एबीएन बिजनेस डेस्क। भारतीय शेयर बाजार आज बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स-निफ्टी आज दिन भर लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 852.49 अंक (1.09%) गिरकर 77,664.00 पर और निफ्टी 205.05 अंक (0.84%) टूटकर 24,173.05 पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच सोमवार को निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने से घरेलू शेयर बाजार उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में लगभग स्थिर स्तर पर बंद हुए। बीएसई का 30 शेयरों वाला मानक सूचकांक सेंसेक्स 26.76 अंक यानी 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 78,520.30 अंक पर बंद हुआ।
कारोबार के दौरान यह 78,942.45 के ऊपरी और 78,203.30 के निचले स्तर तक भी गया। वहीं, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 11.30 अंक यानी 0.05 प्रतिशत बढ़कर 24,364.85 अंक पर बंद हुआ।
सेंसेक्स की कंपनियों में ट्रेंट, भारतीय स्टेट बैंक, एशियन पेंट्स, एनटीपीसी, बजाज फाइनेंस और इंटरग्लोब एविएशन (यानी इंडिगो) के शेयर प्रमुख रूप से लाभ में रहे। इसके उलट, लार्सन एंड टुब्रो, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एचसीएल टेक और कोटक महिंद्रा बैंक के शेयर नुकसान में रहे।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 4.76 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद गहराने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। हालांकि, निवेशक पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम को पूर्ण संघर्ष की शुरूआत के बजाय संभावित वार्ता रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
इसके साथ ही नायर ने कहा कि संघर्ष विराम समाप्त होने की समयसीमा नजदीक होने से बाजार में सतर्कता बनी हुई है। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग बढ़त के साथ बंद हुए। यूरोपीय बाजार दोपहर के सत्र में गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को मजबूत बढ़त के साथ बंद हुए थे।
शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 683.20 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर खरीदे। बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 504.86 अंक चढ़कर 78,493.54 अंक और निफ्टी 156.80 अंक बढ़कर 24,353.55 अंक पर बंद हुआ था।
एबीएन बिजनेस डेस्क। आज शेयर बाजार की शुरूआत हरे निशान पर हुई। सेंसेक्स 78,677 पर खुला और 78730 का हाई बनाया। निफ्टी भी 24385 के स्तर पर खुला था। हालांकि कारोबार के दौरान इस तेजी पर ब्रेक लग गया और मार्केट लाल निशान पर ट्रेड करता दिखा। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 122 अंक गिरकर 77,988 के लेवल पर आ गया जबकि निफ्टी में 34 अंक की गिरावट रही, ये फिसलकर 24,196 पर बंद हुआ।
एबीएन सेंट्रल डेस्क। देश में महंगाई के मोर्चे पर मार्च महीने में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गयी है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.40% हो गयी, जो फरवरी में 3.21% थी। खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण रही।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण महंगाई दर 3.63% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह अपेक्षाकृत कम 3.11% दर्ज की गयी। खाद्य महंगाई में भी इजाफा देखने को मिला। मार्च में खाद्य महंगाई दर 3.87% रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह 3.96% और शहरी इलाकों में 3.71% दर्ज की गयी, जो यह दर्शाता है कि गांवों में खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव ज्यादा बना हुआ है। वहीं, आवास क्षेत्र में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही। मार्च 2026 में हाउसिंग इंफ्लेशन 2.11% आंकी गयी। इसमें ग्रामीण आवास महंगाई 2.54% और शहरी आवास महंगाई 1.95% रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में उतार-चढ़ाव आने वाले महीनों में महंगाई की दिशा तय करेगा। फिलहाल महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक के तय लक्ष्य दायरे के भीतर बनी हुई है, जिससे नीतिगत स्तर पर राहत की स्थिति बनी हुई है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। भारत के शेयर बाजारों में बुधवार, 8 अप्रैल को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 2946.32 (3.95%) अंक उछलकर 77,562.90 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 873.70 (3.78%) अंक चढ़कर 23,997.35 के स्तर पर बंद हुआ।
इस तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और ग्लोबल बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत प्रमुख कारण रहे। सुबह 10:45 बजे के करीब सेंसेक्स 2,919 अंक (3.91%) बढ़कर 77,535 पर कारोबार कर रहा था, वहीं निफ्टी 868 अंक (3.76%) चढ़कर 23,992 पर पहुंच गया।
एबीएन बिजनेस डेस्क। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक आक्रामक बयान ने गुरुवार को दिनया भर के बाजारों को हिलाकर रख दिया था। भारत भी इस वैश्विक झटके से अछूता नहीं रहा, भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार बंद होने के कुछ समय पहले बाजार ने शानदार रिकवरी की।
सुबह की बड़ी गिरावट के बाद बीएसई सेंसेक्स दिन के निचले स्तर से करीब 1600 अंक उछलकर हरे निशान में पहुंच गया, जबकि निफ्टी 50 ने भी वापसी करते हुए 22,600 का स्तर दोबारा हासिल कर लिया। बीएसई सेंसेक्स 185.23 अंक उछल कर 73,319.55 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी में 33.70 अंक की तेजी आयी, ये 22,713.10 के स्तर पर बंद हुआ।
एबीएन बिजनेस डेस्क। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच सोमवार को घरेलू शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,700 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 50 22,500 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1635.67 अंक (2.22%) गिरकर 71,947.55 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 488.20 अंक (2.14%) टूटकर 22,331.40 पर आ गया। इस गिरावट से बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का मार्केट कैप करीब 8 लाख करोड़ रुपए घट गया यानि निवेशकों को 8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ।
सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे। एक्सिस बैंक के शेयरों में 3% से ज्यादा की गिरावट आई। ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 1.95% और स्मॉलकैप 2.31% गिरा।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में सोमवार को रुपया पहली बार 95 प्रति डॉलर के स्तर के पार पहुंच गया। यह अब तक का सबसे निचला स्तर है, जिससे बाजार में चिंता बढ़ गयी है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। मार्च महीने में होम लोन लेने की सोच रहे ग्राहकों के लिए राहत भरी खबर है। देश के कई बैंकों में होम लोन की शुरूआती ब्याज दरें करीब 7.10 प्रतिशत से शुरू हो रही हैं। हालांकि, यह दर उधारकर्ता की प्रोफाइल, क्रेडिट स्कोर और लोन की राशि के आधार पर अलग अलग हो सकती है। यह जानकारी वित्तीय प्लेटफॉर्म के आंकड़ों से सामने आयी है।
अलग अलग बैंकों में लोन की राशि के हिसाब से ब्याज दरों में बदलाव देखा जा रहा है। 30 लाख रुपये तक, 30 से 75 लाख रुपये और 75 लाख रुपये से अधिक के लोन पर दरें अलग हो सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, स्टेट बैंक आॅफ इंडिया में सभी श्रेणियों में दरें लगभग 7.25 से 8.70 प्रतिशत तक हैं।
मार्च महीने में होम लोन बाजार में निजी बैंकों की भी मजबूत मौजूदगी बनी हुई है। हालांकि इन बैंकों की शुरूआती ब्याज दरें सरकारी बैंकों के करीब हैं, लेकिन इनकी दरों में अंतर ज्यादा देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण जोखिम आधारित मूल्य निर्धारण है, जिसके तहत अलग अलग ग्राहकों के लिए ब्याज दरें उनके क्रेडिट प्रोफाइल के अनुसार तय की जाती हैं।
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