टीम एबीएन, रांची। अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा के नेतृत्व में फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के प्रतिनिधिमंडल ने नव नियुक्त क्षेत्रीय निदेशक शिवेंद्र कुमार से शिष्टाचार मुलाकात कर उन्हें सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कर्मचारी राज्य बीमा योजना के अंतर्गत नए डिस्पेंसरी खोलने, प्रमुख शहरों में एंबुलेंस सेवा प्रारंभ करने की राज्य सरकार की योजना, ईएसआईसी समिति के माध्यम से डॉक्टरों की नियुक्ति तथा नए शाखा कार्यालय खोलने जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाया।
बैठक के दौरान यह भी अवगत कराया गया कि बोकारो में ईएसआईसी अस्पताल के निर्माण का मामला भूमि मूल्य निर्धारण को लेकर लंबे समय से राज्य सरकार एवं केंद्र सरकार के बीच लंबित है। यह सहमति बनाई गई कि इस विषय पर झारखण्ड चैंबर शीघ्र ही केंद्र सरकार को पत्र लिखकर समाधान हेतु पहल करेगा।
चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम का अस्पताल बीमीतों को बेहतर चिकित्स्कीय सुविधाएँ उपलब्ध करा रहा है। यह प्रयास चैंबर द्वारा लगातार किए गए पत्राचार एवं केंद्र सरकार के साथ सकारात्मक संवाद का परिणाम है।
उप समिति चेयरमैन प्रमोद सारस्वत ने ईएसआईसी अस्पताल में चिकित्सा सम्बंधित असुविधा होने पर लोगों से चैम्बर को सूचित करने की अपील की। यह भी कहा कि विभाग द्वारा प्रत्येक माह सुविधा समागम की आयोजित बैठक में भी समस्याओं का समाधान कराया जा सकता है।
प्रतिनिधिमंडल में चैंबर के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, महासचिव रोहित अग्रवाल एवं श्रम एवं ईएसआईसी उप समिति के चेयरमैन प्रमोद सारस्वत शामिल थे। इस अवसर पर ईएसआईसी के सहायक निर्देशक अभिषेक कुमार भी उपस्थित थे। उक्त जानकारी महासचिव रोहित अग्रवाल ने दी।
टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक अहम निर्णय लिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने निर्देश जारी करते हुए राज्य के सभी सदर अस्पतालों और राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में कैंसर जांच एवं उपचार से जुड़ी आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की पहल की है। इसके तहत रेडिएशन सेंटर, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं के लिए समुचित स्थान एवं सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार संयुक्त सचिव ने झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि अस्पतालों के निर्माण या उन्नयन के लिए तैयार की जा रही विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन में रेडिएशन सेंटर के लिए स्थान का प्रावधान अनिवार्य रूप से किया जाए।
निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि लीनियर एक्सीलेरेटर जैसे अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना के लिए तकनीकी मानकों के अनुरूप रेडिएशन बंकर का निर्माण किया जाना आवश्यक होगा। साथ ही एमआरआई और सीटी स्कैन इकाइयों के लिए भी पर्याप्त स्थान सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में इन सेवाओं के विस्तार में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
विभाग ने जेएसबीसीसीएल को यह भी निर्देशित किया है कि वह अपने सभी परामर्शियों को मौजूदा एवं प्रस्तावित डीपीआर में आवश्यक संशोधन करने के लिए निर्देश जारी करे। सरकार का उद्देश्य है कि राज्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधाएं जिला स्तर तक उपलब्ध हों, जिससे मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े।
इस संबंध में जारी आदेश की प्रति सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों, अस्पताल अधीक्षकों तथा जिलों के सिविल सर्जनों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। यह पहल राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। झारखंड सरकार ने राज्य के मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी और मरीजों के अनुकूल बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने निमार्णाधीन और संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों की संरचना और योजना में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
हालिया निरीक्षणों में यह सामने आया था कि कई अस्पतालों में आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, आपरेशन थिएटर, आईपीडी, रेडियोलाूजी सेंटर और डायग्नोस्टिक सेंटरों की स्थिति वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं है, जिससे मरीजों की आवाजाही और इलाज की प्रक्रिया प्रभावित होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब अस्पतालों के डिजाइन की समीक्षा कर उन्हें पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है।
इस विशेषज्ञ समिति में रिम्स रांची के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ चिकित्सकों को शामिल किया गया है। इनमें डॉ हेमंत नारायण (कार्डियोलॉजी), डॉ प्रदीप कुमार भट्टाचार्य (क्रिटिकल केयर), डॉ अजीत कुमार डुंगडुंग (मेडिसिन), डॉ अनिल कुमार कमल (सर्जरी), डॉ अंशु जणैयार (पैथोलॉजी) और डॉ अनीश कुमार चौधरी (रेडियोलॉजी) विभाग शामिल हैं। इनके साथ सदर अस्पताल के प्रतिनिधि और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के अधिकारी भी शामिल हैं।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अब अस्पतालों का निर्माण पेशेंट फ्लो और वर्क फ्लो के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित होगा। इसके तहत आईसीयू, ओटी, इमरजेंसी, रेडियोलॉजी सेंटर आदि को एक ही फ्लोर पर स्थापित किया जाय। ट्रॉमा सेंटर को ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास स्थापित किया जायेगा ताकि एम्बुलेंस को त्वरित पहुंच मिल सके। आईसीयू, ओटी और इमरजेंसी सेवाओं को एक ही फ्लोर या नजदीकी क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिससे उपचार में समय की बचत हो।
संक्रमण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए आपरेशन थिएटर को पूर्णत: स्टेराइल जोन के रूप में विकसित किया जायेगा और साफ व गंदे क्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन किया जायेगा। साथ ही मरीजों, अस्पताल कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट के आवागमन के लिए अलग-अलग लिफ्ट और कॉरिडोर की व्यवस्था अनिवार्य होगी। रेडियोलॉजी, लैब और ब्लड बैंक जैसी सुविधाओं को ऐसी जगह स्थापित किया जायेगा, जहां से ओपीडी और इमरजेंसी दोनों के मरीज आसानी से पहुंच सकें।
नयी व्यवस्था के तहत निर्माण एजेंसियों को अपने डिजाइन विशेषज्ञ समिति के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे। समिति द्वारा समीक्षा और आवश्यक सुझाव दिये जाने के बाद ही भवनों के अंतिम नक्शे को मंजूरी दी जायेगी। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह के द्वारा जारी यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इस पहल को राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक, सुव्यवस्थित और मरीज-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
टीम एबीएन, रांची। राज्य सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं तकनीक-सक्षम बनाने के उद्देश्य से ह्यूमन रिसोर्स इंफॉर्मेशन सिस्टम लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गयी है। आज अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार की अध्यक्षता में एचआरआईएस से संबंधित एक विस्तृत प्रस्तुतीकरण आयोजित किया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान प्रस्तावित प्रणाली के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गयी।
बैठक के उपरांत अपर मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिया गया कि एचआरआईएस सॉफ्टवेयर का विकास कार्य प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण किया जाये तथा इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मियों के लिए 01 अगस्त 2026 से लागू किया जाये। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के अपर सचिव विद्यानंद शर्मा पंकज, 104 एचआईएचएल के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रितेश गुप्ता, उपस्थिति पोर्टल से जुड़े संविदा तकनीकी विशेषज्ञों सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।
वर्तमान में विभागीय मानव संसाधन से संबंधित डेटा विभिन्न जिलों एवं संस्थानों में अलग-अलग स्वरूप में उपलब्ध होने के कारण डेटा असंगतता, निर्णय लेने में विलंब तथा रियल-टाइम जानकारी के अभाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इन चुनौतियों के समाधान हेतु एचआरआईएस को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यह प्रणाली कर्मचारियों के पूरे सेवा-काल (नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक) को एक ही प्लेटफॉर्म पर प्रबंधित करेगी, जिसमें भर्ती, उपस्थिति, अवकाश, वेतन प्रबंधन, प्रदर्शन मूल्यांकन एवं प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण मॉड्यूल शामिल होंगे। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए सेल्फ-सर्विस पोर्टल की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी।
यह पहल राज्य में स्मार्ट गवर्नेंस एवं डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रशासनिक दक्षता में व्यापक सुधार आयेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत वेतन बिल का सृजन केवल आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के सफल सत्यापन के पश्चात ही किया जायेगा।
उच्चस्तरीय सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु ओटीपी आधारित प्रणाली के स्थान पर अनिवार्य बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण लागू किया जाएगा, जिससे संपूर्ण प्रक्रिया अधिक सुरक्षित, पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनेगी तथा ट्रेजरी/ एसएनए स्पर्श के माध्यम से वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
एचआरआईएस के माध्यम से विभाग को रियल-टाइम वर्कफोर्स विजिबिलिटी प्राप्त होगी, जिससे डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी तथा प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
इस प्रणाली के लागू होने से मैन्युअल कार्यों में कमी, वेतन संबंधी त्रुटियों में सुधार, ट्रांसफर एवं पोस्टिंग प्रक्रियाओं में तेजी तथा डेटा डुप्लीकेशन में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सिस्टम में रोल-बेस्ड एक्सेस, टू-फैक्टर आॅथेंटिकेशन, एन्क्रिप्शन एवं आॅडिट ट्रेल जैसी आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाएं लागू की जायेंगी।
टीम एबीएन, रांची । झारखंड में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने आज एक ऐतिहासिक और जनकल्याणकारी पहल की शुरुआत की। यह योजना उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जिनके बच्चे दिल के वाल्व या हृदय में छेद जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण उनका इलाज संभव नहीं हो पाता था।
मंत्री संज्ञान में लगातार ऐसे मामले आते रहे, जहां पैसे के अभाव में मासूम बच्चों की जान तक चली जाती थी। एक जनप्रतिनिधि होने के साथ-साथ एक संवेदनशील चिकित्सक के रूप में उन्होंने इस समस्या को गंभीरता से लिया और इसका स्थायी समाधान निकालने का संकल्प लिया। इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है कि आज राज्य में इस महत्वाकांक्षी योजना की सफल शुरुआत हो चुकी है।
मंत्री आज रांची के ऑडिटोरियम में State Level Conference on Caring for Children with Heart Disease कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर विशेष जांच शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें केरल के Amrita Hospital Kochi से आए अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञों द्वारा पूरे झारखंड से आए 170 बच्चों की जांच की गई। जांच के उपरांत 56 बच्चों को सर्जरी हेतु चिन्हित किया गया है।
इन सभी बच्चों का ऑपरेशन पूरी तरह से निःशुल्क कराया जाएगा, जिससे उनके परिवारों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। मंत्री ने कहा कि पहले ऐसे बच्चों को इलाज के लिए चेन्नई, चंडीगढ़ या छत्तीसगढ़ भेजना पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार का प्रयास है कि यह सुविधा झारखंड में ही उपलब्ध हो वह भी पूरी तरह मुफ्त।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि आने वाले दिनों में पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग कैंप लगाए जाएंगे, ताकि सुदूर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों तक पहुंचकर अधिक से अधिक जरूरतमंद बच्चों को चिन्हित किया जा सके और उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि जब एक डॉक्टर नीति-निर्माण की भूमिका में होता है, तो उसके निर्णयों का सीधा लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक पहुंचता है।
टीम एबीएन, रांची। प्रांतीय अध्यक्ष विक्रांत कुमार सिंह के नेतृत्व में झारखंड आॅफिसर्स, टीचर्स एंड एम्पलाइज एसोसिएशन का एक शिष्टमंडल झारखंड राज्य आरोग्य सोसायटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन से मिला। इस दौरान झारखंड राज्यकर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना से संबंधित व्यावहारिक समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा की गयी।
महासंघ की ओर से 19 बिंदुओं पर आधारित सुझाव कार्यकारी निदेशक को प्रस्तुत किये गये, जिन पर बिंदुवार विचार-विमर्श किया गया। बैठक में कार्यकारी निदेशक के द्वारा अवगत कराया गया कि इनमें से अधिकांश बिंदुओं को संशोधित संकल्प में शामिल कर लिया गया है तथा उनके अनुरूप कार्रवाई भी की जा चुकी है। शेष बिंदुओं पर कार्यकारी निदेशक ने कहा कि इनहे शीघ्र ही क्रियान्वित किया जायेगा।
कार्यकारी निदेशक छवि रंजन ने कहा कि यह सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे देश की उत्कृष्ट स्वास्थ्य योजनाओं में स्थापित करने के लिए विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने कर्मचारियों एवं उनके प्रतिनिधियों के सहयोग को आवश्यक बताते हुए कहा कि संशोधित संकल्प के पश्चात योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है।
बैठक में झारखंड राज्य आरोग्य सोसायटी की अपर कार्यकारी निदेशक सीमा सिंह, महाप्रबंधक प्रवीण चंद्र मिश्रा, वरिष्ठ परामर्शी विवेक कुमार नायक, अंशु कुमार सिंह के साथ महासंघ के प्रांतीय कोषाध्यक्ष नितिन कुमार, झारखंड पुलिस एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राहुल कुमार मुर्मू, मुख्य समन्वयक अरविंद कुमार तथा अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
एबीएन हेल्थ डेस्क। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह श्री कृष्ण प्रणामी सेवा धाम ट्रस्ट के प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व स्तर पर प्रत्येक वर्ष 10 अप्रैल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। यह दिवस होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य होम्योपैथी के महत्व, उसके सिद्धांतों तथा समाज में उसके योगदान के प्रति जागरूकता फैलाना है।
होम्योपैथी एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है, जिसका आधार समरूपता का सिद्धांत, अर्थात जिस पदार्थ से किसी स्वस्थ व्यक्ति में रोग के लक्षण उत्पन्न होते हैं, उसी पदार्थ को अत्यंत सूक्ष्म मात्रा में देकर रोगी का उपचार किया जाता है। इस पद्धति की शुरूआत 18वीं शताब्दी में जर्मनी के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. हैनिमैन ने की थी। विश्व होम्योपैथी दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को इस चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना तथा इसके सुरक्षित, सस्ती और प्रभावी उपचार के रूप में प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है।
इसके माध्यम से यह भी बताया जाता है कि होम्योपैथी केवल रोग के लक्षणों को नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर उपचार करती है। आज के समय में, जब लोग दवाइयों के दुष्प्रभावों से चिंतित रहते हैं, होम्योपैथी एक सुरक्षित विकल्प के रूप में उभर रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें दवाएं प्राकृतिक तत्वों से बनी होती हैं और इनके दुष्प्रभाव अत्यंत कम होते हैं।
बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए भी यह अपेक्षाकृत सुरक्षित मानी जाती है। इसके अलावा, होम्योपैथी उपचार व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने पर भी बल देती है। यही कारण है कि यह केवल रोग को दबाने के बजाय जड़ से समाप्त करने का प्रयास करती है। भारत में भी यह चिकित्सा पद्धति अत्यंत लोकप्रिय है और सरकार द्वारा इसे आयुष प्रणाली के अंतर्गत बढ़ावा दिया जा रहा है।
विश्व होम्योपैथी दिवस के अवसर पर देश-विदेश में विभिन्न संगोष्ठियों, स्वास्थ्य शिविरों, कार्यशालाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। चिकित्सक, शोधकर्ता एवं विद्यार्थी इस दिन होम्योपैथी के क्षेत्र में हो रहे नवीन शोध और उपलब्धियों पर चर्चा करते हैं। साथ ही, आम जनता को मुफ्त परामर्श और दवाएं भी वितरित की जाती हैं।
विश्व होम्योपैथी दिवस न केवल एक चिकित्सा पद्धति के सम्मान का दिन है, बल्कि यह हमें समग्र स्वास्थ्य की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करता है। आधुनिक जीवनशैली से उत्पन्न विभिन्न रोगों के बीच होम्योपैथी एक सरल, सुरक्षित और प्रभावी विकल्प के रूप में अपनी पहचान बना रही है। इस दिवस के माध्यम से हमें यह समझने का अवसर मिलता है कि प्राकृतिक और संतुलित उपचार पद्धतियां हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं।
टीम एबीएन, रांची। मंगलवार को चाणक्य होटल में कोलकाता के सबसे जाने-माने कंसल्टेंट नेफ्रोलॉजिस्ट और किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ प्रतीम सेनगुप्ता के नेतृत्व में रांची के होटल बीएनआर में मीडिया संवाद किया गया, जिसमेें रांची के जाने माने डॉक्टर, बिजनेसमैन, सामजसेवी एवं पत्रकार बंधु लोग शामिल हुए।
Nephrocare India Ltd. के संस्थापक और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ प्रतिम सेन गुप्ता ने अपने संगठन का परिचय मीडिया के माध्यम से लोगो को दिया। साथ ही, वे झारखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य में किडनी की देखभाल की सेवाओं को मज़बूत करने में अपनी रुचि व्यक्त किया और अपने अनुभव को सभी के सामने साझा किया।
Nephrocare India Ltd एक पब्लिक लिस्टेड और तेज़ी से बढ़ने वाला हेल्थकेयर संगठन है, जो किडनी की 360-डिग्री समग्र देखभाल देने के लिए समर्पित है। इसकी सेवाओं में आधुनिक डायलिसिस देखभाल (जिसमें सेंटर और सैटेलाइट यूनिट शामिल हैं), क्रोनिक किडनी रोग (CKD) का शुरुआती पता लगाना और रोकथाम, किडनी ट्रांसप्लांट में सहायता, ट्रांसप्लांट के बाद की देखभाल, और समुदाय-आधारित जागरूकता और स्क्रीनिंग कार्यक्रम शामिल हैं। इसका दृष्टिकोण क्लिनिकल उत्कृष्टता को पहुँच और सामर्थ्य के साथ जोड़ता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें अभी तक पूरी सुविधाएँ नहीं मिली हैं।
पिछले कुछ सालों में, संगठन ने ऐसे किडनी देखभाल मॉडल बनाने पर ध्यान दिया है जिन्हें बढ़ाया जा सके और जो लंबे समय तक चल सकें। इसके लिए इसने मानकीकृत प्रोटोकॉल अपनाए हैं, जिससे लागत को नियंत्रित रखते हुए गुणवत्तापूर्ण इलाज के परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। इसका मिशन शुरुआती हस्तक्षेप, मरीज़ों की शिक्षा और एकीकृत देखभाल वितरण प्रणालियों के माध्यम से किडनी रोग के बोझ को कम करना है।
इस संबंध में, कोलकाता स्थित यह संगठन अपनी सेवाओं का विस्तार झारखंड राज्य में करने और एक मज़बूत किडनी देखभाल तंत्र विकसित करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है। हम ये प्रस्ताव देते हैं:
Nephrocare का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि झारखंड के लोगों को किडनी की सुलभ, उच्च-गुणवत्ता वाली और व्यापक देखभाल मिले, जिससे इलाज के परिणाम बेहतर हों और लंबे समय तक चलने वाले स्वास्थ्य देखभाल के बोझ में कमी आए। Nefrocare@डॉ प्रतिम सेन गुप्ता ने नेन्फ्रोलॉजी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। भारत की सबसे बड़ी डायलिसिस सेवा प्रदाता कंपनी है जो किडनी की गंभीर बीमारियों के लिए हीमोडायलिसिस, पेरिटोनियल डायलिसिस और घर पर डायलिसिस जैसी व्यापक सेवाएं प्रदान करती है। यह मुख्य रूप से 288+ शहरों में उन्नत तकनीक के साथ डायलिसिस और किडनी प्रबंधन में विशेषज्ञता रखती है।
नेफरोकेयर इंडिया लिमिटेड के कार्यक्रम में सिनर्जी ग्लोबल हॉस्पिटल की ओर से डॉ राहुल सिन्हा, डॉ रजनीश कुमार, डॉ रंजीत कुमार, राँची के प्रतिष्ठित व्यवसाई राज कुमार पोद्दार, कोलकाता के जाने माने पत्रकार श्री रित्विक, डॉ सुनील mk रूंगटा, डॉ धीरज कुमार नेफ़्रॉलोजिस्ट, डॉ नीरज कुमार, सौमित्र कुमार, अर्जमंन नसीम, अरफ़ा हबीब, निशांत कुमार सहित गण मान्य लोग इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
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