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Published / 2025-09-28 18:43:47
तुर्की : 5.4 तीव्रता के भूकंप के झटके के बाद घर छोड़ भागे लोग

5.4 तीव्रता भूकंप के झटकों से दहला तुर्की, घरों से बाहर भागे लोग 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। तुर्की के उत्तर-पश्चिमी इलाके में रविवार को मध्यम तीव्रता का भूकंप आया, जिससे लोग अपने घरों से बाहर भागे और आपातकालीन सेवाएं सतर्क हो गयीं। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। तुर्की की आपातकालीन एजेंसी के अनुसार, भूकंप का केंद्र कुया प्रांत के सिमाव शहर में था और इसकी गहराई 8 किलोमीटर (5 मील) थी। 

भूकंप का समय दोपहर 12:59 बजे था। इसके तुरंत बाद क्षेत्र में 4.0 तीव्रता का आफ्टरशॉक भी दर्ज किया गया। भूकंप की झटके तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल तक महसूस की गयी, जो सिमाव से लगभग 100 किलोमीटर (62 मील) उत्तर में स्थित है। 

स्थानीय मीडिया ने दिखाया कि लोग भूकंप के डर से स्क्वेयर और पार्क में जमा हुए। पिछले महीने, अगस्त में तुर्की के पड़ोसी प्रांत बालिकेसिर के सिंडिर्गी में 6.1 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। उसके बाद से क्षेत्र में कई छोटे भूकंप आये हैं।

Published / 2025-09-16 19:38:52
भारत-अमेरिका के बीच फिर खुलेंगे व्यापार के द्वार!

टैरिफ बम अटैक के बाद ट्रंप का यू-टर्न: ट्रेड डील के लिए भारत भेजा विशेष वार्ताकार, दोनों देशों में फिर खुलेंगे व्यापार के द्वार 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर लगाये गये 50% टैरिफ के बाद भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील की बातचीत बाधित हो गयी थी। इसके चलते दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया। अब ट्रंप ने भारत भेजा ब्रेंडन लिंच, अपने खास वार्ताकार को, ताकि छठे दौर की बातचीत फिर से शुरू की जा सके। 

दोनों देश  मंगलवार, 16 सितंबर  को नयी दिल्ली में हाई-लेवल मीटिंग करेंगे, जिसमें द्विपक्षीय व्यापार और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के मुद्दों पर चर्चा की जायेगी। ट्रंप के टैरिफ फैसले से भारत-अमेरिका ट्रेड डील में खटास, अब विशेष वार्ताकार भेजे गये। 

भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी टीम मंगलवार को भारतीय प्रतिनिधियों से मुलाकात करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल व्यापारिक चर्चा का हिस्सा है, जबकि ट्रंप के अचानक टैरिफ बढ़ाने से पहले बातचीत रोक दी गयी थी।  

वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने कहा कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक वार्ता की उम्मीद है, लेकिन ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने पहले ही रिश्तों को ठेस पहुंचायी है। ट्रंप ने पहले भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में दूरी बढ़ गयी थी। अब इस बातचीत के जरिए दोनों पक्ष संबंधों में सुधार की उम्मीद जता रहे हैं।

इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रेंडन लिंच  कर रहे हैं, जो ट्रंप के करीबी और अमेरिका के चीफ नेगोशिएटर हैं। भारत की ओर से मुख्य वातार्कार  राजेश अग्रवाल  विशेष सचिव, वाणिज्य मंत्रालय, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करेंगे। 

उन्होंने कहा कि अमेरिकी टीम मंगलवार को भारतीय वातार्कारों से मिलेगी। इसके बाद स्थिति स्पष्ट हो पायेगी। यह छठा दौर नहीं बल्कि व्यापारिक चर्चा का हिस्सा है। वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच  सकारात्मक और उपयोगी बातचीत की उम्मीद है। 

26-29 मार्च : पहली बातचीत 

  • 2 अप्रैल : ट्रंप ने सभी देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ की घोषणा की; भारत पर कुल 26% टैरिफ लगा। 
  • 5 अप्रैल : बेसलाइन टैरिफ लागू 
  • 21 अप्रैल : पीएम मोदी की जेडी वेंस के साथ मुलाकात 
  • 14-18 जुलाई : पांचवें दौर की बातचीत के बाद टैरिफ और बढ़ा दिया गया।

Published / 2025-09-14 23:02:58
रूस-यूक्रेन युद्ध : यूक्रेन ने रूस पर किये ताबड़तोड़ ड्रोन हमले

  • 361 ड्रोन हमले से रूस के सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी में से एक में लगी भीषण आग

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। यूक्रेन ने शनिवार रात रूस पर बड़ा ड्रोन हमला किया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि खुद रूस ने यूक्रेन के 361 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। 

इन हमलों में रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक में आग लग गई। रूस के उत्तर-पश्चिमी लेनिनग्राद क्षेत्र में स्थित किरिशी रिफाइनरी पर शनिवार रात हुए हमले से हफ्तों पहले भी यूक्रेन ने रूसी तेल अवसंरचना को निशाना बनाया था। 

किरिशी रिफाइनरी उत्पादन के मामले में रूस की तीन शीर्ष रिफाइनरियों में से एक है। वह हर वर्ष लगभग 1.77 करोड़ मीट्रिक टन, यानी प्रतिदिन 3.55 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करती है। 

यूक्रेन के जनरल स्टाफ के अनुसार, घटनास्थल पर विस्फोट व आग लगने की सूचना मिली है। उन्होंने एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें रात के समय आसमान में आग की ऊंची लपटें व धुएं का गुबार दिखाई देता है। 

यूक्रेन ड्रोन कमान ने हमले की पुष्टि कतरे हुए इसे सफल बताया। क्षेत्रीय गवर्नर अलेक्जेंडर ड्रोज्डेंको ने बताया कि किरिशी इलाके में रात भर में तीन ड्रोन गिराए गए, जिसके गिरते मलबे से रिफाइनरी में आग लग गई। 

कोई हताहत नहीं हुआ और आग बुझा दी गई। रूसी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, वायु रक्षा प्रणालियों ने यूक्रेन के कम से कम 361 ड्रोन मार गिराए। इनमें चार निर्देशित हवाई बम व एक अमेरिकी निर्मित एचआईएमएआरएस मिसाइल शामिल थी।

 उधर, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ एंड्री हनातोव के हवाले से कहा गया कि यूक्रेन जानबूझकर रूसी ड्रोन हमलों के दौरान मोबाइल संचार की गुणवत्ता को कम कर सकता है, ताकि हमलों के समन्वय के लिए इस्तेमाल किए जा रहे नेटवर्क को रोका जा सके।

Published / 2025-09-14 21:01:26
नेपाल हिंसा में मरे लोगों को शहीद का दर्जा देंगी पीएम कार्की

नेपाल की नई पीएम सुशीला कार्की का सत्ता को लेकर स्पष्ट संदेश- मजे लेने नहीं आयी, 6 महीने से ज्यादा नहीं रुकेंगे लेकिन... 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेपाल में चल रहे आंदोलन के बाद अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की बन गयी हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने साफ कह दिया कि वे सत्ता का आनंद लेने नहीं, बल्कि सिर्फ 6 महीने के भीतर देश को नयी संसद और नया नेतृत्व सौंप देंगी। इस दौरान उन्होंने कहा है कि हिंसा में मरे लोगों को शहीद का दर्जा दिया जायेगा। 

काठमांडू के सिंह दरबार में रविवार को औपचारिक रूप से कार्यभार संभालते हुए सुशीला कार्की ने कहा, मेरी टीम और मैं यहां सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हम 6 महीने से ज्यादा नहीं रुकेंगे। इसके बाद जिम्मेदारी नई संसद को सौंप देंगे।" उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हाल के दंगों और तोड़फोड़ की घटनाओं की पूरी जांच होगी। 

नेपाल में आंदोलन का नेतृत्व करने वाले युवाओं का कहना है कि यही सही वक्त था बदलाव का। उनका मानना है कि कार्की के नेतृत्व में बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और अपारदर्शी सिस्टम पर काबू पाया जा सकेगा। युवा संतोष ने बताया यहां हालात इतने खराब थे कि छोटे से छोटे काम के लिए भी सरकारी दफ्तरों में घूस देनी पड़ती थी। बड़े नेताओं के काम तुरंत हो जाते थे, लेकिन आम लोग त्रस्त हो गए थे। 

एक अन्य युवा थापा ने कहा कि नेपाल में न इंडस्ट्री थी, न मजबूत शिक्षा व्यवस्था और न ही रोजगार। इस वजह से युवा विदेश जाने पर मजबूर थे। अब उन्हें उम्मीद है कि पारदर्शी नेतृत्व से हालात बदलेंगे। पदभार संभालने के बाद हालात सामान्य करने के प्रयास शुरू हो गए हैं। करीब 4-5 दिन बाद नेपाल-भारत बॉर्डर आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। अब लोग छोटे वाहनों और आधार कार्ड के जरिए सीमा पार कर सकते हैं। 

हालांकि, बड़ी गाड़ियों की आवाजाही अभी भी रोकी गई है क्योंकि हालिया हिंसा में भंडार कार्यालय को जला दिया गया था, जिससे कागजी काम और टैक्स वसूली बाधित है। बता दें कि हिंसा के बीच अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को काठमांडू के बौद्ध इलाके में स्थित भाटभटेनी सुपर स्टोर से छह शव बरामद हुए। सीमा पार करने वाले लोगों ने कहा कि हालात धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं, लेकिन अभी भी डर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

Published / 2025-09-13 12:13:05
टैरिफ़ की मजबूरी ने भारत से रिश्ते को झकझोर दिया : ट्रम्प

  • भारत पर 50% को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान
  • फैसला लेना आसान नहीं था और इस से दोनों देशों के बीच दरार भी आई

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति ने पूरी दुनिया के व्यापारिक समीकरणों को प्रभावित किया। उन्होंने कई देशों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ाया। जिन देशों ने अमेरिका की शर्तें मान लीं, उनके प्रति ट्रंप का रुख नरम रहा, लेकिन जो देश अपनी प्राथमिकताओं पर डटे रहे, उन्हें अमेरिका के टैरिफ का सामना करना पड़ा।

भारत भी उन देशों में शामिल रहा जिसने अमेरिका के सामने झुकने से इनकार किया। इसके बाद भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया, जिससे भारत पर कुल टैरिफ 50 फीसदी लगा। इससे भारत-अमेरिका की दशकों पुरानी दोस्ती में कड़वाहट आने लगी।

फैसला लेना आसान काम नहीं था: ट्रम्प 

एक इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भारत रूस से कच्चा तेल खरीद रहा था। इस कदम से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और रिश्तों में दूरी आई।

अमेरिकी राष्ट्रपति भारत पर 50% टैरिफ को लेकर कहा कि फैसला लेना आसान काम नहीं था और इस से दोनों देशों के बीच दरार भी आई।

ट्रंप ने माना कि यह निर्णय कड़ा था, लेकिन ज़रूरी भी। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या भारत की तुलना में यूरोप के लिए ज्यादा बड़ी है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने कई बड़े संघर्षों को रोका, जैसे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम करवाना और कांगो-रवांडा के बीच युद्ध पर विराम लगवाना।

भारत ने साफ किया अपना रुख

भारत ने साफ किया है कि उसकी पहली प्राथमिकता अपनी ऊर्जा जरूरतें हैं। भारत रूस से तेल खरीदता है क्योंकि यह उसकी ज़रूरत और बाज़ार की परिस्थितियों के हिसाब से सस्ता और अनुकूल विकल्प है। भारत का कहना है कि वह अमेरिकी दबाव में आकर अपने फैसले नहीं बदलेगा।

अमेरिका की शर्तें

अमेरिका चाहता है कि भारत तेल और पेट्रोलियम उत्पाद उसी से खरीदे। इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताएं चल रही हैं। लेकिन अमेरिका के वाणिज्य सचिव ने यह साफ कर दिया है कि जब तक भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करेगा, तब तक भारत-अमेरिका के बीच कोई बड़ा व्यापार समझौता आगे नहीं बढ़ पाएगा।

Published / 2025-09-13 08:03:56
सुशीला कार्की बनी नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री

  • सस्पेंस खत्म, शपथग्रहण के बाद नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री बनीं सुशीला कार्की

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश, सुशीला कार्की ने नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। 

उन्हें राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल ने शीतल निवास में आयोजित एक समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलायी। 

कार्की, जो कि एक प्रतिष्ठित पूर्व प्रधान न्यायाधीश हैं, को देश के सामने मौजूद राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए चुना गया है।

Published / 2025-09-12 20:30:49
सुशीला कार्की ही होंगी नेपाल की अंतरिम पीएम

  • सुशीला कार्की होंगी नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री, आज होगा शपथ ग्रहण

एबीएन सेन्ट्रल डेस्क। नेपाल में युवा पीढ़ी के हिंसक प्रदर्शनों के बाद उपजे राजनीतिक संकट के बीच शुक्रवार को पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने का फैसला किया गया है। इसके साथ ही नेपाल की संसद को भी भंग कर दिया गया है। 

शुक्रवार को राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल के साथ सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल की मौजूदगी में जनरेशन-जी के नेतृत्वकर्ताओं ने एक बैठक की थी। जिसमें पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अंतरिम सरकार का प्रमुख बनाने पर सहमति बनी थी। 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह आज रात 8:45 बजे राष्ट्रपति भवन में शपथ ग्रहण करेंगी। सुशीला कार्की का जन्म सात जून 1952 को विराटनगर में हुआ था। उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके अलावा उन्होंने कानून की पढ़ाई नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सटी से की। 

इसके बाद वकालत और कानूनी सुधारों के क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। सुशीला कार्की नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश रह चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक मामलों की सुनवाई की, जिनमें चुनावी विवाद भी शामिल थे।

Published / 2025-09-11 20:50:38
नेपाल संकट : पीएम की रेस में सुशीला से आगे निकले कुलमान

नेपाल के अंतरिम पीएम रेस में नया नाम: कुलमान घिसिंग ने सुशीला कार्की को छोड़ा पीछे, क्या भारत के लिए होगा भरोसेमंद विकल्प 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। नेपाल में जेन-जेड आंदोलन  और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अब अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए कुलमान घिसिंग का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। 54 साल के घिसिंग, जो नेपाल बिजली बोर्ड में कार्यरत रहे हैं और बिजली आपूर्ति सुधार के लिए लोकप्रिय हैं, अब पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की  को पीछे छोड़ चुके हैं। 

कुलमान घिसिंग कौन हैं? 

  • जन्म:  रामेछाप (नेपाल)  
  • शिक्षा: एनआईटी जमशेदपुर से इंजीनियरिंग प्रारंभिक शिक्षा नेपाल के सरकारी स्कूल से 
  • पेशा: नेपाल  बिजली विभाग में अधिकारी, 2016 में विभाग प्रमुख नियुक्त 
  • पहचान: ईमानदार और कड़क अफसर  जिन्होंने शहरी इलाकों में 18 घंटे बिजली को 24 घंटे किया 
  • राजनीतिक इतिहास: पिछले साल प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से टकराव  के कारण पद से हटाए गए, जिस पर नेपाल में व्यापक विरोध हुआ 
  • जेन-जेड : आंदोलन में घिसिंग का नाम क्यों उभरा? 
  • ईमानदार छवि : जनता और जेन-जेड गुटों द्वारा भरोसेमंद और निष्पक्ष माना जाता है। नीतिगत साहस : बिजली विभाग में कार्यकाल के दौरान भ्रष्टाचार और खराब व्यवस्था के खिलाफ सीधा कदम उठाया।  

सुशीला कार्की के खिलाफ विरोध  

  • कार्की के नाम को जेन-जेड का एक बड़ा वर्ग और राजनीतिक दलों ने अस्वीकार किया। 
  • विरोध का कारण: उम्र, संविधान में बदलाव पर उनकी सीमित स्वीकृति और राजनीतिक दलों के दबाव। 
  • कुलमान घिसिंग का नाम ऐसे समय में उभरा है जब नेपाल में अस्थिरता बढ़ रही है और विभिन्न दल उन्हें एक  स्थिर और निष्पक्ष चेहरा मानते हैं 

भारत के लिए कुलमान घिसिंग का दृष्टिकोण 

कुलमान घिसिंग को भारत के साथ मजबूत और भरोसेमंद संबंध बनाए रखने वाला माना जाता है। उनका मानना है कि  नेपाल-भारत संबंध सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक तौर पर भी महत्वपूर्ण हैं। बिजली और ऊर्जा क्षेत्र में भारत के साथ सहयोग के जरिए नेपाल में  स्थिरता और विकास लाने पर घिसिंग जोर देंगे। जेन-जेड आंदोलन के दौरान उन्होंने यह स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच मतभेदों को हल करके साझेदारी को मजबूत किया जा सकता है।  विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर घिसिंग अंतरिम प्रधानमंत्री बनते हैं, तो भारत के साथ व्यापार, ऊर्जा और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में नई गति आयेगी।  

अंतरिम प्रधानमंत्री पद के लिए वर्तमान स्थिति 

  • पहले बालेन शाह  का नाम सामने आया था, लेकिन उन्होंने पद लेने से इंकार किया। 
  • अब जेन-जेड और सेना के बीच बातचीत में कुलमान घिसिंग का नाम प्रमुखता से उठ रहा है। 
  • सुशीला कार्की ने सेना प्रमुख अशोक राज  से मुलाकात की थी, लेकिन जेन-जेड ने घिसिंग का नाम आगे रखा।

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