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Published / 2022-02-28 13:13:13
कल से 2 रुपये महंगे हो जायेगा अमूल दूध

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमूल ब्रांड के नाम से दूध और दूध उत्पादों के विपणनकर्ता गुजरात को-आॅपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) ने देश भर में कल से अपने अमूल फ्रेश ब्रांड के दूध की कीमत में दो रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी का फैसला किया है। अमूल फ्रेश देश भर के जिन भी बाजारों में उपलब्ध है, वह उसकी कीमत में उक्त वृद्धि के अलावा गुजरात के अहमदाबाद और सौराष्ट्र क्षेत्र के बाजारों में कल यानी एक मार्च से अमूल गोल्ड, ताजा और शक्ति की कीमतों में भी वृद्धि की गयी है। गोल्ड की कीमत रुपये 30 प्रति 500 मिली, अमूल ताजा रुपये 24 प्रति 500 मिली और अमूल शक्ति रुपये 27 प्रति 500 मिली होगी। यह रुपये 2 प्रति लीटर की बढ़ोतरी केवल 4 प्रतिशत की वृद्धि होती है, जो औसत खाद्य महंगाई से बहुत कम है। इसमें कहा गया है कि पिछले 2 वर्षों में अमूल ने अपने फ्रेश दूध श्रेणी की कीमतों में प्रति वर्ष केवल 4 प्रतिशत की वृद्धि की है। एनर्जी, पैकेजिंग, परिवहन, पशु आहार की लागत में वृद्धि के कारण दूध उत्पादन खर्च में वृद्धि हुई है और इस प्रकार संचालन की कुल लागत में वृद्धि हुई है। अमूल ने किसानों की दूध खरीद की कीमतों में रुपये 35 से रुपये 40 प्रति किलो फैट की वृद्धि की है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 5 प्रतिशत ज्यादा है।

Published / 2022-02-27 16:15:11
दोगुना बढ़कर 100 अरब डॉलर के पार होगा कच्चे तेल का आयात बिल

एबीएन, बिजनेस डेस्क। रूस पर यूक्रेन के हमले के बीच कच्चे तेल का दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास तक पहुंच गया है, जो सात सालों में सबसे ज्यादा स्तर है। इस कारण भारत का कच्चे तेल का आयात बिल भी 100 अरब डॉलर के पार जा सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश का कच्चे तेल का आयात बिल मौजूदा वित्त वर्ष 2021-22 में 100 अरब डॉलर को पार कर सकता है। यह पिछले वित्त वर्ष में कच्चे तेल के आयात पर हुए खर्च का करीब दोगुना होगा। इसकी वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें 7 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय के पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ ने ये अनुमान जारी किया है। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 94.3 अरब डॉलर खर्च किए हैं। इस साल जनवरी में ही कच्चे तेल के आयात पर 11.6 अरब डॉलर खर्च किए गए हैं। कच्चा तेल बढ़ने से पेट्रोल डीजल भी महंगा हुआ है। पिछले साल जनवरी में भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 7.7 अरब डॉलर खर्च किए थे। फरवरी2022 में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गईं। अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत तक भारत का तेल आयात बिल दोगुना होकर 110 से 115 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। भारत अपने कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत को आयात से पूरी करता है। आयातित कच्चे तेल को तेल रिफाइनरियों के जरिये पेट्रोल और डीजल जैसे उत्पादों में बदला जाता है। भारत के पास बेहतर शोधन क्षमता है। वो कुछ पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात भी करता है, लेकिन रसोई गैस यानी एलपीजी का उत्पादन काफी कम है। इसे सऊदी अरब, कतर जैसे देशों से आयात किया जाता है। वित्त वर्ष 2021-22 के पहले 10 माह अप्रैल-जनवरी में पेट्रोलियम उत्पादों का आयात 3.36 करोड़ टन या 19.9 अरब डॉलर रहा था। जबकि इस दौरान 33.4 अरब डॉलर के 5.11 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया गया था। भारत ने 2020-21 के वित्त वर्ष में 19.65 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 62.2 अरब डॉलर खर्च किए थे। उस समय कोरोना महामारी के कारण कच्चे तेल की कीमतें नरम थीं। चालू वित्त वर्ष में भारत पहले ही 17.59 करोड़ टन कच्चे तेल का आयात कर चुका है। भारत दुनिया का तीसरे सबसे बड़ा तेल-गैस आयातक और उपभोक्ता देश है। भारत ने वित्त वर्ष 2019-2022.7 करोड़ टन कच्चे तेल के आयात पर 101.4 अरब डॉलर खर्च किए थे। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद ब्रेंट क्रूड स्पॉट के दाम 7 साल के उच्चस्तर 105.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए थे। हालांकि, अमेरिका और यूरोपी देशों ने रूस पर जो प्रतिबंध लगाए हैं, ऊर्जा को उनसे बाहर रखा गया है, जिससे तेल के दाम घटकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए।

Published / 2022-02-26 15:14:47
भारत में अप्रैल तक का ही खाद्य तेल, दो दिन में 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े दाम

एबीएन बिजनेस डेस्क। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ी जंग का असर अब भारतीय बाजार पर भी पड़ने लगा लगा है। आने वाले दिनों में भी अगर दोनों देशों के बीच इसी तरह का टकराव जारी रहता है, तो भारतीय बाजार में खाद्य तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिले सकता है। फिलहाल देश में अप्रैल मध्य तक का ही सूरजमुखी तेल का भंडार मौजूद है। बढ़ते तनाव के कारण पिछले दो दिन में तेल की कीमत 10 से 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गई है। दरअसल, भारत सालाना 25 लाख टन सूरजमुखी तेल का आयात करता है। इनमें 90 फीसदी हिस्सा रूस और यूक्रेन से आता है। क्योंकि यह दोनों देश ही तेल के बड़े निर्यातक हैं। पाम और सोयाबीन तेल के बाद देश में सूरजमुखी तीसरा ऐसा खाद्य तेल है, जिसका बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है। इन दिनों यूक्रेन से सनफ्लावर, इंडोनेशिया, मलेशिया से पाम, अर्जेंटीना व ब्राजील से सोया तेल की आवक कम हो गई है। इसी कारण पिछले सात दिन में तेल की कीमतों में 15 रुपये लीटर तक तथा दो दिन में सर्वाधिक 12 रुपये लीटर तक वृद्धि हो चुकी है। इसी तरह सूरजमुखी के तेल की कीमत एक दिन में 10 रुपये बढ़कर 167 से 168 प्रति लीटर पर पहुंच गईं। सात दिन पहले इसके दाम 150 रुपये प्रति लीटर थे।

Published / 2022-02-25 04:39:50
रूस-यूक्रेन विवाद का संकट : कच्चा तेल हुआ महंगा, 15 फीसदी बढ़ेगा आयात बिल

एबीएन बिजनेस डेस्क। यूक्रेन व रूस के बीच जारी जंग का दुनियाभर के देशों पर असर पड़ेगा और भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा। कच्चा तेल 2014 के बाद पहली बार 1053 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे भारत का कच्चा तेल आयात बिल 15 फीसदी बढ़ने का अनुमान है। उधर, अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 10.6 फीसदी घटा है। इससे भी विदेशी मुद्रा कोष पर असर पड़ा है। यूक्रेन जंग के कारण तेल की आपूर्ति गड़बड़ाने का अंदेशा है। इससे भारत पर भी असर पड़ना तय है। यूक्रेन तनाव के कारण आठ साल बाद ब्रेंट क्रूड आइल के दाम पहली बार 105 डॉलर पर पहुंच गए हैं। रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है और वह यूरोप की तेल कंपनियों को इसकी आपूर्ति करता है। वह यूरोप को अपनी करीब 35 फीसदी प्राकृतिक गैस भी निर्यात करता है। ताजा जंग के कारण यूरोप को तेल व गैस की आपूर्ति ठप हो सकती है। विश्व में कच्चे तेल की मांग बढ़ गई है और ओपेक ने उत्पादन घटा रखा है, इसलिए तेल के दाम और बढ़ने की आशंका है। रूस पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियां बढ़ने का भी विश्व अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा। क्रिसिल रिसर्च की निदेशक हेतल गांधी के अनुसार विश्व के तेल निर्यात बाजार में रूस की 12 फीसदी हिस्सेदारी और यूक्रेन संकट के कारण कच्चे तेल के दाम आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। जब तक ओपेक उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं करता, तब तक कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा ही बने रहने के आसार हैं। बीते दिन माहों से ओपेक देश अपने उत्पादन लक्ष्य के अनुसार तेल नहीं निकाल रहे हैं। इसके कारण दाम पर असर पड़ा है। इसी तरह गैस के दामों पर भी असर पड़ेगा। ईंधन की आपूर्ति व उत्पादन में कमी के कारण इसके भी दाम बढ़ सकते हैं। आयातक देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। एफडीआई में आई कमी : उधर, देश में अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच 60.3 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। यह पिछले साल के मुकाबले 10.6 फीसदी कम है। 2020 की इसी अवधि में यह 67.5 अरब डॉलर रहा था। इसी तरह भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश 43.1 अरब डॉलर रहा। यह 16 फीसदी कम है। 2020-21 में यह 51.4 अरब डॉलर रहा था। सरकार के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है।

Published / 2022-02-23 14:31:13
भारती एयरटेल को 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में वोडाफोन

एबीएन बिजनेस डेस्क। वोडाफोन भारती एयरटेल को इंडस टावर्स में 5 फीसदी हिस्सेदारी बेचने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, इस बिक्री से वोडाफोन को मिलने वाली राशि उसकी भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में डाली जाएगी। इंडस टावर्स लिमिटेड पहले भारती इन्फ्राटेल लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। नयी दिल्ली, ब्रिटिश दूरसंचार कंपनी वोडाफोन इंडस टावर्स में अपनी करीब पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए भारती एयरटेल के साथ बात कर रही है। दूरसंचार उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बुधवार को इस संभावित सौदे की जानकारी दी। हालांकि, वोडाफोन ने इस बारे में कोई टिप्पणी करने से मना कर दिया। इंडस टावर्स में वोडाफोन के पास फिलहाल 28 प्रतिशत हिस्सेदारी है। सूत्रों ने कहा कि वोडाफोन 3,300 करोड़ रुपये मूल्य वाली कंपनी इंडस टावर्स में अपनी पांच प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए एयरटेल के संपर्क में है। सूत्रों के मुताबिक, इस बिक्री से वोडाफोन को मिलने वाली राशि उसकी भारतीय इकाई वोडाफोन आइडिया लिमिटेड में डाली जाएगी। इंडस टावर्स लिमिटेड पहले भारती इन्फ्राटेल लिमिटेड के नाम से जानी जाती थी। वह दूरसंचार टावर खड़ा करने, उनके स्वामित्व एवं प्रबंधन का काम करती है। इस तरह उसकी कई मोबाइल आॅपरेटरों के लिए संचार संरचना प्रदान करने में भूमिका है। इंडस टावर्स के पास 1,84,748 दूरसंचार टावर हैं और उसकी देश के सभी 22 दूरसंचार सर्किल में मौजूदगी है।

Published / 2022-02-23 06:01:59
टाटा पावर और आरडब्ल्यूई के बीच करार

एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा पावर ने भारत में अपतटीय पवन परियोजनाओं के संयुक्त विकास की संभावनाएं तलाशने के लिए जर्मनी की आरडब्ल्यूई रिन्यूएबल जीएमबीएच से करार किया है। इस बारे में टाटा पावर की 100 फीसदी हिस्सेदारी वाली सहायक कंपनी टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी लिमिटेड ने आरडब्ल्यूई रिन्यूएबल जीएमबीएच से सहमति ज्ञापन (एमओयू) किया है। टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी देश की सबसे बड़ी एकीकृत बिजली कंपनियों में शामिल है वहीं आरडब्ल्यू रिन्यूएबल जीएमबीएच अपतटीय पवन परियोजना क्षेत्र की अग्रणी कंपनी है। बयान में कहा गया है कि भारत एक ऐसा बाजार है जिसका पूरा उपयोग नहीं हुआ है। यह अपतटीय पवन परियोजनाओं के विकास के लिए एक आकर्षक बाजार है। भारत की तटरेखा 7,600 किलोमीटर है। सरकार ने 2030 तक 30,000 मेगावॉट की अपतटीय पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह एमओयू इस दृष्टि से काफी महत्त्वपूर्ण हो जाता है। टाटा पावर के मुख्य कार्याधिकारी प्रवीर सिन्हा ने कहा कि आरडब्ल्यूई हमारे लिए आदर्श भागीदार है। इसके जरिये टाटा पावर को अपने अपतटीय पवन कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। आरडब्ल्यूई के पास अपतटीय पवन परियोजनाओं के परिचालन की वैश्विक विशेषज्ञता है।

Published / 2022-02-19 17:24:17
प्याज की महंगाई रोकने को मोदी सरकार उठा रही कई कदम

एबीएन बिजनेस डेस्क। केंद्र ने खुदरा प्याज की कीमतों में किसी भी तेजी पर लगाम लगाने को लेकर कदम उठाया है। उसने उन राज्यों के लिए प्याज का बफर स्टॉक सुनियोजित और लक्षित तरीके से उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है, जहां दाम पिछले महीनों के मुकाबले बढ़ रहे हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने शुक्रवार को एक बयान में कहा कि बाजारों में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए महाराष्ट्र में प्याज की लासलगांव और पिंपलगांव थोक मंडियों में भी बफर स्टॉक जारी किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि राज्यों को भंडारण से अलग स्थानों पर 21 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से प्याज की पेशकश की गई है। मदर डेयरी के सफल बिक्री केन्द्रों को भी परिवहन लागत सहित 26 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से इस सब्जी की आपूर्ति की गई है। मंत्रालय ने कहा, बफर स्टॉक के तेजी से बाजार में आने से प्याज की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। धीरे-धीरे महंगा हो रहा है प्याज : मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में खुदरा प्याज की कीमतें धीरे-धीरे बढ़ रही हैं। दिल्ली और चेन्नई में प्याज की कीमत 37 रुपए किलो थी, जबकि मुंबई में 39 रुपए किलो और कोलकाता में 43 रुपए किलो थी। मंत्रालय ने आगे कहा कि देर से पैदावार वाली खरीफ (गर्मी) प्याज की आवक स्थिर है और मार्च, 2022 से रबी (सर्दियों) फसल के आने तक स्थिर रहने की उम्मीद है। इस साल 17 फरवरी तक, प्याज की अखिल भारतीय औसत कीमत पिछले साल की तुलना में 22.36 प्रतिशत कम थी। मंत्रालय के अनुसार, मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के माध्यम से प्रभावी बाजार हस्तक्षेप के कारण वर्ष 2021-22 के दौरान प्याज की कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं। इसी तरह, आलू का अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य पिछले महीने की तुलना में 17 फरवरी को 6.96 प्रतिशत कम यानी 20.58 रुपए प्रति किलोग्राम था। अब तक छह राज्यों, आंध्र प्रदेश, असम, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल ने अग्रिम रूप से लिया है और कुल 164.15 करोड़ रुपए केंद्रीय हिस्से के रूप में जारी किए गए हैं। इन राज्यों के पास आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए धन और जनादेश है। इसमें कहा गया है, अन्य राज्यों से भी अनुरोध किया गया है कि वे आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए राज्य स्तर पर हस्तक्षेप के लिए पीएसएफ का गठन करें।

Published / 2022-02-17 15:38:35
टाटा स्टील पांचवीं बार विनिर्माण क्षेत्र में भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों में शुमार

जमशेदपुर। ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् द्वारा 2022 के लिए टाटा स्टील को विनिर्माण श्रेणी में भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों में से एक के रूप में मान्यता दी गयी है। कंपनी को यह सम्मान पांचवीं बार प्राप्त हुआ है जो उच्च-विश्वास, अखंडता, विकास और कर्मचारियों का ख्याल रखने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर कंपनी के निरंतर प्रयास को रेखांकित करता है। पिछले कुछ वर्षों में, टाटा स्टील ने कार्यबल के विभिन्न क्षेत्रों के लिए कोर माइनिंग आॅपरेशन्स में ट्रांसजेंडर और महिलाओं की नियुक्ति जैसी कई पथ-प्रदर्शक नीतियों, अभ्यासों और पहल की शुरूआत की हैं। कंपनी लोगों को काम पर रखने, जुड़ाव, विविधता तथा समावेशन, पुरस्कार और सम्मान और प्रदर्शन प्रबंधन के क्षेत्र में निरंतर नवाचार और अग्रणी रही है। टाटा स्टील ने सभी विविध समूहों के लिए एक सक्षम कार्यस्थल बनाने के लिए एलजीबीटीक्यू + पार्टनर्स, एजाइल वर्किंग मॉडल और विस्तारित मातृत्व अवकाश का लाभ देने जैसी पथ प्रदर्शक नीतियां लागू की हैं। अत्रेयी सान्याल, वाईस प्रेसिडेंट, ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट, टाटा स्टील ने कहा : हम पांचवीं बार इस सम्मान को हासिल कर गौरान्वित महसूस कर रहे हैं। टाटा स्टील में, हम टीम वर्क को बढ़ावा देने, प्रतिभा को पोषित करने और नेतृत्व क्षमता को बढ़ाने में दृढ़ता से विश्वास करते हैं। हमारे कर्मचारी हमेशा संगठनात्मक लक्ष्यों को प्राप्त करने में हमारी सबसे मूल्यवान संपत्ति रहे हैं। हमारी नीतियां, हमेशा से कर्मचारी सर्वप्रथम के दर्शन से प्रेरित रहती हैं। इसने हमें एक ऐसा कार्य वातावरण बनाने में सक्षम बनाया है जो समावेशी है और सभी के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देता है। टाटा स्टील ने कार्यबल के विभिन्न वर्गों के लिए कई पथ-प्रदर्शक नीतियों और अभ्यासों को लागू किया है और अपने कार्यबल के पोषण और सशक्तीकरण के लिए समय के साथ विकसित होती रहेगी। कार्यस्थल संस्कृति पर एक वैश्विक प्राधिकरण के रूप में, ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् तीन दशकों से भी अधिक समय से कर्मचारियों के अनुभवों और संगठनों में लोगों के व्यवहार का अध्ययन कर रहा है। हर साल, 60 से अधिक देशों के 10,000 से अधिक संगठन अपनी कार्यस्थल संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए मूल्यांकन, बेंचमार्किंग और कार्यों की योजना के लिए ग्रेट प्लेस टू वर्कञ् संस्थान के साथ भागीदारी करते हैं। इस साल विनिर्माण क्षेत्र के 132 संगठनों ने इस मूल्यांकन में भाग लिया । इस अध्ययन ने देश भर में विनिर्माण क्षेत्र के 3,83,583 कर्मचारियों की आवाज का भी प्रतिनिधित्व किया। कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया के आधार पर, टाटा स्टील को 2022 के लिए विनिर्माण श्रेणी में भारत के सर्वश्रेष्ठ कार्यस्थलों के रूप में मान्यता प्राप्त शीर्ष 30 संगठनों में से एक के रूप में नामित किया गया है।

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