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भारतीय अर्थव्यवस्था : 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.2% रहने का अनुमान
Published / 2022-01-07 15:25:01
भारतीय अर्थव्यवस्था : 2021-22 में आर्थिक वृद्धि दर 9.2% रहने का अनुमान

एबीएन डेस्क। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से देश की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2021-22 में 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है जबकि एक साल पहले इसमें 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) के शुक्रवार को जारी राष्ट्रीय आय के पहले अग्रिम अनुमान में यह कहा गया है। एनएसओ ने कहा, वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2021-22 में 9.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। जबकि एक साल पहले 2020-21 में इसमें 7.3 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। आधार मूल्य पर वास्तविक सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 2021-22 में 135.22 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जो पिछले वित्त वर्ष 2020-21 में 124.53 लाख करोड़ रुपये था। यह 8.6 प्रतिशत वृद्धि को बताता है।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण को सरकार की मंजूरी, 12 हजार करोड़ रुपये में पूरी होगी परियोजना
Published / 2022-01-07 02:59:55
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के दूसरे चरण को सरकार की मंजूरी, 12 हजार करोड़ रुपये में पूरी होगी परियोजना

एबीएन डेस्क। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण के लिए बृहस्पतिवार को 12,000 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की। इसका इस्तेमाल सात राज्यों में ग्रिड एकीकरण और करीब 20,000 मेगावॉट क्षमता की नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के पारेषण में किया जाएगा। इस योजना के तहत 10,750 सर्किट किलोमीटर की बिजली पारेषण लाइन बिछाने और बिजली उपकेंद्रों के करीब 27,500 मेगा वोल्ट-एम्पीयर अंतरण का लक्ष्य रखा गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने मंत्रिमंडल के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि हरित ऊर्जा गलियारे के दूसरे चरण का क्रियान्वयन वर्ष 2021-22 से लेकर 2025-26 के दौरान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना में किए जाने वाले कुल निवेश का 33 फीसदी केंद्रीय मदद के रूप में है। ठाकुर ने कहा कि इस योजना के पहले चरण का करीब 80 फीसदी कार्य पूरा किया जा चुका है। पहले चरण के लिए 10,142 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।

छुआ जादुई आंकड़ा: उद्योग जगत में एपल ने रचा नया इतिहास
Published / 2022-01-04 03:52:40
छुआ जादुई आंकड़ा: उद्योग जगत में एपल ने रचा नया इतिहास

एबीएन डेस्क। दिग्गज टेक कंपनी एपल ने सभी बड़ी कंपनियों को पीछे छोड़ते हुए इतिहास रच दिया है। सोमवार को कंपनी की मार्केट वैल्यू 3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गई जो कि अब तक की सबसे अधिक वैल्यू है। एपल सोमवार दोपहर को तीन फीसदी की वृद्धि के साथ 182.88 डॉलर पर कारोबार कर रही थी। अक्तूबर के बाद से कंपनी ने अब तक अपने बाजार पूंजीकरण में लगभग 700 बिलियन डॉलर जोड़े हैं। कोरोना महामारी के बावजूद IPhone निर्माता कंपनी के शेयर की कीमत में लगातार वृद्धि हो रही है। कंपनी को मुनाफा का सबसे बड़ा फायदा लॉकडाउन के दौरान ही हुआ क्योंकि काम, शिक्षा, मनोरंजन से जुड़े रहने के लिए प्रौद्योगिकी की मांग बढ़ गई थी। महज 16 महीने में एक ट्रिलियन मार्केट वैल्यू की बढ़ोतरी : द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1976 में शुरू हुई एपल ने अगस्त 2018 में एक ट्रिलियन डॉलर का जादुई आंकड़ा छुआ था। उसे यह उपलब्धि हासिल करने में 42 साल का लंबा सफर तय करना पड़ा। लेकिन इसके बाद दो साल में ही कंपनी की मार्केट वैल्यू दो ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा हो गई। जबकि अगले ट्रिलियन यानी तीन ट्रिलियन मार्केट वैल्यू होने में कंपनी को सिर्फ 16 महीने और 15 दिन लगे।

व्हाट्सऐप ने नवंबर 2021 में 17.5 लाख से अधिक भारतीय खातों को किया बंद
Published / 2022-01-02 04:12:18
व्हाट्सऐप ने नवंबर 2021 में 17.5 लाख से अधिक भारतीय खातों को किया बंद

एबीएन डेस्क। सोशल मीडिया कंपनी व्हाट्सऐप ने अपनी अनुपालन रिपोर्ट में कहा कि उसने नवंबर 2021 में 17.5 लाख से अधिक भारतीय खातों को बंद किया, जबकि इस दौरान उसे 602 शिकायतें मिलीं। अपनी ताजा रिपोर्ट में मैसेजिंग मंच ने कहा कि इस दौरान व्हाट्सऐप पर 17,59,000 भारतीय खातों को बंद किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय खातों की पहचान +91 फोन नंबर के जरिए की जाती है। व्हाट्सऐप के एक प्रवक्ता ने कहा, आईटी नियम 2021 के अनुसार हमने नवंबर महीने के लिए अपनी छठी मासिक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस उपयोगकर्ता-सुरक्षा रिपोर्ट में उपयोगकर्ताओं की शिकायतों का ब्यौरा और व्हाट्सऐप द्वारा की गई संबंधित कार्रवाई के साथ ही व्हाट्सऐप द्वारा खुद की गई कार्रवाइयां भी शामिल हैं। प्रवक्ता ने कहा कि व्हाट्सऐप ने नवंबर में 17.5 लाख से अधिक खातों पर प्रतिबंध लगा दिया। फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनी ने इससे पहले कहा था कि 95 प्रतिशत से अधिक प्रतिबंध स्वचालित या बल्क मैसेजिंग के अनधिकृत उपयोग के कारण हैं।

2021 में करीब 78 लाख बढ़ी शेयर निवेशकों की संपत्ति
Published / 2021-12-31 14:34:01
2021 में करीब 78 लाख बढ़ी शेयर निवेशकों की संपत्ति

नयी दिल्ली। शेयर निवेशकों की संपत्ति में 2021 में जोरदार उछाल आया। कोरोना वायरस महामारी के झटकों के बावजूद वर्ष 2021 में बाजार में तेजी के साथ इक्विटी निवेशकों की संपत्ति करीब 78 लाख करोड़ रूपए बढ़ गई। कैलेंडर वर्ष 2021 घरेलू शेयर बाजारों के लिए ऐतिहासिक वर्ष साबित हुआ। शेयर बाजार ने 2021 के दौरान कई रिकॉर्ड तोड़े और 2021 के आखिरी कारोबारी दिन में भी वृद्धि दर्ज की। तीस शेयरों पर आधारित सेंसेक्स में सालाना आधार पर 2021 में 10,502.49 अंक यानी 21.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सेंसेक्स मार्च 2020 में कोरोना वायरस महामारी के कारण बुरी तरह लुढ़कने के बाद इस साल 50,000 और 62,000 के स्तर को पार कर गया। शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक वर्ष 2021 के नौ महीने के दौरान लाभ में रहा और वर्ष के केवल तीन महीनों में घाटे के साथ बंद हुआ।बाजार के लिए अगस्त सबसे अधिक लाभकारी रहा। इस दौरान बाजार ने 4,965.55 अंक या 9.44 प्रतिशत की छलांग लगाते हुए भारी लाभ दर्ज किया। वहीं 19 अक्टूबर को बाजार अपने आज तक के सबसे उच्चतम स्तर 62,245.43 पर पहुंच गया था। इस साल बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 77,96,692.95 करोड़ रुपये बढ़कर 2,66,00,211.55 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। निवेशकों की संपत्ति को दर्शाने वाला बाजार पूंजीकरण 18 अक्टूबर को 2,74,69,606.93 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।

BSNL : 100 रुपये से कम के रिचार्ज में अनलिमिटेड कॉलिंग और  इंटरनेट भी
Published / 2021-12-31 13:35:47
BSNL : 100 रुपये से कम के रिचार्ज में अनलिमिटेड कॉलिंग और इंटरनेट भी

एबीएन डेस्क। बीएसएनएल ग्राहकों के लिए हम कुछ ऐसे रिचार्ज प्लान की लिस्ट लेकर आए हैं जो काफी बजट फ्रेंडली हैं और 100 रुपये से भी कम कीमत में कई सारे बेनिफट्स के साथ आते हैं। BSNL के Rs 187 प्लान में अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ प्रतिदिन 2 जीबी डेटा और एसएमएस बेनिफिट्स भी मिलते हैं।118 रु में ग्राहक को अनलिमिटेड कॉलिंग और 0.5 जीबी डेली डेटा मिलता है। 107 रु का रिचार्ज प्लान आपको 84 दिनों की वैलिडिटी के साथ मिलता है। BSNL Rs. 99 : प्लान में अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग 22 दिनों तक मिलती है। भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के पास यूजर्स के लिए कई ऐसे प्लान हैं जिन्हें वैल्यू फॉर मनी कहा जा सकता है। जहां एक ओर कई टेलीकॉम कंपनियों ने अपने रिचार्ज प्लान्स की कीमतों में वृद्धि कर दी है तो ग्राहकों को मोबाइल रिचार्ज के लिए खर्च करना पड़ रहा है लेकिन अगर आप एक बीएसएनएल ग्राहक हैं तो हम आपके लिए कुछ ऐसे रिचार्ज प्लान की लिस्ट लेकर आए हैं जो 100 रुपये से भी कम कीमत में कई बेनिफट्स के साथ आते हैं। BSNL Rs. 97 प्लान : यह 18 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इसमें आपको रोज़ 2 जीबी का डेटा मिलता है जिसकी डेली लिमिट समाप्त होने के बाद इंटरनेट स्पीड 80 केबीपीएस रह जाती है। इस प्लान के साथ आपको अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग मिलती है। बीएसएनएल का 97 रुपये का रिचार्ज प्लान आपको कोई SMS बेनिफिट नहीं देता है। BSNL Rs. 99 प्लान : यह प्लान उन ग्राहकों के लिए फायदेमंद है जिनको सिर्फ वॉयस कॉलिंग के लिए एक सस्ता प्लान चाहिए। इसमें आपको अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग की सुविधा मिलती है और वैलिडिटी 22 दिनों की है। बीएसएनएल का 99 रुपये वाला प्लान आपको डेटा या एसएमएस के बेनिफिट नहीं देता है। BSNL Rs. 107 प्लान : बीएसएनएल का यह रिचार्ज प्लान आपको 84 दिनों की वैलिडिटी के साथ मिलता है। इस प्रीपेड प्लान में आपको 3जीबी डेटा मिलता है और कॉलिंग के लिए 100 मिनट फ्री वॉयस कॉल मिलती हैं। इसके साथ आपको एक महीने के लिए बीएसएनएल ट्यून्स का बेनिफिट भी मिलता है। BSNL Rs. 118 प्लान : इस प्रीपेड प्लान में ग्राहक को अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ 0.5 जीबी डेली डेटा मिलता है। डेली डेटा लिमिट खत्म हो जाने के बाद इंटरनेट स्पीड 40 केबीपीएस रह जाती है। यह प्लान आपको एसएमएस बेनिफिट नहीं देता है। BSNL Rs. 187 प्लान : यह प्रीपेड प्लान आपको अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग के साथ दूसरे बेनिफिट्स भी देता है। जिसमें ग्राहक को प्रतिदिन 2 जीबी डेटा और 100 एसएमएस जैसे बेनिफिट्स दिए जाते हैं। इस प्लान के साथ बीएसएनएल ट्यून्स का ऑफर भी है। यह 28 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है और इंडस्ट्री के बेस्ट प्लान्स में से एक है। 4जी नेटवर्क की कमी इस प्लान में खल सकती है। पिछले दिनों टेलीकॉम कंपनियों ने अपने सभी रिचार्ज प्लान के प्राइस बढ़ा दिए हैं। ऐसे में बीएसएनल के ये सस्ते रिचार्ज प्लान ग्राहकों को बढ़ी हुई कीमतों से राहत दे सकते हैं।

जीएसटी : कपड़ों पर वृद्धि टली, फुटवियर को लेकर भी अहम फैसला
Published / 2021-12-31 13:15:14
जीएसटी : कपड़ों पर वृद्धि टली, फुटवियर को लेकर भी अहम फैसला

एबीएन डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में जीएसटी परिषद की 46वीं बैठक खत्म हो चुकी है और दोपहर 3 बजे इस बैठक के परिणामों के बारे में जानकारी दी जाएगी।इससे पहले बैठक के बाद लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने कपड़ों पर जीएसटी की दर में वृद्धि 5% से 12% तक करने को स्थगित करने का निर्णय लिया है। परिषद फरवरी 2022 में अपनी अगली बैठक में इस मामले की समीक्षा करेगी। काउंसिल की बैठक में एक ओर जहां कपड़ों पर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी को फरवरी 2022 तक के लिए टाल दिया गया है। गौरतलब है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों द्वारा इस कदम का विरोध किए जाने के बाद जीएसटी परिषद ने अपने फैसले पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 46 वीं बैठक ने अपनी अगली बैठक में इस मुद्दे पर और विचार करने का निर्णय लिया। वर्तमान में मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत, एमएमएफ यार्न पर 12 प्रतिशत है, जबकि कपड़े पर 5 प्रतिशत की दर से लागू होती है। परिषद ने बीते 17 सितंबर को संपन्न हुई अपनी पिछली बैठक में फुटवियर और कपड़ा क्षेत्रों में जीएसटी दर के ढांचे में बदलाव का फैसला किया था। जीएसटी काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 जनवरी, 2022 से सभी फुटवियर पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, चाहे इन जूते-चप्पलों की कीमत कुछ भी क्यों न हो। यानी जूता चाहे 100 रुपये का हो या फिर 1000 रुपये का सभी पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि रेडीमेड कपड़ों सहित कपास को छोड़कर कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत समान जीएसटी दर लागू होगी। ऐसा माना जा रहा था कि आज की बैठक में स्लैब घटाए जा सकते हैं। जीएसटी काउंसिल ने बैठक में 12 फीसदी और 18 फीसदी के स्लैब को मिलाए जाने पर चर्चा तो की, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक, अब जूते-चप्पल पर टैक्स कम करने और दो स्लैब को आपस में मिलाने के बारे में काउंसिल की अगली बैठक में विचार किया जाएगा।

जीएसटी : कपड़ों पर वृद्धि टली, फुटवियर को लेकर भी अहम फैसला
Published / 2021-12-31 13:11:21
जीएसटी : कपड़ों पर वृद्धि टली, फुटवियर को लेकर भी अहम फैसला

एबीएन डेस्क। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में जीएसटी परिषद की 46वीं बैठक खत्म हो चुकी है और दोपहर 3 बजे इस बैठक के परिणामों के बारे में जानकारी दी जाएगी।इससे पहले बैठक के बाद लिए गए फैसलों के बारे में बताते हुए हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ने अहम जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद ने कपड़ों पर जीएसटी की दर में वृद्धि 5% से 12% तक करने को स्थगित करने का निर्णय लिया है। परिषद फरवरी 2022 में अपनी अगली बैठक में इस मामले की समीक्षा करेगी। काउंसिल की बैठक में एक ओर जहां कपड़ों पर जीएसटी दरों में बढ़ोतरी को फरवरी 2022 तक के लिए टाल दिया गया है। गौरतलब है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों द्वारा इस कदम का विरोध किए जाने के बाद जीएसटी परिषद ने अपने फैसले पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में और राज्य के समकक्षों की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 46 वीं बैठक ने अपनी अगली बैठक में इस मुद्दे पर और विचार करने का निर्णय लिया। वर्तमान में मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत, एमएमएफ यार्न पर 12 प्रतिशत है, जबकि कपड़े पर 5 प्रतिशत की दर से लागू होती है। परिषद ने बीते 17 सितंबर को संपन्न हुई अपनी पिछली बैठक में फुटवियर और कपड़ा क्षेत्रों में जीएसटी दर के ढांचे में बदलाव का फैसला किया था। जीएसटी काउंसिल की बैठक में निर्णय लिया गया कि 1 जनवरी, 2022 से सभी फुटवियर पर 12 फीसदी जीएसटी लगेगा, चाहे इन जूते-चप्पलों की कीमत कुछ भी क्यों न हो। यानी जूता चाहे 100 रुपये का हो या फिर 1000 रुपये का सभी पर 12 फीसदी की दर से जीएसटी लगेगा। इसके साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि रेडीमेड कपड़ों सहित कपास को छोड़कर कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत समान जीएसटी दर लागू होगी। ऐसा माना जा रहा था कि आज की बैठक में स्लैब घटाए जा सकते हैं। जीएसटी काउंसिल ने बैठक में 12 फीसदी और 18 फीसदी के स्लैब को मिलाए जाने पर चर्चा तो की, लेकिन इस पर फैसला नहीं लिया जा सका। रिपोर्ट के मुताबिक, अब जूते-चप्पल पर टैक्स कम करने और दो स्लैब को आपस में मिलाने के बारे में काउंसिल की अगली बैठक में विचार किया जाएगा।

GST काउंसिल बैठक आज, टैक्स की दरें घटाने पर हो सकता है फैसला
Published / 2021-12-31 03:16:37
GST काउंसिल बैठक आज, टैक्स की दरें घटाने पर हो सकता है फैसला

एबीएन डेस्क। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में शुक्रवार को जीएसटी परिषद की अहम बैठक होगी। इसमें जीएसटी की दरें घटाने पर भी फैसला हो सकता है। बताया जा रहा है कि जीएसटी की 12 और 18 फीसदी की दरों का विलय कर एक दर बनाई जा सकती है। काफी समय से दोनों टैक्स स्लैब को एक करने की मांग उठ रही है। वहीं, टेक्सटाइल और जूतों पर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी लगने जा रहा है। राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों स जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं। इन सबके बीच लोगों को अब भी उम्मीद है कि पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आएंगे, हालांकि आज की बैठक में इस पर चर्चा होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री समूह ने भी जीएसटी दरें घटाने को लेकर अपनी रिपोर्ट जीएसटी परिषद को सौंपी है। इसमें टैक्स स्लैब को मिलाने के साथ बिना जीएसटी वाले कुछ उत्पादों को कर के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा फिटमेंट कमेटी, जिसमें राज्यों और केंद्र के कर अधिकारी शामिल हैं, ने भी स्लैब और दरों में बदलाव की सिफारिशें की हैं। अभी जीएसटी की दर 5, 12, 18 और 28 फीसदी है। वहीं, विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर ऊंचे स्लैब के ऊपर उपकर भी लगाया जाता है। टेक्सटाइल और जूतों पर 1 जनवरी से 12 फीसदी जीएसटी : जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़ों पर जीएसटी दर बढ़ाने का मुद्दा छाया रह सकता है। दरअसल, एक जनवरी 2022 से टेक्सटाइल और जूतों पर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी लगने जा रहा है। राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों स जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इसे देखते हुए जीएसटी दर बढ़ाने का फैसला टल सकता है। परिषद की 17 सितंबर को हुई पिछली बैठक में फुटवियर एवं कपड़ों पर जीएसटी दर संशोधित करने का फैसला लिया गया था। कपड़ा सेक्टर पर जीएसटी दर बढ़ाने का विरोध : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ गुरुवार को हुई बजट-पूर्व बैठक में भी कई राज्यों ने कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी दर बढ़ाए जाने का मुद्दा उठाते हुए इस पर विरोध जताया। गुजरात ने कपड़ा उत्पादों पर बढ़ी हुई दर को स्थगित करने की मांग रखी। वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बैठक में कहा कि इससे पूरे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा। साथ ही यह फैसला आम आदमी के अनुकूल नहीं है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल पर पांच फीसदी ही जीएसटी लगना चाहिए। इस मांग का पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों ने भी समर्थन किया है।

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