रिम्स के मेडिसिन आईसीयू में भर्ती एक कैदी हुआ फरार, तलाश जारी टीम एबीएन, रांची। रिम्स के मेडिसिन आईसीयू में भर्ती पाकुड़ का एक कैदी मंगलवार की सुबह करीब चार बजे फरार हो गया। कैदी का इलाज मेडिसिन आईसीयू में डॉ ऋषि गुड़िया की देखरेख में चल रहा था। ब्रेन से संबंधित समस्या के बाद उसे पाकुड़ से रिम्स लाकर भर्ती कराया गया था। सुबह करीब चार बजे कैदी पेशाब करने के बहाने बाथरूम गया। इसी दौरान वह चकमा देकर वहां से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद रिम्स अधीक्षक डॉ हीरेंद्र बिरुआ मेडिसिन आईसीयू पहुंचे और मामले की जानकारी ली। फिलहाल फरार कैदी की तलाश जारी है।
थैलेसीमिया-सिकल सेल मरीजों को बड़ी राहत, निजी अस्पतालों में भी मुफ्त चढ़ेगा खूनआयुष्मान एवं अबुआ स्वास्थ्य कार्डधारियों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी मिलेगी सुविधा : स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारीटीम एबीएन, रांची। झारखंड में थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और गंभीर एनीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए राज्य सरकार ने बड़ी राहत की पहल की है। अब आयुष्मान भारत एवं अबुआ स्वास्थ्य कार्ड के लाभुकों को सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ आयुष्मान योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी निर्धारित पैकेज के तहत निःशुल्क रक्त चढ़ाने की सुविधा मिल सकेगी। स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पतालों में मरीजों को रक्त चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध कराने तथा अस्पतालों को भुगतान में किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए विभिन्न श्रेणियों के पैकेज और उनकी दरें निर्धारित की हैं। यह व्यवस्था पूरे राज्य में लागू की गई है।स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि आज स्वास्थ्य विभाग ने थैलेसीमिया और सिकल सेल के मरीजों के लिए एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है, जो इन मरीजों और उनके परिवारों के लिए वरदान साबित होगा। अब किसी मरीज को जांच और इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।मरीजों की स्क्रीनिंग, आवश्यक जांच और समुचित इलाज की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसी बीमारियों में मरीजों को नियमित रूप से रक्त की आवश्यकता पड़ती है। ऐसे में सरकार का प्रयास है कि मरीजों को उनके जिले और घर के आसपास ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो।डॉ. अंसारी ने कहा कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को इलाज के लिए दूर-दराज के अस्पतालों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसी उद्देश्य से सरकारी अस्पतालों के साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड के स्वास्थ्य विभाग को मजबूत और आधुनिक बनाने के लिए दिन-रात प्रयास जारी है। आने वाले दिनों में झारखंड स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य बनेगा।हमारी प्राथमिकता है कि हर गरीब, जरूरतमंद और गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को समय पर जांच, रक्त और बेहतर इलाज मिले। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में थैलेसीमिया और सिकल सेल मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा, ताकि बीमारी की पहचान समय रहते हो सके और मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा सके।निजी अस्पतालों के लिए निर्धारित पैकेजसिकल सेल एनीमिया के लिए निर्धारित पैकेज के तहतरूटीन वार्ड — ₹2,100HDU — ₹3,300बिना वेंटिलेटर ICU — ₹8,500वेंटिलेटर सहित ICU — ₹9,000गंभीर एनीमिया से पीड़ित थैलेसीमिया मरीजों के लिए भी अलग-अलग पैकेज निर्धारित किए गए हैं। इनमें रक्त चढ़ाने के साथ मरीज की आवश्यकता के अनुसार आवश्यक जांच और आयरन चिलेशन की दवाओं का प्रावधान किया गया है। डे-केयर अथवा अधिकतम एक दिन के पैकेज में पैक्ड सेल ब्लड ट्रांसफ्यूजन, CBC, LFT, KFT, यूरिन प्रोटीन और सीरम फेरिटिन जैसी जांचों को शामिल किया गया है। कुछ पैकेज में 15 दिनों की डेफेरासिरॉक्स अथवा डेफेरिप्रोन आयरन चिलेशन दवा भी शामिल है। इन पैकेजों की दर ₹2,300 से ₹3,200 तक निर्धारित की गई है। बच्चों में गंभीर एनीमिया यानी थैलेसीमिया के लिए भी अलग पैकेज निर्धारित किए गए हैं, जिनकी दर ₹2,300 से ₹3,000 तक है।सामान्य गंभीर एनीमिया के लिएरूटीन वार्ड — ₹2,100HDU — ₹3,300बिना वेंटिलेटर ICU — ₹8,500वेंटिलेटर सहित ICU — ₹9,000वहीं एप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी के लिए भी ₹5 लाख तक का पैकेज निर्धारित किया गया है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार मरीजों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। निर्धारित पैकेज के माध्यम से थैलेसीमिया, सिकल सेल एनीमिया और गंभीर एनीमिया के मरीजों को अपने जिले अथवा नजदीकी सूचीबद्ध निजी अस्पताल में ही रक्त चढ़ाने की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि इससे मरीजों को इलाज के लिए दूर स्थित बड़े अस्पतालों में जाने की जरूरत कम होगी तथा उनके समय और आने-जाने के खर्च की भी बचत होगी। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि खासकर उन मरीजों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है, जिन्हें बीमारी के कारण नियमित अंतराल पर रक्त चढ़ाने की आवश्यकता पड़ती है। निजी अस्पतालों में भी निर्धारित पैकेज के माध्यम से सुविधा उपलब्ध होने से उपचार की पहुंच और बेहतर होगी।गरीब और जरूरतमंद मरीजों को मिलेगी बड़ी राहतझारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह ने कहा कि इस तरह के पैकेज जनोपयोगी हैं। इससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर नियमित रक्त चढ़ाने की जरूरत वाले थैलेसीमिया और सिकल सेल मरीजों को अब इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नजदीकी सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में सुविधा मिलने से मरीजों और उनके परिजनों की परेशानी कम होगी। सरकार की इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर मरीजों को उनके घर के आसपास उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना, वहीं दूसरी ओर निजी अस्पतालों को निर्धारित पैकेज के माध्यम से सेवा के लिए भुगतान सुनिश्चित करना है। इससे राज्य में सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से रक्त चढ़ाने की सुविधा का दायरा और व्यापक होगा।
रिम्स डेंटल यूनिट में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल, 4 माह से नहीं मिला स्टाइपेंड एबीएन हेल्थ डेस्क (रांची)। रिम्स डेंटल यूनिट में इंटर्न डॉक्टरों ने 3 घंटे के लिए पेन डाउन की घोषणा की है। इंटर्न डॉक्टरों का आरोप है कि उन्हें बीते 4 माह से स्टाइपेंड नहीं मिला है। इसी वजह से नाराज डॉक्टर हड़ताल पर बैठ गये हैं। इधर रिम्स निदेशक ने हड़ताल पर बैठे डॉक्टरों से वार्ता की और आज शाम तक स्टाइपेंड देने का आश्वासन दिया। रिम्स डायरेक्टर के आश्वासन के बाद इंटर्न डॉक्टरों ने फिलहाल अपना हड़ताल तोड़ दिया है।
टीम एबीएन, रांची। बिरसा मुंडा सेवा संस्थान ने आज मेसरा स्थित संस्थान के नूतन परिसर में नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया। यह शिविर बिरसा मुंडा सेवा संस्थान एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, रांची महानगर के संयुक्त तत्वावधान में आयरिस हॉस्पिटल के सहयोग से आयोजित हुआ। शिविर में स्थानीय लोगों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच करायी। अनुभवी चिकित्सकों एवं चिकित्सा दल ने नेत्र संबंधी विभिन्न समस्याओं की जांच की तथा आवश्यक परामर्श प्रदान किया। जरूरतमंद मरीजों को आगे के उपचार के संबंध में भी उचित चिकित्सकीय सलाह दी गयी। इस अवसर पर आयोजकों ने कहा कि समाज के जरूरतमंद एवं वंचित लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना संस्थान का प्रमुख उद्देश्य है। ऐसे स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से समय पर जांच और उचित चिकित्सकीय परामर्श उपलब्ध कराने का प्रयास निरंतर जारी रहेगा। शिविर के सफल आयोजन में बिरसा मुंडा सेवा संस्थान, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ रांची महानगर तथा कफकर हॉस्पिटल के चिकित्सकों एवं कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। उक्त जानकारी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के रांची महानगर प्रचार विभाग के शिवेंदु सागर ने दी।
उज्जैन से पधारे श्री अरुण ऋषि स्वर्गीय मशहूर वक्ता ने जीवन प्रेरक स्वास्थ्य स्वास्थ्य लाभ के उपाय बताये एबीएन सोशल डेस्क। एक दवा निराली 15 सेकंड की ताली के माध्यम से अरुण ऋषि स्वर्गीय ने आज हरमू रोड स्थित, मारवाड़ी भवन के द्वितीय तल के सभागार में ज्ञान एवं मनोरंजन से भरपूर एक आयोजन जो आपके अनमोल स्वास्थ्य के नाम यानी जीवन जीने की कला को सीखता है। मुख्य वक्ता के रूप में सभागार में उपस्थित लोगों के बीच रखा। जैसा कि ज्ञात है झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन एवं मारवाड़ी सहायक समिति, रांची के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यक्रम में अरुण ऋषि ने दैनिक दिनचर्या के बेहतर उपाय बताएं। जिसके माध्यम से घर पर रहकर हम अपने स्वस्थ शरीर का लाभ अवश्य ले सकते हैं। उन्होंने कहा चरण कमल बंदों बारंबार उन्होंने बताया 73 वर्ष की उम्र हो चुकी है। और 47 साल से वह बीमार नहीं हुए। जबकि उन्होंने 28 लाख किलोमीटर की रनिंग यात्रा की है। उन्होंने बताया कि बिना टूथ पेस्ट, चाय कॉफी, सेविंग, शैंपू के बिना भी हम स्वस्थ और सुंदर एवम सुंदरता का लाभ ले सकते हैं। 2 घंटे तक चले इस कार्यक्रम में सकारात्मक सोच, स्वस्थ जीवन शैली, मानसिक संतुलन, परिवार में सद्भाव और जीवन कैसे प्रसन्न रहे इसका उन्होंने उपाय बताया। उन्होंने स्वस्थ समाज, समृद्धि समाज और सशक्त समाज की परिकल्पना को साकार करने का उपाय भी बताया। इसके पूर्व दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल ने सभा मे उपस्थित लोगों का स्वागत किया। वरीय उपाध्यक्ष ललित पोद्दार ने अरुण ऋषि जी को पुष्प गुच्छ एवम मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा ने अंग वस्त्र देकर साथ ही अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल व महासचिव विनोद कुमार जैन ने मोमेंटो देकर उनका अभिनंदन और स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन संयुक्त महामंत्री प्रमोद सारस्वत व धन्यवाद वरीय उपाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार ने दिया। आयोजन में अध्यक्ष सुरेश चंद्र अग्रवाल, वरीय उपाध्यक्ष ललित कुमार पोद्दार, महासचिव विनोद जैन, मारवाड़ी सहायक समिति के अध्यक्ष पवन शर्मा, प्रमोद सारस्वत, गोवर्धन प्रसाद गाड़ोदिया, ओमप्रकाश अग्रवाल, रतन बका, चंडी डालमिया, पवन मंत्री, अरुण खेमका, मनोज नरेड़ी, कमल सिंघानिया, अशोक नरसरिया, पवन पोद्दार, प्रकाश धेलिया, निर्मल बुधिया, किशन पोद्दार, कौशल राजगढ़िया, रमन वोडा, विष्णु सेन, कमल शर्मा सहित काफी संख्या में महिलाओं के संग विशिष्ट लोगों की उपस्थिति थी। उक्त जानकारी झारखंड प्रांतीय मारवाड़ी सम्मेलन के महासचिव विनोद कुमार जैन ने दी।
झारखंड में छह स्थानों पर विकसित होंगे रेडिएशन सेंटरमेडिकल कॉलेजों में कैंसर डे-केयर की तैयारीटीम एबीएन, रांची। झारखंड में कैंसर मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में कैंसर डे-केयर एवं रेडिएशन की सुविधा का विस्तार करेगी। इसके तहत छह स्थानों पर रेडिएशन सेंटर विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। रांची समेत सभी मेडिकल पांच कॉलेजों में पीपीपी मोड पर कैंसर डे-केयर एवं रेडिएशन सेंटर शुरू करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके सभाकक्ष में बैठक हुई। बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह, RIMS एवं SNMMCH के प्रतिनिधियों के अलावा मेदांता और अन्य अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद थे।बैठक में अपर मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने जिला अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों, मशीनों, मानवबल और आवश्यक खर्च का आकलन कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उनका जोर इस बात पर था कि कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े और जिला स्तर पर ही आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध हो।बैठक में रेडिएशन उपचार के लिए आधुनिक लीनैक मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि रेडिएशन सेवा के लिए मशीन के साथ रेडिएशन विशेषज्ञ, टेक्नीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित मानवबल की आवश्यकता होती है। राज्य में रेडियो फिजिसिस्ट की कमी को इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौती माना गया। मशीन के खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और रखरखाव की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।प्रस्तावित रेडिएशन सेंटर के लिए मेडिकल कॉलेजों को दो समूहों में रखने की योजना पर विचार किया गया। पहले समूह में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका तथा दूसरे समूह में रांची, हजारीबाग और पलामू को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों के लिए मशीन और तकनीकी मानवबल की व्यवस्था पीपीपी मोड से करने की संभावना पर भी विचार किया गया।डे-केयर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था अलग-अलग रखने पर भी चर्चा हुई। डे-केयर सेंटर में मेडिकल ऑफिसर के माध्यम से सेवाएं संचालित करने तथा रेडिएशन सेंटर के लिए विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षित तकनीकी मानवबल की व्यवस्था करने की योजना है। बिहार में संचालित डे-केयर मॉडल का भी बैठक में संदर्भ लिया गया, जहां मेडिकल ऑफिसर को प्रशिक्षण देकर डे-केयर सेवा संचालित की जाती है।आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को संबंधित योजना के निर्धारित पैकेज और दर के अनुसार उपचार मिलेगा। वहीं अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस की निर्धारित दरों को आधार बनाने पर सहमति बनी।बैठक में कैंसर डे-केयर सेंटरों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए रिम्स में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर विकसित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पैट स्कैन की सुविधा के विस्तार तथा इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई।पूरी योजना की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर समिति गठित की जाएगी। अपर सचिव सह झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक श्री शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में समिति प्रस्ताव, संसाधनों के आकलन, टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था की निगरानी करेगी। विभाग की ओर से भारत सरकार के बीजीएफ कार्यक्रम के तहत भी प्रस्ताव भेजकर आवश्यक स्वीकृति लेने की तैयारी की जा रही है।
झारखंड में छह स्थानों पर विकसित होंगे रेडिएशन सेंटरमेडिकल कॉलेजों में कैंसर डे-केयर की तैयारीटीम एबीएन, रांची। झारखंड में कैंसर मरीजों को बेहतर और सुलभ उपचार उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में कैंसर डे-केयर एवं रेडिएशन की सुविधा का विस्तार करेगी। इसके तहत छह स्थानों पर रेडिएशन सेंटर विकसित करने की योजना पर विचार किया जा रहा है। रांची समेत सभी मेडिकल पांच कॉलेजों में पीपीपी मोड पर कैंसर डे-केयर एवं रेडिएशन सेंटर शुरू करने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।इस संबंध में शुक्रवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके सभाकक्ष में बैठक हुई। बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक शशि प्रकाश सिंह, सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. विमलेश कुमार सिंह, RIMS एवं SNMMCH के प्रतिनिधियों के अलावा मेदांता और अन्य अस्पतालों के प्रतिनिधि मौजूद थे।बैठक में अपर मुख्य सचिव ने जिला स्तर पर कैंसर मरीजों को कीमोथेरेपी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने जिला अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध संसाधनों, मशीनों, मानवबल और आवश्यक खर्च का आकलन कर प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया। उनका जोर इस बात पर था कि कैंसर मरीजों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े और जिला स्तर पर ही आवश्यक उपचार की सुविधा उपलब्ध हो।बैठक में रेडिएशन उपचार के लिए आधुनिक लीनैक मशीन की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि रेडिएशन सेवा के लिए मशीन के साथ रेडिएशन विशेषज्ञ, टेक्नीशियन और रेडियो फिजिसिस्ट जैसे प्रशिक्षित मानवबल की आवश्यकता होती है। राज्य में रेडियो फिजिसिस्ट की कमी को इस क्षेत्र की प्रमुख चुनौती माना गया। मशीन के खराब होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था और रखरखाव की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई।प्रस्तावित रेडिएशन सेंटर के लिए मेडिकल कॉलेजों को दो समूहों में रखने की योजना पर विचार किया गया। पहले समूह में जमशेदपुर, धनबाद और दुमका तथा दूसरे समूह में रांची, हजारीबाग और पलामू को शामिल करने का प्रस्ताव है। इन केंद्रों के लिए मशीन और तकनीकी मानवबल की व्यवस्था पीपीपी मोड से करने की संभावना पर भी विचार किया गया।डे-केयर और रेडिएशन सेंटर की व्यवस्था अलग-अलग रखने पर भी चर्चा हुई। डे-केयर सेंटर में मेडिकल ऑफिसर के माध्यम से सेवाएं संचालित करने तथा रेडिएशन सेंटर के लिए विशेषज्ञ एवं प्रशिक्षित तकनीकी मानवबल की व्यवस्था करने की योजना है। बिहार में संचालित डे-केयर मॉडल का भी बैठक में संदर्भ लिया गया, जहां मेडिकल ऑफिसर को प्रशिक्षण देकर डे-केयर सेवा संचालित की जाती है।आयुष्मान और अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के कार्डधारियों को संबंधित योजना के निर्धारित पैकेज और दर के अनुसार उपचार मिलेगा। वहीं अन्य मरीजों के लिए सीजीएचएस की निर्धारित दरों को आधार बनाने पर सहमति बनी।बैठक में कैंसर डे-केयर सेंटरों की केंद्रीकृत निगरानी के लिए रिम्स में कंट्रोल एवं कमांड सेंटर विकसित करने की संभावना पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा रांची, जमशेदपुर और धनबाद में पैट स्कैन की सुविधा के विस्तार तथा इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावनाओं की भी समीक्षा की गई।पूरी योजना की निगरानी के लिए विभागीय स्तर पर समिति गठित की जाएगी। अपर सचिव सह झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक श्री शशि प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में समिति प्रस्ताव, संसाधनों के आकलन, टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था की निगरानी करेगी। विभाग की ओर से भारत सरकार के बीजीएफ कार्यक्रम के तहत भी प्रस्ताव भेजकर आवश्यक स्वीकृति लेने की तैयारी की जा रही है।
एआई असिस्टेंट और एआई फैमिली डॉक्टर विकसित करने के लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश टीम एबीएन, रांची। अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को उनके कार्यालय कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, संयुक्त सचिव दिनेश कुमार यादव, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, उप सचिव ध्रुव प्रसाद सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समयबद्ध और तकनीक आधारित बनाने के लिए एआई असिस्टेंट और एआई फैमिली डॉक्टर विकसित करने पर विस्तार से चर्चा की गयी। अपर मुख्य सचिव ने दोनों प्लेटफॉर्म के विकास के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन तैयार करने का निर्देश दिया। एआई असिस्टेंट स्वास्थ्य विभाग के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत हेल्थ प्रोफेशनल्स और स्वास्थ्य कर्मियों के लिए डिजिटल सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह उन्हें उनके दैनिक कार्यों की जानकारी और समय पर रिमाइंडर एवं अलर्ट उपलब्ध कराएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य कर्मियों को यह जानकारी मिल सकेगी कि उन्हें कब, कहां, किसके साथ और कौन-सा कार्य करना है, कार्य के लिए कितने लोगों की आवश्यकता होगी तथा आवश्यक संसाधन क्या होंगे। उदाहरण के तौर पर, एआई असिस्टेंट किसी सहिया को यह जानकारी दे सकेगा कि उसे किस स्थान पर, किस समय टीकाकरण करना है, कितने बच्चों का टीकाकरण होना है तथा इसके लिए किन तैयारियों की आवश्यकता है। इससे स्वास्थ्य कर्मियों को अपने कार्य समय पर और व्यवस्थित तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी। बैठक में अपर मुख्य सचिव ने एआई फैमिली डॉक्टर विकसित करने का भी निर्देश दिया। प्रस्तावित एआई फैमिली डॉक्टर आम लोगों के लिए एक डिजिटल स्वास्थ्य सहायक के रूप में कार्य करेगा। यह मरीज द्वारा बताई गई स्वास्थ्य संबंधी समस्या के आधार पर संभावित बीमारी और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि, एआई द्वारा सुझायी गयी किसी भी दवा को तब तक वैध चिकित्सकीय सलाह नहीं माना जायेगा, जब तक उसे किसी पंजीकृत मेडिकल प्रैक्टिशनर द्वारा अनुमोदित न किया जाये। इस व्यवस्था का उद्देश्य एआई की सुविधा का लाभ उठाते हुए चिकित्सकीय सुरक्षा और विशेषज्ञों की निगरानी सुनिश्चित करना है। अपर मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोनों एआई प्लेटफॉर्म के विकास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इसके लिए डीपीआर तैयार करने का निर्देश दिया। योजना के अनुसार, एआई फैमिली डॉक्टर को प्रारंभिक चरण में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा सकता है। पायलट परियोजना के परिणाम सफल रहने पर इसे राज्य के व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावना पर विचार किया जायेगा। इस पहल के माध्यम से राज्य में स्वास्थ्य कर्मियों के दैनिक कार्यों को अधिक व्यवस्थित करने के साथ-साथ आम लोगों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में एआई की महत्वपूर्ण भूमिका सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
दिखेगा टैलेंट, एलिगेंस और लीडरशिप का संगम बी रियल, बी बोल्ड, बी द क्राउन होगी थीम टीम एबीएन, रांची। राजधानी में फैशन, प्रतिभा और आत्मविश्वास के बड़े मंच द क्राउन आॅफ झारखंड 2026 को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। आयोजन से पूर्व शुक्रवार को रूद्रांश होटल, अशोक नगर में प्रेस वार्ता कर आयोजकों ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की। श्वेता श्रीवास्तव, प्रशांत जाधव, रूमी रानी सिंह, तन्मय नरेंद्र काले और सिमरन पाटेकर ने बताया कि छह सितंबर को करमटोली चौक स्थित आइएमए हॉल में राज्यस्तरीय समारोह का भव्य आयोजन किया जायेगा। आॅरेलिया अटायर के इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं और महिलाओं की छिपी प्रतिभाओं को पहचान दिलाने के साथ उन्हें अपनी क्षमता प्रदर्शित करने के लिए बड़ा मंच उपलब्ध कराना है। आयोजकों के अनुसार इस वर्ष समारोह की थीम बी रियल, बी बोल्ड, बी द क्राउन रखी गयी है। इसके माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी पहचान, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जायेगा। टैलेंट, एलिगेंस, और लीडरशिप का उत्सव है : श्वेता श्वेता श्रीवास्तव ने बताया कि द क्राउन आॅफ झारखंड को सिर्फ प्रतियोगिता के रूप में नहीं देखा जा रहा है। यह टैलेंट, एलिगेंस, व्यक्तित्व और लीडरशिप का उत्सव है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से प्रतिभागी इसमें शामिल होकर प्रतिभा और हुनर का प्रदर्शन करेंगे। कार्यक्रम में शहर और राज्य की कई गणमान्य हस्तियां गेस्ट आॅफ आॅनर के रूप में मौजूद रहेंगी। युवाओं और फैशन प्रेमियों में उत्साह समारोह की शुरुआत दोपहर दो बजे गेस्ट रिपोर्टिंग से होगी। आयोजन को लेकर राजधानी के युवाओं और फैशन प्रेमियों में खासा उत्साह है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम के माध्यम से झारखंड की प्रतिभाओं को नयी पहचान देने का प्रयास किया जायेगा। पास बुकिंग और आयोजन से जुड़ी जानकारी के लिए 91306 52391 और 97718 77736 पर संपर्क किया जा सकता है। ग्रूमिंग सेशन आज प्रशांत जाधव और रूमी रानी सिंह ने बताया कि मुख्य समारोह से एक दिन पहले शनिवार को होटल रूद्रांश, अशोक नगर में ग्रूमिंग सेशन आयोजित होगा। इसमें प्रतिभागियों को मंच पर प्रस्तुति, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व विकास और फैशन की बारीकियों की जानकारी दी जायेगी। साथ ही बेहतर प्रस्तुति के लिए विशेषज्ञ जरूरी टिप्स देंगे।
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