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यूको बैंक का शुद्ध लाभ 776 प्रतिशत बढ़ा
Published / 2022-02-01 15:15:04
यूको बैंक का शुद्ध लाभ 776 प्रतिशत बढ़ा

एबीएन बिजनेस डेस्क। सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाता यूको बैंक ने 31 दिसंबर, 2021 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही के दौरान शुद्ध लाभ में 775.9 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया है और यह बढ़कर 310.4 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 21 की तीसरी तिमाही में यह 35.4 करोड़ रुपये था। कोलकाता के इस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही के दौरान 25.26 प्रतिशत बढ़कर 1,762.6 करोड़ रुपये हो गई, जबकि दिसंबर 2020 को समाप्त होने वाली तीसरी तिमाही (वित्त वर्ष 21 की तीसरी तिमाही) के दौरान यह 1,407.1 करोड़ रुपये थी। दिसंबर 2021 में इसके अग्रिम 7.5 प्रतिशत बढ़कर 1,25,519 करोड़ रुपये हो गए, जो एक साल पहले 1,16,797 करोड़ रुपये थे। दिसंबर 2021 के अंत में इसका पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.56 प्रतिशत और कॉमन इक्विटी-1 अनुपात 11.73 प्रतिशत रहा। करूर वैश्य बैंक का शुद्ध लाभ चार गुना बढ़ा : करूर वैश्य बैंक (केवीबी) ने वित्त वर्ष 2021-22 की तीसरी तिमाही के दौरान शुद्ध लाभ में चार गुना वृद्धि दर्ज की है और यह बढ़कर 185 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 35 करोड़ रुपये था। इस तिमाही के दौरान बैंक की कुल आय मामूली रूप से घटकर 1,600 करोड़ रुपये रह गई, जबकि वर्ष 2020-21 में इसी तिमाही के दौरान यह 1,614 करोड़ रुपये थी। तिमाही में परिचालन लाभ 402 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तीसरी तिमाही के 269 करोड़ रुपये से 133 करोड़ रुपये अधिक है। तिमाही के दौरान बैंक की शुद्ध ब्याज आय वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही की 584 करोड़ रुपये के मुकाबले चालू तिमाही के दौरान 18 प्रतिशत (103 करोड़ रुपये) बढ़कर 687 करोड़ रुपये हो गई। शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.68 प्रतिशत रहा। जमा लागत पिछली अवधि के 4.80 प्रतिशत की तुलना में 58 आधार अंक तक घटकर 4.22 प्रतिशत रह गई। टाटा मोटर्स को 1,451 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा : घरेलू वाहन कंपनी टाटा मोटर्स को चालू वित्त वर्ष की दिसंबर में समाप्त तीसरी तिमाही में 1,451 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध घाटा हुआ है। टाटा मोटर्स ने सोमवार को शेयर बाजारों को यह जानकारी दी। इससे पिछले वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में कंपनी ने 2,941.48 करोड़ रुपये का एकीकृत शुद्ध लाभ कमाया था। कंपनी की परिचालन आय आलोच्य तिमाही के दौरान घटकर 72,229.29 करोड़ रुपये रह गई। एक साल पहले की इसी अवधि में यह 75,653.79 करोड़ रुपये थी। सन फार्मा के शुद्ध लाभ में 11 फीसदी इजाफा : दवा कंपनी सन फार्मा का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर, 2021 की तिमाही में 11.14 प्रतिशत बढ़कर 2,058.8 करोड़ रुपये हो गया। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिक्री में वृद्धि से कंपनी का लाभ बढ़ा है। कंपनी ने सोमवार को शेयर बाजारों को बताया कि इससे पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में उसका एकीकृत शुद्ध लाभ 1,852.4 करोड़ रुपये रहा था। फार्मा कंपनी ने कहा कि अक्टूबर-दिसंबर, 2021 की तिमाही में उसकी परिचालन आय बढ़कर 9,863 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। डीएलएफ के शुद्ध लाभ में 16 फीसदी गिरावट : रियल्टी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी डीएलएफ के शुद्ध लाभ में वित्त वर्ष 22 की तीसरी तिमाही के दौरान 16 प्रतिशत की गिरावट नजर आई है और यह कम होकर 379 करोड़ रुपये रह गया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के दौरान यह 451 करोड़ रुपये था। इंडियन आॅयल का शुद्ध लाभ 19 फीसदी बढ़ा : इंडियन आॅयल कॉरपोरेशन (आईओसी) का शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 19 फीसदी बढ़कर 5,860.80 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। आईओसी ने सोमवार को एक बयान में यह जानकारी दी। कंपनी ने कहा कि 31 दिसंबर, 2021 को समाप्त तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 19.2 फीसदी बढ़कर 5,860.80 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एक साल पहले की इसी तिमाही में 4,916.59 करोड़ रुपये था। कंपनी के अनुसार यह लाभ इससे पिछली तिमाही में हुए 6,360.05 करोड़ रुपये के लाभ से कम है। इसके अलावा कंपनी की परिचालन आय आलोच्य तिमाही में बढ़कर 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई। एक साल पहले की इसी तिमाही में यह 1.47 लाख करोड़ रुपये थी। आईओसी ने कहा कि तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ बढ़ने का मुख्य कारण रिफाइनिंग मार्जिन ज्यादा होना है। हालांकि कंपनी ने कितना मार्जिन कमाया, इसकी जानकारी नहीं दी।

तेज बना रहेगा सड़क व रेलवे में सार्वजनिक निवेश
Published / 2022-02-01 12:57:32
तेज बना रहेगा सड़क व रेलवे में सार्वजनिक निवेश

एबीएन डेस्क (त्वेष मिश्र)। आर्थिक समीक्षा 2021-22 के मुताबिक हाल के वर्षों में सार्वजनिक क्षेत्र के निवेश को लेकर सड़कों और रेलवे पर ध्यान अधिक रहा है। राष्ट्रीय रेल योजना पर विशेष जोर दिए जाने के साथ यह धारणा जारी रहने की संभावना है। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है, अगले 10 साल के दौरान रेलवे सेक्टर में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) बहुत ज्यादा रहेगा क्योंकि आने वाले वर्षों मेंं बढ़ती हुई मांग को देखते हुए 2030 तक क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी होगी। समीक्षा में कहा गया है, 2014 तक रेलवे पर पूंजीगत व्यय सालाना महज 45,980 करोड़ रुपये था। उसके बाद उच्च स्तर पर अकुशलता और मार्गों पर भीड़ की स्थिति पैदा हुई, जिससे बढ़ती हुई मांग पूरी करने में समस्याएं आने लगीं। 2014 के बाद इस दिशा में लगातार सुधार की कवायदें शुरू हुईं और इसी के मुताबिक पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी हुई। 2021-22 में पूंजीगत व्यय आवंटन बढ़कर 2,15,000 करोड़ रुपये हो गया, जो 2014 के स्तर की तुलना में 5 गुना ज्यादा है। साथ ही इसमें कहा गया है कि आने वाले वर्षों में पूंजीगत व्यय में और बढ़ोतरी होगी। समीक्षा के मुताबिक अप्रैल से नवंबर 2021 के बीच पूंजीगत व्यय का ध्यान बुनियादी ढांचा केंद्रित क्षेत्रों जैसे सड़क एवं राजमार्गों, रेलवे, आवास एवं शहरी मामलों पर रहा। इसके साथ केंद्र ने राज्यों द्वारा पूंजीगत व्यय बढ़ाने के लिए कुछ प्रोत्साहन दिए। समीक्षा में कहा गया है कि 2014-2021 के दौरान औसतन 1,835 ट्रैक किलोमीटर प्रति साल लाइन बिछाई गई, जो नई लाइनें बिछाने व कई ट्रैक बनाने की परियोजनाओं में किया गया। वहीं 2009-14 के दौरान औसतन 720 ट्रैक किलोमीटर का औसत रहा। इसी तरह से सड़क क्षेत्र में देखें तो 2013-14 से राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण लगातार बढ़ा है। 2020-21 में 13,327 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ, जबकि 2019-20 मेंं 10,237 किलोमीटर राजमार्गों का निर्माण हुआ था। इससे पता चलता है कि पहले के साल की तुलना में 30.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2021-22 (सितंबर तक) 3,824 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हुआ है। समीक्षा में कहा गया है, प्रतिदिन सड़क निर्माण 2020-21 में उल्लेखनीय रूप से बढ़कर प्रतिदिन 36.5 किलोमीटर हो गया, जो 2019-20 में 28 किलोमीटर प्रतिदिन था। इसमें पहले के साल की तुलना में 30.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 2020-21 मेंं सड़कों पर सार्वजनिक व्यय उल्लेखनीय रूप से 29.5 प्रतिशत बढ़ा है। सड़कों और रेलवे पर भारी खर्च से स्टील उत्पादन को भी प्रोत्साहन मिला है। समीक्षा में कहा गया है, आर्थिक रिकवरी के साथ स्टील की मांग इस साल तेज रही है। अगले वित्त वर्ष में भी स्टील की मांग तेज रहने की उम्मीद है। यह मुख्य रूप से भारत सरकार द्वारा सड़कों, रेलवे और रक्षा उत्पादन पर ध्यान बढ़ाने की वजह से हुआ है। स्टील के लिए प्रदर्शन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना से इस क्षेत्र में जरूरी निवेश को बल मिला है। नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एनआईपी) में वित्त वर्ष 2020 से 2025 के बीच 111 लाख करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य है। एनआईपी कार्यबल की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि करीब 15 से 17 प्रतिशत आवंटन नवोन्मेषी और वैकल्पिक पहल जैसे राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) की संपत्ति मुद्रीकरण व अन्य साधनोंं से प्राप्त किया जाएगा। समीक्षा के मुताबिक एनएमपी से 6 लाख करोड़ रुपये मुद्रीकरण की संभावना है, जो केंद्र की प्रमुख संपत्तियोंं के माध्यम से वित्त वर्ष 2022 से 2025 के बीच 4 साल के दौरान आएंगे।

टाटा मोटर्स : पांच गुणा बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री
Published / 2022-02-01 12:55:13
टाटा मोटर्स : पांच गुणा बढ़ी इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री

एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा मोटर्स ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि कंपनी ने जनवरी, 2021 में 59,866 वाहन बेचे थे। घरेलू वाहन विनिर्माता कंपनी ने कहा कि जनवरी, 2022 में उसकी घरेलू बाजार में बिक्री सालाना आधार पर 26 प्रतिशत बढ़कर 72,485 इकाई पर पहुंच गई। एक पहले के इसी महीने में यह 57,649 इकाई थी। कंपनी ने आलोच्य महीने के दौरान कुल 40,777 यात्री वाहन बेचे, जबकि जनवरी, 2021 के दौरान 26,978 वाहनों की बिक्री की थी। टाटा मोटर्स की जनवरी माह में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री पांच गुना होकर 2,892 इकाई पर पहुंच गई। कंपनी ने जनवरी 2021 में 514 इलेक्ट्रिक वाहन बेचे थे।

एयरटेल में 1 अरब डॉलर निवेश करेगा गूगल
Published / 2022-01-29 14:17:17
एयरटेल में 1 अरब डॉलर निवेश करेगा गूगल

एबीएन बिजनेस डेस्क। तकनीकी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी गूगल भारतीय दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनी भारती एयरटेल में 1 अरब डॉलर तक का निवेश करेगी। यह निवेश इक्विटी और किफायती स्मार्टफोन, नेटवर्क और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक साझेदारी के मिश्रण के तौर पर होगा। गूगल का यह भारत में दूरसंचार क्षेत्र में दूसरा निवेश है, इससे पहले कंपनी ने रिलायंस जियो में निवेश किया था। यह निवेश गूगल के 10 अरब डॉलर के इंडिया डिजिटलीकरण कोष का हिस्सा है। निवेश के मसले पर दोनों कंपनियों में 2021 की पहली छमाही से ही बातचीत चल रही थी, जिसकी आज औपचारिक घोषणा की गई। 1 अरब डॉलर के निवेश में से भारती एयरटेल में 70 करोड़ डॉलर (करीब 5,224 करोड़ रुपये) का निवेश किया जाएगा। इसके बदले गूगल को 734 रुपये प्रति शेयर भाव पर तरजीही शेयर जारी किए जाएंगे। इस सौदे से भारती एयरटेल में गूगल की हिस्सेदारी 1.28 फीसदी होगी। सौदे का मूल्य गुरुवार को एयरटेल के शेयर भाव 715.90 रुपये से 2.5 फीसदी अधिक दाम पर किया गया है। इसके अतिरिक्त गूगल स्मार्टफोन एक्सेस, नेटवर्क और क्लाउड जैसे क्षेत्रों में संभावित निवेश के लिए 30 करोड़ डॉलर का कोष अलग से रखेगी। इस निवेश से एयरटेल को अपने ग्राहकों को किफायती उपकरण की व्यापक रेंज उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। एयरटेल के मुख्य कार्याधिकारी गोपाल वि_ल ने कहा कि कंपनी की योजना अपना विशिष्ट स्मार्टफोन विकसित करने की नहीं है। उन्होंने कहा कि कंपनी स्मार्टफोन की उपलब्धता में सुधार के लिए ऋणदताओं, उपकरण विनिमार्ताओं और ई-कॉमर्स कंपनियों सहित पारिस्थितिकी तंत्र के सभी साझेदारों के साथ काम करती रहेगी। कंपनी ग्राहकों के खरीदारी के रुझान का अनुामन लगाने के लिए सॉफ्टवेयर टूल और डेटा मॉडल का भी उपयोग कर रही है जिससे लक्षित ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिलती है। वर्तमान में एयरटेल के 19 करोड़ से अधिक 4जी ग्राहक हैं, जिनमें से करीब 8 करोड़ ग्राहक पिछले दो साल में जुड़े हैं। साझेदारी के दो अन्य क्षेत्र हैं 5जी और क्लाउड। दोनों कंपनियां साथ मिलकर 5जी और अन्य स्टैंडर्ड के लिए भारत-निर्दिष्ट नेटवर्क डोमेन भी बनाएंगी। एयरटेल पहले से ही गूगल के 5जी-रेडी इवॉल्व्ड पैकेट कोर और सॉफ्टवेयर नेटवर्क प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रही है। विल ने कहा कि एयरटेल हर साल 2.5 अरब डॉलर का पूंजीगत निवेश कर रही है और होम ब्रॉडबैंड, डेटा सेंटर तथा 5जी सेवाओं पर निवेश जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि गूगल के निवेश से कंपनी के डिजिटल एजेंडा में व्यापक तेजी आएगी। विल ने कहा कि इससे गूगल के जियो में मौजूदा निवेश पर कोई विवाद नहीं होगा। जुलाई 2020 में गूगल ने जियो प्लेटफॉर्म्स में 4.5 अरब डॉलर (33,737 करोड़ रुपये) के निवेश से 7.73 फीसदी हिस्सेदारी ली थी।

रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव की सलाह: बजट में अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने, रोजगार सृजन पर हो जोर
Published / 2022-01-27 17:36:36
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव की सलाह: बजट में अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने, रोजगार सृजन पर हो जोर

एबीएन बिजनेस डेस्क। रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर डी सुब्बाराव ने बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार को आगामी बजट में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने साथ ही कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की जरूरत को देखते हुए कर कटौती की ज्यादा गुंजाइश नहीं है। सुब्बाराव ने यह भी कहा कि अनुभव से पता चलता है कि संरक्षणवादी दीवारों के साथ निर्यात को बढ़ावा देने की नीति शायद ही कभी प्रतिस्पर्धी होती है, इसलिए आयात शुल्कों को घटाने की जरूरत है। उन्होंने पीटीआई-भाषा से साक्षात्कार में कहा, वृद्धि को गति देना हर बजट का मकसद होता है और इस बजट का भी यह उद्देश्य होना चाहिए। लेकिन, इस बजट में अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए। सुब्बाराव ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करने वाले निम्न-आय वर्ग के लिए भारी संकट पैदा कर दिया है, जबकि दूसरी ओर उच्च-आयवर्ग न केवल अपनी आमदनी बढ़ाने में सक्षम है, बल्कि वास्तव में उनकी बचत और संपत्ति बढ़ी है। उन्होंने हाल में आई विश्व असमानता रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, इस तरह की व्यापक असमानता न केवल नैतिक रूप से गलत और राजनीतिक रूप से नुकसानदेह है, बल्कि इससे हमारी दीर्घकालिक वृद्धि संभावनाएं भी प्रभावित होंगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को आम बजट 2022-23 संसद में पेश करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि वृद्धि को गति देना हर बजट का मकसद होता है और इस बजट का भी यह उद्देश्य होना चाहिए, लेकिन इस बार अर्थव्यवस्था में व्यापक असमानता को पाटने पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा, हमें रोजगार आधारित वृद्धि की जरूरत है। अगर इस बजट के लिए कोई "थीम" है, तो वह रोजगार होनी चाहिए। पूर्व गवर्नर ने कहा कि मंदी के कारण नौकरियां कम हुई हैं। इसके अलावा आर्थिक गतिविधियों के श्रम प्रधान अनौपचारिक क्षेत्र से पूंजी प्रधान औपचारिक क्षेत्र की ओर केंद्रित होने से भी रोजगार का संकट पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि रोजगार पैदा करने के लिए वृद्धि जरूरी है, लेकिन इतना ही पर्याप्त नहीं है। निर्यात बढ़ाने से न सिर्फ विदेशी मुद्रा मिलेगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसके अलावा सुब्बाराव ने कहा कि इस साल देश के कर संग्रह में आया उछाल अगले साल खत्म हो जाएगा, क्योंकि अनौपचारिक क्षेत्र फिर से पटरी पर आने लगेगा। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाने की लगातार जरूरत को देखते हुए कर कटौती की गुंजाइश बहुत कम है।

दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी बनी टीसीएस
Published / 2022-01-26 16:30:17
दुनिया की दूसरी सबसे मूल्यवान आईटी कंपनी बनी टीसीएस

एबीएन बिजनेस डेस्क। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पूरी दुनिया में आईटी सर्विस सेक्टर में टाटा कंसल्टेंसी दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनकर उभरी है। ब्रांड फाइनेंस 2022 ग्लोबल 500 रिपोर्ट में यह बात कही गई है। पहले स्थान पर एक्सेंचर काबिज है। टाटा कंसल्टेंसी के अलावा भारत की अन्य दिग्गज कंपनियों में से इंफोसिस समेत चार टेक कंपनियों ने इस सूची में टॉप 25 आईटी सर्विसेज ब्रांड में जगह बनाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सेंचर सबसे मूल्यवान और सबसे मजबूत आईटी सेवा ब्रांड के रूप में जारी है। इसकी ब्रांड वैल्यू 36.2 अरब डॉलर है। इसके बाद वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते आईटी सेवा ब्रांड के रूप में उभरते हुए तीसरे स्थान पर है, जो पिछले साल से 52 प्रतिशत मूल्य वृद्धि और 2020 से 80 प्रतिशत बढ़कर 12.8 अरब डॉलर मूल्य की हो गई है। टीसीएस की बात करें तो यह कारोबारी प्रदर्शन और सफल साझेदारियों के चलते 16.8 अरब डॉलर मूल्य की कंपनी बनकर दूसरे नंबर पर पहुंच गई। ब्रांड फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 12 महीनों में टीसीएस की ब्रांड वैल्यू 1.844 अरब डॉलर (12.5 फीसदी) बढ़कर 16.786 अरब डॉलर हो गई है। गौरतलब है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज टाटा ग्रुप की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में एक है जो आईटी सेवाओं से जुड़े काम देखती है। इस उपलब्धि पर टीसीएस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि कंपनी ने अपना निवेश ब्रांड और कर्मचारियों में किया यह शानदार रैंकिंग इसकी का नतीजा है। दुनिया में सबसे तेज बढ़ने वाले 10 बड़े आईटी सर्विसेज ब्रांड को देखें तो इनमें सभी 6 बड़े भारतीय ब्रांड शामिल हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था में डिजिटलीकरण का अमह रोल देखने को मिला है खासतौर से कोरोना महामारी के दौर में। यही वचह है कि पिछले दो साल में आईटी सेवाओं ने सबसे तेजी से रफ्तार पकड़ी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आईटी कंपनियों को सबसे तेज वृद्धि 2020 से 2022 के बीच मिली है जो कि 51 प्रतिशत के आसपास है। हालांकि इसी दौर में अमेरिकी कंपनियों की ग्रोथ देखें तो भारतीय कंपनियां उनसे 7 फीसदी पीछे रही हैं।

डीजल की जगह वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करें निर्माण क्षेत्र : गडकरी
Published / 2022-01-26 03:57:19
डीजल की जगह वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल करें निर्माण क्षेत्र : गडकरी

एबीएन सेंट्रल डेस्क। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने निर्माण उद्योग में डीजल के उपयोग पर चिंता जताते हुए मंगलवार को कहा कि क्षेत्र को जीवाश्म ईंधन की जगह जैव-एथनॉल, एलएनजी और सीएनजी जैसे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह न केवल खतरनाक उत्सर्जन को कम करेगा बल्कि भारी आयात बिल में भी कटौती करेगा। उद्योग मंडल सीआईआई के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि फिलहाल भारत अपनी कुल जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इस पर सालाना आठ लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह अर्थव्यवस्था पर काफी बड़ा बोझ है। उन्होंने कहा, फिलहाल, डीजल का बड़े पैमाने पर निर्माण उद्योग में उपयोग हो रहा है। दुर्भाग्य से, यह ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के लिये भी काफी जिम्मेदार है। मंत्री ने कहा, हमें डीजल के स्थान पर अन्य वैकल्पिक ईंधन का उपयोग करना होगा। खतरनाक उत्सर्जन को कम करने के साथ भारी आयात बिल में कमी लाने के लिए यह जरूरी है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि अगर हम डीजल के स्थान पर जैव ईंधन का उपयोग नहीं करते हैं, तो अगले पांच साल में देश का कच्चे तेल का आयात बिल 25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। गडकरी ने यह भी कहा कि वह अपने चीनी कारखानों में बायोडीजल का उपयोग कर रहे हैं, और ट्रैक्टरों को सीएनजी पर चलाने के लिये उसमें जरूरी बदलाव किये गये हैं।

सेंसेक्स ने लगाया 1,546 अंक का गोता, निफ्टी भी 17,200 से नीचे
Published / 2022-01-24 12:29:57
सेंसेक्स ने लगाया 1,546 अंक का गोता, निफ्टी भी 17,200 से नीचे

एबीएन बिजनेस डेस्क। वैश्विक स्तर पर कमजोर रुख के बीच घरेलू बाजार में चौतरफा बिकवाली से बीएसई सेंसेक्स सोमवार को 1,546 अंक का गोता लगाकर 58,000 अंक के नीचे आ गया। कारोबारियों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों की पूंजी निकासी जारी रहने से भी बाजार धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा। बाजार में शुरूआत गिरावट के साथ हुई और दोपहर के कारोबार में बिकवाली और तेज हो गयी। लगभग सभी खंडवार सूचकांक नुकसान में रहे। तीस शेयरों पर आधारित बीएसई सेंसेक्स 1,545.67 अंक यानी 2.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,491.51 पर बंद हुआ। इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 468.05 अंक यानी 2.66 प्रतिशत का गोता लगाकार 17,149.10 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के सभी 30 शेयर नुकसान में रहे। बजाज फाइनेंस का शेयर करीब 6 प्रतिशत टूटकर सर्वाधिक नुकसान में रहा। इसके अलावा टाटा स्टील, विप्रो, टेक महिंद्रा, टाइटन, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचसीएल टेक में भी प्रमुख रूप से नुकसान में रहे। आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स के इक्विटी शोध प्रमुख नरेंद्र सोलंकी ने कहा, एशिया के अन्य बाजारों में मिले-जुले रुख के बीच घरेलू बाजार गिरावट के साथ खुले। इसका कारण निवेशकों की अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर नजर और भू-राजनीतिक अनिश्चितता है। दोपहर के कारोबार में बिकवाली में तेजी आयी क्योंकि दोनों सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गये थे। उन्होंने कहा, बिकवाली इतनी तेज थी कि दोनों मानक सूचकांक करीब 3-3 प्रतिशत नीचे आ गये। धारणा इतनी कमजोर थी कि कारोबारियों ने 14 जनवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान विदेशी मुद्रा भंडार के 2.22 अरब डॉलर बढ़कर 634.96 अरब डॉलर पर पहुंचने के रिजर्व बैंक के आंकड़ों को भी नजरअंदाज किया। एशिया के अन्य बाजारों में हांगकांग का हैंगसेंग, दक्षिण कोरिया कॉस्पी नुकसान में, जबकि जापान का निक्की और चीन का शंघाई कंपोजिट लाभ में रहे। यूरोप के प्रमुख बाजारों में दोपहर के कारोबार में गिरावट का रुख रहा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड 0.32 प्रतिशत बढ़कर 88.17 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 19 पैसे टूटकर 74.62 (अस्थायी) प्रति डॉलर पर आ गया।

रिलायंस जियो इस साल ला सकती है IPO, 100 अरब डॉलर वैल्यूएशन की उम्मीद
Published / 2022-01-22 18:13:55
रिलायंस जियो इस साल ला सकती है IPO, 100 अरब डॉलर वैल्यूएशन की उम्मीद

एबीएन बिजनेस डेस्क। मुकेश अंबानी की टेलीकॉम कंपनी रिलांयस जियो इस साल IPO ला सकती है। इसका वैल्यूएशन 7.40 लाख करोड़ यानी 100 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इसकी लिस्टिंग के बाद यह ग्रुप में रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरी सबसे बड़ी कंपनी होगी। CLSA ने उम्मीद जताई : विदेशी ब्रोकरेज हाउस CLSA ने इस तरह की उम्मीद जताई है कि इस साल में यह कंपनी लिस्ट हो सकती है। जियो में 2020 में 13 निवेशकों को करीबन 33% हिस्सेदारी बेची जा चुकी है। इसमें से 10% के करीब फेसबुक को और 8% के करीब गूगल को हिस्सेदारी बेची गई थी। रिलायंस जियो देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके पास अक्टूबर 2021 में 42 करोड़ से ज्यादा ग्राहक थे। 2020 में जियो की बिकी थी हिस्सेदारी : रिलायंस ने साल 2020 में जियो में हिस्सेदारी बेचकर 1.52 लाख करोड़ रुपए हासिल किया था। गूगल और फेसबुक ने मिलकर 77,311 करोड़ रुपए का निवेश किया था। इन्हें इसके बदले 18% हिस्सेदारी मिली थी। रिटेल में इसने 10% से ज्यादा हिस्सेदारी बेचकर 47 हजार करोड़ रुपए जुटाए थे। CLSA ने कहा कि हमारा मानना है कि रिलायंस जियो IPO अलग से लिस्ट हो सकती है। इसका वैल्यूएशन 99 अरब डॉलर का हो सकता है। 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो सकते हैं : जियो के जनवरी अंत तक 43 करोड़ से ज्यादा ग्राहक होने की उम्मीद है जबकि दूसरी सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल के पास 32 करोड़ ग्राहक हैं। हालांकि प्रति ग्राहक कमाई में एयरटेल आगे है। यह हर ग्राहक से 157 रुपए कमाती है जबकि जियो 144 रुपए कमाती है। वैसे कीमतें बढ़ने से सभी कंपनियों की प्रति ग्राहक कमाई बढ़ने की उम्मीद है। तीनों कंपनियों ने बढ़ाया दाम : हाल में एयरटेल सहित तीनों प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों ने कीमतो में जमकर बढ़ोत्तरी की है। पहले वोडाफोन ने कीमत बढ़ाई, फिर एयरटेल ने और अंत में जियो ने बढ़ाई। 2021 में जियो के पास करीबन 39% बाजार हिस्सेदारी थी। रिलायंस जियो ने जियो फोन नेक्स्ट को लॉन्च किया था। एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ : रिलायंस ने साल 2020 में जब जियो में हिस्सेदारी बेचकर रकम जुटाई तो उस समय इसका एंटरप्राइज वैल्यूएशन 5.16 लाख करोड़ रुपए था। जबकि मार्केट वैल्यूएशन 4.91 लाख करोड़ रुपए था। उस आधार पर जियो के एक शेयर की कीमत 885 रुपए के करीब आ रही थी। जियो में इस समय प्रमोटर की हिस्सेदारी करीबन 67% है। कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है : इस आधार पर अगर देखा जाए तो कंपनी IPO में 17% तक हिस्सेदारी बेच सकती है। क्योंकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में प्रमोटर्स के पास 50% हिस्सेदारी है। ऐसे में अगर जियो में कंपनी 17% हिस्सा बेचती है तो उसके पास 50% हिस्सा रहेगा। इस 17% के लिए जियो को 85 हजार करोड़ रुपए मिल सकते हैं। हालांकि बाजार की स्थितियों और आगे चलकर ज्यादा वैल्यूएशन पर बेचने की रणनीति के तहत कंपनी कम हिस्सा भी में बेच सकती है।

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