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Published / 2021-12-31 03:16:37
GST काउंसिल बैठक आज, टैक्स की दरें घटाने पर हो सकता है फैसला

एबीएन डेस्क। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में शुक्रवार को जीएसटी परिषद की अहम बैठक होगी। इसमें जीएसटी की दरें घटाने पर भी फैसला हो सकता है। बताया जा रहा है कि जीएसटी की 12 और 18 फीसदी की दरों का विलय कर एक दर बनाई जा सकती है। काफी समय से दोनों टैक्स स्लैब को एक करने की मांग उठ रही है। वहीं, टेक्सटाइल और जूतों पर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी लगने जा रहा है। राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों स जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं। इन सबके बीच लोगों को अब भी उम्मीद है कि पेट्रोल-डीजल जीएसटी के दायरे में आएंगे, हालांकि आज की बैठक में इस पर चर्चा होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री समूह ने भी जीएसटी दरें घटाने को लेकर अपनी रिपोर्ट जीएसटी परिषद को सौंपी है। इसमें टैक्स स्लैब को मिलाने के साथ बिना जीएसटी वाले कुछ उत्पादों को कर के दायरे में लाने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा फिटमेंट कमेटी, जिसमें राज्यों और केंद्र के कर अधिकारी शामिल हैं, ने भी स्लैब और दरों में बदलाव की सिफारिशें की हैं। अभी जीएसटी की दर 5, 12, 18 और 28 फीसदी है। वहीं, विलासिता और अहितकर वस्तुओं पर ऊंचे स्लैब के ऊपर उपकर भी लगाया जाता है। टेक्सटाइल और जूतों पर 1 जनवरी से 12 फीसदी जीएसटी : जीएसटी काउंसिल की बैठक में कपड़ों पर जीएसटी दर बढ़ाने का मुद्दा छाया रह सकता है। दरअसल, एक जनवरी 2022 से टेक्सटाइल और जूतों पर पांच फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी जीएसटी लगने जा रहा है। राज्य सरकारों से लेकर इन क्षेत्रों स जुड़े उद्योग और कारोबारी इसका विरोध कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इसे देखते हुए जीएसटी दर बढ़ाने का फैसला टल सकता है। परिषद की 17 सितंबर को हुई पिछली बैठक में फुटवियर एवं कपड़ों पर जीएसटी दर संशोधित करने का फैसला लिया गया था। कपड़ा सेक्टर पर जीएसटी दर बढ़ाने का विरोध : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ गुरुवार को हुई बजट-पूर्व बैठक में भी कई राज्यों ने कपड़ा उत्पादों पर जीएसटी दर बढ़ाए जाने का मुद्दा उठाते हुए इस पर विरोध जताया। गुजरात ने कपड़ा उत्पादों पर बढ़ी हुई दर को स्थगित करने की मांग रखी। वहीं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बैठक में कहा कि इससे पूरे टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भारी नुकसान होगा। साथ ही यह फैसला आम आदमी के अनुकूल नहीं है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि टेक्सटाइल पर पांच फीसदी ही जीएसटी लगना चाहिए। इस मांग का पश्चिम बंगाल, दिल्ली, राजस्थान एवं तमिलनाडु जैसे राज्यों ने भी समर्थन किया है।

Published / 2021-12-30 05:20:05
बजाज हाउसिंग फाइनेंस बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को देगी सस्ता आवास ऋण

एबीएन डेस्क। बजाज हाउसिंग फाइनेंस एक नई त्योहारी पेशकश की घोषणा करते हुए कहा कि वह बेहतर क्रेडिट स्कोर वाले लोगों को कम से कम 6.65 प्रतिशत की दर से आवास ऋण देगी। बजाज फाइनेंस की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बजाज हाउसिंग फाइनेंस ने कहा कि उद्योग में पहली बार हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (एचएफसी) पात्र घर खरीदारों को अपने आवास ऋण की दरों को रेपो दर से जोड़ने का विकल्प दे रही है। कंपनी ने कहा कि इससे उन्हें आरबीआई की तरफ से दरों में की जाने वाली कमी का फायदा मिल सकेगा। कंपनी ने कहा कि आवास ऋण की इस घटी हुई दर का लाभ उठाने के लिए कम से कम 800 का सिबिल स्कोर होना चाहिए। हालांकि, 750 और 799 के बीच क्रेडिट स्कोर वाले भी प्रतिस्पर्धी दर पर आवास ऋण पा सकते हैं।

Published / 2021-12-28 16:25:47
10-15% तक सस्ता हुआ खाने का तेल

एबीएन बिजनेस डेस्क। अडानी विल्मर और रुचि सोया सहित प्रमुख खाद्य तेल कंपनियों ने अपने उत्पादों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में कमी की है। उद्योग मंडल सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने सोमवार को कहा कि इन कंपनियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए कीमतों में 10-15 प्रतिशत की कटौती की है। इन ब्रांड के तेल हुए सस्ते : एसईए ने कहा कि अडानी विल्मर द्वारा फॉर्च्यून ब्रांड के तेलों पर, रुचि सोया द्वारा महाकोश, सनरिच, रुचि गोल्ड और न्यूट्रेला ब्रांड के तेलों पर, इमामी द्वारा हेल्दी एंड टेस्टी ब्रांड पर, बंज द्वारा डालडा, गगन, चंबल ब्रांड पर और जेमिनी ने फ्रीडम सूरजमुखी तेल ब्रांड पर कीमतों में कमी की है। काफको द्वारा न्यूट्रीलाइव ब्रांड पर, फ्रिगोरिफिको एलाना द्वारा सनी ब्रांड पर, गोकुल एग्रो द्वारा विटालाइफ़, महक एंड जायका ब्रांड पर और अन्य कंपनियों द्वारा भी खाद्य तेल कीमतों में कमी की गई है। एसईए ने एक बयान में कहा, हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हमारे प्रमुख सदस्यों ने त्योहारी सत्र के दौरान उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के लिए अपने खाद्य तेलों की कीमतों को 10-15 प्रतिशत तक कम कर दिया है। उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए, केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने कुछ दिन पहले तेल उद्योग की शीर्ष कंपनियों की एक बैठक बुलाई थी और उनसे अनुरोध किया था कि वे आयात शुल्क में की गई कमी के बाद इसपर सकारात्मक पहल करें। सरसों का तेल भी हो सकता है सस्ता : उद्योग संगठन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट आने के साथ घरेलू सरसों का भारी उत्पादन होने की उम्मीद के साथ नया साल उपभोक्ताओं के लिए खुशी का संदेश लेकर आएगा। एसईए ने आगे कहा कि पिछले कुछ महीनों के दौरान उच्च अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण खाद्य तेल कीमतों में अत्यधिक तेजी से घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ नीति निर्माता भी परेशान थे। सरकार ने उठाया ये कदम : खाद्य तेलों की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इस साल कई बार रिफाइंड और कच्चे दोनों खाद्य तेलों पर आयात शुल्क कम किया है। आयात शुल्क में आखिरी कमी 20 दिसंबर को सरकार द्वारा की गई थी जब मार्च, 2022 के अंत तक के लिए रिफाइंड पाम तेल पर मूल सीमा शुल्क को 17.5 प्रतिशत से घटाकर 12.5 प्रतिशत कर दिया गया है। आपूर्ति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने व्यापारियों को दिसंबर, 2022 तक एक और साल के लिए बिना लाइसेंस के रिफाइंड पाम तेल आयात करने की अनुमति दी है तथा बाजार नियामक ने कच्चे पाम तेल और कुछ अन्य कृषि वस्तुओं के नए वायदा अनुबंधों की पेशकश पर रोक लगा दी है।

Published / 2021-12-27 15:13:04
दुनिया की अर्थव्यवस्था 2022 में पहली बार होगी 100 ट्रिलियन डॉलर के पार

एबीएन बिजनेस डेस्क। दुनिया का आर्थिक उत्पादन अगले साल में पहली बार 100 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर जाएगा। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। इसके अलावा रिपोर्ट के अनुसार, चीन को नंबर 1 अर्थव्यवस्था के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका से आगे निकलने में पहले की तुलना में थोड़ा अधिक समय लगेगा। ब्रिटिश कंसल्टेंसी उीु१ ने अनुमान जताया है कि चीन 2030 में डॉलर के मामले में दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्था बन जाएगा, जो पिछले साल की वर्ल्ड इकोनॉमिक लीग टेबल रिपोर्ट के पूवानुर्मान से दो साल की देरी है। सीइबीआर ने कहा कि भारत अगले साल फ्रांस और फिर 2023 में ब्रिटेन से आगे निकलकर दुनिया की छठीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपना स्थान फिर हासिल करने के लिए तैयार है। उीु१ के डिप्टी चेयरमैन डगलस मैकविलियम्स ने कहा कि 2020 के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि विश्व अर्थव्यवस्थाएं मुद्रास्फीति से कैसे निपटती हैं, जो अब अमेरिका में 6.8 फीसदी तक पहुंच गई है। हमें उम्मीद है कि अपेक्षाकृत मामूली समायोजन गैर-क्षणिक तत्वों को नियंत्रण में लाएगा। यदि नहीं, तो दुनिया को 2023 या 2024 में मंदी के लिए खुद को तैयार करने की आवश्यकता होगी। रिपोर्ट से पता चलता है कि जर्मनी 2033 में आर्थिक उत्पादन के मामले में जापान से आगे निकलने की राह पर है। रूस 2036 तक टॉप 10 अर्थव्यवस्था बन सकता है और इंडोनेशिया 2034 में नौवें स्थान की राह पर है।

Published / 2021-12-26 14:05:20
वित्त वर्ष 21 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह में 2.3% की कमी

एबीएन डेस्क। वित्त वर्ष 21 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह 4.69 लाख करोड़ रुपए रहा है जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 4.80 लाख करोड़ रुपए की तुलना में 2.3 प्रतिशत कम है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 19 में व्यक्तिगत आयकर संग्रह 4.61 लाख करोड़ रुपए, वित्त वर्ष 20 में 4.80 लाख करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 21 में यह 4.69 लाख करोड़ रुपए रहा है। आयकर संग्रह में ब्याज कर, फ्रिंज लाभ कर, आय और व्यय कर शामिल है। सरकार ने प्रत्यक्ष कर राजस्व को लेकर कई कदम उठाये हैं ताकि कर संग्रह में बढोतरी होने के साथ ही करदाता आधार भी बढ़े और स्वैच्छिक तौर पर अनुपालनों को बढ़ावा मिल सके। इसके अतिरिक्त डिजिटल लेनदेन को भी बढ़ावा देने के साथ ही कर चोरी पर भी लगाम लगाने की कोशिश की है। वित्त मंत्रालय ने लोगों को रिटर्न दाखिल करने को सुगम बनाने के उद्देश्य से नया रिटर्न पोटर्ल शुरू किया है जिसमें पहले से भरा हुआ फॉर्म है और संबंधित व्यक्ति के सारे वित्तीय आंकड़े में उसमें होते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष में गत सात दिसंबर में 3.61 लाख करोड़ रुपए के व्यक्तिगत आयकर राजस्व मिला है। सरकार की बुहत कोशिशों और कर चोरी रोकने के उपायों के बावजूद करीब 140 करोड़ की आबादी वाले इस देश में मात्र 1.5 करोड़ लोग की आयकर दे रहे हैं।

Published / 2021-12-25 18:03:18
8 लाख करोड़ मार्केट कैप वाले क्लब में शामिल देश की चौथी कंपनी बनी इंफोसिस

एबीएन डेस्क। आईटी कंपनी इंफोसिस के नाम एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। दरअसल, यह कंपनी अब रिलायंस इंडस्ट्रीज और टीसीएस जैसी कंपनियों के क्लब में शामिल हो गई है। बता दें कि इस क्लब में 8 लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली कंपनियां शामिल हैं। अब इंफोसिसि इस क्लब में एंट्री करने वाली देश की चौथी कंपनी बन गई है। गौरतलब है कि शुक्रवार को कंपनी का शेयर सालभर के उच्च स्तर पर पहु्ंच गया। सुबह के कारोबार में बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर इंफोसिस के शेयर का भाव 1,913 रुपये तक पहुंच गया। इस भाव पर कंपनी का बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) 8 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके साथ ही इंफोसिस के नाम यह उपलब्धि जुड़ गई। इससे पहले रिलायंस और टीसीएस के अलावा एचडीएफसी बैंक का एमकैप ही देश में 8 लाख करोड़ रुपये के पार गया है। हालांकि, 1,913 रुपये तक पहुंचने के बाद बीएसई पर इंफोसिस का शेयर कारोबार के अंत में 1863.63 रुपये पर बंद हुआ। इसके कारण कंपनी का एमकैप 7.83 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। बता दें कि इंफोसिस देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक है। कंपनी की शुरुआत एन नारायणमूर्ति और सहयोगियों ने 40 साल पहले की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आईटी कंपनी इंफोसिस अपने अक्तूबर-दिसंबर तिमाही के परिणाम जल्द 12 जनवरी तक जारी करने वाली है।

Published / 2021-12-25 17:57:42
चीन, ड्रैगन ने दबा रखा है विश्व का आधा अनाज, इसलिए दुनिया भर में बढ़ी महंगाई

एबीएन डेस्क। दुनिया की कुल आबादी में चीन का हिस्सा 20 फीसदी से भी कम है, लेकिन उसने अपने भंडारों में मक्के और दूसरे अनाजों के दुनिया की कुल पैदावार का लगभग आधा हिस्सा जमा कर रखा है। इसकी वजह से बाकी दुनिया को इन अनाजों की महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। चीन का सबसे बड़ा अनाज भंडार बंदरगाह शहर दालियान में है। इसका संचालन चीन की प्रमुख सरकार कंपनी कॉफको करती है। इस भंडार में देश-विदेश से खरीदे गए बीन्स और अनाज को रखा जाता है। यहां से रेल और जल मार्गों के जरिए अनाज पूरे चीन में भेजा जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समय इस भंडार में अनाज की जितनी मात्रा है, उतनी पहले कभी नहीं थी। ये बात इस भंडार के प्रमुख चिन युयुन ने पिछले महीने स्वीकार की थी। चिन ने कहा था- इस समय भंडार में इतना गेहूं है, जिससे डेढ़ साल तक की मांग पूरी की जा सकती है। देश में खाद्य सामग्रियों की सप्लाई की कोई समस्या नहीं है। अमेरिका कृषि विभाग का अनुमान है कि 2022 की पहली छमाही में दुनिया के कुल मक्का भंडार का 69 फीसदी हिस्सा चीन में होगा। इसी तरह 60 प्रतिशत चावल और 51 प्रतिशत गेहूं चीन के भंडारों में मौजूद रहेगा। इस अनुमान के मुताबिक दस साल पहले चीन के भंडारों में जितना अनाज था, आज वह उससे 20 प्रतिशत ज्यादा है। चीन ने 2020 में 98.1 बिलियन डॉलर की खाद्य सामग्रियों का आयात किया। इसमें पेय सामग्रियां शामिल नहीं हैं। एक दशक पहले की तुलना में पिछले साल चीन ने अनाज का चार गुना अधिक आयात किया। चीन के कस्टम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस साल जनवरी से सितंबर के बीच चीन ने खाद्य सामग्रियों का 2016 के बाद का सबसे ज्यादा आयात किया। बीते पांच वर्षों में चीन ने सोयाबीन, मक्का और गेहूं का दो से लेकर 12 गुना तक ज्यादा आयात किया है। उसने ये खरीदारी अमेरिका, ब्राजील और दूसरे अनाज निर्यातक देशों से की है। चीन के बीफ, पोर्क, डेयरी और फल आयात में दो से लेकर पांच गुना तक बढ़ोतरी हुई है। इस बीच बाकी दुनिया में खाद्य पदार्थों की कीमत तेजी से चढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन के आंकड़ों के मुताबिक बीते नवंबर में खाद्य मूल्य सूचकांक एक साल पहले की तुलना में 30 प्रतिशत ऊपर था। जापान के नेशनल रिसोर्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष अकियो शिबाता ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- चीन की जमाखोरी भी बढ़ती खाद्य महंगाई का एक कारण है। विश्लेषकों का कहना है कि चीन अधिक मात्रा में अनाज और दूसरी खाद्य सामग्रियों का इसलिए आयात कर रहा है, क्योंकि वहां उपभोग की बढ़ती मांग के मुताबिक पैदावार नहीं हो रही है। देश में आर्थिक विकास के साथ पोर्क और दूसरे पशु खाद्यों की मांग बढ़ी है। चीन के उपभोक्ता अब अच्छी क्वालिटी के विदेशी खाद्यों की मांग भी कर रहे हैँ। इस बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने खाद्य सुरक्षा को खास महत्त्व देने की नीति अपनाई है। इन सब कारणों ने चीन ने खाद्य आयात असामान्य रूप से बढ़ा दिया है।

Published / 2021-12-24 03:55:43
सरकार ने दिया टेलिकॉम कंपनियों को निर्देश, दो साल तक रखो कॉल के रिकॉर्ड

एबीएन डेस्क। केंद्र सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए फोन कंपनियों से दो साल का कॉल रिकॉर्ड रखने को कहा है। दरअसल, इसके पीछे सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला दिया गया है। बता दें कि दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक बदलाव करते हुए दूरसंचार और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के साथ-साथ अन्य सभी दूरसंचार लाइसेंसधारियों को कम से कम दो साल के लिए कॉल रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए कहा है, इससे पहले एक साल का रिकाॅर्ड रखा जाता था। 21 दिसंबर को एक अधिसूचना के माध्यम से, दूरसंचार विभाग ने कहा है कि सभी कॉल विवरण रिकॉर्ड, एक्सचेंज विवरण रिकॉर्ड, और नेटवर्क पर एक्सचेंज संचार का IP विवरण का रिकॉर्ड 2 साल के लिए रखा जाना चाहिए। अधिसूचना में कहा गया है कि इंटरनेट सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों को 2 साल की अवधि के लिए सामान्य IP विवरण रिकॉर्ड के अलावा इंटरनेट टेलीफोनी डिटेल भी सेव करके रखनी होगी। इससे संबंधित एक अधिकारी ने कहा कि ऐसा इसलिया आदेश दिया गया है क्योंकि उन्हें एक साल बाद भी डेटा की आवश्यकता रहती है क्योंकि कई मामलों में जांच पूरी होने में समय अधिक लगता है।

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