टीम एबीएन, रांची। कोरोना से अभी लोग ठीक से उबर भी नहीं पाये थे कि इसी बीच एचएमपीवी एक नया खतरा बनकर बढ़ने लगा है। सबसे पहले चीन से खबरें सामने आयी कि देश में इस वायरस के संक्रमण ने अस्पतालों और श्मशान में भीड़ बढ़ा दी है, लेकिन बीते सोमवार को भारत में भी इस संक्रामक रोग का पहला मामला सामने आ गया। वहीं, चीनी वायरस एचएमपीवी को लेकर झारखंड भी अलर्ट है।
एचएमपीवी वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। वर्तमान में, एचएमपीवी (ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस) वायरस के संबंध में कोई तत्काल चिंता नहीं है, क्योंकि यह आबादी के लिए तत्काल खतरा पैदा नहीं करता है।
राज्य सरकार ने किसी भी संभावित स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारी और व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि एक डॉक्टर होने के नाते, मैं सभी उपलब्ध चैनलों के माध्यम से स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा हूं और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ नियमित संचार बनाए रख रहा हूं। वर्तमान में, हमें किसी भी अलार्म के संबंध में केंद्रीय स्वास्थ्य अधिकारियों से कोई औपचारिक संचार नहीं मिला है।
मैंने विभाग के सचिव को राज्य भर में तैयारियों के मौजूदा स्तर का आकलन करने के लिए सिविल सर्जनों के साथ एक बैठक बुलाने का निर्देश दिया है। अंसारी ने कहा कि रिम्स में 2 से 3 दिन के अंदर एचएमपीवी संक्रमण की जांच शुरू हो जायेगी। बाजार से भी जांच किट खरीदने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। जमशेदपुर के एमजीएमसीएच में भी जांच शुरू कराने की योजना है।
अंसारी ने कहा कि मैं जनता को आश्वस्त करता हूं कि हमारे पास सभी आवश्यक व्यवस्थाएं हैं और तत्काल चिंता का कोई कारण नहीं है। हालांकि, चल रहे सर्दी के मौसम को देखते हुए, अतिरिक्त सावधानी बरतना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से 5 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों और 70 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस दौरान वे स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।
हम सभी को सूचित रहने, स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करने और अपनी और अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए निवारक उपाय करने की दृढ़ता से सलाह देते हैं। राज्य सरकार सभी नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और किसी भी उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए सक्रिय कदम उठाती रहेगी।
उन्होंने कहा कि रिम्स में एचएमपीवी संक्रमण की जांच शुरू करने की तैयारी की जा रही है। मशीन उपलब्ध है, लेकिन जांच किट का इंतजार है। ये किट एनआईवी पुणे से मंगाई जा रही हैं। इसके लिए पत्र भेजा गया है। जल्द ही रिम्स में जांच की सुविधा शुरू हो जायेगी।
एबीएन हेल्थ डेस्क। भारत में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय और विशेषज्ञों ने सतर्कता बढ़ा दी है। हालांकि, दिल्ली मेडिकल काउंसिल के अध्यक्ष और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अरुण गुप्ता ने कहा कि मौजूदा स्थिति चिंताजनक नहीं है और घबराने की आवश्यकता नहीं है।
डॉ गुप्ता ने बताया कि एचएमपीवी से जुड़े संक्रमण पहले भी देखे गए हैं और यह कोई नया वायरस नहीं है। भारत में जो मामले रिपोर्ट हुए हैं, वे नियमित निगरानी के दौरान पाये गये हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू जैसे लक्षणों वाली बीमारियों में कोई अप्रत्याशित वृद्धि नहीं हुई है। फिर भी, कोरोना जैसी सावधानियों को अपनाने की सलाह दी गयी है।
शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने संयुक्त निगरानी समूह की बैठक आयोजित की। इसमें डीजीएचएस, आईसीएमआर, एनसीडीसी, डब्ल्यूएचओ और अन्य प्रमुख संस्थाओं के विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। बैठक में चीन में श्वसन रोगों के बढ़ते मामलों और मौसमी पैथोजेन्स जैसे इन्फ्लूएंजा, फरश् और एचएमपीवी की समीक्षा की गई।
मंत्रालय ने बताया कि भारत में श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए पहले से ही एक मजबूत निगरानी प्रणाली है। आईसीएमआर और आईडीएसपी नेटवर्क के आंकड़ों से पता चला है कि मौजूदा समय में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है। अस्पतालों के चिकित्सकों ने भी इसकी पुष्टि की है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। हाल ही में चीन में मानव मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। एचएमपीवी एक श्वसन वायरस है जो ऊपरी और निचले श्वसन संक्रमण का कारण बन सकता है। यह वायरस विशेष रूप से छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को प्रभावित करता है। 2001 में खोजे गये इस वायरस का संबंध श्वसन सिंकिटियल वायरस (आरएसवी) से है, और यह न्यूमोविरिडे परिवार का सदस्य है।
एचएमपीवी आमतौर पर सर्दियों और वसंत के दौरान अधिक सक्रिय होता है। इसके लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं, जिनमें खांसी, गले में खराश, बुखार और सांस लेने में दिक्कत शामिल हैं। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने, या दूषित सतहों के संपर्क में आने से फैलता है।
एचएमपीवी से बचाव के लिए कुछ बुनियादी स्वच्छता उपायों का पालन करना जरूरी है।
एचएमपीवी के लिए फिलहाल कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसके इलाज में लक्षणों को कम करने और सहायक चिकित्सा देखभाल का सहारा लिया जाता है।
एबीएन हेल्थ डेस्क। वर्तमान समय में दिन प्रतिदिन हमारा स्वास्थ्य गिरता जा रहा है जिसमें एक गंभीर समस्या हमारे सामने निकल कर आ रहे हैं वह है चेस्ट पेन (एंजाइना रोग), सर्दी मै बढ़ता सीने का दर्द बच्चों व युबाओ को हार्ट अटैक व उनके जीवन को संकट मै डाल रहा है।
चेस्ट पेन की वजह से कई बच्चे, युवा, वरिष्ठजन अपनी जान गवा चुके हैं। योगाचार्य महेश पाल बताया कि नये साल की सुरूआत को अपने दिनचर्या मैं योग-प्राणायाम को शामिल कर करे और प्रत्येक दिन योग अभ्यास करे, जिससे कि हम पूरे साल स्वस्थ बने रहे।
एनजाइना से तात्पर्य सीने में दर्द या बेचैनी से है जो आमतौर पर कोरोनरी हृदय रोग के कारण होता है। यह दिल के दौरे जैसा महसूस हो सकता है जिसमें आपकी छाती में दबाव या सिकुड़न होती है। इसे कभी-कभी एनजाइना पेक्टोरिस या इस्केमिक चेस्ट पेन कहा जाता है, कोरोनरी धमनियाँ रक्त वाहिकाएँ हैं जो आपके हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुँचाती हैं।
यदि आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल बहुत अधिक है तो यह आपकी धमनियों में जमा हो जाता है और उन्हें संकरा कर देता है।यदि आपकी धमनियाँ गंभीर रूप से संकरी हैं तो उनमें प्रवाहित होने वाले रक्त की मात्रा कम हो जाती है और आपके हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं मिल पाता है।
एनजाइना के लक्षण तब शुरू हो होते हैं जब आपके दिल को सामान्य से ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है और उसे ज़रूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसा तब होता है जब आप शारीरिक रूप से ज़्यादा मेहनत करते हैं या भावनात्मक रूप से परेशान होते हैं एवं अधिक कोलेस्ट्रॉल और भारी खाना खाने के बाद भी ऐसा देखने मै आता है।
एंजाइना रोग या सीने का दर्द होने के कुछ कारण है जिसमें पसलियों, पसली की कार्टिलेज, सीने की मांसपेशियों (पेशी-कंकालीय सीने की दीवार का दर्द), या सीने की नाड़ियों के विकार, फेफड़े को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (प्लूराइटिस),हृदय को ढकने वाली झिल्ली की सूजन (पेरिकार्डाइटिस), पाचन संबंधी विकार (जैसे कि इसोफ़ेजियल रिफ़्लक्स या इसोफ़ेजियल ऐंठन, अल्सर रोग या पित्ताशय की पथरी), दिल का दौरा या एंजाइना (अक्यूट करोनरी सिंड्रोम और स्टेबल एंजाइना), योग व प्राणायाम से। चेस्टपेन (एंजाइना) से बचा जा सकता है जिसमें नाड़ी शोधन, सूर्य भेदी, भ्रामरी प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, चकरासन, उष्ट्रासन, वज्रासन, नाड़ीशोधन प्राणायाम नाड़ीयो के विकारों को दूर करता है।
सूर्यभेदी प्राणायाम कोरोनरी धमनी के अवरोधों को दूर कर कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है जो चेस्ट पेन का मुख्य कारण है, सूर्य नमस्कार शरीर में ऊर्जा का संचार करता है मोटापा को नियंत्रित करता है, चक्रासन पाचन संबंधी विकारों को दूर करता है।
भ्रामरी प्राणायाम भावनात्मक रूप से स्ट्रांग बनता है चेस्ट पेन की समस्या से बचाव के लिए हमें हमारी दिनचर्या व भोजनचर्या को ठीक कर प्रत्येक दिन योग अभ्यास करना होगा, 2025 नया साल के रूप में हमारे सामने आ रहा है हम नित्य प्रतिदिन योग को अवश्य शामिल करें और 2025 में पूर्ण रूप से अपने आप को स्वस्थ बनायें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। धूम्रपान, जो एक आम सी लगने वाली आदत है, कहीं न कहीं हमारी उम्र को चोरी-चुपके कम कर रही है। धूम्रपान से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य खतरों को लेकर हाल ही में किये गये एक शोध में चौंकाने वाले आकड़े सामने आये हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के अध्ययन के अनुसार, एक सिगरेट पीने से पुरुषों के जीवन से औसतन 17 मिनट और महिलाओं के जीवन से 22 मिनट कम हो जाते हैं। यह आंकड़े पिछले अनुमानों से कहीं अधिक हैं, जिसमें एक सिगरेट से जीवन के 11 मिनट कम होने की बात कही गयी थी। यानी तीन सिगरेट पीने से जिंदगी के एक घंटे से ज्यादा का समय बीत जाता है।
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने पाया है कि धूम्रपान से होने वाला नुकसान संचयी होता है। यानि जितनी जल्दी कोई व्यक्ति इस आदत को छोड़ता है, उतनी ही लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने की संभावना होती है। शोध में यह भी पाया गया कि एक धूम्रपान करने वाला व्यक्ति जो दिन में 10 सिगरेट पीता है, अगर 1 जनवरी को धूम्रपान छोड़ देता है, तो 8 जनवरी तक वह जीवन के एक पूरे दिन के नुकसान को रोक सकता है। फरवरी के अंत तक उसका जीवन एक सप्ताह तक बढ़ सकता है और अगस्त आते-आते यह अवधि एक महीने तक हो सकती है।
धूम्रपान से सिर्फ उम्र ही कम नहीं होती, बल्कि यह कई गंभीर बीमारियों जैसे कि कैंसर, दिल की बीमारी और फेफड़ों की बीमारी का भी कारण बनता है। धूम्रपान करने वाले लोगों में गैर-धूम्रपान करने वालों की तुलना में ये बीमारियां होने का खतरा काफी ज्यादा होता है।
यूसीएल अल्कोहल और तंबाकू अनुसंधान समूह की प्रमुख शोधकर्ता डॉ सारा जैक्सन ने कहा, धूम्रपान छोड़ने का फायदा किसी भी उम्र में महसूस किया जा सकता है। यह स्वास्थ्य में तत्काल सुधार लाता है और जीवन प्रत्याशा बढ़ाता है। उन्होंने धूम्रपान छोड़ने के लिए उपलब्ध विभिन्न उपचार और संसाधनों का उपयोग करने की सलाह दी।
वहीं यूके की नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) ने क्विट स्मोकिंग ऐप और आनलाइन पर्सनल क्विट प्लान जैसे संसाधनों के जरिए धूम्रपान छोड़ने वालों की मदद की पेशकश की है। ब्रिटिश सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री एंड्रयू ग्वेने ने इसे एक जानलेवा और महंगी आदत बताते हुए कहा कि नये साल के मौके पर धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लेने का यह सही समय है।
रॉयल कॉलेज आफ फिजिशियन के प्रोफेसर संजय अग्रवाल ने बताया कि धूम्रपान करने वाली हर सिगरेट जीवन के अनमोल मिनट छीन लेती है और हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर भी विनाशकारी प्रभाव डालती है। उन्होंने धूम्रपान को रोकथाम योग्य मृत्यु और बीमारियों का प्रमुख कारण बताया।
धूम्रपान छोड़ना आसान नहीं होता, लेकिन यह संभव है। कई तरीके हैं जिनकी मदद से आप धूम्रपान छोड़ सकते हैं जैसे कि
एबीएन हेल्थ डेस्क। आल इंडिया युनिवर्सिटी गेम्स 2024-25 उड़ीसा के भुनेश्वर के किट युनिवर्सिटी में आयोजित हैं। जिसमें देशभर से 900 युनिवर्सिटी और चालीस हजार से ज्यादा बच्चों ने भाग लिया है।
जिसमें रांची जिला से नटराज योग संस्थान के संचालक आर्य प्रहलाद भगत की प्रतिनियुक्ति झारखंड से तकनीकी पदाधिकारी के तौर पर हुई है, यह बहुत अभूतपूर्व है और योगासन भारत ने उन्हें यह मौका प्रदान किया है। योगासन खेल संघ झारखंड के महासचिव विपिन पांडेय एवं सभी पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं प्रेषित की है।
एबीएन हेल्थ डेस्क (चंडीगढ़)। भले ही आजकल आरओ का जमाना हो लेकिन भारत में अभी भी कई लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। भारत में गंदे पानी पीने के कारण लोगों में गंभीर बीमारियां पनप रही हैं। हाल ही में हुए सर्वे के अनुसार, भारत में गंदा पानी पीने के कारण शहर व गांव में मौत की संख्या काफी बढ़ी है। आज हम आपको बताएंगे कि गंदे पानी के कारण कौन-कौन सी बीमारियां फैल रही हैं।
गंदा खाना और पानी पीने के कारण होने वाला डायरियां मौत की वजह भी बन सकता है। यह बीमारी ज्यादा छोटे बच्चों में देखने को मिलती है। अगर दो हफ्ते तक बीमारी ठीक ना हो तो उससे शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इसमें उल्टी-दस्त, चक्कर आना, डिहाइड्रेशन, त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब ठीक से न होना, मल में खून आना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
बैक्टीरिया के कारण होने वाला साल्मोनेला टाइफी ज्यादातर गांवों में देखने को मिलता है क्योंकि यहां साफ-सफाई की काफी कमी होती है। एक जीवाणु संक्रमण है, जो आगे चलकर टाइफाइड बुखार का कारण बनता है। इसमें बुखार, मतली, उल्टी, दस्त, और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं।
हेपेटाइटिस ए एचएएस वायरस के कारण होने वाला लीवर रोग है, जो दूषित पानी या भोजन से फैलता है। अगर बुखार, भूख न लगना, मतली, पेट में दर्द, पीलिया, थकावट, पीला या स्लेटी रंग का मल व पेशाब और सारे शरीर में खुजली जैसे लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
पेचिश को खूनी दस्त भी कहा जाता है, जो गंदा पानी और दूषित भोजन से होती है। इसके कारण आंतों में सूजन आ जाती है। यह आमतौर पर 3 से 7 दिनों तक रहता है लेकिन फिर भी अगर यह बीमारी ठीक न हो तो इससे जान जा सकती है। इसमें उच्च बुखार मतली व उल्टी, पेट में मरोड़, खूनी दस्त, तेज बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
एबीएन हेल्थ डेस्क। आज के समय में व्यस्त जीवन और खराब लाइफ स्टाइल की वजह से कई सारी समस्याएं उत्पन्न हो रही है। लोगों को खुद के स्वास्थ्य पर ध्यान देने का समय नहीं मिल पा रहा है। खासकर महिलाएं जो घर और बाहर के कामों को तो अच्छे से संभाल लेती हैं लेकिन खुद की छोटी-छोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देती है। वह छोटी-छोटी समस्याएं आगे जाकर गंभीर बीमारी के रूप में उभरती हैं।
इन्हीं में से एक है पीसीओडी, योगाचार्य महेश पाल बताते हैं कि जब पीसीओडी होता है तो हमारे सामने कई लक्षण नजर आते हैं जिनमें चेहरे पर कील मुहासे होना, वजन बढ़ना, अनियमित पीरियड्स या पीरियड्स का पूरी तरह बंद हो जाना, ज्यादा रक्तस्राव होना, त्वचा का काला पड़ना, चेहरे पर बाल उगना, सर दर्द होना नींद में कमी आदि, पीसीओडी यानी पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज, पीसीओडी की समस्या महिलाओं और लड़कियों में बहुत ही कॉमन हो गयी है।
नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हेल्थ एंड रिसर्च के अनुसार हमारे देश में करीब 10% से भी अधिक महिला आबादी पीसीओडी की समस्या से ग्रसित हो गयी है और यह आंकड़ा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। पीसीओडी का मतलब है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन डिजीज जो महिलाओं में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। यह महिला में होने वाला एक हार्मोनल विकार है, जहां हार्मोन संतुलन बिगड़ने के कारण ओवरी में छोटे-छोटे सिस्ट का निर्माण होता है जो गांठ की तरह दिखाई देते हैं।
पीसीओडी के कारण महिलाओं में बांझपन, अनियमित पीरियड्स, इत्यादि जैसी कई समस्याएं सामने आती है। पीसीओडी की समस्या अधिकतर 14 वर्ष से 45 वर्ष की लड़कियों व महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलती हैं। पीसीओडी होने के पीछे कई कारण है जिसमें अनहेल्दी लाइफस्टाइल, आनुवांशिक कारण, मोटापा इन्सुलिन रेजिस्टेंस, हाइड्रोजन लेवल का हाई होना, फास्ट फूड जंक फूड का सेवन, अव्यवस्थित भोजनाचार्य, सिगरेट शराब या नशीली पदार्थों का सेवन, पीरियड्स असंतुलन होना, योग प्राणायाम मेडिटेशन व व्यायाम न करना, तनाव में रहना आदि कारणों की वजह से महिलाएं पीसीओडी की समस्या से ग्रसित हो जाती हैं।
ओव्यूलेशन की कमी गर्भाशय के स्तर को हर एक मेंस्ट्रुअल के समय बहने से रोकती है। पीसीओडी से ग्रस्त महिलाओं को साल में नौ पीरियड्स कम आते हैं, जिससे कि गर्भाशय की मोटी परत काफी बढ़ जाती है। इस वजह से एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया और एंडोमेट्रियल कैंसर अंतगर्भाशय मैं होने का खतरा बढ़ जाता है।
पीसीओडी की समस्या से बचाव के लिए सहयोगी चिकित्सा के रूप में हमें हमारे दैनिक दिनचर्या में योग प्राणायाम को महत्व देना चाहिए जिसमें, भुजंगासन, शसकासन, बद्धकोणासन, उष्ट्रासन, सेतुबंध आसन, तितली आसान, सूर्य नमस्कार भुजंगासन-पेल्विक एरिया पर हल्का दबाव डालता है। अंडाशय को उत्तेजित करता है और पीसीओडी के लक्षणों को दूर करने में मदद करती है।
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