हेल्थ

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Published / 2023-02-28 00:00:14
महामारी की तरह बढ़ रही है ऑस्टियोपोरोसिस : डॉ चौधरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आईएमए भवन में रविवार को हड्डी रोग पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य वक्ता के रूप में आईएमए सचिव डॉ सौरभ चौधरी, डॉ सुनील कुमार व डॉ राजेश ठाकुर शामिल थे। डॉ चौधरी ने कहा कि साइलेंट महामारी की तरह ऑस्टियोपोरोसिस बढ़ रही है। इसके प्रति लोगों में जागरूकता की कमी है। 

अधिकांश लोगों को यह बीमारी तब समझ में आती है, जब उनकी हड्डियां किसी न किसी कारण से टूट जाती है। 50 वर्ष के बाद लगभग  30 प्रतिशत  महिलाएं इस बीमारी से ग्रस्त हो जाती है। इस दौरान हड्डियां अंदर से खोखली हो जाती है और उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसका इलाज संभव है। अगर किसी व्यक्ति को पीठ में दर्द, आसानी  से  बोन  फ्रैक्चर  हो जाना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द होना सहित अन्य परेशानी हो तो उसे नजर अंदाज न करें। उसकी जांच कराएं। 

वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ सुनील कुमार ने घुटने के दर्द वाले रोगी का इलाज कैसे करना है, उसके बारे में बताया। इस अवसर पर आइएमए के अध्यक्ष डॉ जीसी माझी सहित दर्जन भर डाक्टर उपस्थित थे।

Published / 2023-02-23 23:21:45
झारखंड : राज्य में पहली बार 3डी विजन से हुई लेप्रोस्कोपिक सर्जरी

टीम एबीएन, रांची। विज्ञान और तकनीक हेल्थ सेक्टर में आये दिन कुछ नई मशीनें लेकर आ रहे हैं, जो मरीजों के साथ-साथ डॉक्टरों के लिए भी रामबाण होते नजर आ रहे हैं। हम बात कर रहे हैं झारखंड की राजधानी रांची की। यहां धुर्वा स्थित पारस एचईसी हॉस्पिटल में 3डी विजन के माध्यम से लेप्रोस्कोपी ऑपरेशन किया गया है।

पारस हॉस्पिटल के डॉक्टर संजय ने ABN से खास बातचीत की। उन्होंने कहा कि 3डी विजन आने से न सिर्फ मरीजों को फायदा होगा, बल्कि हम जैसे डॉक्टर का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और जब डॉक्टर का कॉन्फिडेंट होगा तो ऑपरेशन बेहतर और सटीक होगा। हेल्थ सेक्टर के लिए टेक्नोलॉजी एक क्रांति है। डॉक्टर संजीव कुमार ने कहा कि लेप्रोस्कोपिक में रोगी के पेट में पोर्ट से छेद कर कार्बन डाईऑक्साइड गैस भरी जाती है। ऐसा करने से रोगी का पेट फूल जाता है। 

इसके बाद तीन और सूराख बनाये जाते हैं। इन तीन सूराखों में एक से एचडी कैमरा और दो से सर्जरी उपकरण पेट के अंदर डाले जाते हैं। कंसोल की मदद से चिकित्सक पेट के भीतर उपकरणों के हर मूवमेंट पर नजर रखते हैं और उस हिस्से को काट-काट कर निकालते हैं, जो बीमारी का कारण होता है। 3डी कैमरे से हमें स्पष्ट रूप से चीजें दिखती हैं। सबसे बड़ी बात है कि हम काफी गहराई तक जा कर ऑपरेशन कर सकते हैं। इससे बारीक नसें बहुत आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। साथ ही बहुत स्पष्ट दिखाई देने से ऑपरेशन भी बहुत जल्द और सटीक होता है। इस ऑपरेशन में कोई अतिरिक्त खर्च नहीं आता।

डॉक्टर संजीव कुमार कहते हैं इस ऑपरेशन में आधुनिक मशीन का उपयोग होगा। पर इसमें कोई अतिरिक्त खर्चा नहीं है। सामान्य लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में 50,000 रुपये का खर्च आता है, 3डी के बाद भी इसका खर्च यही रहेगा। साथ ही 24 घंटे के अंदर हम मरीज को डिस्चार्ज कर देते हैं। इससे मरीज बड़ी जल्दी स्वस्थ होगा व जल्दी डिस्चार्ज होगा तो खर्च भी कम आयेगा। लेप्रोस्कोपिक 3डी माध्यम से ऑपरेशन करा चुकीं कविता कहती हैं कि ऑपरेशन के बाद बहुत जल्दी डिस्चार्ज कर दिया गया। जिस वजह से खर्च काफी कम आया व आराम भी है।

Published / 2023-02-22 18:24:47
बर्ड फ्लू को लेकर पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं...

  • बर्ड फ्लू को लेकर केंद्रीय टीम का बोकारो दौरा

टीम एबीएन, बोकारो/ रांची। बोकारो के सरकारी फार्म में एमबीएल फ्लू के प्रकोप के बाद उसकी स्थिति का आंकलन करने के लिए मंगलवार को केंद्रीय टीम बोकारो पहुंची। जिसमे दिल्ली से पशुपालन विभाग से डॉक्टर जिमी शर्मा, कोलकाता से हेल्थ विभाग की टीम में डॉ सीएस तलकर, डॉ अमित भौमिक और डॉ शिव कुमार शामिल थे। 

इस दौरान 1040 अंडे और 103 मुर्गियों को नष्ट का दिया गया। 908 मुर्गी फार्म में थे। जिसमे से लगभग 800 मुर्गी फ्लू से मरी हैं। बताते चलें कि मुर्गियों के मरने की शुरुआत 03 फरवरी से हुई थी। वहीं सैंपल की रिपोर्ट पॉजिटिव 21 फरवरी को आयी थी। पशुपालन विभाग से आई डॉक्टर जिमी शर्मा ने पशुपालन विभाग के डाटा को कलेक्ट किया और आवश्यक दिशा निर्देश दिये। 

उन्होंने आसपास के पोल्ट्री फार्म जहां चिकेन की संख्या अधिक है, वहां सैंपल करने के काम की जानकारी ली। वहीं कोलकाता से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पोल्ट्री फार्म में हैंडलर और कर्मियों को सर्विलांस पर रखा है। क्योंकि वह सभी संक्रमित मुर्गी के कॉन्टेक्ट में रहे हैं। कोलकाता से आई हेल्थ विभाग की टीम ने सिविल सर्जन से मुलाकात की और आवश्यक दिशा निर्देश दिए। 

उनके साथ जिला महामारी विशेषज्ञ पवन कुमार श्रीवास्तव भी मौजूद थे। पशुपालन पदाधिकारी मनोज कुमार मणि ने बताया बुधवार से ही सैंपलिंग का काम शुरू हो गया है जरीडीह, सिवानडीह और चास समेत अन्य स्थानों पर सैंपलिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब तक की जांच में कहीं बड़ी संख्या में मुर्गियों के मरने की सूचना नहीं मिली है। सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ भी स्पष्ट हो सकेगा। 

सहायक निरीक्षक प्रदीप ने बताया कि इसमें पैनिक होने की जरूरत नहीं है। इससे बचाव की आवश्यकता है, अगर किसी को इस प्रकार की कोई भी सूचना मिलती है, तो तुरंत कंट्रोल रूम को अवगत कराएं ताकि वहां एहतियात के तौर पर जो कदम उठाना चाहिए उसे उठाया जा सके। उन्होंने पोल्ट्री फार्म संचालकों से भी अपील की है कि अगर उन्हें अपने फार्म में इस प्रकार का कोई लक्षण देखने को मिलता है तो तुरंत पशुपालन विभाग को अवगत करायें।

Published / 2023-02-17 18:52:17
मेदांता रांची की एक और उपलब्धि, क्रिटिकल केस में मरीज का किया सफल उपचार, स्वस्थ जीवन जी रही मरीज

  • मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी 

टीम एबीएन, रांची। अपनी एक्सपर्ट डॉक्टर्स की टीम, अत्याधुनिक तकनीक और मरीज के प्रति जिम्मेदारी के साथ मेदांता रांची सफल उपचार में लगातार उपलब्धि हासिल कर रहा है। मेदांता रांची ने एक 70 वर्षीय महिला का सफल इलाज किया है। इस महिला को डीसीएम यानी डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी बीमारी थी। उपचार के बाद महिला अभी एकदम स्वस्थ्य जीवन जी रही है। 

मेदांता रांची के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी डॉ मुकेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि मेदांता रांची में एक 70 वर्षीय महिला का केस आया था। इनको शार्टनेस आफ ब्रेथ था। जिसकी ग्रेडिंग इनवाईएचए क्लास 4 थी। ये महिला रात में सो भी नहीं पाती थी। रात भर बैठ कर रहती थी। 

इनकी सांस इतनी फूल रही थी। मेदांता रांची में जब इनका इलाज शुरू हुआ तो बहुत सारे मेडिसिन दिए गए। लेकिन इन महिला मरीज की प्रॉब्लम ठीक नहीं हो पा रही थी। मरीज का इजेकशन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, जबकि उनकी डायग्नोसिस डीसीएम था साथ ही इसीजी में एलबीबीबी था।  

डॉ मुकेश ने बताया कि इसके बाद मरीज को एक डिवाइस लगाने की प्लानिंग की गई। इस डिवाइस को सीआरटीडी कहा जाता है। उस डिवाइस को मेदांता रांची में गत गुरुवार को लगाया गया। डिवाइस को लगाने के बाद मरीज की इलाज में काफी सुधार है। पहले जितना शार्टनेस आफ ब्रेथ था, वह काफी कम हो गया है। इस डिवाइस को लगाने से धीरे-धीरे इसका इंप्रूवमेंट और बढ़ेगा। आने वाले 15 से 20 दिन में वो मरीज आक्सीजन के बिना वह अपना काम कर लेंगी। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस को लगाने के लिए सबसे पहले हृदय में 3 तार डालने होते हैं। 3 चेंबर में 3 तार इस डिवाइस को चलाते हैं। और साथ में इन वायर के साथ एक बैटरी कनेक्टेड होता है। जिसे पल्स जनरेटर कहा जाता हैं। पल्स जनरेटर में  बैटरी होता है। इसको स्किन के नीचे लेफ्ट साइड के सोल्जर के नीचे स्किन में फिट कर दिया जाता है। 

चेस्ट के अपर पार्ट में बैटरी को फिट कर दिया जाता है और फिर डिवाइस को तीन तार से कनेक्ट कर दिया जाता है। ये तार हर्ट का जो कॉन्ट्रैक्टलिटी उसे सिंक्रोनाइज करके रेगुलेटेड वे में कॉन्ट्रैक्ट करवा देते हैं। यानी मरीज का जो इजेक्शन फ्रेक्शन 27 प्रतिशत था, इसको इंप्रूव कर के 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक जा सकते हैं। यह 60 प्रतिशत भी हो सकता है। 

मेदांता रांची के कंसलटेंट कार्डियोलॉजिस्ट डॉ मुकेश ने बताया कि इस डिवाइस की बैटरी एक तरह से कैपेसिटर है। इसमें चार्ज स्टोर होता है। इसके 3 तार में से एक तार शॉकवेव देता है। अगर पेशेंट को कभी और अरिदिमिया होता है। वीटी/वीएफ होता है तो उसके अंदर एक तार शॉकवेव देगा और आटोमेटिक डिफाइब्रिलेशन देकर अरिदिमिय को खत्म कर देगा। जिसके कारण पेशेंट की जान बच जायेगी। इस मशीन को लगाने का मुख्य कारण यही है कि बहुत सारे मरीज जिनके हृदय का फंक्शन कम होता है और अरिदिमिया होने का चांस ज्यादा होता है। इसको लगाने से अगर कोई अरिदिमिया हो तो वह आॅटोमेटिक शॉक देकर उसको कन्वर्ट कर देता है और मरीज की जान बच जाती है। 

डॉ मुकेश ने बताया कि इस मरीज के सांस फूलने का मुख्य कारण रिड्यूस्ड हार्ट फंक्शन था। हृदय का जो पंपिंग फंक्शन है, वह रिड्यूस हो चुका था। वैसे जो नॉरमल पर्सन होते हैं उनके हृदय का फंक्शन 60 प्रतिशत से ऊपर होता है। इस मरीज के हर्ट का पंपिंग फंक्शन 27 प्रतिशत तक हो चुका था। डॉक्टर मुकेश ने बताया कि मेदांता रांची में कार्डियक क्रिटिकल केयर के लिए सारी अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध है। 

वहीं मेदांता रांची के हॉस्पिटल डायरेक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि मेदांता रांची में इलाज की सारी विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध है। यहां डॉक्टरों की एक्सपर्ट टीम है, जो किसी भी हालात में इलाज करने में सक्षम हैं। इसी कारण से मेदांता रांची चिकित्सा के क्षेत्र में नया आयाम हासिल कर रहा है।

Published / 2023-02-14 18:04:36
अब नया खतरा... मारबर्ग वायरस की चपेट में आ सकती है पूरी दुनिया

  • शरीर से पसीने की तरह निकलने लगता है खून, डब्ल्यूएचओ ने बुलायी आपात बैठक

एबीएन सेंट्रल डेस्क। पूरा विश्व अभी कोरोना वायरस के कहर से उबरी भी नहीं है कि एक और खतरनाक वायरस मारबर्ग ने चिंता बढ़ा दी है। इस मारबर्ग वायरस से अफ्रीकी देश इक्वेटोरियल गिनी में अब तक कम से कम 9 लोगों की मौत हो चुकी है। इबोला से मिलते-जुलते इस बेहद घातक वायरस के लिए कोई वैक्सीन मौजूद नहीं है। ऐसे में इसे रोकने के लिए प्रभावित इलाकों में लॉकडाउन का ऐलान कर दिया गया है। 

इस नये वायरस ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की भी चिंता बढ़ा दी है और उसने इसे लेकर एक आपात बैठक बुलाई है। संयुक्त राष्ट्र की इस स्वास्थ्य एजेंसी ने एक बयान में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन इक्वेटोरियल गिनी में नये मारबर्ग वायरस के प्रकोप पर चर्चा करने के लिए मारबर्ग वायरस वैक्सीन कंसोर्टियम की एक तत्काल बैठक बुलायेगा। संगठन ने इसके साथ ही बताया कि यह बैठक भारतीय समयानुसार मंगलवार शाम 7:30 बजे होगी। 

कितना खतरनाक है मारबर्ग वायरस 

डब्ल्यूएचओ के मुताबिक मारबर्ग एक बेहद घातक वायरस है, जो चमगादड़ों से लोगों में पहुंचता है और फिर एक व्यक्ति से दूसरे में फैल जाता है। इससे संक्रमित व्यक्ति को रक्तस्रावी बुखार आता है और धीरे-धीरे उसकी स्थिति गंभीर हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ने बताया कि अब तक सामने मिले मरीजों में से 88 फीसदी की मौत हो गयी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की अफ्रीका इकाई के निदेशक डॉ मतशिदिसो मोइति ने बताया कि मारबर्ग वायरस बहुत ज्यादा संक्रामक है जो कि इबोला वायरस की फैमिली से ही संबंध रखता है। यह वायरस इंसानों में फ्रूट बैट से पहुंचा है और इससे संक्रमित लोगों की मृत्यु दर 88 प्रतिशत है। इस वायरस से संक्रमित होने के बाद अचानक लक्षण दिखने शुरू होते हैं। 

क्या हैं इसके लक्षण 

अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने बताया है कि मारबर्ग वायरस के लक्षण 2 से लेकर 21 दिनों की अवधि के बीच अचानक शुरू होते हैं। इसके प्रमुख लक्षण बुखार, ठंड लगना, सिर दर्द होते हैं। इन लक्षणों के कुछ दिनों बाद छाती, पीठ और पेट पर दाने निकल आते हैं। इसके अलावा उल्टी, सीने में दर्द, गले में खराश, पेट में दर्द और दस्त इस वायरस के लक्षण हो सकते हैं।

Published / 2023-02-08 18:07:13
मिलावट के कारण 2050 तक 70% लोग होंगे कैंसर पीड़ित : दिनकर सबनीस

एबीएन सोशल डेस्क। अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत, झारखंड प्रांत के तत्वावधान में होचर, कांके स्थित नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय परिसर में उपभोक्ता जागरण पर एक संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी का शुभारंभ अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेहताब सिंह कौरव, प्रांत अध्यक्ष पिंटू चाकिया, ग्राम संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति व रांची महानगर संपर्क सहप्रमुख अमरेंद्र सिंह व प्राचार्य डॉ बिरेन्द्र साहू ने संयुक्त रूप से भारत माता एवं स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि एवं वेद मंत्रों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया गया। 

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय संगठन मंत्री दिनकर सबनीस ने कहा कि ग्राहकों को न्याय पाने के चेतना जागरण करने के निमित्त ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एक आयाम अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के रूप में गठित हुआ है। उन्होंने कहा भारतीय उपभोक्ता अथवा ग्राहक को बाजार में कानून की जानकारी के अभाव में कई प्रकार के अन्याय का सामना करना पड़ता है। एमआरपी अथवा अधिकतम खुदरा मूल्य ग्राहक के लिए विक्रय मूल्य नहीं है, ग्राहक इस मूल्य से मोलभाव कर सकता है। 

उन्होंने कहा कि किसी प्रकार के ग्राहक को कठिनाई होती है तो वह उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा के अपने अधिकार को प्राप्त कर सकते हैं। आज विज्ञापन के भ्रम अथवा मोह जाल में भारतीय समाज ऐसा फंस गया है जो अपने पारंपरिक खाद्य सामग्री अथवा जीवन शैली को नकारते हुए आरामदायक चीजों को प्राथमिकता देकर रोग को आमंत्रित कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज मिलावट चरम पर है। डब्ल्यूएचओ ने चेताया है कि यदि सामग्रियों में मिलावट पर रोक नहीं लगाई गई तो 2050 तक 70% लोग कैंसर से पीड़ित हो जायेंगे। 

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मेहताब सिंह कौरव ने कहा समाज के प्रत्येक व्यक्ति एक ग्राहक के रूप में है,जो प्रतिदिन अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु बाजार पर आश्रित होता है। ग्राहकों की सुविधा के लिए ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने 48 वर्ष पूर्व अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत की स्थापना की थी। ग्राहकों के लिए 1986 में कानून भी बनाया गया परंतु आज भी अपने अधिकार को प्राप्त करने में समाज पीछे है। उन्होंने कहा जब तक रहोगे मौन, तो सुनेगा कौन अर्थात ग्राहक को अपने अधिकार के लिए आवाज उठाना ही चाहिए। 

संगोष्ठी में उद्बोधन के पूर्व नेताजी एकेडमी उच्च विद्यालय के प्राचार्य डॉ बिरेन्द्र साहू ने राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को शॉल ओढ़ाकर एवं झारखंड के सदानों का इतिहास नामक पुस्तक भेंट करके तथा अन्य पदाधिकारियों को शिक्षक शिक्षिकाओं के द्वारा अंग वस्त्र प्रदान करके सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का अध्यक्षता प्रांत  अध्यक्ष पिंटू चाकिया एवं संचालन प्रांत संगठन मंत्री शिवाजी क्रांति ने किया।

संगोष्ठी में दुलाल उरांव, भीम हो, राजू कुमार, शिव प्रसाद साहू, बबलू कुमार साहु, उर्मिला केरकेट्टा, सुनीता मुंडा, विजय उरांव, बालचंद उरांव, सुनीता कश्यप, कुसुम टोप्पो, सुजीत उपाध्याय, राम किशोर साहू, राकेश चंद्र झा, मनीष साहू, अनु देवी, रिंकी देवी सहित लगभग 550 छात्र-छात्राएं उपस्थित थे। उक्त जानकारी अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के झारखंड प्रांत अध्यक्ष पिंटू चकिया ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी।

Published / 2023-01-20 09:37:31
बढ़ता भारत : दूसरे देशों से तकनीक साझा करने के लिए डब्ल्यूएचओ ने भारत से मांगी मदद

एबीएन सेंट्रल डेस्क। 600 से ज्यादा कोरोना वायरस के स्वरूपों की पहचान करने में भारतीय वैज्ञानिकों को सफलता मिली। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ विनोद स्कारिया ने कहा कि हमें खुशी है कि भारत अब दूसरे देशों को जीनोम साइंस में प्रशिक्षित कर रहा है। 
इसका एक सफल परिणाम मालदीव में देखने को मिला, जब उस देश ने अपने यहां कोरोना संक्रमण को लेकर पहला जीनोम सीक्वेंस किया। तीन से चार दिन तक चले इस प्रशिक्षण में उनकी टीम ने मालदीव के वैज्ञानिक और डॉक्टरों का  मार्गदर्शन किया।

600 से ज्यादा कोरोना वायरस के स्वरूपों की पहचान करने में भारतीय वैज्ञानिकों को मिली सफलता 

सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा डब्ल्यूएचओ : कोरोना महामारी को नियंत्रण में लाने के लिए डब्ल्यूएचओ बीते लंबे समय से सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। भारत की तरह दूसरे देशों को भी वायरस की पहचान करने में सक्षम बनाने के लिए डब्ल्यूएचओ ने यह पहल शुरू की है। किसी भी जीव के डीएनए में मौजूद समस्त जीनों का अनुक्रम संजीन या जीनोम कहलाता है। कोरोना महामारी में नवंबर 2020 में सरकार ने पहली बार जीनोम विज्ञान का सहारा लेते हुए कोरोना वायरस के विभिन्न स्वरूपों की पहचान करना शुरू किया था। इसके लिए बाकायदा एक नेटवर्क स्थापित किया गया, जिसमें अब देश की 53 से ज्यादा प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

Published / 2023-01-14 09:57:19
अब लीजिये... इस कोरोना वैक्सीन से ब्रेन स्ट्रोक का खतरा

  • फिर भी फाइजर-बायोनटेक वैक्सीन लगाने की सलाह

एबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन समेत दुनिया के कई देशों में कोरोना ने रफ्तार पकड़ ली है। इस जानलेवा महामारी से रोकथाम के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। टीकाकरण की रफ्तार बढ़ाई जा रही है। लेकिन इन सब के बीच यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने शुक्रवार को एक ऐसी जानकारी दी है जो कि चिंताजनक है। 

दरअसल, अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसी ने कहा कि अमेरिकी दवा निर्माता फाइजर इंक और जर्मन पार्टनर बायोएनटेक के अपडेटेड बाइवेलेंट कोविड-19 शॉट  से बुजुर्गों में ब्रेन स्ट्रॉक का खतरा हो सकता है। हालांकि, फिर भी सीडीसी ने लोगों को वैक्सीन लेते रहने की सलाह दी है।

65 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए खतरा : सुरक्षा निगरानी प्रणाली ने कहा कि एक सीडीसी वैक्सीन डेटाबेस ने एक संभावित सुरक्षा मुद्दे को उजागर किया था जिसमें 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को 22-44 दिनों की तुलना में फाइजर/बायोएनटेक बाइवेलेंट शॉट प्राप्त करने के 21 दिनों के बाद इस्केमिक स्ट्रोक होने की अधिक संभावना थी। बता दें कि इस्कीमिक स्ट्रोक मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी को रक्त पहुंचाने वाली किसी रक्त वाहिका में किसी अवरोध (थक्के या एम्बोलाइ) के कारण होते हैं।

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