टीम एबीएन, कोडरमा। न्यू कॉलोनी कोडरमा में नेचुरोपैथी सेन्टर का विधिवत उद्घाटन हजारीबाग के सुरेंद्र कुमार पांडेय के द्वारा फीता काट कर किया गया। मौके पर सेंटर में पूजा कर वातावरण को शुद्ध किया गया।
वहीं उद्घाटन में आये लोगों को इसके बारे में बताते हुए गौतम कुमार पांडेय ने कहा कि नेचुरोपैथी के माध्यम से पांच बीमारी को छोड़कर जिसमें एक्सीडेंटल, डिलीवरी, पोलियो ग्रसित, सीरियस रोगी और 90 वर्ष से ऊपर के व्यक्ति को छोड़कर हर प्रकार के रोग का ईलाज किया जायेगा।
आगे उन्होंने बताया कि यहां पर फियोथैरेपी और आयुर्वेद के माध्यम से गारंटी के साथ ईलाज किया जायेगा। साथ ही एक अच्छा प्लेटफार्म भी दिया जायेगा। इसमें पुराने से पुराने रोग जैसे बांझपन, लकवा, गठिया इत्यादि का इलाज किया जायेगा।
मौके पर सेंटर के संचालक सत्यम कुमार मेहता, चंद्रप्रकाश चौधरी, करण कुमार सन्तोष, विनोद कुमार पांडेय, चंदन कुमार, विक्रम कुमार, गौतम कुमार, सुनील कुमार, मुकेश कुमार के साथ काफी संख्या में लोगउपस्थित थे।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। संयुुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनिया गुटेरेस ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर में प्रत्येक वर्ष प्रदूषित वायु से 70 लाख से अधिक लोगों की असमय मौत हो जाती है। गुटेरेस ने आज यहां सात सितंबर को मनाये जाने वाले नीले आकाश के लिए स्वच्छ वायु का अंतरराष्ट्रीय दिवस पर यह बात कही।
उन्होंने कहा कि विश्व की करीब 99 प्रतिशत आबादी कालिख, गन्धक और विषैले रासायनों वाली वायु में सांस ले रही है और इसका वैश्विक तापमान में वृद्धि से गहरा संबंध है। यहां जारी बयान में उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में अधिक गंभीर है।
उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण किसी सीमा में नहीं बंधा रहता और इसके दूषक तत्व हजारों किलोमीटर तक फैलते जाते है। प्रत्येक महाद्वीप पर जलवायु संकट का विनाशकारी प्रभाव बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए हमें मिलकर स्वच्छ वायु के लिए काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि हमें जीवाश्म ईंधन, विशेषकर कोयले का उपयोग कम करने, स्वच्छ अक्षय उूर्जा को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य के लिए मैंनेे एक जलवायु एकजुटता संधि का प्रस्ताव रखा है। जिसकेे अंतर्गत सभी बड़े उत्सर्जकों को अपने उत्सर्जन को कम करने का प्रयास करेंंगे और संपन्न देश वित्तीय और तकनीकी सहायता जुटायेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने एक एक्सिलरेशन एजेण्डा का प्रस्ताव भी रखा है।
उन्होंने आग्रह किया हैै कि सभी देश इसे लागू करे। उन्होंने कहा कि हमें रसोई में स्वच्छ ईंधन और विद्युत वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देना होगा। हमें लोगों को पैदल और साइकिल से चलने के लिए प्रोत्साहित करना और जिम्मेदारी से कचरा प्रबंधन का व्यवहार में लाना होगा। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ पृथ्वी के लिए वायु सर्वहितकारी और सबकी जिम्मेदारी को अपनाना होगा।
एबीएन हेल्थ डेस्क। विश्व स्वास्थ्य संगठन-डब्ल्यूटीओ ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के कठोर वैज्ञानिक परीक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा है कि सभी के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए इनका समग्रता और बेहतर समझदारी के साथ आकलन किया जाना चाहिए।
आयुष मंत्रालय ने सोमवार को यहां बताया कि डब्ल्यूटीओ ने प्रथम डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन 2023 का गुजरात घोषणापत्र जारी कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार डब्ल्यूटीओ का गुजरात घोषणापत्र वैश्विक प्रतिबद्धता और सभी के लिए स्वास्थ्य एवं कल्याण का लक्ष्य पाने के लिए पारंपरिक चिकित्सा क्षमता के उपयोग की पुष्टि करता है।
घोषणापत्र ने स्वदेशी ज्ञान, जैव विविधता और पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धताओं की पुष्टि की है। डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के लिए समग्रता, संदर्भ-विशिष्ट, बेहतर समझ, आकलन और कठोर वैज्ञानिक तरीकों के प्रयोग की आवश्यकता है।
इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली के हमारे प्राचीन ज्ञान को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।
डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अघानाम घेब्रेयेस ने कहा कि गुजरात घोषणापत्र विज्ञान के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा की क्षमता का दोहन करने के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में काम करेगा और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में पारंपरिक औषधियों के एकीकरण पर फोकस करेगा और पारंपरिक चिकित्सा की शक्ति प्रकट करने में मदद करेगा।
पारंपरिक चिकित्सा पर पहला वैश्विक शिखर सम्मेलन विश्व स्वास्थ्य संगठन और आयुष मंत्रालय ने 17-18 अगस्त को गांधीनगर, गुजरात में आयोजित किया था।
टीम एबीएन, रांची। देश के प्रसिद्ध हॉस्पिटल चेन्नई महिपाल के हृदय रोग, हड्डी और अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर की सेवा झारखंड वासियों को 1 सितंबर से रांची में ही उपलब्ध हो जायेगी। यह सुविधा राजधानी के लालपुर स्थित कमल फार्मा में मिलेगी, जहां आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम का उद्घाटन किया गया।
मुख्य अतिथि रांची के सांसद संजय सेठ ने आज इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के कार्यालय का उद्घाटन कमल फार्मा लालपुर चौक में किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रांची में चिकित्सा सहायता केंद्र का खुलना एक बहुत बड़ी सेवा है। इससे मरीजों की समस्याओं का समाधान तो तुरंत हो जायेगा। इसके अलावा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई और मुंबई के बड़े अस्पतालों के डॉक्टर यहां बैठेंगे। इससे रांची सहित झारखंड के लोगों को इलाज के लिए बाहर के राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा।
रांची के पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय ने कहा की बीमारी किसी भी परिवार के लिए सबसे परेशानी वाला सबब होता है। ऐसे समय में बीमार व्यक्ति और उनके परिजनों को सहायता की जरूरत होती है। रांची में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम द्वारा मरीजों और उनके परिजनों को मेडिकल सुविधा मुहैया करायी जायेगी, जो अनूठी पहल है।
चेंबर आफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष कुणाल अजमानी ने कहा इस संस्था के माध्यम से मरीजों को रांची में ही देश के बड़े हॉस्पिटल के डॉक्टर उपलब्ध कराया जा रहा है और उन्हें इलाज में सहयोग किया जायेगा। जो झारखंड और रांची के लिए पहली और अनूठी पहल है।
रांची इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के एसोसिएट पार्टनर बजरंग वर्मा और कमल नाथ महतो ने बताया कि सितंबर महीने से चेन्नई के प्रसिद्ध महिपाल अस्पताल के हृदय, हड्डी सहित अन्य रोगों के विशेषज्ञ डॉक्टर यहां अपनी सेवा देंगे। जिससे रांची समेत झारखंड के जिलों के मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके अलावा हमारी संस्था की ओर से यदि कोई पेशेंट इलाज के लिए बाहर जाते हैं। तो उनकी सारी व्यवस्था वाहन, ठहरने के लिए रूम के साथ संबंधित हॉस्पिटल में इलाज में मरीजों और उनके परिजनों को सहयोग किया जायेगा।
उद्घाटन कार्यक्रम में इंडिया ट्रीटमेंट डॉट कॉम के सीईओ सुमित वैद्य, एसपी चट्टोराज, महिला रोग विशेषज्ञ डॉ करुणा शाहदेव, वार्ड 11 के पूर्व पार्षद अभय कुमार सिंह, रमेश सिंह, अजय पोद्दार, श्रीराम शर्मा, बसंत दास, अजय गुप्ता सहित कई लोग उपस्थित थे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। दिल्ली के एक निजी अस्पताल के चिकित्सकों ने रोबोट की मदद से एक जटिल गाल ब्लैडर सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। फोर्टिस अस्पताल शालीमार के रोबोटिक- लैप जीआई ओंकोलॉजी, बेरियाट्रिक एंड मिनीमल इन्वेसिव सर्जरी के प्रधान निदेशक एवं विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप जैन ने गुरुवार को यहां संवाददाताओं को बताया कि 36 वर्षीय महिला का गॉल ब्लैडर आसपास फैली छोटी आंत एवं बड़ी आंत में बुरी तरह से फंसा हुआ था और बाइल डक्ट भी फंसी थी।
डॉ जैन ने बताया कि पीड़ित महिला का सीटी स्कैन और पेट स्कैन किया गया और रोबोट की मदद से उनका गालब्लैडर निकालने का फैसला किया गया। उन्होंने बताया कि महिला का इलाज समय पर इलाज न किया जाता तो गालब्लैडर आसपास के अंगों से और चिपक सकता था। उनके गॉलब्लैडर की दीवार भी सख्त हो गयी थी।
उन्होंने कहा, हमने सफलतापूर्वक उनकी रोबोटिक सर्जरी की। रोबोटिक-असिस्टेंस से की जाने वाली सर्जरी खासतौर से इस प्रकार की जटिल और चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में काफी संभावनाओं से भरपूर है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी काफी फायदेमंद होती है। इसके प्रयोग के लिए लचीले उपकरणों के साथ-साथ बाइल डक्ट को ठीक प्रकार से देखने के लिए विशेषज्ञ तकनीकों का भी लाभ मिलता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। प्रकृति में हर गुण विद्यमान है। कहीं प्रकृति औषधीय गुण समेटे हुए है, तो कहीं विष से भी भर पड़ा है। आइये आज ऐसे ही औषधीय गुण से भरपूर एक फल जामुन की चर्चा करते हैं :
?अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।
?जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है।
?पहले के जमाने में गांवों में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता था, जिसे जमोट कहते हैं।
?दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहां जल के स्रोत बंद नहीं हुए हैं।
?भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख केएन श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहां लकड़ी की वो तख्ती साबुत है, जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था।
?स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबिटीज, गठिया, पेचिस, पाचन संबंधी कई अन्य समस्याओं को ठीक करने में अत्यंत उपयोगी है।
?एक रिसर्च के मुताबिक जामुन की पत्तियों में एंटी डायबिटिक गुण पाये जाते हैं, जो रक्त शुगर को नियंत्रित करने करती है। ऐसे में जामुन की पत्तियों से तैयार चाय का सेवन करने से डायबिटीज के मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
?सबसे पहले आप एक कप पानी लें। अब इस पानी को तपेली में डालकर अच्छे से उबाल लें। इसके बाद इसमें जामुन की कुछ पत्तियों को धो कर डाल दें। अगर आपके पास जामुन की पत्तियों का पाउडर है, तो आप इस पाउडर को 1 चम्मच पानी में डालकर उबाल सकते हैं। जब पानी अच्छे से उबल जाए, तो इसे कप में छान लें। अब इसमें आप शहद या फिर नींबू के रस की कुछ बूंदें मिक्स करके पी सकते हैं।
?जामुन की पत्तियों में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं। इसका सेवन मसूड़ों से निकलने वाले खून को रोकने में और संक्रमण को फैलने से रोकता है। जामुन की पत्तियों को सुखाकर टूथ पाउडर के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसमें एस्ट्रिंजेंट गुण होते हैं, जो मुंह के छालों को ठीक करने में मदद करते हैं। मुंह के छालों में जामुन की छाल के काढ़ा का इस्तेमाल करने से फायदा मिलता है। जामुन में मौजूद आयरन खून को शुद्ध करने में मदद करता है।
?जामुन की लकड़ी न केवल एक अच्छी दातुन है अपितु पानी चखने वाले (जलसूंघा) भी पानी सूंघने के लिए जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल करते हैं।
तो है न जामुन बड़े ही काम की चीज...
स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी एबीएन हेल्थ डेस्क। कुछ दिन से बारिश और मौसम की वजह से आई फ्लू कंजेक्टिवाइटिस के मामले बढ़ रहे हैं। इसे देख हैल्थ डिपार्टमेंट ने एहतियात के तौर पर एडवाइजरी भी जारी की है। वहीं, पीजीआई एडवांस आई सेंटर के एचओडी डॉ एसएस पांडव की मानें तो 3 दिन में वायरल के केस बढ़े हैं। बुधवार को ओपीडी में आई फ्लू के 50 केस आये। डॉक्टर्स की मानें तो हर सीजन में केस देखे जाते हैं। 5 दिन में वायरल ठीक हो जाता है। डॉक्टर्स के मुताबिक तेज गर्मी के बाद बारिश से मौसम में तेजी से बदलाव आता है। हवा के साथ प्रदूषण और नमी से फंगल इन्फैक्शन की समस्याएं पैदा होती हैं सबसे ज्यादा आंखों से जुड़ी दिक्कतें परेशान करती हैं। फंगल इन्फैक्शन बढ़ने से आंखों का ख्याल रखना बेहद जरूरी होता है। आई फ्लू होने पर जलन, दर्द और लालपन जैसी परेशानी होती है, जिसका कारण एलर्जिक रिएक्शन है। ज्यादातर शुरुआत एक-आंख से होती हैं, कुछ समय बाद दूसरी मैं आ जाती है। फ्लू आमतौर पर अपने-आप ठीक हो जाता है, लेकिन आंखों को साफ रखना बहुत जरूरी है। आई फ्लू के लक्षण और बचाव • आंखें लाल और जलन होना। चुभन और सूजन आना। • पलकों पर पीला और चिपचिपा तरल जमा होना। • खुजली होना और पानी आना। • बार-बार आंखों को न छुएं और साफ पानी से धोते रहें। • साफ करने के लिए टिश्यू पेपर • या साफ कपड़े का इस्तेमाल करें। • मरीज से आई कॉन्टैक्ट न बनायें। • टीवी मोबाइल से दूरी बनायें। • आंखों पर काला चश्मा पहनें। • डॉक्टर के पास जरूर जायें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। शहर में इस समय बरसात व गर्मी के कारण कई तरह की बीमारियां फैल रही हैं। इसमें कंजक्टिवाइटिस भी उन्हीं बरसाती बीमारियों में एक है, जो आंखों को संक्रमित कर रहा है। इसको जय बांग्ला भी कहा जाता है।
इस बीमारी से बच्चों से लेकर बड़े तक शिकार हो रहे हैं। एमजीएम और सदर अस्पताल में प्रतिदिन दस से 20 मरीज इलाज कराने के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे इसके चपेट में आ रहे हैं।
इसकी शुरुआत एक आंख से होती है, लेकिन जल्द ही दूसरी आंख भी इसकी चपेट में आ जाती है। लगातार दवा डालने से तीन से पांच दिनों के अंदर यह पूरी तरह ठीक हो जाता है।
आंख लाल होना, जलन, खुजली, चुभन, तेज दर्द, सूजन, आंख से लगातार पानी गिरना, पलकों पर चिपचिपाहट और आंख में बार-बार कीचड़ का जमा होना।
स्वच्छता का पूरा ध्यान रखें, अगर कोई भी लक्षण दिखाई दे तो घर से बाहर न जायें और परिवार में भी लोगों से शारीरिक दूरी बनाकर रखें, आंखों को बार-बार हाथ न लगायें, खुजली होने पर आंखों को बिल्कुल मले नहीं, आई ड्रॉप डालने से पहले और बाद में हाथों को साबुन से अवश्य धो लें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।
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