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Published / 2022-02-14 12:33:50
आइपीओ के लिए एलआईसी ने मांगी मंजूरी...

एबीएन डेस्क। सरकार ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की मंजूरी के लिए आज भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास मसौदा (डीआरएचपी) जमा करा दिया। सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी का आईपीओ मार्च में बाजार में आ सकता है। निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे ने ट्वीट कर कहा, एलआईसी के आईपीओ का डीआरएचपी आज सेबी के पास जमा करा दिया गया है। इससे पहले बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण से एलआईसी के आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई थी, जिसके बाद बीमा कंपनी के निदेशक मंडल ने भी कंपनी को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी थी। सेबी के पास जमा कराए गए आईपीओ मसौदे के अनुसार सरकार निर्गम के जरिये एलआईसी के 31 करोड़ से अधिक इक्विटी शेयर बेचेगी। सरकार का लक्ष्य मार्च तक एलआईसी के शेयर को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्घ कराना है। एलआईसी का अंतर्निहित मूल्य भी 5.4 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और सरकार जो मूल्यांकन चाह रही है उसे रोडशो के बाद तय किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि डीआरएचपी जमा कराने के बाद बाजार नियामक सेबी से इसे आसानी से मंजूरी मिल जाएगी क्योंकि इसके बारे में सेबी के साथ पहले से ही विचार-विमर्श चल रहा है। उम्मीद की जा रही है निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ की जबरदस्त मांग होगी। बीमा कंपनी के मूल्यांकन, मूल्य दायरे आदि का विवरण निर्गम दस्तावेज में जल्द ही उपलब्ध कराया जाएगा। सरकार पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी निर्गम आरक्षित रखेगी और उन्हें कम कीमत में भी शेयर दिए जा सकते हैं। एंकर निवेशकों के लिए भी कुछ शेयर आरक्षित रखे जाएंगे। एलआईसी के आईपीओ को देश में अब तक का सबसे बड़ा निर्गम माना जा रहा है। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार के विनिवेश लक्ष्य में 78,000 करोड़ रुपये की कमी रहने का अनुमान है, इसीलिए एलआईसी का आईपीओ सरकार के लिए महत्त्वपूर्ण है। सरकार अब तक एयर इंडिया के निजीकरण और अन्य सरकारी उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी बिक्री से करीब 12,000 करोड़ रुपये जुटा चुकी है। एलआईसी की 2020 में घरेलू बाजार में 64.1 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी थी। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक एलआईसी जीवन बीमा प्रीमियम के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी है।

Published / 2022-02-13 08:47:53
तीन महीने में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स की जबरदस्त बिक्री

एबीएन बिजनेस डेस्क। देश में परंपरागत वाहनों के मुकाबले अब इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारें अब इस दिशा में इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही हैं। हाल ही में बजट में भी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को लेकर तमाम घोषणाएं की गई हैं। पिछले कुछ समय से देश में पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए भी ईवी को महत्वपूर्ण कड़ी बताया जा रहा है, यही वजह है कि लोगों से पेट्रोल-डीजल के बजाय इन्हें ही खरीदने के लिए सलाह दी जा रही है। हालांकि हर महीने देखा जाए तो इवी की खरीद में भी वृद्धि देखी जा रही है। काउंसिल फॉर एनवायरनमेंट, एनर्जी एंड वॉटर की सीईएफ हैंडबुक का आंकड़ा बताता है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में काफी उछाल आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही में ही ईवी की बिक्री में 250 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोत्तरी देखी गई है। अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर में ईवी की बिक्री बढ़कर 1.3 लाख यूनिट से ज्यादा हो गई है। जबकि साल 2020-21 के वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में लगभग 34 हजार यूनिट ही बिकी थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ईवी को लेकर लोगों की दिलचस्पी यूं ही नहीं बढ़ी है। पिछले कुछ समय से डीजल और पेट्रोल की कीमतों में हुई रिकॉर्ड वृद्धि, फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्यफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (फेम-2) के तहत प्रोत्साहन के साथ इलेक्ट्रिक गाड़ियों के नए-नए मॉडल्स की लॉन्चिंग जैसे कदमों ने शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की बिक्री बढ़ाने में योगदान दिया है। सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक ने यह भी रेखांकित किया है कि तीसरी तिमाही के दौरान पिछले वर्ष की इसी समयावधि की तुलना में कुल बिजली उत्पादन 3.7 प्रतिशत बढ़कर 324 बिलियन किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) हो गया। ऐसा त्योहारी सीजन के दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ने के कारण हुआ। वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के दौरान नीलाम की गई कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता में पिछले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही की तुलना में 61 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। इस अवधि के लिए बिजली वितरण कंपनियों का कुल बकाया भी पिछले वित्त वर्ष में इसी अवधि की तुलना में सात प्रतिशत (7%) बढ़कर 1.23 लाख करोड़ रुपये हो गया।

Published / 2022-02-13 07:51:04
डिजिटल विज्ञापन व्यवसाय को लेकर अब ईपीसी ने गूगल पर ठोका दावा

एबीएन सेंट्रल डेस्क। यूरोपीय प्रकाशक परिषद (ईपीसी) ने शुक्रवार को गूगल के डिजिटल विज्ञापन व्यवसाय के खिलाफ अविश्वास जताते हुए यूरोपीय आयोग में शिकायत दर्ज कराई। इससे यूरोपीय संघ के एंटीट्रस्ट प्रमुख मार्गेथ वेस्टेगर को जांच में मदद मिलेगी। गूगल ने 2020 में ऑनलाइन विज्ञापनों से करीब 147 अरब डॉलर की कमाई की, जो दुनिया की किसी भी अन्य कंपनी की तुलना में अधिक है, इसमें सर्च इंजन, यूट्यूब और जीमेल विज्ञापन गूगल की कुल बिक्री और मुनाफे का सबसे बड़ा हिस्सा हैं। 16 फीसदी राजस्व कंपनी को नेटवर्क व्यवसाय से मिला, जिसमें अन्य मीडिया कंपनियां अपनी वेबसाइट और एप्स पर विज्ञापन बेचने के लिए गूगल एडसेंस का इस्तेमाल करती हैं। बाजार हिस्सेदारी 100% तक : प्रकाशकों के व्यापार निकाय, जिसमें एक्सल स्प्रिंगर, न्यूज यूके, कोंडे नास्ट, बोनियर न्यूज और प्रैसा इबेरिका शामिल हैं, ने यूरोपीय आयोग में अपनी शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया कि प्रेस प्रकाशक गूगल की तकनीक की वजह से पूरी तरह से उसके कब्जे में हैं। ईपीसी के अध्यक्ष क्रिश्चियन वान थिलो ने कहा कि अब समय आ गया है कि यूरोपीय आयोग ऐसे फैसले करे जिससे गूगल को वास्तविक बदलाव करने होंगे। उन्होंने कहा कि विज्ञापन तकनीक की मूल्य श्रृंखला में ऊपर से नीचे तक गूगल का कब्जा है। पिछले साल शुरू हुई जांच : वेस्टेगर, ने हाल के वर्षों में तीन अलग-अलग मामलों में प्रतिस्पर्धा विरोधी प्रथाओं के लिए गूगल के खिलाफ आठ अरब यूरो (9.2 अरब डॉलर) से अधिक का जुर्माना लगाया था। बार-बार मिल रही शिकायतों के आधार पर पिछले साल उन्होंने गूगल के डिजिटल विज्ञापन व्यवसाय की जांच शुरू की थी। वहीं गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि हर साल हम अपने विज्ञापन नेटवर्क में प्रकाशन भागीदारों को सीधे अरबों डॉलर का भुगतान करते हैं। ब्रिटेन में गूगल का संशोधित प्रस्ताव मंजूर : ब्रिटेन के प्रतिस्पर्धा नियामक ने शुक्रवार को कहा कि उसने उपभोक्ताओं को ट्रैक करने के लिए विज्ञापनदाताओं की तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाली थर्ड पार्टी कुकीज पर प्रतिबंध लगाने की अपनी योजना के संबंध में गूगल के एक संशोधित प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। निजता की रक्षा के लिए कुकीज को रोकने का दावा : गूगल का दावा है वह उपयोगकर्ताओं की निजता की रक्षा के लिए थर्ड पार्टी कुकीज को रोकने पर काम कर रहा है। वहीं, 250 अरब डॉलर के वैश्विक डिजिटल विज्ञापन क्षेत्र के अन्य खिलाड़ियों का कहना है कि थर्ड पार्टी कुकीज को बैन करने से उनकी क्षमता सीमित हो जाएगी। सीएमए के सीईओ एंड्रिया कोसेली ने कहा कि इसको दूर करने को गूगल कानूनी रूप से बाध्य है और पारदर्शिता के लिए सूचना प्राधिकरण कड़ी निगरानी करेंगे।

Published / 2022-02-13 07:07:48
टीसीएस समेत टॉप 9 कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 1.03 लाख करोड़ घटा

एबीएन बिजनेस डेस्क। सेंसेक्स की शीर्ष 10 में से नौ कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) में बीते सप्ताह सामूहिक रूप से 1,03,532.08 करोड़ रुपए की गिरावट आई। सबसे ज्यादा नुकसान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को हुआ। बीते सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 491.90 अंक या 0.83 प्रतिशत नीचे आया। शीर्ष 10 कंपनियों में सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में बढ़ोतरी हुई। समीक्षाधीन सप्ताह में रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार मूल्यांकन 30,474.79 करोड़ रुपए बढ़कर 16,07,857.69 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में 44,037.2 करोड़ रुपए की गिरावट आई और यह 13,67,021.43 करोड़ रुपए पर आ गया। एचडीएफसी की बाजार हैसियत 13,772.72 करोड़ रुपए के नुकसान से 4,39,459.25 करोड़ रुपये रह गई। हिंदुस्तान यूनिलीवर का बाजार पूंजीकरण 11,818.45 करोड़ रुपए के नुकसान से 5,30,443.72 करोड़ रुपए पर और आईसीआईसीआई बैंक का 9,574.95 करोड़ रुपए टूटकर 5,49,434.46 करोड़ रुपए पर आ गया। बजाज फाइनेंस का बाजार मूल्यांकन 8,987.52 करोड़ रुपए के नुकसान से 4,22,938.56 करोड़ रुपए पर और इन्फोसिस का 8,386.79 करोड़ रुपए की गिरावट के साथ 7,23,790.27 करोड़ रुपए रह गया। समीक्षाधीन सप्ताह में भारती एयरटेल को 3,157.91 करोड़ रुपए का घाटा हुआ और उसका बाजार पूंजीकरण 3,92,377.89 करोड़ रुपए पर आ गया। एचडीएफसी बैंक की बाजार हैसियत 2,993.33 करोड़ रुपए घटकर 8,41,929.20 करोड़ रुपए रह गई। इसी तरह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का मूल्यांकन 803.21 करोड़ रुपए घटकर 4,72,379.69 करोड़ रुपए पर आ गया। शीर्ष 10 कंपनियों की सूची में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर कायम रही। उसके बाद क्रमश: टीसीएस, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस, आईसीआईसीआई बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, एसबीआई, एचडीएफसी, बजाज फाइनेंस और भारती एयरटेल का स्थान रहा।

Published / 2022-02-12 17:01:32
डीआरएचपी में निर्गम का आकार नहीं!

एबीएन एडिटोरियल डेस्क (निकुंज ओहरी)। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के मसौदे में सरकार द्वारा 5 फीसदी हिस्सेदारी के विनिवेश का उल्लेख हो सकता है और निर्गम के आकार का जिक्र शायद नहीं हो। क्योंकि संभावित निवेशकों के साथ मूल्यांकन पर अभी पर्याप्त चर्चा नहीं की गई है। एक अधिकारी ने कहा, अगर एलआईसी नए शेयर जारी करती और नई पूंजी जुटाती तो उसे निर्गम के आकार का उल्लेख करना होता। लेकिन यह आॅफर फॉर सेल होगा, जिसमें सरकार बीमा कंपनी में अपनी हिस्सेदारी बेच रही है। उक्त अधिकारी ने कहा कि बीमा कंपनी का मूल्यांकन बाजार की मांग और स्थिति पर निर्भर करता है। सरकार ने अभी निवेशकों के साथ परामर्श नहीं किया है, इसलिए कोई मूल्यांकन तय करना संभव नहीं है। एलआईसी का अंतर्निहित मूल्य भी 5 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है और सरकार जो मूल्यांकन चाह रही है उसे रोड शो के बाद तय किया जाएगा। अधिकारी ने कहा, शेयर का मूल्य अभी पता नहीं है और इसे निवेशकों के साथ चर्चा के बाद ही तय किया जाएगा। डीआरएचपी में केवल यह कहा जाएगा कि सरकार 5 फीसदी हिस्सेदारी बेच रही है। 31 दिसंबर, 2021 को एलआईसी के शेयरधारिता प्रारूप के हिसाब से 5 फीसदी हिस्सेदारी करीब 31.6 करोड़ शेयर के बराबर होगी। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आईपीओ के पूर्व-नियोजन के जरिये शेयर मूल्य की तलाश नहीं की गई है, ऐसे में फिलहाल बीमा कंपनी का मूल्यांकन तय करना कठिन होगा। अधिकारी ने बताया कि एलआईसी के निदेशक मंडल ने आज आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी और इसका डीआरएचपी रविवार को जमा कराया जाएगा। अब इस प्रस्ताव को भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा। बीमा नियामक से मंजूरी के बाद मसौदे की दोबारा जांच होगी और उसे सेबी के पास उसे जमा कराया जाएगा। अगर रविवार को बीमा नियामक से मंजूरी मिलती है तो डीआरएचपी उसी दिन या सोमवार को जमा कराया जा सकता है। सरकार को उम्मीद है कि डीआरएचपी जमा कराने के बाद बाजार नियामक सेबी से इसे आसानी से मंजूरी मिल जाएगी क्योंकि इसे लेकर सेबी के साथ पहले से ही विचार-विमर्श चल रहा है। उम्मीद की जा रही है निवेशकों के बीच एलआईसी के आईपीओ की जबरदस्त मांग होगी। बीमा कंपनी के मूल्यांकन, मूल्य दायरे आदि का विवरण निर्गम दस्तावेज में जल्द ही उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार पॉलिसीधारकों के लिए 10 फीसदी निर्गम को आरक्षित रखेगी और उन्हें कम कीमत में भी शेयर दिए जा सकते हैं।

Published / 2022-02-10 17:04:47
अगले पांच साल में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी पेट्रोनेट

एबीएन बिजनेस डेस्क। निया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात टर्मिनल का परिचालन करने वाली पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड अगले चार-पांच वर्षों में 40,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी जिसमें विदेशी आपूर्ति स्रोत भी शामिल हैं। पेट्रोनेट के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एके सिंह ने गुरुवार को कहा कि कंपनी की पेट्रोरसायन कारोबार क्षेत्र में भी प्रवेश की योजना है। इसके लिए कंपनी एक प्रोपेन डिहाइड्रोजेनरेशन संयंत्र में 12,500 करोड़ रुपए का निवेश करेगी जो आयातित माल को प्रोपिलीन में बदलेगा। श्री सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि पेट्रोनेट की ओडिशा के गोपालपुर में 1,600 करोड़ रुपए की लागत से एक फ्लोटिंग (हवा में तैरती) एलएनजी आयात इकाई स्थापित करने की भी योजना है। पिछले साल अमेरिका के लूसियाना में टेल्यूरियन की एलएनजी परियोजना में 2.5 अरब डॉलर निवेश संबंधी गैर-बाध्यकारी समझौता करने वाली कंपनी विदेशी परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर भी गौर करेगी। श्री सिंह ने इसका अधिक ब्योरा न देते हुए कहा, हम विदेशी निवेश के बढ़िया मौकों का मूल्यांकन हमेशा ही करते रहते हैं। अगर ऐसा करना देश के लिए फायदेमंद और बेहतर विकल्प है तो निश्चित रूप से हम ऐसा करेंगे। एलएनजी -162 डिग्री सेल्सियस तक ठंडी की गई प्राकृतिक गैस होती है ताकि जहाजों के जरिए आसानी से इसकी ढुलाई हो सके। बाद में इसे तरल रूप में बदल दिया जाता है। भारत का घरेलू प्राकृतिक गैस उत्पादन ऊर्जा, उर्वरक एवं सीएनजी क्षेत्रों की घरेलू मांग को आधा भी पूरा नहीं कर पाता है। बाकी जरूरत को एलएनजी के रूप में आयात किया जाता है। सिंह ने कहा कि पेट्रोनेट घरेलू एलएनजी आयात क्षमता के विस्तार और पेट्रोरसायन कारोबार पर 17,000 करोड़ रुपए का निवेश करेगी। इसमें गुजरात के दाहेज टर्मिनल की क्षमता को बढ़ाकर 2.25 करोड़ टन प्रतिवर्ष करने पर 600 करोड़ रुपए और एक अतिरिक्त भंडारण टैंक बनाने पर 1,245 करोड़ रुपए का निवेश शामिल है। दाहेज आयात टर्मिनल दुनिया में सबसे बड़ा है और इस बंदरगाह में तीसरी जेटी भी जोड़ी जाएगी जहां प्रोपेन, इथेन और एलएनजी का आयात किया जा सके।

Published / 2022-02-10 16:58:54
टाटा नैनो का नया रूप देख हैरान रह गये रतन टाटा

एबीएन बिजनेस डेस्क। जिस नैनो कार को घर-घर तक पहुंचाने का सपना रतन टाटा ने देखा था और एक लाख रुपये में कार की कीमत रखी थी, उस कार की ब्रिकी कुछ सालों से बुरे दौर से गुजर रही थी। ऐसे में नैनो को इलेक्ट्रिक व्हीकल के रूप में पेश किया गया है। रतन टाटा ने की इलेक्ट्रिक कार की सवारी : सोशल मीडिया पर रतन टाटा के साथ ElectraEV ने कार के साथ रतन टाटा का फोटो शेयर करते हुए लिखा कि ये हमारे लिए सुपर प्राउड की बात है कि जब हमने कार को रतन टाटा को डिलीवर किया तो उन्होंने न सिर्फ इस कार की सवारी की बल्कि इसके बारे में फीडबैक भी दिया। टाटा नैनो को इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के लिए पावरट्रेन बनाने वाली कंपनी इलेक्ट्रा ईवी ने कस्टमाइज किया है। Linkedin पर इस बात की जानकारी देते हुए कंपनी ने बताया कि रतन टाटा को न सिर्फ ये कार पसंद आई, बल्कि वे नैनो की इस कार में बैठकर घूमने भी निकले। कंपनी ने इस बात पर खुशी जताई कि रतन टाटा को 72 वोल्ट की नैनो ईवी डिलीवर करना और उसके बारे में फीडबैक लेना सुपर प्राउड फीलिंग है। बता दें कि नैनो ईवी 10 सेकंड से भी कम समय में 0 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ लेती है। ये 4 सीटों वाली कार है और इसमें लीथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया है। इलेक्ट्रिक होने के बावजूद यह रीयल कार की फील देती है। इस कस्टम बिल्ट नैनो ईवी में 72 वोल्ट आर्किटेक्चर का इस्तेमाल किया गया है। कंपनी ने इसके डिजाइन को मोडिफाई कर ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के द्वारा सर्टिफाइड रेंज 213 किलोमीटर को अचीव कर लिया है।

Published / 2022-02-09 17:55:45
भारतीयों में बढ़ी इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों की दिलचस्पी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारत में अब आवागमन वाले वाहनों का रुझान बदल रहा है और ज्यादा उपभोक्ता इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। डेलॉयट की एक रिपोर्ट में यह कहा गया है। डेलॉयट की तरफ से जारी वैश्विक ऑटोमोटिव उपभोक्ता अध्ययन रिपोर्ट, 2022 कहती है कि एक-तिहाई से अधिक भारतीय उपभोक्ताओं ने इलेक्ट्रिक एवं हाइब्रिड वाहनों के प्रति दिलचस्पी दिखाई है। इसके मुताबिक, भारत में पर्यावरण-अनुकूल और महामारी की वजह से टिकाऊ परिवहन साधनों पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, 59 प्रतिशत भारतीय उपभोक्ता जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण स्तर और पेट्रोल एवं डीजल वाहनों के उत्सर्जन को लेकर फिक्रमंद हैं। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों में भारतीय उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि का पता चलता है क्योंकि वे उत्सर्जन एवं प्रदूषण में कमी लाने में मददगार होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, हरित प्रौद्योगिकी वाले वाहनों को बढ़ावा देने की घोषणा बजट 2022-23 में भी की गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों की अदला-बदली की सुविधा चार्जिंग स्टेशनों पर देने से इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ेगा।

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