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2021 में भारत में लैम्बॉर्गिनी की लग्जरी कारों की बिक्री 86% बढ़ी
Published / 2022-01-19 13:18:30
2021 में भारत में लैम्बॉर्गिनी की लग्जरी कारों की बिक्री 86% बढ़ी

नयी दिल्ली। इटली की सुपर लग्जरी वाहन विनिर्माता आॅटोमोबिली लैम्बॉर्गिनी की 2021 के दौरान भारत में बिक्री 86 प्रतिशत बढ़कर 69 इकाई पर पहुंच गई। कंपनी का यह अब तक का बिक्री का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। लैम्बॉर्गिनी ने बुधवार को बताया कि वर्ष 2020 में उसने भारत में 37 वाहनों की बिक्री की थी। कंपनी की कारों की कीमत 3.16 करोड़ रुपये से शुरू होती है। कंपनी ने इससे पहले वर्ष 2019 में अपनी सबसे अधिक 52 इकाइयों की बिक्री की थी। वैश्विक स्तर पर भी कंपनी ने पिछले वर्ष दुनियाभर में 8,405 वाहनों की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी। कंपनी ने कहा कि लक्षित और निगरानी वाली विकास रणनीति के कारण 2020 के मुकाबले उसकी बिक्री में 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

रिलायंस ने 983 करोड़ से एडवर्ब में खरीदी 54% हिस्सेदारी
Published / 2022-01-19 06:22:08
रिलायंस ने 983 करोड़ से एडवर्ब में खरीदी 54% हिस्सेदारी

एबीएन डेस्क। मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली रिलायंस रिटेल ने घरेलू रोबोटिक्स कंपनी एडवर्ब में 13.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 983 करोड़ रुपए) में 54 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। एडवर्ब टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक और सीईओ संगीत कुमार ने बताया कि कंपनी स्वतंत्र रूप से काम करना जारी रखेगी और रिलायंस से मिली धनराशि का इस्तेमाल विदेश में कारोबार के विस्तार तथा नोएडा में एक बड़ा रोबोट विनिर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए किया जाएगा। कंपनी के पास पहले ही नोएडा में एक विनिर्माण संयंत्र है, जहां हर साल लगभग 10,000 रोबोट बनाए जाते हैं। कुमार ने कहा, इस निवेश के साथ रिलायंस के पास एडवर्ब में लगभग 54 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी। वे कंपनी में सबसे बड़े शेयरधारक बन गए हैं। रिलायंस पहले ही हमारे सम्मानित ग्राहकों में से एक था, जिसके साथ मिलकर हमने उनके किराना व्यवसाय जियो मार्ट के लिए उच्च क्षमता वाले स्वचालित गोदामों का निर्माण किया था। सहूलियत और भरोसा, जैसे कारक पहले से मौजूद थे, जिसके कारण यह जुड़ाव हुआ। उन्होंने कहा कि रिलायंस रिटेल के साथ रणनीतिक साझेदारी से हमें नई ऊर्जा पहलों के जरिए 5जी, बैटरी प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, हम एक लाभदायक कंपनी हैं। हम इस धनराशि का इस्तेमाल विदेश में विस्तार करने और विनिर्माण संयंत्रों की स्थापना में करेंगे। कुमार ने कहा, इस समय हमारी आय का 80 प्रतिशत हिस्सा भारत से आता है लेकिन अगले 4-5 वर्षों में भारत और विदेश व्यापार के बीच 50-50 प्रतिशत की हिस्सेदारी होने की उम्मीद है। हमारी आय में सॉफ्टवेयर की कुल हिस्सेदारी 15 प्रतिशत है, जिसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान है। एडवर्ब की स्थापना 2016 में हुई थी और उसे चालू वित्त वर्ष के दौरान 400 करोड़ रुपए की आय की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

झटका : टाटा मोटर्स बढायेगी कारों की कीमत!
Published / 2022-01-19 04:04:39
झटका : टाटा मोटर्स बढायेगी कारों की कीमत!

एबीएन डेस्क। टाटा मोटर्स ने मंगलवार को कहा कि वह अपने यात्री वाहनों की कीमतों में 19 जनवरी से औसतन 0.9 प्रतिशत की वृद्धि करेगी, ताकि लागत में हुई बढ़ोतरी की आंशिक रूप से भरपाई की जा सके। मुंबई स्थित वाहन विनिर्माता घरेलू बाजार में टियागो, पंच और हैरियर जैसे विभिन्न मॉडल बेचती है। टाटा मोटर्स ने एक बयान में कहा कि 19 जनवरी 2022 से विभिन्न मॉडलों की कीमत औसतन 0.9 प्रतिशत बढ़ाई जाएगी। इसके साथ ही कंपनी ने ग्राहकों की प्रतिक्रिया के आधार पर एक विशिष्ट संस्करण की कीमत में 10,000 रुपए तक की कटौती की है। टाटा मोटर्स ने कहा, कंपनी बढ़ी हुई लागत के एक महत्वपूर्ण हिस्से को खुद समायोजित कर रही है, लेकिन कुल लागत में तेज बढ़ोतरी ने उसे न्यूनतम मूल्य वृद्धि के जरिए कुछ भार ग्राहकों पर डालने को मजबूर किया। टाटा मोटर्स ने कहा कि 18 जनवरी 2022 को या उससे पहले बुक की गई कारों पर कीमतों में बढ़ोतरी का कोई असर नहीं होगा। इससे पहले मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने पिछले हफ्ते अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में तत्काल प्रभाव से 4.3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की थी। ऑटोमोबाइल कंपनियों का कहना है कि पिछले साल की तुलना में इस्पात, एल्युमीनियम, तांबा, प्लास्टिक और कीमती धातुओं के महंगा होने के कारण उन्हें कीमतों में बढ़ोतरी के लिए मजबूर होना पड़ा है।

झटका : मारुति सुजुकी ने 4.3% तक बढ़ायी कारों की कीमत
Published / 2022-01-15 13:53:35
झटका : मारुति सुजुकी ने 4.3% तक बढ़ायी कारों की कीमत

एबीएन डेस्क। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने अपने विभिन्न मॉडलों के दाम 4.3 प्रतिशत तक बढ़ा दिए हैं। कंपनी ने शनिवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि उत्पादन लागत में हुई वृद्धि के बोझ को आंशिक रूप से कम करने के लिए उसे यह कदम उठाना पड़ा है। कंपनी ने अपने विभिन्न मॉडलों की कीमतों में 0.1 से 4.3 प्रतिशत तक की वृद्धि की है। शेयर बाजारों को भेजी सूचना में कंपनी ने कहा कि दिल्ली शोरूम में विभिन्न मॉडलों की भारित औसत कीमत में 1.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नए कीमतें आज से प्रभावी हो गई हैं। मारुति आल्टो से लेकर एस-क्रॉस मॉडल बेचती है। इनकी कीमत 3.15 लाख रुपए से 12.56 लाख रुपए है। पिछले साल मारुति ने अपनी कारों के दाम तीन बार बढ़ाए थे। पिछले साल जनवरी में मारुति ने कीमतों में 1.4 प्रतिशत, अप्रैल में 1.6 प्रतिशत और सितंबर में 1.9 प्रतिशत यानी कुल मिलाकर 4.9 प्रतिशत की वृद्धि की थी। कंपनी ने पिछले महीने कहा था कि आवश्यक जिंसों मसलन इस्पात, एल्युमीनियम, प्लास्टिक और बहुमूल्य धातुओं की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान आए उछाल की वजह से उसे अपने वाहनों के दाम बढ़ाने पडेंगे।

महामारी के बीच डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही दुनिया, तकनीक से किफायती होगा कारोबार : सत्या नडेला
Published / 2022-01-12 01:59:53
महामारी के बीच डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही दुनिया, तकनीक से किफायती होगा कारोबार : सत्या नडेला

एबीएन डेस्क। माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सत्या नडेला ने कहा कि महामारी के बीच दुनिया डिजिटल परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। विभिन्न स्तरों पर तकनीकी को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। बदल रहे इस दौर में तकनीकी की मदद से न सिर्फ कारोबार किफायती हो जाएगा बल्कि उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। माइक्रोसॉफ्ट फ्यूचर रेडी इंवेट में नडेला ने मंगलवार को कहा कि महामारी के बीच वैश्विक स्तर पर संगठन डिजिटल परिवर्तन के दौर में हैं। हाइब्रिड वर्क, हाइपरकनेक्टेड व्यवसाय और मल्टी-क्लाउड वातावरण जैसे रुझानों के लिए एक ऐसे डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र की जरूरत है, जिसकी कोई सीमा न हो। हालांकि, इस तंत्र में विभिन्न पक्षों के बीच तत्काल भरोसा कायम करने की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी एक ऐसी ताकत है, जिसकी मदद से किसी अर्थव्यवस्था में लगातार बढ़ रही महंगाई को भी कम किया जा सकता है। छोटे या बड़े व्यवसाय तकनीकी के इस्तेमाल से अपनी उत्पादकता बढ़ाने के साथ उत्पादों और सेवाओं को किफायती बना सकते हैं। संगठनों को इस बदलाव को अपनाने में मदद करना माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीकी कंपनियों के लिए जोरदार अवसर और एक बड़ी जिम्मेदारी है। मेटावर्स है अगला पड़ाव, डिजिटल अवतार में होगा आमना-सामना : नडेला ने कहा कि मेटावर्स माइक्रोसॉफ्ट का अगला अहम पड़ाव है, जहां लोग वर्चुअल वर्ल्ड से आगे डिजिटल अवतार में पहुंच सकते हैं। इसके जरिए आप और मैं एक मीटिंग कर सकते हैं, जहां हम सभी फिजिकली उपस्थित हुए बिना भी मौजूद होते हैं। कंपनी सावधानी से इस दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हम डिजिटल प्रतिनिधित्व तैयार करने के बारे में बात कर रहे हैं। मेटावर्स के जरिये हमारे पास ऐसा करने और मानवता को साथ लाने का मौका है। इस पर जोर ऐसे समय में दिया जा रहा है, जब फेसबुक ने खुद को मेटा में रिब्रांड किया है। वह मेटावर्स के विकास के लिए 10 अरब डॉलर खर्च कर रही है। नडेला ने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट भी मेटावर्स तक पहुंचने के लिए उपभोक्ताओं और व्यवसाय दोनों की क्षमता विकसित करने में जुटी है।

व्यवसाय के लिए वृद्धि से पहले फिट होना जरूरी: एन चंद्रशेखरन
Published / 2022-01-12 01:45:40
व्यवसाय के लिए वृद्धि से पहले फिट होना जरूरी: एन चंद्रशेखरन

एबीएन डेस्क। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है। मैराथन दौड़ में अक्सर शिरकत करने वाले टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने मंगलवार को कहा कि किसी के लिए भी वृद्धि के लिए पहले फिट होना जरूरी है। चंद्रशेखरन ने फिट नहीं रहने को आगे बढ़ने की कोशिश नहीं करने का सबक बताते हुए कहा कि टाटा समूह अपने मुख्य व्यवसाय को मजबूत करते हुए अपनी कंपनियों को स्थिरता और डिजिटलीकरण के लिहाज से नए भविष्य की ओर ले जा रहा है।

गुड न्यूज : इस साल भी रहेगी पीएसयू के आईपीओ की बहार
Published / 2022-01-10 17:37:41
गुड न्यूज : इस साल भी रहेगी पीएसयू के आईपीओ की बहार

एबीएन बिजनेस डेस्क। सरकारी फर्मों का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 2018-19 में भी बड़ी संख्या में जारी रहने की उम्मीद है। बिजनेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक सबसे पहले रेल कंपनियों आरआईटीईएस और आईआरएफसी लिमिटेड के आईपीओ मई तक आम लोगों के लिए आ सकते हैं। इसके अलावा दो और रेल पीएसयू आईआरसीओएन और आरवीएनएल के आईपीओ भी बाद में इसी साल आने वाले हैं। बहरहाल, आईआरसीटीसी का आईपीओ लाने की योजना अनिश्चितकाल के लिए टल गई है। न तो रेल मंत्रालय और न ही निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग इसे सार्वजनिक करने के पक्ष में है। 2018-19 का संयुक्त विनिवेश लक्ष्य 800 अरब रुपये है। इस वित्त वर्ष में आने वाले अन्य आईपीओ में मजगांव डॉक शिप बिल्डर्स, गार्डेन रीच शिपबिल्डर्स के आईपीओ शामिल हैं। इनके अलावा 3 जनरल इंश्योरेंस पीएसटी का विलय कर एकल इकाई बनाई जोगी और उसके बाद उसे सूचीबद्ध कराए जाने की योजना है। इनमें नैशनल इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस शामिल हैं। दो शिपबिल्डरों का आईपीओ आगामी वित्त वर्ष की पहली छमाही में आने की उम्मीद है। वरिष्ठ सरकारी सूत्रों के मुताबिक आरआईटीईएस और आईआरएफसी की सूचीबद्धता मई के आखिर के पहले तक होगी और पहले आरआईटीईएस को सूचीबद्ध कराया जाएगा। आरआईटीईएस के आईपीओ में 12 प्रतिशत केंद्र की हिस्सेदारी हो सकती है जबकि आईआरएफसी में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी कम की जाएगी। आरवीएनएल में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी की योजना बनाई गई है। इसके पहले आईआरएफसी की सूचीबद्धता को लेकर संदेह था। इसकी वजह अलग कर देनदारी का मसला था। बहरहाल, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने अब कंपनी को 63.92 अरब रुपये संचित विलंबित कर देयता से मुक्त कर दिया है, जिसे कंपनी के नेटवर्थ में जोड़ा जाएगा। आईआरसीटीसी के आईपीओ की योजना को ठंडे बस्ते मेंं डाले जाने की कई वजहें हैं। आईआरसीटीसी का आईपीओ न लाए जाने की वजहों के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, कंपनी की आमदनी का बड़ा स्रोत टिकट की बुकिंग पर सेवा शुल्क व अन्य सेवाएं हैं। सरकार ने सेवा शुल्क वापस ले लिया है। ऐसे में निवेशकों की इसमें दिलचस्पी रहने की उम्मीद कम है। नोटबंदी की घोषणा के बाद नरेंद्र मोदी सरकार ने डिजिटल लेन-देन को लोकप्रिय बनाने के लिए कई कदमों की घोषणा की थी। इसमें से आईआरसीटीसी द्वारा लिया जाने वाला सेवा शुल्क खत्म करना शामिल था। इस कदम से आईआरसीटीसी का 500 करोड़ रुपये राजस्व खत्म हो गया। उम्मीद की जा रही थी कि वित्त मंत्रालय इस घाटे की भरपाई करेगा, लेकिन सिर्फ 800 करोड़ रुपये दिए गए। एसबीआई कैपिटल मार्केट, आईडीबीआई कैपिटल मार्केट ऐंड सिक्योरिटी, इलारा सिक्योरिटीज इंडिया और आईडीएफसी बैंक आरआईटीईएस के सलाहकार हैं, जबकि आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, एसबीआई कैप्स, आईडीएफसी और एचएसबीसी आईआरएफसी के बोली प्रबंधक हैं। 2017-18 में कंपनियों के रिकॉर्ड 7 आईपीओ आए। इससे 240 अरब रुपये से ज्यादा एकत्र हुए, जो साल भर के पुनरीक्षित विनिवेश लक्ष्य 1 लाख करोड़ रुपये का एक चौथाई है। इन कंपनियों में न्यू इंडिया एश्योरेंस, जनरल इंश्योरेंस कॉर्प, एचएएल, भारत डायनॉमिक्स, कोचीन शिपयॉर्ड और हुडको शामिल हैं।

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की मांग में जोरदार उछाल, कंपनियों ने बढ़ाया स्टॉक
Published / 2022-01-09 13:52:45
कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की मांग में जोरदार उछाल, कंपनियों ने बढ़ाया स्टॉक

एबीएन डेस्क। देश में कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रॉन के मामले बढ़ने के बीच रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनियों की मांग में जोरदार उछाल आया है। पिछले दो सप्ताह के दौरान एफएमसीजी कंपनियों की मांग काफी तेजी से बढ़ी है। इन कंपनियों ने आपूर्ति के किसी तरह के संकट से बचने के लिए स्टॉकिस्टों को अधिक माल भेजना शुरू कर दिया है। पारले प्रोडक्ट्स, डाबर इंडिया और आईटीसी जैसी कंपनियां महामारी की नई लहर के कारण आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी व्यवधान से बचने के लिए कच्चे माल का अतिरिक्त स्टॉक रख रही हैं। पूर्व में हुए अनुभव के मद्देनजर इन कंपनियों ने यह कदम उठाया है। हालांकि, ये कंपनियां विनिर्माण सामग्री की मुद्रास्फीति से प्रभावित हैं। एफएमसीजी कंपनियों का मानना है कि कोविड के मामलों में अचानक वृद्धि और कुछ राज्यों में स्थानीय स्तर पर लगाए अंकुशों से उनकी आउट ऑफ होम चैनल उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है। हालांकि, घरेलू उपभोग के उत्पादों और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले सामान की मांग तेज होगी। कंपनियों को उम्मीद है कि डिजिटलीकरण में तेजी के साथ ई-कॉमर्स और प्रौद्योगिकी मंच पर मौजूदगी एफएमसीजी उत्पादों की सतत आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। पारले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह ने कहा, ‘‘पिछले दो हफ्तों में हमने बाजार में मांग में 10-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी है। हम इस बात को समझ रहे हैं कि अब उपभोक्ता बाहर निकलकर सामान नहीं खरीदना चाहेंगे।’’ बिस्कुट क्षेत्र की कंपनी ने ताजा परिस्थितियों के मद्देनजर पहले से बफर स्टॉक रखा है। डाबर ने भी बढ़ाई अपने उत्पादों की आपूर्ति, बाजार की निगरानी कर रही है आईटीसी

मार्च में आ सकती है एलआईसी की आइपीओ
Published / 2022-01-07 15:35:06
मार्च में आ सकती है एलआईसी की आइपीओ

एबीएन डेस्क। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के विनिवेश की दिशा में अब तक हुई प्रगति की शुक्रवार को समीक्षा की। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा कि सीतारमण ने एलआईसी के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की। इस बैठक में निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) के सचिव तुहिन कांत पांडे और वित्त मंत्रालय के कई वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। सरकार की इस वित्त वर्ष के अंत यानी मार्च 2021 तक एलआईसी का आईपीओ लाने की योजना है। यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ साबित हो सकता है। चालू वित्त वर्ष के लिए 1.75 लाख करोड़ रुपये के तय विनिवेश लक्ष्य को हासिल करने में एलआईसी का आईपीओ काफी अहम भूमिका निभा सकता है। अभी तक सरकार कई सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बिक्री से सिर्फ 9,330 करोड़ रुपये ही जुटा सकी है। एलआईसी के विनिवेश प्रबंधन के लिए सरकार ने सितंबर 2021 में दस मर्चेंट बैंकरों की नियुक्ति की थी जिनमें गोल्डमैन सैक्स, सिटीग्रुप और नोमुरा भी शामिल हैं। वहीं सिरिल अमरचंद मंगलदास को आईपीओ के लिए विधि सलाहकार नियुक्त किया गया है। सरकार इस आईपीओ में बिक्री के लिए रखी जाने वाली हिस्सेदारी का अनुपात तय करने में लगी हुई है। इसके अलावा एलआईसी में विदेशी निवेशकों को हिस्सेदारी बढ़ाने की मंजूरी देने के बारे में भी गौर कर रही है। सेबी नियमों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक किसी आईपीओ में शेयर खरीद सकते हैं लेकिन एलआईसी अधिनियम में विदेशी निवेश का कोई प्रावधान न होने से इसके लिए जरूरी संशोधन करने पड़ सकते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने गत जुलाई में एलआईसी के विनिवेश प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई थी। इसे विनिवेश प्रक्रिया में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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