नई दिल्ली। बीते दिनों लगातार बढ़त के बाद सोमवार को सोना-चांदी फिर सस्ते हुए। MCX पर 4:30 बजे शाम को सोना 203 रुपये कम होकर प्रति 10 ग्राम 47,720 रुपये पर आ गया। सफारा बाजार की बात करें तो इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार सोना 92 रुपये सस्ता होकर 47,771 पर आ गया।चांदी MCX पर शाम 4:30 बजे 504 रुपये सस्ती होकर 68,793रुपये प्रति किलो पर आ गई। इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट के अनुसार, सराफा बाजार में भी चांदी में मामूली गिरावट आई। 148 रुपये सस्ती होकर 67,641 रुपये प्रति किलो पर आ गई। IIFL सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट (कमोडिटी एंड करेंसी) अनुज गुप्ता कहते हैं कि अभी सोने में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनी हुई है। आने वाले दिनों में सोने की चमक बढ़ सकती है। यह साल के आखिर तक फिर 55 हजार तक जा सकता है। इसीलिए निवेशकों को इस गिरावट से घबराने की जरूरत नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोमवार को सोने की चमक फीकी पड़ी है। यह 1,799 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। शुक्रवार को ये 1,810 डॉलर पर आ गया था। आनेवाले दिनों में यह फिर बढ़ सकता है। पिछले साल जब कोरोना अपने चरम पर था तक सोने का भाव अपने ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। अगस्त 2020 में 56,200 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। उस समय कोरोना महामारी के कारण निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ था। इस समय फिर एक बार ऐसा ही माहौल बनने लेगा है।
नयी दिल्ली। आयकर विभाग ने देश के करीब 17.92 लाख से अधिक करदाताओं को 37,050 करोड़ रुपये से अधिक का रिफंड जारी कर दिया है। विभाग ने 1 अप्रैल 2021 से 05 जुलाई 2021 तक के लिए यह रिफंड जारी किया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 37,050 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड में से 16,89,063 मामलों में 10,408 करोड़ रुपये का इनकम टैक्स रिफंड और 1,03,088 मामलों में 26,642 करोड़ रुपये का कॉरपोरेट टैक्स रिफंड जारी किया गया है। आम तौर पर आयकर रिटर्न सेंट्रलाइज प्रोसेसिंग सेंटर से 20 से 45 दिन के अंदर टैक्स रिफंड हो जाता है। अगर आपका टैक्स पर रिटर्न अभी तक नहीं मिला है, तो आप यह बड़ी ही आसानी से चेक कर सकते हैं कि आखिर आपका रिफंड किन कारणों से आप तक नहीं पहुंच सका है। अगर आप आईटीआर दाखिल करते समय गलत फार्म भर दिए हैं, तब भी आपको समय पर पैसा नहीं आता है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के नए नियमों के अनुसार, अगर आप बैंक अकाउंट की जानकारी गलत देते हैं, तब भी आपका पैसा रिफंड नहीं होता है। साथ ही, हमें ध्यान रखना चाहिए कि हमारा पैन नंबर अकाउंट से जुड़ा हो। अब अगर आपको दो महीने के अंदर रिटर्न को लेकर कोई जानकारी नहीं मिलती है, तो सबसे पहले आप अपने आईटीआर को चेक कर लें। कई बार जल्दबाजी में या फिर अन्य वजहों से आप रिटर्न फाइल करते वक्त गलती कर बैठते हैं। ऐसे स्थिति में आपका रिटर्न वक्त पर नहीं आता है। कई बार हमें कुछ अतिरिक्त सूचनाएं देनी होती हैं या फिर इनकम टैक्स रिटर्न को रिफंड करने के लिए कुछ नई जानकारी मांगता है। ऐसे में समय पर रिटर्न नहीं आने पर यह जरूर चेक कर लें कि कहीं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपसे कुछ नई जानकारी तो नहीं मांग रहा है। ऐसे दस्तावेज को जल्द से जल्द जमा कर देना चाहिए। कई बार ज्यादा रिटर्न क्लेम करने पर भी आपको रिटर्न का पैसा नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति में आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से कोई न कोई जानकारी जरूर दी जाएगी। ऐसी स्थिति में आप अपने दस्तावेज फिर से चेक करें। अगर सबकुछ सही तो आप फिर से क्लेम कर सकते हैं, लेकिन अगर गलत है, तो आप नई रकम की डिमांड कर सकते हैं।
नई दिल्ली। देश में कच्चे इस्पात का उत्पादन सालाना आधार पर मई में 46.9 प्रतिशत बढ़कर 92 लाख टन रहा। विश्व इस्पात संघ (वर्ल्ड स्टील) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी दी। पिछले वर्ष मई में कच्चे इस्तपाल का उत्पादन 58 लाख टन था। वर्ल्ड स्टील ने कहा, विश्व इस्पात संघ (वर्ल्ड स्टील) को जानकारी देने वाले 64 देशों में आलोच्य माह के दौरान कच्चे इस्पात उत्पादन 16.5 प्रतिशत बढ़कर 17.44 करोड़ टन रहा। रिपोर्ट के अनुसार मई में चीन में कच्चे इस्पात का उत्पादन 6.6 प्रतिशत बढ़कर 9.95 करोड़ टन रहा जो एक साल पहले इसी महीने में 9.23 करोड़ टन था। वर्ल्ड स्टील के अनुसार मई में जापान का कच्चा इस्पात उत्पादन मई, 2020 के 59 लाख टन के मुकाबले 84 लाख टन पर पहुंच गया। आंकड़ों के अनुसार अमेरिका का उत्पादन मई 2020 के 42 लाख टन से बढ़ कर 72 लाख लाख टन रहा। इसके अलावा रूस का मई का उत्पादन 66 लाख टन, दक्षिण कोरिया का 60 लाख टन, जर्मनी का 35 लाख टन, ईरान का 26 लाख टन तथा तुर्की और ब्राजील का कच्चे इस्पात का उत्पादन 32-32 लाख टन रहा। विश्व इस्पात संघ के सदस्य वैश्विक इस्पात उत्पादन में 85 प्रतिशत योगदान करते हैं।
एबीएन बिजनेस डेस्क। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने कहा है कि 5जी प्रौद्योगिकी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह पूरी तरह गलत है। अभी तक जो भी प्रमाण उपलब्ध हैं उनसे पता चलता है कि अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकी पूरी तरह सुरक्षित है। सीओएआई ने इस बात पर जोर दिया कि 5जी प्रौद्योगिकी पासा पलटने वाली होगी और इससे अर्थव्यवस्था और समाज को जबर्दस्त फायदा होगा। सीओएआई रिलायंस जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने कहा कि भारत में दूरसंचार क्षेत्र में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक विकिरण सीमा को लेकर पहले ही कड़े नियम हैं। वैश्विक रूप से मान्य मानकों की तुलना में भारत में नियम अधिक सख्त हैं। सीओएआई के महानिदेशक एस पी कोचर ने कहा, वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य मानक की तुलना में भारत में सिर्फ 10 प्रतिशत विकिरण की अनुमति है। विकिरण और उसके प्रभाव को लेकर जो भी चिंता जताई जा रही है वह सही नहीं है। ये भ्रम फैलाने वाली आशंकाएं हैं। जब भी कोई नई प्रौद्योगिकी आती है, तो ऐसा ही होता है।
मुंबई। देश में सभी को कोरोना की वैक्सीन लगाने पर 3.70 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम खर्च करना होगा। इसमें उत्तर प्रदेश को सबसे ज्यादा खर्च करना होगा। उसे 67 हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड से निपटने के लिए देश की पूरी आबादी के कुल वैक्सीन पर यह खर्च आएगा। यह तब होगा जब यह मान लिया जाए कि वैक्सीन की कीमत 360 रुपये से 2900 रुपये के बीच होगी। रइक ने रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि यदि हम यह भी मान लें कि केंद्र राज्यों को 50% टीके देता है तो राज्यों के लिए बाकी 50% खुद खर्च करना होगा। इसके मुताबिक, सिक्किम को वैक्सीन पर 20 करोड़ रुपए खर्च करना होगा। हालांकि यह परिस्थितियां एकदम एक्सट्रीम केसेस में है और सही कीमत के आधार पर है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि हम इस परिदृश्य का विश्लेषण 20 प्रमुख राज्यों के वित्त वर्ष 2022 के कुल खर्च के साथ मैप करते हैं तो 2900 रुपए की वैक्सीन के आधार पर कुल खर्च का 16% बिहार के लिए होगा। उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों के लिए यह 12% होगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि वैक्सीन की इतनी लागत तो जरूर ही होगी। क्योंकि वैक्सीन की अधिकतम लागत भी 3.7 लाख करोड़ रुपए होगी। हालांकि यह 5.5 लाख करोड़ रुपए के राजस्व नुकसान से काफी कम है। यह नुकसान कोरोना की इस लहर के लॉकडाउन के अनुमान पर है। रइक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसका पेमेंट रुपये में किया जाएगा। इस वजह से इसका असर हमारे डॉलर के रिजर्व पर अवश्य पड़ेगा। हालांकि, इस तरह के पेमेंट संभावित रूप से भारत में नए निवेश को भी फायदा दे सकते हैं, क्योंकि निवेशक इस तरह के बड़े पैमाने पर वैक्सीनेशन में भारी फायदा कमा सकते हैं। दूसरी लहर कमजोर हो रही है। कहा कि पिछले 7 दिनों के नए मामलों के आंकड़े देखें तो यह पता चलता है कि कोविड की दूसरी लहर धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है। इसके अलावा, हर रोज कोरोना के जितने केस आ रहे हैं उससे कहीं ज्यादा लोग ठीक भी हो रहे हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, नए मामलों में गांवों के जिलों की हिस्सेदारी अप्रैल 2021 के अंत में 45.5% से बढ़कर 52.9% हो गई है। यह पहली लहर के दौरान 53.7% के पीक से थोड़ा कम है। हालांकि, सितंबर 2020 की तुलना में आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे कुछ राज्यों में स्थिति मामूली रूप से बेहतर है। चिंता यह है कि लॉकडाउन से जुड़े प्रतिबंधों के बढ़ने से मई महीने में आर्थिक गतिविधियों पर भारी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
एबीएन डेस्क। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री ने घरेलू उड़ानों का किराया बढ़ाने पर रोक की सीमा 31 मई 2021 तक कर दी है। मिनिस्ट्री ने बताया कि अगले महीने के अंत तक 80 फीसदी एयरलाइन कैपेसिटी को भी बरकरार रखा जाएगा। एविएशन मिनिस्ट्री ने सोमवार को यह जानकारी दी। एविएशन मिनिस्ट्री की तरफ से यह फैसला ऐसे समय में आया है जब एयरलाइन कंपनियों ने सरकार ने अपील की है कि कैपेसिटी घटाकर 60 फीसदी कर दिया जाए क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बुकिंग घट गई है। अप्रैल की शुरुआत में एविएशन कंपनियों ने मदद के लिए सरकार का दरवाजा खटखटाया था। ऐसे समय में जब एविएशन कंपनियों का बिजनेस सुधरने लगा था, तब संक्रमण की दूसरी लहर ने फिर से उन्हें बेपटरी कर दिया है। एयरलाइन कंपनियों ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के सामने तीन मांगें रखी थीं।पहली, वित्तीय मदद ताकि उनका कारोबार चलता रहे। दूसरी, कैपेसिटी कैप मौजूदा 80 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दिया जाए। तीसरी, सरकार लोअर फेयर लिमिट को सख्ती से लागू कराए। रेटिंग एजेंसी इक्रा के मुताबिक, अप्रैल में एयर पैसेंजर ट्रैफिक की ग्रोथ में 15 से 17% की गिरावट आ सकती है। मई 2020 के बाद से घरेलू पैसेंजर का ट्रैफिक फरवरी में 64% पर पहुंच गया था। मार्च 2021 में रोजाना औसतन 2.49 लाख यात्रियों ने फ्लाइट से यात्रा की है। 6 अप्रैल से 11 अप्रैल के दौरान मार्च की तुलना में इसमें 12% की अचानक गिरावट आई। देश में फैली कोरोना महामारी के बीच घरेलू एयरलाइन कंपनी विस्तारा ने डॉक्टरों और नर्सों के लिए खास ऑफर निकाला है। कंपनी ने कोविड महामारी के इस संकट काल में डॉक्टरों और नर्सों को देशभर में फ्री आने-जाने की सुविधा देने का ऐलान किया है। सिविल एविएशन मिनिस्ट्री की ज्वाइंट सेक्रेटरी ऊषा पाधी को लिखे पत्र में कंपनी ने इस ऑफर के बारे में जानकारी दी है। इसके अलावा कंपनी ने कहा कि संकट के समय में हम इन वॉरियर्स की सभी सुविधाओं का ध्यान रखेंगे। ऊषा पाधी ने अपने ट्वीट में विस्तारा के इस लेटर का हवाला देते हुए कहा है कि विस्तारा सरकारी संगठनों और अस्पतालों की तत्काल जरूरत को पूरा करने के लिए एयर लॉजिस्टिक्स सुविधा देने के लिए तैयार है। इसके अलावा कंपनी ने कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में डॉक्टरों और नर्सों की मुफ्त हवाई यात्रा का प्रस्ताव रखा है। आइए हम मिलकर इस संकट का मुकाबला करें।
कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से सहमे उद्योग से वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण लगातार बातचीत कर रही हैं। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में सतत वृद्धि को बनाए रखने के लिए सरकार और उद्योगों के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। हम महामारी से निपटने के साथ अर्थव्यवस्था बचाने की भी कोशिश कर रहे हैं। उद्योग संगठन चैंबर ऑफ कॉमर्स के सेमीनार में वित्तमंत्री ने कहा, महामारी की दूसरी लहर के बावजूद केंद्र सरकार कई ऐसे कदम उठा रही है, जिससे अर्थव्यवस्था में सुधार को सुनिश्चित किया जा सके। संकट के बीच सतत वृद्धि हासिल करने के लिए उद्योग जगत का साथ आना जरूरी है। सरकार और उद्योग के बीच पूरा भरोसा होना चाहिए। उद्योग जगत को यह महसूस करना होगा कि हम उनकी बेहतरी के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। हमारे बीच अविश्वास का कोई कारण नहीं होना चाहिए। वित्तमंत्री ने रिजर्व बैंक को सरकार का महत्वपूर्ण और भरोसेमंद अंग बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और केंद्रीय बैंक साथ मिलकर अर्थव्यवस्था और देश की बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं। हमारी सरकार ने पहले जो कदम उठाए थे, उसका नतीजा है कि दूसरी लहर के बावजूद अर्थव्यवस्था सुधार की राह पर है। सरकार ने पिछले साल 70 दिन का लंबा लॉकडाउन लगाया था। सरकार लॉकडाउन के पक्ष में बिलकुल नहीं सीतारमण ने एक बार फिर दोहराया कि पिछले साल की तरह सरकार देशभर में एकबारगी लॉकडाउन करने के पक्ष में बिलकुल नहीं है। उन्होंने कहा कि इस कदम से प्रवासी मजदूरों पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। अभी सेंटिमेंट में ज्यादा कमी नहीं आई है। लिहाजा हम उद्योग जगत से अपील करते हैं कि वे सरकार पर भरोसा बनाए रखें। महामारी से निपटने के लिए हम टीकाकरण की गति और विस्तार को बढ़ाएंगे। कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने के लिए 4,650 करोड़ रुपये की मदद दी जा रही है। सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक की ओर से जुलाई तक अधिक मात्रा में वैक्सीन का उत्पादन किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में यह मुफ्त मिलेगी। 2021-22 की विकास दर में 0.5 फीसदी कटौती घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा ने बढ़ते संक्रमण और लॉकडाउन की स्थितियों को देखते हुए भारत के विकास दर अनुमान में कटौती कर दी है। एजेंसी ने मंगलवार को कहा कि नए आर्थिक प्रतिबंधों के दबाव में 2021-22 के दौरान भारत की विकास दर 10-10.5 फीसदी रह सकती है। एजेंसी ने पहले 11 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था। इक्रा ने कहा, अप्रैल-जून तिमाही के लिए हमने पहले 27.5 फीसदी विकास दर का अनुमान लगाया था, लेकिन अब यह 20-25 फीसदी के दायरे में रह सकती है। संक्रमण के हालिया बढ़ते मामलों से उपभोक्ताओं के भरोसे में कमी आई है। कारोबारी भरोसा भी 93 फीसदी से गिरकर 90 के करीब पहुंच गया है।
एबीएन डेस्क। पेट्रोलियम पदार्थों और खनिजों की कीमतों में भारी वृद्धि होने से मार्च 2021 में थोक मूल्यों पर आधारित थोक मुद्रास्फीति की दर आठ वर्ष के उच्चतम स्तर 7.39 प्रतिशत पर पहुंच गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों में बताया गया है कि मार्च 2020 में थोक मूल्य थोक मुद्रास्फीति की दर 0.42 प्रतिशत रही थी। फरवरी 2021 में थोक मुद्रास्फीति की दर 4.17 प्रतिशत रही थी। आंकड़ों के अनुसार थोक मुद्रास्फीति में लगातार तीसरे महीने वृद्धि हुई है। मार्च 2021 में मुद्रास्फीति की दर 8 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है इससे पहले अक्टूबर 2012 में थोक मुद्रास्फीति की दर 7.2 प्रतिशत दर्ज की गयी थी। आंकड़ों के अनुसार मार्च 2021 में कच्चे तेल के दामों में 73.70 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह पेट्रोल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 32.15 प्रतिशत की तेजी आई है। खनिज पदार्थों के दाम 10.20 प्रतिशत बढ़े हैं। इसके अलावा रसोई गैस-एलपीजी की कीमत 10.30 प्रतिशत और पेट्रोल की कीमत 18.48 प्रतिशत बढ़ी है। हाई स्पीड डीजल के दामों में 18.27 प्रतिशत की कमी आई है। खाद्य पदार्थों में धान की कीमतें 1.38 प्रतिशत, दाल दलहन 13.14 प्रतिशत, फल 16.33 प्रतिशत, दूध 2.65 प्रतिशत तथा मांस, मछली और अंडा 5. 38 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि मोटे अनाज के दाम 1.38 प्रतिशत, गेहूं 7.80 प्रतिशत , सब्जी 5.19 प्रतिशत, आलू 33.10 प्रतिशत नीचे आए हैं।
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