एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत सरकार के आयुष विभाग के अंतर्गत कार्य करने वाली योग के क्षेत्र में संस्था अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर महर्षि पतंजलि योग रत्न सम्मान समारोह का आयोजन भारत की राजधानी नई दिल्ली के संविधान सभागार भवन मै 24 नवंबर को आयोजित किया गया।
जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे राज्य सभा सांसद दिनेश शर्मा, राजऋषि वेदमूर्ति आचार्य, स्वामी अमित देव डॉ ईश्वरन आचार्य, डॉ एसपी मिश्रा, डॉ मंगेश योगगुरु, नितिन पाठक, योगाचार्य दीपनारायण पाल अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
भारत के अलग-अलग राज्यों में विशेष योग्यता प्राप्त योगाचार्य व योगगुरु जिन्होंने योग के क्षेत्र में विशेष उपलब्धि हासिल की और योग के प्रचार प्रसार को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जो कार्य किया उन सभी कार्य को देखते हुए महर्षि पतंजलि योग रत्न अवार्ड के लिए चयनित किया गया।
योगाचार्य महेश पाल का चयन योग के क्षेत्र में 21000 सूर्य नमस्कार पूर्ण करने, योग के क्षेत्र में रिसर्च कार्य करने, योगासना खेल मै राष्ट्रीय स्तर पर नेशनल जज के रूप में कार्य करने, योग व स्वास्थ विषय पर आर्टिकल लेखन से समाज को जागरूक करने, बच्चों व युवाओं को योग से प्रेरित कर संस्कार विकसित करने, योग शिविरों के द्वारा लोगों मैं योग के महत्व को समझाने आदि कार्यो के लिए महर्षि पतंजलि योगरत्न अवार्ड से सम्मानित किया गया।
योगाचार्य ने उद्बोधन देते हुए कहा कि योग से हमारी सोयी हुई इक्षा शक्ति जागृत होती हैं जिससे हम बड़े बड़े लक्ष्यों को प्राप्त कर सकते हैं, योगाचार्य महेश पाल मध्य प्रदेश के प्रथम योगाचार्य हैं जिन्हें महर्षि पतंजलि योग रत्न अवॉर्ड दिया गया है।
योगाचार्य महेश पाल ने अपनी योग की पढ़ाई उत्तराखंड से की है एवं योग की सेवाएं मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में दे चुके हैं जिसमें गुजरात, असम, अरुणाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली आदि इस अवसर पर पतंजलि परिवार व मित्र जनों द्वारा बधाई शुभकामनाएं दी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में युवाओं की बदलती दैनिक दिनचर्या व अव्यवस्थित भोजनचर्या के कारण युवाओं में घटता स्पर्म काउंट नपुंसकता को जन्म दे रहा है जिसके कारण नव वैवाहिक जोड़े माता पिता बनने में असमर्थ होते जा रहे हैं योगाचार्य महेश पाल बताते है कि यह समस्या 40 से अधिक के उम्र के लोगों में देखने को मिलती है। वर्तमान समय में यह समस्या बहुत तेजी से युवा वर्ग में देखने में आ रही है।
एक शोध में यह आशंका व्यक्त की गयी है कि 2025 तक सर्वाधिक नपुंसकता की संख्या बाला देश भारत बन सकता है इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी), जिसे नपुंसकता के रूप में भी जाना जाता है, इरेक्शन पाने और उसे बनाए रखने में असमर्थता है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक बहुत ही आम स्थिति है, खासकर यह वृद्ध पुरुषों में पायी जाती है।
यह अनुमान लगाया गया है कि 40 से 70 वर्ष की आयु के बीच के आधे पुरुषों में यह किसी न किसी हद तक होती है, लेकिन वर्तमान समय में यह समस्या युवा वर्ग में भी देखने में आ रही है, कम शुक्राणु संख्या को आलिगोस्पर्मिया भी कहा जाता है। शुक्राणुओं की पूरी तरह कमी को एजोस्पर्मिया कहा जाता है। यदि आपके वीर्य में प्रति मिलीलीटर 15 मिलियन से कम शुक्राणु हैं, तो आपके शुक्राणुओं की संख्या सामान्य से कम मानी जाती है।
कम शुक्राणुओं की संख्या का मुख्य लक्षण गर्भधारण न कर पाना, अंडकोष क्षेत्र में दर्द, सूजन या गांठ, चेहरे या शरीर पर कम बाल या गुणसूत्र या हार्मोन संबंधी स्थिति, किसी पुरुष में शुक्राणु कम होने के कई कारण हो सकते हैं। हार्मोन में अनुवाँशिक असंतुलन टेस्टोस्टेरोन की कमी, अधिक धूम्रपान व अधिक शराब का सेवन, नशा, अव्यवस्थित जीवन शैली, मानसिक तनाव व चिंता, मोटापा, डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, फास्ट फूड जंक फूड, मानव शरीर में अंतर स्त्रावी तंत्र प्रजनन अंगों को विनियमित करने और भावनात्मक संतुलन बनाये रखने के लिए हार्मोन की श्रृंखला जारी करने का काम करता है।
जब हमारी जीवन शैली व आहार शैली असंतुलित होती है व इन सभी कारणों से शरीर तंत्रिकाओं के माध्यम से प्रजनन प्रणाली को नियंत्रित करने की क्षमता को देता है जिससे हार्मोन असंतुलित हो जाते है और स्पर्म काउंट कम होने लगता है प्रजनन अंग काम करना बंद कर देते हैं और नपुंसकता धीरे-धीरे जन्म ले लेती है। नपुंसकता से बचाव के लिए अपनी जीवन शैली व आहार शैली को व्यवस्थित करते हुए योग को अपने दिनचर्या में स्थान देना होगा।
यह योग अभ्यास प्रजनन तंत्र को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं जिसमें पश्चिमोत्तानासन, उत्तांन आसान, जानुसिरासन, कंदरासन, भद्रासन, तितली आसन, धनुरासन, सूर्य नमस्कार, नाड़ीशोधन प्राणायाम, अनुलोम विलोम, कपालभाती, भ्रामरी चंद्रभेदी प्राणायाम, वज्रासन- यह आसन श्रोणि क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में मदद करता है, तथा यौन क्रिया से जुड़ी मांसपेशियों और तंत्रिकाओं को मजबूत बनाता है सर्वांगासन- यह आसन जीवन शक्ति को बढ़ाता है और स्तंभन दोष को दूर कर सकता है।
भुजंगासन- प्रजनन अंगों को उत्तेजित करने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाने जाता हैं, पश्चिमोत्तानासन- आसन पैल्विक मांसपेशियों को खींचता है और विश्राम देता है, तनाव और चिंता को कम करता है, धनुरासन- पेट और पैल्विक मांसपेशियों को मजबूत करके, धनुरासन प्रजनन प्रणाली को सशक्त बनाता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रास :- गुर्दे, यकृत और पेट के अंगों को उत्तेजित करता है तथा प्रजनन प्रणाली को पुनर्जीवित करने में मदद करता है जानु शीर्षासन :- श्रोणि क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे स्तंभन स्वास्थ्य को बढ़ावा मिलता है। सेतुबंधासन-जननांगों में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है, तथा तनाव और थकान को कम करता है। व्यवस्थित दैनिक दिनचर्या का आहार से हम विभिन्न प्रकार के रोगों के साथ-साथ आने वाले गंभीर रोगों से बच सकते हैं अपने जीवन को स्वस्थ पूर्वक बना सकते हैं इसलिए हमें हमारे जीवन में योग को स्थान देने की आवश्यकता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में डेंगू ज्वर का प्रकोप बहुत तेजी से फैल रहा है, 2024 के बीच तक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को 7.6 मिलियन से अधिक डेंगू के मामले रिपोर्ट किये गये हैं। इनमें से 3.4 मिलियन मामलों की पुष्टि की गयी हैं, योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि डेंगू बुखार एक कष्टदायक शरीर को दुर्बल करने वाला मच्छर जनित रोग है और जो लोग दूसरी बार डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं उनमें गंभीर बीमारी विकसित होने का काफी अधिक जोखिम होता है।
डेंगू, जिसे ट्रॉपिकल फ्लू के नाम से भी जाना जाता है,यह वायरस एडीज प्रजाति के मच्छरों द्वारा फैलता डेंगू बुखार मुख्य रूप से संक्रमित एडीज मच्छरों के काटने से फैलता है , जिसमें ए.एजिप्टी और ए. एल्बोपिक्टस मच्छर शामिल हैं। मच्छर तब संक्रमित होता है जब वह किसी ऐसे व्यक्ति को काटता है जिसके खून में डेंगू है। लगभग एक सप्ताह के बाद, मच्छर काटने पर बीमारी को दूसरे व्यक्ति में फैलाने में सक्षम होता है। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में डेंगू का सीधा प्रसार नहीं होता डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है क्योंकि रक्त कोशिकाएं वायरस से प्रभावित होती हैं जो प्लेटलेट्स को नुकसान पहुँचती है इस चरण के दौरान उत्पादित एंटीबॉडी डेंगू बुखार के दौरान बड़ी संख्या में प्लेटलेट्स को नष्ट कर देती प्लेटलेट्स अस्थि मज्जा (Bone Marrow) में ब्लड सेल्स हैं।
स्वस्थ व्यक्ति में 1.5 लाख से 4 लाख तक ब्लड प्लेटलेट्स होते हैं, लेकिन डेंगू होने पर इनकी संख्या तेजी से गिर जाती है. जिसके चलते मरीज की इम्युनिटी काफी कमजोर हो जाती है. डेंगू में प्लेटलेट्स गिरकर 60 हजार तक पहुंच जाते हैं, WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) के अनुसार, थ्रोम्बोसाइटोपेनिया को बीमारी की गंभीरता का आकलन करने के लिए एक मानदंड माना जाता है।
थ्रोम्बोसाइटोपेनिया को प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट या 150,000/mm3 (<150 G/L) से कम प्लेटलेट काउंट के रूप में परिभाषित किया जाता थ्रोम्बोसाइटोपेनिक पर्पुरा एक प्रतिरक्षा संबंधी बीमारी है। एंटी-प्लेटलेट एंटीबॉडी के कारण प्लीहा में प्लेटलेट्स नष्ट हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आती है, शरीर में हल्का सा प्रभाव होने पर आसानी से खून बहने लगता है। डेंगू बुखार के लक्षण आमतौर पर संक्रमित होने के पहले हफ़्ते में ही दिखने लगते हैं जिसमें ,अचानक बहुत तेज़ बुखार, जी मिचलाना, त्वचा पर लाल चकत्ते,भयंकर सरदर्द, पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी,आँखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, या ऐंठन, नाक या मसूड़ों से खून आना,तेजी से सांस चलना आदि लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह ले चिकित्सा प्रारंभ कर दे उसके पश्चात सहयोगी चिकित्सा के रूप में आसन प्राणायाम का धीरे-धीरे अभ्यास कर सकते हैं जिसमें, सर्वांगासन, मत्स्यासन, पश्चिमोतानासन, नाड़ीशोधन प्राणायाम, कपालभाति प्राणायाम, के साथ साथ तुलसी+गिलोय का अर्क एवं पपीते के पत्तों का जूस काफी लाभदायक सिद्ध होता है, डेंगू बुखार तेज होने पर एवं अत्यधिक प्लेटलेट्स की संख्या गिरने पर आसन का अभ्यास नही करना चाहिए केवल नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास धीरे धीरे कर सकते हैं, नाड़ी शोधन प्राणायाम प्रतिरक्षा प्रणाली को स्ट्रांग बनता है एवं रक्त कोशिकाओं को डेंगू वायरस से प्रभावित होने से बचाने मैं सहयोग करता है, नाड़ी शोधन प्राणायाम के अभ्यास 1:4:2 के अनुपात के साथ किया जाता है, अभ्यास के लिए सुखासन में बैठ जाए दोनों हाथों को ज्ञान मुद्रा में रखें फिर बांयी नासिक से सांस 12 काउंटिंग के साथ ले फिर 48 काउंटिंग तक होल्ड करें फिर 24 काउंट के द्वारा दांयी से छोड़ दें फिर दांयी नासिका से सांस ले बांयी से छोड़ दें इस तरह 5 मिनिट तक कर सकते हैं।
डेंगू ज्वर एवं अन्य बीमारियों से बचाव के लिए योग एक अत्यंत लाभकारी उपाय है। नियमित योगाभ्यास से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और शरीर के अंगों की कार्यक्षमता में सुधार होता है। योग आसनों से रक्त संचार बेहतर होता है, तनाव कम होता है, और मानसिक संतुलन बना रहता है। योग जीवनशैली को स्वस्थ बनाता है और आत्म-संयम को बढ़ाता है, जिससे समग्र स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही हमारी इम्युनिटी भी बूस्ट होती है जिससे हम डेंगू जैसी कई बीमारियों से बच सकते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। कंप्यूटर के सामने घंटों एक पोजिशन में बैठकर काम करना और मोबाइल पर चैट-गेम खेलने की आदत युवाओं को स्पाइन की बीमारी का रोगी बना रही है। फरीदाबाद के सरकारी और निजी अस्पतालों में रोजाना 20-30 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। ऐसे में न्यूरो सर्जन ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
फरीदाबाद में बीके, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सहित करीब 15 बड़े अस्पताल हैं। इन अस्पतालों की न्यूरोलॉजी ओपीडी में रोजाना चार से पांच मरीज पीठ दर्द और स्पाइन की समस्या से पीड़ित होते है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ। राहुल ने बताया कि युवाओं में यह बीमारी काफी तेजी से बढ़ी है। पिछले दो साल में ओपीडी में इस बीमारी के मरीजों में युवाओं के केस 30 प्रतिशत तक बढ़े हैं।
ग्रेटर फरीदाबाद स्थित एक निजी अस्पताल के न्यूरो सर्जन डॉ विक्रम दुआ ने बताया कि भागदौड़ भरी जीवनशैली में 70 से 80 प्रतिशत लोगों को पीठ दर्द की समस्या हो रही है। इसके अलावा सोते समय हाथ में दर्द, जलन और झुनझुनी भी लोगों को परेशान करती है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
साथ ही रहन-सहन में बदलाव व तकनीकी निर्भरता के कारण युवा इस बीमारी की गिरफ्त में आ रहे हैं, जो कि आमतौर पर बुजुर्गों की बीमारी कही जाती है। उनके पास पहले जहां इस बीमारी के केस में 90 फीसदी बुजुर्ग तो 10 फीसदी युवा आते थे। वहीं आज यह रेश्यो 70 और 30 पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि युवा आजकल घंटों कंप्यूटर पर समय बिताते हैं। उनकी फिजिकल एक्टिविटी जीरो हो गई है, ऐसे में स्पाइन डिसआॅर्डर लगातार बढ़ रहा है।
शुरुआती दौर में भले ही युवा इसे गंभीरता से न लें, लेकिन लंबे समय में यह परेशानी का कारण बन सकती है। रीढ़ की हड्डी में दर्द और विकलांगता कैंसर, स्ट्रोक, हृदय रोग, मधुमेह और अल्जाइमर रोग की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहा है। मूव योर स्पाइन अभियान का उद्देश्य घर, कार्यस्थलों, स्कूलों और समुदायों के भीतर की स्थितियों सहित रीढ़ की हड्डी में दर्द और विकलांगता के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
डॉ रवि शंकर ने कहा कि पीठ दर्द का एक कारण घंटों कंप्यूटर पर बैठने के अलावा अधिक ड्राइविंग करना भी है। जब हम एक ही पोजिशन में ज्यादा देर तक बैठते हैं तो सिर से कमर तक की हड्डियों में खिंचाव पैदा होता है जो लम्बर स्पोंडिलोसिसबीमारी का संकेत है। ओपीडी में इस बीमारी के रोजाना चार से पांच मरीज आ रहे हैं।
कंप्यूटर के सामने घंटों बैठकर काम करना इस बीमारी का मुख्य लक्षण है। इसके अलावा कमर टेढ़ी करके बैठना, गलत तरीके से चलना, कमर दर्द को नजरअंदाज करना, कमजोरी आना, शरीर का कोई भाग सुन्न पड़ जाना, पैरों में झनझनाहट होना, चलने में दिक्कत होना, पेशाब रुक जाना। अगर कमर दर्द ठीक नहीं होती है और साथ में बुखार या टांगों में दर्द है तो तुरंत स्पाइनल सर्जन को दिखायें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय के भाग दौड़ भरी जीवन में हम अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं जिसके कारण हम विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित हो जाते हैं, उन्हीं में से एक गंभीर बीमारी है किडनी रोग। योगाचार्य महेश पाल विस्तार पूर्वक बताते हैं कि वर्तमान समय में भारत ही नहीं पूरे विश्व में बच्चे युवा वर्ग महिलाएं वयस्क वरिष्ठजन किडनी रोग से ग्रस्त होते जा रहे हैं, एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय जनसंख्या का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा क्रोनिक किडनी रोग (सीकेडी) से पीड़ित है, बही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये संख्याएं चौंका देने वाली हैं।
अनुमान है कि दुनिया भर में 2 मिलियन से भी अधिक लोग किडनी फेलियर से पीड़ित हैं, और इस बीमारी से पीड़ित रोगियों की संख्या में हर साल 5-7% की दर से वृद्धि होती जा रही है। किडनी रोग होने के कई कारण देखे गए हैं जो इस प्रकार है, किडनी में पर्याप्त रक्त प्रवाह न होना,किडनी को प्रत्यक्ष क्षति,किडनी में मूत्र का जमा हो जाना, प्रोस्टेट ग्रंथि में वृद्धि, गुर्दे में पथरी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सिगरेट व धूम्रपान का अत्यधिक सेवन, गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं होना, जैसे एक्लेम्पसिया व प्रीक्लेम्पसिया, अत्यधिक शराब का सेवन एवं बिन्ज ड्रिंकिंग (जिसे महिलाओं के लिए 2 घंटे में लगभग चार ड्रिंक्स और पुरुषों के लिए 2 घंटे में पांच ड्रिंक्स के रूप में परिभाषित किया जाता है) बिन्ज ड्रिंकिंग एक जोखिम तीव्र किडनी फेलियर है जो किडनी के कार्य में अचानक गिरावट लाता है और किडनी फेलियर का कारण बनता है।
किडनी की बीमारियाँ तब होती हैं जब आपकी किडनी क्षतिग्रस्त हो जाती है और आपके रक्त को फिल्टर नहीं कर पाती। क्रोनिक किडनी रोग में, क्षति कई वर्षों के दौरान होती है ग्लोमेरुलोनेफ्राइटिस,इस प्रकार की किडनी की बीमारी में ग्लोमेरुली को नुकसान पहुंचता है, जो आपके गुर्दे के अंदर फिल्टरिंग इकाइयां हैं। आपके गुर्दे के कई काम हैं, लेकिन उनका मुख्य काम आपके रक्त को साफ करना, विषाक्त पदार्थों, अपशिष्ट और अतिरिक्त पानी को मूत्र (पेशाब) के रूप में बाहर निकालना है।
आपके गुर्दे आपके शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स (जैसे नमक और पोटेशियम) और खनिजों की मात्रा को भी संतुलित करते हैं, रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाते हैं, लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करते हैं और आपकी हड्डियों को मजबूत रखते हैं। यदि आपके गुर्दे क्षतिग्रस्त हैं और ठीक से काम नहीं करते हैं, तो अपशिष्ट आपके रक्त में जमा हो जाते हैं और किडनी को क्षति पहुँचाते है और किडनी के रोगों से हम ग्रस्त होने लगते हैं, जब हम किडनी रोग से ग्रस्त होते हैं तो हमारे सामने कई लक्षण नजर आते हैं, थकान, कमजोरी, कम ऊर्जा स्तर,भूख में कमी हाथ, पैर और टखनों में सूजन सांस लेने में कठिनाई झागदार या बुलबुलादार पेशाब।
मोटी आंखें, सूखी और खुजली वाली त्वचा, ध्यान केन्द्रित करने में परेशानी, नींद न आना, सुन्न होना। मतली या उलटी,मांसपेशियों में ऐंठन, उच्च रक्तचाप, त्वचा का काला पड़ना, यह सारे लक्षण हमारी बॉडी में नजर आते हैं तो हमें तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए उसके पश्चात अन्य उपचार करने चाहिए, योग रक्तचाप को कम करने, गुर्दे की कार्यप्रणाली में सुधार करने, डायलिसिस की आवश्यकता को कम करने और सीकेडी के रोगियों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए पारंपरिक उपचार विधियों के सहायक उपचार के रूप में सुरक्षित और प्रभावी उपाय है, योग अभ्यास से हमारे दैनिक दिनचर्या और हमारी आहारचार्य में बदलाव आने से किडनी के रोगों के साथ साथ अन्य रोगों से भी बच सकते हैं।
किडनी रोग से बचाव के लिए हमें यह योग अभ्यास हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल करना चाहिए जिसमें कपालभाति सटकर्म, नाड़ी शोधन, अनुलोम विलोम प्राणायाम, आसन मैं धनुरासन, पश्चिमोत्तासन, चक्रासन वृक्षासन, उष्ट्रासन, सूर्य नमस्कार कटिचक्रासन आदि, कपालभाति के अभ्यास से किडनी फंक्शन को बेहतर करने में मदद मिलती है। प्राणायाम ग्लोमेरुली फिल्टरिंग इकाई को क्षति होने से बचाने में सहयोग करता है, आसन का अभ्यास लिवर, किडनी, ओवरी और यूट्रस के फंक्शन को स्टिम्युलेट करता है।
इस तरह रेगुलर योग अभ्यास करने से किडनी रोग ही नहीं अन्य रोगों से हम अपने आप को बचा सकते हैं हमें अपनी लाइफ स्टाइल में 1 घंटे का योग अभ्यास जरूर शामिल करना चाहिए और हमारी दैनिक दिनचर्या और आहारचार्य को हमारे स्वास्थ्य के अनुसार रखना चाहिए, जिससे कि हम हमारे जीवन में विभिन्न प्रकार के रोगों का व समस्याओं से बचे रहें। किडनी रोगियों के लिए भोजन मैं सोडियम प्रोटीन पोटेशियम और फास्फेट की कम मात्रा बाला भोजन लेना चाहिए।
एबीएन हेल्थ डेस्क। बच्चों में बढ़ती आंखों की समस्या एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है, जिसमें वर्तमान समय देखने में आ रहा है कि प्रत्येक बच्चे को जन्म से ही आंखों की समस्या से गुजरना पड़ रहा है। और आंखों पर चश्मा लगता जा रहा है। यह कारण माता-पिता की बदलती लाइफस्टाइल दैनिक दिनचर्या आहार शैली भी एक कारण है।
वहीं बच्चों की दिनचर्या एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का ज्यादा उपयोग और फास्ट फूड का अत्यधिक सेवन करने से बच्चे दिन प्रतिदिन आंखों की समस्याओं से ग्रसित होते जा रहे हैं। योगाचार्य महेश पाल विस्तार पूर्वक बताते हैं कि बच्चों में आँखों की समस्याएँ ऐसी किसी भी समस्या या स्थिति को संदर्भित करती हैं जो आँखों, ऑप्टिक तंत्रिका और मस्तिष्क सहित दृश्य प्रणाली को प्रभावित करती हैं।
ये समस्याएँ गंभीरता में भिन्न हो सकती हैं, हल्के अपवर्तक त्रुटियों से लेकर अधिक गंभीर स्थितियों तक जो बिना इलाज के दृष्टि हानि का कारण बन सकती हैं। बच्चों में होने वाली आम आँखों की समस्याओं में अपवर्तक त्रुटियाँ शामिल हैं, जैसे कि मायोपिया (नज़दीकी दृष्टि) और हाइपरोपिया (दूरदृष्टि), साथ ही एम्ब्लियोपिया (आलसी आँख), स्ट्रैबिस्मस (भरी आँखें) और कंजंक्टिवाइटिस (गुलाबी आँख) जैसी स्थितियाँ।
इन स्थितियों और उनके संकेतों और लक्षणों के बारे में जागरूक होना ज़रूरी है ताकि समय रहते इनका पता लगाया जा सके और उचित उपचार के साथ साथ योग अभ्यास कर समय रहते आंखों की समस्या का निदान कर सकें, बच्चों में आँखों की समस्याओं के कुछ सामान्य लक्षणों में बार-बार आँखों को रगड़ना, अत्यधिक आँसू आना, लाल या सूजी हुई आँखें, प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, आँखें सिकोड़ना , ध्यान केंद्रित न कर पाना, पढ़ने या नज़दीक से काम करने में कठिनाई और आँखों का असामान्य संरेखण शामिल हैं।
वहीं आंखों की योगिक सूक्ष्म क्रिया से स्ट्रैबिस्मस, आँशु नलिकाओं का अवरुद्ध होने की समस्या, निस्टागमस आदि समस्याओं से बचा जा सकता है वहीं आसान और प्राणायाम ध्यान के द्वारा मायोपिया (निकट दृष्टि दोष), हाइपरोपिया (दूरदृष्टि दोष) एम्ब्लियोपिया (आलसी आँख) कंजंक्टिवाइटिस (गुलाबी आँख) आदि आँखों की समस्याओं से बचा जा सकता है, जिसमे रेगुलर योग अभ्यास मैं आँखों की योगिक सूक्ष्म क्रियाएं, सुखासन, स्वास्तिक आसान पद्मासन, सर्वांगासन शीर्षासन विपरीत करनी मुद्रा , प्राणायाम में अनुलोमविलोम, भ्रामरी, चंद्रभेदी आज्ञाचक्र पर ध्यान, नदी शोधन प्राणायाम आदि के अभ्यास से आंखों की समस्याओं से बचा जा सकता है।
5 वर्ष से अधिक के बच्चे योगाभ्यास अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकते हैं, आंखों में लालिमा होने की समस्या होने पर शीर्षासन का अभ्यास न करें। बच्चों की दैनिक दिनचर्या में पौष्टिक आहार शैली और दैनिक दिनचर्या में योगाभ्यास को स्थान देकर आंखों की समस्या के साथ-साथ हम बच्चों को भविष्य में आने वाले विभिन्न प्रकार मानसिक व शारीरिक रोगों से बचा सकते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। परम श्रद्धेय योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, अध्यक्ष वर्ल्ड योगासन एवं योगाचार्य डॉ जयदीप आर्य, महासचिव वर्ल्ड योगासन एवं योगासन भारत के मार्गदर्शन में आॅल इंडिया योगासन पुलिस गेम 27 सितंबर 2024 को भिलाई छत्तीसगढ़ में 18 से 55 वर्ष के आयु वर्ग में संपन्न हुआ।
समापन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ जयदीप आर्य, महासचिव वर्ल्ड योगासन एवं योगासन भारत का सान्निध्य व आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मुख्य अतिथि का स्वागत छत्तीसगढ़ योगासन सचिव एव कंपटीशन डायरेक्टर यश पाराशर कंपटीशन मैनेजर जयंत जैन ने पुष्प गुच्छ, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र देकर किया।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में रचित कौशिक, कोषाध्यक्ष योगासन भारत का स्वागत किया गया। अन्य गणमान्य अतिथियों में सचिव रोहित कौशिक, यस पारासर उमग नारंग श्रेयस मारकंडेय छत्तीसगढ़ पुलिस आईजी आदि शामिल रहे।
मुख्य अतिथि डॉ जयदीप आर्य जी ने करो योग, रहो निरोग के माध्यम से प्रतिदिन योगासन और प्राणायाम को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी और कहा वह दिन दूर नहीं जब योगासन खेल के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए सर्वाधिक मेडल जीतकर राष्ट्र का नाम रोशन करेंगे।
योगाचार्य महैश पाल ने बताया की इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आल इंडिया नेशनल योगासन पुलिस गेम का आयोजन भिलाई छत्तीसगढ़ में किया गया जिसमें पूरे देश से 511 योग के खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में पांच प्रकार के इवेंट्स—ट्रेडिशनल, आर्टिस्टिक पेयर, आर्टिस्टिक सिंगल, रिदमिक पेयर, और आर्टिस्टिक ग्रुप इवेंट्स—में प्रतिभागियों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में प्रत खिलाड़ी को प्रत्येक आसन के प्रदर्शन पर 10 अंक में से अंक दिये गये, जो माइक्रो मार्किंग सिस्टम के आधार पर खिलाड़ियों की प्रतिभा को आकलन किया गया।
योगासन भारत, भारत सरकार के खेल युवा कल्याण विभाग के अंतर्गत कार्य करने बाली योग की सबसे बड़ी संस्था है जो हमेशा योगासन को गाव से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर योग के खिलाडियों को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है, इस प्रतियोगिता मे आर्टिस्टिक सिंगल सीनियर बी+सी ग्रुप में प्रथम स्थान बब्लिना खाकरे मध्य प्रदेश पुलिस का रहा, दूसरा स्थान राजस्थान व तृतीय स्थान पंजाब पुलिस का रहा।
इसी तरह अन्य इवेंट में बीएसएफ पुलिस आइटीबीपी पुलिस एवं अन्य इवेंट में अलग-अलग राज्य की पुलिस ग्रुप ने स्थान प्राप्त किया। समापन पर छत्तीसगढ़ योगासन सचिव व छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा सभी अतिथियों, खिलाड़ियों और आयोजन समिति का धन्यवाद ज्ञापित किया एवं राष्ट्रगान के साथ प्रतियोगिता को सम्पन्न किया गया।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। नया जीवन पाने वाले इन हृदय रोगियों के लिए विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर बत्रा हास्पिटल में सम्मान समारोह का आयोजन हुआ। बत्रा हार्ट एंड मल्टीस्पिशयलिटी ग्रुप, फरीदाबाद ने समय पर और तत्परता से इलाज के जरिए पिछले एक साल में हृदयाघात से भर्ती सभी 110 मरीजों की जान बचा कर शून्य मृत्युदर का कीर्तिमान बनाया है। इन मरीजों में ज्यादातर वे थे जिन्हें गंभीर रूप से दिल का दौरा पड़ा था या हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं थीं।
विश्व हृदय दिवस की पूर्व संध्या पर हास्पिटल में आयोजित एक सम्मान और सालगिरह समारोह को संबोधित करते हुए कार्डियक साइंसेज के निदेशक और अध्यक्ष डॉ. पंकज बत्रा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, पिछले साल भर में हमारे पास हृदय रोगों और हृदयाघात के 110 मरीज आये और विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा उनके सफलतापूर्वक इलाज से उन्हें जीवनदान मिला। इस कार्यक्रम में उपस्थित अधिकांश मरीजों को गंभीर रूप से दिल के दौरे पड़े थे और उनकी धमनियों में 100 प्रतिशत ब्लॉकेज था।
इस कार्यक्रम में कश्मीर से लेकर केरल तक के 55 से 85 वर्ष की आयु के मरीजों ने बत्रा हार्ट एंड मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल, फरीदाबाद में नया जीवन पाने के अपने अनुभवों को साझा किया। दिल्ली के अधेड़ आयु के एक मरीज डेविड ने बताया कि किन हालात में वे इस अस्पताल पहुंचे और किस तरह डॉ. पंकज की तत्परता से उनका जीवन बच पाया। उन्होंने बताया, मुझे हृदय की समस्या थी जबकि मैं इसे पेट में गैस और जलन की समस्या समझता रहा।
जब सीने में दर्द बढ़ने लगा तो मुझे बत्रा हास्पिटल लाया गया जहां डॉ. पंकज ने तुंरत मेरे मर्ज को पहचान कर समय से मेरा इलाज कर मेरा जीवन बचाया। डेविड की पत्नी ने भी इसी बात को दोहराया और वहां मौजूद उन मरीजों की भावनाओं को अभियक्ति जिन्हें इस हास्पिटल में जीवनदान मिला।
ज्यादातर मरीजों ने छुट्टियों में भी गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को आपात चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने की बत्रा हास्पिटल की प्रतिबद्धता की चर्चा करते हुए उम्मीद जताई कि यह रविवार और छुट्टियों के दिन भी खुला रहेगा।
डॉ. पंकज ने कहा, शून्य मृत्युदर हमारी टीम के समर्पण और उनकी विशेषज्ञता का प्रमाण है। हमने आपातकालीन चिकित्सा जिसे डोर बैलून टाइम कहते हैं और जहां मरीज की जान बचाने के लिए 30 मिनट से भी कम का समय मिलता है, में अपनी विशेषज्ञता से नये मानदंड स्थापित करते हुए इसे एक जीवनरक्षक प्रारूप बनाया है। मरीजों को सम्मानित करने के साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के स्टाफ, नर्सों, डॉक्टरों और मरीज के अस्पताल में भर्ती होने से पहले व उसके बाद इलाज व देखभाल में शामिल सभी कर्मचारियों को भी मेरिट प्रमाणपत्र से सम्मानित किया।
इस मौके पर बत्रा हर्ट एंड मल्टी स्पेशियलिटी हास्पिटल, फरीदाबाद के अध्यक्ष रमेश कुमार बत्रा ने डॉ पंकज की किताब प्रीवेंशन आॅफ हर्ट डिजीज का लोकार्पण किया। हृदय की बीमारियों से बचाव के लिए जीवनशैली में सुधार की जरूरत की चर्चा करते हुए डॉ. पंकज ने नियमित व्यायाम, टहलने, तनावमुक्त रहने, धूम्रपान नहीं करने और ब्लड प्रेशर एवं मधुमेह पर नजर रखते हुए समय-समय पर चिकित्सा जांच कराते रहने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, चिकित्सा विज्ञान में तमाम अविष्कारों के बावजूद 2019 के आंकड़े बताते हैं कि हृदय संबंधी बीमारियों से दुनिया में 1.80 करोड़ लोगों की मौत हुई जिसमें 58 प्रतिशत लोग एशिया के थे। इसकी बड़ी वजह अनियमित नींद, मोबाइल का लगातार इस्तेमाल, जंक फूड और धूम्रपान है। बत्रा हास्पिटल हृदय दशकों से हृदय चिकित्सा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और देशभर के मरीजों की उम्मीदों पर खरा उतरा है।
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