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Published / 2026-07-01 10:43:57
पलामू : वात्सल्य किड्स स्कूल में बच्चों को पिलायी गयी पल्स पोलियो की दवा

  • वात्सल्य किड्स स्कूल में पल्स पोलियो अभियान के तहत छोटे बच्चों को पिलाई गई जीवनरक्षक खुराक

एबीएन न्यूज नेटवर्क, पलामू। हुसैनाबाद शहर के वार्ड 8 मुख्य ब्रांच एसबीआई क़े सामने गली स्थित वात्सल्य किंड्स स्कूल में पल्स पोलियो अभियान के तहत छोटे बच्चों को पोलियो रोधी दवा की खुराक पिलाई गई।

अभियान का उद्देश्य 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखना एवं अभिभावकों को पोलियो क़े दवा दिलाने के प्रति जागरूक करना है। इस दौरान अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद की जीएनएम अलका कुमारी एवं स्वास्थ्यकर्मी दिनेश कुमार ने विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पल्स पोलियो की खुराक पिलाई। 

इस दौरान विद्यालय के निदेशक अंकित कश्यप सहित विद्यालय की सभी शिक्षिकाएं उपस्थित रहीं और अभियान को सफल बनाने में सहयोग किया। विद्यालय के निदेशक अंकित कश्यप ने कहा कि विद्यालय में पल्स पोलियो का खुराक से बच्चों के स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। 

उन्होंने अनुमंडलीय अस्पताल हुसैनाबाद की स्वास्थ्य कर्मियों को विद्यालय पहुंचकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने जनहितक सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को प्रत्येक पल्स पोलियो अभियान में पोलियो की खुराक अवश्य दिलाएं।

Published / 2026-06-30 21:02:40
रांची : छह मरीजों के मोतियाबिंद का नि:शुल्क इलाज करायेगा गायत्री परिवार

नेत्र चिकित्सा शिविर में छ: मोतियाबिंद मरीजों का नि:शुल्क उपचार करायेगी गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-२ धुर्वा रांची 

टीम एबीएन, रांची। नेत्र जांच चिकित्सक डाक्टर जीवक अस्पताल ललगुटवा एवं निरामया अस्पताल कोकर डाक्टर राहुल भंते की टीम से मिली रिपोर्ट के अनुसार अवगत कराया गया है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार रांची तथा रामकृष्ण मिशन आश्रम के सहयोग से रविवार 28 जून 2026 को गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-2 धुर्वा रांची परिसर में आंख जांच उपचार एवं मोतियाबिंद परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। 

इस शिविर में तीस (30) से ज्यादा मरीजों का आंख से संबंधित सभी रोगों की नेत्र चिकित्सक ने जांच की थी। जांच के दौरान छह मरीजों की आंख में मोतियाबिंद होने का लक्षण पाये गये हैं। इन सभी छह (6) मरीजों का मोतियाबिंद का नि: शुल्क आपरेशन, रांची शहर स्थित डॉ० जीवक अस्पताल में कराया जायेगा। 

साथ ही मोतियाबिंद के मरीजों को अस्पताल ले जाने तथा ले आने के लिए एंबुलेंस की भी नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। सभी से निवेदन किया गया कि अपने सम्पर्क के सभी ऐसे जरूरतमंदों तथा विशेष कर जो आर्थिक स्थिति के कारण मोतियाबिंद का आपरेशन  तथा अन्य रोग का उपचार नहीं करा पाते हैं। 

उन तक यह संदेश जरूर पहुंचाने की कृपा करें, नेत्र परीक्षण हेतु इस शिविर में अधिक से अधिक संख्या में अपने सम्पर्क के परिजन को अगले जुलाई माह के अंतिम रविवार को पुन: शक्तिपीठ सेक्टर टू में उपचार कराने हेतु लाने अथवा भेजने की कृपा करें। 

अस्पताल से उपस्थित डाक्टर टीम को गायत्री युग साहित्य पुस्तक भेंट कर उनका स्वागत अभिनन्दन स्वस्तिवाचन मंत्र पाठ कर शक्तिपीठ व्यवस्था टीम द्वारा किया गया। उक्त जानकारी गायत्री शक्तिपीठ, सेक्टर-2 धुर्वा रांची झारखंड जोन कार्यालय के व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने दी।

Published / 2026-06-29 22:03:10
नेत्र चिकित्सा शिविर में छह मोतियाबिंद मरीजों का नि:शुल्क उपचार करायेगी गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-२ धुर्वा रांची

टीम एबीएन, रांची। नेत्र जांच चिकित्सक डाक्टर जीवक अस्पताल ललगुटवा एवं निरामया अस्पताल कोकर डाक्टर राहुल भंते टीम से मिली रिपोर्ट के अनुसार अवगत कराया गया है कि अखिल विश्व गायत्री परिवार रांची तथा रामकृष्ण मिशन आश्रम के सहयोग से रविवार 28 जून 2026 को गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर-2 धुर्वा रांची परिसर में आंख जांच उपचार एवं  मोतियाबिंद परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया था। 

इस शिविर में तीस (30) से ज्यादा मरीजों का आंख से संबंधित सभी रोगों की नेत्र चिकित्सक द्वारा जांच किया गया था तथा जांच के दौरान छह मरीजों के आंख में मोतियाबिंद होने का लक्षण पाया गया है। इन सभी छह मरीजों का मोतियाबिंद का नि: शुल्क आपरेशन, रांची शहर स्थित डॉ जीवक अस्पताल में कराया जायेगा। 

साथ ही मोतियाबिंद के मरीजों को अस्पताल ले जाने तथा ले आने के लिए एम्बुलेंस की भी नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। सभी से निवेदन किया गया कि अपने सम्पर्क के सभी ऐसे जरुरत मंदों तथा विशेष कर जो आर्थिक स्थिति के कारण मोतियाबिंद का आपरेशन  तथा अन्य रोग का उपचार नहीं करा पाते हैं, उन तक यह संदेश जरूर पहुंचाने की कृपा करें। 

नेत्र परीक्षण हेतु इस शिविर में अधिक से अधिक संख्या में अपने सम्पर्क के परिजन को अगले जुलाई माह के अंतिम रविवार को पुन: शक्तिपीठ सेक्टर टू में उपचार कराने हेतु लाने अथवा भेजने की कृपा करें। अस्पताल से उपस्थित डाक्टर टीम को गायत्री युग साहित्य पुस्तक भेंट कर उनका स्वागत अभिनन्दन स्वस्तिवाचन मंत्र पाठ कर शक्तिपीठ व्यवस्था टीम द्वारा किया गया। उक्त जानकारी गायत्री शक्तिपीठ, सेक्टर-२ धुर्वा रांची जोन कार्यालय, रांची झारखंड के व्यवस्थापक जटाशंकर झा ने दी।

Published / 2026-06-25 19:58:21
झारखंड : 28 से 30 जून तक चलेगा राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

61.26 लाख बच्चों को पिलायी जायेगी पोलियो की खुराक 

एबीएन हेल्थ डेस्क (रांची)। झारखंड में 28 से 30 जून 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों को लेकर गुरुवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में अभियान की तैयारियों, विभागीय समन्वय तथा शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गयी। 

बैठक में बताया गया कि अभियान के अंतर्गत राज्य के 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 61.26 लाख बच्चों को पोलियो रोधी दवा की दो बूंद पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान के प्रथम दिन 28 जून को पूरे राज्य में स्थापित 24,507 पोलियो बूथों पर बच्चों को पोलियो की खुराक दी जायेगी। 

इसके बाद 29 एवं 30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर उन बच्चों तक पहुंचेंगी जो बूथों पर नहीं आ सके हैं, ताकि कोई भी बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रह जाये। बैठक की अध्यक्षता करते हुए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए पूर्ण समन्वय एवं सक्रिय सहयोग सुनिश्चित किया जाये। 

उन्होंने विशेष रूप से आईसीडीएस, पंचायती राज विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, शिक्षा विभाग तथा सूचना एवं जनसंपर्क विभाग को अभियान में अपनी पूरी क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहिया, पंचायत प्रतिनिधि, स्वयं सहायता समूह, ग्राम स्तरीय संगठन तथा ग्रामीण विकास विभाग के कर्मी समुदाय तक जागरूकता संदेश पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। 

साथ ही मीडिया संस्थानों से भी अपील की गयी कि वे पोलियो उन्मूलन के संदेश को राज्य के प्रत्येक गांव, टोला एवं बस्ती तक पहुंचाने में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। अपर मुख्य सचिव ने राज्य के सभी उपायुक्तों को निर्देश दिया कि अभियान के तीनों दिनों के दौरान प्रतिदिन शाम को समीक्षा एवं डी-ब्रीफिंग बैठक आयोजित कर दिनभर की प्रगति का आकलन करें। 

उन्होंने कहा कि यदि कहीं बच्चों के छूटने, कम कवरेज, टीमों की अनुपस्थिति, प्रतिरोध अथवा अन्य चुनौतियों की जानकारी मिलती है तो वहां तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि अगले दिन की गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके तथा शत-प्रतिशत बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित हो। 

बैठक में यह भी बताया गया कि भारत वर्ष 2011 से वाईल्ड पोलियो वायरस से मुक्त है, लेकिन दुनिया के कुछ देशों में अब भी पोलियो वायरस का संचरण जारी रहने के कारण सतर्कता बनाये रखना आवश्यक है। ऐसे में प्रत्येक अभियान के दौरान प्रत्येक बच्चे तक पहुंचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। 

श्री सिंह ने राज्य के सभी अभिभावकों से अपील की कि वे 28 जून को अपने 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निकटतम पोलियो बूथ पर अवश्य लेकर जाएं तथा घर-घर आने वाली स्वास्थ्य टीमों का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि बच्चे ने पहले कितनी भी बार पोलियो की दवा ली हो, हर अभियान में पोलियो की खुराक पिलाना आवश्यक है, क्योंकि यही पोलियो उन्मूलन की सफलता की कुंजी है।

Published / 2026-06-21 17:38:20
योग, व्यायाम और प्राणायाम जीवन के लिए बेहद उपयोगी : डाक्टर रामदेव प्रसाद

एबीएन हेल्थ डेस्क। डॉक्टर रामदेव प्रसाद ने योग के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन के लिए अनेक आवश्यकताओं में सहज-सुलभ आसन, व्यायाम, प्राणायाम भी बहुत महत्वपूर्ण,अनमोल व अपेक्षित है। 

आज गायत्री शक्तिपीठ सेक्टर टू धूर्वा परिसर में सुबह 90 मिनट तक विश्व योग दिवस समारोह मनाया गया। इसमें बहुत बुजुर्ग वरिष्ठ योगाचार्य महाशय डाक्टर रामदेव प्रसाद जी 88 वर्ष के सानिध्य में मनाया गया। 

शुभारंभ गायत्री महामंत्र के सस्वर पाठ, गुरु-ईश ध्यान वंदना से हुआ।  इस क्रम में सबके लिए स्वस्थ-सुखद जीवन के सहज सुलभ आसन, व्यायाम, प्राणायाम पर अपेक्षित लाभ बताते हुए अनेक प्रकार का योगासन अभ्यास क्रम कराये।  

अ से आ तक के एक नये क्रम में पैर की अंगुली से लेकर आंख तक का अभ्यास कराया। शरीर के मांस पेशियों को वार्म अप कराया और पैरों की अंगुली की तकलीफ,दर्द से लेकर पंजों, घुटनों, कमर, कलाई, कोहनी, कंधा, छाती, गर्दन, जबड़ा, मुंह, पेट दर्द निवारण, गैस आदि में राहत, दांत, कान, जीभ, सिर आंख, गाल, चेहरा आदि सभी के सही संचालन, स्वस्थ-सुखद तन-मन के लिए लाभदायक आसनों की चर्चा कर बताये/ कराये। 

इसके बाद प्राणायाम,आर्ट आॅफ लिविंग, पतंजलि योग की चर्चा करके इड़ा, पिंगला, सुषुम्ना, नाड़ियों की गतिविधि, पूरक, कुंभक, रेचक, प्राणाकर्षक, प्राणायाम का असंदिग्ध लाभ, सावधानी पूर्वक अभ्यास का पुट, सूत्र की चर्चा कर कराया।  

इसके बाद हमारे प्रान्तीय सहायक जोन समन्वयक व रांची जिला समन्वयक, वरिष्ठ व्यवस्था सहयोगी शारदा प्रसाद व महिला मंडल प्रतिनिधियों ने इन सब के साथ प्रज्ञा योग अभ्यास की चर्चा करके सभी लाभार्थी अभ्यास कर्ता साधक- शिष्य व भाई-बहनों को सराहा। अंत मे महाशय योगाचार्य जी का अभिनंदन, सम्मान तिलक वंदन, रक्षा सूत्र, स्वस्तिवाचन पाठ व गायत्री मंत्र चादर ओढ़ाकर किया गया और खूब खूब सराहा तथा धन्यवाद व्यक्त किये।  

आयोजन में शक्तिपीठ परिवार के भाई-बहन व परिव्राजक टीम ने सभी व्यवस्था में योगदान किए। विश्व कल्याण, परमार्थ के लिए शुभ कामना सहित शांति पाठ कर समापन हुआ। उक्त जानकारी गायत्री परिवार के जय नारायण प्रसाद ने दी।

Published / 2026-06-19 15:31:13
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को, स्वस्थ जीवन, संतुलित मन और वैश्विक कल्याण का महापर्व

  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून को, स्वस्थ जीवन, संतुलित मन और वैश्विक कल्याण का महापर्व
  • योग केवल अभ्यास नहीं बल्कि स्वास्थ्य संतुलित और आनंदमय जीवन की है कुंजी: संजय सर्राफ

टीम एबीएन, रांची। हिंदी साहित्य भारती के उपाध्यक्ष सह झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता संजय सर्राफ ने कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिवस योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्वस्थ जीवनशैली कोप्रोत्साहित करने तथा मानव जीवन में शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। योग भारत की प्राचीन एवं अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर है, जिसने आज पूरी दुनिया को स्वास्थ्य और शांति का मार्ग दिखाया है।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने का प्रस्ताव भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान रखा था। इस प्रस्ताव को अभूतपूर्व समर्थन मिला और 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया। 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन (ग्रीष्म अयनांत) माना जाता है,जिसका विशेष आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है।

 पहला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को विश्वभर में उत्साहपूर्वक मनाया गया था।योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक संपूर्ण पद्धति है। योग शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। नियमित योगाभ्यास से शरीर स्वस्थ, मन शांत और विचार सकारात्मक बनते हैं। 

योग तनाव, चिंता, अवसाद, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा तथा अनेक जीवनशैली संबंधी रोगों को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। यही कारण है कि आज विश्व के लगभग सभी देशों में योग का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा हैअंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को योग के प्रति जागरूक करना, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना तथा वैश्विक स्तर पर शांति और सद्भाव का संदेश देना है।

वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, बढ़ते मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बीच योग मानवता के लिए एक प्रभावी समाधान के रूप में उभरा है। यह दिवस लोगों को यह संदेश देता है कि स्वस्थ शरीर और संतुलित मन के बिना सुखी जीवन की कल्पना संभव नहीं है।इस दिवस की विशेषता यह है कि विश्वभर में लाखों लोग एक साथ योगाभ्यास कर एकता, अनुशासन और स्वास्थ्य का संदेश देते हैं। 

विद्यालयों, महाविद्यालयों, सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों तथा विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है और योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा मिलती है।आज योग भारत की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ वैश्विक कल्याण का माध्यम बन चुका है। 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हमें यह स्मरण कराता है कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि स्वस्थ, संतुलित और आनंदमय जीवन की कुंजी है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को नियमित योग अपनाकर स्वयं के स्वास्थ्य के साथ-साथ एक स्वस्थ एवं सशक्त समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए। योग वास्तव में मानवता को जोड़ने वाला, स्वास्थ्य और शांति का सार्वभौमिक संदेश है।

Published / 2026-06-12 20:54:00
विश्व रक्तदाता दिवस 14 जून को

मानवता की सेवा का महापर्व, रक्तदान से बचाएं अनमोल जीवन 

यह समाज में सेवा, करुणा और मानवता की भावना को करता है मजबूत : संजय सर्राफ 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रांतीय प्रवक्ता सह इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के आजीवन सदस्य संजय सर्राफ ने कहा है कि विश्व रक्तदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 14 जून को पूरे विश्व में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त की आवश्यकता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, स्वैच्छिक एवं नि:शुल्क रक्तदाताओं का सम्मान करना तथा अधिक से अधिक लोगों को नियमित रक्तदान के लिए प्रेरित करना है। 

यह दिन उन लाखों रक्तदाताओं को समर्पित है, जिनकी निस्वार्थ सेवा के कारण असंख्य लोगों को नया जीवन मिलता है। विश्व रक्तदाता दिवस मनाने की शुरूआत वर्ष 2004 में हुई थी और वर्ष 2005 में विश्व स्वास्थ्य सभा ने इसे आधिकारिक वैश्विक दिवस के रूप में मान्यता प्रदान की। 

14 जून का चयन इसलिए किया गया क्योंकि इसी दिन आधुनिक रक्त संक्रमण प्रणाली के जनक तथा एबीओ रक्त समूह प्रणाली के खोजकर्ता महान वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टाइनर का जन्म हुआ था। उनकी खोज ने चिकित्सा विज्ञान में एक नयी क्रांति ला दी और सुरक्षित रक्ताधान संभव हो सका। मानव शरीर के लिए रक्त अत्यंत आवश्यक है और इसका कोई कृत्रिम विकल्प उपलब्ध नहीं है। 

सड़क दुर्घटनाओं, गंभीर आॅपरेशन, प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, कैंसर, थैलेसीमिया, एनीमिया तथा अनेक जटिल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार में रक्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। समय पर उपलब्ध रक्त किसी भी व्यक्ति के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है। इसी कारण रक्तदान को महादान कहा जाता है। 

विश्व रक्तदाता दिवस की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह समाज में सेवा, करुणा और मानवता की भावना को मजबूत करता है। यह दिवस लोगों के बीच फैली भ्रांतियों को दूर करने तथा यह संदेश देने का कार्य करता है कि स्वस्थ व्यक्ति नियमित अंतराल पर सुरक्षित रूप से रक्तदान कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार,एक यूनिट रक्त कई जरूरतमंद मरीजों के उपचार में सहायक बन सकता है और एक रक्तदाता अनेक परिवारों की खुशियां लौटाने का माध्यम बन सकता है। इस दिवस का प्रमुख उद्देश्य सुरक्षित रक्त एवं रक्त उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना, युवाओं को रक्तदान अभियान से जोड़ना, स्वैच्छिक रक्तदाताओं को सम्मानित करना तथा प्रत्येक देश में मजबूत रक्तदान व्यवस्था विकसित करना है। 

यह दिवस समाज को यह संदेश देता है कि रक्तदान किसी जाति, धर्म, वर्ग या भाषा का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता की सेवा का कार्य है। आज आवश्यकता इस बात की है कि प्रत्येक स्वस्थ नागरिक स्वेच्छा से रक्तदान करे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करे। 

रक्तदान न केवल किसी अनजान व्यक्ति को नया जीवन देता है, बल्कि समाज में भाईचारे, सहयोग और मानवीय मूल्यों को भी सुदृढ़ बनाता है। वास्तव में, रक्त की कुछ बूंदें किसी के जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकती है इसलिए रक्तदान करें और मानवता के इस महायज्ञ में अपनी सहभागिता निभायें।

Published / 2026-06-11 18:35:14
2029 तक टीबी मुक्त होगा झारखंड : इरफान अंसारी

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी का एलान, रिम्स-टू को लेकर कही बड़ी बात 

टीम एबीएन, रांची। झारखंड सरकार ने वर्ष 2029 तक राज्य को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह घोषणा राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने गुरुवार को रांची के रेडिसन ब्लू होटल में आयोजित टीबी मुक्त भारत अभियान पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर की। 

टीबी उन्मूलन के लिए पंचायत स्तर तक चलेगा अभियान 

स्वास्थ्य विभाग एवं नेशनल टास्क फोर्स के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि टीबी देश और राज्य दोनों के लिए गंभीर चुनौती है। सरकार पंचायत स्तर पर विशेष शिविर लगाकर मरीजों की पहचान कर रही है तथा उन्हें नि:शुल्क दवा के साथ प्रति माह एक हजार रुपये की सहायता भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि टीबी, मलेरिया, थैलेसीमिया और कुष्ठ रोग जैसी बीमारियों को सरकार ने चुनौती के रूप में लिया है। 

निश्चय मित्र  बनेंगे जागरूकता अभियान की ताकत 

डॉ. अंसारी ने कहा कि टीबी के मरीजों के प्रति सामाजिक भेदभाव समाप्त करने की जरूरत है। इसके लिए निश्चय मित्र कार्यक्रम के तहत टीबी से स्वस्थ हो चुके लोग गांव-गांव जाकर जागरूकता फैलायेंगे। आने वाले दिनों में राज्यभर में व्यापक स्क्रीनिंग अभियान चलाया जायेगा तथा पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों और एआई तकनीक की मदद से रोग की शीघ्र पहचान सुनिश्चित की जायेगी। 

रिम्स-2 और मेडिकल कॉलेजों से मजबूत होगा स्वास्थ्य ढांचा 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि झारखंड को स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। रांची में एशिया के सबसे बड़े अस्पतालों में शामिल होने वाले रिम्स-2 का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने, एमबीबीएस एवं पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने तथा एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की योजना है, ताकि लोगों को हर तरह की उन्नत चिकित्सा सुविधा झारखंड में ही उपलब्ध हो सके। 

भारत में टीबी की चुनौती पर सरकार की नजर 

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व के लगभग 25 प्रतिशत टीबी मरीज भारत में हैं, इसलिए इस बीमारी पर नियंत्रण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। वहीं एनएचएम निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि वर्तमान में झारखंड में लगभग 63 हजार टीबी मरीज पंजीकृत हैं, जिन्हें सरकार की ओर से पोषण सहायता प्रदान की जा रही है। 

32 राज्यों के विशेषज्ञों ने साझा किये सुझाव 

कार्यशाला में देश के 32 राज्यों से आए विशेषज्ञों ने टीबी उन्मूलन की रणनीतियों पर अपने विचार साझा किये। मौके पर डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, शोभिनी राजन, डॉ. अशोक भारद्वाज सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित थे। मंच संचालन अणिमा किस्कू ने किया।

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