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रूस के परमाणु रिएक्टर कनेक्शन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
Published / 2026-05-13 21:22:23
रूस के परमाणु रिएक्टर कनेक्शन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

समुद्र में डूबे रूसी जहाज से जुड़ा बड़ा खुलासापरमाणु रिएक्टर कनेक्शन ने बढ़ाई दुनिया की टेंशनएबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस का मालवाहक जहाज उरसा मेजर दिसंबर 2024 में भूमध्य सागर में डूब गया था। अब इस घटना को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। स्पेन सरकार के एक दस्तावेज के अनुसार जहाज में ऐसे हिस्से मौजूद हो सकते थे जो पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाले परमाणु रिएक्टरों से जुड़े थे।  यह जहाज Saint Petersburg से रूस के पूर्वी शहर Vladivostok जा रहा था। 23 दिसंबर 2024 को स्पेन और अल्जीरिया के बीच समुद्र में जहाज के इंजन कक्ष में विस्फोट हुआ, जिसके बाद वह डूब गया। हादसे में दो चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी जबकि 14 लोगों को बचा लिया गया था। स्पेन सरकार के दस्तावेज में कहा गया है कि बचाए जाने के बाद जहाज के कप्तान ने अधिकारियों को बताया था कि जहाज में पनडुब्बियों में इस्तेमाल होने वाले दो परमाणु रिएक्टरों जैसे उपकरणों के हिस्से मौजूद थे। यह जानकारी स्पेन की संसद में जमा एक आधिकारिक दस्तावेज में सामने आई है।जहाज की मालिक रूसी सरकारी कंपनी Oboronlogistika ने पहले दावा किया था कि जहाज पर आतंकी हमला हुआ था। कंपनी के अनुसार जहाज के पानी की सतह के पास तीन शक्तिशाली विस्फोट हुए थे, जिससे जहाज को भारी नुकसान पहुंचा। यह कंपनी रूस के रक्षा मंत्रालय से जुड़ी मानी जाती है और उस पर पहले से ही  अमेरिका तथा यूरोपीय संघ के प्रतिबंध लगे हुए हैं।  इस खुलासे के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है कि क्या जहाज सैन्य या परमाणु तकनीक से जुड़ा संवेदनशील सामान ले जा रहा था।  विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जहाज में वास्तव में परमाणु रिएक्टरों से जुड़े हिस्से थे, तो यह मामला केवल समुद्री दुर्घटना नहीं बल्कि वैश्विक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन सकता है।

होर्मुज संकट पर बड़ी राहत पर फैसला 48 घंटे में
Published / 2026-05-06 18:58:27
होर्मुज संकट पर बड़ी राहत पर फैसला 48 घंटे में

होर्मुज संकट पर बड़ी राहत: अमेरिका-ईरान डील के बेहद करीब, 1 पन्ना बदलेगा खेल... फैसला 48 घंटे में एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है, जहां दोनों देश युद्ध समाप्त करने के बेहद करीब बताये जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, एक पन्ने के समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर सहमति बनने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है, जो इस लंबे संघर्ष को खत्म करने का रास्ता खोल सकता है।सूत्रों के मुताबिक, इस समझौते में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पर रोक लगाने और कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने का वादा कर सकता है। वहीं अमेरिका ईरान पर लगाये गये आर्थिक प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने और विदेशों में फंसे अरबों डॉलर के फंड को जारी करने पर सहमत हो सकता है। इस संभावित डील का सबसे अहम पहलू स्ट्रेट आॅफ होर्मुज से जुड़ा है। इस जलडमरूमध्य से वैश्विक तेल और गैस की 20 प्रतिशत से अधिक आपूर्ति गुजरती है। समझौते के तहत दोनों पक्ष इस रास्ते पर लगी पाबंदियों को हटाने और जहाजों की आवाजाही सामान्य करने पर सहमत हो सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट में बड़ी राहत मिल सकती है। अमेरिकी प्रशासन को उम्मीद है कि अगले 48 घंटों में ईरान की ओर से अहम जवाब मिल जाएगा। हालांकि अभी तक किसी भी बिंदु पर अंतिम सहमति नहीं बनी है, लेकिन यह पहला मौका है जब दोनों देश इतने करीब पहुंचे हैं। इस समझौते के तहत 30 दिनों की एक वार्ता अवधि भी प्रस्तावित है, जिसमें दोनों पक्ष विस्तृत समझौते पर काम करेंगे। इस दौरान धीरे-धीरे अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटायेगा और ईरान भी जलडमरूमध्य पर लगाये गये प्रतिबंध कम करेगा। परमाणु मुद्दे पर बातचीत भी इस डील का बड़ा हिस्सा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 12 से 15 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाये, जबकि ईरान ने 5 साल का प्रस्ताव दिया है। अंतिम समझौते में इस अवधि को लेकर सहमति बनाना सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसके अलावा, ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण व्यवस्था को स्वीकार कर सकता है, जिसमें संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों द्वारा अचानक जांच भी शामिल होगी। यह अमेरिका की प्रमुख शर्तों में से एक है। इस पूरी प्रक्रिया में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की भूमिका अहम मानी जा रही है, जिसने हाल ही में होर्मुज क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई को सीमित करने का फैसला लिया है। वहीं मार्को रुबियो ने कहा है कि यह एक जटिल प्रक्रिया है और अंतिम समझौते तक पहुंचने में समय लग सकता है। 

मेटा की एआई डील को चीन ने दिया झटका
Published / 2026-04-29 21:08:54
मेटा की एआई डील को चीन ने दिया झटका

मेटा की एआई डील को चीन ने दिया झटकाचीन का मेटा को बड़ा झटका, 2 अरब डॉलर एआई डील पर लगायी रोकएबीएन सेंट्रल डेस्क। चीन ने एक बड़े फैसले में अमेरिकी टेक कंपनी मेटा की 2 अरब डॉलर की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) डील को रोक दिया है। यह डील अक स्टार्टअप मानस के अधिग्रहण से जुड़ी थी, जिसे अब राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के चलते रद कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के प्रमुख आर्थिक नियामक एनडीआरसी ने 2021 में लागू विदेशी निवेश सुरक्षा नियमों के तहत इस सौदे को वापस लेने का आदेश दिया। यह फैसला दिखाता है कि चीन अब अपनी तकनीक, डेटा और टैलेंट को विदेश जाने से रोकने के लिए और सख्त रुख अपना रहा है। हालांकि मानस ने बाद में अपना बेस विदेश में शिफ्ट कर लिया था और उसे अमेरिकी निवेश भी मिला था, लेकिन चीनी अधिकारियों ने माना कि कंपनी के तकनीकी संसाधन, डेटा और रिसर्च अभी भी चीन से जुड़े हुए हैं। इसी वजह से इस डील को संवेदनशील माना गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस फैसले के तहत अब मेटा और मानस के बीच हुए निवेश, शेयर ट्रांसफर और बौद्धिक संपत्ति को वापस करना होगा। अक जैसे सेक्टर में यह प्रक्रिया काफी जटिल मानी जाती है।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ एक डील तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा संकेत है कि चीन अब एआई जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों, खासकर अमेरिकी कंपनियों, को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है। इस फैसले का असर वैश्विक निवेशकों पर भी पड़ सकता है। अब क्रॉस-बॉर्डर टेक डील्स में जोखिम बढ़ेगा और कंपनियां भविष्य में अपने आॅपरेशन, डेटा और रिसर्च को अलग-अलग रखने की कोशिश कर सकती हैं, ताकि ऐसे नियमों से बचा जा सके। कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि दुनिया में टेक्नोलॉजी और डेटा को लेकर प्रतिस्पर्धा और तनाव लगातार बढ़ रहा है, और एआई इस संघर्ष का सबसे अहम केंद्र बन चुका है।

अब तुर्किये में भी बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन
Published / 2026-04-23 22:44:06
अब तुर्किये में भी बच्चों के सोशल मीडिया पर बैन

अब तुर्किये में भी बच्चों के सोशल मीडिया पर बैनअब इस देश ने दिखायी सख्ती: 15 वर्ष से कम बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लगा रहा बैन, संसद में विधेयक पारितएबीएन सेंट्रल डेस्क। कई देशों ने बच्चों की सुरक्षा और आॅनलाइन जोखिम कम करने के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध या सख्त नियम लागू किये हैं। इसी कड़ी में एक और देश का नाम जुड़ गया है। तुर्किये की संसद ने बुधवार देर रात एक विधेयक पारित किया, जिसमें 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया मंचों तक पहुंच सीमित करने का प्रावधान शामिल है। सरकारी मीडिया ने यह जानकारी दी। यह कानून बच्चों और किशोरों को आॅनलाइन खतरनाक गतिविधियों से बचाने की वैश्विक प्रवृत्ति के मद्देनजर लाया गया है। सोशल मीडिया कंपनियों को चेतावनीयह विधेयक ऐसे समय में पारित हुआ है जब एक सप्ताह पहले काहरामानमाराश (दक्षिणी तुर्किये) में हुई गोलीबारी की घटना में 14 वर्षीय एक लड़के ने स्कूल में नौ छात्रों और एक शिक्षक की हत्या कर दी थी। इस घटना में हमलावर की भी मौत हो गयी थी। पुलिस हमलावर की आॅनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही है ताकि हमले के पीछे की मंशा का पता लगाया जा सके। तुर्किये की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के अनुसार नए कानून के तहत सोशल मीडिया कंपनियों को आयु सत्यापन प्रणाली लागू करनी होगी, अभिभावक नियंत्रण (पैरेंटल कंट्रोल) के साधन उपलब्ध कराने होंगे और हानिकारक मानी जाने वाली सामग्री (कंटेंट) पर तेजी से कार्रवाई करनी होगी। अब इस विधेयक को कानून बनने के लिए राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन की मंजूरी की आवश्यकता है, जिन्हें 15 दिनों के भीतर इस पर निर्णय लेना होगा। काहरामानमाराश की घटना के बाद एर्दोआन ने बच्चों की सुरक्षा और निजता के लिए आॅनलाइन जोखिम कम करने की आवश्यकता पर बल दिया था।सोशल मीडिया मंच  गंदगी का अड्डा बने: एर्दोआनएर्दोआन ने सोमवार को टेलीविजन पर अपने एक संबोधन में कहा, हम ऐसे दौर में जी रहे हैं जहां कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म हमारे बच्चों के दिमाग को खराब कर रहे हैं और सोशल मीडिया मंच साफ शब्दों में कहें तो गंदगी का अड्डा बन गये हैं। मुख्य विपक्षी दल रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) ने इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा प्रतिबंधों से नहीं बल्कि अधिकार-आधारित नीतियों से सुनिश्चित की जानी चाहिए। कानून के तहत यूट्यूब, टिकटॉक, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंच 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट बनाने से रोकेंगे और अभिभावक नियंत्रण प्रणाली लागू करेंगे। इसके अलावा, आॅनलाइन गेम कंपनियों को भी तुर्किये में एक प्रतिनिधि नियुक्त करना होगा ताकि वे नये नियमों का पालन सुनिश्चित कर सकें। उल्लंघन की स्थिति में इंटरनेट बैंडविड्थ में कमी और जुमार्ने जैसे दंड का प्रावधान है। तुर्किये सरकार पर हाल में आॅनलाइन मंचों पर प्रतिबंध लगाने के आरोप लगते रहे हैं, खासकर जब ये प्लेटफॉर्म असहमति व्यक्त करने का माध्यम बने हैं। इन देशों में भी सख्तीकई देशों ने बच्चों की सुरक्षा और आॅनलाइन जोखिम कम करने के लिए सोशल मीडिया पर उम्र आधारित प्रतिबंध या सख्त नियम लागू किये हैं। यह सिर्फ तुर्केए तक सीमित नहीं है, बल्कि एक वैश्विक ट्रेंड बनता जा रहा है।आॅस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम लागू किये हैं। आॅस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला विश्व का पहला देश बना। फ्रांस की संसद 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया (टिकटॉक, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट) पर प्रतिबंध लगाने के लिए एक कड़े कानून पर काम कर रही है, जो सितंबर 2026 तक लागू हो सकता है।चाइना सबसे सख्त देशों में शामिल है। वहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया और आॅनलाइन गेमिंग पर समय सीमा तय है और रात में उपयोग पर भी रोक है।ब्रिटेन सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने या सख्त नियम लागू करने पर सक्रिय रूप से विचार कर रही है। ब्रिटेन ने भी सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त कानून के तहत प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ाया है कि वे बच्चों को हानिकारक कंटेंट से बचायें और उम्र सत्यापन लागू करें।

7.4 तीव्रता के भूकंप ने जापान में मचायी तबाही
Published / 2026-04-20 22:54:50
7.4 तीव्रता के भूकंप ने जापान में मचायी तबाही

7.4 तीव्रता के भूकंप ने जापान में मचायी तबाही7.4 तीव्रता के भूकंप से कांपी जापान की धरती, डरे सहमे लोग घरों से भागे बाहरएबीएन सेंट्रल डेस्क। जापान के उत्तरी इलाके में एक बार फिर विनाशकारी भूकंप ने सभी को डरा दिया है। जिस कारण सुनामी का खतरा भी मंडरा रहा है। सोमवार दोपहर करीब 4:53 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर लगभग 1:23 बजे) सानरिकु तट के पास समुद्र के अंदर शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किये गये। भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने तुरंत तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है।शुरूआती आंकड़ों के मुताबिक इस भूकंप की तीव्रता 7.4 दर्ज की गई है। भूकंप का केंद्र समुद्र तल से करीब 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई पर था। कम गहराई पर केंद्र होने के कारण भूकंप के झटके काफी तेज थे और इससे समुद्र की लहरों में हलचल पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।जापान के सार्वजनिक टेलीविजन एनएच ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि उत्तरी जापान के तटीय इलाकों में 3 मीटर (लगभग 10 फीट) तक ऊंची सुनामी की लहरें जल्द ही टकरा सकती हैं। प्रशासन ने तटीय क्षेत्रों, बंदरगाहों और समुद्री तटों के पास रहने वाले लोगों को तुरंत घर खाली कर सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने का निर्देश दिया है। चेतावनी में कहा गया है कि सुनामी की पहली लहर के बाद और भी कई लहरें आ सकती हैं जो पहली लहर से ज्यादा खतरनाक हो सकती हैं।सरकार और एजेंसियां अलर्ट परभूकंप के बाद जापानी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। सानरिकु तट के पास स्थित रिहायशी इलाकों और औद्योगिक इकाइयों में नुकसान का आकलन किया जा रहा है। फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान की तत्काल खबर नहीं है लेकिन सुनामी के खतरे को देखते हुए अगले कुछ घंटे बेहद संवेदनशील बताए जा रहे हैं।

ट्रंप का एलान : डील मानो, नहीं तो अंधेरे में डुब जाएगा ईरान
Published / 2026-04-19 21:29:19
ट्रंप का एलान : डील मानो, नहीं तो अंधेरे में डुब जाएगा ईरान

ट्रंप की आखिरी चेतावनी: राष्ट्रपति बोले- डील मानो, वरना अंधेरे में डूबेगा ईरान; पाकिस्तान में कल फिर वार्ताएबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे आक्रामक रुख अख्तियार किया है। उन्होंने ईरान को सैन्य तबाही की चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान ने मौजूदा समझौते की शर्तों को स्वीकार नहीं किया, तो अमेरिका उसके तमाम पावर प्लांट और पुलों को जमींदोज कर देगा।सीजफायर के उल्लंघन का आरोपट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने होर्मुज में गोलीबारी कर मौजूदा सीजफायर समझौते की धज्जियां उड़ा दी हैं। उन्होंने बताया कि ईरानी हमलों का निशाना फ्रांस और ब्रिटेन के जहाज बने हैं। ट्रंप के मुताबिक, ईरान का यह कदम उसकी हताशा को दर्शाता है।इस्लामाबाद में निर्णायक बातचीतइस तनाव के बीच ट्रंप ने कूटनीतिक रास्ते का आखिरी विकल्प भी खुला रखा है। अमेरिकी प्रतिनिधियों का एक दल कल शाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लाबाद पहुंच रहा है। वहां ईरान के साथ निर्णायक बातचीत होनी है। ट्रंप ने कहा कि यह ईरान के पास आखिरी मौका है।आर्थिक नाकेबंदी और नुकसानईरान की ओर से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी ने उसे पहले ही बंद कर रखा है। इससे ईरान को रोजाना 50 करोड़ डॉलर का भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के जहाज अब तेल और माल लोडिंग के लिए अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का के बंदरगाहों का रुख कर रहे हैं, जिससे अमेरिका को कोई नुकसान नहीं है।ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा कि पिछले 47 वर्षों से जो काम किसी राष्ट्रपति ने नहीं किया, उसे अब वो अंजाम देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर डील नहीं हुई, तो ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह कर दिया जाएगा।ईरान ने किया पाकिस्तान वार्ता में जाने से इनकारइस बीच समाचार एजेंसी तसनीम की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने पाकिस्तान में होने वाली आगामी राजनयिक वार्ता में अपना प्रतिनिधिमंडल भेजने से साफ इनकार कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से ईरान के बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकेबंदी प्रभावी रहेगी, तब तक बातचीत की कोई मेज नहीं सजेगी।

भारतीय टैंकर पर होर्मुज में फायरिंग के बाद मची हलचल
Published / 2026-04-18 21:05:40
भारतीय टैंकर पर होर्मुज में फायरिंग के बाद मची हलचल

होर्मुज में भारतीय टैंकर पर फायरिंग: एमईए ने ईरानी राजदूत को किया तलब, दिल्ली में मची हलचल ओमान के पास भारतीय तेल टैंकर पर फायरिंग की घटना से होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। जानें कैसे इस घटना ने भारत और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत से जुड़ी एक बड़ी घटना सामने आई है। ओमान के पास एक भारतीय-ध्वज वाले कच्चे तेल के टैंकर पर ईरानी नौसेना द्वारा फायरिंग किये जाने की खबर है। यह टैंकर करीब 20 लाख बैरल इराकी तेल लेकर जा रहा था। घटना के बाद क्षेत्र में स्थिति और तनावपूर्ण हो गयी है। टैंकर पर फायरिंग, बड़ा खतरा टला रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह विशाल तेल टैंकर होर्मुज के पास से गुजर रहा था तभी उस पर फायरिंग की गयी। हालांकि अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आयी है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच टकराव जारी है और होर्मुज क्षेत्र अत्यधिक संवेदनशील बना हुआ है। दो भारतीय जहाजों को लौटना पड़ा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना के बाद दो भारतीय-ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षा कारणों से वापस लौटना पड़ा। यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। इससे साफ है कि समुद्री मार्ग पर स्थिति सामान्य नहीं है और जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। भारत सरकार हरकत में, राजदूत तलब घटना के बाद भारत सरकार ने तुरंत कूटनीतिक स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत को तलब कर इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। सरकार जल्द ही इस पर आधिकारिक बयान जारी कर सकती है। होर्मुज में बढ़ता तनाव, वैश्विक असर संभव होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या बाधा का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के चलते पहले ही इस क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई थी, और अब भारतीय जहाज से जुड़ी यह घटना स्थिति को और गंभीर बना रही है। भारत-ईरान संपर्क पर सवाल हाल ही में ईरान की ओर से कहा गया था कि भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया जायेगा और इसको लेकर दोनों देशों के बीच संपर्क भी बना हुआ है। इसके बावजूद हुई यह घटना कई सवाल खड़े करती है और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती है।

म्यांमार जा रहा जहाज अंडमान सागर में पलटा, 250 से ज्यादा लोग लापता
Published / 2026-04-17 20:50:14
म्यांमार जा रहा जहाज अंडमान सागर में पलटा, 250 से ज्यादा लोग लापता

अंडमान सागर में बड़ा हादसा: म्यांमार जा रहा जहाज पलटा, 250 से ज्यादा लोग लापता म्यांमार जा रहा एक जहाज अचानक अंडमान सागर में पलट गया, जिसमें रोहिंग्या रिफ्यूजी और बांग्लादेशी नागरिक सवार थे। बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के अधिकारियों ने कन्फर्म किया है। एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण सभी की नजरें इन दिनों समुद्री मार्ग खासकर होर्मुज स्ट्रेट की तरफ टिकी है। लेकिन इस बीच एक और बड़ी खबर सामने आयी है। अंडमान सागर में एक दर्दनाक हादसा हो गया, म्यांमार जा रही शरणार्थियों से भरी एक जहाज अचानक पलट गया। इस नाव में रोहिंग्या रिफ्यूजी और बांग्लादेशी नागरिक सवार थे। शुरूआती जानकारी के मुताबिक, इस घटना में 250 से ज्यादा लोग लापता हैं, जिससे चिंता और बढ़ गयी है। बांग्लादेश कोस्ट गार्ड ने दी जानकारी बांग्लादेश कोस्ट गार्ड के मुताबिक, 9 अप्रैल को समुद्र में बहते हुए नौ लोगों को बचाया गया। इनमें तीन रोहिंग्या और छह बांग्लादेशी नागरिक थे। इन्हें बांग्लादेश के जहाज एमटी मेघना प्राइड ने सुरक्षित निकाला। अधिकारियों ने बताया कि बचाये गये लोगों में आठ पुरुष और एक महिला शामिल थे। बाद में इन्हें टेकनाफ लाकर पुलिस को सौंप दिया गया। यह रेस्क्यू जहाज के क्रू ने खुद किया, क्योंकि हादसा बांग्लादेश के समुद्री इलाके के बाहर हुआ था। कैसे पलटी जहाज? जानिये कारण प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जहाज में ज्यादा भीड़ और खराब मौसम इस हादसे की वजह हो सकते हैं। वहीं, यूएनएचसीआर और आईओएम ने बताया कि यह ट्रॉलर कॉक्स बाजार के टेकनाफ से बड़ी संख्या में लोगों को लेकर मलेशिया जा रहा था। एजेंसियों का कहना है कि नाव में ज्यादा भीड़ थी और समुद्र में तेज हवाएं व खराब मौसम था। इसी वजह से नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह डूब गयी। अभी तक यह साफ नहीं है कि हादसा ठीक कब हुआ और खोज-बचाव अभियान को लेकर भी कोई पक्की जानकारी नहीं दी गयी है। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने बताया कि कई लोग विदेश में नौकरी और बेहतर जिंदगी के झूठे वादों में फंसकर ऐसे खतरनाक सफर पर निकल पड़ते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। बता दें दुनिया भर से मदद की मांग भी तेज हो गयी है। यूएनएचसीआर और आईओएम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए ज्यादा फंड और सहायता देने की अपील की है। बांग्लादेश में इस समय 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या रह रहे हैं, जो म्यांमार से भागकर आये हैं। एजेंसियों ने कहा कि जब तक इन लोगों के लिए स्थायी समाधान और बेहतर हालात नहीं बनते, तब तक ऐसे जोखिम भरे सफर जारी रहेंगे और हादसे होते रहेंगे। 

अमेरिकी नाकेबंदी को ठेंगा: होर्मुज पार कर गया ईरान का ब्लैकलिस्ट तेल टैंकर, ट्रैकिंग सिस्टम भी रखे चालू
Published / 2026-04-15 20:50:39
अमेरिकी नाकेबंदी को ठेंगा: होर्मुज पार कर गया ईरान का ब्लैकलिस्ट तेल टैंकर, ट्रैकिंग सिस्टम भी रखे चालू

एबीएन सेंट्रल डेस्क। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच  अमेरिका द्वारा ब्लैकलिस्ट एक विशाल क्रूड आयल टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी के बावजूद स्ट्रेट आफ हॉर्मुज को पार कर सुरक्षित ईरान के तट तक पहुंच गया। ईरान के इस दावे ने अमेरिका की समुद्री रणनीति पर सवाल खड़े कर दिये हैं। भारत में मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास के अनुसायह वेरी लार्ज कू्रड कैरियर अपनी पूरी यात्रा के दौरान ट्रैकिंग सिस्टम चालू रखे हुए था। ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि जहाज ने अपनी लोकेशन छिपाने की कोई कोशिश नहीं की और खुलेआम अंतर्राष्ट्रीय जलक्षेत्र से होकर गुजरा। दूतावास के मुताबिक, यह सुपरटैंकर लगभग 20 लाख बैरल तक कच्चा तेल ले जाने में सक्षम है। इसके बावजूद अमेरिकी नाकेबंदी इसे रोकने में असफल रही और जहाज बिना किसी नुकसान के अपने गंतव्य तक पहुंच गया। इससे पहले अमेरिका ने दावा किया था कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी नाकेबंदी लागू कर दी है। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका जायेगा। इन जहाजों में वो जहाज भी शामिल हैं जिन्होंने ईरान को किसी प्रकार का शुल्क (टोल) दिया है। अमेरिका का कहना था कि इस नाकेबंदी के जरिए वह ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना चाहता है, क्योंकि ईरान का लगभग 90% अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। ईरान के इस दावे से यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह प्रभावी है या उसमें खामियां हैं। अगर एक ब्लैकलिस्टेड जहाज खुले तौर पर इस मार्ग से गुजर सकता है, तो यह अमेरिका की रणनीतिक पकड़ पर बड़ा सवाल है।

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