एबीएन सेंट्रल डेस्क। तेल आपूर्ति के मामले में भारत फिलहाल सुरक्षित है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों के बाद उसने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल रास्ता है, जहां से वैश्विक स्तर पर करीब 20 फीसदी तेल और गैस गुजरता है।
ईरान की सरकारी मीडिया ने 28 फरवरी को बताया कि जवाबी कार्रवाई में इस रास्ते को बंद कर दिया गया है। ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने जहाजों को चेतावनी दी है कि कोई भी जहाज यहां से नहीं गुजर सकता। लेकिन भारत के अधिकारी और एक्सपर्ट कहते हैं कि निकट भविष्य में तेल की कमी नहीं होगी।
देश के पास कच्चे तेल का स्टॉक इतना है कि कम से कम 10 दिनों की जरूरत पूरी हो सकती है। इसके अलावा तैयार पेट्रोल, डीजल जैसे ईंधन का स्टॉक भी 5 से 7 दिनों या इससे ज्यादा का है। रिफाइनरियों के टैंकों में कच्चा तेल और ईंधन भरा पड़ा है। इसलिए अगर यह बंदी कुछ दिनों की रही तो भारत पर असर कम होगा।
भारत अपनी 88 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत आयात करता है। इसमें से लगभग आधा हिस्सा, यानी 2.5 से 2.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन, होर्मुज से होकर आता है। ये तेल मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, वअए और कुवैत से आता है। इसी रास्ते से भारत का 60 फीसदी एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) और लगभग सारा एलपीजी (रसोई गैस) भी आता है।
कतर और यूएई जैसे देशों से गैस इसी रास्ते से पहुंचती है। अगर यह बंदी लंबी चली तो समस्या बढ़ सकती है। खासकर एलपीजी और एलएनजी पर असर पड़ सकता है क्योंकि इनके लिए लंबे अनुबंध होते हैं और स्पॉट मार्केट में ज्यादा विकल्प नहीं मिलते। लेकिन कच्चे तेल के लिए विकल्प ज्यादा हैं।
अधिकारी बताते हैं कि लंबे समय तक बंदी हुई तो भारत अपनी खरीदारी बदल सकता है। रूस से तेल की खरीदारी बढ़ाई जा सकती है। पहले अमेरिकी दबाव में रूस से कम खरीदा गया था, लेकिन अब जरूरत पड़ने पर फिर से मॉस्को से खरीद सकते हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि मध्य पूर्व से जहाज को भारत पहुंचने में 5 दिन लगते हैं, जबकि रूस से कम से कम एक महीना।
इसलिए आर्डर पहले से प्लान करने पड़ेंगे। इसके अलावा वेनेजुएला, ब्राजील और अफ्रीका जैसे देशों से भी तेल लिया जा सकता है। दुनिया में कुल मिलाकर पर्याप्त तेल है। साथ ही भारत के पास स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी हैं, जो एक हफ्ते की जरूरत पूरी कर सकते हैं।
इस घटना का सबसे तुरंत असर तेल की कीमतों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड पिछले हफ्ते करीब सात महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया, लगभग 73 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। साल की शुरुआत से अब तक करीब 16 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है।
ट्रेडर्स अगले हफ्ते और ज्यादा उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं। कुछ मॉडल्स कहते हैं कि अगर आपूर्ति में दिक्कत हुई तो कीमत 80 डॉलर तक जा सकती है। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में बढ़ोतरी, फ्रेट और इंश्योरेंस की लागत बढ़ना सबसे बड़ा खतरा है। लेकिन लंबे समय तक पूरी तरह बंदी होने की संभावना कम है।
केप्लर के एक्सपर्ट सुमित रितोलिया कहते हैं कि भारत की विविध स्रोतों से खरीदारी, रूस का विकल्प और स्टॉक के बफर से भौतिक कमी का खतरा कम है। मुख्य समस्या कीमतों में उतार-चढ़ाव और उसका आर्थिक असर होगा। सरकार स्थिति पर नजर रख रही है और वैकल्पिक रास्ते तलाश रही है। फिलहाल कोई पैनिक नहीं है, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो गैस और एलपीजी की कीमतें आसमान छू सकती हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित कई शहरों में शुक्रवार दोपहर (27 फरवरी) को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 रही।
भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग दहशत के चलते घरों से बाहर आ गए। जानकारी के मुताबिक कोलकाता में दोपहर करीब 1.20 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो रिपोट्स के अनुसार बांग्लादेश में केंद्रित भूकंप का नतीजा था।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) ने बताया कि शुक्रवार को बांग्लादेश में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। ईएमएससी ने बताया कि भूकंप का केंद्र 35 किलोमीटर (21.75 मील) की गहराई पर था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल के कोलकाता सहित कई शहरों में शुक्रवार दोपहर (27 फरवरी) को भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। बताया जा रहा है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.4 रही।
भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग दहशत के चलते घरों से बाहर आ गए। जानकारी के मुताबिक कोलकाता में दोपहर करीब 1.20 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए, जो रिपोट्स के अनुसार बांग्लादेश में केंद्रित भूकंप का नतीजा था।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूरोपीय भूमध्यसागरीय भूकंपीय केंद्र (ईएमएससी) ने बताया कि शुक्रवार को बांग्लादेश में 5.4 तीव्रता का भूकंप आया। ईएमएससी ने बताया कि भूकंप का केंद्र 35 किलोमीटर (21.75 मील) की गहराई पर था।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी उच्चतम न्यायालय द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापक प्रभाव वाले वैश्विक टैरिफ को निरस्त करने संबंधी ऐतिहासिक फैसले के केंद्र में एक भारतीय मूल के वकील हैं, जिन्होंने अमेरिका की शीर्ष अदालत में इन शुल्कों की अवैधता के खिलाफ दलील दी।
भारतीय प्रवासी के पुत्र और राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में पूर्व अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल रहे नील कात्याल ने छोटे व्यवसायों की ओर से इस महत्वपूर्ण टैरिफ मामले में बहस की और जीत हासिल की। फैसला आने के तुरंत बाद कात्याल ने एक्स पर पोस्ट किया, विजय। कात्याल ने एमएस नाउ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, आज जो कुछ हुआ है वह अमेरिकी प्रणाली में बेहद खास है।
मैं प्रवासी माता-पिता का बेटा हूं, मैं अदालत में गया और अमेरिका के छोटे व्यवसायों की ओर से यह दलील दी, देखिए, राष्ट्रपति अवैध तरीके से काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, मैं अपना पक्ष रखने में सक्षम था, उन्होंने मुझसे बेहद कठिन सवाल पूछे। यह बहुत ही तीखी और गहन मौखिक बहस थी और अंत में उन्होंने मतदान किया और हम जीत गये।
उन्होंने आगे कहा, इस देश की यही बात असाधारण है। हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था है जो स्वयं को सुधारती है, जो हमें यह कहने की अनुमति देती है आप दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन फिर भी आप संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लुला दा सिल्वा के साथ उनकी बातचीत से दोनों देशों की रणनीति साझेदारी में नयी ऊर्जा आयी है और दोनों पक्षों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर (करीब 1,814.5 अरब रुपये) के पार ले जाने की प्रतिबद्धता जतायी है।
श्री मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत आये दा सिल्वा के साथ शनिवार को यहां द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त वक्तव्य में कहा कि श्री दा सिल्वा की यात्रा ने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी में नया जोश भर दिया है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति दा सिल्वा की यात्रा ने हमारी रणनीतिक साझेदारी में नयी ऊर्जा का संचार किया है। ब्राजील लातिन अमेरिका में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। हम अगले पांच वर्षों में अपने द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर (करीब 1,814.5 अरब रुपये) से आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा व्यापार केवल एक आंकड़ा नहीं है, यह विश्वास का प्रतिबिंब है।
श्री मोदी ने कहा कि श्री दा सिल्वा के साथ आया बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल इन संबंधों में बढ़ते भरोसे को दिखाता है। उन्होंने कहा कि भारत-मर्कोसुर व्यापार समझौते का विस्तार आर्थिक सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सुपर कंप्यूटर, सेमीकंडक्टर और ब्लॉकचेन जैसे क्षेत्रों में अपने सहयोग को भी हम प्राथमिकता दे रहे हैं। हम दोनों देश मानते हैं कि प्रौद्योगिकी समावेशी होनी चाहिए और के इसे साझा प्रगति के पुल की तरह काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा सहयोग हमारे संबंधों का एक मजबूत स्तंभ रहा है। हाइड्रोकार्बन के साथ-साथ हम नवीकरणीय ऊर्जा , इथेनाल मिश्रमण, सतत विमान ईंधन जैसे अनेक क्षेत्रों में भी सहयोग को और अधिक गति दे रहे हैं। ग्लोबल बायो-फ्यूल अलायंस में ब्राजील की सक्रिय भागीदारी, हरित भविष्य के प्रति साझा संकल्प को दर्शाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में हमारा सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ के लिए भी महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि दोनों देश ब्राजील में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (डीपीआई) के लिए एक सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) की सह-अध्यक्षता करने के ब्राजील के प्रस्ताव का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मैं इस पहल के लिए राष्ट्रपति दा सिल्वा को बधाई देता हूं।
राष्ट्रपति दा सिल्वा और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए श्री मोदी ने कहा कि वह पिछले साल अपनी ब्राजील यात्रा के दौरान मिले गर्मजोशी भरे स्वागत की दिल से सराहना करते हैं। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में श्री दा सिल्वा के नेतृत्व को बेहद अहम बताया। हैदराबाद हाउस में हुई वार्ता के बाद दोनों नेताओं की मौजूदगी में भारत और ब्राजील के बीच कई समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किये गये।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, भारत-ब्राजील संबंधों को लंबे समय से राष्ट्रपति दा सिल्वा की दृष्टि और नेतृत्व का लाभ मिला है। हाल के वर्षों में मुझे उनसे कई बार मिलने का अवसर मिला है और हर मुलाकात के दौरान मैंने भारत के प्रति उनकी गहरी मित्रता और विश्वास को महसूस किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने भारतीय छात्रों के लिए बड़ी राहत का ऐलान करते हुए कहा है कि फ्रांस वीज़ा और सोर्सिंग प्रक्रिया को सरल बनाएगा और अधिक शैक्षणिक पाठ्यक्रम इंग्लिश में उपलब्ध कराएगा। यह घोषणा उन्होंने नई दिल्ली में भारत-फ्रांस शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग पर उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान की।
AIIMS परिसर में संबोधन के दौरान मैक्रों ने कहा कि फिलहाल हर साल लगभग 10,000 भारतीय छात्र फ्रांस जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मिलकर यह संख्या 2030 तक बढ़ाकर 30,000 प्रति वर्ष करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए फ्रांस की ओर से वीज़ा प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक और छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप बनाया जाएगा।
इस अवसर पर मैक्रों और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री JP Nadda ने All India Institute of Medical Sciences में Indo-French Campus on AI in Global Health का उद्घाटन किया। यह पहल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हेल्थकेयर समाधान, रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने की दिशा में अहम मानी जा रही है।
मैक्रों ने भरोसा दिलाया कि फ्रांस आने वाले भारतीय छात्रों को विश्वस्तरीय शिक्षण, अत्याधुनिक रिसर्च सेंटर्स और मजबूत इंटर-डिसिप्लिनरी सहयोग मिलेगा। उन्होंने कहा कि फ्रांस विभिन्न विषयों में इंग्लिश-टॉट प्रोग्राम्स की पेशकश करेगा ताकि भारतीय छात्रों के लिए उच्च शिक्षा और अधिक सुलभ हो सके। इंडो-फ्रेंच AI कैंपस का उद्देश्य न केवल ग्लोबल हेल्थ में AI के उपयोग को आगे बढ़ाना है, बल्कि दोनों देशों के बीच अकादमिक उत्कृष्टता, छात्र आदान-प्रदान और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को भी नई मजबूती देना है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच अचानक बंद हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म अब देश के भीतर काम नहीं कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन वेबसाइट्स के डोमेन नाम रूस के राष्ट्रीय डोमेन नेम सिस्टम (DNS) से हटा दिए गए हैं।
इससे पहले रूस में कुछ प्लेटफॉर्म की स्पीड धीमी कर दी जाती थी, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। मौजूदा कदम के तहत ये वेबसाइटें पूरी तरह अदृश्य हो गई हैं। जब कोई यूजर इन साइट्स को खोलने की कोशिश करता है तो सिस्टम संबंधित IP एड्रेस खोज नहीं पाता। नतीजतन स्क्रीन पर एरर मैसेज दिखाई देता है कि ऐसा डोमेन मौजूद ही नहीं है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ही नहीं बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों की वेबसाइट्स भी प्रभावित हुई हैं। इनमें बीबीसी, डॉउचा वेले, रेडियो फ्री यूरोप रेडियो लिबर्टी जैसी साइट्स शामिल हैं। इसके अलावा गुमनाम ब्राउजिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला टॉर ब्राउजर (Tor Browser) भी ब्लॉक कर दिया गया है।
राष्ट्रीय DNS सिस्टम के तहत सख्ती
रूस में इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को देश के राष्ट्रीय DNS सिस्टम का इस्तेमाल करना अनिवार्य है। यह सिस्टम Roskomnadzor नामक सरकारी एजेंसी की निगरानी में काम करता है, जो सॉवरेन इंटरनेट कानून के तहत इंटरनेट कंट्रोल को लागू करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 से ही रूस ने Google DNS जैसी वैकल्पिक DNS सेवाओं के उपयोग को भी धीरे-धीरे सीमित करना शुरू कर दिया था। अब ताजा कदम को इंटरनेट नियंत्रण की दिशा में एक बड़ा और कड़ा फैसला माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्रवाई रूस में विदेशी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और मीडिया आउटलेट्स की पहुंच को लगभग खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे देश के अंदर रहने वाले लोग कई वैश्विक सेवाओं और खबरों के स्रोतों से कट गए हैं।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। एक नयी रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई।
2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की उजली किरण माना गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है।
इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (एसआईएफसी) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास कोई विकास योजना नहीं है और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है।
2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गयी, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गयी और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गयीं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा।
2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गयी, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाये तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है। भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई।
2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गयी, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गयी है।
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