नई दिल्ली। रुपये की मजबूती के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को सोना 142 रुपये की गिरावट के साथ 47,480 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। पिछले कारोबार में सोना 47,622 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। चांदी भी 615 रुपये की गिरावट के साथ 60,280 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो पिछले कारोबार में 60,895 रुपये प्रति किलोग्राम थी। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के सीनियर एनालिस्ट (कमोडिटीज) तपन पटेल ने कहा, रुपये की मजबूती के कारण दिल्ली में 24 कैरेट सोने की हाजिर कीमत में 142 रुपये की गिरावट आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना मामूली बढ़त के साथ 1,799 डॉलर प्रति औंस और चांदी सपाट होकर 22.30 डॉलर प्रति औंस पर चल रही थी।
एबीएन डेस्क। कोरोना महामारी की मार के बाद ऑटोमोबाइल सेक्टर ने तेजी से वापसी की है। गाड़ियों की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिल रहा है। आलम ये है कि ऑटो सेक्टर गाड़ियों की बढ़ती डिमांड को पूरा नहीं कर रहा है और लोगों को नई गाड़ी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। अभी देश के 7 लाख लोग अपनी कार की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं। अगर मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इन 7 लाख लोगों ने गाड़ी खरीदने के लिए बुकिंग कराई हुई है लेकिन अभी तक कार की डिलीवरी नहीं मिली है। ऐसा नहीं है कि ये लोग किसी खास गाड़ी की डिलीवरी का इंतजार कर रहे हैं, बल्कि हर प्रकार की गाड़ियों की वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है। मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा के एक-एक लाख लोग कार डिलीवरी की वेटिंग लिस्ट में है। किआ मोटर्स के 75 हजार ग्राहक वेटिंग लिस्ट में हैं। कंपनियां कार डिलीवर नहीं कर पा रही हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर इन दिनों सेमीकंडक्टर चिप की कमी से जूझ रहा है। बताया जा रहा है कि सेमीकंडक्टर चिप की कमी की वजह से दुनियाभर की 170 इंडस्ट्रीज परेशान हैं। इनमें से एक ऑटो सेक्टर भी है। 150 लाख करोड़ का नुकसान : सेमीकंडक्टर चिप की भारी कमी के कारण इस साल ऑटो इंडस्ट्री को करीब 150 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। जापान की कंपनी टोयोटा को भी चिप की कमी के कारण नुकसान हो रहा है।
एबीएन डेस्क। भारत में जल्द ही लिथियम आयन बैटरी का निर्माण शुरू किया जाएगा। इससे देश में न केवल ई वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा बल्कि देश में पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता भी कम होगी। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने गुरुवार को कहा कि आयात निर्भरता घटाने के लिए विभिन्न देशों के साथ लिथियम पर करार किए जा रहे हैं। क्या कहा नीति आयोग? : कांत ने कहा, पब्लिक सेक्टर की कंपनी बिदेश इंडिया लिमिटेड अर्जेंटिना, चिली, ऑस्ट्रेलिया और बोलिविया में लिथियम और कोबाल्ट की खादानों के लिए लगातार बातचीत कर रही है। ये वो देश हैं जहां लिथियम का भंडार है। इसके साथ ही अर्बन माइनिंग पर भी काम चल रहा हो जहां रिसाइकिलिंग के जरिए लिथियम का उत्पादन किया जा सके। इससे आयात को घटाने में मदद मिलेगी। अमिताभ कान्त ने आगे बताया कि ई-व्हीकल इंडस्ट्री के लिए काम कर रही संसदीय समिति भी देश में लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन पर जोर दे रही है। समिति ने कहा है कि वर्ष 2030 तक देश में ई- व्हीकल मार्केट 206 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। इस टारगेट तक पहुंचना तभी संभव है जब देश में ही लिथियम बैटरी के उत्पादन में वृद्धि होगी। सरकार लिथियम आयन बैटरी के उत्पादन के लिए प्रोत्साहन राशि (PLI) की घोषणा भी कर चुकी है। इसके लिए लगभग 43 हजार करोड़ रुपए को मंजूरी मिली है। ई-व्हीकल मार्केट में अगले 5 सालों में करीब 94 हजार करोड़ रुपए का निवेश की संभावनाएं जताई गई हैं। चीन को लगेगा झटका : अभी देश में लिथियम बैटरी व सेल की एक भी उत्पादन इकाई नहीं है और 100 फीसदी जरूरत आयात के जरिए पूरी होती है, जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सा चीन से आता है। इतना ही नहीं दुनियाभर में बनने वाली एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) का 90 फीसदी उत्पादन भी चीन ही करता है।
एबीएन डेस्क। असम की खास किस्म की चाय ने नीलामी का नया रिकॉर्ड बनाया है। मनोहारी गोल्ड टी 99,999 रुपए प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड कीमत पर बिकी है। गुवाहाटी चाय नीलामी केंद्र (GTAC) के सचिव प्रियनुज दत्ता ने कहा कि मनोहारी चाय बागान ने अपनी ‘मनोहारी गोल्ड’ किस्म का एक किलोग्राम सौरभ टी ट्रेडर्स को बेचा। यह देश में चाय की बिक्री और खरीद में अब तक की सबसे ऊंची नीलामी कीमत है। मनोहरी टी एस्टेट के मालिक राजन लोहिया ने कहा, हम इस प्रकार की प्रीमियम क्वालिटी वाली स्पेशल चाय के लिए खास उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों द्वारा मांग के आधार पर चाय का निर्माण करते हैं। क्या है चाय की खासियत? मनोहरी गोल्ड टी की खासियत यह है कि ये पत्तियों से नहीं बल्कि छोटी कलियों से तैयारी की जाती है, इसलिए इसकी कीमत ज्यादा है और स्वाद भी काफी अच्छा होता है। चमकीले पीले रंग की लीकर का स्वाद सुखद होता है और इसे कई हेल्थ बेनिफिट्स के लिए जाना जाता है। असम चाय अपने स्वादिष्ट स्वाद, मजबूत और चमकीले रंग के लिए जानी जाती है। मनोहारी गोल्ड चाय अपने नाम के साथ मेल खाती है। यह चाय की पत्तियां पीसे जाने पर एक सुनहरा रंग देती हैं। ऑक्सीडेशन के कारण, इसकी प्रक्रिया के दौरान हरे रंग से भूरापन में रंग बदल जाता है और सूखने पर, कलियां सुनहरी हो जाती हैं और फिर उन्हें काले पत्तों से अलग किया जाता है। एक महीने में ही टूट गया रिकॉर्ड मनोहरी गोल्ड टी जुलाई 2019 में जीटीएसी नीलामी में 50,000 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकी थी, जो उस समय की उच्चतम नीलामी कीमत थी। हालांकि, रिकॉर्ड एक महीने के भीतर टूट गया, जब अरुणाचल प्रदेश के डोनी पोलो टी एस्टेट द्वारा निर्मित ‘गोल्डन नेडल्स टी’ और असम के डिकॉन टी एस्टेट की ‘गोल्डन बटरफ्लाई टी’ अलग-अलग नीलामियों में 75,000 रुपए प्रति किलोग्राम के हिसाब से बिकी। इतना ही नहीं साल 2018 में, यही चाय इसी प्लांटेशन में सबसे महंगी नीलाम हुई थी। मनोहरी टी स्टेट की इस चाय की कीमत 39,001 रुपए प्रति किलोग्राम लगाई गई। साल 2021 में यह चाय सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 99,999 रुपए प्रति किलो के भाव पर बिकी। लोहिया के मुताबिक, 2018 में इस स्पेशन वैरायटी का उत्पादन शुरू करने के बाद से मनोहरी गोल्ड चाय की बहुत अधिक मांग है। यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गई है और हर साल नीलामी में रिकॉर्ड तोड़ रही है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों द्वारा ब्रांड की मांग की जाती है।
एबीएन डेस्क। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रविवार को निवेशकों को आगाह किया कि वे मोटी कमाई के पीछे भागते वक्त सावधान रहें, क्योंकि उसमें बड़ी जोखिम रहती है। गर्वनर दास ने कहा कि निवेशकों या जमाकर्ताओं को स्वयं भी बहुत समझदार होने की आवश्यकता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि उच्च रिटर्न या उच्च ब्याज दरों से अक्सर उच्च जोखिम जुड़ी होती है। सिर्फ इसलिए कि एक बैंक ज्यादा ब्याज की पेशकश कर रहा है तो उसका पीछा करते हुए उसमें पैसा लगाने से पहले बहुत सावधान रहना चाहिए। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने यह भी कहा कि ऐसे संस्थान भी हैं, जो उच्च रिटर्न दे रहे हैं और वे आर्थिक रूप से सक्षम भी हैं, लेकिन जमाकर्ताओं को हमेशा बहुत सतर्क रहना चाहिए। दिल्ली में आयोजित डिपॉजिटर्स फर्स्ट कार्यक्रम में गवर्नर दास ने कहा कि रिजर्व बैंक इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि बैंकिंग तंत्र मजबूत और लचीला बना रहना चाहिए, लेकिन यह साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि हर हितधारक चाहे वह बैंकों का प्रबंधन हो, चाहे वह बैंकों का बोर्ड हो, चाहे वह बैंकों की विभिन्न समितियां हों, लेखा परीक्षा समिति, जोखिम प्रबंधन समिति या कोई अन्य नियामक प्राधिकरण हो, हम सभी की संयुक्त जिम्मेदारी है। जमा बीमा राशि अंतिम विकल्प होना चाहिए : बैंकों या वित्तीय संस्थान के डूबने की दशा में जमाकर्ताओं को उनकी जमा के एवज में दी जाने वाली बीमा राशि को लेकर गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि यह राशि अंतिम विकल्प होना चाहिए। रिजर्व बैंक बैंकों नियामक दिशानिर्देशों को मजबूत कर निगरानी के तरीकों को सशक्त बना रहा है, ताकि बैंकों का कामकाज बहुत लचीले तरीके से आगे बढ़ सके। रिजर्व बैंक ने आम बजट की घोषणा के अनुसार किसी बैंक या वित्त संस्थान के संकटग्रस्त होने की दशा में बैंकों में जमा राशि का अधिकतम पांच लाख रुपये तक का भुगतान करने के लिए जमा बीमा नीति लागू की है। इसमें खाते में जमा राशि या अधिकतम पांच लाख रुपये की राशि बैंक के जमाकर्ता को लौटाने का प्रावधान है।
एबीएन बिजनेस डेस्क। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को डिपॉजिट फर्स्ट 5 लाख रुपए तक के समयबद्ध जमा राशि बीमा भुगतान की गारंटी विषय पर आधारित एक समारोह को संबोधित किया है। पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम में कहा कि आज देश के लिए बैंकिंग सेक्टर के लिए और देश के करोड़ों बैंक अकाउंट होल्डर्स के लिए बहुत महत्वपूर्ण दिन है। उन्होंने कहा कि आज के आयोजन का जो नाम दिया गया है उसमें डिपॉजिटर्स फर्स्ट की भावना को सबसे पहले रखना, इसे और सटीक बना रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते कुछ दिनों में एक लाख से ज्यादा जमाकर्ताओं को बरसों से फंसा हुआ उनका पैसा वापस मिला है। मोदी ने कहा कि ये राशि 1300 करोड़ रुपए से भी ज्यादा है। मोदी ने आगे कहा कि दशकों से चली आ रही एक बड़ी समस्या का कैसे समाधान निकाला गया है, आज का दिन उसका साक्षी बन रहा है। उन्होंने कहा कि कोई भी देश समस्याओं का समय पर समाधान करके ही उन्हें विकराल होने से बचा सकता है लेकिन सालों तक एक प्रवृत्ति रही कि समस्याओं को टाल दो। भारत समस्याओं को टालता नहीं : पीएम मोदी ने कहा कि आज का नया भारत, समस्याओं के समाधान पर जोर लगाता है, आज भारत समस्याओं को टालता नहीं है। उन्होंने कहा कि यानी अगर बैंक डूबा, तो डिपॉजिटर्स को, जमाकर्ताओं को सिर्फ एक लाख रुपए तक ही मिलने का प्रावधान था। ये पैसे भी कब मिलेंगे, इसकी कोई समय सीमा नहीं तय थी। मोदी ने कहा कि गरीब की चिंता को समझते हुए, मध्यम वर्ग की चिंता को समझते हुए उन्होंने इस राशि को बढ़ाकर फिर 5 लाख रुपए कर दिया। मोदी ने कहा कि हमारे देश में बैंक डिपॉजिटर्स के लिए इंश्योरेंस की व्यवस्था 60 के दशक में बनाई गई थी। पहले बैंक में जमा रकम में से सिर्फ 50 हजार रुपए तक की राशि पर ही गारंटी थी। फिर इसे बढ़ाकर एक लाख रुपए कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि कानून में संशोधन करके एक और समस्या का समाधान करने की कोशिश की है। मोदी ने आगे कहा कि पहले जहां पैसा वापसी की कोई समयसीमा नहीं थी, अब हमारी सरकार ने इसे 90 दिन यानी 3 महीने के भीतर अनिवार्य किया है यानी बैंक डूबने की स्थिति में भी, 90 दिन के भीतर जमाकर्ताओं को उनका पैसा वापस मिल जाएगा।
एबीएन डेस्क। ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन पर इटली में 1.13 अरब डॉलर (करीब 9750 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगा है। कंपनी पर यूरोप में अपने बाजार प्रभुत्व का दुरुपयोग कर छोटे विक्रेताओं या प्रतिद्वंदियों को दबाने का आरोप है। जुर्माना इटली की एंटीट्रस्ट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने लगाया है। अथॉरिटी ने गुरुवार को कहा कि छोटे प्रतिस्पर्धियों को परेशान करने के लिए अमेजन ने थर्ड पार्टी सेलर्स को लाभ पहुंचाया। उन्हें अपनी लॉजिस्टिक सेवाओं और डिलीवरी सिस्टम का उपयोग करने दिया, ताकि वे प्रतिद्वंद्वियों के प्रॉडक्ट की बिक्री और डिलीवरी को प्रभावित करें। इटली में यह अथॉरिटी किसी भी कंपनी पर उसके कुल राजस्व का 10% तक जुर्माना लगा सकती है। अमेजन ने हाई कोर्ट में अपील करने की बात कही है। इटली में अथॉरिटी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की कानूनी व्यवस्था है। कोर्ट जुर्माने की राशि को कम या ज्यादा करने पर फैसला ले सकती है। रेगुलेटरी अथॉरिटी ने दो साल तक चली जांच में पाया कि सााल 2019 में अमेजन का ऑनलाइन बाजार में मार्केट शेयर उसके करीबी प्रतिद्वंद्वियों से 5 गुना ज्यादा था, जो पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा था। इटली में 2019 में थर्ड पार्टी सेलर्स की ऑनलाइन जितनी भी प्रॉडक्ट बिक्री हुई थी, उसमें 70 फीसदी सिर्फ अमेजन पर हुई थी।
एबीएन डेस्क। भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन ने शुक्रवार को कहा कि व्यवस्था की उत्पादकता एवं प्रभाव बढ़ाने के लिए सुधार करने जरूरी हैं लेकिन इसी के साथ सुधारों पर अमल करने का समय भी काफी अहम है। रंगराजन ने आईसीएफएआई बिज़नेस स्कूल में एक व्याख्यान देते हुए कहा कि सुधार किए जाने पर आलोचना का सामना करना ही पड़ता है और यह कोई नई बात नहीं है। वर्ष 1991 के आर्थिक सुधार भी संकट की छाया में लागू किए गए थे। उन्होंने कहा, वर्ष 1991 में आर्थिक सुधार होने पर भी आलोचक सामने आए थे। उस समय संसद में बैठे कुछ लोगों को लग रहा था कि हमने खुद को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के हाथों बेच दिया है। 1991 में लागू हुए कई सुधार भी संकट की छाया में ही लागू किए जा सके थे हालांकि रंगराजन कहा कि अब ऐसा नहीं किया जा सकता है लिहाजा सुधारों के पहले अधिक विचार-विमर्श करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, में सहमति बनाने की जरूरत है। हम सुधारों की दिशा में जितना भी आगे बढ़ेंगे, हमें हितधारकों के साथ उतनी ही ज्यादा सहमति बनाने की जरूरत होगी। लिहाजा सुधारों का समय और उसका क्रम भी अहम है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के पूर्व प्रमुख ने कहा कि श्रम सुधारों को लागू करने का सबसे अच्छा समय तब है जब अर्थव्यवस्था में उछाल का दौर हो। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्यों को एक साथ मिलकर सुधारों की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए। उन्होंने कृषि विपणन समेत सभी क्षेत्रों में सुधार किए जाने को जरूरी बताते हुए कहा कि सरकार को इन्हें लाने के पहले सहमति बनाने की कोशिश करनी चाहिए। उनका यह बयान तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसान आंदोलन के संदर्भ में खासा अहम है। इसकी वजह से सरकार को ये तीनों सुधार वापस भी लेने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत को पांच लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए अगले पांच वर्षों तक सालाना नौ फीसदी की दर से वृद्धि करने की जरूरत है।
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