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भारत में बनती है दुनिया की 60% वैक्सीन : डीआरडीओ वैज्ञानिक
Published / 2023-12-16 21:42:42
भारत में बनती है दुनिया की 60% वैक्सीन : डीआरडीओ वैज्ञानिक

एबीएन हेल्थ डेस्क। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) में इंस्टिट्यूट आॅफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंस के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ अनंत नारायण भट्ट ने कहा है कि भारत प्राचीन काल से ही औषधियों के उत्पादन की जननी रही है और वर्तमान समय में अपना देश पूरी दुनिया में लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन के उत्पादन का केंद्र है।डॉ भट्ट गोरखपुर में महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान संकाय व फार्मेसी संकाय के संयुक्त तत्वावधान एवं ट्रांसलेशन बायोमेडिकल रिसर्च सोसायटी के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के एक महत्वपूर्ण तकनीकी सत्र की अध्यक्षता करते हुए शनिवार को गोरखपुर में कहा कि एडवांसेज एंड आपर्चुनिटीज इन ड्रग डिस्कवरी फ्रॉम नेचुरल प्रोडक्ट्स श्बायोनेचर कॉम.2023 विषयक संगोष्ठी में जैव पॉलिमर एल्गिनेट से हेमोस्टैटिक एजेंट का विकास बिंदु पर अपना शोध प्रस्तुत करते हुए डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ भट्ट ने बताया कि गनशॉट से अत्यधिक रक्तस्राव की वजह से भारत के सेना के जवानों का जीवन खतरे में आ जाता है। उनके रक्तस्राव को रोकने हेतु एक स्वदेशी औषधि का निर्माण किया है जिसकी क्षमता अन्य दवाओं की अपेक्षा काफी बेहतर है। यह औषधि एलिग्नेट रसायन पर आधारित है।एक अन्य सत्र की अध्यक्षता करते हुए इंस्टिट्यूट आफ मॉलिक्यूलर एंड आयुर्वेदिक बायोलॉजी के निदेशक एवं बीएचयू के पूर्व प्रोफेसर डॉ राजा वशिष्ट त्रिपाठी ने आयुर्वेद के विभिन्न आयामों व पर महायोगी गोरखनाथ जी के ग्रंथो के सबद दोहावली को लेते हुए आहार-विहार पर विस्तृत जानकारी दी।उन्होंने कहा- हमें आयुर्वेद व आधुनिक विज्ञान को साथ में रखकर कदम से कदम मिलाकर आगे अध्ययन की जरूरत है जो भविष्य में मानवता के समग्र विकास हेतु एक वरदान साबित होगा। डॉ त्रिपाठी ने कहा कि भारत के वैदिक ग्रंथ मार्गदर्शक ग्रंथ हैं जिनके द्वारा संपूर्ण विश्व को निरोगी बनाया जा सकता है। जरूरत बस इन ग्रंथों में निहित ज्ञान को अपनाने की है। हमारा शरीर हर प्रकार के बीमारियो से निपटने की क्षमता रखता है और इस क्षमता का ज्ञान वैदिक ग्रंथों में वर्णित है।संगोष्ठी के एक सत्र में मुंबई के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रो आरवी होसुर ने द्दहर्बोलॉमिक्स, एन इमर्जिंग फ्रंटियर, विषय पर बात करते हुए कहा कि आयुर्वेद में सभी रोगों से निदान संबंधी सामग्री संकलित है। उन्होंने त्रिफला की उपयोगिता पर विस्तृत प्रकाश डालते हुए बताया कि त्रिफला एंटीआक्सीडेंट, सूजनरोधी और जीवाणुरोधी प्रभाव वाला एक प्राचीन हर्बल उपचार है। यह हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता है। त्रिफला पुरातन काल से प्रचलित महत्वपूर्ण औषधि है। त्रिफला को हर उम्र के लोग रसायन औषधि के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके नियमित सेवन से पेट से जुड़ी बीमारियों से बचाव होता है। यह औषधि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे गंभीर रोगों में भी लाभकारी है। आयुर्वेद के अनुसार त्रिफला में ऐसे गुण हैं जो पाचन शक्ति बढ़ाने और वजन घटाने में सहायक हैं।सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय पुणे के बॉयोटेक्नोलॉजी विभाग की डॉ शिल्पी शर्मा ने मधुमेह के प्रबंधन के लिए प्राकृतिक यौगिकों की क्षमता की खोज विषय पर अपना शोध अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधनों में लगभग सभी लाइलाज बीमारियों के इलाज हैं। मधुमेह जैसी भयानक बीमारी का इलाज भी आज वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया है और अब प्राकृतिक संसाधनों से इसकी दवाई भी बनाई जा रही है जिसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा। आईआईटी इंदौर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ हेम चन्द्र झा ने अश्वगंधा बैक्टीरिया और वायरस से प्रेरित गैस्ट्रिक के खिलाफ एक संभावित चिकित्सीय एजेंट है विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि अश्वगंधा चूर्ण या किसी भी माध्यम में इसे लेने से यह शरीर को स्वस्थ ही बनाता है। यह विभिन्न रोगों से लड़ने में और असामान्य बीमारी से हमें बचाने में भी कारगर सिद्ध होता है।

कोरोना की एक और लहर ने एक बार फिर बढ़ाया टेंशन
Published / 2023-12-16 11:46:51
कोरोना की एक और लहर ने एक बार फिर बढ़ाया टेंशन

कोविड-19 के नये वैरिएंट जेएन.1 से संक्रमित सात मरीज मिले एबीएन सेंट्रल डेस्क। कोरोना की एक और लहर एक बार फिर पूरी दुनिया को सताने वाली है। चीन में मिले सबवैरिएंट जेएन.1. के सात मामले ने एक बार फिर लोगों का टेंशन बढ़ा दिया है। चीन ने कोविड-19 के नये वैरिएंट जेएन.1 से संक्रमित सात लोगों का पता लगाया है। देश के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण और रोकथाम प्रशासन का कहना है कि फिलहाल देश में इसका खतरा काफी कम है। हालांकि, साथ ही अधिकारियों ने इस बात से भी इनकार नहीं किया है कि आगे यह खतरनाक नहीं हो सकता है। यूके, आइसलैंड, फ्रांस और अमेरिका में फैलने से पहले जेएन.1 वैरिएंट की पहचान सबसे पहले लक्जमबर्ग में की गयी थी। आइए जानते हैं कि क्या है कोविड-19 का नया वैरिएंट, इससे खतरा आदि।

सावधान... एक और नयी बीमारी का टेंशन दे रहा चीन
Published / 2023-11-30 20:53:47
सावधान... एक और नयी बीमारी का टेंशन दे रहा चीन

चीन की रहस्यमयी बीमारी को लेकर झारखंड में भी अलर्टसिविल सर्जन ने कहा- इसके लिए हम पूरी तरह से तैयारटीम एबीएन, रांची। रांची समेत पूरे झारखंड में एक बार फिर एक ऐसी बीमारी का खतरा मंडरा रहा है जो लोगों को मास्क पहनने पर मजबूर कर रहा है। दरअसल, इन दिनों चीन में एक और स्वास से जुड़ी बीमारी इन्फ्लूएंजा ने दस्तक दे दी है और इसका असर भारत में भी पड़ने की आशंकाएं जतायी जा रही है। इस बीमारी के शिकार ज्यादातर छोटे बच्चे हो रहे हैं।चीन से आये फ्लू को लेकर केंद्र सरकार ने अलर्ट जारी कर दिया है। जिसके बाद झारखंड में स्वास्थ्य विभाग अलर्ट हो गया है। रांची के सदर अस्पताल में भी यह कवायद शुरू हो गयी है और बेड और दवाइयों के पुख्ता इंतजाम किये जा रहे हैं।सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर ने कहा कि इसके लिए हम पूरी तरह से तैयार है और एहतियात बरती जा रही है, लेकिन डरने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि पूरे देश में वैक्सीन लगाये गये हैं और इम्यूनिटी मजबूत करायी गयी है।स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों के बारे में उन्होंने बताया कि हर लेवल पर तैयारियां की जा रही है और ब्लॉक लेवल पर बजी दवाइयां लेने को कहा गया है। ट्रेनिंग भी दी जा रही है और ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में उपलब्ध कराई जा रही है। वहीं बीएसए प्लांट का भी मॉक ड्रिल किया जा रहा है।

मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स अस्पताल ने रचा इतिहास, बिना चीरा लगाये हृदय वाल्व का सफलतापूर्ण उपचार
Published / 2023-11-23 21:14:12
मेदांता अब्दुर रज्जाक अंसारी मेमोरियल वीवर्स अस्पताल ने रचा इतिहास, बिना चीरा लगाये हृदय वाल्व का सफलतापूर्ण उपचार

मेदांता रांची हॉस्पिटल ने पहली बार ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन विधि से वाल्व प्रत्यारोपित कर बुजुर्ग मरीज की जान बचायी झारखंड में पहली बार मेदांता रांची हॉस्पिटल ने ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन विधि का प्रयोग कर आओरटिक वाल्व स्टेनोसिस का इलाज, पुराने (खराब), क्षतिग्रस्त वाल्व को हटाये बिना एक नया वाल्व लगाकर मिनिमल इनवेसिव प्रकिया से किया गया एबीएन हेल्थ डेस्क। मेदांता रांची के कार्डियक साइंस टीम के डॉक्टर द्वारा प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया कर हृदय रोगों से जुड़े मुद्दों पर बात की। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डाक्टरों ने बताया कि मेदांता रांची इलाज के साथ लोगों को हृदय रोगों से जुड़े खतरों के बारे में जाकरूक करता है। विभिन्न माध्यमों से पैदा की गई जागरूकता हृदय रोगियों को उनकी स्थिति को खराब होने से बचाने और हृदय को स्वस्थ जीवन शैली जीने में मदद करती है। हृदय रोगों के कई रूपों को स्वस्थ जीवन शैली विकल्पों के साथ रोका या इलाज किया जा सकता है, जबकि अन्य के लिए दवा या सर्जरी की आवश्यकता होती है। दिल की बीमारियों का जल्दी पता चलने पर इलाज आसान होता है। मेदांता अस्पताल अक्सर इस बड़ी समस्या से निपटने के लिए हृदय रोगों के बारे में प्रचार-प्रसार करने में अग्रणी रहा है। सभी हृदय संबंधी आपात स्थितियां जैसे कार्डियक अरेस्ट, तीव्र हृदय विफलता, कार्डियक अतालता, अस्थिर एनजाइना और विकारों को पूरा करना। मौके पर मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने एक अनोखा और अद्वितीय मेडिकल स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि मेदांता रांची के डाक्टरों ने एक मरीज का सफल इलाज किया। यह झारखंड में पहला केस, जहां बिना सर्जरी के मरीज के दिल के वाल्व को बदला गया है। उन्होंने बताया कि यह इलाज का एक बहुत ही एडवांस फॉर्म है, जिसमे ट्रांसकेथेटर आओर्टिक वाल्व इंप्लाटेशन पद्धति का इस्तेमाल किया गया है।  मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि मरीज उनके पास कुछ समय पहले आई थी। मरीज को रात में सोने में काफी दिक्कत होती है, उनकी सांस भी फूलने लगती थी। मरीज की समस्या को सुनने के बाद पहले उन्हें प्राथमिक उपचार दिया गया।डाक्टरों को चेकअप के दौरान पता चला कि मरीज को सीवियर कैल्सीफिक एसिस यानी यह एक ऐसी बीमारी  है, जिसमें मरीज के दिल का एक वाल्व सूख जाता है, जिसकी वजह से खून के प्रवाह में दिक्कत आती है। मरीज को इसकी वजह से अक्सर बेहोशी, सांस लेने में दिक्कत और थकावट होती थी। इसके साथ ही उन्हें बाएं वेंट्रिकुलर डिसफंक्शन भी था यानी उनका दिल कमजोर हो चुका था। इसलिए मरीज को अक्सर  दिक्कतों का सामना करना पड़ता था।  मरीज की समस्या को देखते हुए डाक्टरों की एक टीम का गठन किया गया । डाक्टरों ने समझा कि क्योंकि मरीज का  दिल कमजोर है इसलिए कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता, उनका इलाज इस तरह से करना होगा उनका दिल सुरक्षित भी हो जाए और उन्हें कोई तकलीफ भी ना हो। मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डा. मुकेश अग्रवाल ने बताया कि इस वाल्व को बदलने के दो तरीके थे- एक सर्जरी के माध्यम से और दूसरा नस के माध्यम से वाल्व का प्रत्यारोपन करना। काफी सोचने के बाद यह निर्णय लिया गया कि दूसरा तरीका अपनना चाहिए क्योंकि दिल कमजोर और सर्जरी की वजह से मरीज की जान को खतरा भी हो सकता है। डाक्टरों की टीम ने 14 नवंबर को ळं५्र पद्धति के माध्यम से इलाज किया, जिसमें मरीज के नस के माध्यम से वाल्व का प्रत्यारोपन किया गया। जिसके बाद मरीज पूरी तरह से स्वास्थ है। मौके पर मेदांता रांची के डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने कहा कि हमारी कोशिश होती है विभिन्न हृदय रोगों से पीड़ित रोगियों के लिए हृदय देखभाल की सुलभ और किफायती सुविधाएं प्रदान करे। उन्होंने कहा कि मेदांता रांची में कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर टीम उपलब्ध है। इसके बारे में और जानकारी देते हुए उन्होंने बतलाया, मेदांता रांची में कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर की विश्वस्तरीय प्रशिक्षित मेडिकल टीम है।उन्होंने इसकी अहमियत पर प्रकाश डाला और यह भी बताया की मेडिकल टीम इमरजेंसी कार्डियक  संबंधित समस्याओं के लिए 24 गुणा 7 सुविधाएं उपलब्ध है इसके अलावा जन्मजात हृदय रोग तथा वयस्कों के अति जटिल हृदय संबंधित समाधान आधुनिक मेडिकल सुविधाओं के साथ उपलब्ध है, मेदांता रांची में हृदय रोग संबंधित समस्याओं के लिए झारखंड की सबसे बड़ी कॉम्प्रिहेंसिव कार्डियक केयर टीम में से एक है।

वेबिनार में चिकित्सकों ने दिये दंत सुरक्षा और उसकी मजबूती के टिप्स
Published / 2023-11-06 19:06:42
वेबिनार में चिकित्सकों ने दिये दंत सुरक्षा और उसकी मजबूती के टिप्स

टीम एबीएन, रांची। वेबिनार का आयोजन 6/11/23 संध्याकाल में दंत्य प्रतिस्थापन विषयगत केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना लाभार्थी कल्याण संघ भारत ने आज संध्या को एक वेबिनार का आयोजन किया। इसमें देश भर के लाभार्थी भाग लिये। वेबिनार विश्वनाथ पांडे की अध्यक्षता में हुई।इसका संचालन डॉक्टर दिलीप गांगुली जन सम्पर्क प्रमुख ने की।संघ के महासचिव टी के दामोदरण ने धन्यवाद देते हुए कहा कि वेबिनर से दंत स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है और व्यापक जानकारी मिली है। वेबिनार के अतिथि दंत चिकित्सक रशमीत कुमार, बीडीएस, एमडीएस (ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी हैप्पी टूथ मल्टीस्पेशलिटी डेंटल क्लिनिक, लोरेटो कॉन्वेंट स्कूल के सामने, एजी रोड, डोरंडा रांची)  ने कहा कि दंत प्रतिस्थापन विषयगत मामले में भले ही दंत स्वास्थ्य देखभाल जागरूकता में काफी वृद्धि हुई है।फिर भी अधिकांश लोग दांतों की समस्याओं जैसे दांतों का झड़ना, मसूड़े की सूजन और दांतों की सड़न आदि का अनुभव करते हैं। शुरुआती दिनों में लापता दांतों को केवल डेन्चर या ब्रिज से बदला जा सकता। हालांकि, दंत चिकित्सा प्रौद्योगिकी के तेजी से विकास के साथ, उच्च दंत प्रत्यारोपण उपलब्ध हैं। डेंटल इम्प्लांट सर्जरी एक लोकप्रिय और सुरक्षित डेंटल प्रक्रिया है और इसे लापता दांतों के लिए एक अच्छा प्रतिस्थापन माना जाता है। जबड़े की हड्डी की स्थिति और अन्य स्वास्थ्य कारक दंत प्रत्यारोपण सर्जरी की संभावना निर्धारित करते हैं। प्रत्यारोपण का लाभ यह है कि वे प्राकृतिक दांतों के रूप में दिखाई देते हैं, मुस्कान बनाये रखते हैं और प्रत्यारोपण के आसपास हड्डी को सुरक्षित रूप से ठीक करने की सुविधा देकर मुंह की समग्र संरचना को बनाये रखते हैं। क्योंकि हड्डी ठीक होने में समय लगता है, उपचार पूरा होने में कुछ समय लग सकता है।ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि दंत प्रत्यारोपण की गहराई समझ लें। दंत प्रत्यारोपण कृत्रिम उपकरण हैं जो एक दंत चिकित्सक रोगी के जबड़े की हड्डी में रखता है। वे टाइटेनियम स्क्रू से बने स्थायी फिक्सेशन होते हैं, जो लापता दांत को बदलने के लिए मसूड़ों के नीचे जबड़े की हड्डी में शल्य चिकित्सा द्वारा प्रत्यारोपित किये जाते हैं। दंत प्रत्यारोपण तीन भागों से बना होता है :- ताज, सीमा और प्रत्यारोपण।दांतों के प्रतिस्थापन के लिए दंत प्रत्यारोपण को एक प्रभावी दीर्घकालिक समाधान के रूप में दिखाया गया है। यदि किसी व्यक्ति के एक या अधिक दांत टूट गये हैं, तो उन्हें दांतों के बीच के अंतराल को भरने के लिए दांत प्रत्यारोपण की आवश्यकता हो सकती है। बताया कि डेंटल इम्प्लांट सर्जरी में कई चरण शामिल होते हैं, जिनमें डेंटल इम्प्लांट साइट (जिसे ऑसियोइंटीग्रेशन के रूप में जाना जाता है) के आसपास ठीक से ठीक होने के लिए जबड़े की हड्डी की आवश्यकता होती है।इम्प्लांट को एक प्राकृतिक दांत के समान गमलाइन में पकड़ना होता है। प्रत्यारोपण जबड़े की हड्डी के भीतर एक शल्य प्रक्रिया द्वारा रखा जाता है और यह कृत्रिम दांत की जड़ के रूप में कार्य करता है। इस प्रक्रिया के लिए टाइटेनियम पहली पसंद है, क्योंकि यह इम्प्लांट को जबड़े की हड्डी के साथ सफलतापूर्वक जोड़ देता है। मजबूती से अपनी जगह पर बना रहता है और किसी ब्रिजवर्क की तरह क्षतिग्रस्त नहीं होगा। डेंटल इम्प्लांट सर्जरी एक डेंटल प्रक्रिया है जो लापता या क्षतिग्रस्त दांतों को कृत्रिम दांतों से बदल देती है जो असली दांतों की तरह दिखते और काम करते हैं। यह ऑपरेशन खराब फिटिंग वाले डेन्चर या ब्रिजवर्क के लिए एक स्वागत योग्य विकल्प हो सकता है।दंत प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए पसंदीदा उपचार है जिनके एक या अधिक दांत टूट चुके हैं। प्रत्यारोपण उन रोगियों के लिए उपयुक्त हैं, जिनका एक दुर्घटना में दांत टूट गया है, या दांत गंभीर रूप से सड़ चुके हैं और दांत निकालने की आवश्यकता है। यहां कुछ कारण बताये गये हैं कि किसी को दंत प्रत्यारोपण की आवश्यकता क्यों पड़ सकती है: कैविटी (दांतों की सड़न, दबाना या पीसने की आदत, दांत की जड़ का फ्रैक्चर, चेहरे की चोट  कटे ओट मसूढ़े की बीमारी कुछ मामलों में, कुछ कारकों के कारण दंत प्रत्यारोपण सफल नहीं हो सकते हैं। नीचे दी गयी स्थितियों में कोई व्यक्ति दंत प्रत्यारोपण प्राप्त करने के योग्य नहीं हो सकता है। धुआं, विकिरण उपचार गर्दन या सिर पर, अनियंत्रित मधुमेह, रक्त के थक्के विकार कैंसर जैसी पुरानी बीमारी, खराब रोग प्रतिरोधक क्षमता और जबड़े की हड्डी कमजोर होना।दंत प्रत्यारोपण से दंत प्रत्यारोपण बेहतर पाचन, चबाने की क्षमता में सुधार करता है। यह आपके आत्मसम्मान को बढ़ाता है।यह आपके बचे हुए दांतों को हिलने से रोकता है। यह आपकी मुस्कान को बरकरार रखता है।यह दांतों को प्राकृतिक रूप देता है। यह स्थायी या हटाने योग्य डेंटल ब्रिज और डेन्चर को बनाए रखने में मदद करेगा। अन्य स्वास्थ्य लाभों के अलावा आत्मविश्वास में सुधार करने के लिए दंत प्रत्यारोपण महत्वपूर्ण है। आगे बताया कि दंत प्रत्यारोपण उपचार में जोखिम दुर्लभ हैं, और जब वे उत्पन्न होते हैं, तो वे अक्सर हल्के और प्रबंधनीय होते हैं। इम्प्लांट साइट पर संक्रमण या मामूली रक्तस्राव हो सकता है। साथ ही आसपास के ऊतकों और तंत्रिका क्षति में मामूली चोट लग सकती है, जिससे असुविधा या सुन्नता हो सकती है।ऊपरी जबड़े में दंत प्रत्यारोपण साइनस गुहाओं में से एक में फैल सकता है, जिससे साइनस की समस्या हो सकती है। दुर्लभ परिस्थितियों में मामूली रक्तस्राव का पता लगाया जा सकता है। दंत प्रत्यारोपण के अधिकांश ऑपरेशन सफल होते हैं। उचित मौखिक स्वच्छता का अभ्यास करके संक्रमण से बचा जा सकता है, जैसे कि दिन में दो बार दांतों को ब्रश करना और इंटरडेंटल ब्रश का उपयोग करके अपने दांतों के बीच सफाई करना। आपको तंबाकू उत्पादों का उपयोग नहीं करना चाहिए और धूम्रपान से बचना चाहिए।प्रत्यारोपण प्रक्रिया के पहले सप्ताह के दौरान, दंत चिकित्सक किसी भी दर्द और दर्द का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाओं और इबुप्रोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द दवाओं का सुझाव देगा। सर्जरी के बाद मामूली असुविधा होगी और दंत चिकित्सक नरम खाद्य पदार्थ खाने, दर्द और सूजन को कम करने के लिए आइस पैक लगाने और सर्जिकल साइट के ठीक होने तक धैर्य बनाए रखने की सलाह देंगे। डेंटल इम्प्लांट सुरक्षित हैं और लापता दांतों को बदलने का एक प्रभावी तरीका है। एक बार डालने के बाद, दंत प्रत्यारोपण जबड़े की हड्डी में मिल जाते हैं। डाक्टर रशमित ने अंत में कई लाभार्थी भागीदारों के प्रश्नों के उत्तर संतोषजनक दिये।द्वारा- गणेश प्रसाद चौधरी कार्यपालक सदस्य केंद्रीय सारकार स्वास्थ्य सेवा लाभार्थी कल्याण एसोसिएशन, झारखण्ड रांची मोबाइल 9308255900

जानें थायराइड के कारण, लक्षण और निदान...
Published / 2023-11-05 23:06:21
जानें थायराइड के कारण, लक्षण और निदान...

दो तरह का होता है थायराइड, ये लक्षण दिखें तो भूलकर भी न करें नजरअंदाज एबीएन हेल्थ डेस्क। थायराइड की समस्या अमूमन महिलाओं में देखी जाती है, हालांकि कई पुरुषों को भी थायराइड हो जाता है। शरीर में हार्मोन के इंबैलेंस की वजह से ये बीमारी होती है। हमारे गले में मौजूद तितली के आकार की थायराइड ग्रंथि होती है, जो हार्मोन का निर्माण करती है। जब किसी वजह से इस एंडोक्राइन ग्रंथि की कार्यक्षमता प्रभावित होती है तो हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं। जिसकी वजह से थायराइड की समस्या से जूझना पड़ता है। इस बीमारी से पीड़ित होने पर सेहत संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। अधिकतर लोग शरीर में होने वाले छोटे-मोटे बदलावों पर ध्यान नहीं देते हैं, लेकिन इससे यह समस्या गंभीर हो सकती है। थायराइड भी दो तरह का होता है। जब शरीर में थायराइड हार्मोन ज्यादा बनने लगता है तब हाइपरथायरायडिज्म की समस्या होती है और जब यह हार्मोन कम मात्रा में बने तो व्यक्ति हाइपोथायरायडिज्म का शिकार होता है। थायराइड के शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दिया जाये तो लाइफस्टाइल में बदलाव कर और कुछ ट्रीटमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है। इसलिए इसके लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए।हाइपरथायराइड होने पर दिखते हैं ये लक्षणअगर किसी को हाइपरथायराइड की समस्या हो तो वजन कम होना, भूख ज्यादा लगना, मांसपेशियों में कमजोरी और दर्द, धड़कन तेज होना, घबराहट महसूस होना, बिना वजह चिड़चिड़ापन और पसीना ज्यादा आने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं। हाइपोथायराइड के क्या हैं लक्षण जब कोई हाइपोथायराइड से पीड़ित होता है तो उसे पसीना कम आना, बालों का ज्यादा झड़ना, थकान, चेहरे पर सूजन, कब्ज, स्ट्रेस महसूस होना, धड़कनों की गति कम महसूस होना, मांसपेशियों में अकड़न, जोड़ों में दर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इन चीजों से करें परहेज थायराइड के लक्षण दिखाई दे रहे हो तो सोयाबीन और उससे बनी चीजों का सेवन न करें, क्योंकि सोयाबीन में फाइटोएस्ट्रोजन पाया जाता है जो थायराइड हार्मोन बनाने वाले एंजाइम की कार्यक्षमता पर असर डाल सकता है। इसके अलावा इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को अल्कोहल, कैफीन युक्त चीजों जैसे चाय-कॉफी, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड्स से भी परहेज करना चाहिए। लाइफस्टाइल में करें ये बदलाव हेल्दी रहने के लिए यह बहुत जरूरी है कि रोजाना कुछ वक्त एक्सरसाइज के लिए निकाला जाये। थायराइड की समस्या में भी रोजाना वर्कआउट करने से काफी फायदा मिल सकता है, क्योंकि इससे आप अपना वेट मेंटेन रख पाते हैं। वहीं अपनी डाइट में तोरई, लौकी, परवल, मशरूम जैसी सब्जियां शामिल करें। इसके अलावा गाय का दूध, नारियल पानी, ग्रीन टी, बादाम, मूंगफली जैसे फूड्स भी फायदेमंद रहते हैं।

कोरोना ने बढ़ाया हार्ट अटैक का मामला...
Published / 2023-10-30 21:03:55
कोरोना ने बढ़ाया हार्ट अटैक का मामला...

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया का बड़ा बयान- कोरोना की वजह से बढ़ रहे हार्ट अटैक के मामले एबीएन हेल्थ डेस्क। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा है कि देश में हार्ट अटैक के मामले कोरोना वायरस की वजह से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पहले कोविड का सामना करना पड़ा था। उनमें हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट का रिस्क हो सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के एक अध्ययन का हवाला देते गुए कहा कि जो व्यक्ति गंभीर रूप से कोविड वायरस का शिकार हुए थे उन्हें दिल के दौरे से बचने के लिए एक या दो साल तक जरूरत से ज्यादा परिश्रम नहीं करना चाहिए। गुजरात में हाल ही में दिल संबंधी समस्याओं की वजह से बहुत से लोगों की मौत हुई है, जिसमें नवरात्रि महोत्सव के दौरान ह्यगरबाह्ण खेलते वक्त हुई घटना भी शामिल है। इसके बाद राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ऋषिकेश पटेल ने ह्यकार्डियोलॉजिस्टह्ण सहित चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ एक बैठक की। पटेल ने विशेषज्ञों से कारणों और उपचार का पता लगाने के लिए मौत के आंकड़े जुटाने को कहा है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया के बयान से यह साफ हो गया है कि हार्ट अटैक के केस बढ़ने का बड़ा कारण कोरोना वायरस है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट दिल्ली के राजीव गांधी अस्पताल में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में डॉ। अजित जैन बताते हैं कि कोरोना महामारी के बाद से ही हार्ट अटैक के केस बढ़े हैं। मरीजों की जांच के दौरान यह साफ हो गया था कि कोरोना वायरस के कारण हार्ट की आर्टरीज में खून के थक्के (ब्लड क्लॉट) बन गये थे। इन क्लॉट की वजह से हार्ट को ब्लड पंप करने में परेशानी हो रही है। इस वजह से दिल का दौरा पड़ रहा है। क्लॉट बनने की एक बड़ी वजह कोरोना का साइड इफेक्ट है। चिंता की बात यह है कि ये क्लॉट किसी भी उम्र के व्यक्ति के शरीर में बन रहे हैं। भले ही व्यक्ति बाहर से फिट नजर आ रहा हो, लेकिन उसकी हार्ट की नसों में खून के थक्के बन रहे हैं। कई मामलों में इसके कोई लक्षण भी नहीं दिखते हैं। यही कारण है कि अचानक हार्ट अटैक आ रहे हैं और लोगों की मौत हो रही है। वर्कआउट से बचें सफदरजंग हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजिस्ट डॉ दीपक कुमार सुमन बताते हैं कि जिन लोगों को कोरोना ने गंभीर रूप से बीमार किया था उन लोगों को हैवी वर्कआउट करने से बचना चाहिए। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के हिसाब से ही एक्सरसाइज करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि एक्सरसाइज के दौरान शरीर में आक्सीजन की सप्लाई बढ़ जाती है। ऐसे लंग्स पर प्रेशर पड़ता है और हार्ट भी तेजी से ब्लड पंप करने लगता है। अगर हार्ट में कोरोना की वजह या अन्य किसी कारण से ब्लड क्लॉट बना हुआ है तो हैवी एक्सरसाइज के दौरान हार्ट अटैक आने का खतरा है।

सदर अस्पताल रांची में लगा मानसिक स्वास्थ्य पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर
Published / 2023-10-14 17:48:16
सदर अस्पताल रांची में लगा मानसिक स्वास्थ्य पर एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर

टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 14 अक्टूबर 2023 को सदर अस्पताल रांची के सभागार में जिला स्तरीय तनाव प्रबंधन एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया। कार्यशाला की शुरुआत एनएमएचपी कार्यक्रम के स्टेट कंसलटेंट शांतना मैडम ने किया। सभा में उपस्थित स्वास्थ्य कर्मियों को संबोधित कहते हुए शांतना मैडम ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक है।विश्व स्वास्थ्य संगठन, मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुए कहता है कि यह सलामती की एक स्थिति है जिसमें किसी व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास रहता है, वह जीवन के सामान्य तनावों का सामना कर सकता है, लाभकारी और उपयोगी रूप से काम कर सकता है और अपने समाज के प्रति योगदान करने में सक्षम होता है।कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए मनोचिकित्सक डॉक्टर वीना मिस्त्री ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य  मनुष्य के सोचने, समझने, महसूस करने और कार्य करने की क्षमता को प्रभावित करता है। मानसिक विकार में अवसाद दुनिया भर में सबसे बड़ी समस्या है। यह कई सामाजिक समस्याओं जैसे- बेरोज़गारी, गरीबी और नशाखोरी आदि को जन्म देती है।मानसिक स्वास्थ्य शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है, और यह सबसे बड़ी दौलत में से एक है जिसे हर कीमत पर बचाने की जरूरत है।कार्यक्रम के दौरान अस्पताल प्रबंधक सुश्री जीरन मैडम, डिस्ट्रिक्ट फाइनेंस एवं लॉजिस्टिक कंसलटेंट सरोज कुमार चौधरी, डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम असिस्टेंट अभिषेक देव, डॉ नाजिया कैसर, सदर अस्पताल रांची की एएनएम, जीएनएम, नर्सिंग स्टाफ एवं पैरामेडिकल कर्मी मौजूद रहे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अप्रैल 1948 को की थी मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत
Published / 2023-10-10 18:51:04
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अप्रैल 1948 को की थी मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 10 अक्टूबर 2023 को मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष पर सिविल सर्जन रांची डॉ प्रभात कुमार ने सर्वप्रथम सिविल सर्जन कार्यालय के प्रांगण से फिरायालाल चौक तक प्रभात फेरी का आयोजन किया। जिसमें एनएमटीसी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने भाग लिया। तत्पश्चात सिविल सर्जन कार्यालय के सभागार में सिविल सर्जन महोदय की अध्यक्षता में परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सर्वप्रथम सिविल सर्जन ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुरुआत विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 7 अप्रैल 1948 को शुरुआत की थी। पूरे विश्व में यह 1950 में लागू किया गया। जिसका मकसद मानसिक तौर पर लोगों को स्वस्थ रखा जाना है। खास तौर पर कोविद-19 महामारी के दौरान लोगों में मानसिक अवसाद या मानसिक रूप से लोगों में अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंता बढ़ी है। कार्यक्रम को आगे बढ़ते हुए जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी पदाधिकारी सह नोडल पदाधिकारी एनसीडी सेल रांची डॉक्टर शोभा किस्पोट्टा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का एहसास होता है। इस स्थिति में व्यक्ति दूसरों के साथ सकारात्मक तरीके से बातचीत कर सकता है। साथ ही तनाव की समस्या से निपटने की क्षमता भी रखता है। मानसिक स्वास्थ्य विकार कई प्रकार के होते हैं। इनमें से कुछ सामान्य मानसिक स्वास्थ्य के प्रकार में ये शामिल हैं ।कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए जिला नोडल पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि हमें कुछ महत्वपूर्ण चीजों  को समझना अत्यंत आवश्यक है उदाहरण के तौर पर। चिंता (एंग्जायटी) मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एक विकार चिंता भी है। चिंता के कारण वास्तविक या काल्पनिक स्थितियों में अत्यधिक चिंता या भय उत्पन्न हो सकता है। अवसाद (डिप्रेशन) यह मानसिक समस्या सामान्य उदासी या दुख से अलग होती है। इसमें व्यक्ति को काफी दुख, क्रोध, निराश या फ्रस्टेशन हो सकती है।बाइपोलर डिसआर्डर बाइपोलर विकार को पहले मैनिक डिप्रेशन कहा जाता था। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को बारी-बारी से मेनिया (असामान्य रूप से भावनाओं को प्रकट करना) और अवसाद होता है। ईटिंग डिसआर्डर यह विकार भोजन और शरीर की छवि से संबंधित जुनूनी व्यवहार होता है। इस समस्या में व्यक्ति बहुत कम खाता है या फिर जरूरत से ज्यादा खाने लगता है। पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसआर्डर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी यह विकार ऐसी घटनाओं के बाद उत्पन्न होता है, जिसकी कभी आशा न की गई हो। इसमें किसी तरह की लड़ाई , किसी अपने की मृत्यु या गंभीर दुर्घटना शामिल है। इस समस्या की चपेट में आने वाला व्यक्ति तनाव और डर महसूस करता है। सिजोफ्रेनिया और सायकोटिक विकार यह एक गंभीर मानसिक रोग है। इसमें लोग ऐसी चीजों को देखने, सुनने और विश्वास करने लगते हैं, जो वास्तविक में हैं ही नहीं। अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसआर्डर (एडीएचडी) यह बच्चों में पाये जाने वाले सबसे आम मानसिक विकारों में से एक है। इस समस्या से जूझ रहे व्यक्ति को अपने व्यवहार को नियंत्रित रखने में परेशानी होती है। एडिक्टिव डिसआर्डरइस मानसिक समस्या के अंतर्गत व्यक्ति को शराब या ड्रग्स जैसे नशीले पदार्थों की लत लग सकती है। इस लत के कारण व्यक्ति की जान को भी जोखिम हो जाता है। पर्सनालिटी डिसआर्डरइस स्थिति में व्यक्ति की पर्सनालिटी यानी बिहेवियर में पूरी तरह बदलाव हो जाता है। इससे व्यक्ति के सोचने-समझने, खाने-पीने और सोने के समय में भी बदलाव होता है, जिसका असर व्यक्ति के रिश्तों पर भी पड़ सकता है। इससे व्यक्ति को तनाव होना भी काफी आम हो जाता है। मनोचिकित्सक डॉ वीना मिस्त्री द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया कि हम मानसिक स्वास्थ्य के लक्षणों को कैसे समझ पाएंगे इसके लिए हमें विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालें की आवश्यकता है।  बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के लक्षण-  खाने या सोने की आदतों में बदलाव  पसंदीद लोगों और गतिविधियों से दूरी बनाना  ऊर्जा हीन या लो एनर्जी का एहसास होना  सुन्न महसूस करना जैसे कि कुछ भी मायने नहीं रखता है  अजीब सा दर्द महसूस होना  असहाय या निराश महसूस करना  धूम्रपान, शराब पीना और ड्रग्स का अधिक उपयोग करना  कन्फ्यूज्ड होना, चीजों को भूलना और गुस्सा आना  परेशान, चिंतित या डरा हुआ महसूस करना  मूड स्विंग्स के कारण रिश्तों में दरार पड़ना।इस कार्यक्रम के दौरान जिला कार्यक्रम सहायक अभिषेक देव, फाइनेंशियल एवं लॉजिस्टिक कंसलटेंट सरोज कुमार चौधरी, मनोवैज्ञानिक नाजिया, जिला सलाहकार सुशांत कुमार, सोशल वर्कर सतीश कुमार एवं डाटा एंट्री आपरेटर सौरव आनंद मौजूद रहे।

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