एबीएन हेल्थ डेस्क। चीन में कोरोना बेकाबू है। जिसे देख पूरी दुनिया सकते में है। दिल्ली एम्स के चिकित्सकों में भी बेचैनी दिख रही है। उन्होंने देशवासियों से अपने और अपने परिवार की सुरक्षा के प्रति खुद सतर्क रहने की अपील की है। इसे लेकर एम्स के डॉ विनोद ने लोगों को स्वस्थ और सतर्क रहने जरूरी टिप्स भी दिये हैं। उन्होंने कहा है कि सभी परिवार के सदस्य कृपया ध्यान दें :
एबीएन हेल्थ डेस्क। रेफ्रिजरेटर तकनीकी प्रगति में से एक माना जा सकता है जिसमें हम खाने-पीने की चीजें लम्बे समय तक फ्रेश रखते हैं। कुछ समय के लिए खाने-पीने की चीजें फ्रिज में रखना समय की जरूरत है। हमारी मसरूफियत भरी जिंदगी में हम सुबह का खाना रात तक फ्रिज में ही सुरक्षित रखते हैं। अक्सर हम लोग वीकआॅफ के दिन ही सब्जियां और फू्रट खरीद लेते हैं और उसका पूरे हफ्ते इस्तेमाल करते हैं।
फल और सब्जियों को स्टोर करने से काम आसान हो जाता है। लेकिन आप जानते हैं कि सर्दी में कुछ फूड्स को फ्रिज में स्टोर करने से उनकी तासीर बदल जाती है और वो फूड बॉडी में जहर की तरह असर करते हैं। कुछ सब्जियां सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। इन सब्जियों को हम फ्रेश रखने के लिए फ्रिज में रख देते हैं। आप जानते हैं कि कुछ सब्जियों को फ्रिज में रखने से उनकी तासीर बदल जाती है और वो सेहत को नुकसान पहुंचाती है। आइए जानते हैं कि कौन-कौन सी ऐसी सब्जियां हैं जिन्हें फ्रिज में स्टोर नहीं करना चाहिए।
टमाटर को फ्रिज में नहीं रखें :
डायटिशियन के मुताबिक टमाटर को फ्रिज में स्टोर नहीं करना चाहिए। अगर आप टमाटर को रखना चाहते हैं तो कमरे के तापमान में रखें। एक्सपर्ट के मुताबिक टमाटर को फ्रिज में रखने से उसका स्वाद, बनावट और सुगंध में बदलाव होने लगता है। टमाटर ऐसी सब्जी है जो पकने के बाद एथिलीन गैस छोड़ती हैं जो सब्जियों को तेजी से पकाती है। टमाटर को अगर रखना चाहते हैं तो कमरे में रखें।
खीरा को फ्रिज में नहीं रखें :
कॉलेज आफ एग्रीकल्चर एंड एनवायर्नमेंटल साइंसेज के मुतााबिक अगर खीरे को 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे कुछ दिनों तक रखा जाए तो ये तेजी से सड़ने लगता हैं। खीरा को आप फ्रिज में नहीं रखें बल्कि नॉर्मल टेम्प्रेचर पर रखें। ज्यादा समय तक फ्रिज में रखा खीरा सेहत को बिगाड़ सकता है।
एवोकाडो :
एवोकाडो को फ्रिज में नहीं रखें। एवोकाडो में फैटी एसिड ज्यादा मात्रा में होता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी कम होता है। इस फूड को फ्रिज में रखने पर उसकी बाहरी परत सख्त हो जाती है और अंदरूनी भाग खराब होने लगता है। कच्चे एवोकाडोस को फ्रिज में रखने पर वो कच्चे ही रहेंगे और खराब हो जाएंगे और आपकी सेहत को नुकसान पहुंचायेंगे।
आलू को फ्रिज में कभी मत रखें :
कुछ लोग आलू को भी बाकी सब्जियों के साथ फ्रिज में रख देते हैं। आलू को फ्रिज में रखने पर उसमें मौजूद स्टार्च शुगर में बदल जाता है जो शुगर के मरीजों की ब्लड शुगर को बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट के मुताबिक आलू को फ्रिज में रखने के बजाए खुली जगह पर नॉर्मल तापमान में रखें।
लहसुन को रखें फ्रिज से दूर :
हेल्थलाइन की खबर के मुताबिक लहसुन को कई तरह से संग्रहित किया जा सकता है, जैसे कि कमरे के तापमान पर या रेफ्रिजरेटर या फ्रीजर में। लेकिन एक्सपर्ट के मुताबिक ताजा लहसुन को स्टोर करने का सबसे सरल और सबसे अच्छा तरीका आपके किचन में हैं। किचन में नॉर्मल तापमान पर लहसुन को स्टोर करने से उसकी तासीर नहीं बदली और वो सेहत के लिए उपयोगी रहता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन में तेजी से संक्रमण फैला रहे बीएफ.7 नामक कोविड-19 के नके म्यूटेशन ने केंद्र सरकार को लोगों को मास्क लगाने और टीका लगवाने की सलाह देने के लिए प्रेरित किया है। कोविड-19 के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के इस सब-वैरिएंट के देश में अब तक बीएफ.7 के चार मामले सामने आये हैं। इनमें से तीन गुजरात से हैं और एक ओडिशा से। दो संक्रमित व्यक्ति अमेरिका की यात्रा करके लौटे थे। ये महिलाएं हैं। हालांकि, चारों अब स्वस्थ हो चुके हैं।
भले ही भारत में आने वाले रोजाना केसों की संख्या नियंत्रण है, केंद्र ने बुधवार को संक्रमित मरीजों को निगरानी में रखने और उभरते वैरिएंट की पहचान करने के उपायों पर चर्चा की। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर आने वाले यात्रियों के नमूने फिर से लिए जा रहे हैं। केंद्र ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कहा है कि वे सभी कोविड केसों के नमूनों को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भारतीय एसएआरएस- सीओवी-2 जीनोमिक्स कंसोर्टियम प्रयोगशालाओं में भेजें।
बीएफ.7 क्या है : सभी वायरसों की तरह एसएआरएस- सीओवी-2, जिसके कारण 2020 में कोविड महामारी फैला, अल्फा, डेल्टा, ओमिक्रॉन और अन्य जैसे कई म्यूटेशन से गुजरा। ये वैरिएंट मानव प्रतिरक्षा (इम्यून सिस्टम) और टीके से बचने के लिए शाखाओं में बंट गये और अधिक सब-वैरिएंट के रूप में विकसित हुए।
बीएफ.7 (बीए.5.2.1.7) का पहला मामला भारत में पहली बार जुलाई में पाया गया था। यह अत्यधिक तेजी से फैलने वाले ओमिक्रॉन का एक सब-वेरिएंट है। यह चीन में प्रवेश करने से पहले पहली बार अमेरिका और यूरोप में पाया गया था, जहां यह नए संक्रमणों में तेजी से वृद्धि कर रहा है।
कैसे पता चलेगा कि मुझे बीएफ.7 संक्रमण है : बीएफ.7 संक्रमण वाले मरीजों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित लोगों के समान लक्षण दिखाई देते हैं। इसके लक्षणों में ऊपरी श्वसन संक्रमण, गले में खराश, थकान, नाक बहना, खांसी और बुखार शामिल हैं। कुछ रोगियों में लूज मोशन और पेट दर्द की शिकायत हो सकती है। नये सब-वेरिएंट के कारण ज्यादा लोगों को अस्पताल में भर्ती नहीं होना पड़ा है। हालांकि, ऐसे कुछ मामले हैं जिनमें मरीज को निमोनिया हुआ है। अधिकांश विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि चौथा बूस्टर डोज कुछ हद तक सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
क्या बीएफ.7 सब-वेरिएंट ज्यादा घातक है : बीएफ.7 वैरिएंट ओमिक्रॉन का एक वेरिएंट है, जिसमें ओमिक्रॉन की तुलना में अधिक न्यूट्रलाइजेशन रेजिस्टेंस है, जिसका अर्थ है कि टीके या यहां तक कि बाईवेलेंट बूस्टर डोज संक्रमण या पुन: संक्रमण को रोकने में सक्षम नहीं हो सकते। नये वेरिएंट की इनक्यूबेशन पीरियड कम है, यह बताता है कि संक्रमण का पता लगाने के लिए आरटी-पीसीआर टेस्ट प्रभावी नहीं होंगे।
हाई ट्रांसमिशन रेट के साथ, यह मौजूदा एक्सबीबी स्ट्रेन को प्रतिस्थापित करेगा, जो भारत में नए मरीजों में पाया जाने वाला सबसे प्रमुख स्ट्रेन है। अगर इसके प्रसार को रोकने के लिए कदम नहीं उठाये गये तो यह फैल सकता है।
एक अनुमान के अनुसार, BF.7 वेरिएंट से संक्रमित एक व्यक्ति अपने आसपास के 10-18.6 लोगों को संक्रमित कर सकता है। हालांकि, ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट की मृत्यु दर अधिक नहीं है, लेकिन विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल बताते हैं कि चीन की 60 फीसदी आबादी तीन महीने के भीतर संक्रमित हो जायेगी और हजारों लोगों के मरने की आशंका है। इसकी मुख्य वजह यह है कि चीनी नागरिकों को दी गई वैक्सीन कोविड-19 के शुरुआती वेरिएंट वाले एक मृत वायरस से विकसित किया गया था, जबकि एमआरएनए टीके म्यूटेशन के खिलाफ अधिक प्रभावी माने जाते हैं।
रौशन सिन्हा
टीम एबीएन, दारू (हजारीबाग)। प्रखंड क्षेत्र के पुनाई पंचायत के जरगा और इरगा पंचायत के बड़वार बिरहोर टोला के दर्जनों बच्चे गंभीर चर्म और अन्य रोगों से पीड़ित है पर इनका समुचित इलाज नही हो पा रहा है। सरकार के तरफ से इन्हें विशेष संरक्षित समुदाय का दर्जा दिया गया है पर इनके इलाज की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है।
चर्म रोग से पीड़ित बच्चों के माता पिता का कहना है कि इन बच्चों के इलाज वे गरीबी के कारण नहीं करा पा रहे हैं उनके मुहल्ले में बीडीओ, सीओ, मुखिया सहित कई लोग आते हैं पर किसी भी तरह से उनकी मदद नही मिल पाई है। लुप्त होती इस समुदाय की तरफ यदि ठीक से नहीं ध्यान दिया गया तो इनकी स्तिथि दिन ब दिन और खराब होती जायेगी।
जरगा का लक्ष्मण बिरहोर की आंखों में कुछ दिन पूर्व मिट्टी चली गयी थी जिसका भी इलाज वो ठीक से नहीं करा पा रहा है उसे एक आंख से दिखना पूरी तरह से बंद हो गया है और उसकी दूसरी आंख की भी रोशनी कम हो रही है। उसकी तबीयत ठीक नहीं रहने के कारण वो दिन भर घर में पड़ा रहता है और कोई मेहनत मजदूरी के काम भी नहीं कर पाता है। पंचायत के मुखिया अनिल कुमार देव ने उसकी आंखों का इलाज करवाने का भरोसा दिलाया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने कहा कि संगठन चीन में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों की खबरों को लेकर बेहद चिंतित है, क्योंकि देश ने अपनी शून्य कोविड नीति को मोटे तौर पर छोड़ दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं।
टेड्रोस ने बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को चीन में कोविड-19 की गंभीरता, विशेषकर अस्पतालों और गहन देखभाल इकाइयों में भर्ती मरीजों को लेकर और अधिक जानकारी की आवश्यकता है, ताकि जमीन पर स्थिति का व्यापक जोखिम आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि चीन में गंभीर बीमारी के बढ़ते मामलों की खबरों के बीच बदल रही स्थिति को लेकर डब्ल्यूएचओ बहुत चिंतित है।
टीम एबीएन, रांची। आमतौर पर पीठ के दर्द को लोग हल्के में ले लेते हैं लेकिन एक पीठ का दर्द कई अन्य बीमारियों का सूचक भी हो सकता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं। पीठ के दर्द से परेशान लोगों के लिए मेदांता रांची ने विशेष पहल की है और विशेष बैकएक क्लीनिक यानी पीठ के दर्द की क्लीनिक की शुरूआत की है।
रिडीटिंग पेन के बारे में विशेष जानकारी देते हुए मेदांता रांची के कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन डॉक्टर आनंद कुमार झा ने बताया कि वैसे मरीज जिनके पीठ में दर्द हो रिडीटिंग पेन यानी जिसे साइटिका कहते हैं, इस दर्द के कारण जिसके पैर में दर्द होता हो या चलने में परेशानी हो चलने के बाद बैठ जाना पड़ता हो। अगर ऐसे लक्षण हो तो वह इस क्लीनिक में संपर्क कर सकते हैं।
डॉक्टर आनंद ने बताया कि अगर पीठ में दर्द हो तो उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। वह आगे चलकर धीरे-धीरे सूनापन पैदा कर सकता है और अगर वक्त रहते इलाज न किया जाए तो पैरालाइसिस भी हो सकता है। डॉक्टर आनंद ने यह भी बताया कि बैकएक में भी कई तरह के दर्द होते हैं। इसमें अपर बैकएक, मिडल बैकएक और लोअर बैकएक होता है। इन सब में कॉमन बैकएक कॉमन होता है। जिसे कमर का दर्द भी कहा जाता है।
इस क्लिनिक में शनिवार को सुबह नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक संपर्क किया जा सकता है। बैकएक के मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेदांता रांची ने इस पहल को किया है। ऐसे मरीज जो बैकएक से परेशान हैं, उनके इलाज के लिए मेदांता की एक्सपर्ट टीम रहेगी।
टीम एबीएन, रांची। सिर का दर्द भले ही कहने के लिए आम हो लेकिन इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। जब भी सिर का दर्द हो, डॉक्टर से जरूर सलाह लें। सिरदर्द के इलाज के लिए मेदांता रांची ने विशेष पहल की है। इसके लिए विशेष सिरदर्द क्लिनिक को शुरू किया गया है। इस विशेष क्लिनिक के बारे में और जानकारी देते हुए मेदांता रांची के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर कुमार विजय आनंद ने बताया कि इस क्लीनिक में सिर दर्द से पीड़ित मरीज को एक प्रश्नोत्तरी दी जाएगी। उसके बाद कुछ अन्य पैरामीटर पर मरीज को देखा जाएगा।डॉ कुमार विजय आनंद ने बताया कि सिर दर्द के कई प्रकार होते हैं।
सिरदर्द को सामान्यत: दो भागों में वर्गीकृत किया जाता है, प्राइमरी और सेकेंडरी हेडेक। प्राइमरी हेडेक जिसमें माइग्रेन, टेंशन हेडेक, क्लस्टर सिरदर्द के अलावा कई अन्य तरह के सिरदर्द होते हैं। जिसका डायग्नोसिस मरीज के द्वारा जो जानकारी मिलती है, उसके आधार पर किया जाता है। सेकेंडरी हेडेक वैसे हेडेक होते हैं, जिसमें कुछ गंभीर अंडरलाइन कारण होते हैं, जैसे इंफेक्शन, स्ट्रोक, ट्यूमर, वैस्कुलाइटिस इत्यादि। ऐसे मरीजों में कई टेस्टों स्कैन करने की जरूरत होती है। क्लीनिक में वैसे मरीज जो सिर के विभिन्न तरह के दर्द से परेशान हैं, वह प्रत्येक बुधवार सुबह 9 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
क्लीनिक में वैसे मरीजों को प्राथमिकता दी जाएगी जो दूरदरज के क्षेत्र से अपना इलाज करवाने आएंगे। क्लिनिक में सिर दर्द के बारे में जागरूकता देने के साथ ही यह भी जानकारी दी जाएगी कि अगर सिर में दर्द है तो डॉक्टर से क्यों मिलना चाहिए? अगर किसी को सिर में दर्द है जो उनकी डेली लाइफ को और उनके कार्य को प्रभावित कर रहा है तो डॉक्टर से क्यों मिलना चाहिए? यदि सिर का दर्द रीसेंट आनसेट यानी हाल ही में शुरू हुआ हो या बहुत गंभीर शुरूआत हो, सिर के दर्द के साथ बुखार हो, सिर के दर्द के साथ चक्कर आ रहे हो, उल्टी जैसा हो रहा है, सेंस में कमी महसूस हो रही हो या फिर अचानक गिर गए हो, सिर में दर्द के साथ दृष्टि में परिवर्तन हुआ हो, तो न्यूरोलॉजिस्ट से तुरंत मिलना चाहिए।
डॉ कुमार विजय आनंद ने बताया कि मेदांता रांची में इस तरह की पहल पहली बार की जा रही है। वही इस क्लिनिक के बारे में और जानकारी देते हुए मेदांता रांची के ऊ्र१ीू३ङ्म१ विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता सेहत को लेकर बराबर पहल करता रहता है। मेदांता की कोशिश यह होती है कि लोगों को हर तरह की बीमारी के बारे में सचेत करने के साथ ही उचित और सुविधा पूर्ण इलाज उपलब्ध कराई जाए। मेदांता सेहतमंद इंसान, स्वास्थ्य समाज और उन्नत सुविधा के साथ इलाज के अपने मुख्य ध्येय को हमेशा सर्वोपरि रखता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। मंकीपॉक्स बीमारी को अब "एमपॉक्स" के नाम से जाना जायेगा, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने यह ऐलान किया है। दुनिया भर के विशेषज्ञों के साथ विमर्श कर डब्ल्यूएचओ ने मंकीपॉक्स का नाम बदला है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ को शिकायतें मिली थीं, जिसमें मंकीपॉक्स नाम का इस्तेमाल आपत्तिजनक और नस्लवादी टिप्पणियों के लिए किया जा रहा था। इसके बाद इसके नाम को बदलने पर विचार किया गया।
फिलहाल मंकीपॉक्स और एमपॉक्स दोनों ही नाम का इस्तेमाल होगा लेकिन अगले एक साल में मंकीपॉक्स नाम को पूरी तरह हटा दिया जायेगा। मंकीपॉक्स को इसका नाम इसलिए मिला क्योंकि इस बीमारी से जुड़े वायरस की पहचान सबसे पहले 1958 में डेनमार्क में शोध के लिए रखे गये बंदरों में हुई थी। हालांकि यह बीमारी कई जानवरों में पाई जाती है, और चूहों आदि जैसे रोडेन्ट्स जानवरों में खूब मिलती है। इस साल की शुरूआत में कई देशों में इस बीमारी से बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए थे।
यह वायरस पशुओं से फैलना शुरू हुआ और इंसानों में बहुत तेजी से फैला। 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कांगो में पहली बार मनुष्यों में इस बीमारी के लक्षण नजर आए थे। इसके बाद से इसका प्रचार मनुष्यों में मुख्य रूप से कुछ पश्चिम और मध्य अफ्रीकी देशों तक सीमित रहा। हालांकि इस साल इसके केस भारत सहित कई देशों में भी मिले। इस साल 110 देशों से लगभग 81,107 पुष्ट मामले मंकीपॉक्स के मिले। डब्ल्यूएचओ के अनुसार 55 लोगों की मौत भी दुनियाभर में इस साल मॉकीपॉक्स से हुई।
• मंकीपॉक्स चेचक की तरह होता है।
• इससे संक्रमण के 7 से 10 दिन में व्यक्ति में लक्षण दिखने लगते हैं।
• इसमें लक्षण को तौर पर संक्रमित व्यक्ति को बुखार महसूस होता है।
• शरीर में दर्द और थकान भी महसूस हो सकती है। यह पहला चरण है।
• संक्रमण के दूसरे चरण में त्वचा पर कहीं-कहीं गांठ दिखने लगती हैं और चकते आ जाते हैं और फिर यही चकत्ते बडे़ दानों में बदल जाते हैं।
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