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Published / 2022-03-11 17:53:19
जनवरी में औद्योगिक उत्पादन 1.3% बढ़ा

एबीएन बिजनेस डेस्क। जनवरी में औद्योगिक उत्पादन सालाना आधार पर 1.3 फीसदी बढ़ा है। शुक्रवार को जारी आधिकारिक डेटा में कहा गया है कि इसके पीछे वजह खनन और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों के प्रदर्शन में सुधार रहा है। जनवरी 2021 में इंडैक्स ऑफ इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन (IIP) में जनवरी 2021 में 0.6 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी डेटा के मुताबिक, खनन क्षेत्र में ग्रोथ जनवरी 2021 में 2.4 फीसदी की गिरावट मुकाबले 2.8 फीसदी बढ़ी है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में जनवरी में 1.1 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है।।इसमें एक साल पहले के समान महीने में 0.9 फीसदी की दर से गिरावट आई थी। पिछले तीन महीनों में जनवरी के दौरान मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सबसे तेज ग्रोथ देखी गई है। ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटी : हालांकि, ऊर्जा उत्पादन में ग्रोथ घटकर 0.9 फीसदी पर रही है। जनवरी 2021 में इसमें 5.5 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई थी। मौजूदा वित्त वर्ष की अप्रैल-जनवरी अवधि में, आईआईपी ग्रोथ 13.7 फीसदी पर रही है। वित्त वर्ष 2020-21 की समान अवधि के दौरान 12 फीसदी की गिरावट देखी गई थी। जनवरी में प्राइमेरी गुड्स कैटेगरी में 1.6 फीसदी की ग्रोथ देख गई है। वहीं, कैपिटल गुड्स में जनवरी महीने के दौरान 1.4 फीसदी की गिरावट देखी गई है। जबकि, इंटरमीडिएट गुड्स कैटेगरी में जनवरी महीने में 0.9 फीसदी ग्रोथ हुई है। इंफ्रास्ट्रक्चर/ कंस्ट्रक्शन गुड्स में जनवरी महीने में 5.4 फीसदी की ग्रोथ देखी गई है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में जनवरी 2022 में 3.3 फीसदी की गिरावट आई है। जबकि, कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स में 2.1 फीसदी की ग्रोथ हुई है। क्या होता है IIP : बता दें कि औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में खास महत्व होता है। इससे पता चलता है कि उस देश की अर्थव्यवस्था में औद्योगिक वृद्धि किस गति से हो रही है। आईआईपी के अनुमान के लिए 15 एजेंसियों से आंकड़े जुटाए जाते हैं। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन, इंडियन ब्यूरो ऑफ माइंस, सेंट्रल स्टेटिस्टिकल आर्गेनाइजेशन और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी शामिल हैं। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताजा मानकों के मुताबिक, किसी उत्पाद के इसमें शामिल किए जाने के लिए प्रमुख शर्त यह है कि वस्तु के उत्पादन के स्तर पर उसके उत्पादन का कुल मूल्य कम से कम 80 करोड़ रुपए होना चाहिए। इसके अलावा यह भी शर्त है कि वस्तु के उत्पादन के मासिक आंकड़े लगातार उपलब्ध होने चाहिए। इंडेक्स में शामिल वस्तुओं को तीन समूहों-माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रिसिटी में बांटा जाता है। फिर इन्हें बेसिक गुड्स, कैपिटल गुड्स, इंटरमीडिएट गुड्स, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल्स जैसी उप-श्रेणियों में बांटा जाता है।

Published / 2022-03-10 10:14:54
भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती के लिए साझेदार बने एक्सिस बैंक और एयरटेल

एबीएन डेस्क। एक्सिस बैंक, जो भारत का तीसरा सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का बैंक है, और भारती एयरटेल (एयरटेल) जो भारत का प्रमुख संचार समाधान प्रदाता है, ने आज वित्तीय समाधानों की एक श्रृंखला के माध्यम से भारत के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र के विकास को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण साझेदारी की घोषणा की। देश में डिजिटल भुगतान को अपनाने में तेजी लाने के लिए, आगामी महीनों में, एक्सिस बैंक और एयरटेल विशेष रूप से एयरटेल के 340 मिलियन से अधिक ग्राहकों के लिए कई नये-नये वित्तीय पेशकश और डिजिटल सेवाओं को बाजार में लाएंगे। इनमें उद्योग के अग्रणी लाभों के साथ पूर्व-अनुमोदित तुरंत लाभ, बाय नाउ पे लैटर आदि लाभों वाला को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड शामिल होगा। यह गठबंधन, देश भर में अपनी महत्वपूर्ण पहुंच के साथ, डिजिटलीकृत भुगतानों के प्रयोग को बढ़ाकर टियर 2 और टियर 3 बाजारों में प्रवेश करने में मदद करेगा। इस साझेदारी को आज अपनी तरह के पहले "एयरटेल एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड" के लॉन्च के साथ शुरू किया गया, जो एयरटेल ग्राहकों को कैशबैक, विशेष छूट, डिजिटल वाउचर और मानार्थ सेवाओं जैसे कई आकर्षक लाभ प्रदान करेगा। भारती एयरटेल के सीईओ गोपाल विट्टल ने कहा, एयरटेल अपने ग्राहकों को विश्व स्तरीय डिजिटल सेवाओं की पेशकश करने के अपने प्रयास तहत मजबूत वित्तीय सेवा पोर्टफोलियो का निर्माण कर रहा है। हम इस रोमांचक प्रयास में एक्सिस बैंक के साथ सहयोग करके खुश हैं। दोनों ही कंपनियों के लिए लाभप्रद इस टेल्को-बैंक साझेदारी के जरिए, एयरटेल ग्राहकों के लिए एक्सिस बैंक के विश्व स्तरीय वित्तीय सेवा पोर्टफोलियो और विशेष लाभ उपलब्ध होंगे, जबकि एक्सिस बैंक एयरटेल की मजबूत डिजिटल क्षमताओं और गहरी वितरण पहुंच से लाभान्वित होगा।

Published / 2022-03-06 03:39:41
15 से 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ सकती है पेट्रोल-डीजल की कीमत

एबीएन डेस्क। रूस-यूक्रेन के बीच अनिश्चित्ता की स्थिति के साथ बरकरार मांग से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतें छोटी अवधि में 95 डॉलर से 125 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने रहने की उम्मीद है। IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस संकट से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने के बाद देश में पेट्रोल-डीजल की घरेलू बाजार में कीमतें 15 से 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ने की उम्मीद है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि तेल मार्केटिंग कंपनियां 7 मार्च या उसके बाद कीमतों में बदलाव करेगी, जो मौजूदा राज्य के विधानसभा चुनावों में मतदान का आखिरी दिन है। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में कटौती से कुछ हद तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर असर कम हो सकता है, लेकिन पूरी तरह नहीं होगा। मौजूदा समय में, भारत अपने कच्चे तेल की जरूरत का 85 फीसदी हिस्से का आयात करता है। इसके अलावा तेल की ज्यादा कीमत के बड़े असर से सामान्य महंगाई में बढ़ोतरी का ट्रेंड देखने को मिल सकता है। देश में महंगाई और बढ़ने के आसार : इससे पहले ही भारत में महंगाई को मापने वाला मुख्य कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स जो रिटेल महंगाई को दिखाता है, जनवरी में भारतीय रिजर्व बैंक की टार्गेट रेंज के पार चला गया है। बढ़ोतरी को कमोडिटी की ज्यादा कीमतों पर थोपा गया था। इंडस्ट्री के कैलकुलेशन के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी बढ़ोतरी से सीपीआई आधारित महंगाई में करीब 10 बेसिस प्वॉइंट्स की बढ़ोतरी होती है। इस संकट के अलावा कम सप्लाई को लेकर भय ने ब्रैंट क्रूड ऑयल की कीमत को 10 साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है। यह करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पर मौजूद है। शुक्रवार को, ब्रैंट इंडैक्स्ड क्रूड ऑयल 113.76 डॉलर प्रति बैरल पर रहा है। इन्वेस्टमेंट बैंकर मॉर्गन स्टैनली का कहना है कि अगर रूस से तेल की सप्लाई आगे भी बाधित रहती है तो इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल 185 डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। कच्चा तेल 120 डॉलर के स्तर तक पहुंच चुका था और आज यह 110 डॉलर के रेंज में ट्रेड कर रहा है। दरअसल, रूस के खिलाफ अमेरिका और यूरोप के अन्य देश पाबंदियां लगा रहे हैं। इसके कारण भी वह तेल का खुलकर निर्यात नहीं कर पा रहा है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, रूस अभी 66 फीसदी तेल का निर्यात नहीं कर पा रहा है।

Published / 2022-03-05 12:55:11
अमूल के बाद कल से महंगा होगा मदर डेयरी का दूध

एबीएन बिजनेस डेस्क। मदर डेयरी दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमत में दो रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी करेगी। खरीद लागत में वृद्धि होने के कारण की जा रही यह मूल्य वृद्धि रविवार से प्रभाव में आएगी। इससे पहले अमूल और पराग मिल्क फूड्स दूध की कीमत दो रुपये प्रति लीटर बढ़ा चुके हैं। मदर डेयरी ने शनिवार को कहा कि खरीद लागत (किसानों को अदा किया जाने वाला शुल्क), ईंधन की कीमत और पैकेजिंग सामग्री की कीमत बढ़ने के कारण मदर डेयरी को दिल्ली-एनसीआर में दूध की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करनी पड़ रही है जो छह मार्च 2022 से प्रभाव में आएगी। रविवार से फुल क्रीम दूध की कीमत 59 रुपये प्रति लीटर होगी जो अभी 57 रुपये प्रति लीटर है। टोन्ड दूध 49 रुपये प्रति लीटर, डबल टोन्ड दूध 43 रुपये प्रति लीटर, गाय का दूध 51 रुपये प्रति लीटर होगा। टोकन वाला दूध 44 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 46 रुपये प्रति लीटर होगा। मदर डेयरी ने हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी दूध के दाम दो रुपये प्रति लीटर बढ़ाए हैं। इन क्षेत्रों के अलावा अन्य इलाकों में दूध के दामों में चरणबद्ध तरीके से बढोतरी होगी। मदर डेयरी का दूध देश के 100 से अधिक शहरों में मिलता है। दिल्ली-एनसीआर में मदर डेयरी प्रतिदिन 30 लाख लीटर से अधिक दूध बेचती है।

Published / 2022-03-05 07:46:19
रूस-यूक्रेन लड़ाई से गहरा रहा 1970 के बाद का सबसे बड़ा तेल संकट

एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के बैंकिंग सिस्टम पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। ये देश रूस के ऑयल का भी विरोध कर रहे हैं। दुनियाभर के बैंक, पोर्ट्स और ट्रांसपोर्टर्स रूसी ऑयल से खुद को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। इससे 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी ऑयल क्राइसिस का खतरा दिख रहा है। आईएचएस मार्किट के वाइस-चेयरमैन डेनियल येर्गिन ने कहा है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से दुनिया में 1970 के दशक के बाद सबसे बड़ी ऑयल क्राइसिस पैदा हो सकती है। एक रिपोर्ट के अनुसार, येर्गिन ने कहा, 1970 के दशक में अरब ऑयल पर बैन और ईरानियन क्रांति के बाद से ऑयल की सबसे बड़ी क्राइसिस सामने आ सकती है। रूस से भारी निर्यात : येरगिन का कहना है कि यह 1970 के दशक में अरब तेल प्रतिबंध और ईरानी क्रांति के बाद से सबसे खराब संकट हो सकता है। उस दशक में दोनों घटनाएं तेल के लिए बहुत बड़ा झटका था। यद्यपि अमेरिका और अन्य देशों द्वारा रूसी तेल पर प्रतिबंध अभी तक लागू नहीं किए गए हैं, येरगिन का मानना है कि बाजार से रूसी बैरल का एक महत्वपूर्ण नुकसान होगा। उनके अनुसार, रूस प्रतिदिन लगभग 7.5 मिलियन बैरल तेल और प्रोसेस्ड वस्तुओं का निर्यात करता है। रूस का आधा निर्यात नाटो को : येरगिन के मुताबिक, लोजिस्टिक्स के मामले में वास्तव में यह एक बड़ा व्यवधान होने जा रहा है और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानी होने जा रही है। यह एक आपूर्ति संकट है। यह एक लोजिस्टिक्स संकट है। यह एक भुगतान संकट है और यह 1970 के दशक के पैमाने पर भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिबंध लगाने वाली सरकारों और उद्योग के बीच मजबूत कम्युनिकेशन सबसे खराब स्थिति का की तरफ बढ़ सकते हैं। येरगिन के मुताबिक, सरकारों को स्पष्टता प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि नाटो के सदस्य रूस के निर्यात का लगभग आधा हिस्सा प्राप्त करते हैं। उसका कुछ हिस्सा बाधित होने वाला है।

Published / 2022-03-04 17:43:47
शेयर बाजार : तीन दिन से जारी गिरावट से निवेशकों को 5.59 लाख करोड़ का नुकसान

एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल के बीच पिछले तीन दिनों से शेयर बाजारों में जारी गिरावट से निवेशकों को 5.59 लाख रुपये का नुकसान हुआ है। शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन गिरावट रही। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 768.87 अंक यानी 1.40 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54,333.81 अंक पर बंद हुआ। पिछले तीन दिनों में शेयर बाजार में 1,913.47 अंक यानी 3.40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। इसी के साथ बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण पिछले तीन दिनों में 5,59,623.71 करोड़ रुपये घटकर 2,46,79,421.38 करोड़ रुपये रहा।

Published / 2022-03-04 04:37:07
यूट्यूबर्स ने वीडियो से देश को कराई 6800 करोड़ की कमाई

एबीएन सेंट्रल डेस्क। इंटरनेट और स्मार्टफोन के दौर में कमाई अब सिर्फ नौकरी या बिजनेस करने तक ही सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल युग में पैसे कमाने के कई ऐसे तरीके सामने आए हैं, जिन्हें पहले उतनी तवज्जो नहीं मिलती थी। खास बात है कि इन नए तरीकों से न सिर्फ लोग अपना घर-परिवार चला रहे हैं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान दे रहे हैं। यूट्यूब भी एक ऐसा ही जरिया बनकर सामने आया है। 92 फीसदी छोटे उद्यमियों ने कहा, मंच के जरिये दुनियाभर में नए लोगों तक पहुंचने में मिली मदद : ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स की बृहस्पतिवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यूट्यूब क्रिएटर्स (यूट्यूब पर वीडियो बनाने वाले) ने वीडियो बना-बनाकर 2020 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 6,800 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। खास बात है कि यूट्यूबर्स ने 6,83,900 फुल टाइम नौकरियों के बराबर भी जीडीपी को मजबूत किया है। 92 फीसदी छोटे एवं मध्यम उद्यमियों का कहना है कि यूट्यूब की मदद से उन्हें दुनियाभर में नए लोगों तक पहुंचने में मदद मिली है। आर्थिक विकास पर असर डालने की क्षमता : यूट्यूब पार्टनरशिप के एशिया-प्रशांत के क्षेत्रीय निदेशक अजय विद्यासागर का कहना है कि भारत में यूट्यूब की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को देखकर खुशी हो रही है। देश के यूट्यूबर्स में आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और सांस्कृतिक मूल्यों पर असर डालने की अहम शक्ति के रूप में उभरने की क्षमता है। जैसे-जैसे हमारे यूट्यूबर वैश्विक दर्शकों से जुड़ने वाली मीडिया कंपनियों की इस अगली पीढ़ी का निर्माण करेंगे, अर्थव्यवस्था पर इसका असर और तेज होगा। लाखों में होती है कमाई : रिपोर्ट के मुताबिक, 40,000 से अधिक यूट्यूब चैनलों के एक लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स (ग्राहक) हैं। इनकी संख्या हर साल 45 फीसदी की दर से बढ़ रही है। देश में कम-से-कम छह अंकों या इससे अधिक में कमाई करने वाले यूट्यूब चैनलों की संख्या में सालाना आधार पर 60 फीसदी बढ़ रही है। देश में 44.8 करोड़ यूट्यूब यूजर्स : पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक, देश में यूट्यूब का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 44.8 करोड़ है। 53 करोड़ व्हाट्सएप और 41 करोड़ लोग फेसबुक उपयोग करते हैं। इंस्टाग्राम यूजर्स की संख्या 21 करोड़ है, जबकि 1.75 करोड़ ट्विटर का इस्तेमाल करते हैं। कारोबार को आगे बढ़ाने में मददगार : ऑक्सफोर्ड इकनॉमिक्स के सीईओ एड्रियन कूपर ने कहा कि यूट्यूब भारतीय निर्माताओं के लिए उनके पेशेवर लक्ष्यों को पाने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यूट्यूब पर सामग्री के मौद्रिकरण के आठ अलग-अलग तरीकों के साथ यूट्यूब दुनियाभर के क्रिएटर्स के लिए एक प्रेरक स्रोत बनकर उभरा है। भारत में 80 फीसदी से ज्यादा क्रिएटर्स का कहना है कि यूट्यूब मंच का उनके पेशेवर लक्ष्यों पर सकारात्मक असर पड़ा है।

Published / 2022-03-02 14:56:02
मोटी कमाई का मौका देगा रतन टाटा समर्थित "ब्लूस्टोन ज्वैलरी" का आईपीओ

एबीएन बिजनेस डेस्क। रतन टाटा सपोर्टेड ब्लूस्टोन ज्वैलरी आईपीओ के माध्यम से फंड जुटाने की योजना बना रही है। ब्लूस्टोन ज्वैलरी भारत की अग्रणी ओमनीचैनल ज्वैलरी चेन में से एक है और वह प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम के माध्यम से 1,500 करोड़ रुपए से अधिक जुटाने की योजना बना रही है। रतन टाटा समर्थित ज्वैलरी प्लेटफॉर्म ने पहले ही आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, आईआईएफएल सिक्योरिटीज, जेफरीज और जेएम फाइनेंशियल को आईपीओ के लिए निवेश बैंकर नियुक्त कर दिया है और उसे 12,000-15,000 करोड़ रुपए के मूल्यांकन की उम्मीद है। जनिक प्रस्ताव लॉन्च करना चाहती है। आईपीओ के माध्यम से कंपनी अपनी हिस्सेदारी का 10-12 प्रतिशत बेचना चाहती है। कंपनी के निजी इक्विटी निवेशकों, कलारी कैपिटल कंपनी में अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा या पूरी तरह से बेच सकते हैं।

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