एबीएन एडिटोरियल डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने इसी सप्ताह यूक्रेन को ऐसे हमलों के लिए मध्यम दूरी की अमेरिकी मिसाइलों का उपयोग करने की मंजूरी दे दी है, जिसे मॉस्को ने एक वृद्धि के रूप में वर्णित किया है जो वाशिंगटन को युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से लड़ने वाला बना देगा और तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा। यह युद्ध के 1,000 दिनों को चिह्नित करने के लिए चौकसी की योजना के बीच आया, जिसमें मोर्चे पर थके हुए सैनिक थे, कीव हवाई हमलों से घिरा हुआ था और डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में वापस आने पर पश्चिमी समर्थन के भविष्य के बारे में संदेह था।
मॉस्को ने कहा कि यूक्रेन ने पहली बार रूसी क्षेत्र पर हमला करने के लिए अमेरिकी एटीएसीएमएस मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जो युद्ध के 1,000वें दिन एक बड़ी वृद्धि है। रूस ने कहा कि उसकी सेना ने ब्रांस्क क्षेत्र में एक सैन्य सुविधा पर दागी गयी छह मिसाइलों में से पांच को मार गिराया, जबकि एक का मलबा सुविधा पर गिरा, जिससे कोई हताहत या क्षति नहीं हुई। यूक्रेन ने कहा कि उसने रूस के लगभग 110 किमी अंदर एक रूसी हथियार डिपो पर हमला किया और द्वितीयक विस्फोट किये। इसमें यह नहीं बताया गया कि उसने किन हथियारों का इस्तेमाल किया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने इसी सप्ताह यूक्रेन को ऐसे हमलों के लिए मध्यम दूरी की अमेरिकी मिसाइलों का उपयोग करने की मंजूरी दे दी है, जिसे मॉस्को ने एक वृद्धि के रूप में वर्णित किया है जो वाशिंगटन को युद्ध में प्रत्यक्ष रूप से लड़ने वाला बना देगा और तुरंत जवाबी कार्रवाई करेगा। यह युद्ध के 1,000 दिनों को चिह्नित करने के लिए चौकसी की योजना के बीच आया, जिसमें मोर्चे पर थके हुए सैनिक थे, कीव हवाई हमलों से घिरा हुआ था, और डोनाल्ड ट्रम्प के व्हाइट हाउस में वापस आने पर पश्चिमी समर्थन के भविष्य के बारे में संदेह था।
सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी मिसाइलें यूक्रेन को उस क्षेत्र की रक्षा करने में मदद कर सकती हैं, जिस पर उसने रूस के अंदर सौदेबाजी के साधन के रूप में कब्जा कर लिया है, लेकिन इससे 33 महीने पुराने युद्ध का रुख बदलने की संभावना नहीं है। जब ट्रम्प दो महीने में सत्ता में लौटेंगे, तो अमेरिका की स्थिति में संभावित रूप से अधिक परिणामी बदलाव की उम्मीद है, उन्होंने बिना बताए युद्ध को जल्द खत्म करने का वादा किया है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। पाकिस्तान जानता है कि अमरीका के साथ उसके संबंध अच्छे नहीं हैं और नयी सरकार में ये और ये और भी खराब हो सकते हैं, क्योंकि ट्रंप अमरीका फर्स्ट नीति के प्रबल समर्थक हैं। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आयात पर उच्च शुल्क लगायेंगे। अमरीका, पाकिस्तानी वस्तुओं, विशेष रूप से कपड़े का सबसे बड़ा आयातक है।
अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव में डॉनल्ड ट्रम्प की जीत के बाद पाकिस्तान की चिंता बढ़ गयी है। उसे डर है कि नयी अमरीकी सरकार उसकी गतिविधियों पर अब तीखी नजर रखेगी और पहले की तरह उदारता नहीं बरतेगी। उसकी चिंता स्वाभाविक है और इसके खास कारण भी हैं। ट्रंप के पहले कार्यकाल के अंत के बाद पिछले चार साल में भू-राजनीतिक स्थिति नाटकीय रूप से बदल चुकी है।
अगस्त 2021 में पाकिस्तान के इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण मोड़ आया था। अमरीकी सेना की अफगान भूमि से शीघ्र वापसी में पाकिस्तान ने तालिबान की मदद की थी। उस समय के प्रधानमंत्री इमरान खान ने दावा किया था कि अफगान जनता ने जंजीरों से मुक्ति पा ली है। यह ऐतिहासिक तथ्य है कि अगस्त 2021 में बाइडन प्रशासन की निगरानी के अधीन जो हुआ, वह डॉनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में हुए दोहा समझौते की परिणति थी।
दोहा समझौते के रूप में प्रसिद्ध अमरीका और तालिबान के बीच हस्ताक्षरित यह शांति समझौता 29 फरवरी 2020 को कतर के दोहा में हुआ था, जिसका उद्देश्य 2001-2021 के अफगान युद्ध का अंत करना था। इमरान खान ने इस उम्मीद के साथ तालिबान को शांति समझौते में शामिल होने के लिए राजी करने में अमरीका और डॉनल्ड ट्रंप की मदद की थी कि अफगानिस्तान में दोस्ताना तालिबानी निजाम स्थापित होने से पाकिस्तान को भू-रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साथ ही वाशिंगटन के साथ संबंधों में सुधार होगा।
यह पाकिस्तान के लिए एक सपने जैसा था, जो जल्दी ही कड़वा साबित हुआ। अमरीका ने पाकिस्तान का हाथ थामने से इनकार कर दिया और अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी इस्लामाबाद के लिए आपदा साबित हुई, क्योंकि तालिबान समर्थित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान प्रांतों में सुरक्षा बलों और नागरिकों पर दुस्साहसी आतंकी हमले शुरू कर दिए। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए एक दु:स्वप्न बन गई है, क्योंकि उसे राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा करने वाले इस संकट से बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गयी है कि पाकिस्तान के सदाबहार दोस्त चीन ने अपने नागरिकों को टीटीपी और अन्य समूहों द्वारा निशाना बनाये जाने पर पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जतायी है। उसने पाकिस्तान सरकार और सैन्य बलों पर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर काम कर रहे चीनी नागरिकों के लिए सुरक्षित माहौल मुहैया करवाने में विफल रहने का आरोप लगाया है।
बताया जा रहा है कि बीजिंग ने यह भी सुझाव दिया है कि वह पाकिस्तान में कार्यरत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी सेना तैनात कर सकता है, जो इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह विफल रहा है। 20 जनवरी, 2025 को डॉनल्ड ट्रंप के 47वें अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण करने के साथ ही पाकिस्तान की चिंता कई गुना बढ़ जायेगी। पाकिस्तान जानता है कि अमरीका के साथ उसके संबंध अच्छे नहीं हैं और नई सरकार में ये और खराब हो सकते हैं, क्योंकि ट्रम्प अमरीका फर्स्ट नीति के प्रबल समर्थक हैं।
ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह आयात पर उच्च शुल्क लगाएंगे। अमरीका, पाकिस्तानी वस्तुओं, विशेष रूप से कपड़े, का सबसे बड़ा आयातक है। ऐसे में पाकिस्तान को अमरीका के भू-राजनीतिक समीकरणों में अपनी जगह खोने का डर है। साथ ही निर्यात राजस्व व आर्थिक मदद में कटौती का डर सता रहा है। डॉनल्ड ट्रंप भारत के जांचे-परखे मित्र हैं। अमरीका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने 5 नवंबर को अपनी जीत के पहले ही दिन फोन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई संदेश लिया। वस्तुत: मोदी उन विश्व नेताओं में शामिल थे, जिनकी कॉल ट्रंप ने पहले-पहल सुनी। यह दोनों नेताओं और उनके देशों के संबंधों में गर्मजोशी को रेखांकित करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सभी क्षेत्रों में भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ा है। अमरीका में चाहे ओबामा, ट्रंप, बाइडन या अब फिर से ट्रंप का प्रशासन हो, रणनीतिक रूप से भारत की ओर झुकाव रखता है। अमरीका और भारत क्वाड, हिंद-प्रशांत क्षेत्र, जी-20 और कई अन्य वैश्विक मंचों पर रणनीतिक साझेदारी रखते हैं। यह विश्व मंच पर उभरते नए संबंध हैं, जहां अमरीका और भारत गुटीय राजनीति और कूटनीति का हिस्सा न होते हुए भी साथ आ रहे हैं।
भारत ने रूस पर एक स्वतंत्र और वाशिंगटन से विपरीत रुख अपनाया, इसके बावजूद दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध कायम हैं। अमरीका ने पाकिस्तान के मित्र चीन के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने की धमकी दी है। इसलिए पाकिस्तान में यह समझा जा रहा है कि अमरीका उसे चीन के चश्मे से देखेगा जो उसके लिए अच्छा नहीं है और भारत के नजरिए से भी देखेगा, यह भी उसके लिए हानिकारक है। पाकिस्तान विश्व मंच पर और भी अलग-थलग पड़ सकता है, विशेष रूप से दक्षिण एशियाई क्षेत्र में उसे अधिक अलगाव का सामना करना पड़ सकता है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को अमेरिका को चेतावनी जारी करते हुए हस्ताक्षरित नयी परमाणु नीति में स्पष्ट कर दिया है कि यूक्रेन द्वारा पश्चिमी रॉकेट्स के उपयोग पर रूस परमाणु प्रतिक्रिया दे सकता है। यह बयान क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया।
पेस्कोव का यह बयान अमेरिका द्वारा यूक्रेन को लंबी दूरी की एमजीएम-140 आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (एटीएसीएमएस) का उपयोग रूस के कुर्स्क क्षेत्र में करने की मंजूरी के बाद आया। पुतिन द्वारा हस्ताक्षरित इस नई नीति में कहा गया है कि यदि कोई परमाणु शक्ति किसी गैर-परमाणु देश को रूस के खिलाफ समर्थन देती है, तो यह रूस के लिए परमाणु प्रतिक्रिया का कारण बन सकती है।
यूक्रेन पर हमले के दौरान रूस कई बार यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के खिलाफ परमाणु हथियार उपयोग की धमकी दे चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन सहित पश्चिमी नेताओं ने यह स्पष्ट किया है कि रूस और नाटो के बीच सीधा संघर्ष टालना उनकी प्राथमिकता है, क्योंकि इससे परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ सकता है।
रूस की इस नयी नीति और पेस्कोव के बयान ने पश्चिमी देशों और यूक्रेन के साथ पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पश्चिमी देश इस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं और यह स्थिति वैश्विक शांति को किस हद तक प्रभावित करती है। बता दें कि पुतिन ने देश की परमाणु नीति में बड़े बदलाव की घोषणा की है।
उन्होंने कहा है कि रूस पर पारंपरिक मिसाइलों से हमला होने की स्थिति में, खासकर जब उसे किसी परमाणु शक्ति का समर्थन प्राप्त हो, तो रूस परमाणु हथियारों के इस्तेमाल पर विचार कर सकता है। रूस की इस नई नीति ने विश्व में परमाणु खतरे की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। पुतिन ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस अपनी सुरक्षा पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
यह नीति न केवल अमेरिका, बल्कि उन सभी देशों के लिए चेतावनी है, जो यूक्रेन को सैन्य सहायता दे रहे हैं। रूस और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव से विश्व शांति को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। अब यह देखना होगा कि यह स्थिति वैश्विक राजनीति को किस दिशा में ले जाती है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिकी चुनाव में जीत के बाद 47वें राष्ट्रपति बनने जा रहे डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी करते हुए अमेरिकावासियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि आज से पहले ऐसा नजारा नहीं देखा। हम अपने बॉर्डर को मजबूत करेंगे। देश की सभी समस्याएं दूर करेंगे और उनका हर पल अमेरिका के लिए है।
ट्रंप ने कहा, 47वें राष्ट्रपति के रूप में मैं हर दिन आपके लिए लड़ूंगा। यह अमेरिका के लिए एक शानदार जीत है, जो अमेरिका को फिर से महान बनायेगी। उन्होंने आगे कहा, मैं आपके परिवार और भविष्य के लिए लड़ूंगा। हमें स्विंग स्टेट के मतदाताओं का भी साथ मिला। अगले चार साल अमेरिका के लिए स्वर्णिम होने वाले हैं। जनता ने हमें बहुत मजबूत जनादेश दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप के बाद, अमेरिका के उप राष्ट्रपति उम्मीदवार जेडी वेंस ने भी रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों को संबोधित किया। जेडी वेंस ने अपने भाषण में कहा, मैं सभी को बधाई देना चाहता हूं। अमेरिका के इतिहास में यह एक महान राजनीतिक वापसी है। यह अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक वापसी भी है। गौरतलब है कि जेडी वेंस ने अपने क्षेत्र में भी जीत हासिल की है, और उनकी यह जीत रिपब्लिकन पार्टी के लिए एक और अहम उपलब्धि मानी जा रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की जीत हो गयी है, ऐसा फॉक्स न्यूज ने ऐलान किया है। ट्रंप की जीत के साथ अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी लोग रिपब्लिकन पार्टी की इस जीत को कैसे स्वीकार करते हैं। यहां पर कुल 538 इलेक्टोरल वोट होते हैं, और राष्ट्रपति बनने के लिए 270 वोटों का बहुमत चाहिए।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मंगलवार 5 नवंबर को वोटिंग हुई। इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी कमला हैरिस के बीच मुख्य मुकाबला था। कुछ जगहों पर मतगणना जारी है, लेकिन अमेरिकी कानून के मुताबिक ट्रंप को विजेता घोषित कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी भी कुछ राज्यों में मतगणना जारी है। अलास्का और विस्कॉन्सिन के अनुमानों के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप को 279 इलेक्टोरल वोट मिल सकते हैं, जबकि कमला हैरिस के खाते में 223 वोट होंगे।
बता दें कि कुल 538 वोटों में जीत के लिए कम से कम 270 वोटों की जरूरत होती है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक कमला हैरिस न्यू हैंपशायर में जीत हासिल कर सकती हैं।
एबीएन एडिटोरियल डेस्क। इजराइल दुनिया के नक्शे में एक डॉट के बराबर दिखने वाला एक देश है। तीन इजराइल मिलकर राजस्थान के बराबर भी नही होते फिर भी इजराइल धार्मिक रूप से इतना कट्टर देश है कि वहां रविवार को नाक साफ करने पर न केवल जुर्माना लग जाता है बल्कि जेल भी हो सकती है, बावजूद इसके आज उसके पास रूस, अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है।
इजराइल दुनिया के उन 9 देशों में शामिल है जिनके पास खुद का सेटेलाइट सिस्टम है, जिसकी सहायता से वो ड्रोन चलाता है, अपनी सेटेलाइट टेक्नोलॉजी इजराइल किसी देश के साथ साझा नही करता। इजराइल दुनिया का एकमात्र देश है जो एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से पूरी तरह लैस है। इजराइल की ओर आने वाली हर मिसाइल न सिर्फ रास्ते मे मार गिराई जाती है बल्कि एक मिनट के भीतर मिसाइल दागने वाली जगह की पहचान कर इजराइल जवाबी मिसाइल दाग कर सब कुछ तहस नहस कर देता है।
नागरिकता को लेकर इजराइल की स्पष्ट नीति है कि दुनिया के किसी भी हिस्से में रहने वाले यहूदी को इजराइल अपना नागरिक मानता है। हां, यहूदी होने के लिए माँ और पिता दोनों का यहूदी होना अनिवार्य है। आखिर ऐसा क्या है यहूदियों में जो न केवल आज दुनिया का सत्तर प्रतिशत कारोबार यहूदियों के हाथ मे है बल्कि अपनी सैन्य शक्ति से वो पूरी दुनिया मे अपनी ताकत का लोहा मनवाते है।
इजराइल की औरतें जिनके लिए आर्मी ट्रेनिग अनिवार्य है, उनकी सोच सिर्फ यहूदी बच्चे पैदा करना नही होती, वो फोकस करती है एक योद्धा, एक बिजनेसमैन, एक कामयाब और जहीन इंसान पैदा करने पर और ये सोच सिर्फ उसकी नही पूरी कौम, पूरे इजराइल राष्ट्र की होती है। एक कामयाब इंसान पैदा करने की शुरूवात वो उसी वक्त से कर देती है जब उन्हें गर्भ ठहरने का आभास होता है।
प्रेग्नेंसी के दौरान यहूदी औरतें अपने लाइफ पार्टनर के साथ गणित के सवाल हल करती है। इसे मेंटल मैथ टेकनिक बोला जाता है, जिसमे सवालो को बोल बोल के हल किया जाता है। गर्भावस्था के दौरान उनका ज्यादातर वक्त गीत संगीत के बीच एक रिलैक्स इनवायरमेंट में बीतता है। दुनिया भर में सिगरेट के सभी बड़े ब्राण्ड भले ही इजराइली कम्पनियो के हो लेकिन आप किसी गर्भवती महिला के घर के आसपास भी सिगरेट नही पी सकते। उनका मानना है कि सिगरेट होने वाले बच्चे के डीएनए और जीन्स को खराब कर सकती है। बच्चों को जंक फूड देने की सख्ती से मनाही होती है।
उन्हें कार्टून, फुटबाल के बजाय तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेल खिलाए और सिखाए जाते है। उनका मानना है कि तीरंदाजी और शूटिंग जैसे खेल बच्चों में सही फैसले लेने की सलाहियत पैदा करते है। स्कूल में भर्ती करने से पहले ही मां बाप बच्चों को प्रैक्टिकली कारोबारी मैथ सिखाते हैं। बच्चों को धार्मिक या अन्य विषयों से इतर साइंस पढ़ने के लिए ज्यादा प्रेरित किया जाता है। पढ़ाई के आखिरी सालों में डिग्री कालेजो में कारोबार स्टडी के लिए उनके ग्रुप बना कर उन्हें टास्क दिए जाते है और सिर्फ उसी ग्रुप के बच्चे पास किए जाते है जो कम से कम 10,000 डॉलर का मुनाफा कमाने में सफल हो जाये। इससे कम मुनाफे वालो को डिग्री नही दी जाती।
न्यूयार्क में इनका एक सोशल सेट अप सेंटर है जो यहूदियों को बिजनेस के लिए बिना ब्याज के लोन प्रोवाइड कराते है। मेडिकल साइंस के स्टूडेंट को नौकरी करने के बजाय प्राइवेट प्रैक्टिस के लिए सेटअप उपलब्ध कराया जाता है। इसीलिए पूरी दुनिया मे यहूदी डॉक्टर्स आपको नौकरी में रेयर ही मिलेंगे। इजराइल के नागरिक नौकरी नही करते बल्कि दुनियां के लोगो को नौकरी देते है।
इजराइल सिर्फ एक देश एक कौम नही, ये एक इंफ्रास्ट्रक्चर एक सोच है जो नस्ल दर नस्ल आगे बढ़ायी जाती है। दुनियां को इनसे सीखने की जरूरत है।
सोचिए और सीखिए कैसे एक छोटी सी कम्युनिटी धार्मिक रूप से कट्टर होते हुए भी पूरी दुनिया पर छायी है। खासकर हमारे जैसे देश को इस बारे में सोचने की बहुत जरूरत है हम कैसे उस रास्ते पर सीख सकते है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। विदेश मंत्री एस जयशंकर शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए मंगलवार को इस्लामाबाद पहुंचे। यह पिछले कुछ वर्षों में किसी वरिष्ठ भारतीय मंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा है। नूर खान हवाई अड्डे पर पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों ने जयशंकर का स्वागत किया। पिछले करीब नौ साल में पहली बार भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा की है।
दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंध कश्मीर मुद्दे पर और पाकिस्तान से सीमापार आतंकवाद को लेकर तनावपूर्ण बने हुए हैं। इससे पहले विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान की यात्रा की थी। वह दिसंबर 2015 में अफगानिस्तान पर एक सम्मेलन में शामिल होने के लिए इस्लामाबाद की यात्रा पर आयी थीं। भारत ने आज कहा कि वह एससीओ की विभिन्न प्रणालियों में सक्रियता से शामिल है।
पाकिस्तान 15 और 16 अक्टूबर को एससीओ के शासन प्रमुखों की परिषद (सीएचजी) के दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। विदेश मंत्रालय ने कहा, एससीओ सीएचजी की बैठक सालाना होती है और इसमें संगठन के व्यापार तथा आर्थिक एजेंडा पर ध्यान दिया जाता है। उसने कहा, सम्मेलन में विदेश मंत्री एस जयशंकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत एससीओ की रूपरेखा के तहत अनेक प्रणालियों एवं पहल समेत इसके प्रारूप में सक्रियता से शामिल है।
मामले से जुड़े लोगों ने कहा कि जयशंकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की ओर से आयोजित रात्रि भोज समारोह में शामिल हो सकते हैं। शरीफ एससीओ के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करने के लिए उन्हें रात्रि भोज देंगे। दोनों पक्षों ने पहले ही एससीओ के शासन प्रमुखों के शिखर सम्मेलन के दौरान जयशंकर और पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार के बीच किसी भी द्विपक्षीय वार्ता की संभावना से इनकार कर दिया है।
जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इसे नयी दिल्ली की ओर से एक अहम निर्णय के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने हाल में एक समारोह में अपने संबोधन में कहा था, भारत किसी भी पड़ोसी की तरह निश्चित रूप से पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध रखना चाहेगा। जयशंकर ने कहा, लेकिन सीमापार आतंकवाद पर ध्यान नहीं देकर और ख्याली पुलाव बनाकर ऐसा नहीं किया जा सकता। वरिष्ठ मंत्री को भेजने के निर्णय को एससीओ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दर्शाने के रूप में देखा जा रहा है।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने पाकिस्तान के लिए सात अरब डॉलर के नये ऋण पैकेज को मंजूरी दे दी है। इससे नकदी की कमी से जूझ रहे देश के मौजूदा आर्थिक संकट से निपटने के प्रयासों को मजबूती देने के लिए 1.1 अरब डॉलर से कम की पहली ऋण किस्त को तत्काल जारी करने की अनुमति मिल गयी है।
आईएमएफ बोर्ड की बुधवार को वाशिंगटन में बैठक हुई, जिसमें पाकिस्तान के साथ कर्मचारी स्तरीय समझौते को मंजूरी दी गयी। इससे पहले पाकिस्तान ने अपने कृषि आयकर में सुधार करने, कुछ वित्तीय जिम्मेदारियों को प्रांतों को हस्तांतरित करने तथा सब्सिडी को सीमित करने का वादा किया था।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने पुष्टि की कि आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने 37 महीने की विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल राशि सात अरब अमेरिकी डॉलर है। यह 1958 के बाद से पाकिस्तान द्वारा प्राप्त किया गया 25वां आईएमएफ कार्यक्रम और छठा ईएफएफ है।
समाचार पत्र द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने वित्त मंत्रालय के हवाले से कहा कि पाकिस्तान आईएमएफ ऋण पर करीब पांच प्रतिशत ब्याज दर का भुगतान करेगा। मंत्रालय ने यह बयान आर्थिक मामलों से संबंधित सीनेट की स्थायी समिति को भेजा था।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बुधवार को दोहराया कि यह पाकिस्तान का आखिरी आईएमएफ कार्यक्रम होगा। यह बयान उन्होंने 2023 में 24वें कार्यक्रम को मंजूरी मिलने के बाद दिया।
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