टीम एबीएन, रांची। आज दिनांक 17.06.2025, मंगलवार को डीएवी पब्लिक स्कूल गांधीनगर, रांची में प्राचार्य प्रदीप झा के विशेष आमंत्रण पर विद्यालय परिसर में बृहत योग कक्षा का संचालन स्वामी मुक्तरथ के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। प्राचार्य श्री झा ने बच्चों को योग के समग्र रूपों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि योग शारिरिक व्यायाम नहीं है, यह विद्या पूरी तरह से वैज्ञानिक है जो मनुष्य के चित्त के गंदगी को हटाता है और प्रकाश को दिखाता है। महर्षि पातञ्जलि का यह सूत्र बताता है- योगश्चित्त वृत्ति निरोध:। योग से चित्तवृत्तियों का निरोध होता है और निरोध होने से वास्तविक ज्ञान उजागर होता है। व्यक्ति का मन स्थिर होता है और प्रसन्नचित होता है। योग शरीर और मन दोनों को तनावरहित कर ध्यान के लिए मस्तिष्क को तैयार करता है। ध्यान में मन की स्थिरता के लिये योगासन और प्राणायाम की साधना करनी होती है ताकि शरीर घन्टों तक स्थिर और सुखद अवस्था में बनी रहे। स्वामी मुक्तरथ योग के कई पहलुओं पर ध्यान आकृष्ट कराते हुए मानव मस्तिष्क की संरचना और मस्तिष्क में सुषुप्त केंद्रों को जागृत करने के उपाय पर योग साधनाओं की जानकारी दिये। उन्होंने कहा मस्तिष्क के दोनों गोलार्द्ध का समान रूप से विकाश नही हो पाता है। किसी में दाहिना मस्तिष्क तो किसी में बायां मस्तिष्क असंतुलित रूप से क्रियाशील रहता है जिस कारण से हमारी एकाग्रता ठीक नही रहती है और बुद्धि के स्तर पर भी हम कमजोर रह जाते हैं। पर जिस व्यक्ति का समुचित रूप से मस्तिष्क के दोनों हिस्से विकसित होते हैं उसमें मेधा शक्ति,बौद्धिक शक्ति, आत्मिक शक्ति सभी तेज होते हैं। इसके लिए खास रूप से जीवन के प्रथम चरण में ही आसन, प्राणयाम, मुद्रा और ध्यान शुरू कर देना चाहिये। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का थीम है एक पृथ्वी एक स्वास्थ्य यानि समस्त जीवों के स्वास्थ्य प्रबंधन का खयाल हमें रखना है। रांची के सभी डीएवी विद्यालयों में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी जोर-शोर से शुरू हो गयी है। सत्यानंद योग मिशन राजधानी में विभिन्न जगहों पर योग शिविर का संचालन कर रहा है। सीसीएल गांधीनगर डीएवी में पांच सौ विद्यार्थियों को स्वामी मुक्तरथ और इनके सहयोगी रोहित कुमार, केशव कुमार और सूरज कुमार ने वृक्षासन, ताड़ासन, त्रिकोणासन, अर्धचक्रासन, कटिचालन, तितली आसन, शशांकासन, उष्ट्रासन, उत्तानकुर्मासन, उत्तानपादासन, सुप्तपवनमुक्तासन, सेतुबंध आसन, मकरासन, भुजंगासन, शलभासन तथा नाड़ीशोधन एवं भ्रामरी प्राणायाम को कराया गया। (लेखक सत्यानंद योग मिशन रांची के अध्यक्ष हैं।)
रांची में कोरोना से 44 साल के शख्स की मौत, रिम्स में चल रहा था इलाज टीम एबीएन, रांची। झारखंड की राजधानी रांची में कोरोना से पीड़ित 44 वर्षीय एक शख्स की मौत हो गयी है। झारखंड में कोरोना से मौत का यह पहला मामला है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। कोरोना से पीड़ित मरीज का झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में इलाज चल रहा था। राज्य में फिलहाल कोरोना से पीड़ित मरीजों की संख्या छह है। इनका इलाज चल रहा है। रिम्स ने सभी नागरिकों से अपील है कि अफवाहों पर ध्यान नहीं दें और केवल अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी प्राप्त करें। सावधानी बरतें, मास्क का प्रयोग करें। हाथ धोते रहें और भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचें। स्वस्थ रहें और सतर्क रहें।
एबीएन हेल्थ डेस्क। पटियाला, पंजाब में 2 से 6 जून 2025 तक आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम 6 जून को प्रतिष्ठित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनएस एनआईएस), पटियाला, पंजाब में संपन्न हुआ। विश्व योगासन और योगासन भारत के महासचिव योगाचार्य डॉ. जयदीप आर्य के मार्गदर्शन में योगासन भारत द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। योगाचार्य महेश पाल ने बताया कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति देखी गयी जिनमें रचित कौशिक, कोषाध्यक्ष, योगासन भारत और निदेशक, शिक्षा और प्रशिक्षण समिति डॉ एम निरंजना मूर्ति, उपाध्यक्ष, एशियाई योगासन, डॉ सीके मिश्रा, मुख्य प्रशिक्षक, एनएस एनआईएस पटियाला, योगासन स्पोर्ट्स, अभिजीत बोस, उपाध्यक्ष, तमिलनाडु युवा योगासन स्पोर्ट्स एसोसिएशन, पंकज मजूमदार, राज्य सचिव त्रिपुरा, विपनदीप, राज्य सचिव, पंजाब दयानिधि, राज्य सचिव, पुडुचेरी और अर्जुन तिवारी, तकनीकी निदेशक, पंजाब योगासन स्टेट बॉडी। भारत के 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 180 प्रशिक्षु न्यायाधीशों ने इस प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। पूरे भारत से दस विशेषज्ञ संसाधन व्यक्तियों ने प्रशिक्षण सत्रों के दौरान अपने बहुमूल्य ज्ञान और विशेषज्ञता का योगदान दिया। 3 जून को भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिन्होंने सभी प्रतिभागियों के लिए एक विशेष योग और ध्यान (ध्यान) सत्र का नेतृत्व डॉ जयदीप आर्य द्वारा किया। उन्होंने प्रशिक्षु न्यायाधीशों को योगासन खेलों के दृष्टिकोण को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें उत्कृष्टता के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शन के अवसर से प्रेरित किया। अपने दौरे के दौरान, डॉ. आर्य जी ने योगासन खेलों के वैश्विक प्रचार और विकास के लिए सहयोगात्मक प्रयासों पर चर्चा करने के लिए एनएस एनआईएस पटियाला के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक विनीत कुमार से भी मुलाकात की। 5 जून 2025 को चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो (डॉ) मनप्रीत सिंह मन्ना जी का विशेष अतिथि के रूप में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनके आगमन पर पंजाब योगासन खेल संघ के अध्यक्ष डॉ अकालकला ने पुष्प गुच्य से स्वागत किया उन्होंने अपने विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे 60 से अधिक देशों के 4500 विदेशी छात्रों को योगासन खेलों से परिचित कराने की इच्छा व्यक्त की। 5वां राष्ट्रीय योगासन न्यायाधीश प्रशिक्षण कार्यक्रम योगासन खेलों को पेशेवर बनाने और पूरे भारत में योग्य न्यायाधीशों की एक नयी पीढ़ी को तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मानसिक शांति और फोकस के लिए भ्रामरी का जादू एबीएन हेल्थ डेस्क। भ्रामरी प्राणायाम तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी मानसिक समस्याओं से राहत दिलाने में अत्यंत प्रभावी है। इसे किसी भी उम्र का व्यक्ति कहीं भी कर सकता है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं होते, जिससे यह सभी के लिए सुरक्षित है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसे नियमित रूप से करने से मानसिक शांति, फोकस और माइंडफुलनेस में सुधार होता है। आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता, अनिद्रा जैसी समस्याएं आम बात है। ऐसे में प्राणायाम मानसिक तनाव या शारीरिक समस्याओं से लड़ने का एक मजबूत तरीका है। चर्चा करते हैं बेहद फायदेमंद भ्रामरी प्राणायाम के बारे में, जो बहुत ही सरल और लोकप्रिय प्राणायाम है, जिसे करने से अनगिनत फायदे मिलते हैं। भ्रामरी के फायदे अनगिनत हैं। यह न केवल मानसिक स्वास्थ्य में लाभकारी है बल्कि हर किसी के लिए सुरक्षित भी है। भ्रामरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कोई भी व्यक्ति, चाहे बच्चा हो, बुजुर्ग हो, कभी भी और कहीं भी कर सकता है। भ्रामरी के कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं, जो इसे और भी खास बनाता है। उदाहरण के लिए, कपालभाति को कुछ स्थितियों जैसे हाई बीपी, गर्भावस्था, मासिक धर्म, या पेट की सर्जरी के बाद नहीं करना चाहिए, लेकिन भ्रामरी में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है। योग4लाइफ की को-फाउंडर और ट्रेनर कविता अरोड़ा ने बताया, चार या पांच प्राणायाम बहुत लोकप्रिय हैं। इसमें कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी भी है। इसमें भ्रामरी बहुत खास है। भ्रामरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे कोई भी कभी भी कर सकता है। इसके कोई साइड इफेक्ट नहीं हैं। इसे बच्चे से लेकर उम्रदराज तक हर कोई कर सकता है और इसके अनगिनत फायदे भी होते हैं। उन्होंने बताया, आज के समय में स्ट्रेस, एंग्जाइटी, डिप्रेशन, अनिद्रा जैसी समस्याओं में भ्रामरी बहुत ज्यादा फायदा देता है। रिसर्च में भी यह बात सामने आई है कि इसे करने से पॉजिटिविटी, फोकस और माइंडफुलनेस बढ़ता है। उन्होंने आगे बताया, जिन लोगों को रात में नींद न आने की समस्या है, वे अपने बेड पर बैठकर भी भ्रामरी कर सकते हैं, इससे उन्हें काफी मदद मिलती है और अच्छी नींद आती है। अगर आपको रात में नींद नहीं आ रही, तो बिस्तर पर बैठकर 5 से 11 राउंड भ्रामरी करने से नींद में सुधार हो सकता है। इसे करने की विधि भी बेहद आसान है, शांत बैठें, आंखें बंद करें, कानों को अंगूठे से ढकें और हम्म की आवाज निकालें। खास बात यह है कि भ्रामरी को आप दिन के साथ ही रात में भी कर सकते हैं। छात्रों के साथ ही माइग्रेन के मरीजों के लिए भी भ्रामरी फायदेमंद होता है। कुल मिलाकर, भ्रामरी एक ऐसा सरल और प्रभावी प्राणायाम है, जो मानसिक शांति, बेहतर फोकस और अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर किसी को करना चाहिए। इसे करने की कोई सीमा नहीं है और इसके फायदे अनंत हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसे रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करना चाहिए। तो, चाहे आप तनाव से जूझ रहे हों या बेहतर फोकस चाहते हों, भ्रामरी प्राणायाम आपके लिए एक आसान और प्रभावी उपाय है, जो कि समस्याओं से निजात दिलाने में मददगार साबित हो सकता है।
अब तक 500 से अधिक कर्मचारियों का कैशलेस इलाज कुछ कर्मचारियों के 24 लाख रुपये तो कुछ 14 लाख रुपये का कैशलेस इलाज टीम एबीएन, रांची। सरकारी कर्मचारियों के लिए राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना वरदान साबित हो रही है। करीब 2 महीने की अल्प अवधि में ही इस योजना के तहत 500 से अधिक लाभुकों का इलाज किया जा चुका है। एक लाभुक को 24 लाख से अधिक तो एक के करीब 14 लाख रुपये का कैशलेस इलाज किया जा चुका है। राज्य में अवस्थित अस्पतालों के साथ राज्य के बाहर अवस्थित अस्पतालों में भी इलाज करवा रहे हैं। साथ ही सूचीबद्ध अस्पतालों के अतिरिक्त अस्पताल में भी सीजीएचएस प्रावधानों के अनुसार इलाज किया जा रहा है। राज्य कर्मी स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत जब 1 मार्च को हुई तो किसी ने यह अंदाजा भी नहीं लगाया था यह योजना इतनी लोकप्रिय होगी। अब तक राज्य सरकार के करीब एक लाख 83 हजार से अधिक कर्मचारी, पदाधिकारी और पेंशनरों एवं 4 लाख 65 हजार उनके आश्रित को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त झारखंड राज्य के उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले लगभग 15 हजार अधिवक्ताओं को भी इसी योजना के अंतर्गत शामिल किया गया है। योजना के अंतर्गत कर्मचारी, पदाधिकारी या अन्य लाभुकों की भागीदारी दिन प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। बीमा कंपनी ने कर्मचारियों के समुचित इलाज के लिए राज्य के 192 और राज्य के बाहर 673 अस्पतालों को सूचीबद्ध किया है। योजना के अंतर्गत देश के 169 शहरों के अस्पतालों को आच्छादित किया गया है। देश के सभी मुख्य शहरों के बड़े अस्पतालों को आच्छादन की योजना है। सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राज्य के सभी प्रमुख अस्पताल जैसे आर्किड, पल्स, सैंफोर्ड, पारस, राज, हेल्थ प्वाइंट जैसे अस्पताल इस के अंतर्गत सूचीबद्ध हैं। इसके साथ मैक्स, यथार्थ ग्रुप, अपोलो और बीएम बिरला जैसे बड़े अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध है।विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अब तक इस योजना के तहत करीब 600 कर्मचारियों ने अपना कैशलेस एवं रिमबर्समेंट मोड (सीजीएचएस दर) में इलाज का लाभ लिया गया है। सूचीबद्ध अस्पतालों के अतिरिक्त अन्य अस्पतालों से इलाज करवाने पर भारत सरकार के द्वारा तय सीजीएचएस के दर पर भुगतान करने का प्रावधान किया गया है। यहां ध्यातव्य है कि इस योजना के अंतर्गत कैशलेस पैकेज की दर में सीजीएचएस की दर से भी अधिक राशि का प्रावधान किया गया है। इलाज के पैकेज में रूम रेंट, मेडिकल प्रोसिडयोर, नर्सिंग खर्च आदि सभी आवश्यक खर्चों का प्रावधान किया गया है। हम आपको बता दें की योजना के अंतर्गत प्रारंभिक अवस्था में 5 लाख और गंभीर बीमारी की अवस्था में 10 लाख का बीमा कवरेज किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर 10 लाख से ऊपर आने वाली सारी राशि को कॉरपस फंड से दिया जाता है। इसके अंतर्गत एयर एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराने हेतु अग्रतर कार्रवाई की जा रही है। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है की योजना का लाभ पहले दिन से ही मिलना शुरू हो जाता है यानी इसमें कोई वेटिंग पीरियड नहीं है। साथ ही यदि कोई पहले से बीमारी है उस स्थिति में भी बीमा कवरेज दिया जाता है जबकि अन्य योजनाओं में पहले चेकअप किया जाता है और उच्च प्रीमियम की राशि देनी होती है। इसमें कोई उम्र की सीमा भी नहीं है। महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ भी पहले दिन से ही शुरू हो जाता है। विभाग एक मोबाइल एप भी डेवलप कर रहा है। इस ऐप के माध्यम से लाभुक संबंधित सारी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जैसे वॉलेट में उपलब्ध राशि, इलाज की विवरणी, अस्पताल एवं वहां उपलब्ध इलाज की सुविधा इस माध्यम से उपलब्ध होगी। 1 कर्मी के 25 तो दूसरे के करीब 14 लाख रुपये का भुगतान एक राज्य कर्मी की सड़क पर दुर्घटना हो गयी। अभी वे से रांची के बहुत बड़े मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में इलाजरत हैं। उनके इलाज के मद में इस योजना के अंतर्गत अब तक 24 लाख 91 हजार रुपये का भुगतान संबंधित अस्पताल को किया जा चुका है। साथ ही आगे भी 12 लाख रुपये जल्द दिये जायेंगे। इस प्रकार एक अन्य राज्यकर्मी जो की किडनी की बीमारी से पीड़ित हैं उनके इलाज के लिए राज्य के बाहर एवं राज्य के अंतर्गत अस्पतालों में करीब 14 लख रुपये की राशि उपलब्ध करायी गयी है।
राज्य में एम्स और 5 मेडिकल कॉलेज की उठी मांग 1170 पंचायतों में बनेगा सीएचसी, स्वास्थ्य सेवाओं को जमीनी स्तर तक ले जाने की तैयारी जेटी-1 कोरोना वैरिएंट पर झारखंड सरकार अलर्ट, पीएसए प्लांट एक्टिव, जल्द होगी मॉक ड्रिल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने डॉ अंसारी को रिपोर्ट सहित दिल्ली तलब किया, झारखंड की स्वास्थ्य जरूरतों पर होगा मंथन केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा: आपकी सोच सराहनीय, हर संभव मदद को तैयार स्वास्थ्य मंत्री ने झारखण्ड सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं की तारीफ की, कहा—अच्छा काम हो रहा है टीम एबीएन, रांची। झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि राज्य की सामाजिक-आर्थिक परिस्थिति और आदिवासी बहुलता को देखते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए विशेष पैकेज दिया जाये। उन्होंने यह मांग केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा द्वारा वर्चुअल माध्यम से आयोजित स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा बैठक में रखी। नामकुम स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के आरसीएच सभागार से इस बैठक में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ अंसारी ने भाग लिया। उनके साथ अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह, अभियान निदेशक अबु इमरान, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक प्रमुख डॉ चंद्र किशोर शाही एवं अन्य अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में टीबी मुक्त भारत अभियान, खसरा-रूबेला टीकाकरण, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन, 15वां वित्त आयोग अनुदान, और पीएसए प्लांट संचालन पर चर्चा की गयी। डॉ अंसारी ने बताया कि झारखंड में टीबी मरीजों को अब निक्षय आहार योजना के तहत 500 रुपये के स्थान पर 1000 रुपये प्रति माह पोषण सहायता दी जा रही है। अब तक 12 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से मरीजों को हस्तांतरित किए जा चुके हैं। राज्य में अब तक 226 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है। साथ ही 100 दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान को राज्य में गंभीरता से चलाया जा रहा है। खसरा एवं रुबेला की रोकथाम के लिए वर्ष 2023 में 9 उच्च जोखिम जिलों : साहेबगंज, पाकुड़, गोड्डा, जामताड़ा, धनबाद, देवघर, गिरिडीह, कोडरमा और दुमका में 45 लाख बच्चों का टीकाकरण किया गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में टफ-1 टीका 8,41,319 बच्चों को और टफ-2 टीका 7,83,165 बच्चों को दिया गया। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है। डॉ अंसारी ने रांची में एम्स की स्थापना, पांच नये मेडिकल कॉलेज और एक मेडिकल सिटी की मांग दोहराते हुए कहा कि झारखंड जैसे पिछड़े राज्य को स्वास्थ्य के क्षेत्र में विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने राज्य में स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि आप अच्छा कार्य कर रहे हैं, मैं आपकी सोच की सराहना करता हूं और हर संभव मदद करूंगा। उन्होंने डॉ अंसारी को निर्देशित किया कि वे एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट के साथ दिल्ली आयें, जिससे झारखंड की आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा की जा सके। डॉ अंसारी ने जानकारी दी कि 1170 पंचायतों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निर्माण की मंजूरी मिल चुकी है, और स्वास्थ्य विभाग तेजी से कार्य कर रहा है ताकि दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में भी स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ करायी जा सकें। कोरोना के वर्तमान जेएन-1 वैरिएंट को लेकर भी राज्य सरकार अलर्ट मोड में है। सभी सिविल सर्जनों को तैयारी के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के सभी प्लांट क्रियाशील हैं और शीघ्र ही मॉक ड्रिल के माध्यम से तैयारियों का आकलन किया जायेगा। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग की स्वास्थ्य अनुदान राशि को इस वित्तीय वर्ष में प्राथमिकता के साथ खर्च करने के निर्देश भी दिये गये।
संक्रमित हुए शख्स का निजी अस्पताल में चल रहा इलाज टीम एबीएन, रांची। झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य और प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक लाल विजय शाहदेव कोरोना वायरस से संक्रमित पाये गये हैं। उन्होंने रविवार को स्वयं सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर इसकी पुष्टि की है। एक बार फिर कोरोना वायरस अपना पांव पसार रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों से मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच 2025 में झारखंड की राजधानी रांची में यह पहला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया फेसबुक पेज पर साझा की गई जानकारी में शाहदेव ने लिखा, भारत में कल तक 257 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं और मैं भी उनमें शामिल गया हूं। 22 मई को जब मैं मुंबई से रांची आ रहा था, उसी दौरान फ्लाइट में मेरी तबीयत बिगड़ गई और मैं बेहोश हो गया। लाल विजय शाहदेव ने बताया कि वे रांची लौटने के बाद कुछ फिल्मों का प्रिव्यू करने वाले थे लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण वे यह कार्य नहीं कर सके। फिलहाल उनका इलाज रांची के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में डॉक्टर मोहित नारायण की निगरानी में हो रहा है। अस्पताल में दिनेश झा उनकी देखभाल कर रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा, अब मैं पहले से बेहतर महसूस कर रहा हूं। इसके साथ ही उन्होंने अपने संपर्क में आए सभी लोगों से अपील की है कि यदि किसी को सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार, खांसी या सर्दी जैसे लक्षण महसूस हों तो वे तुरंत कोरोना टेस्ट करवाएं। इस मामले को लेकर रांची सिविल सर्जन डॉक्टर प्रभात ने कहा है कि निजी अस्पताल में झारखंड फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के सदस्य प्रबीर शाहदेव उर्फ लाल विजय शाहदेव कोरोना संक्रमित होकर भर्ती हुए हैं। उनके संपर्क में आये तमाम लोगों को चिन्हित किया जा रहा है। एक स्पेशल टीम गठित कर इस मामले की पड़ताल की जा रही है, जो जानकारी मिली है उसके अनुसार मुंबई से रांची आने के क्रम में 22 मई को उनकी तबीयत फ्लाइट में ही बिगड़ी थी। सिविल सर्जन ने शहर के लोगों से अपील की है कि कोरोना को लेकर वह सतर्क रहें, डरने की जरूरत नहीं है। स्वास्थ्य महकमा इसे लेकर सतर्क है और लोगों को जागरुक भी कर रहा है। वहीं सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को भी सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। कोरोना के लक्षण दिखने वाले लोगों पर विशेष ध्यान देते हुए वैसे मरीजों को आइसोलेट करने का भी निर्देश दिया गया है।
हाल के दिनों में कोविड के मामले तेजी से बढ़े हैं और भारत में भी अब तक इसके 257 सक्रिय मामले दर्ज हो चुके हैं, जिससे चिंता की लहर दौड़ गयी है एबीएन हेल्थ डेस्क। कोविड-19 महामारी के कई साल बाद भी इस बीमारी का वायरस सक्रिय है। हॉन्गकॉन्ग, सिंगापुर और थाईलैंड में इस बीमारी के प्रसार के लिए जिम्मेदार वैरिएंट जेएन.1 को पहली बार अगस्त 2023 में पहचाना गया था। यह ओमिक्रोन वैरिएंट का ही एक प्रकार है, जो बहुत अधिक संक्रामक है। हाल के दिनों में कोविड के मामले तेजी से बढ़े हैं और भारत में भी अब तक इसके 257 सक्रिय मामले दर्ज हो चुके हैं, जिससे चिंता की लहर दौड़ गयी है।हालांकि 1.4 अरब की आबादी वाले इस देश में यह संख्या बहुत मामूली लग सकती है लेकिन इस पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। स्वास्थ्य कर्मियों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले समूहों मसलन बुजुर्गों और बच्चों के लिए कोविड खासा दिक्कतदेह हो सकता है। खबरों के मुताबिक सरकार हालात पर नजर बनाये हुए है। कोविड 19 का बार-बार सिर उठाना बताता है कि यह अब स्थानीय बीमारी में बदल चुका है। संक्रमण में हालिया इजाफे की कई वजह हो सकती हैं। इनमें टीके से मिली रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म होना, बूस्टर खुराक न लेना और सामूहिक प्रतिरक्षा का कमजोर पड़ना शामिल हैं। देश में टीकाकरण के प्रयास भी ढीले हो गए हैं। यह नया सब-वैरिएंट बताता है कि वायरस अपना रूप बदलने और खुद को ढालने में सक्षम है। ऐसे में मौजूदा टीकों की क्षमता भी सवालों के घेरे में है। प्रतिरक्षा कमजोर पड़ने की संभावना का भी सरकार द्वारा समुचित अध्ययन किया जाना चाहिए। टीकाकरण के शुरूआती दौर के बाद जहां मौत और अस्पताल में दाखिलों की तादाद में तेजी से कमी आई थी वहीं ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनसे मिला बचाव समय के साथ खत्म हो रहा है। इसका अर्थ है कि हमें वायरस के नए रूपों में सामने आने के साथ ही नयी टीकाकरण नीति भी अपनानी होगी। कई विकसित देश कोविड-19 टीके की बूस्टर खुराक हर साल लगाने की पेशकश कर रहे हैं, खास तौर पर उन समूहों को जो अधिक जोखिम में हैं। भारत को भी इसी मॉडल पर विचार करना चाहिए। बुजुर्गों को, गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों को और स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित रूप से टीकाकरण में प्राथमिकता देनी चाहिए। ये टीके भी बदलते वैरिएंट के लिहाज से उन्नत होने चाहिए। एमआरएनए का विज्ञान ऐसा है कि उस पर आधारित टीकों को अपेक्षाकृत जल्दी बदला जा सकता है और टीके लगाने का बुनियादी ढांचा पहले से मौजूद है। कोविन ऐप को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की क्षमता के कारण हम महामारी के दौरान लाखों लोगों को बहुत कम समय में टीका लगा सके। तैयारी केवल टीके तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसमें जागरूकता और लोगों के व्यवहार में बदलाव भी शामिल होना चाहिए। जागरूकता अभियान भयभीत करने के लिए नहीं बल्कि बचाव के सरल मगर कारगर व्यवहार पर जोर देने के लिए चलाये जाने चाहिए। भीड़-भाड़ वाली सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनें, नियमित रूप से हाथ साफ करें और कम हवादार जगहों पर जाने से बचें। इससे संक्रमण का प्रसार रूक सकता है। इन उपायों को अपनाने से काफी बदलाव आ सकता है, खास तौर पर जहां जनसंख्या का घनत्व अधिक है। सकारात्मक बात यह है कि हालिया वैश्विक घटनाक्रम देखते हुए हम तैयारी को लेकर सचेत हैं। तीन सालों की गहन बातचीत के बाद एक वैधानिक रूप से बाध्यकारी महामारी समझौता मंजूर किया जा चुका है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्य देशों की हालिया विश्व स्वास्थ्य असेंबली में मंजूर किया गया। यह समझौता कहता है कि टीके और जरूरी संसाधन सभी को उपलब्ध होने चाहिए और राष्ट्रीय स्तर पर तैयारी की पुख्ता योजना होनी चाहिए। हालांकि रोगाणु और डेटा साझेदारी से संबंधित पैथोजन एक्सेस ऐंड बेनिफिट शेयरिंग सिस्टम्स (पीएबीएस) पर बातचीत जारी है। भारत के लिए इन वैश्विक मानकों से जुड़ना और अंतरराष्ट्रीय ढांचे में सक्रिय भागीदारी करना बहुत अहम है। जरूरत इस बात की भी है कि जीनोम निगरानी को मजबूत किया जाए ताकि फैल रहे रोगाणुओं को पहचाना जा सके, उन्नत खुराकों के साथ टीकाकरण का दायरा बढ़ाया जा सके, बायोफार्मा क्षेत्र में निवेश किया जाए और व्यक्तिगत स्तर पर और साफ-सफाई तथा नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
आखिर कैसे रखें उन सबका ख्याल एबीएन हेल्थ डेस्क। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का नया वैरिएंट तेजी से फैल रहा है। इस वैरिएंट के सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज सिंगापुर में मिल रहे हैं। वहीं अगर भारत की बात की जाए तो यहां पर अब तक 2 लोगों की मौत हुई है और 257 मामले सामने आए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा केरल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में कोरोना फैल रहा है। ऐसे में आपको अपना खास ख्याल रखना होगा और अपने परिवार को भी बचाकर रखना होगा। अब हम जान लेते हैं कि आखिर इस न;२ वैरिएंट का नाम क्या है और ये सबसे ज्यादा किन लोगों तक पहुंच रहा है। बता दें, संक्रमित होने के 24 से 48 घंटे के अंदर तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, गला बैठ जाना और थकान जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं। कई केसों में मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ रही है। इस नए वैरिएंट का नाम जेएन.1 वैरिएंट बताया जा रहा है। किन लोगों के लिए सबसे ज्यादा खतरा है बुजुर्गों की इम्यूनिटी कमजोर होती है। अगर पहले से हार्ट डिजीज, शुगर या किडनी की परेशानी है तो यह संक्रमण जानलेवा हो सकता है। डायबीटिज वाले मरीज कोरोना के संक्रमण से लड़ने में कमजोर पड़ सकते हैं और वायरस जल्दी फेफड़ों तक पहुंच सकता है। कोरोना वायरस सीधे फेफड़ों पर हमला करता है, जिससे सांस की दिक्कत वाले मरीजों की स्थिति जल्दी खराब हो सकती है। गर्भावस्था में इम्यून सिस्टम कुछ हद तक दबा होता है, ताकि भ्रूण को शरीर स्वीकार सके, ऐसे में वायरस से बचाव कठिन हो जाता है। छोटे बच्चें कोरोना वायरस की चपेट में जल्द से जल्द आ सकते हैं। कैसे रखें अपना और अपनों का खयाल मास्क जरूर पहनें: खासकर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के लिए मास्क लगाना होगा। इम्यूनिटी को मजबूत करें: हल्दी वाला दूध, काढ़ा, तुलसी-अदरक की चाय पी सकते हैं। बुजुर्गों का ख्याल रखना: घर के बुजुर्गों और बीमार लोगों को भीड़ से दूर रखें और उन्हें समय-समय पर डॉक्टर से जांच करवाते रहें। साफ-सफाई पर ध्यान दें: नियमित हाथ धोना और सैनिटाइजर का प्रयोग करना जरूरी है। कोरोना की हर लहर हमें एक नई चेतावनी देकर जाती है। यह लहर भी उन्हीं लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है, जो पहले से कमजोर हैं या लापरवाह हैं। खुद भी सजग रहें और अपने आसपास के लोगों को भी सतर्क रखें, क्योंकि थोड़ी सी सावधानी आपकी और अपनों की जान बचा सकती है।
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