हेल्थ

View All
Published / 2026-04-01 20:43:45
स्वास्थ्य सेवाओं में देश का तीसरा अग्रणी राज्य बना झारखंड

एनक्यूएएस प्रमाणन में 56% तक पहुंचा आंकड़ा 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड ने स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में तेज प्रगति दर्ज की गयी है। 

आज स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गयी। बैठक में एनएचएम के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा, डी आई सी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित सभी संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे। 

बता दें कि सरकार के द्वारा वित्तीय प्रोत्साहन के तहत गुणवत्ता आश्वसन मानक प्राप्त करने वाली स्वास्थ्य संस्थानों को प्रति बेड 10000 सालाना, 3 साल तक देने का प्रावधान है। जिसमें से 25% राशि उक्त स्वास्थ्य संस्थान में कार्य करने वाले पदाधिकारी एवं कर्मियों के बीच वितरित किए जाने का भी प्रावधान है। शेष 75% राशी से प्राथमिकता के आधार पर उक्त स्वास्थ्य संस्थान में जन सुविधा को उन्नत किए जाने का भी प्रावधान है। साथ ही सर्टिफिकेट प्राप्त संस्थान को आयुष्मान भारत योजना के तहत दिए जाने वाले राशि में भी 15% की बढ़ोतरी किए जाने का प्रावधान है। 

बैठक में बताया गया कि मार्च 2025 तक जहां केवल 8 प्रतिशत स्वास्थ्य केंद्र ही राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन प्रमाणित थे, वहीं मार्च 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 56 प्रतिशत हो गया है। राज्य सरकार ने दिसंबर 2026 तक सभी स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत प्रमाणित कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। 

जिला स्तर पर जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में उत्कृष्ट कार्य करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों एवं कर्मियों को सम्मानित करने की योजना भी बनायी गयी है। राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक के तहत अस्पतालों में बुनियादी ढांचे में सुधार, दवाओं की नियमित उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती तथा उन्नत जांच सुविधाएं सुनिश्चित की गयी हैं, जिससे मरीजों को बेहतर उपचार मिल रहा है। 

इस दिशा में प्रशासन की सक्रिय भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह एवं एनएचएम अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा द्वारा नियमित समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्यों की निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं में आए इस व्यापक सुधार से राज्य की आम जनता को सीधा लाभ मिल रहा है और सरकारी अस्पतालों के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

Published / 2026-03-20 21:59:36
झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी की बैठक में अहम फैसले, नये अस्पतालों के आवेदन अस्वीकृत

एचईएम 2.0 पोर्टल माइग्रेशन और सूचीबद्धता मामलों पर विस्तृत चर्चा, मानकों में कमी पर कड़ा रुख 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी अध्यक्ष छवि रंजन की अध्यक्षता में राज्य सूचीबद्धता समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। यह बैठक कार्यकारी अध्यक्ष के कार्यालय कक्ष में संपन्न हुई, जिसमें समिति के सभी सदस्यों ने भाग लिया।  

बैठक के दौरान सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये। सूचीबद्ध निजी अस्पतालों के एचईएम 2.0 पोर्टल पर माइग्रेशन से संबंधित विभिन्न मामलों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में स्पष्ट किया गया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु निर्धारित मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जायेगा। 

समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि नए आवेदनों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (ठऌअ) के दिशा-निदेर्शों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेजों की कमी है। इनमें नगर निकाय/विकास प्राधिकरण/जिला परिषद/पंचायत द्वारा स्वीकृत भवन योजना की अनुपलब्धता प्रमुख रही। 

नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) की गाइडलाइन के अनुसार 1 मार्च 2026 से अस्पतालों की सूचीबद्धता के लिए एबीडीएम-सक्षम एचएमआईएस की उपलब्धता अनिवार्य कर दी गयी है। ऐसे में जो अस्पताल इस शर्त को पूरा नहीं करेंगे, उनकी सूचीबद्धता नहीं की जा सकेगी। 

इस निर्देश के तहत अस्पतालों को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के अनुरूप अपनी हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (एचएमआईएस) व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। इसका उद्देश्य अस्पतालों में डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना और सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। 

इन कमियों को ध्यान में रखते हुए समिति ने आवेदन को अस्वीकृत करने का निर्णय लिया तथा संबंधित अस्पतालों को इसकी सूचना देने के निर्देश दिये गये। वहीं, पहले से सूचीबद्ध निजी अस्पताल ने पोर्टल पर माइग्रेशन से संबंधित अनुरोध को समिति ने स्वीकृति प्रदान की। बैठक में निदेशक प्रमुख, स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. सिद्धार्थ सान्याल सहित बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

Published / 2026-03-17 19:40:33
झारखंड : राज्य के सभी जिलों में शुरू होगा टेली आईसीयू

मरीजों को घर के पास मिलेगी सुपर स्पेशलिटी सुविधा 

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने समीक्षा बैठक में दिए निर्देश

मैनपावर व उपकरणों की कमी दूर करने पर जोर 

टीम एबीएन, रांची। आज अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, झारखंड सरकार के कार्यालय कक्ष में टेली आईसीयू के संदर्भ में सभी सदर अस्पतालों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य के सभी सदर अस्पतालों एवं मेडिकल कॉलेजों में टेली आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसके लिए आवश्यक उपकरणों और मैनपावर की तत्काल व्यवस्था करने को कहा गया। 

उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के पांच जिले—गुमला, सिमडेगा, चतरा और रांची सदर टेली आईसीयू से जुड़े हुए हैं। इन अस्पतालों का मेंटर राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) है, जहां से सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर टेली आईसीयू एवं एआई तकनीक के माध्यम से गंभीर मरीजों की निगरानी कर उन्हें परामर्श दे रहे हैं। 

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि इस व्यवस्था को सभी जिलों में लागू किया जाएगा, जिससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और उन्हें स्थानीय स्तर पर ही विशेषज्ञ डॉक्टरों की सलाह मिल सकेगी। बैठक में संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। 

उन्होंने बताया कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) द्वारा नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया गया है। आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त नियुक्तियां भी की जाएंगी। वहीं, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को आउटसोर्सिंग के माध्यम से पूरा करने का निर्देश दिया गया। 

मेडिकल उपकरणों की खरीद पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया। जिन अस्पतालों में उपकरणों की खरीद लंबित है, उनकी निगरानी की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर राज्य स्तर से उपकरण उपलब्ध कराये जायेंगे। 

बैठक में एसएनए स्पर्श और मुख्यमंत्री अस्पताल रखरखाव योजना की भी समीक्षा की गई। इस दौरान एनएचएम के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने जिलों से अद्यतन जानकारी ली। अधिकांश जिलों द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च किए जाने पर संतोष व्यक्त किया गया और शेष राशि भी शीघ्र खर्च करने के निर्देश दिये गये।  

बैठक में झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक छवि रंजन, विभाग के संयुक्त सचिव विद्यानंद शर्मा, पंकज, डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला एवं संयुक्त निदेशक रीतु सहाय सहित कई अधिकारी उपस्थित थे।

Published / 2026-03-16 21:58:00
एआई और रोबोटिक तकनीक से टीबी व सर्वाइकल कैंसर की जांच पर सरकार का फोकस

रिम्स में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू करने की तैयारी 

एबीएन हेल्थ डेस्क। झारखंड में टीबी और सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग अब एआई और रोबोटिक तकनीक के उपयोग की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। 

इसी सिलसिले में सोमवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में मेरील कंपनी के साथ एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में टीबी मुक्त भारत, सर्वाइकल कैंसर मुक्त भारत, ड्रग एब्यूज नियंत्रण तथा रोबोटिक स्किल लैब की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा हुई। 

बैठक के दौरान मेरील कंपनी के अधिकारियों ने पावर प्वाइंट प्रस्तुति (पीपीटी) के माध्यम से बताया कि आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से सर्वाइकल कैंसर की शुरूआती पहचान आसान हो सकती है। इसके लिए किसी महंगी मशीन की जरूरत नहीं होगी और एएनएम स्तर की स्वास्थ्यकर्मी भी इस जांच को कर सकेंगी। प्रारंभिक जांच के बाद आवश्यकता पड़ने पर आरटीपीसीआर टेस्ट के माध्यम से इसकी पुष्टि की जा सकेगी। 

प्रस्तुति में यह भी बताया गया कि टीबी की पहचान के लिए एआई आधारित एक्स-रे तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक्स-रे में संदिग्ध मामला सामने आने पर आगे आरटीपीसीआर जांच की जाएगी, जिससे ड्रग रेजिस्टेंस का भी पता लगाया जा सकेगा। 

बैठक में रोबोटिक सर्जरी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि रोबोटिक तकनीक से सर्जरी अधिक सटीक होगी और इसमें ब्लड लॉस कम होने के साथ मरीज का रिकवरी समय भी कम होगा। इस तकनीक से जनरल सर्जरी, कैंसर सर्जरी, स्त्री रोग, यूरोलॉजी, ईएनटी, कार्डियक और आथोर्पेडिक सर्जरी जैसी जटिल प्रक्रियाएं भी की जा सकती हैं। 

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने प्रस्तुति देखने के बाद निर्देश दिया कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर रिम्स, रांची में इस तकनीक का प्रशिक्षण शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि रोबोटिक तकनीक से जुड़ी लागत का आकलन कर उसकी तुलना आयुष्मान भारत योजना और सीजीएचएस पैकेज की दरों से की जाये। 

सर्जरी के लिए कास्ट आधारित पैकेज बनाने का निर्देश 

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सर्जरी के प्रकार के आधार पर प्रत्येक सर्जरी का कास्ट आधारित पैकेज तैयार किया जाए और इसे पीपीपी मोड पर संचालित करने की संभावना देखी जाए। उन्होंने कहा कि विभाग इस कास्ट आधारित पैकेज का अध्ययन करेगा और यह देखा जाएगा कि इसे आयुष्मान भारत योजना के पैकेज के आधार पर लागू किया जा सकता है या फिर सीजीएचएस की दरों के अनुसार लागू किया जाए। 

उन्होंने कंपनी को विभिन्न प्रकार के रोबोटिक सिस्टम की लागत और उपयोगिता का विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने को कहा और इसके लिए एक महीने का समय दिया। इसके बाद पुन: बैठक कर प्रस्ताव की समीक्षा की जाएगी। 

बैठक में अपर मुख्य सचिव के साथ छवि रंजन, कार्यकारी निदेशक झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी, शशि प्रकाश झा, अभियान निदेशक एनएचएम, विद्यानंद शर्मा पंकज, संयुक्त सचिव स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग, डॉ (प्रो) हीरेंद्र बिरूवा, चिकित्सा अधीक्षक, रिम्स और प्रो पंकज बोदरा, एचओडी, सर्जरी, रिम्स सहित मेरील कंपनी के कई अधिकारी उपस्थित थे।

Published / 2026-03-16 18:30:28
नियमों का पालन नहीं करने वाले नर्सिंग कॉलेजों पर लगेगा अधिकतम फाइन : अजय कुमार सिंह

टीम एबीएन, रांची। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग में सोमवार को नर्सिंग संस्थानों को मान्यता प्रदान करने को लेकर निष्पादन समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की। बैठक में डीआईसी डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, संयुक्त सचिव सीमा कुमारी उदयपुरी, उपसचिव ध्रुव प्रसाद सहित विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे। 

बैठक में राज्य के 61 नर्सिंग कॉलेजों द्वारा एनओसी के लिए दिये गये आवेदनों पर विस्तार से चर्चा की गयी। इन आवेदनों पर सरकार के निर्णय के अनुमोदन के उपरांत सुयोग्य पाये जाने वाले संस्थान को एनओसी दिया जायेगा। अपर मुख्य सचिव ने काउंसिल की बैठक 15 दिनों के भीतर आयोजित करने का निर्देश दिया। 

जमीन, भवन और आधारभूत सुविधाओं की हुई समीक्षा 

अपर मुख्य सचिव ने कॉलेजों की आधारभूत सुविधाओं की जानकारी लेते हुए अधिकारियों से पूछा कि संबंधित संस्थान अपनी जमीन पर संचालित हैं या लीज पर, कितनी जमीन उपलब्ध है, कितने कमरे हैं तथा कॉलेज नया है या पहले से संचालित है। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित कॉलेजों के लिए जमीन की रसीद और शहरी क्षेत्रों में होल्डिंग टैक्स की स्थिति की भी जांच की जाये। 

लीज या किराये पर चल रहे कॉलेजों पर जतायी सख्ती 

बैठक में उन्होंने कहा कि यदि किसी कॉलेज को पहले से मौका दिया गया है, तो उसे अब तक अपना भवन निर्माण कर लेना चाहिए था। ऐसे मामलों में लीज या किराये की व्यवस्था की नवीनीकरण स्थिति की भी समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। 

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई 

अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले कॉलेजों पर अधिकतम जुर्माना लगाया जायेगा। विभाग द्वारा तैयार चार्ट में विभिन्न कमियों के आधार पर जुर्माने की राशि तय की गयी है। 

उन्होंने कहा कि यदि कोई कॉलेज लगातार तीन वर्षों से एडमिशन ले रहा है लेकिन नॉर्म्स का पालन नहीं कर रहा, तो ऐसे संस्थानों के निलंबन पर भी विचार किया जाना चाहिए। ऐसे कॉलेजों को शो-कॉज नोटिस जारी करने और फिलहाल एडमिशन रोकने का निर्देश दिया गया। 

निरीक्षण प्रक्रिया को किया जायेगा और सख्त 

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि किसी भी कॉलेज को एनओसी देने से पहले अनिवार्य रूप से निरीक्षण किया जाए। निरीक्षण के दौरान चार अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिनमें संबंधित जिले के सिविल सर्जन, रजिस्ट्रार, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर और एडिशनल कलेक्टर शामिल होंगे। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी निरीक्षण की फोटो आॅनलाइन अपलोड की जाएं और निरीक्षण में संबंधित अधिकारी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाये। 

अस्पतालों से जुड़ेगा प्रशिक्षण 

नर्सिंग छात्रों के बेहतर प्रशिक्षण के लिए कॉलेजों को सरकारी या निजी अस्पतालों तथा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) से जोड़ने का निर्देश दिया गया। इसके साथ ही मॉडल के तौर पर कम से कम पांच सीएचसी में तत्काल नर्सिंग की कक्षाएं शुरू करने का भी निर्देश दिया गया, ताकि भविष्य में इस व्यवस्था का विस्तार किया जा सके। 

आनलाइन होगी पूरी प्रक्रिया 

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि अब आफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किये जायें और पूरी प्रक्रिया को आनलाइन किया जाये। उन्होंने सभी कॉलेजों में फैकल्टी का एचआर आनलाइन प्रदर्शित करने, बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने, तथा सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्देश दिया। 

उन्होंने कहा कि जिन कॉलेजों को फिलहाल एनओसी के लिए योग्य नहीं पाया गया है, वे अपनी कमियां दूर कर विभाग को सूचित करें, ताकि बाद में उन पर भी विचार किया जा सके।

Published / 2026-03-03 18:30:34
डॉ एसके दास और डॉ शिवानी झा को आईओजी डॉ सत्योपाल अवार्ड्स

  • डॉ एस के दास एवं डॉ शिवानी झा को आईओजी डॉ० सत्योपाल अवार्डस से दिल्ली में किया गया पुरस्कृत

एबीएन न्यूज नेटवर्क, कतरास। दिल्ली के ली मेरिडीयन होटल जनपथ में प्रतिष्ठित चिकित्सक एस के दास और शिवानी झा को आईओजी डॉ० सत्योपाल अवार्डस से पुरस्कृत किया। इस कार्यक्रम में देश और विदेश के प्रतिष्ठित चिकित्सको का जमघट हुआ। 

सेमिनार में पुरस्कृत और सम्मानित अन्य ख्यातिनाम डॉक्टरो में डॉक्टर नरेंद्र मल्होत्रा, डॉक्टर जयदीप मल्होत्रा, डॉक्टर ऋषिकेश पई सहित पूर्व वियाडा अध्यक्ष सह प्रसिद्ध समाजसेवी विजय झा आदि शामिल थे ।

Published / 2026-03-02 21:11:51
झारखंड में टीकाकरण अभियान को दी जायेगी रफ्तार

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्टेट टास्क फोर्स की बैठक 

टीकाकरण में लापरवाही बरतने वाले कर्मियों पर कार्रवाई का निर्देश 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आज स्टेट टास्क फोर्स (टीकाकरण) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गयी। बैठक में एनएचएम के एमडी शशि प्रकाश झा, पुलिस विभाग की ओर से एसके झा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। 

सोशल मीडिया सुदृढ़ करने और पीएमयू गठन का निर्देश 

बैठक में अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि टीकाकरण के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए सोशल मीडिया को मजबूत किया जाये तथा एक पीएमयू का गठन किया जाये, ताकि कोई भी लाभार्थी टीकाकरण से वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि जो भी लाभार्थी टीकाकरण से छूट जायें, उनका फोन के माध्यम से फॉलोअप किया जाये। इस कार्य के लिए एएनएम द्वारा व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर वस्तुस्थिति का आकलन किया जायेगा। साथ ही एआई के माध्यम से कॉल सेंटर स्थापित कर कम मैनपावर में अधिक प्रभावी ढंग से फॉलोअप करने का निर्देश दिया गया। 

गैप एनालिसिस और सख्त कार्रवाई 

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि जहां भी टीकाकरण में गैप हो, उसे चिन्हित कर भरने का प्रयास किया जाये। किसी भी कर्मी के लापरवाही बरतने पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया। बैठक में चंदनकियारी से संबंधित एक प्रकरण सामने आया, जिसमें एक डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप की जानकारी दी गयी। इस पर जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। 

मासिक प्रेस ब्रीफिंग और विभागीय सहयोग 

समुदाय के साथ बेहतर संवाद के लिए प्रत्येक जिले में प्रतिष्ठित चिकित्सकों द्वारा मासिक प्रेस ब्रीफिंग आयोजित करने का निर्देश दिया गया। अभियान की सफलता के लिए आईसीडीएस, पंचायती राज, शिक्षा, आईपीआरडी, कल्याण विभाग एवं पुलिस विभाग के सहयोग पर जोर दिया गया। 

एनजीओ और रोटरी क्लब का सहयोग 

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने हेतु विभिन्न एनजीओ का सहयोग लिया जाये। इसमें रोटरी क्लब जैसे प्रतिष्ठित संगठनों को भी शामिल किया जायेगा, ताकि एचपीवी वैक्सीन सभी पात्र किशोरियों तक अनिवार्य रूप से पहुंचायी जा सके। 

28 फरवरी को हुआ एचपीवी वैक्सीन लॉन्च 

राज्य में 28 फरवरी 2026 को एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस अभियान के तहत 14 वर्ष से अधिक एवं 15 वर्ष से कम आयु की लगभग 4 लाख किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि एचपीवी टीकाकरण अभियान को मिशन मोड में चलाते हुए हर पात्र किशोरी तक टीका पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Published / 2026-02-21 21:24:03
रांची : सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने निकाला पांच किलो का ट्यूमर

रांची सदर अस्पताल में चमत्कार : डॉक्टरों ने व्यक्ति के शरीर से निकाला 5 किलो का ट्यूमर, 17 साल से झेल रहा था तकलीफ 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड के रांची सदर अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बड़ी चिकित्सीय सफलता हासिल की है। 54 वर्षीय मरीज के गर्दन और पीठ के (सर्वाइको-डार्सल) हिस्से में 17 साल से बढ़ रहे लगभग 5 किलोग्राम वजन के ट्यूमर को सफलतापूर्वक हटाया गया। 

17 साल से झेल रहा था तकलीफ 

मरीज लंबे समय से गर्दन में सूजन, भारीपन और तेज दर्द से परेशान थे। ट्यूमर इतना बड़ा हो गया था कि मरीज का सिर झुकाना, बैठना और सामान्य तरीके से सोना भी मुश्किल हो गया था। मरीज कई बड़े अस्पतालों में सलाह ले चुके थे, लेकिन सर्जरी का उच्च जोखिम होने के कारण इलाज संभव नहीं हो पाया था। 

जटिल सर्जरी में मिली सफलता 

यह जटिल आपरेशन न्यूरोसर्जन डॉ. विकास कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने किया। सर्जरी के दौरान रक्तस्राव, नसों और मांसपेशियों की सुरक्षा और त्वचा पुनर्निर्माण जैसी कई चुनौतियां थीं। टीम ने सावधानीपूर्वक योजना और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर ट्यूमर को पूरी तरह निकालने में सफलता पायी। एनेस्थीसिया टीम में डॉ. निरज, डॉ. वसुंधा, डॉ. ज्योतिका और डॉ. अंचल शामिल थीं। आपरेशन थिएटर स्टाफ में संजू, नूर, मंटू और सरिता सुरेश ने भी अहम योगदान दिया। 

सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति स्थिर है और वह जल्दी स्वस्थ हो रहा है। इस सफलता पर सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि यह जिले के लिए गर्व की बात है। उप अधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह ने भी कहा कि यह सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की क्षमता को दर्शाती है।

Page 1 of 54

Newsletter

Subscribe to our website and get the latest updates straight to your inbox.

We do not share your information.

abnnews24

सच तो सामने आकर रहेगा

टीम एबीएन न्यूज़ २४ अपने सभी प्रेरणाश्रोतों का अभिनन्दन करता है। आपके सहयोग और स्नेह के लिए धन्यवाद।

© www.abnnews24.com. All Rights Reserved. Designed by Inhouse