बीमारियां, पीठ और कमर का दर्द, मंद बुद्धि या अवसाद, अम्ल पित्त से संबंधित बीमारियां, अस्थमा या सांस की बीमारी, बवासीर, अनिंद्रा, अनियमित या पीड़ादायक मासिक, चक्कर आना आदि सभी तरह के रोगों का उपचार संभव है। कैंप का उद्घाटन झारखंड बिहार प्रदेश माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष श्री राज कुमार मारु तथा लायंस क्लब के पूर्व जिलापाल श्री संजीव पोद्दार ने किया। श्री राज कुमार मारु ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे कई रोगी जिनका इलाज अब दवाइयों से संभव नहीं है उन्हें इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति से लाभ मिलेगा। नागपुर से आये न्यूरोथैरेपी वैद्य अमृत लुटे ने बताया की वर्तमान में रहन-सहन एवं खानपान के कारण शरीर में हार्मोन संतुलन बिगड़ जाता है एवं तंत्रिका तंत्र में विकार पैदा होने लगता है इलाज से हार्मोन को संतुलित एवं तांत्रिक तंत्र को मजबूती प्रदान कर रोगों का निवारण किया जाता है। लायंस क्लब के पूर्व जिला पाल श्री संजीव पोद्दार ने कैंप के आयोजक श्री नरेन्द्र लाखोटिया एवं श्री मुरारी लाल राजगढ़िया की प्रशंसा करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया कि उन्होंने इस वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति को रांची की जनता तक पहुंचा कर उल्लेखनीय कार्य किया है। श्री माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष किशन साबू ने बताया कि भविष्य में इस तरह के वैकल्पिक चिकित्सा कैंप का आयोजन किया जाता रहेगा। चिकित्सा परामर्श एवं इलाज प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 12 बजे तक तथा संध्या 4 बजे से 7 बजे तक चलेगा।आज के उद्घाटन कार्यक्रम में शिव शंकर साबू, रोहित अग्रवाल, प्रभात साबू, मनोज चौधरी, अमित मालपानी, अंकुर डागा, मंजू दरगड़, अजय दरगड़ उपस्थित रहे। उक्त जानकारी मीडिया प्रभारी रश्मि मालपानी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।
कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ देशभर में हो रहीं मॉकड्रिल, स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश जारी एबीएन हेल्थ डेस्क। देश के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्तियों का दौर लौटने लगा है। कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना फिर अनिवार्य कर दिया है, तो कई प्रदेशों ने बेहद सावधान रहने की हिदायत दी है। जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है। देशभर में मॉकड्रिल शुरू राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी अस्पतालों, पॉलिक्लीनिक व डिस्पेंसरियों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, कोरोना संक्रमण के चलते किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश भर में सरकारी और निजी अस्पतालों में दो दिन मॉकड्रिल होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में तैयारियों को परखने का निर्देश दिया था, साथ ही तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल करने के भी निर्देश दिये थे। जिसके बाद आज देशभर में मॉकड्रिल शुरू हो गई हैं। चेन्नई के राजीव गांधी जनरल हॉस्पिटल में भी कोरोना महामारी की तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल की गई, जिसका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण भी किया। संक्रमण को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियातन सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। जिला प्रशासन और पंचायतों को भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। केरल सरकार ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग नागरिकों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया है। पुडुचेरी प्रशासन ने भी तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक स्थलों पर मास्क अनिवार्य कर दिया है। वहीं, यूपी सरकार ने राज्य के सभी हवाईअड्डों पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सरकारी आदेश में पॉजिटिव पाए जाने वाले नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने को भी कहा गया है।
कहा-आपके पास कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े अधिक डेटा हैंएबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर से चीन पर सवाल उठाये हैं। सही तरह से जानकारी न देने पर नाराजगी भी जाहिर की है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने चीन पर कोविड-19 की उत्पत्ति पर जानकारी साझा करने का दबाव डाला है।उन्होंने कहा कि उन्हें निश्चित तौर पर ये पता है कि कोरोना वायरस के उत्पत्ती के संबंध में चीन के पास अधिक जानकारी है। डॉ टेड्रोस ने आगे कहा कि उन्होंने चीन से जल्द से जल्द सारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख के अनुसार, कोरोना वायरस के पहली बार उभरने के बाद से तीन से भी अधिक सालों से इसको लेकर सारी परिकल्पनाएं चर्चा की मेज तक ही सीमित हैं।डब्ल्यूएचओ ने और क्या कहा?डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने जिनेवा में मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन के पास जो जानकारी है, उसकी पूरा जाने बिना, कोरोना के संबंध में सभी बातें परिकल्पनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की उत्पत्ती के संबंध में यह डब्ल्यूएचओ की स्थिति है और इसलिए हम चीन से इस पर सहयोग करने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर बीजिंग पूरा डेटा दे देता है तो हमें पता चल जायेगा कि क्या हुआ या यह (कोरोना) कैसे शुरू हुआ।रेकून कुत्ते से फैला कोरोना?पिछले महीने के आखिर में, अचानक ये बात सामने आई कि रेकून कुत्ते, जो एसएआरएस- सीओवी -2 वायरस के समान वायरस फैलाने में सक्षम हैं, के कारण कोरोना वायरस का प्रसार हुआ। इधर, शोधकर्ता जो सटीक डेटा की तलाश में हैं, उनका कहना है कि उक्त तर्क (वायरस जानवर से इंसानों में फैला) संक्रमण के प्रसार के कारणों को सपोर्ट तो करता है, लेकिन कारण यही होगा ये निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है। डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने गुरुवार को पत्रकार को बताया कि नया डेटा सुराग प्रदान करता है, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, जिसमें जोर देकर कहा गया है कि डेटा जनवरी और फरवरी 2020 में तीन साल से अधिक समय पहले एकत्र किया गया था जिसे बहुत पहले साझा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, जानकारी के बिना, उचित आकलन करने के लिए डेटा के बिना, हमारे लिए ठोस जवाब देना बहुत मुश्किल है और वर्तमान समय में, हमारे पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि महामारी कैसे शुरू हुई। उन्होंने निश्चित तौर पर कहा कि चीन के अविश्वसनीय वैज्ञानिकों ने कहीं अधिक अध्ययन किया है और बहुत अधिक डेटा एकत्र किया है जो खोज में प्रासंगिक हो सकता है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि उनके पास अधिक जानकारी है, वैज्ञानिकों, सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों और सरकारों की आवश्यकता है। यह कोई खेल नहीं है।वुहान से हुई कोरोना की शुरुआतकोरोनावायरस की शुरुआत दिसंबर, 2019 में सबसे पहले चीन के बंदरगाह शहर वुहान से हुई थी। इसकी चपेट में अब तक दुनिया के 68 करोड़ 45 लाख 87 हजार 758 लोग आ चुके हैं। इनमें 65 करोड़ 74 लाख 80 हजार 712 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 68 लाख 36 हजार 267 मरीजों की मौत हो चुकी है। दुनिया में अभी 2 करोड़ 02 लाख 70 हजार 779 मरीज ऐसे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।
भारत में हुए रिसर्च में सामने आई बड़ी खबर एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार सार्स-सीओवी-2 वायरस से होने वाला डिमेंशिया से जूझ रहे रोगियों में इस रोग को और बढ़ा सकता है। जर्नल आॅफ अल्जाइमर्स डिसीज रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि डिमेंशिया के सभी प्रकारों वाले प्रतिभागियों को सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद डिमेंशिया और तेजी से बढ़ा। मानवीय समझ पर कोरोना के प्रभाव को लेकर अभी तक विस्तृत जानकारी का अभाव है, वहीं विशेषज्ञों ने इसे ब्रेन फॉग की संज्ञा दी है। अनुसंधानकतार्ओं ने पहले से डिमेंशिया से जूझ रहे 14 रोगियों में संज्ञानात्मक विकास पर कोरोना के प्रभावों का अन्वेषण किया जिन्हें सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद सोच-समझ संबंधी समस्या और बढ़ गई थी। इन रोगियों में चार अल्जाइमर्स रोग, पांच वस्क्युलर डिमेंशिया, तीन पार्किंसन से ग्रस्त थे और दो रोगी फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया की वजह से व्यवहार में बदलाव के शिकार थे। इन प्रतिभागियों का चयन कुल 550 डिमेंशिया रोगियों में से किया गया जिन्होंने मई 2013 से सितंबर 2022 के बीच पश्चिम बंगाल में बर्द्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल, बांगड़ इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस और निजी क्लीनिक में इलाज कराया। उन्होंने कहा कि रोगियों में समस्या तेजी से बिगड़ने का पता चला। मुख्य अध्ययनकर्ता और बांगुर इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस के सौविक दुबे ने कहा कि ब्रेन फॉग एक अस्पष्ट शब्द है जिसमें कोरोना के बाद विभिन्न संज्ञानात्मक आयाम को लेकर कोई विशेष कारक स्पष्ट नहीं किया गया है।
टीम एबीएन, रांची। सीसीएल के केंद्रीय अस्पताल, गांधीनगर, कांके रोड में 29 मार्च की सुबह नौ बजे से नि:शुल्क हृदय रोग संबंधी चिकित्सीय शिविर का आयोजन किया जायेगा। शिविर में यशोदा अस्पताल, हैदराबाद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ प्रमोद कुचलाकांति हृदय रोग से ग्रसित मरीजों की जांच करेंगे एवं चिकित्सीय सलाह देंगे। निःशुल्क हृदय संबंधी चिकित्सीय सलाह का राज्य के सभी लाभ उठा सकते हैं।
टीम एबीएन, रांची। राज्य के नौ जिलों में 12 अप्रैल से मिजल्स रुबेला का टीका लगेगा। इसमें साहेबगंज, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़, गिरिडीह, धनबाद और कोडरमा जिले शामिल हैं।नोडल पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार ने बताया कि मिजल्स रुबेला कार्यक्रम की शुरुआत 12 अप्रैल से सभी प्रभावित नौ जिलों में अभियान के रूप में होगी। इसके तहत नौ महीने से 15 वर्ष तक के सभी 45 लाख 62 हजार 492 बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य है। सभी जिलों को मिजल्स रुबेला अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर से कम्युनिकेशन प्लान (कार्य योजना) भेजी गयी हैं।
टीम एबीएन, रांची। पारस हेल्थकेयर ने आज अपने नये लोगो के लॉन्च के साथ अपने नये ब्रांड अभियान का अनावरण किया, जो उपचार और विश्वास का प्रतीक होते हुए इनोवेशन और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पारस हेल्थकेयर (जिसे अब पारस हेल्थ कहा जायेगा) ने अपने 4 ब्रांड मूल्यों करुणा, सुगमता, मितव्यता और उत्कृष्टता पर जोर दिया है और ध्यान केंद्रित किया है। पारस हेल्थ का नया दृष्टिकोण एक स्वस्थ भारत के लिए साझेदारी करना है और इसका मिशन बुनियादी सुविधाओं और उपचार की कमी वाले समुदायों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुलभ बनाना है। नई पहल के एक हिस्से के रूप में, पारस हेल्थ ने रोगियों की क्लिनिकल परीक्षण आवश्यकताओं के लिए प्रयोगशालाओं के एक नये वर्टिकल, पारस लैब्स में प्रवेश की घोषणा की है। पारस हेल्थ का भारत में 6 अस्पतालों का एक नेटवर्क है जो आज की तारीख में 1500 बेड संचालित करता है। 2006 में गुरुग्राम में अपने पहले अस्पताल के साथ शुरू हुई श्रृंखला का विस्तार पटना, दरभंगा, उदयपुर, पंचकुला, रांची तक हो गया है और अब यह श्रीनगर और कानपुर तक फैल गया है। यह नई सुविधाएं और शुरुआत मरीजों को सहायता प्रदान करने वाली सेवाएं प्रदान करेंगे और उन्हें सुव्यवस्थित करेंगे। इसके अतिरिक्त, ईएमआर और डिजिटल केयर टचप्वाइंट लागू किए जायेंगे, जिससे मरीज अपने घरों में आराम से प्रमुख सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। पारस हेल्थ द्वारा डिजिटल रोगी रिकॉर्ड बनाये रखा जाएगा, जिससे उनके रोगियों के अनुरूप उपचार और देखभाल की जा सके। मौके पर पारस हेल्थ के प्रबंध निदेशक डॉ धर्मिंदर नागर ने कहा कि पिछले 17 वर्षों से पारस हेल्थ अपने मरीजों को सस्ती, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। लक्ष्य हमेशा देश के किसी भी हिस्से में मौजूद होना रहा है जहां उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता होती है, और संगठन ने एक विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में खुद के लिए एक प्रतिष्ठा बनायी है जो अपने रोगियों की जरूरतों को पहले रखती है। हमारा परिवर्तन केवल हमारे नाम और लोगो में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पारस हेल्थ के भविष्य के रोडमैप को भी ध्यान में रखता है, जिसमें न केवल अस्पताल बल्कि रोगियों के घरों से उपचारात्मक, निवारक और देखभाल भी शामिल होगी। पारस हेल्थ के ग्रुप सीओओ डॉ सैंटी साजन ने कहा कि पारस हेल्थ का मिशन हमेशा सभी को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा है। हमारे पास उन लोगों की एक असाधारण टीम है जो अपने रोगियों और उनके परिवारों के लिए सबसे अच्छी देखभाल प्रदान करने के बारे में जुनूनी हैं। डॉक्टरों, नर्सों और सहायक सेवाओं की हमारी असाधारण टीम हमारे कम्पास हैं। हम क्लीनिकल उत्कृष्टता, सहानुभूति और बेहतरीन देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और रोगी परिणामों को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। रोगी - चिकित्सक - प्रक्रिया - लोग - प्लेस ( पेशंट- फिजिशियन- प्रोसेस-पीपल-प्लेस ) के हमारे 5 स्वास्थ्य सेवा स्तंभ निश्चित रूप से हमारे समुदायों की सभी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के लिए हमारी देखभाल और प्रतिबद्धता में विश्वास बढ़ाना जारी रखेंगे। पारस हेल्थ अपने नेटवर्क के तहत 9,000+ बेड के साथ 2031 तक भारत में सबसे बड़ा निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बनने की इच्छा रखता है। इसमें से लगभग 5000 बेड वित्त वर्ष 2028 तक आॅर्गेनिक और इनॉर्गैनिक विस्तार के माध्यम से जोड़े जायेंगे। 2,000+ बेड की प्रतिबद्ध विस्तार पाइपलाइन को कानपुर, श्रीनगर और पंचकूला विस्तार के माध्यम से पूरा किया जायेगा।
जापान के शोधार्थियों के अध्ययन में हुआ खुलासाएबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के शोधार्थियों ने एक अध्ययन में दावा किया है कि कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप का उप स्वरूप एक्सबीबी.1.5 अत्यधिक संक्रामक है। यह उप स्वरूप काफी तेजी से प्रसारित होने की क्षमता रखता है।शोधकर्ताओं के अनुसार, तीन साल बाद भी कोरोना वायरस का खौफ बना हुआ है। हालांकि, इसके खिलाफ अत्यधिक प्रभावी टीके मौजूद हैं। बावजूद इसके वायरस में आनुवंशिक बदलावों की निगरानी बेहद जरूरी है। द लैंसेट इंफेक्शन डिजीज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के जरिये जापानी शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक टीम हाल ही में नये एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप को चिह्नित करने में सफलता हासिल की है, जिसका पहली बार अक्तूबर 2022 में पता चला था।जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के प्रोफेसर केई सातो ने बताया कि ओमिक्रॉन का एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप पिछले स्वरूप की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकता है और इसमें अगले स्वरूप को पैदा करने की क्षमता भी ज्यादा है। ऐसे में महामारी वृद्धि को लेकर आशंका जतायी जा सकती है। उसके लिए हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर सावधानीपूर्वक निगरानी करनी चाहिए।स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन : शोधकर्ताओं के अनुसार, एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन है। टोक्यो विश्वविद्यालय के सिस्टम वायरोलॉजी विभाग के प्रो केइया उरीउ ने बताया कि स्पाइक प्रोटीन में अमीनो एसिड प्रतिस्थापन और वायरल में वृद्धि देखी गई है जो पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में प्रमुख समस्या बनी हुई है। बीते साल एक्सबीबी.1.5 वैरिएंट ने एक्सबीबी.1 वंशज को जन्म दिया था जिसके स्पाइक प्रोटीन में प्रतिस्थापन होने की वजह से अमेरिका में तेजी से फैला था। शोधकर्ताओं का मानना है कि सभी देशों को वायरस के बदलावों पर गंभीरता से निगरानी रखनी चाहिए।बढ़ रहा कोरोना का ग्राफ एक दिन में 754 नए मामले दर्ज : देश में चार महीने के अंतराल के बाद एक दिन में कोरोना संक्रमण के 700 से अधिक मामले सामने आये हैं। इसके साथ ही कोरोना के इलाजरत मरीजों की संख्या बढ़कर 4,623 पहुंच गयी है। इससे पहले पिछले साल 12 नवंबर को देश में कोरोना के 734 मामले दर्ज किये गये थे।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कर्नाटक में संक्रमण से एक मरीज की मौत के बाद देश में मृतक संख्या बढ़कर 5,30,790 हो गयी है। अब तक रिपोर्ट किये गये कोविड मामलों की कुल संख्या 4.46 करोड़ (4,46,92,710) तक पहुंच गयी है। भारत में अभी तक कुल 4,41,57,297 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोविड-19 से मृत्यु दर 1.19 फीसदी है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.80 फीसदी है।
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