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Published / 2021-09-24 05:36:57
शेयर बाजार ने रचा इतिहास, सेंसेक्स ने पहली बार 60 हजार का आंकड़ा छुआ

मुंबई। इंफोसिस, एचडीएफसी बैंक और टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में तेजी के चलते प्रमुख शेयर सूचकांक सेंसेक्स शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में 350 अंक से अधिक बढ़कर पहली बार 60,000 अंक के स्तर को पार कर गया। इस दौरान 30 शेयरों वाला सूचकांक 359.29 अंक या 0.60 फीसदी की तेजी के साथ 60,244.65 के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह निफ्टी 100.40 अंक या 0.56 प्रतिशत बढ़कर 17,923.35 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स को 1,000 अंक से ऐतिहासिक 60,000 के स्तर तक पहुंचने में 31 साल से थोड़ा अधिक समय लगा। सूचकांक 25 जुलाई 1990 को 1,000 अंक पर था और चार मार्च 2015 इसने 30,000 अंक के स्तर को छुआ। सेंसेक्स को 30,000 अंक का स्तर छूने में 25 साल लग गए। इसके बाद छह साल में सेंसेक्स 30,000 से बढ़कर 60,000 के स्तर पर पहुंच गया। सेंसेक्स में सबसे अधिक दो प्रतिशत की तेजी इंफोसिस में हुई। इसके अलावा एलएंडटी, एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचडीएफसी बैंक बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल थे। दूसरी ओर एनटीपीसी, एचयूएल, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व लाल निशान में थे। पिछले सत्र में सेंसेक्स 958.03 अंक या 1.63 प्रतिशत बढ़कर 59,885.36 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 276.30 अंक या 1.57 प्रतिशत बढ़कर 17,822.95 पर पहुंच गया। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को सकल आधार पर 357.93 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.09 प्रतिशत बढ़कर 77.32 डॉलर प्रति बैरल पर था।

Published / 2021-09-16 14:06:35
होराइजन होंडा में होंडा की नई बाइक सीबी 200एक्स लॉन्च

रांची। मेन रोड और कोकर स्थित होंडा मोटरसाइकिल एंड स्कूटर इंडिया के अधिकृत डीलर होराइजन होंडा में नई एडीबी मोटरसाइकिल सीबी 200एक्स लॉन्च किया है। यह बाइक बीएस6 तकनीक पर आधारित 4 स्ट्रोक इंजन से लैस है। इसकी इंजन क्षमता 184.4 सीसी है, बाइक में सेल्फ स्टार्ट एवं बेहतर ब्रेकिंग के लिए फ्रंट और रियर डिस्क ब्रेक के साथ सिंगस चैनल एबीएस दिया है। इसमें हेड और टेल लैंप के साथ इंडिकेटर में भी एलईडी लाइट लगे हैं। बाइक में कुल 5 गियर एवं 12 लीटर का फ्यूल टैंक दिया गया है। बाइक की सबसे खास बात इसका आकर्षक एवं स्पोर्टी लुक है जो युथ को आकर्षित करेगी। यह तीन रंगो स्पोर्ट्स रेड, मैट सिल्वर मैटेलिक, पर्ल नाइट स्टार ब्लैक में उपलब्ध है। ग्राहक इसे होराइजन होंडा के मेन रोड एवं कोकर स्थित शोरूम से फाइनेंस और एक्सचेंज की भी जानकारी ले सकते हैं।

Published / 2021-09-12 13:39:56
सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल बनें बैंक: सीतारमण

एबीएन डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि बैंकों (निजी क्षेत्र सहित) को डिजिटलीकरण को तेजी से अपनाना चाहिए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ गरीबों और समाज के पिछड़े तबकों तक पहुंच सके। तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि महामारी के दौरान बैंकिंग प्रतिनिधियों (कॉरस्पॉन्डेंट) के जरिए, डिजिटल के इस्तेमाल से जरूरतमंद लोगों के ब्योरे के सत्यापन के बाद सरकार की वित्तीय मदद उन तक पहुंच सकी। वित्त मंत्री ने कहा, प्रधानमंत्री इस बात को जानते हैं कि बैंकिंग महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्होंने जनधन योजना के तहत शून्य शेष वाले बैंक खाते को अनुमति देने में हिचकिचाहट नहीं दिखाई। उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि प्रत्येक के पास बैंक खाता हो और वह रुपे कार्ड के जरिए लेनदेन कर सके। सीतारमण ने कहा कि सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों के बैंक खातों में तीन किस्तों में 1,500 रुपए डाले हैं और डिजिटलीकरण के जरिए बैंकिंग क्षेत्र में काफी तेजी से बदलाव हो रहे हैं। बैंक शाखा खोलने की जरूरत नहीं : वित्त मंत्री ने कहा कि आज ऐसे स्थान पर बैंक शाखा खोलने की जरूरत नहीं है, जहां बैंक नहीं है। आज हम वहां रहने वाले लोगों के बैंक खातों तक पहुंच जाते हैं। सभी तरह की प्रौद्योगिकियां उपलब्ध हैं। तूतीकोरिन में बैठकर भी कोई किसी छोटे गांव में रहने वाले व्यक्ति की बैंकिंग जरूरत को प्रौद्योगिकी के जरिए पूरा कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक जैसे बैंकों के लिए प्रौद्योगिकी से संबंधित समाधान अपनाना बेहद जरूरी है ताकि वे अधिक दक्ष बन सकें। डिजिटलीकरण है जरूरी : सीतारमण ने कहा, बैंकिंग के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। मेरा मानना है कि डिजिटलीकरण पूर्ण होना चाहिए। आपके खुद के तथा ग्राहकों की दृष्टि से डिजिटलीकरण जरूरी है। तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक को अपने सभी ग्राहकों को इससे जोड़ना चाहिए और वित्तीय समावेशन का कार्यान्वयन करना चाहिए। जनधन योजना की तारीफ की : सीतारमण ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक की एक लाभार्थी को वित्तीय सहायता प्रदान करने के बाद कहा कि आप एक ऐसी महिला को चेक दे रहे हैं, जो इडली बेचने का कारोबार करती है। आप यह वित्तीय सहायता इस वजह से दे पाए क्योंकि प्रधानमंत्री जनधन जैसी कोई योजना है। उन्होंने कहा, यदि यह योजना नहीं होती तो आप यह सहायता नहीं दे पाते। यह इसलिए संभव हो पाया क्योंकि 2014 में प्रधानमंत्री जनधन योजना शुरू हुई।

Published / 2021-09-11 04:28:25
फोर्ड ने भारत में किया कार प्रोडक्शन बंद करने का ऐलान

एबीएन डेस्क। अमेरिका की प्रमुख वाहन विनिर्माता कंपनी फोर्ड द्वारा भारत में कारों का उत्पादन बंद करने की अचानक की गई घोषणा के एक दिन बाद शुक्रवार को एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने कहा कि यह निर्णय देश के कारोबारी माहौल को परिलक्षित नहीं करता है, बल्कि यह परिचालन संबंधी मुद्दों से जुड़ा मामला है। सूत्र, सरकार में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं जिन्होंने पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर कहा कि जापानी और कोरियाई कार विनिर्माताओं से प्रतिस्पर्धा के कारण अमेरिकी कंपने ने उत्पादन बंद करने का निर्णय किया है। फोर्ड मोटर कंपनी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि वह भारत में अपने दो विनिर्माण संयंत्रों को बंद करेगी और केवल आयातित वाहनों की ही बिक्री करेगी। फोर्ड, जिसने अपने चेन्नई (तमिलनाडु) और साणंद (गुजरात) संयंत्रों में लगभग 2.5 अरब डॉलर का निवेश किया है, इन संयंत्रों से उत्पादित इकोस्पोर्ट, फिगो और एस्पायर जैसे वाहनों की बिक्री बंद हो जायेगी। सरकारी सूत्र ने कहा, भारत के आटोमोबाइल क्षेत्र में विकास की कहानी जारी है और घरेलू तथा निर्यात दोनों बाजारों में यह आगे बढ़ रही है। फोर्ड का कारोबार से बाहर निकलना संभावित परिचालन संबंधी दिक्कतों की वजह से हो सकता है और यह किसी भी तरह से भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र या भारत में कारोबारी माहौल को प्रतिबिंबित नहीं करता है। जनरल मोटर्स के बाद भारत में प्लांट बंद करने वाली फोर्ड दूसरी अमेरिकी वाहन कंपनी है। वर्ष 2017 में, जनरल मोटर्स ने कहा था कि वह भारत में वाहनों की बिक्री बंद कर देगी क्योंकि दो दशकों से अधिक समय तक संघर्ष करने के बाद भी उसके कारोबार में बदलाव नहीं आया है। चालू वित्तवर्ष में अप्रैल-अगस्त के दौरान यात्री वाहनों की कुल बिक्री 11.42 लाख वाहनों की हुई, जबकि वर्ष 2019-20 की समान अवधि में यह बिक्री संख्या 10.91 लाख थी।

Published / 2021-09-08 08:19:07
SEBI का बड़ा फैसला: एक जनवरी से बदलेगा शेयर बाजार का अहम नियम

एबीएन डेस्क। बाजार नियामक सेबी ने बड़ा एलान किया है। सेबी ने T+1 (ट्रेड+1 दिन) सेटलमेंट साइकिल पेश किया है। इसके तहत अब शेयरों में होने वाले कारोबार को एक दिन में ही सेटल कर दिया जाएगा। हालांकि यह सेटलमेंट प्लान वैकल्पिक है। अगर ट्रेडर्स चाहें तो इसे चुन सकते हैं। नया नियम एक जनवरी 2022 से लागू हो जाएगा। ये है मौजूदा नियम : मौजूदा समय में देश में अप्रैल 2003 से T+2 सेटलमेंट साइकल लागू है। यानी जब आप शेयर बेचते हैं, तो वो शेयर तुरंत ब्लॉक हो जाता है और राशि आपको कारोबारी दिन के दो दिन बाद (T+2 डे) मिलती है। इससे पहले देश में T+3 सेटलमेंट साइकिल चल रहा था। क्या है नया नियम? : सेबी के नए सर्कुलर के अनुसार, नए साल से कोई भी स्टॉक एक्सचेंज सभी शेयरधारकों के लिए किसी भी शेयर के लिए T+1 सेटलमेंट साइकिल को चुन सकता है। आसान भाषा में समझें, तो आपको शेयर बेचने पर कारोबारी दिन के एक दिन बाद ही पैसा मिल जाएगा। यह छोटा सेटलमेंट साइकल ज्यादा सुविधाजनक होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि इससे पैसे के रोटेशन में तेजी आएगी। ध्यान रहे कि यदि स्टॉक एक्सचेंज किसी भी शेयर के लिए एक बार T+1 सेटलमेंट साइकल को चुनता है, तो उसे कम से कम छह महीने तक जारी रखना होगा और यदि स्टॉक एक्सचेंज बीच में T+2 सेटलमेंट साइकिल चुनता है, तो भी उसे एक महीना पहले नोटिस देना होगा। अगस्त में बना था पैनल : मालूम हो कि अगस्त 2021 की शुरुआत में ही सेबी ने इसके लिए निशेषज्ञों का एक पैनल बनाया था, जिसे T+2 के बजाय T+1 साइकल लागू करने की प्रक्रिया की मुश्किलों पर रिपोर्ट पेश करनी थी। यह फैसला मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर इंस्टीट्यूशंस जैसे स्टॉक एक्सचेंज, क्लीयरिंग कॉर्पोरेशन और डिपॉजिटर्स के साथ बातचीत के बाद लिया गया है। SEBI ने 85 कंपनियों पर लगाया बैन : सेबी ने सनराइज एशियन लिमिटेड समेत 85 कंपनियों और व्यक्तियों पर शेयर बाजार में कारोबार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों पर शेयर प्राइस में हेराफेरी करने के चलते एक साल का बैन लगाया गया है। सनराइज एशियन और उसके पांच डायरेक्टर्स को कैपिटल मार्केट से एक साल के लिए और 79 इकाइयों को छह महीने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इससे पहले एक अलग आदेश में सेबी ने कोरल हब लिमिटेड को कैपिटल मार्केट से तीन साल के लिए और छह लोगों को दो-तीन सालों के लिए प्रतिबंधित किया था।

Published / 2021-08-28 16:08:45
ट्रेड यूनियनों में बढ़नी चाहिए महिलाओं की भागीदारी : अत्रेई सरकार

जमशेदपुर। इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन के तत्वाधान जमशेदपुर के एक होटल में टाटा ग्रुप की कंपनियों के नेताओं के लिए एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन स्वास्थ्य सुरक्षा और श्रम कानूनों में होने वाले बदलाव के विषय में रखा गया है। इस कार्यशाला का आयोजन इंडियन स्टील मेटल माइंस एंड इंजीनियरिंग इंप्लाइज फेडरेशन के महासचिव श्री रघुनाथ पांडेय के द्वारा किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती अत्रैई सरकार (वीपी- एच आर एम ,टाटा स्टील), विशिष्ट अतिथि के रूप में उप श्रमायुक्त (कोल्हान) राजेश प्रसाद एवं सम्मानित अतिथि के रुप में इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन के क्षेत्रीय सचिव श्री अपूर्वा कैवार उपस्थित थी। मुख्य अतिथि के रुप में बोलते हुए श्रीमती अत्रैयी सरकार ने कहा कि टाटा स्टील अपनी कंपनी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कृत्य संकल्प है तथा हर स्तर पर महिलाओं को दृढ़ करने का काम कर रही है उन्होंने यूनियन लीडर से भी कहा कि जिस यूनियन में महिलाओं की भागीदारी होती है वह यूनियन सदैव अग्रसर होती है। साथ ही उन्होंने कहा कि जो यूनियन नेता अपने कनिष्ठ नेताओं को आगे नहीं बढ़ाते हैं वह वाकई नेता नहीं होते है। उन्होंने यूनियन को शरीर का दिल कहा जो कि मुख्य हिस्सा होता है उन्होंने कहा कि आने वाले 10 सालों में तेजी से उद्योगों में बदलाव आएंगे जिसमें मशीनीकरण होगा यूनियन नेता अभी से श्रमिकों को कौशल विकास पर ध्यान केंद्रित कराए। उन्होंने श्रमिकों के साथ ही साथ पर्यावरण की सुरक्षा करने की भी सलाह दी। उप श्रम आयुक्त श्री राजेश प्रसाद ने उपस्थित श्रमिक नेताओं को असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रहे श्रमिकों को संगठित करने पर बल दिया और उन्हें यूनियन से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने हाल में ही केंद्र सरकार द्वारा लाए गए ई श्रम पोर्टल पर असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को रजिस्टर्ड कराने की भी सलाह दी। इंडस्ट्री आल ग्लोबल यूनियन की क्षेत्रीय सचिव अपूर्वा कैवार ने श्रमिकों को संगठित करने पर बल दिया तथा इंडस्ट्री अल से हर सहयोग देने का वादा किया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए वक्ता श्री बीएस सारंगी ने केंद्र सरकार द्वारा नए लेबर कानून के आने से मजदूरों तथा यूनियनों के होने वाले फायदे एवं नुकसान के विषय में विस्तृत जानकारी दी। श्री नीरज सिन्हा चीफ सेफ्टी टाटा स्टील ने कहा कि अपने व्यवहार में परिवर्तन लाकर बहुत सारे होने वाली दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। श्री आशुतोष भट्टाचार्य ने इंडस्ट्री अल ग्लोबल यूनियन के विश्व सर पर उपस्थिति एवं किए जाने वाले कार्य के विषय में विस्तृत जानकारी दी। टाटा वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष एस आलम ने आने वाले समय में यूनियन की चुनौतियों के विषय में विस्तृत रूप से बताया। कार्यशाला को टाटा वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष श्री संजीव चौधरी डिप्टी प्रेसिडेंट श्री शैलेश एक्सीडेंट वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने भी संबोधित किया। कार्यशाला का संचालन रघुनाथ पांडेय ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन देविका सिंह ने किया आज के कार्यशाला में 50 से अधिक प्रतिभागी उपस्थित थे।

Published / 2021-08-26 09:24:36
टाटा स्टील यूरोप को लेकर टाटा संस के ऑडिटर ने जताई चिंता

एबीएन डेस्क। टाटा संस के अंकेक्षक ने टाटा स्टील की सहायक टाटा स्टील यूरोप के चालू रहने को लेकर अनिश्चितता पर कंपनी के शेयरधारकों का ध्यान आकर्षित किया है। रिपोर्ट में कहा गया है, टाटा स्टील यूरोप के चालू रहने की क्षमता को लेकर पर्याप्त खुलासा न किए जाने पर हम एकीकृत वित्तीय विवरण पर आपका ध्यान खींचना चाहते हैं। कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण टाटा स्टील यूरोप को अपने दायित्व के निर्वहन के लिए समूह कंपनी का सहयोग लेना होगा क्योंकि इसकी तारीख नजदीक आ रही है। टाटा स्टील यूरोप को टीएस ग्लोबल प्रोक्योरमेंट कंपनी पीटीई लिमिटेड अंडरटेकिंग से पत्र मिला है कि उन्हें कार्यशील पूंजी व अन्य नकद सहायता उपलब्ध कराया जाए, जो टाटा स्टील यूरोप की अगले 12 महीने की अपनी जरूरत के अनुमान से ज्यादा है। इस पत्र में कहा गया है कि इस पर कोई निश्चितता नहीं है कि टाटा स्टील यूरोप को वास्तव में यह रकम उपलब्ध कराई जाएगी। अंकेक्षक ने कहा है, ये बातें व एकीकृत वित्तीय विवरण में लिखे अन्य मामलों के साथ अनिश्चितता की स्थिति टाटा स्टील यूरोप के चालू बने रहने को लेकर संदेह पैदा करते हैं। एकीकृत वित्तीय विवरण में समायोजन को शामिल नहीं किया गया है, जिसका नतीजा यह होगा कि टाटा स्टील यूरोप चालू स्थिति में बने रहने सक्षम नहीं होगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड का परिचालन राजस्व वित्त वर्ष 21 में 62 फीसदी घटकर 9,460.24 करोड़ रुपये रह गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 24,770.46 करोड़ रुपये रहा था। परिचालन राजस्व में सहायक कंपनियों से मिला लाभांश शामिल होता है और यह वित्त वर्ष 20 में काफी ज्यादा था, जिसकी वजह लाभ वाली सहायक फर्म टीसीएस से विशेष लाभांश थी। वित्त वर्ष 21 की अन्य आय 10,138 करोड़ रुपये रही, जो एक साल पहले 125.93 करोड़ रुपये रही थी। इसकी मुख्य वजह टीसीएस की तरफ से हुई पुनर्खरीद के कारण मिला लाभ है। कंपनी की सालाना रिपोर्ट से यह जानकारी मिली। टाटा स्टील यूरोप का नुकसान पिछले वित्त वर्ष में 79.3 करोड़ पाउंड रहा, जिसकी मुख्य वजह कोविड के कारण मांग में आई गिरावट है। टाटा स्टील ने हालांकि यूरोपीय परिचालन को वित्तीय सहारा दिया, लेकिन उसकी अंकेक्षक पीडबल्यूसी ने चेतावनी दी है कि इस बात की कोई निश्चितता नहीं है कि टाटा स्टील यूरोप की फंड की जरूरत पूरी की जाएगी। स्टील कीमतों में तेजी से हालांकि उसकी किस्मत में सुधार के संकेत मिले हैं। सालाना रिपोर्ट हालांकि चेयरमैन व अन्य निदेशकों के वेतन का जिक्र नहीं करता। कार्यकारी निदेशक सौरभ अग्रवाल का वेतन 35 फीसदी बढ़कर 21.5 करोड़ रुपये रहा। उनके कार्यकाल के विस्तार पर 14 सितंबर को होने वाली आगामी एजीएम में चर्चा होगी। वित्त वर्ष 21 में कर पूर्व लाभ 7,503.01 करोड़ रुपये था, जो एक साल पहले 2,679.75 करोड़ रुपये रहा था। कंपनी सकल कर्ज घटाकर 27,615 करोड़ रुपये पर लाने में कामयाब रही, वहीं सकल उधारी वित्त वर्ष 21 के लिए 30,334.30 करोड़ रुपये रही।

Published / 2021-08-26 03:35:59
आज ही के दिन 1907 में इंग्लैंड में मात्र 2.31 करोड़ पूंजी के साथ कंपनी बनी थी टाटा स्टील

जमशेदपुर। वर्तमान में देश की सबसे बड़ी स्टील कंपनी टाटा स्टील वैश्विक स्तर पर पांच शीर्ष स्टील कंपनियों में शामिल है। द टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड के नाम से यह कंपनी 26 अगस्त 1907 को इंग्लैंड में पंजीकृत कराया गया, हालांकि ब्रिटिश निवेशकों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी। 26 अगस्त 1907 को यह कंपनी भारत में 2,31,75,000 रुपये की मूल पूंजी के साथ पंजीकृत हुई। पूंजी जुटाने का नोटिस जारी किया गया, जिसे जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और तीन सप्ताह के भीतर पूरी राशि जुटा ली गई। तब वर्तमान में झारखंड के साकची गांव में 1908 में वर्क्स का निर्माण शुरू हुआ जबकि पहली बार स्टील का उत्पादन 16 फरवरी, 1912 को शुरू हुआ। वर्तमान में टाटा स्टील लिमिटेड ग्रुप का सालाना टर्न ओवर 1,57,184 करोड़ रुपये है जबकि इसकी सालाना इस्पात उत्पादन क्षमता 33 मिलियन टन है। आइए जानते हैं कि स्वदेशी कंपनी की रोचक विकास यात्रा के बारे में : 1867 में जमशेदजी नसेरवानजी टाटा ने प्रसिद्ध ब्रिटिश निबंधकार थॉमस कार्लाइल के एक व्याख्यान में हिस्सा लिया जिसमें उन्होंने कहा था, जिस राष्ट्र को लोहे पर नियंत्रण प्राप्त होता है, वह जल्द ही सोने पर भी नियंत्रण प्राप्त कर लेता है। कार्लाइल को शायद ही पता होगा कि उनका यह व्याख्यान भारत को एक आर्थिक पुनरुत्थान की पथप्रदर्शक यात्रा की ओर ले जाएगा और इस प्रकार, उसी क्षण स्टील प्लांट के निर्माण को लेकर जमशेदजी के विचारों को सकारात्मक गतिशक्ति मिला। 1899 में मेजर महोन द्वारा भारत में इस्पात उद्योग को बढ़ावा देने की सिफारिश की एक रिपोर्ट को स्वीकृति मिली, जिसके आधार पर भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन ने तत्काल कदम उठाते हुए खनिज रियायत नीति को उदार बनाया, जिसने भारत को इसकी पहली एकीत इस्पात कंपनी देने के अपने सपने को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए जमशेदजी को एक सुनहरा अवसर प्रदान किया। 1902 में पिट्सबर्ग, यूएसए में जमशेदजी की मुलाकात जूलियन कैनेडी, सहलिन ऐंड कंपनी लिमिटेड के प्रमुख जूलियन कैनेडी से हुई। जमशेदजी ने कैनेडी को भारत में एक इस्पात संयंत्र स्थापित करने की अपनी इच्छा के बारे में बताया। कैनेडी ने जमशेदजी को स्थानीय परिस्थितियों, कच्चे माल की उपलब्धता और भारत में बाजार की स्थितियों की गहन वैज्ञानिक जांच करने की सलाह दी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए न्यूयर्क के एक प्रख्यात कंसल्टिंग इंजीनियर चार्ल्स पेज पेरिन की भी सिफारिश की। 24 फरवरी, 1904 में टाटा को भारत के फर्स्ट ग्रेड जियोलजिस्ट प्रमथ नाथ बोस का एक पत्र मिला, जिसमें मयूरभंज राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले लौह और झरिया में कोयले की उपलब्धता के बारे में बताया गया था। 1905 में चार्ल्स पेज पेरिन और उनके सहयोगी सी एम वेल्ड ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें इस्पात संयंत्र के निर्माण का खाका तैयार किया गया था। सितंबर 1905 में, मयूरभंज के महाराजा ने टाटा को पूर्वेक्षण (प्रस्पेक्टिंग) लाइसेंस प्रदान किया। 1906 में भारत सरकार ने एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से एक विशेष अवधि के लिए इस्पात खरीदने का वादा कर टाटा की मदद करने के अपने इरादे जाहिर की। साथ ही, सरकार ने अन्य सहायता की भी घोषणा की, जिसकी आवश्यकता आगे चल कर कंपनी को अपना उत्पादन शुरू करने के लिए होने वाली थी।

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