हेल्थ

View All
Published / 2023-01-13 08:45:19
स्वस्थ जीवन के लिए घटायें चीनी की मात्रा...

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दुनिया के देशों को मसौदा दिशानिर्देश जारी किए हैं। इनमें में सुझाया गया है कि स्वस्थ आहार को बढ़ावा देने के लिए दुनिया के देश किस तरह राजकोषीय नीतियां तैयार कर सकते हैं। दिशानिर्देशों के एक महत्त्वपूर्ण हिस्से पर फिलहाल मंत्रणा चल रही है।

इसमें कहा गया है कि कर प्रणाली का सहारा लेकर चीनी युक्त पेय पदार्थों (एसएसबी) का उत्पादन नियंत्रित किया जा सकता है। डब्ल्यूएचओ ने विशेषकर उन देशों के अनुभव से सीखने की सलाह दी है जो चीनी युक्त पेय पदार्थों पर अतिरिक्त कर लगा रहे हैं। ऐसे देशों में ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और मैक्सिको शामिल हैं।

इस चिंता का एक मजबूत आधार है। विकासशील देशों सहित पूरी दुनिया में आवश्यकता से अधिक चीनी का इस्तेमाल मधुमेह (टाइप 2 डायबिटीज) का एक प्रमुख कारण माना जाता है। कार्बन युक्त पेय पदार्थ (कार्बोनेटेड ड्रिंक्स), एनर्जी ड्रिंक्स़, फलों के रस ये सभी एसएसबी की श्रेणी में रखे गए हैं।

मधुमेह जीवनशैली से जुड़ा रोग है जिसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विशेषकर, उन देशों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है जहां मधुमेह की बीमारी तेजी से फैल रही है। डब्ल्यूएचओ के अनुमान के अनुसार खराब गुणवत्ता वाले, अति प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ पूरी दुनिया में धूम्रपान से भी अधिक संख्या में लोगों को लील रहे हैं।

सरकारें निकोटिन का सेवन करने से रोकने के लिए राजकोषीय नीति का इस्तेमाल करती रही हैं, इसलिए यह आशा करने का तर्कपूर्ण कारण है कि सरकार मधुमेह पर नियंत्रण के लिए भी ऐसी ही नीतियां आजमा सकती है।

हालांकि भारत में कुछ अलग तरह की समस्याएं हैं जिनकी अनदेखी नहीं की जा सकती। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की संरचना कुछ ऐसी है जिसमें वर्तमान में बदलाव की गुंजाइश नहीं है। वातित पेय (एयरेटेड ड्रिंक्स) पर सिगरेट की तरह ही 28 प्रतिशत जीएसटी लगता है। इस पर और कर लगाना बुद्धिमानी नहीं होगी क्योंकि जीएसटी संरचना को अस्थिर करने से बचना ही उचित रहेगा।

एक और कर श्रेणी जोड़ने से पूरा जीएसटी तंत्र और पेचीदा हो सकता है। इस श्रेणी में मीठे एवं प्रसंस्कृत फल रस लाये जा सकते हैं। उदाहरण के लिए इस समय फ्रूट जूस का वर्गीकरण इस बात की व्याखात्मक रेखा है कि अतिरिक्त चीनी (एडेड शुगर) या अन्य मीठी सामग्री मायने रखती हैं या नहीं। इन पर 12 प्रतिशत दर से कर लगता है।

इस वर्गीकरण को दो और श्रेणियों में विभाजित करना सीधा उपाय होगा। इनमें एक श्रेणी एडेड शुगर वाली और दूसरी प्राकृतिक रसों वाली हो सकती है। एडेड शुगर वाली श्रेणी पर कार्बन फ्रूट जूस की तरह ही कर लगाया जा सकता है। वास्तव में एडेड शुगर ही समस्या की जड़ है, न कि कार्बन का मिश्रण।

वास्तव में परिष्कृत चीनी युक्त सभी उत्पादों पर ऊंचा कर लगाया जा सकता है। इससे खाद्य प्रसंस्करण कंपनियां अधिक चीनी युक्त उत्पाद बेचने के बजाय अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर तरीके खोज सकती हैं। भारत में सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामान्य तंदुरुस्ती के लिए इन उपायों के परिणाम जल्द ही दिखने लगेंगे। इसके अलावा उत्पादों पर एडेड शुगर का लेबल चिपकाया जा सकता है जैसा कि शाकाहारी एवं मांसाहारी उत्पादों के मामले में होता है।

इस विषय पर खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं दे पाया है। रोजमर्रा की जरूरतों के सामान बनाने वाली कंपनियों की मुहिम इसका एक कारण हो सकता है। उत्पादों पर सूचना स्पष्ट होने से उपभोक्ताओं का ध्यान तत्काल इसकी तरफ जाता है। केवल उत्पाद में उपयोग में लाए गए तत्त्वों के नाम अंकित करने से उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित नहीं होता है।

उत्पादों पर स्पष्ट लेबल होने से उपभोक्ताओं को चयन करने में आसानी होगी। दुनिया में इस संदर्भ में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां तंबाकू उत्पादों की तरह ही स्वास्थ्य संबंधी वैधानिक चेतावनी अंकित करना जरूरी होता है। इस दिशा में नियामकीय हस्तक्षेप की लंबे समय से जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों में मधुमेह के खतरों को लेकर जागरूकता फैलाना भी सरकार की तरफ से एक अच्छा प्रयास हो सकता है।

Published / 2023-01-12 18:34:25
ठंड में पर्याप्त मात्रा में पानी पीयें हर्ट के मरीज, रखें बीपी का ख्याल : डॉ नीरज प्रसाद

  • मेदांता रांची के डॉक्टर ने लोगों को दी सलाह 

एबीएन हेल्थ डेस्क। ठंड के मौसम में हार्ट के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इनमें कई ऐसे भी है जिन की हालत नाजुक हो जाती है। ऐसे पेशेंट्स मरीजों को इस मौसम में विशेष रूप से अपना ख्याल रखने की जरूरत है। मेदांता रांची के एसोसिएट डायरेक्टर, कार्डियोलॉजी डॉक्टर नीरज प्रसाद का कहना है कि कड़ाके की ठंड में कुछ सावधानियां जरूर रखनी पड़ेगी ताकि हालात विपरीत न हो। 

डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि कुछ ऐसे भी केस होते हैं। जिनको हल करना बहुत मुश्किल होता है। कार्डियोजेनिक शॉक वाले केस काफी चैलेंजिंग होते हैं। इनमें तीन ऐसे लिजन्स होते हैं, जिनके इलाज के दौरान काफी सावधानी रखनी होती है। इनमें एक नस होती है जिसकी शुरूआत मुंह से होती है और उसमें दो-तीन ब्रांच निकलते हैं। मुंह से निकलने वाली नस में जो बीमारी होती है और उसे खोला जाता है तो बीपी क्रैश करने का डर होता है। इस हालत में बहुत सावधानी और तेजी से इलाज करना पड़ता है। इसके अलावा सीटीओ क्रॉनिक टोटल ओकुलजन होता है। यह अगर पूरी तरीके से बंद हो तो भी मैं इसे खोल देता हूं। डॉक्टर नीरज बताते हैं कि हर 3 महीने में कोई न कोई एक चैलेंजिंग केस आता है। कई केस ऐसे भी आए हैं जिन में मरीजों को 10 से ज्यादा ब्लॉकेज देखा गया। अभी तक मैंने 18 ब्लॉकेज को ठीक किया है। 

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद बताते हैं कि शीतकालीन मौसम में तीन तरह की दिक्कतें आती है। तापमान कम हो जाता है, तब हमारे शरीर की नसें सिकुड़ जाती है तो रक्त का प्रवाह तेज हो जाता है। जिसके कारण ब्लॉक टूट जाते हैं। इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है। ठंड के वक्त 65 साल के ऊपर के लोगों को बहुत दिक्कत होती है। उनको इस मौसम में बचाकर चलना चाहिए।  

अगर हार्ट की बीमारी से बचना है तो किसी भी प्रकार के वैसे खाद्य पदार्थ का सेवन न करें। जिनमें निकोटिन होता है। इसके अलावा कभी भी तनाव न लें। तनाव के कारण ब्लड प्रेशर क्रिएट होता है। ब्लड प्रेशर के कारण कभी-कभी हार्ट अटैक होने का डर बना रहता है। अगर भोजन कर रहे हैं तो कोशिश रखें कि वह सात्विक हो। कई लोग प्रतिदिन नॉनवेज का सेवन करते हैं। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल बनता है जो खतरनाक हो सकता है। हाई कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से न केवल हार्ट बल्कि ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है। साथ ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान रखना चाहिए। हाई ब्लड प्रेशर नहीं होना चाहिए। इससे आर्टरी पर असर पड़ सकता है।  

मेदांता रांची के डॉक्टर नीरज प्रसाद ने बताया कि ठंड के दिनों में पानी की कमी से हार्ट के वेंट्रिकल में क्लॉट बनता है। वह कभी मस्तिष्क में या कहीं और चल जाता है पर वह हानिकारक हो सकता है। ये कम पानी पीने से होता है। इसलिए इस मौसम में पानी पीने में कमी नहीं होनी चाहिए। हल्का गर्म पानी पी सकते हैं।

Published / 2023-01-12 11:06:05
कोरोना मृतकों की संख्या कम बता रहा चीन: डब्ल्यूएचओ

एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दावा किया है कि चीन कोविड-19 से मरने वालों की संख्या को कम करके बता रहा है।डब्ल्यूएचओ ने बुधवार को कहा कि चीन कोविड-19 महामारी पर पहले की तुलना में अधिक जानकारी देने के बावजूद अभी भी महामारी से होने वाली मौतों की संख्या बेहद कम करके बता रहा है। कोविड-19 तकनीकी प्रमुख, मारिया वान केरखोव ने कहा कि चीन से मिलने वाली जानकारी में काफी खामियां हैं। इन खामियों को दूर करने के लिए हम चीन के साथ काम कर रहे हैं।

दरअसल, पिछले साल दिसंबर में शून्य-कोविड उपाय समाप्त किए जाने के बाद चीन में कोविड-19 का संक्रमण बढ़ गया है। चीन हालांकि इस बात से इनकार कर रहा है कि उसके द्वारा कोविड मौतों के आंकड़े छिपाया जा रहा है, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन सहित विश्वभर के विशेषज्ञ यह मान रहे हैं कि चीन जानबूझकर कोविड से होने वाली मौतों की संख्या कम दिखा रहा है।

चीन में कोविड के बढ़ते संक्रमण के चलते भारत सहित कई देशों ने चीन से आने वाले यात्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। बीजिंग ने इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए इसकी आलोचना की है। कोविड के मामलों में उछाल के बावजूद चीन में किसी नये कोविड वेरिएंट का पता नहीं चला है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऐसा परीक्षणों में कमी के कारण हुआ है।

चीन में करीब एक महीने पहले शून्य कोविड नीति खत्म कर दी गयी थी। इससे यहां कोविड मामलों में तेजी से उछाल आया और रिपोर्टों के अनुसार अस्पतालों और श्मशान घाटों तक की कमी हो गयी। दिसंबर में चीन ने कोविड से होने वाली मौतें चिह्नित करने के मानदंड बदल दिये। इससे सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोविड से मरने वालों की संख्या में काफी कमी आयी।

Published / 2023-01-11 21:16:13
बड़कागांव : अदाणी फाउंडेशन ने अंबाजीत में लगाया नि:शुल्क हेल्थ चेकअप कैंप

टीम एबीएन, बड़कागांव। गोंदलपुरा खनन परियोजना के तहत अदाणी फाउंडेशन ने बुधवार को मध्य विद्यालय अम्बाजीत परिसर में निशुल्क हेल्थ चेक-अप कैंप का आयोजन किया। अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत आयोजित इस कैंप में 85 ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें आवश्यक दवाएं निशुल्क प्रदान की गई। 

इस अवसर पर हजारीबाग के जेनरल फिजिशियन डॉ विजय चैतन्य के नेतृत्व में पैरामेडिकल स्टाफ की एक टीम ने ग्रामीणों को कई तरह की चिकित्सकीय सुविधाएं निशुल्क प्रदान की। सुबह 11:00 बजे से दिन भर चले इस कैंप में महिलाएं, ग्रामीण और बुजुर्गों के स्वास्थ्य की जांच की गयी। कैंप में कई महिलाएं भी अपने बच्चों के साथ आई हुई थीं।

Published / 2023-01-10 20:53:20
यदि आप भी ले चुके हैं वैक्सीन की दोनों डोज, तो जरूर पढ़ें ये खबर...

  • कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक ले चुके लोगों को लगने वाली बूस्टर खुराक पर आयी बड़ी खबर! 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की एक विशेषज्ञ समिति कोविशील्ड या कोवैक्सीन की दो खुराक ले चुके वयस्कों के लिए हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक के रूप में एसआईआई के कोविड-19 रोधी कोवोवैक्स टीके को बाजार में उतारने की मंजूरी देने पर बुधवार को फैसला कर सकती है। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक में प्राथमिक खुराक से अलग बूस्टर खुराक दी जा सकती है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विषय विशेषज्ञ समिति की बैठक 11 जनवरी को हो सकती है। 

सीरम इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (एसआईआई) के सरकारी और नियामक मामलों के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह ने कुछ देशों में महामारी के बढ़ते हालात के मद्देनजर वयस्कों के लिए हीट्रोलोगस बूस्टर खुराक के रूप में कोवोवैक्स को मंजूरी देने के लिए हाल में भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) को पत्र लिखा था। 

डीसीजीआई ने 28 दिसंबर, 2021 को वयस्कों के लिए आपात स्थिति में सीमित इस्तेमाल के लिए कोवोवैक्स को मंजूरी दी थी। उसने 12 से 17 साल की आयु के लोगों के लिए 9 मार्च, 2022 को तथा 7 से 11 साल के बच्चों के लिए 28 जून, 2022 को मंजूरी दी थी। ये मंजूरी कुछ शर्तों के साथ दी गयी। 

कोवोवैक्स का उत्पादन एसआईआई करता है जिसमें नोवावैक्स की प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने 17 दिसंबर, 2021 को आपात उपयोग के लिए इसे सूचीबद्ध करने की मंजूरी दी थी। 

अमेरिकी टीका निर्माता नोवावैक्स इंक ने अपने कोविड-19 टीके एनवीएक्स-सीओवी2373 के भारत एवं कम तथा मध्यम आय वाले देशों में विकास तथा व्यावसायीकरण के लिए अगस्त 2020 में एसआईआई के साथ लाइसेंस समझौते की घोषणा की थी।

Published / 2023-01-10 18:34:31
अब लीजिये... देश की हवा में घुले ओमीक्रॉन के सभी वेरिएंट

  • अब सरकारी सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन, जापान और अमेरिका समेत कई देशों में जानलेवा कोरोना वायरस फिर से कहर बरपा रहा है। इन देशों में ओमीक्रॉन के बीए.2 और एक्सबीबी वेरिएंट से सबसे ज्यादा लोग संक्रमित हुए। बड़ी बात यह है कि इन वेरिएंट्स समेत ओमीक्रॉन के सभी वेरिएंट और सबवेरिएंट भारत की हवा में भी घुल चुके हैं। हालांकि डरने की कोई बात नहीं है, क्योंकि देश में अभी तक इन वेरिएंट्स की वजह से मामलों में न तो उछाल देखा गया है और न ही मौतों की संख्या में कोई बढ़ोतरी हुई है। 

सरकार की सर्विलांस रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे के दौरान 324 पॉजिटिव नमूनों की सीक्वेंसिंग से भारत में सभी ओमिक्रॉन वेरिएंट की उपस्थिति का पता चला। स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि जिन क्षेत्रों में इन ओमीक्रॉन के इन वेरिएंट्स का पता चला है, वहां मृत्यु दर या कोरोना के मामलों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। 

एयरपोर्ट पर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की टेस्टिंग जारी 
मंत्रालय ने पिछले साल 24 दिसंबर से देश के तमाम एयरपोर्ट्स पर पहुंचने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की कोरोना टेस्टिंग शुरू की थी। मंत्रालय ने बताया कि तमाम एयरपोर्ट्स पर 7786 उड़ानों से 13.6 लाख से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत पहुंचे, जिनमें से 29 हजार 113 यात्रियों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया गया। इनमें से 183 नमूने पॉजिटिव पाये गये, जिन्हें बाद में पूरे जीनोम अनुक्रमण के लिए भेजा गया। 50 नमूनों की सीक्वेंसिंग से ओमिक्रॉन और ओमिक्रॉन सब-लाइनेज का पता चला था, जिसमें एक्सबीबी (11), बीक्यू.1.1 (12) और बीएफ7.4.1 (1) वेरिएंट शामिल थे। 

कोरोना के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप का नया मामला मिला 
बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप का एक नया मामला पाया गया है, जिससे देश में इस स्वरूप से संबंधित मामलों की कुल संख्या आठ हो गई है। कोरोना वायरस के एक्सबीबी 1.5 स्वरूप की वजह से अमेरिका में संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी गई थी। भारतीय सार्स कोव-2 जिनोमिकी संगठन (इंसाकोग) ने कहा कि पिछले 24 घंटे में संबंधित स्वरूप का नया मामला उत्तराखंड में मिला, जबकि इससे पहले एक्सबीबी 1.5 स्वरूप से जुड़े तीन मामले गुजरात में और एक-एक मामला कर्नाटक, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ तथा राजस्थान में मिला था।

Published / 2023-01-07 18:17:00
कोरोना के नये वेरिएंट से डरें नहीं, बस सचेत रहें, सावधानी अपनायें : डॉ तापस

  • मेदांता रांची में है कोविड के इलाज की उच्च स्तरीय सुविधा 
  • कोरोना के नये वेरिएंट से घबरायें नहीं, लक्षण दिखाई देने पर करें डॉक्टर से संपर्क : डॉ तेजवीर 
  • प्रोटीन वाली चीजें खायें, भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें : डॉ तेजवीर 

टीम एबीएन, रांची। देश में बीएफ 7 वैरिएंट के मामले अभी बहुत कम आए हैं। देश में उस स्तर पर सर्कुलेट नहीं हुआ है। ये बातें मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची के डॉक्टर तापस साहू ने कही। हालांकि उनका यह भी कहना था कि यह वेरिएंट बहुत तेजी से इनफैक्ट करता है और फैलता है। कोरोना के जितने भी ओमीक्रोन वेरिएंट आये थे, वह बहुत ही लो डेंसिटी के हैं। मतलब यह कि अगर कोई इनफेक्टेड होता भी है तो उसके लक्षण बहुत माइल्ड होंगे।  

डॉक्टर तेजवीर सिंह ने कहा कि देश में पिछले साल जनवरी-फरवरी में ओमीक्रोन की एक लहर आ चुकी थी। इससे देशवासियों में नेचुरल इम्युनिटी बन चुकी है। देश की अधिकतर आबादी कोविड-19 वैक्सीन के दो टीके ले चुकी है। बावजूद इसके हमें तैयार रहना होगा। घबराने की जरूरत नहीं है। अगर किसी ने बूस्टर डोज नहीं लिया है तो वह बिना देरी किए ये डोज ले ले, साथ ही मास्क पहनने और हाथों को सैनिटाइज करने पर विशेष ध्यान दें। बुजुर्ग, प्रेग्नेंट औरत या वैसे लोग जो हृदय, फेफड़े, किडनी की बीमारी के साथ डायबिटीज से ग्रसित है। उन्हें थोड़ा ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। 

डॉक्टर तेजवीर ने बताया कि मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची में कोरोना के इलाज के लिए सारी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है। यहां आईसीयू, टेस्टिंग, आइसोलेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर कोई कोरोना का मरीज आता है तो एक पल्मनोलॉजिस्ट लक्षण को देखता है। उसके बाद से आरटी और पीसीआर होता है। जिसकी रिपोर्ट 4 घंटे के अंदर चली जाती है। पॉजिटिव मरीज के लिए विशेष आइसोलेशन वार्ड हैं। अगर हमारे पास कोई संदिग्ध मरीज आता है तो उन्हें मेन आईसीयू में शिफ्ट नहीं करते हैं बल्कि उन्हें आइसोलेशन आईसीयू में शिफ्ट किया जाता है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती मरीज अलग आइसोलेशन में ही रहता है। अगर रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है तो उन्हें कोविड आइसोलेशन में शिफ्ट कर दिया जाता है। हमारे पास विशेष स्टाफ, विशेष नर्स, ग्राउंड स्टाफ भी हैं। पूरी फोर्स अलग है। अगर कोई कोविड पेशेंट आता है तो प्रॉपर सफाई करके दरवाजे से पेशेंट को ऊपर ले कर जाते हैं। इसके अलावा हमारे वार्ड बॉय अलग हैं। हमारे पास पल्मनोलॉजिस्ट और इंटरनल मेडिसिन की भी अलग टीम है। जरूरत पड़ने पर 24 घंटे सातों दिन आईसीयू के डॉक्टर हैं। 

वहीं मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल रांची के एमडी, पलमोनरी मेडिसिन और कंसलटेंट, पलमोनरी डॉक्टर तेजवीर सिंह ने बताया कि कोरोना का जो नया बीएफ 7 वेरिएंट आया है। यह कोरोना के ओमीक्रोन का ही सब वेरिएंट है। इसमें म्यूटेशन हो जाता है, उसे बीएफ सेवन के नाम से जाना जाता है। कोविड में पहले नेटिव वीटा था, फिर डेल्टा हुआ, ओमीक्रोन आया। अब ओमीक्रोन के म्यूटेशन के बाद बीएफ 1, बीएफ 2 आया और अब बीएफ 7 आया है। मूल रूप से यह ओमीक्रोन का ही सब-वेरिएंट है। 

डॉ तेजवीर से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि यह कितना घातक है, यह कहना थोड़ा मुश्किल है। क्योंकि अपने देश में ज्यादा मामले आए नहीं है। जितनी स्टडी हुई है, उससे यह पता चला है कि इस वेरिएंट की ट्रांसमिसिबिलिटी तेज है। यह फैलता बहुत जल्दी है और मोरटालिटी कम है। अपने देश में इसे वेरिएंट आॅफ कंसर्न का नाम दिया गया है। वेरिएंट की ट्रांसमिसिबिलिटी ज्यादा है। इससे अगर हॉस्पिटलाइजेशन ज्यादा हो, इम्यूनिटी को क्रॉस कर सके इसे वैरीअंट आॅफ कंसर्न कहा जाता है। अभी स्टडी चालू है। अब तक जितने भी स्टडी आए हैं, उसे देखकर यह कहा जा सकता है कि अभी घबराने वाली कोई बात नहीं है। 

डॉक्टर तेजवीर यह भी बताते हैं कि अपने देश की हम चीन से तुलना नहीं कर सकते। दोनों में बहुत फर्क है। चीन में वैक्सीनेशन नहीं हुआ है। चीन लॉकडाउन में था। अपने देश में पहले तीन लहरें हो चुकी हैं। देश की 80 प्रतिशत आबादी वैक्सीनेशन ले चुकी है। जो वैक्सीनेशन ले चुके हैं उनमें नेचुरल इम्यूनिटी है। इस नए वेरिएंट के लक्षण को लेकर बहुत सारे अफवाह उठ रहे हैं कि इसके लक्षण नये हैं। लेकिन जितनी भी स्टडी आई है उसके अनुसार लक्षण वही पुराने वाले हैं। बुखार, खांसी, सर्दी जुकाम, नाक का बंद होना, गले में खराश, गले में दर्द जैसे ही पुराने लक्षण है। जिनको भी लक्षण आ रहे हैं उन्हें खुद को आइसोलेट करना चाहिए। टेस्ट कराने चाहिए। टेस्ट कराना बहुत जरूरी है। जब तक टेस्ट नहीं करायेंगे तो पता नहीं चलेगा। मान लिया कि हल्के लक्षण हीं है। आइसोलेट होना पड़ा। डॉक्टर के पास आरटी-पीसीआर पॉजिटिव आएगा तो उसे जीनोम सिक्वेंस के लिए भेजा जायेगा। तब पता चलेगा कि कौन सा वेरिएंट है? इसलिए टेस्ट कराना बहुत जरूरी है। 

डॉक्टर तेजवीर का यह भी कहना है कि वैसे लोग जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा है और जो किसी बीमारी से ग्रस्त हैं, उनको सचेत रहने की जरूरत है। अगर कोई ब्लड प्रेशर, शुगर, किडनी की बीमारी से ग्रसित है तो उनको थोड़ा ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है। इससे बचने के लिए वैक्सीनेशन बहुत जरूरी है। डॉक्टर तेजवीर यह भी बताते हैं कि खाने-पीने में बेहतर खुराक का ख्याल जरूर रखें। विटामिन, मिनरल का सेवन करें। डायट को दुरुस्त रखें। बाहर का खाना संभव हो तो न खायें। फास्ट फूड छोड़ दें। प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा खायें।

Published / 2022-12-27 13:55:47
नेजल वैक्सीन को कोविन पोर्टल पर लिस्टेड करने की मंजूरी

  • जानें कितनी होगी भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन की कीमत

एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने जहां नाक द्वारा दी जाने वाली दवा नेजल वैक्सीन को बीते हफ्ते मंजूरी दे दी वहीं अब नेजल वैक्सीन की कीमत भी साफ हो गई है। बता दें कि अब इसे कोविन पोर्टल पर लिस्टेड करने की मंजूरी भी मिल गयी है। वहीं इसकी कीमत की बात करें तो इनकोवेक वैक्सीन की कीमत 800+ 5% जीएसटी बतायी जा रही है। यह सरकार द्वारा तय की गई कीमत है इसके अलावा सरकारी अस्पतालों में नेजल वैक्सीन की कीमत 325 रुपये होगी। वहीं, नेजल वैक्सीन जनवरी के आखिरी हफ्ते से लगेगी। 

दरअसल, हाल ही में केंद्र सरकार ने  भारत बायोटेक की नेजल वैक्सीन को मंजूरी दे दी है। इस वैक्सीन का नाम इनकोवेक है। कोविन प्लेटफॉर्म पर अब ये वैक्सीन भी उपलब्ध होगी। ये वैक्सीन 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को लगाई जायेगी इतना ही नहीं नाक से दी जाने वाली इस वैक्सीन को बूस्टर डोज पर लगाया जायेगा।

वहीं, सूत्रों ने कहा कि राज्य या केंद्र सरकारों ने खरीद के लिए कोई अपील नहीं की है। दूसरे देशों से मंजूरी मिलने के बाद इनकोवेक को अन्य देशों में वैक्सीन को निर्यात करने की योजना बना रहा है। इस इंट्रानेजल को भारत में 18 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बूस्टर डोज के लिए इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए सीडीएससीओ से भी मंजूरी मिल गई है।

Page 25 of 55

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse