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Published / 2026-01-06 19:25:41
वित्त वर्ष 2026-27 में 6.9% रह सकता है भारत की जीडीपी वृद्धि दर!

इंडिया रेटिंग्स ने किया अनुमान 

एबीएन बिजनेस डेस्क। साख निर्धारित करने वाली इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च ने आगामी वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा आयकर में कटौती जैसे प्रमुख सुधार और व्यापार समझौते, आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाने के रूप में काम करेंगे। 

साथ ही अर्थव्यवस्था को वैश्विक उथल-पुथल से बचायेंगे। इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अगले वित्त वर्ष में भी उच्च वृद्धि दर और कम महंगाई दर (औसतन 3.8 प्रतिशत खुदरा मुद्रास्फीति) की स्थिति बनी रहेगी।  

कम शुल्क वाले भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि के आंकड़ों में और इजाफा होगा। एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित जीडीपी वृद्धि 7.4 प्रतिशत और बाजार मूल्य पर जीडीपी नौ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। 

इंडिया रेटिंग्स को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारतीय रुपया औसतन 92.26 प्रति डॉलर रहेगा जो मौजूदा वित्त वर्ष में 88.64 प्रति डॉलर से अधिक है। एजेंसी ने साथ ही कहा कि सरकार के विशेष रूप से न्यूजीलैंड, ब्रिटेन और ओमान के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) विदेशी निवेश को बढ़ावा देंगे और अधिक विदेशी निवेश को आकर्षित करके चालू खाता घाटा (सीए) को कम रखने में मदद करेंगे।  

पंत ने कहा कि सीमा शुल्क को युक्तिसंगत बनाना एवं विकसित भारत-राम-जी अधिनियम के तहत आवंटन एक फरवरी को निर्धारित 2026-27 के केंद्रीय बजट में अपेक्षित प्रमुख घोषणाएं होंगी। इसके अलावा, 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट को भी एक फरवरी को सार्वजनिक किया जायेगा। इसमें एक अप्रैल से शुरू होने वाले पांच वर्षों के लिए केंद्र और राज्यों के बीच कर हस्तांतरण के अनुपात का सुझाव दिया गया है।  

रेटिंग एजेंसी के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में कर राजस्व में दो लाख करोड़ रुपये की कमी आयेगी जिसकी भरपाई गैर-कर राजस्व संग्रह और पूंजीगत व्यय में मामूली कमी से की जायेगी। चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट में अनुमानित 4.4 प्रतिशत और वास्तविक रूप से 15.69 लाख करोड़ रुपये रहेगा। एजेंसी के अनुसार, संशोधित अनुमानों (आरई) में निरपेक्ष रूप से आंकड़ा बढ़ सकता है, हालांकि प्रतिशत के रूप में 4.4 प्रतिशत ही रहेगा।

Published / 2026-01-05 19:34:33
जानें शेयर मार्केट टूटने के तीन प्रमुख कारण

रिकॉर्ड हाई के बाद अचानक क्यों टूटा शेयर बाजार? जानें 3 बड़े कारण 

एबीएन बिजनेस डेस्क। सोमवार, 5 जनवरी को भारतीय शेयर बाजारों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद बाजार पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में फिसल गये। सेंसेक्स 322.39 अंक या 0.38% गिरकर 85,439.62 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी 78.25 अंक या 0.30% टूटकर 26,250.30 के स्तर पर पहुंच गया। 

बाजार में गिरावट के 3 बड़े कारण 

  • आईटी शेयरों में जोरदार बिकवाली 
  • आज बाजार की सबसे बड़ी कमजोरी आईटी सेक्टर में देखने को मिली। 
  • निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 2% तक टूट गया। 
  • इंडेक्स के सभी 10 शेयर लाल निशान में रहे। 
  • विप्रो, एचसीएल टेक और इंफोसिस में करीब 3% तक गिरावट दर्ज की गयी। 

निवेशक अमेरिकी बाजार से जुड़े जोखिमों और संभावित नये टैरिफ को लेकर सतर्क दिखे। इसके अलावा, ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने भी भारतीय आईटी सेक्टर पर सतर्क रुख अपनाते हुए निवेशकों को एक्सपोजर घटाने की सलाह दी है। सीएलएसए का मानना है कि आईटी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजे कमजोर रह सकते हैं। 

ट्रंप की नयी टैरिफ चेतावनी 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने भी बाजार के सेंटीमेंट पर असर डाला। उन्होंने कहा कि भारत अब भी रूस से तेल खरीद रहा है, जिससे अमेरिका संतुष्ट नहीं है और जरूरत पड़ने पर भारत पर टैरिफ बढ़ाए जा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे बयान अनिश्चितता बढ़ाते हैं और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित करते हैं। 

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार के मुताबिक, साल 2026 की शुरुआत बड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ हुई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। 

रुपये में कमजोरी 

डॉलर के मुकाबले रुपया भी दबाव में नजर आया। शुरूआती कारोबार में रुपया 4 पैसे कमजोर होकर 90.24 के स्तर पर पहुंच गया। फॉरेक्स विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव और डॉलर की मजबूत मांग के चलते रुपए पर दबाव बना रह सकता है, हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से कुछ राहत मिल सकती है।

Published / 2026-01-04 22:03:25
अब लंबाई के हिसाब से बढ़ेंगे सिगरेट के दाम

सिगरेट पीने वालों को झटका! अब लंबाई के हिसाब से बढ़ेंगे दाम, जानें आपकी वाली कितनी महंगी? 

एबीएन बिजनेस डेस्क। अगर आप धूम्रपान के शौकीन हैं तो आने वाला महीना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। केंद्र सरकार ने तंबाकू उत्पादों विशेषकर सिगरेट पर लगने वाले टैक्स ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किया है। 

1 फरवरी 2026 से सिगरेट की कीमतें ब्रांड के साथ-साथ उसकी लंबाई के आधार पर तय होंगी। साल 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद तंबाकू टैक्स के क्षेत्र में यह अब तक का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। 

लंबाई बढ़ी तो बढ़ेगा दाम: नया टैक्स गणित 

  • सरकार ने स्पेसिफिक सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी को फिर से प्रभावी तरीके से लागू करने का फैसला किया है। अब प्रति 1,000 सिगरेट स्टिक के आधार पर टैक्स वसूला जायेगा। 
  • 65 मिमी से छोटी (बिना फिल्टर): 2.05 प्रति सिगरेट की एक्साइज ड्यूटी। 
  • 65 मिमी से छोटी (फिल्टर वाली): 2.10 प्रति सिगरेट। 
  • 65 से 70 मिमी (मिड-रेंज): 3.60 से 4.00 प्रति सिगरेट। 
  • 70 से 75 मिमी: 5.40 प्रति सिगरेट। 
  • 75 मिमी से ज्यादा (प्रीमियम): 8.50 या उससे अधिक का टैक्स बोझ। 

2017 के बाद सबसे बड़ी सख्ती 

  • जीएसटी लागू होने के समय सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी को लगभग खत्म कर दिया गया था लेकिन अब इसे बेहद सख्त रूप में वापस लाया गया है। 
    जीएसटी के ऊपर अतिरिक्त बोझ: यह नई ड्यूटी मौजूदा 18% से 40% जीएसटी के ऊपर से लगेगी। 
  • कुल टैक्स: हालांकि सरकार ने कंपेंसेशन सेस हटाया है लेकिन नई एक्साइज ड्यूटी जुड़ने के बाद सिगरेट की कुल कीमत का लगभग 53% हिस्सा केवल टैक्स होगा। 
  • सरकार के इस कड़े फैसले के पीछे क्या है वजह? 

वित्त मंत्रालय के इस कदम के पीछे तीन मुख्य उद्देश्य हैं: 

  1. सार्वजनिक स्वास्थ्य: विश्व स्वास्थ्य संगठन  का मानना है कि तंबाकू उत्पादों को महंगा करना उन्हें छोड़ने का सबसे प्रभावी तरीका है। सरकार चाहती है कि बढ़ती कीमतों के कारण लोग धूम्रपान कम करें। 
  2. वैश्विक मानक: विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिश है कि तंबाकू की कीमत का 75% हिस्सा टैक्स होना चाहिए। भारत अब धीरे-धीरे इसी लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। 
  3. राजस्व में वृद्धि: इस नये टैक्स ढांचे से सरकारी खजाने में बड़ी राशि जमा होगी जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जा सकता है।

Published / 2025-12-26 21:09:26
शेयर मार्केट : सेंसेक्स में 367 अंक की गिरावट

85,041 पर हुआ बंद, निफ्टी 26,042 पर 

एबीएन बिजनेस डेस्क। शेयर बाजार में आज यानी 26 दिसंबर को गिरावट दर्ज की गयी। सेंसेक्स 367.25 अंक गिरकर 85,041.45 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी में भी करीब 99.80 अंक की गिरावट रही, ये 26,042.30 के स्तर पर बंद हुआ। 

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 16 में तेजी और 14 में गिरावट रही। बैंकिंग, आटो और आईटी शेयर में तेजी देखने को मिली। वहीं मीडिया और बैंकिंग शेयर्स में गिरावट रही। 

ग्लोबल मार्केट में तेजी 

एशियाई बाजारों में कोरिया का कोस्पी 0.70% ऊपर 4,137 पर और जापान का निक्केई इंडेक्स 0.96% ऊपर 50,893 पर कारोबार कर रहा है। 
हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग इंडेक्स आज बंद है। वहीं चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.19% बढ़कर 3,952 पर कारोबार कर रहा है । 

26 दिसंबर को अमेरिका का डाउ जोन्स 0.60% ऊपर 48,731 पर बंद हुआ था। वहीं, नैस्डेक कंपोजिट में 0.22% और एस एंड पी 500 में 0.32% की तेजी रही थी। 

24 दिसंबर को बाजार में तेजी रही थी 

शेयर बाजार में 24 दिसंबर को बढ़त रही। सेंसेक्स 116 अंक ऊपर 85,409 पर बंद हुआ। निफ्टी में 35 अंक की तेजी रही, ये 26,142 के स्तर पर बंद हुआ।

Published / 2025-12-26 20:25:23
2026 में कैसी रहेगी बाजार की चाल

निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर? मोतीलाल ओसवाल ने दिया न्यू ईयर आउटलुक 

बजट 2026 को खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे एफवाई 27 की दिशा तय हो सकती है।

एबीएन सेंट्रल डेस्क। भारतीय शेयर बाजार की चाल 2026 में स्थिर रहने और इसमें धीरे-धीरे तेजी आने की उम्मीद है। जबकि साल 2025 में भारतीय बाजार डबल डिजिट की ग्रोथ तक पहुंचने में कामयाब रहे। बेंचमार्क इंडेक्स एनएसई निफ्टी करीब 10% की सालाना बढ़त के साथ आॅल-टाइम हाई के आसपास रहा। 

2025 में बाजार ने कंसॉलिडेशन का दौर देखा, लेकिन 2026 में कॉरपोरेट कमाई में सुधार, निजी निवेश में धीरे-धीरे बढ़त, और सरकारी नीतियों के समर्थन से बाजार को सहारा मिल सकता है। बजट 2026 को खास माना जा रहा है, क्योंकि इससे एफवाई 27 की दिशा तय हो सकती है। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने नये साल के आउटलुक में यह बात कही है। 

2026 में निवेशक क्या करें? 

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए ज्यादा सकारात्मक साल हो सकता है। कमाई में सुधार, नीतिगत समर्थन, और निवेशकों का भरोसा बाजार को सहारा देगा। निवेशकों को सलाह है कि अनुशासन बनाये रखें, मजबूत कंपनियों पर फोकस करें, और बाजार की अस्थिरता को मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में निवेश का मौका समझें। 

ब्रोकरेज का कहना है कि भारत की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ स्टोरी बरकरार है। युवा आबादी, डिजिटल अपनाने में तेजी, घरेलू बचत का फाइनैंशल एसेट्स की ओर जाना और लगातार सुधार से इसे बूस्ट मिल रहा है। अगर अमेरिका के साथ टैरिफ विवाद का समाधान होता है, तो यह बाजार के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत होगा। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैल्यूएशन के लिहाज से निफ्टी-50 का फॉरवर्ड पी-ई करीब 21.5 गुना है, जो इसके लंबे औसत से थोड़ा ही ऊपर है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अब भी महंगे नजर आ रहे हैं। निफ्टी मिडकैप-100 और स्मॉलकैप-100 अपने लंबे औसत के मुकाबले काफी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। इसलिए ब्रोकरेज का कहना है कि मिड और स्मॉलकैप में चुनिंदा और मजबूत कंपनियों पर ही फोकस करना चाहिए। 

निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर 

ब्रोकरेज ने लार्जकैप शेयरों को प्राथमिकता दी है, खासकर उन सेक्टरों में जहां कमाई मजबूत है। इनमें फाइनैंशियल सेक्टर, कंजम्शन से जुड़े सेक्टर, इंडस्ट्रियल एंड कैपिटल गुड्स, आईटी सर्विसेज, हेल्थकेयर और फार्मा शामिल हैं। 

ब्रोकरेज का कहना है कि फाइनैंशल सेक्टर की बात करें तो मजबूत क्रेडिट ग्रोथ है। रिटर्न रेशियो अच्छा और मजबूत बैलेंस शीट है। कंजम्प्शन में कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी दमदार है। आॅटोमोबाइल मांग में सुधार से फायदा उठा सकते हैं। इंडस्ट्रियल्स और कैपिटल गुड्स देखें तो इसे इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एनर्जी ट्रांजिशन से मजबूती मिल रही है। 

आईटी सर्विसेज मीडियम टर्म में सकारात्मक, क्योंकि वैश्विक टेक खर्च में सुधार देखने को मिला है और आगे अक व डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर फोकस बढ़ेगा। वहीं, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर डिफेंसिव ग्रोथ और पोर्टफोलियो को स्थिरता देते हैं। 

2025 बाजार के लिए री-सेट का साल 

2025 भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव और री-सेट का साल रहा। अमेरिका के टैरिफ, ऋकक की बिकवाली, रुपये में कमजोरी, और वैश्विक तनाव ने बाजार पर दबाव बनाये रखा। हालांकि साल के अंत में निफ्टी ने वापसी की और 1 दिसंबर 2025 को 26,325 का रिकॉर्ड स्तर छू लिया। मिडकैप ने सीमित बढ़त दिखायी, जबकि स्मॉलकैप शेयरों में ज्यादा गिरावट देखने को मिली। 

1. आरबीआई का रहा अहम रोल 

2025 में फइक ने चार बार ब्याज दरें घटायीं, कुल 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की कटौती की गयी। रीपो रेट घटकर 5.25 फीसदी पर आ गयी। ब्याज दरों में कटौती के अलावा, आरबीआई ने बाजार में नकदी बढ़ाने पर भी जोर दिया। जून 2025 में कैश रिजर्व रेशियो (सीआरआर) में 1 फीसदी की कटौती का ऐलान किया गया, जिसे चार चरणों में लागू किया गया। इससे बैंकिंग सिस्टम में करीब 2.5 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी आयी। 

इसके साथ ही, आरबीआई ने ओपन मार्केट आपरेशन (ओएमओ) के जरिए भी बाजार में पैसा डाला। दिसंबर 2025 में आरबीआई ने 1 लाख करोड़ के सरकारी बॉन्ड खरीदे, ताकि सिस्टम में लंबे समय तक पर्याप्त नकदी बनी रहे। 

2. मजबूत बनी रही इकॉनमी 

साल 2025 में भारत की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (क्यू2) में देश की जीडीपी 8.2 फीसदी की दर से बढ़ी, जिसकी मुख्य वजह कंजम्प्शन में तेजी रहा। नवंबर 2025 में खुदरा महंगाई (सीपीआई) घटकर 0.71 फीसदी पर आ गयी, जो रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 2 फीसदी के लक्ष्य से काफी नीचे है। इसकी वजह खाने-पीने की चीजों के दाम कम होना और जीएसटी में सुधार रहा। 

इस दौरान भारतीय रुपया कभी-कभी कमजोर जरूर हुआ, लेकिन डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद आरबीआई के समय पर किए गए कदमों से रुपये को सहारा मिला। साल के दौरान सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं में भी बदलाव आया। सरकार ने बड़े कैपेक्स के साथ-साथ अब खपत बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। आयकर में छूट, जीएसटी में बड़े बदलाव और 8वें वेतन आयोग को लागू करने की प्रस्तावित योजना का मकसद घरेलू मांग को बढ़ाना और लोगों के खर्च को प्रोत्साहित करना है। 

जीएसटी सुधारों के तहत पहले की चार दरों की व्यवस्था को आसान बनाकर दो स्लैब (5 फीसदी और 18 फीसदी) में बदला गया है। इसके अलावा कुछ चुनिंदा लग्जरी और सिन प्रोडक्ट्स पर 40 फीसदी की ऊंची दर रखी गयी है। इससे टैक्स व्यवस्था आसान हुई, नियमों का पालन बेहतर हुआ और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उपभोग का भरोसा मजबूत हुआ। 

3. अर्निंग्स रही कमजोर 

अर्निंग्स के मोर्चे पर देखें तो निफ्टी-50 में सुस्त ग्रोथ देखने को मिली। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही (क्यू2) में कंपनियों का मुनाफा (पीएटी) साल-दर-साल सिर्फ 2 फीसदी बढ़ा। यह लगातार छठी तिमाही रही, जब कमाई में कमजोर बढ़ोतरी दर्ज हुई। इस दौर को कमाई से ज्यादा वैल्यूएशन के आधार पर बाजार के ठहराव (कंसोलिडेशन) का समय माना गया। 

हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में कमजोर नतीजों की चिंता बनी रही, लेकिन दूसरी छमाही में कई सेक्टरों में सुधार के संकेत मिले। आयल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसीएस), टेलीकॉम, मेटल्स, टेक्नोलॉजी, एनबीएफसी (लोन कारोबार), सीमेंट और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टरों में बेहतर प्रदर्शन दिखा। इसी वजह से निफ्टी की अर्निंग प्रति शेयर (ईपीएस) के अनुमान वित्त वर्ष 2026 के लिए 1.2 फीसदी और वित्त वर्ष 2027 के लिए 0.5 फीसदी बढ़ाये गये, जिससे आगे कमाई में सुधार की उम्मीद बनी है। 

4. डीआईआई ने दिखाया दम 

2025 में एक अहम बदलाव यह रहा कि डीआईआई (घरेलू निवेशक) की हिस्सेदारी पहली बार डीआईआई (विदेशी निवेशक) से ज्यादा हो गयी। मजबूत घरेलू निवेश और प्राइमरी मार्केट में तेज गतिविधियों की वजह से मार्च 2025 में पहली बार निफ्टी-500 कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी एफआईआई से ज्यादा हो गयी। सितंबर 2025 तक यह रुझान और मजबूत हुआ। इसके विपरीत, विदेशी निवेशक पूरे साल ज्यादातर बिकवाल बने रहे। 20 दिसंबर 2025 तक उनकी कुल बिकवाली करीब 2.31 लाख करोड़ रुपये रही। 

एफआईआई की बिकवाली की वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ना, डॉलर मजबूत होना और कैपिटल का रुख उन बाजारों की ओर जाना रहा, जहां अक और सेमीकंडक्टर से जुड़ी ग्रोथ दिख रही है, जैसे चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया। भारत में भी आई और एफएमसीजी जैसे सेक्टरों में कमजोर कमाई ने विदेशी निवेश को प्रभावित किया। 

हालांकि, साल के आखिर में बिकवाली का दबाव कुछ कम हुआ और दिसंबर 2025 में कई दिनों तक ऋकक नेट खरीदार भी बने। कुल मिलाकर, साल 2025 बाजार के लिए उतार-चढ़ाव और वैश्विक अनिश्चितताओं से भरा रहा, लेकिन इसने वैल्यूएशन और निवेशकों की उम्मीदों को संतुलित करने में मदद की।

Published / 2025-12-26 20:21:37
आपकी पूंजी ही आपका अधिकार

भूली हुई वित्तीय परिसंपत्तियां वापस पाना और नागरिक स्वामित्व को सुदृढ़ करना 

एबीएन सेंट्रल डेस्क। आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक देशव्यापी जागरूकता और सुगमीकरण पहल है जो नागरिकों को बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की पहचान करने और वापस पाने में मदद करती है। यह पहल विनियमित वित्तीय प्रणालियों में बैंकों, बीमा, म्यूचुअल फंड, डिविडेंड, शेयरों और सेवानिवृत्ति लाभों में बिना दावे वाली बचत पर ध्यान देती है। 

वित्तीय सेक्टर विनियामक के साथ वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित, यह अभियान डिजिटल पोर्टल को जिला-स्तरीय सुविधाओं के साथ जोड़ता है। सरकारी विभागों, विनियामकों और वित्तीय संस्थानों के समन्वित प्रयासों से, लगभग 2,000 करोड़ रुपये सही मालिकों को लौटाये जा चुके हैं। 

पीढ़ियों से, भारतीय परिवार बैंक खाता खोलकर, बीमा पॉलिसी खरीदकर, म्यूचुअल फंड में निवेश करके, शेयर से लाभांश कमाकर और सेवानिवृत्ति के लिए पैसे अलग रखकर ध्यान से बचत करते आए हैं। ये वित्तीय निर्णय अक्सर बच्चों की पढ़ाई में सहायता करने, स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकताओें को पूरा करने और वृद्धावस्था में सम्मान का जीवन सुनिश्चित करने के लिए उम्मीद और जिÞम्मेदारी के साथ लिये जाते हैं। 

फिर भी, पिछले कुछ समय से मेहनत से कमाई गई इन बचत के एक बड़े हिस्से पर कोई दावा नहीं किया गया है। यह धन न तो विलुप्त हुआ है, न ही इसका गलत इस्तेमाल हुआ है। यह विनियमित वित्तीय संस्थानों के पास सुरक्षित है, जो जानकारी की कमी, पुराने रिकॉर्ड, रहने की जगह में बदलाव या खोए दस्तावेजों की वजह से अपने असली हकदारों से अलग हो गया है। कई मामलों में, परिवारों को पता ही नहीं होता कि ऐसी परिसंपत्तियां विद्यमान हैं।

आपकी पूंजी, आपका अधिकार, नागरिकों को इन भूली वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ने और यह सुनिश्चत करने की एक देशव्यापी कोशिश है कि जो धन लोगों और परिवारों का है, वह आखिर में उनके पास वापस आ जाये। 

बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियां क्या हैं? 

बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों का निर्माण तब होता है जब वित्तीय संस्थानों के पास रखे पैसे पर खाता धारक या उनके कानूनी वारिस लंबे समय तक दावा नहीं करते। ऐसी परिसंपत्तियों में शामिल हैं : 

  • बैंक डिपॉजिट जैसे सेविंग्स अकाउंट, करेंट अकाउंट, फिक्स्ड डिपॉजिट और रेकरिंग डिपॉजिट जो दस साल या उससे अधिक समय से आॅपरेट नहीं किये गये हैं 
  • बीमा पॉलिसी की राशि जिसका निर्धारित तिथि के बाद भी भुगतान नहीं होता 
  • म्यूचुअल फंड रिडेंपशन से मिली राशि या डिविडेंड जो बैंक अकाउंट में बदलाव, बैंक अकाउंट बंद होना, रिकॉर्ड में बैंक अकाउंट अधूरा होना आदि कारणों से क्रेडिट नहीं हो पाये। 
  • डिविडेंड और शेयर जो बिना दावे के रह जाते हैं और कानूनी अधिकारियों को ट्रांसफर कर दिये जाते हैं 
  • पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ जिनका दावा सामान्य तरीके से नहीं किया जाता 
  • अधिकतर मामलों में, काम के लिए प्रवास, अनुबंध विवरणों में बदलाव, पुराने बैंक खाता बंद होने या परिवार के सदस्यों और कानूनी वारिसों के बीच जानकारी की कमी जैसी आम जिंदगी की घटनाओं की वजह से परिसंपत्तियां बिना दावे के रह सकती हैं। 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल 

इस चुनौती का एक संरचित और नागरिक-केंद्रित तरीके से समाधान करने के लिए, सरकार ने अक्टूबर 2025 में एक राष्ट्रव्यापी जागरूकता और सुविधा अभियान के रूप में आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल आरंभ की। इस पहल को वित्तीय सेक्टर के प्रमुख फंड विनियामकों के सहयोग से वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग द्वारा समन्वित किया गया है, जिसमें शामिल हैं : 

  • भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) 
  • भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) 
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) 
  • निवेशक शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) 
  • पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) 

इसका मुख्य लक्ष्य सरल प्रकियाओं और पारदर्शी प्रणालियों का उपयोग कर उन नागरिकों की पहचान करने, एक्सेस प्रदान करने तथा बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियां प्राप्त करने में उनकी मदद करना है जो कानूनी रूप से उनके हैं। 

बिना दावे वाली धन राशि का परिमाण 

भारत में बिना दावे वाली वित्तीय परिसंपत्तियों की संख्या बहुत अधिक है और यह औपचारिक वित्तीय प्रणाली के कई हिस्सों में फैली हुई है। एक मोटे अनुमान के अनुसार, भारतीय बैंकों के पास कुल मिलाकर लगभग 78,000 करोड़ रुपए के बिना दावे वाले डिपॉजिट हैं। बिना दावे वाली बीमा राशि पॉलिसी से मिलने वाली राशि के लगभग 14,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जबकि म्यूचुअल फंड में बिना दावे वाली रकम लगभग 3,000 करोड़ रुपये है।

इसके अतिरिक्त, बिना दावे वाले डिविडेंड लगभग 9,000 करोड़ रुपये के हैं। कुल मिलाकर, यह धन राशि नागरिकों की उन बिना दावे वाली बचत की मात्रा को रेखांकित करती है जो वित्तीय प्रणाली में सुरक्षित होने के बावजूद उपयोग में नहीं लायी जा रही है। 

बिना दावे वाली परिसंपत्तियां क्यों महत्वपूर्ण हैं 

बिना दावे वाला धन केवल एक वित्तीय संख्या नहीं है। परिवारों के लिए, इसका दुष्परिणाम यह हो सकता है कि उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, आजीविका सहायता या आपातकालीन स्थितियों के लिए आवश्यक फंड सीमित मात्रा में या देर से प्राप्त हो। वरिष्ठ नागरिकों के लिए, इसमें पेंशन या बीमा के लाभ शामिल हो सकते हैं जो आवश्यक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करते हैं। 

प्रणालीगत स्तर पर बिना दावे वाली परिसंपत्तियां नागरिकों और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के बीच संपर्क को कमजोर करती हैं। जब लोग उन धन को प्राप्त करने में विफल रहते हैं जो उनके अपने हैं तो इससे भरोसे, भागीदारी और विश्वास पर असर पड़ता है। आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल के साथ इस मुद्दे को हल करने से न केवल घरेलू वित्त सुदृढ़ होगा, बल्कि वित्तीय संस्थानों की साख और समावेशिता भी मजबूत होगी। 

बिना दावे वाली लावारिस परिसंपत्तियों का पता लगाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म 

बिना दावे वाली बैंक जमाराशियां : यूडीजीएएम पोर्टल 

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा विकसित यूडीजीएएम पोर्टल एक केंद्रीकृत तरीके से सभी सहभागी बैंकों में बिना दावे वाली बैंक जमाराशियों के लिए केंद्रीय खोज की सुविधा प्रदान करता है। जब संबंधित बैंक दावे का निपटान करते हैं, तो यह पोर्टल नागरिकों की पहचान करने में मदद करता है कि बिना दावे वाली  शेष राशि कहां मौजूद हैं। 

अगर बैंक में जमा राशि (डिपॉजिट) पर दस साल या उससे ज्यादा समय तक कोई दावा नहीं करता है, तो उसे डिपॉजिÞटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। हालांकि, वो राशि तब भी कस्टमर का ही रहता है, और कस्टमर या उनके कानूनी वारिस कभी भी इस राशि के लिए दावा कर सकते हैं, इसके लिए कोई समय-सीमा नहीं है। 

बीमा राशि : बीमा भरोसा पोर्टल 

बीमा भरोसा पोर्टल लोगों को बिना क्लेम की गई बीमा पॉलिसी की रकम का पता लगाने में मदद करता है। इसमें पॉलिसीधारक, नॉमिनी और उनके कानूनी वारिसों को बीमा कंपनियों के इंक्वायरी पेज के लिंक मिल जाते है जहां वो यह चेक कर सकते हैं कि उन्हें कोई बीमा राशि मिलनी है या नहीं। 
बीमा की रकम तब अनक्लेम्ड मानी जाती है जब ड्यू डेट से बारह महीने के बाद भी उसका भुगतान नहीं हुआ होता है। 

बीमा की रकम जो दस साल से ज्यादा समय तक अनक्लेम्ड रहती है, उसे सरकार द्वारा मेंटेन किए जाने वाले सीनियर सिटिजन्स वेलफेयर फंड (एससीडब्ल्यूएफ) में हस्तांतरित कर दिया जाता है। इस तरह के हस्तांतरण से बीमा रकम के मालिकाना अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ता है, और लाभार्थी के पास हस्तांतरण की तारीख से 25 साल तक रकम पर दावा करने का अधिकार बना रहता है। 

पॉलिसीधारक, नॉमिनी या कानूनी वारिस, एससीडब्ल्यूएफ में बीमा रकम हस्तांतरित होने के बाद भी, तय प्रक्रिया के हिसाब से दावा शुरू करने के लिए संबंधित बीमा कंपनी से संपर्क कर सकते हैं। बीमा की दावा रहित रकम पर दावा करने के लिए किसी तरह का कोई शुल्क नहीं है। 

यह व्यवस्था बचाव के उपायों को भी बढ़ावा देता है, जिसमें कॉन्टैक्ट विवरण को अद्यतन करना, नॉमिनेशन रजिस्टर और अपडेट करना, परिवार के सदस्यों को बीमा पॉलिसी के बारे में बताना, और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए पॉलिसी दस्तावेज का फिजिकल या डिजिटल रिकॉर्ड रखना शामिल है। आसान पहचान के लिए पॉलिसी को आधार और पैन से भी लिंक किया जा सकता है। 

म्यूचुअल फंड निवेश : मित्र पोर्टल 

एमएफ सेंट्रल पर होस्ट किया गया म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट ट्रेसिंग एंड रिट्रीवल असिस्टेंट (एमआईटीआरए-मित्र) निवेशकों को दावा रहित और निष्क्रिय इनएक्टिव म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स का पता लगाने में मदद करता है। यह प्लेटफॉर्म निवेशकों को बताए गए सर्च पैरामीटर्स का इस्तेमाल करके उस म्यूचुअल फंड की पहचान करने की सुविधा देता है जिसमें ऐसे निवेश हो सकते हैं। 

फोलियो नंबर एक यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर है जो म्यूचुअल फंड इंस्टीट्यूशन अपने निवेशकों को किसी खास योजना में उनकी संपत्ति को ट्रैक करने के लिए देते हैं। जब रिडेम्पशन, मैच्योरिटी प्रोसीडिंग्स, या डिविडेंड्स निवेशक के बैंक खाता में बदलाव या उसके बंद होने, अधूरे रिकॉर्ड, पुराने संपर्क विवरण, या केवाईसी अनुपालन लंबित होने जैसी वजहों से क्रेडिट नहीं होते हैं, तो म्यूचुअल फंड की रकम बिना दावे की रह जाती है। 

ऐसे मामलों में, बीमा रकम डूबती नहीं है; ड्यू डेट पर, इसे तय अनक्लेम्ड स्कीम में हस्तांतरित कर दिया जाता है, जहां यह तब तक रहता है जब तक इसे क्लेम नहीं किया जाता। इसके अलावा, म्यूचुअल फंड फोलियो को निष्क्रिय माना जाता है अगर निवेशक दस साल तक कोई लेन-देन नहीं करता है, भले ही फोलियो में यूनिट बैलेंस मौजूद हो। 

एमआईटीआरए-मित्र बिना दावे वाले या निष्क्रिय निवेश की पहचान करने में मदद करता है, जिसके बाद निवेशक दावा प्रक्रिया शुरू करने के लिए संबंधित एसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) या रजिस्ट्रार एंड ट्रांसफर एजेंट (आरटीए) से संपर्क कर सकते हैं। 

यह व्यवस्था बचाव के उपायों पर भी जोर देता है, निवेशक को केवाईसी विवरण, बैंक खाते की जानकारी और सम्पर्क रिकॉर्ड अद्यतन रखने के लिए बढ़ावा देता है, और भविष्य में दावा रहित निवेश से बचने के लिए बैंक खाता स्टेटमेंट को नियमित तौर पर देखते रहने के लिए कहता है। 

लाभांश और शेयर : आईईपीएफए पोर्टल 

बिना दावे वाले डिविडेंड और शेयर को, लगातार सात साल तक बिना पेमेंट या बिना दावे के रहने के बाद, कंपनियां इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड अथॉरिटी (आईईपीएफए) को हस्तांतरित कर देती हैं। आईईपीएफए पोर्टल एक सर्च सुविधा देता है जिससे लोग पैन, नाम या कंपनी का नाम और डीमैट आईडी/फोलियो नंबर जैसी जानकारी डालकर बिना दावे वाले डिविडेंड, शेयर या डिपॉजिट का पता लगा सकते हैं। 

आईईपीएफए के पास दावा करने का कोई शुल्क नहीं लगता है, और फंड में हस्तांतरित की गई रकम को क्लेम करने की कोई खास समय-सीमा नहीं है। सही क्लेम करने वाला रकम हस्तांतरित हो जाने के बाद किसी भी समय रिफंड के लिए आवेदन कर सकता है। 

पहल को अमल में लाना 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार पहल नागरिकों तक सीधे पहुंचने पर जोर देती है, और देश भर में व्यापक और सबको साथ लेकर चलने वाली कवरेज पक्का करने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को व्यवहार में लाने से जोड़ती है। 

अक्टूबर 2025 में शुरू की गयी इस पहल को अक्टूबर से दिसंबर 2025 तक तीन महीने के देशव्यापी अभियान के तौर पर लागू किया गया, जिसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को शामिल किया गया। यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क जागरूकता (अवेयरनेस), पहुंच (एक्सेसिबिलिटी) और कार्रवाई (एक्शन) पर आधारित है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सरल और पारदर्शी प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी यथोचित बचत की पहचान करने, उस तक पहुंचने और उसे पुन: प्राप्त करने में सक्षम बनाना है। 

अक्टूबर से 19 दिसंबर 2025 तक 668 जिलों में सुविधा सेवा शिविर लगाये गये। इन शिविरों में जन प्रतिनिधि, जिला प्रशासन, और बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के अधिकारियों ने प्रमुखता से हिस्सा लिया, जिससे स्थानीय स्तर पर समन्वित और असरदार सर्विस डिलीवरी दुरूस्त हुई। 

ये शिविर राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों और राज्य स्तरीय बीमा समितियों के जरिए जिले के प्रमुख बैंकों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों के साथ मिलकर लगाये गये थे। 

हेल्पडेस्क और डिजिटल कियोस्क के जरिए लोगों को दावा रहित वित्तीय परिसंपत्तियों को चेक करने और आसानी से दावा शुरू करने में मदद की गयी। 
एनरोल करने और केवाईसी और री-केवाईसी फॉर्मैलिटी पूरी करने के लिए भी बढ़ावा दिया गया, ताकि औपचारिक वित्तीय प्रणाली के साथ उनका लिंक मजबूत हो सके। 

जिला स्तरीय परिणाम 

जिला स्तर पर इसे लागू करने से देश के मकसद स्थानीय स्तर पर ऐसे नतीजों में बदले जिन्हें मापा जा सके। बंद और बिना दावे वाले वित्तीय खाते की पहचान की गयी, दावे शुरू किये गये और कई मामलों में फायदों को वापस किया गया, जिसमें आउटरीच एक्टिविटी के दौरान मौके पर ही सेटलमेंट भी शामिल था। बैंकों, बीमा कंपनियों और दूसरे वित्तीय संस्थान के एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर शामिल होने से समन्वित सर्विस डिलीवरी मुमकिन हुई, लोगों के बीच बातचीत आसान हुई और प्रोसेस में होने वाली देरी कम हुई। 

प्राप्त की गयी प्रगति 

अभियान के दौरान सरकारी विभागों, नियामकों और वित्तीय संस्थानों की मिलकर की गयी कोशिशों से अच्छे नतीजे मिले। लगभग 2,000 करोड़ रुपये उनके असली मालिकों को लौटाये गये, जिससे उन परिवारों को वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ा गया जिन पर लंबे समय से कोई दावा नहीं कर रहा था। 

वित्तीय वसूली के अलावा, इस पहल ने नामांकन, दस्तावेजीकरण और रिकॉर्ड रखने के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की, जिससे घर के स्तर पर ज्यादा असरदार वित्तीय योजना में मदद मिली। 

निष्कर्ष 

आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक नागरिक-केंद्रित पहल है जो लोगों और परिवारों को उन वित्तीय परिसंपत्तियों से फिर से जोड़ती है जिनपर उनका अधिकार बनता है। जागरूकता, आसान एक्सेस और समन्वित सुविधा सेवा को मिलाकर, यह पहल वित्तीय प्रणाली में लंबे समय से चली आ रही कमी को दूर करती है और यह पक्का करती है कि बिना दावे वाली बचत की पहचान की जाये और उनके असली मालिकों को लौटायी जाये। 

बड़े स्तर पर देखा जाये तो यह पहल वित्तीय संस्थान में भरोसा बढ़ाती है, वित्तीय समावेशिता को मजबूत करती है और जिम्मेदार वित्तीय तरीकों को बढ़ावा देती है। यह पक्का करके कि व्यक्तिगत बचत आसानी से मिल सकें, सुरक्षित रहें और हस्तांतरित हो सकें, आपकी पूंजी, आपका अधिकार एक ज्यादा पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक-प्रथम वित्तीय प्रणाली में योगदान देता है।

Published / 2025-12-20 20:28:50
दोपहिया वाहनों पर ग्रामीण बाजार का दबदबा

त्योहारी सीजन में दोपहिया वाहनों की बिक्री चमकी, ग्रामीण बाजार ने बढ़ायी रफ्तार 

एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत में दोपहिया वाहन उद्योग इस वित्त वर्ष 2026 में 6 से 9 फीसदी की वृद्धि के साथ मजबूत वापसी कर रहा है। 
भारत के घरेलू दोपहिया उद्योग में चालू वित्त वर्ष 2026 में 6 से 9 फीसदी की सालाना वृद्धि होने की उम्मीद है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने यह जानकारी दी है।

इक्रा के मुताबिक माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में की गई कटौती, शहरी उपभोग में उछाल और सामान्य मॉनसून के कारण ग्रामीण आय में मजबूती से इसे बल मिलेगा। त्योहारों के दौरान और उसके बाद शोरूम में ग्राहकों की निरंतर आवाजाही के कारण डीलरों को वाहनों की थोक बिक्री भी इस साल नवंबर में 19 फीसदी बढ़ गई और 18 लाख गाड़ियां बिक गयी। 

इक्रा ने कहा कि हाल में जीएसटी दरों में की गई कटौती और मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) की प्रचार पेशकशों ने खुदरा मांग में कमी के बावजूद डीलरों को स्टॉक जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया। 

इसके विपरीत, इस महीने खुदरा बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 3.1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी, जो इस वित्त वर्ष में त्योहारी सीजन जल्द शुरू होने और अक्टूबर में रिकॉर्ड बिक्री के बाद बने उच्च आधार के प्रभाव को दर्शाती है। मगर जीएसटी दरों में कटौती को लेकर सकारात्मक माहौल और शादी के सीजनमें मांग के कारण डीलरों की पूछताछ निरंतर बनी रही। 

फेडरेशन आफ आटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (फाडा) के अनुसार, दशहरा और दीवाली के बीच 42 दिनों की त्योहारी अवधि में दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में पिछले साल के मुकाबले इस साल 22 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गयी। ग्रामीण धारणा में सुधार, नकदी की दमदार स्थिति और कर दरों में कमी से इसे बल मिला है। 

डीलरों ने इस सीजन को हाल के वर्षों में सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने मोटरसाइकिलों और स्कूटरों की मजबूत मांग के साथ-साथ इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों में उपभोक्ताओं की बढ़ती रुचि का हवाला दिया। फाडा ने कहा कि त्योहारी मांग और नीतिगत समर्थन के मेल से इस खंड की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। 

फाडा के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खुदरा बिक्री में एक साल पहले के मुकाबले 2.5 फीसदी की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे बिक्री की संख्या भी पिछले साल की 1,43,887 गाड़ियों से घटकर 1,16,982 गाड़ियां रह गयी।

Published / 2025-12-09 20:06:58
शेयर मार्केट : सेंसेक्स 436 और निफ्टी 120 अंक गिरा

शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 436 अंक गिरा, निफ्टी 25,839 पर बंद 

एबीएन बिजनेस डेस्क। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बाद कुछ समय संभला, लेकिन ट्रेडिंग के आखिरी सत्र में बाजार बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। 

विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, रुपए में कमजोरी, अमेरिका-भारत ट्रेड तनाव और फेडरल रिजर्व की बैठक को लेकर अनिश्चितता ने बाजार पर बड़ा दबाव डाला। बीएसई सेंसेक्स 436 अंक गिरकर 84,666 पर बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 120 अंक फिसलकर 25,839 पर बंद हुआ। 

दिनभर की बिकवाली में निवेशकों की संपत्ति को भारी नुकसान हुआ। बीएसई का मार्केट कैप एक ही दिन में 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया। अगर पिछले सत्र के नुकसान को जोड़ दिया जाये, तो दो दिनों में निवेशक 12 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा चुके हैं। 

गिरावट के बड़े कारण  

  1. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली : लगातार कई दिनों से एफआईआई बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा और शेयर कीमतें नीचे आयीं। 
  2. ट्रंप की टैरिफ धमकी : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के चावल पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी, जिससे ट्रेड तनाव बढ़ा और निवेशकों की सेंटिमेंट कमजोर हुई। 
  3. फेडरल रिजर्व की बैठक को लेकर अनिश्चितता : फेड की नीति बैठक से पहले निवेशकों में सावधानी रही। यह चिंता थी कि फेड दरों में कटौती की गति को धीमा कर सकता है। 
  4. रुपये में कमजोरी : रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 90 के पार चला गया। इससे विदेशी निवेश महंगा होता है और बाजार में दबाव बढ़ता है। 
  5. वैश्विक बाजारों से कमजोर संकेत : एशियाई बाजार—जैसे हांगकांग, कोरिया और चीन—सभी गिरावट में थे। अमेरिकी बाजार भी लाल निशान में बंद हुए, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।

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