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Published / 2023-04-10 18:48:42
कोरोना संक्रमण के साथ ही बढ़ने लगी सख्तियां

  • कोरोना संक्रमण बढ़ने के साथ देशभर में हो रहीं मॉकड्रिल, स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश जारी 

एबीएन हेल्थ डेस्क। देश के ज्यादातर हिस्सों में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए सख्तियों का दौर लौटने लगा है। कई राज्यों ने सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना फिर अनिवार्य कर दिया है, तो कई प्रदेशों ने बेहद सावधान रहने की हिदायत दी है। जांच में तेजी लाने का भी निर्देश दिया गया है। 

देशभर में मॉकड्रिल शुरू 

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी अस्पतालों, पॉलिक्लीनिक व डिस्पेंसरियों में जांच बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इस बीच, कोरोना संक्रमण के चलते किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश भर में सरकारी और निजी अस्पतालों में दो दिन मॉकड्रिल होगी। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और स्वास्थ्य विभाग के प्रधान और अतिरिक्त मुख्य सचिवों के साथ समीक्षा बैठक में तैयारियों को परखने का निर्देश दिया था, साथ ही तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल करने के भी निर्देश दिये थे। जिसके बाद आज देशभर में मॉकड्रिल शुरू हो गई हैं। 

चेन्नई के राजीव गांधी जनरल हॉस्पिटल में भी कोरोना महामारी की तैयारियों को लेकर मॉकड्रिल की गई, जिसका राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने निरीक्षण भी किया। संक्रमण को देखते हुए हरियाणा सरकार ने एहतियातन सार्वजनिक स्थानों और स्कूलों में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। 

जिला प्रशासन और पंचायतों को भी कोरोना प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। केरल सरकार ने गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग नागरिकों और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों के लिए मास्क अनिवार्य कर दिया है। 

पुडुचेरी प्रशासन ने भी तत्काल प्रभाव से सार्वजनिक स्थलों पर मास्क अनिवार्य कर दिया है। वहीं, यूपी सरकार ने राज्य के सभी हवाईअड्डों पर विदेश से आने वाले यात्रियों की जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। सरकारी आदेश में पॉजिटिव पाए जाने वाले नमूनों को जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भेजने को भी कहा गया है।

Published / 2023-04-07 14:08:25
चीन पर भड़क उठा डब्ल्यूएचओ

  • कहा-आपके पास कोरोना की उत्पत्ति से जुड़े अधिक डेटा हैं

एबीएन सेंट्रल डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कोरोना की उत्पत्ति को लेकर एक बार फिर से चीन पर सवाल उठाये हैं। सही तरह से जानकारी न देने पर नाराजगी भी जाहिर की है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने चीन पर कोविड-19 की उत्पत्ति पर जानकारी साझा करने का दबाव डाला है।

उन्होंने कहा कि उन्हें निश्चित तौर पर ये पता है कि कोरोना वायरस के उत्पत्ती के संबंध में चीन के पास अधिक जानकारी है। डॉ टेड्रोस ने आगे कहा कि उन्होंने चीन से जल्द से जल्द सारी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए भी कहा है। डब्ल्यूएचओ प्रमुख के अनुसार, कोरोना वायरस के पहली बार उभरने के बाद से तीन से भी अधिक सालों से इसको लेकर सारी परिकल्पनाएं चर्चा की मेज तक ही सीमित हैं।

डब्ल्यूएचओ ने और क्या कहा?

डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अदनोम घेब्येयियस ने जिनेवा में मीडिया से बातचीत में कहा कि चीन के पास जो जानकारी है, उसकी पूरा जाने बिना, कोरोना के संबंध में सभी बातें परिकल्पनाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की उत्पत्ती के संबंध में यह डब्ल्यूएचओ की स्थिति है और इसलिए हम चीन से इस पर सहयोग करने के लिए कह रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर बीजिंग पूरा डेटा दे देता है तो हमें पता चल जायेगा कि क्या हुआ या यह (कोरोना) कैसे शुरू हुआ।

रेकून कुत्ते से फैला कोरोना?

पिछले महीने के आखिर में, अचानक ये बात सामने आई कि रेकून कुत्ते, जो एसएआरएस- सीओवी -2 वायरस के समान वायरस फैलाने में सक्षम हैं, के कारण कोरोना वायरस का प्रसार हुआ। इधर, शोधकर्ता जो सटीक डेटा की तलाश में हैं, उनका कहना है कि उक्त तर्क (वायरस जानवर से इंसानों में फैला) संक्रमण के प्रसार के कारणों को सपोर्ट तो करता है, लेकिन कारण यही होगा ये निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है। 

डब्ल्यूएचओ की तकनीकी प्रमुख मारिया वान केरखोव ने गुरुवार को पत्रकार को बताया कि नया डेटा सुराग प्रदान करता है, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं है, जिसमें जोर देकर कहा गया है कि डेटा  जनवरी और फरवरी 2020 में तीन साल से अधिक समय पहले एकत्र किया गया था  जिसे बहुत पहले साझा किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, जानकारी के बिना, उचित आकलन करने के लिए डेटा के बिना, हमारे लिए ठोस जवाब देना बहुत मुश्किल है और वर्तमान समय में, हमारे पास इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है कि महामारी कैसे शुरू हुई।

 उन्होंने निश्चित तौर पर कहा कि चीन के अविश्वसनीय वैज्ञानिकों ने कहीं अधिक अध्ययन किया है और बहुत अधिक डेटा एकत्र किया है जो खोज में प्रासंगिक हो सकता है। उन्होंने कहा, हम जानते हैं कि उनके पास अधिक जानकारी है, वैज्ञानिकों, सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवरों और सरकारों की आवश्यकता है। यह कोई खेल नहीं है।

वुहान से हुई कोरोना की शुरुआत

कोरोनावायरस की शुरुआत दिसंबर, 2019 में सबसे पहले चीन के बंदरगाह शहर वुहान से हुई थी। इसकी चपेट में अब तक दुनिया के 68 करोड़ 45 लाख 87 हजार 758 लोग आ चुके हैं। इनमें 65 करोड़ 74 लाख 80 हजार 712 लोग ठीक हो चुके हैं, जबकि 68 लाख 36 हजार 267 मरीजों की मौत हो चुकी है। दुनिया में अभी 2 करोड़ 02 लाख 70 हजार 779 मरीज ऐसे हैं, जिनका इलाज चल रहा है।

Published / 2023-04-05 21:32:46
लोगों को कई खतरनाक बीमारी दे गया कोरोना...

  • भारत में हुए रिसर्च में सामने आई बड़ी खबर 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में हुए एक अध्ययन के अनुसार सार्स-सीओवी-2 वायरस से होने वाला डिमेंशिया से जूझ रहे रोगियों में इस रोग को और बढ़ा सकता है। जर्नल आॅफ अल्जाइमर्स डिसीज रिपोर्ट्स में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि डिमेंशिया के सभी प्रकारों वाले प्रतिभागियों को सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद डिमेंशिया और तेजी से बढ़ा। 

मानवीय समझ पर कोरोना के प्रभाव को लेकर अभी तक विस्तृत जानकारी का अभाव है, वहीं विशेषज्ञों ने इसे ब्रेन फॉग की संज्ञा दी है। अनुसंधानकतार्ओं ने पहले से डिमेंशिया से जूझ रहे 14 रोगियों में संज्ञानात्मक विकास पर कोरोना के प्रभावों का अन्वेषण किया जिन्हें सार्स-सीओवी-2 के संक्रमण के बाद सोच-समझ संबंधी समस्या और बढ़ गई थी। 

इन रोगियों में चार अल्जाइमर्स रोग, पांच वस्क्युलर डिमेंशिया, तीन पार्किंसन से ग्रस्त थे और दो रोगी फ्रंटोटेंपोरल डिमेंशिया की वजह से व्यवहार में बदलाव के शिकार थे। इन प्रतिभागियों का चयन कुल 550 डिमेंशिया रोगियों में से किया गया जिन्होंने मई 2013 से सितंबर 2022 के बीच पश्चिम बंगाल में बर्द्धमान मेडिकल कॉलेज अस्पताल, बांगड़ इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस और निजी क्लीनिक में इलाज कराया। 

उन्होंने कहा कि रोगियों में समस्या तेजी से बिगड़ने का पता चला। मुख्य अध्ययनकर्ता और बांगुर इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस के सौविक दुबे ने कहा कि ब्रेन फॉग एक अस्पष्ट शब्द है जिसमें कोरोना के बाद विभिन्न संज्ञानात्मक आयाम को लेकर कोई विशेष कारक स्पष्ट नहीं किया गया है।

Published / 2023-03-26 16:24:51
रांची : सीसीएल गांधीनगर अस्पताल में 29 को लगेगा नि:शुल्क हृदय रोग जांच शिविर

टीम एबीएन, रांची। सीसीएल के केंद्रीय अस्पताल, गांधीनगर, कांके रोड में 29 मार्च की सुबह नौ बजे से नि:शुल्क हृदय रोग संबंधी चिकित्सीय शिविर का आयोजन किया जायेगा। 

शिविर में यशोदा अस्पताल, हैदराबाद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ प्रमोद कुचलाकांति हृदय रोग से ग्रसित मरीजों की जांच करेंगे एवं चिकित्सीय सलाह देंगे। निःशुल्क हृदय संबंधी चिकित्सीय सलाह का राज्य के सभी लाभ उठा सकते हैं।

Published / 2023-03-24 10:56:20
झारखंड : नौ जिलों में 12 अप्रैल से शुरू होगा मिजल्स रुबेला का टीकाकरण

टीम एबीएन, रांची। राज्य के नौ जिलों में 12 अप्रैल से मिजल्स रुबेला का टीका लगेगा। इसमें साहेबगंज, दुमका, देवघर, जामताड़ा, गोड्डा, पाकुड़, गिरिडीह, धनबाद और कोडरमा जिले शामिल हैं।

नोडल पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार ने बताया कि मिजल्स रुबेला कार्यक्रम की शुरुआत 12 अप्रैल से सभी प्रभावित नौ जिलों में अभियान के रूप में होगी। इसके तहत नौ महीने से 15 वर्ष तक के सभी 45 लाख 62 हजार 492 बच्चों का टीकाकरण करने का लक्ष्य है। सभी जिलों को मिजल्स रुबेला अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य स्तर से कम्युनिकेशन प्लान (कार्य योजना) भेजी गयी हैं।

Published / 2023-03-20 19:35:28
नये लोगो और ब्रांड की पहचान के साथ अब पारस हेल्थकेयर बना पारस हेल्थ

टीम एबीएन, रांची। पारस हेल्थकेयर ने आज अपने नये लोगो के लॉन्च के साथ अपने नये ब्रांड अभियान का अनावरण किया, जो उपचार और विश्वास का प्रतीक होते हुए इनोवेशन और प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पारस हेल्थकेयर (जिसे अब पारस हेल्थ कहा जायेगा) ने अपने 4 ब्रांड मूल्यों करुणा, सुगमता, मितव्यता और उत्कृष्टता पर जोर दिया है और ध्यान केंद्रित किया है। 

पारस हेल्थ का नया दृष्टिकोण एक स्वस्थ भारत के लिए साझेदारी करना है और इसका मिशन बुनियादी सुविधाओं और उपचार की कमी वाले समुदायों के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुलभ बनाना है। नई पहल के एक हिस्से के रूप में, पारस हेल्थ ने रोगियों की क्लिनिकल परीक्षण आवश्यकताओं के लिए प्रयोगशालाओं के एक नये वर्टिकल, पारस लैब्स में प्रवेश की घोषणा की है। 

पारस हेल्थ का भारत में 6 अस्पतालों का एक नेटवर्क है जो आज की तारीख में 1500 बेड संचालित करता है। 2006 में गुरुग्राम में अपने पहले अस्पताल के साथ शुरू हुई श्रृंखला का विस्तार पटना, दरभंगा, उदयपुर, पंचकुला, रांची तक हो गया है और अब यह श्रीनगर और कानपुर तक फैल गया है। यह नई सुविधाएं और शुरुआत मरीजों को सहायता प्रदान करने वाली सेवाएं प्रदान करेंगे और उन्हें सुव्यवस्थित करेंगे। 

इसके अतिरिक्त, ईएमआर और डिजिटल केयर टचप्वाइंट लागू किए जायेंगे, जिससे मरीज अपने घरों में आराम से प्रमुख सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। पारस हेल्थ द्वारा डिजिटल रोगी रिकॉर्ड बनाये रखा जाएगा, जिससे उनके रोगियों के अनुरूप उपचार और देखभाल की जा सके।  

मौके पर पारस हेल्थ के प्रबंध निदेशक डॉ धर्मिंदर नागर ने कहा कि पिछले 17 वर्षों से पारस हेल्थ अपने  मरीजों को सस्ती, सुलभ और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। लक्ष्य हमेशा देश के किसी भी हिस्से में मौजूद होना रहा है जहां उच्च-गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा की आवश्यकता होती है, और संगठन ने एक विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवा प्रदाता के रूप में खुद के लिए एक प्रतिष्ठा बनायी है जो अपने रोगियों की जरूरतों को पहले रखती है।

 हमारा परिवर्तन केवल हमारे नाम और लोगो में बदलाव तक सीमित नहीं है, बल्कि पारस हेल्थ के भविष्य के रोडमैप को भी ध्यान में रखता है, जिसमें न केवल अस्पताल बल्कि रोगियों के घरों से उपचारात्मक, निवारक और देखभाल भी शामिल होगी। 

पारस हेल्थ के ग्रुप सीओओ डॉ सैंटी साजन ने कहा कि पारस हेल्थ का मिशन हमेशा सभी को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना रहा है। हमारे पास उन लोगों की एक असाधारण टीम है जो अपने रोगियों और उनके परिवारों के लिए सबसे अच्छी देखभाल प्रदान करने के बारे में जुनूनी हैं। 

डॉक्टरों, नर्सों और सहायक सेवाओं की हमारी असाधारण टीम हमारे कम्पास हैं। हम क्लीनिकल उत्कृष्टता, सहानुभूति और बेहतरीन देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने और रोगी परिणामों को बढ़ाने का प्रयास करते हैं। 

रोगी - चिकित्सक - प्रक्रिया - लोग - प्लेस ( पेशंट- फिजिशियन- प्रोसेस-पीपल-प्लेस ) के हमारे 5 स्वास्थ्य सेवा स्तंभ निश्चित रूप से हमारे समुदायों की सभी स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं के लिए हमारी देखभाल और प्रतिबद्धता में विश्वास बढ़ाना जारी रखेंगे। 

पारस हेल्थ अपने नेटवर्क के तहत 9,000+ बेड के साथ 2031 तक भारत में सबसे बड़ा निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाता बनने की इच्छा रखता है। इसमें से लगभग 5000 बेड वित्त वर्ष 2028 तक आॅर्गेनिक और इनॉर्गैनिक विस्तार के माध्यम से जोड़े जायेंगे। 2,000+ बेड की प्रतिबद्ध विस्तार पाइपलाइन को कानपुर, श्रीनगर और पंचकूला विस्तार के माध्यम से पूरा किया जायेगा।

Published / 2023-03-17 10:30:08
चिंताजनक... ओमिक्रॉन का एक्सबीबी.1.5 बेहद संक्रामक

  • जापान के शोधार्थियों के अध्ययन में हुआ खुलासा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के शोधार्थियों ने एक अध्ययन में दावा किया है कि कोरोना के ओमिक्रॉन स्वरूप का उप स्वरूप एक्सबीबी.1.5 अत्यधिक संक्रामक है। यह उप स्वरूप काफी तेजी से प्रसारित होने की क्षमता रखता है।

शोधकर्ताओं के अनुसार, तीन साल बाद भी कोरोना वायरस का खौफ बना हुआ है। हालांकि, इसके खिलाफ अत्यधिक प्रभावी टीके मौजूद हैं। बावजूद इसके वायरस में आनुवंशिक बदलावों की निगरानी बेहद जरूरी है। द लैंसेट इंफेक्शन डिजीज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के जरिये जापानी शोधकर्ताओं के नेतृत्व में एक टीम हाल ही में नये एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप को चिह्नित करने में सफलता हासिल की है, जिसका पहली बार अक्तूबर 2022 में पता चला था।

जापान की यूनिवर्सिटी ऑफ टोक्यो के द इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के प्रोफेसर केई सातो ने बताया कि ओमिक्रॉन का एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप पिछले स्वरूप की तुलना में अधिक तेजी से फैल सकता है और इसमें अगले स्वरूप को पैदा करने की क्षमता भी ज्यादा है। ऐसे में महामारी वृद्धि को लेकर आशंका जतायी जा सकती है। उसके लिए हमें सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर सावधानीपूर्वक निगरानी करनी चाहिए।

स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन : शोधकर्ताओं के अनुसार, एक्सबीबी.1.5 उप स्वरूप के स्पाइक प्रोटीन में नया म्यूटेशन है। टोक्यो विश्वविद्यालय के सिस्टम वायरोलॉजी विभाग के प्रो केइया उरीउ ने बताया कि स्पाइक प्रोटीन में अमीनो एसिड प्रतिस्थापन और वायरल में वृद्धि देखी गई है जो पश्चिमी और पूर्वी गोलार्ध में प्रमुख समस्या बनी हुई है। बीते साल एक्सबीबी.1.5 वैरिएंट ने एक्सबीबी.1 वंशज को जन्म दिया था जिसके स्पाइक प्रोटीन में प्रतिस्थापन होने की वजह से अमेरिका में तेजी से फैला था। शोधकर्ताओं का मानना है कि सभी देशों को वायरस के बदलावों पर गंभीरता से निगरानी रखनी चाहिए।

बढ़ रहा कोरोना का ग्राफ एक दिन में 754 नए मामले दर्ज : देश में चार महीने के अंतराल के बाद एक दिन में कोरोना संक्रमण के 700 से अधिक मामले सामने आये हैं। इसके साथ ही कोरोना के इलाजरत मरीजों की संख्या बढ़कर 4,623 पहुंच गयी है। इससे पहले पिछले साल 12 नवंबर को देश में कोरोना के 734 मामले दर्ज किये गये थे।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार को सुबह आठ बजे जारी अद्यतन आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटे में कर्नाटक में संक्रमण से एक मरीज की मौत के बाद देश में मृतक संख्या बढ़कर 5,30,790 हो गयी है।

 अब तक रिपोर्ट किये गये कोविड मामलों की कुल संख्या 4.46 करोड़ (4,46,92,710) तक पहुंच गयी है। भारत में अभी तक कुल 4,41,57,297 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं, जबकि कोविड-19 से मृत्यु दर 1.19 फीसदी है। मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 98.80 फीसदी है।

Published / 2023-03-16 21:53:11
दिल का ख्याल रखने के लिए जीवनशैली बदलें...

एबीएन हेल्थ डेस्क। एक समय था जब हार्ट संबंधी समस्याएं उम्रदराज लोगों को ही ज्यादा हुआ करती थीं। लेकिन आज हार्ट की बीमारी के शिकार हर आयुवर्ग के लोग हैं। भारत में एक बड़ी आबादी हृदय रोग से पीड़ित है और हृदय रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। युवाओं में हार्ट अटैक के मामले बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं। क्या वजह है? कहीं खानपान व लाइफस्टाइल में गड़बड़ हो रही है? जानिये उन गड़बड़ियों के बारे में जो युवाओं में हार्ट अटैक के कारणों को बढ़ावा दे रही हैं। 

पेट की चर्बी 

युवाओं में बैली फैट का बढ़ना और मोटापा दिल का दौरा पड़ने का सबसे बड़ा कारण है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की नयी रिपोर्ट के अनुसार अगर आपका बीएमआई सामान्य है और पेट के आसपास चर्बी की मात्रा अधिक है तो आपको दिल का दौरा पड़ने की आशंका कई गुणा बढ़ जाती है। ऐसे में व्यायाम और खुराक दोनों का ख्याल जरूरी है। 

पोषण का स्तर 

शोध बताते हैं कि भारत में 47 प्रतिशत लोगों को विटामिन बी12 की कमी है। विटामिन बी12 की कमी दिल का दौरा पड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण रिस्क फेक्टर है। बी12 की कमी से सीरम होमोसिस्टीन का स्तर बढ़ जाता है जो दिल के दौरे से सीधा संबंध रखता है। जिंक, सेलेनियम, विटामिन सी और विटामिन ई की कमी वाले आहार को भी हृदय रोग के बढ़ते जोखिम से जोड़ा जाता है। साथ ही सैचुरेटेड फैट्स, ट्रांस फैट्स और नमक यानी सोडियम का अत्यधिक सेवन हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है। 

नींद की अहमियत 

सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार जो वयस्क रोज रात को 7 घंटे से कम सोते हैं उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका काफी अधिक होती है। इसका कारण यह है कि नींद की कमी से अकसर तनाव बढ़ता है। जो आपको दिन भर गतिहीन बनाकर रखता है। इस वजह से आप भूख लगने पर बाहर से कुछ अनहेल्दी भी खा ही लेते हैं। यह सभी कारण शरीर में फैट को जमा करते हैं। जिसका आपके दिल की सेहत पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। 

तनाव के असर 

ज्यादातर लोग हर समय कुछ न कुछ सोच रहे होते हैं। इससे शरीर में स्ट्रैस हार्मोन बढ़ जाते हैं जो पेट के चारों तरफ फैट बनकर जमा होने लगते हैं। बहुत लोग तनाव में अधिक भोजन करते हैं। जिसके चलते अनहेल्दी फूड खा लेते हैं और ओवर ईटिंग के शिकार हो जाते हैं। इससे शरीर में कैलोरी का स्तर बहुत बढ़ जाता है। फैट और बढ़ जाता है। तनाव के चलते अनिद्रा दोष हो जाता है। ये सब स्थितियां हृदय रोग की आशंका बढ़ा देती हैं। तनाव हाई ब्लडप्रेशर या हाइपरटेंशन के कारणों में से एक है। दिल के दौरे का एक कारण हाई ब्लड प्रेशर भी है। 

तनाव 
तनाव को कैसे डील करते हैं यह आपकी ओवरआॅल वेलनेस पर प्रभाव डालता है। मनोवैज्ञानिक शोधों से यह बात सामने आई कि तनाव उन व्यक्तियों को अधिक प्रभावित करता है जो यह विश्वास करने लगते हैं कि तनाव की वजह से उनपर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। 

सक्रियता 

सन 2020 में हुए एक शोध में यह पाया गया कि शहरों में रहने वाले 60 प्रतिशत लोग निष्क्रिय या कम एक्टिव हैं। शारीरिक सक्रियता कम होना भी हृदय रोग बढ़ाता है। इसलिए यदि आपको एक ही स्थान पर बैठकर काम करना है तो अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज व योग को जरूर शामिल करें। स्वस्थ हृदय के लिए प्रतिदिन ढाई घंटा व्यायाम या योग करने की सलाह दी जाती है। 

धूम्रपान का कारक 

धूम्रपान करने से ब्लडस्ट्रीम में रसायन निकलते हैं। जो धमनियों और नसों के रक्त को गाढ़ा कर देते हैं और थक्का बनने का कारण बनते हैं। यह थक्के रक्तप्रवाह में बाधक बनते हैं। परिणाम स्वरूप दिल का दौरा पड़ता है। तम्बाकू का प्रयोग लगभग 11।9 प्रतिशत युवाओं द्वारा किया जाता है। यह चिंता का बड़ा कारण है। 

ये सभी कारण इस युवा पीढ़ी की बदलती जीवनशैली की वजह से हैं। हमने देर से सोना शुरू कर दिया है। फास्टफूड का सेवन ज्यादा है। वक्त-बेवक्त भोजन करते हैं। न सोने का समय निश्चित,न ही उठने का व न ही भोजन करने का। युवा पीढ़ी की एक निश्चित दिनचर्या ही नहीं है। ये सभी कारण केवल हृदय रोग ही नहीं बल्कि पीसीओडी, असामान्य लिपिड प्रोफाइल, अवसाद, एंग्जाइटी आदि का खतरा भी बढ़ा रहे हैं। हमारी पुरानी पीढ़ी अपने खानपान और जीवनशैली को लेकर बहुत सजग रही है। समय पर सोना और सुबह जल्दी उठना उनकी जीवनशैली का अहम हिस्सा रहा है जिसे आज की युवा पीढ़ी को अपने बड़ों से सीखने की जरूरत है।

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